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	<title>Person Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>महात्मा गांधी का एक विचार दिला सकता है मनचाही सफलता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 04:00:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Person]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महात्मा गांधी जी को हम बापू के नाम से जानते हैं। उनका पूरा जीवन अपने आप में एक स्कूल की तरह है जिसे अपना कर आप अपने जीवन में नई ऊंचाइयां पा सकते हैं। गांधी जी ने अपने अनुभव पर कई किताबें लिखीं जो आज हमें जीवन की नई राह दिखाती हैं। उनकी सोच हमें [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>महात्मा गांधी जी को हम बापू के नाम से जानते हैं। उनका पूरा जीवन अपने आप में एक स्कूल की तरह है जिसे अपना कर आप अपने जीवन में नई ऊंचाइयां पा सकते हैं। गांधी जी ने अपने अनुभव पर <a href="https://fundabook.com/recommends/mahatma-gandhi-my-experiments-with-truth-paper-back/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">कई किताबें</a> लिखीं जो आज हमें जीवन की नई राह दिखाती हैं।</p>
<p>उनकी सोच हमें राह दिखाती है और उनके विचार आज भी उतने ही सार्थक हैं जितने कि वह तब थे। यदि उनके विचारों पर अमल किया जाए तो हम जीवन में कई तरह से आनंद पा सकते हैं।</p>
<h3><strong>ऐसे जिएं जैसे आपको कल मरना है, सीखें ऐसे कि आपको हमेशा जीवित रहना है</strong></h3>
<p>गांधी जी का यह विचार हमें लगातार सीखने की ओर प्रेरित करता है। कई बार हम यह सोचकर कुछ नया नहीं सीखते कि अब सीख कर क्या करना है। हमें जीना ही कितना है मगर गांधी जी के अनुसार सीखने की कोई उम्र नहीं होती जब जागो तब सवेरा।</p>
<h3><strong>जो समय बचाते हैं वे धन को बचाते। बचाया धन</strong><strong>, </strong><strong>कमाए धन के समान ही महत्वपूर्ण है</strong></h3>
<p>हममें से कई लोग हैं जो अक्सर यह कहते हैं कि क्या करें टाइम ही नहीं मिलता मगर भगवान ने सभी को 24 घंटे ही दिए हैं किसी को कम या ज्यादा नहीं तो फिर कोई और क्या कर सकता है तो हम क्यों नहीं। क्या हममें काबिलियत नहीं है।</p>
<p>कुछ अलग से करने की इच्छा नहीं है। इसका कारण टाइम मैनेजमैंट का न होना है। यदि हम लगातार अपना समय बचाएं, अपने समय को अनावश्यक रूप से व्यर्थ न करके उसका सदुपयोग करें तो हम अपने साथ-साथ दूसरों का जीवन भी संवार सकते हैं।</p>
<div class="inpost-ad"><a href="https://fundabook.com/recommends/mahatma-gandhi-my-experiments-with-truth-paper-back/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">महात्मा गांधी की किताब &#8220;माय एक्सपेरीमेंट्स विद ट्रुथ&#8221; केवल 88 रुपए में खरीदें</a></div>
<h3><strong>आंख के बदले आंख पूरे विश्व को अंधा बना देगी</strong></h3>
<p>आज के समय हर कोई किसी दूसरे की तरक्की नहीं देख सकता। हर समय एक दूसरे की टांग खींचने पर लगे रहते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी की उन्नति में बाधा बनता है तो कोई दूसरा व्यक्ति उसकी उन्नति में बाधा बन जाता है।</p>
<p>जैसा हम दूसरे के लिए करते हैं वैसा ही हम अपने लिए पाते हैं इसलिए अपनी सोच को सदैव सकारात्मक रखें। बदला लेने की भावना अपने मन पर हावी न होने दें ताकि खुद भी तरक्की कर सकें और दूसरों की तरक्की पर हमें मलाल न हो। &#8211; प्रसन्नता ही एक मात्र ऐसा इत्र है जिसे आप दूसरे पर डालते हैं तो कुछ बूंद आप पर भी पड़ती है।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/some-precious-words-on-gandhi-jayanti/">गांधी जयंती पर कुछ अनमोल वचन</a> </div></strong></p>
<h3><strong>व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से नहीं उसके चरित्र से होती है</strong></h3>
<p>कई बार हम बाहरी आवरण को देख कर किसी की तरफ आकर्षित हो जाते हैं मगर जब हम उसके करीब जाते हैं तो हम सच्चाई से रू-ब-रू हो पाते हैं।</p>
<p>किसी व्यक्ति के कपड़ों से हम उसके व्यक्तित्व को नहीं समझ सकते।वह उसके व्यक्तित्वका आवरण मात्र है। उसका व्यक्तित्व उसके चरित्र से उजागर होता है।</p>
<h3><strong>आप जो कुछ भी करते हैं वह कम महत्वपूर्ण हो सकता है मगर सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप कुछ करें</strong></h3>
<p>कई बार किसी कार्य को करने से पहले ऐसे विचार हमारे दिमाग में चलते रहते हैं कि &#8220;वह जरूरी नहीं है&#8221; या &#8220;वह कम महत्वपूर्ण है&#8221;। ऐसे में हम उस कार्य को शुरू ही नहीं कर पाते।</p>
<p>यदि हम किसी कार्य को करेंगे ही नहीं तो कैसे पता चलेगा कि वह महत्वपूर्ण है या नहीं। कार्य महत्वपूर्ण है या नहीं यह जरूरी नहीं है कार्य का होना जरूरी है।</p>
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<h3><strong>गांधी जयंती 2 अक्तूबर</strong></h3>
<p>गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था जिनका जन्म 2 अक्तूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। इस दिन को सारा देश गांधी जयंती के रूप में मनाता है। अहिंसा के पथ पर चल कर देश को अंग्रेजों की दास्ता से मुक्ति दिलाने वाले गांधी जी ने पूरी दुनिया को अपने विचारों से प्रभावित किया था। । अहिंसा केरास्ते पर चलने की बात गांधीजी |ने आजादी की लड़ाई में शामिल हर शख्स से कही थी। उन्होंने त्याग को अपने जीवन में सदा अपनाए रखा और सादगी भरे जीवन के साथ-साथ कम से कम चीजों से अपना जीवनयापन किया।</p>
<h4><strong>गांधी जी के तीन महत्वपूर्ण सूत्र</strong></h4>
<p><strong>पहला</strong> : सामाजिक गंदगी को दूर करने के लिए झाड़ का सहारा।<br />
<strong>दूसरा</strong> : सामूहिक प्रार्थना को बल देना जिससे एकजुट होकर व्यक्ति जात-पात और धर्म की बंदिशों को दरकिनार कर प्रार्थना करे।<br />
<strong>तीसरा</strong>: चरखा जोआत्मनिर्भर और एकता का प्रतीक माना जाने लगा था।</p>
<p>हंसता हुआ चेहरा हर किसी को पसंद होता है। हर हंसने वाले चेहरे के साथ दुनिया हंसती है। यदि आप अपनी छवि को हमेशा अच्छा बनाए रखना चाहते हैं, सदैव प्रसन्न रहकर अपने आसपास का माहौल खुशनुमा बना सकते हैं।</p>
</div>
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		<title>डाॅ. वेदप्रताप वैदिक: 13 वर्ष की आयु में हिंदी भाषा के लिए सत्याग्रह करने वाले महान विद्वान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Sep 2024 22:28:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Person]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महान हिंदी विद्वान,चिंतक,पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डाॅ. वेदप्रताप वैदिक की गणना राष्ट्रीय अग्रदूतों में होती है। मात्र 13 वर्ष की आयु में मातृभाषा हिंदी के लिए सत्याग्रह करने वाले डा. वेद प्रताप वैदिक का जन्म सन 1944 में इंदौर में हुआ था। वह देश के जाने माने व बड़े हिंदी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक थे। [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महान हिंदी विद्वान,चिंतक,पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डाॅ. वेदप्रताप वैदिक की गणना राष्ट्रीय अग्रदूतों में होती है। मात्र 13 वर्ष की आयु में मातृभाषा हिंदी के लिए सत्याग्रह करने वाले डा. वेद प्रताप वैदिक का जन्म सन 1944 में इंदौर में हुआ था। वह देश के जाने माने व बड़े हिंदी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक थे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में पीएचडी की थी।</p>
<h2>13 वर्ष की आयु में सत्याग्रह</h2>
<p>डा. वैदिक ने हिंदी भाषा के लिए सत्याग्रह किया और अपनी पहली जेल-यात्रा सिर्फ 13 वर्ष की आयु में की थी। हिंदी सत्याग्रही के तौर पर वे 1957 में पटियाला जेल में रहे। बाद में छात्र नेता और भाषाई आंदोलनकारी के तौर पर कई जेल यात्राएं कीं।</p>
<p>हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा का स्थान दिलाने के लिए सबसे अधिक जेल यात्रा करने वाले वह पहले भाषाई आंदोलनकारी थे।, जिन्होंने हिंदी को मौलिक चिंतन की भाषा बनाया और भारतीय भाषाओं को उनका उचित स्थान दिलवाने के लिए सतत संघर्ष और त्याग किया।</p>
<p>महर्षि दयानंद, महात्मा गांधी और डाॅ. राममनोहर लोहिया की महान परंपरा को आगे बढ़ानेवाले योद्धाओं में डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का नाम अग्रणी है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-52011 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik1.jpg?resize=696%2C365&#038;ssl=1" alt="Dr-vedpratap-vaidik" width="696" height="365" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik1.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik1.jpg?resize=300%2C158&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2>हिंदी भाषा में पी.एच.डी. करने वाले पहले व्यक्ति</h2>
<p>वह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में पीएच.डी. कर रहे थे। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर शोध ग्रंथ वह हिंदी में लिखना चाहते थे परंतु उनको अनुमति नहीं मिली।</p>
<p>इस प्रश्न पर उन्होंने आंदोलन किया और कहा कि देश की राष्ट्रभाषा पर मुझे शोध ग्रंथ लिखने और पीएच.डी. करने की अनुमति मिलनी चाहिए। मामला न्यायालय में गया, भारत की संसद में भी मामला गूंजा।</p>
<p>डा. राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी वाजपेयी, मधु लिमये, चंद्रशेखर, प्रकाश वीर शास्त्री, रामधारी सिंह दिनकर, डा. धर्मवीर भारती और डा. हरिवंश राय बच्चन जैसे विद्वानों ने उनका प्रबल समर्थन किया।</p>
<p>इसके बाद इंदिरा गांधी सरकार की पहल पर JNU के नियमों में बदलाव हुआ और उन्हें वापस लिया गया। इसके बाद डा. वैदिक पहले भारतीय छात्र बने जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी में शोध लिख कर पीएच. डी. की। इस दृष्टि से उन्होंने भारत में एक नया इतिहास बनाया।</p>
<p>डा. वैदिक ने अपने लेखन के 60 वर्षों में हजारों लेख लिखे और भाषण दिए! वे लगभग 10 वर्षों तक पीटीआई भाषा (हिन्दी समाचार समिति) के संस्थापक-संपादक रहे और उसके पहले नवभारत टाइम्स के संपादक (विचारक) रहे।</p>
<p>डा. भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर उनके लेख राष्ट्रीय समाचार पत्रों तथा प्रदेशों और विदेशों के लगभग 200 समाचार पत्रों में हर सप्ताह प्रकाशित होते रहे हैं। उनका अंतिम लेख उनकी मृत्यु से महज़ एक दिन पहले ही प्रकाशित हुआ था।</p>
<p>ख़ास: उन्होंने 2014 में आतंकी हाफिज सईद का इंटरव्यू लिया था।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="wp-image-52014 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?resize=696%2C313&#038;ssl=1" alt="Dr.-vedpratap-vaidik" width="696" height="313" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?resize=300%2C135&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?resize=696%2C313&amp;ssl=1 696w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2>हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई का दिया था सुझाव</h2>
<p>अक्तूबर 2022 से देश में पहली बार मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में होने का फ़ैसला लिया गया था। मध्य प्रदेश के सभी 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस पहल की शुरुआत की गयी थी। दरअसल इसका सुझाव सन 2019 में डॉ वेद प्रताप वैदिक ने ही दिया था।</p>
<h2>मीडिया ने की हर बार उपेक्षा</h2>
<p>दोगले चरित्र वाले भारतीय मीडिया चैनलों ने हिंदी भाषा को उसका उचित सम्मान दिलाने में  हमेशा डा. वैदिक के प्रयास की हमेशा उपेक्षा की। वैसे तो हर बार हिंदी दिवस पर सभी चैनल पर हिंदी भाषा को लेकर बड़े-२ प्रोग्राम चलते हैं लेकिन डा. वैदिक के किसी भी प्रयास और यहाँ तक की उनकी मृत्यु पर किसी चैनल ने प्रोग्राम चलाना तो दूर इस खबर को हाई लाइट करना भी ज़रूरी नहीं समझा।</p>
<h2>डा. वैदिक की जीवन यात्रा</h2>
<p><strong>जन्म</strong>: डॉ. वेद प्रताप वैदिक का जन्म 30 दिसंबर 1944 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ।</p>
<p><strong>शिक्षा</strong>:</p>
<p>(1) पीएच.डी (अंतरराष्ट्रीय राजनीति), स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज, जवाहरलाल नेहरु वि.वि., 1971. विषय — अफगानिस्तान के साथ सोवियत संघ और अमेरिका के संबंधों का तुलनात्मक अध्ययन, 1946-1963 (पीएच.डी. शोध-कार्य के दौरान न्यूयार्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय, वाशिंगटन डी. सी. की लायब्रेरी आॅफ कांग्रेस, मास्को की विज्ञान अकादमी, लंदन के प्राच्य-विद्या संस्थान तथा काबुल विश्वविद्यालय में विशेष अध्ययन का अवसर)</p>
<p>(2) एम.ए. (राजनीति शास्त्र), प्रथम श्रेणी इंदौर क्रिश्चियन काॅलेज, इंदौर विश्वविद्यालय, 1965</p>
<p>(3) बी.ए. (राजनीति शास्त्र, दर्शनशास्त्र, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी) प्रथम श्रेणी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, 1963</p>
<p>(4) संस्कृत (सातवलेकर परीक्षाएं),1955 प्रथम श्रेणी</p>
<p>(5) रूसी भाषा (स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज),1967प्रथम श्रेणी</p>
<p>(6) फारसी भाषा (स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज), 1968 प्रथम श्रेणी</p>
<p><strong>छात्रवृत्तियां</strong>:</p>
<p>(1) राष्ट्रीय प्रतिभा छात्रवृत्ति, 1963-64. एवं</p>
<p>(2) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग शोधवृत्ति, 1964-1966</p>
<p><strong>शोधवृत्तियां</strong>:</p>
<p>(3) वरिष्ठ शोधवृत्ति, इंडियन काॅसिल आॅफ सोश्यल साइंस रिसर्च, 1981-1983</p>
<p>‘इंस्टीट्यूट फाॅर डिफेंस स्टडीज एण्ड एनालिसस’ तथा ‘स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज’ (ज.नेहरू.वि.वि.) में दो साल तक ‘सीनियर फेलो’ के तौर पर शोधकार्य.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="wp-image-52013 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C392&#038;ssl=1" alt="Dr-vedpratap-vaidik" width="696" height="392" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C392&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=746%2C420&amp;ssl=1 746w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p><strong>अध्यापन</strong>:</p>
<p>हस्तिनापुर काॅलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में राजनीति शास्त्र का अध्यापन, 1970-74। 30 वर्षों में अनेक भारतीय एवं विदेशी विश्वविद्यालयों में अन्तरराष्ट्रीय राजनीति एवं पत्रकारिता पर अल्पकालिक अध्यापन-कार्यक्रम चलाते रहे।</p>
<p><strong>पुस्तकें</strong>:</p>
<p>(1) ‘हिन्दी पत्रकारिता: विविध आयाम’, संपादित (नेशनल, 1976),पाँच संस्करण (हिन्दी बुक सेंटर), हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास, कला और अधुनातन प्रवृत्तियों का विवेचन करने वाले इस ग्रंथ को समीक्षकों ने ‘हिन्दी पत्रकारिता का विश्वकोष’ कहा है. लगभग सभी विश्वविद्यालयों में इसका संदर्भ ग्रंथ के तौर पर उपयोग किया जाता है. इसके कई संस्करण आ चुके हैं।</p>
<p>(2) ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा’ (नेशनल पब्लिशिंग हाउस, 1973). : अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी का यह पहला शोधग्रंथ है, विद्वान समीक्षकों ने इसे अपने विषय का ‘प्रामाणिक’ और ‘मौलिक’ संदर्भ ग्रंथ कहा है. यह फारसी, रूसी और अंग्रेजी स्रोतों के आधार पर लिखा गया है. इस ग्रंथ पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।</p>
<p>(3) ‘भारतीय विदेश नीति: नये दिशा संकेत’ (नेशनल, 1971) इस ग्रंथ को समीक्षकों ने ‘मौलिक चिंतन और भविष्य दृष्टि’ का उल्लेखनीय दस्तावेज घोषित किया है।</p>
<p>(4) ‘एथनिक क्राइसिस इन श्रीलंका: इंडिया’ज़ आॅप्शंस’ (नेशनल, 1985).श्रीलंका की तमिल समस्या पर किसी भारतीय द्वारा लिखा गया यह पहला ग्रंथ है।</p>
<p>(5) ‘अफगानिस्तान: कल, आज और कल’ (राजकमल प्रकाशन, 2002). अफगानिस्तान के इतिहास, समाज और राजनीति पर इस तरह का गवेषणात्मक और मौलिक व्याख्यासम्पन्न ग्रंथ दुनिया की किसी भी अन्य भाषा में उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>(6) ‘वर्तमान भारत’ (राजकमल प्रकाशन, 2002)। समसामयिक भारत की राजनीति पर लिखे गए विश्लेषणात्मक निबंधों का संग्रह !</p>
<p>(7) ‘महाशक्ति भारत’ (राजकमल प्रकाशन, 2002)। इस ग्रंथ में भारत को महाशक्ति बनाने का स्वप्न देखा गया है और उस स्वप्न को साकार करने के उपायों पर विचार किया गया है।</p>
<p>(8) ‘अंग्रेजी हटाओ: क्यों और कैसे ? (प्रभात प्रकाशन, दिल्ली प्रथम संस्करण 1973, सातवां संस्करण, 1998) : इस पुस्तक की 75 हजार प्रतियां बिक चुकी हैं और इसका मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, संस्कृत, गुजराती, मराठी, बांग्ला, असमिया, पंजाबी,उर्दू, सिंधी, मणिपुरी, कश्मीरी, कोंकणी तथा ओडि़या आदि में अनुवाद हो चुका है।</p>
<p>(9) हिंदी का सम्पूर्ण समाचार-पत्र कैसा हो ? (प्रवीण प्रकाशन, 1994), तीन संस्करण।</p>
<p>(10) ‘भाजपा, हिंदुत्व और मुसलमान’ (राजकमल प्रकाशन)</p>
<p>(11)‘कुछ महापुरूष और कुछ मित्र’ शीघ्र प्रकाश्य</p>
<p>(12) मोरिशस, मध्य एशिया और चीन के तीन यात्रा-वृतांत प्रकाशनाधीन</p>
<p><strong>पत्रकारिता</strong>:</p>
<p>(1) 1958 में प्रूफ रीडर के तौर पर पत्रकारिता में प्रवेश. तब से अब तक लगभग 1000 लेख, दर्जनों शोधपत्र, लगभग दो हजार संपादकीय तथा सैकड़ों समीक्षाएं प्रकाशित. पिछले तीन दशकों में ‘नई दुनिया’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिंदुस्तान’, ‘जनसत्ता’, ‘भास्कर’, ‘टाइम्स आॅफ इंडिया’, ‘धर्मयुग’, ‘दिनमान’, ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘इंटरनेशनल स्टडीज’, ‘स्ट्रटेजिक एनालिसिस’, ‘वल्र्ड फोकस’ आदि पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर लेख और भेंट वार्ताएं।</p>
<p>अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, श्रीलंका, चेकोस्लोवाकिया, सूरिनाम आदि राष्ट्रों के शीर्ष नेताओं से की गई भेंट-वार्ताओं को अंतरराष्ट्रीय ख्याति। देश के लगभग दर्जन भर अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-52012 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C428&#038;ssl=1" alt="Dr.-vedpratap-vaidik" width="696" height="428" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?w=699&amp;ssl=1 699w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=300%2C185&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C428&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=683%2C420&amp;ssl=1 683w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=356%2C220&amp;ssl=1 356w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p>(2) संपादक, ‘पी.टी.आई.-भाषा’, 1986-96 :  प्रेस ट्रस्ट आॅफ इंडिया द्वारा स्थापित ‘भाषा’ नामक हिंदी की समाचार समिति के संस्थापक-संपादक। ‘भाषा’ ने अपनी नवीन खबर-शैली, देशी और विदेशी नामों के मानकीकरण और अनेक महत्त्वपूर्ण अवसरों पर अपने ‘स्कूपों’ द्वारा हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय ख्याति अर्जित की।</p>
<p>(3) संपादक (विचार), नवभारत टाइम्स, 1986. सहायक संपादक, नवभारत टाइम्स 1974-85, संपादक, ‘अग्रवाही (मासिक), इंदौर, 1962-66. संपादक, इंदौर क्रिश्यिचन काॅलेज पत्रिका, 1963-64. हिंदी पत्रकारिता: विविध आयम’ नामक 1100 पृष्ठों के महग्रंथ का संपादन, 1976।</p>
<p>(4) निदेशक, हिंदुस्तान समाचार, 1974-77</p>
<p>(5) संपादकीय निदेशक, नेटजाल.काॅम (भारतीय भाषाओं का महापोर्टल)</p>
<p><strong>सम्मान</strong>:</p>
<p>(1) हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पत्रकारिता के लिए इक्कीस हजार रूपये की एवं  सम्मान राशि, 1990.</p>
<p>(2) पुरस्कार मधुवन (भोपाल) द्वारा पत्रकारिता में ‘श्रेष्ठ कला आचार्य’ की उपाधि से सम्मानित, 1989.</p>
<p>(3) उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिंदी सेवा के लिए ‘पुरूषोत्तमदास टण्डन’ स्वर्ण पदक, 1988.</p>
<p>(4) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा’ ग्रंथ पर गोविंदवल्लभ पंत पुरस्कार, 1976.</p>
<p>(5) काबुल वि.वि. द्वारा अफगानिस्तान संबंधी शोधगं्रथ पर दस हजार रूपये की सम्मान राशि, 1972.</p>
<p>(6) इंडियन कल्चरल सोसायटी द्वारा ‘लाला लाजपतराय सम्मान’, 1992.</p>
<p>(7) मीडिया इंडिया सम्मान, नई दिल्ली, 1992.</p>
<p>(8) डाॅ. राममनोहर लोहिया सम्मान, कानपुर, 1990.</p>
<p>(9) प्रधानमंत्री द्वारा प्रदत्त रामधारीसिंह दिनकर शिखर सम्मान, 1992.</p>
<p>(10) छात्रकाल में राजनीतिशास्त्र, दर्शन और हिंदी में सर्वोच्च अंक पाने पर कई बार ‘स्पेशल मेरिट सर्टिफिकेट’</p>
<p><strong>मृत्यु</strong>:</p>
<p>14 मार्च 2023, गुरुग्राम</p>
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		<title>एक ऐसे &#8216;इंजीनियर&#8217; जिनके आगे अंग्रेज भी सिर झुकाते थे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Sep 2023 11:59:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Person]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[engineer]]></category>
		<category><![CDATA[life]]></category>
		<category><![CDATA[science]]></category>
		<category><![CDATA[technology]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>15 सितंबर को प्रतिवर्ष हमारे देश में इंजीनियर्स को सम्मानित करने के लिए राष्ट्रीय अभियंता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन महान इंजीनियर, भारत रत्न एवं ब्रिटिश नाइटहुड पुरस्कार से सम्मानित डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। भारत सरकार द्वारा साल 1968 में डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>15 सितंबर को प्रतिवर्ष हमारे देश में इंजीनियर्स को सम्मानित करने के लिए राष्ट्रीय <strong>अभियंता दिवस</strong> के रूप में मनाया जाता है। यह दिन महान इंजीनियर, <strong>भारत रत्न</strong> एवं <strong>ब्रिटिश नाइटहुड</strong> पुरस्कार से सम्मानित डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।</p>
<p>भारत सरकार द्वारा साल 1968 में डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जन्मतिथि को &#8216;<strong>अभियंता दिवस&#8217;</strong> घोषित किया गया था। उसके बाद से हर साल 15 सितंबर को अभियंता दिवस मनाया जाता है। विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1860 को मैसूर (कर्नाटक) के कोलार जिले के एक तेलुगु परिवार में हुआ था।</p>
<p>एक इंजीनियर के रूप में डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने देश में कई बांध बनवाए, जिसमें मैसूर में कृष्णराज सागर बांध, पुणे के खड़कवासला जलाशय में बांध और ग्वालियर में तिगरा बांध आदि महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p>सिर्फ यही नहीं, हैदराबाद सिटी को बनाने का पूरा श्रेय डॉ. विश्वेश्वरैया को ही जाता है। उन्होंने वहां एक बाढ़ सुरक्षा प्रणाली तैयार की थी, जिसके बाद पूरे भारत में उनका नाम हो गया। विश्वेश्वरैया को <strong>मॉडर्न मैसूर स्टे</strong>ट का पिता भी कहा जाता था।</p>
<h2>इस वजह से अंग्रेज भी एम विश्वेश्वरैया के आगे सिर झुकाते थे</h2>
<p>बात उस समय की है जब <strong>भारत</strong> अंग्रेजी गुलामी का दौर झेल रहा था। उस दौर में <strong>मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया</strong> ने अपनी इंजीनियरिंग के कौशल के साथ आम लोगों के हित का ऐसा दौर तैयार किया कि अंग्रेज भी उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सके।</p>
<p>ब्रिटिश काल के दौरान एक रेलगाड़ी में बहुत से <strong>अंग्रेज </strong>सवार थे वहीँ एक <strong>डिब्बे</strong> में एक भारतीय यात्री गंभीर मुद्रा में बैठा था। सांवले <a href="https://fundabook.com/how-do-we-see-colors/">रंग</a> और मंझले कद का वह यात्री सादे कपड़ों में था और वहां बैठे अंग्रेज उन्हें अनपढ़ समझकर मजाक उड़ा रहे थे।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-32862" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/01/An-engineer-before-whom-even-British-used-bow-their-heads.jpg?resize=696%2C390&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="390" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/01/An-engineer-before-whom-even-British-used-bow-their-heads.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/01/An-engineer-before-whom-even-British-used-bow-their-heads.jpg?resize=300%2C168&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/01/An-engineer-before-whom-even-British-used-bow-their-heads.jpg?resize=696%2C390&amp;ssl=1 696w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p>अचानक उसने उठकर गाड़ी की जंजीर खींच दी। <a href="https://fundabook.com/first-solar-train-india/">ट्रेन</a> कुछ ही पलों में रुक गई। सभी यात्री चेन खींचने वाले को भलाबुरा कहने लगे।</p>
<p>थोड़ी देर में गार्ड आ गया और सवाल किया कि जंजीर किसने खींची तो उसने उत्तर दिया, &#8220;मेरा अंदाजा है कि यहां से लगभग कुछ दूरी पर रेल की पटरी उखड़ी हुई है।&#8221; गार्ड ने पूछा, “आपको कैसे पता?&#8221;</p>
<p>वह बोले, &#8220;गाड़ी की स्वाभाविक गति में अंतर आया है और इसकी आवाज से मुझे खतरे का आभास हो रहा है।&#8221; गार्ड उन्हें लेकर जब कुछ दूर पहुंचा तो देख कर दंग रह गया कि वास्तव में एक जगह से रेल की पटरी के जोड़ खुले हुए हैं। वह सांवले से व्यक्ति थे &#8211; मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया।</p>
<p>15 सितंबर 1860 में मैसूर के कोलार जिले में पैदा हुए डॉ. एम विश्वेश्वरैया के पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेद चिकित्सक थे। विश्वेश्वरैया की मां का नाम वेंकाचम्मा था।</p>
<p>साधारण परिवार में जन्मे एम विश्वेश्वरैया जब मात्र 12 वर्ष के थे, तो उनके पिता का निधन हो गया।  परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था, लिहाजा विश्वेश्वरैया गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते रहे।</p>
<p><strong>बी.ए.</strong> करने के बाद उन्होंने कुछ समय शिक्षक के रूप में भी काम किया। उनकी योग्यता देख <strong>मैसूर</strong> सरकार ने उन्हें स्कॉलरशिप दी, जिसके बाद उन्होंने पुणे के <strong>साइंस कालेज</strong> में <strong>सिविल इंजीनियरिंग</strong> के पाठ्यक्रम में दाखिला लिया और प्रथम स्थान प्राप्त किया। इंजीनियर बनते ही उनकी योग्यता देख महाराष्ट्र सरकार ने इन्हें नासिक जिले के सहायक इंजीनियर के पद पर नियक्त किया।</p>
<p>इंजीनियर के रूप में विश्वेश्वरैया को असली ख्याति मिली पुणे के खड़कवासला <strong>बांध </strong>की भंडारण क्षमता में बिना ऊंचाई बढ़ाए बढ़ौतरी करने से।</p>
<p>बांधों की <strong>जल भंडारण</strong> स्तर में वृद्धि करने के लिए <strong>विश्वेश्वरैया</strong> ने स्वचालित जलद्वारों का उपयोग खड़कवासला बांध पर किया था।</p>
<p>वर्ष 1909 में उन्हें मैसर राज्य का मुख्य अभियंता नियुक्त किया गया। कृष्णराज <a href="https://fundabook.com/city-in-the-sea-hindi/">सागर</a> बांध के निर्माण के कारण <strong>मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया</strong> का नाम पूरे विश्व में सबसे अधिक चर्चा में रहा।</p>
<p>इसका निर्माण स्वतंत्रता के करीब 40 वर्ष पहले हुआ था। वर्ष 1912 में उन्हें मैसूर राज्य का दीवान नियुक्त किया गया। उन्होंने <strong>चंदन तेल फैक्टरी</strong>, <strong>साबुन फैक्टरी</strong>, <strong>धातु फैक्टरी</strong>, <strong>क्रोम टेनिंग फैक्टरी</strong> प्रारंभ की। बांध निर्माण के साथ-साथ <strong>औद्योगिक विकास</strong> में भी उनका योगदान कम नहीं है।</p>
<p>वह उन शुरूआती लोगों में से एक थे, जिन्होंने <strong>बेंगलूर</strong> स्थित भारतीय <a href="https://fundabook.com/amazing-facts-of-science/">विज्ञान</a> संस्थान में वैमानिकी एवं इंजीनियरिंग जैसे अनेक विभागों को आरंभ करने का स्वप्न देखा था। वह वर्ष 1918 में मैसूर के दीवान के रूप में सेवानिवृत्त हो गए।</p>
<p>उन्हें 1955 में देश के सर्वोच्च सम्मान &#8216;<strong>भारत रत्न</strong>&#8216; से नवाजा गया। 101 वर्ष की दीर्घायु में काम करते रहने वाले विश्वेश्वरैया का कहना था कि &#8216;जंग लग जाने से बेहतर है, काम करते रहना।&#8217;</p>
<h2>भारत के अलावा इन देशों में मनाया जाता है अभियंता दिवस</h2>
<p>अभियंता दिवस सिर्फ भारत में ही नहीं मनाया जाता बल्कि कई अन्य देशों में भी यह दिवस मनाया जाता है। जैसे कि- <strong>अर्जेंटीना में 16 जून</strong> को, <strong>बांग्लादेश में 7 मई</strong> को,<strong> इटली में 15 जून</strong> को, <strong>तुर्की में 5 दिसंबर</strong> को, <strong>ईरान में 24 फरवरी</strong> को, <strong>बेल्जियम में 20 मार्च</strong> को और <strong>रोमानिया में 14 सितंबर</strong> को अभियंता दिवस के रूप में मनाया जाता है।</p>
<p>दरअसल, यह दिवस दुनियाभर के इंजीनियरों को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है, ताकि वो देश-दुनिया को अपने हुनर की बदौलत तरक्की की नई राह पर ले जाएं।</p>
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		<title>रोचक प्रसंग- डा. विक्रम साराभाई की &#8216;सादगी और भगवदगीता का वैज्ञानिक महत्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Aug 2023 09:15:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Person]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[विज्ञान]]></category>
		<category><![CDATA[apj abdul kalam]]></category>
		<category><![CDATA[bhagwat geeta]]></category>
		<category><![CDATA[motivational stories]]></category>
		<category><![CDATA[motivational story]]></category>
		<category><![CDATA[science]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>चेन्नई में एक सज्जन धोती-शाल ओढ़े समुद्र तट पर बैठे श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ कर रहे थे। उसी समय एक लड़का वहां आया तथा उनको देखकर बोला, &#8220;क्या आप आज भी विज्ञान के इस युग में इतनी पुरानी किताब पढ़ते हैं? देखिए! हम चांद पर पहुंच गए हैं और आप इन्हीं में व्यस्त हैं।&#8221; वह सज्जन [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>चेन्नई में एक सज्जन धोती-शाल ओढ़े समुद्र तट पर बैठे श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ कर रहे थे। उसी समय एक लड़का वहां आया तथा उनको देखकर बोला, &#8220;क्या आप आज भी विज्ञान के इस युग में इतनी पुरानी किताब पढ़ते हैं? देखिए! हम चांद पर पहुंच गए हैं और आप इन्हीं में व्यस्त हैं।&#8221;</p>
<p>वह सज्जन भगवद्गीता से ध्यान हटा कर उस लड़के की ओर देख कर बोले, &#8220;तुम भगवद्गीता के बारे में क्या जानते हो?&#8221;</p>
<p>लड़के ने प्रश्न का उत्तर नहीं दिया और उत्साह से बोला, &#8221; विज्ञान के इस युग में इन पुरानी किताबों को पढ़ कर क्या होगा। मैं इन सब में विश्वास नहीं करता। मैं विक्रम साराभाई रिसर्च इंस्टीच्यूट का छात्र और एक वैज्ञानिक हूँ। देखिए, दुनिया चांद पर पहुंच गई है और आप अब भी गीता और रामायण पर अटके हुए हैं।&#8221;</p>
<p>तभी दो बड़ी कारें वहां आकर रुकीं। एक कार से कुछ ब्लैक कमांडो उतरे और एक आदमी ने दूसरी कार का पिछला दरवाजा खोला, सलाम किया और झुक कर दरवाजे के पास खड़ा हो गया। जो सज्जन भगवद्गीता का पाठ कर रहे थे, धीमी गति से चल कर कार में बैठ गए। लड़के ने सोचा कि यह आदमी कोई प्रसिद्ध व्यक्ति लगता है। वह उनके पास गया और पूछा, &#8220;सर, आप कौन हैं?&#8221;</p>
<p>वह सज्जन बड़े शांत स्वर में बोले, &#8220;मैं विक्रम साराभाई हूं&#8221;। लड़के को जैसे बिजली का झटका लगा।</p>
<p>क्या आप जानते हैं कि यह लड़का कौन था? वह थे भारत के मिसाइलमैन डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जो बाद में महान वैज्ञानिक बने तथा उन्होंने भारत राष्ट्रपति का पद भी सुशोभित किया।</p>
<p>श्री अब्दुल कलाम पर इस घटना का इतना प्रभाव पड़ा कि उन्होंने भगवद्गीता पढ़ने के साथ-साथ रामायण, महाभारत और अन्य धार्मिक पुस्तकें भी पढ़ीं। कहा जाता है कि इस घटना के बाद उन्होंने मांस का सेवन भी त्याग दिया था।</p>
<p>श्री अब्दुल कलाम ने अपनी आत्मकथा में लिखा, &#8220;गीता एक विज्ञान है और भारतीयों के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत का गर्व का बड़ा विषय है।&#8221;</p>
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		<title>चौधरी चरण सिंह- किसानों का मसीहा जिसने किसान को दिया सर्वोच्च स्थान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Dec 2022 03:30:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Person]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[champion of peasants]]></category>
		<category><![CDATA[Chaudhary Charan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[farmers day]]></category>
		<category><![CDATA[life]]></category>
		<category><![CDATA[किसान दिवस]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत के पांचवें प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह (23 दिसंबर 1902 &#8211; 29 मई 1987) की जन्म जयंती यानि 23 दिसंबर को भारत में किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह को किसानों का मसीहा भी कहा जाता है। चौधरी चरण सिंह ने भूमि सुधारों पर काफ़ी सराहनीय काम किया था। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत के पांचवें प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह (23 दिसंबर 1902 &#8211; 29 मई 1987) की जन्म जयंती यानि 23 दिसंबर को भारत में किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह को <strong>किसानों का मसीहा</strong> भी कहा जाता है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-50452" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/12/choudhary-charan-singh-champion-of-Indias-peasants.jpg?resize=696%2C365&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="365" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/12/choudhary-charan-singh-champion-of-Indias-peasants.jpg?w=800&amp;ssl=1 800w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/12/choudhary-charan-singh-champion-of-Indias-peasants.jpg?resize=300%2C158&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/12/choudhary-charan-singh-champion-of-Indias-peasants.jpg?resize=768%2C403&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/12/choudhary-charan-singh-champion-of-Indias-peasants.jpg?resize=696%2C365&amp;ssl=1 696w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p>चौधरी चरण सिंह ने भूमि सुधारों पर काफ़ी सराहनीय काम किया था। साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में और केंद्रीय <strong>वित्तमंत्री</strong> के रूप में उन्होंने गांवों और किसानों के विकास के महत्वपूर्ण योगदान दिया। चौधरी चरण सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीयता और एक साधारण ग्रामीण किसान की तरह जिया।</p>
<h2>किसान दिवस की स्थापना</h2>
<figure id="attachment_20892" aria-describedby="caption-attachment-20892" style="width: 192px" class="wp-caption alignright"><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-20892 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/12/choudhary-charan-singh.jpg?resize=192%2C262&#038;ssl=1" alt="choudhary charan singh" width="192" height="262" /><figcaption id="caption-attachment-20892" class="wp-caption-text">Choudhary Charan Singh (1902-1987)</figcaption></figure>
<p>वर्ष 2001 में भारतीय सरकार द्वारा <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%80_%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%A3_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9" target="_blank" rel="noopener noreferrer">चौधरी चरण सिंह</a>  की जयंती पर उनके कार्यो को ध्यान में रखते हुए 23 दिसम्बर को राष्‍ट्रीय <b>किसान दिवस</b> की घोषणा की गई थी।</p>
<p>&#8216;<strong>किसान दिवस</strong>&#8216; मेहनती किसानों को समर्पित है जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहे जाते हैं। 2001 से लेकर हर वर्ष 23 दिसंबर किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है।</p>
<h2>किसानों का महत्त्व</h2>
<p>भारत एक <strong>कृषि</strong> प्रधान देश है। इसका मतलब है कि यहां की जनसंख्या का एक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर है।</p>
<p>किसान  देश की प्रगति में विशेष सहायक होते हैं। किसान के बल पर देश अपने खाद्यान्नों के उत्पादन को बेहतर करके खुशहाल बन सकते है। पूर्व <a href="https://fundabook.com/sushma-swaraj-directs-visa-pakistani-patient/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">प्रधानमंत्री</a> चरण सिंह को किसानों के अभूतपूर्व विकास के लिए विशेष योगदान दिया था।</p>
<p>चौधरी चरण सिंह की नीति किसानों व ग़रीबों को ऊपर उठाने की थी। उन्होंने हमेशा यह साबित करने की कोशिश की, कि किसानों के बिना देश व प्रदेश का विकास नहीं हो सकता।</p>
<p>उनका कहना था कि भारत का संपूर्ण विकास तभी होगा जब किसान, मज़दूर, ग़रीब सभी खुशहाल होंगे। देश में <a href="https://fundabook.com/top-10-lesson-we-can-learn-from-mahatma-gandhi-life/">राष्ट्रपिता महात्मा गांधी</a> ने भी कृषि सुधारों पर अधिक बल दिया था।</p>
<h2>किसानों के मसीहा का चौधरी चरण सिंह का योगदान</h2>
<p>किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर, 1902 को उत्तर प्रदेश के <strong>मेरठ</strong> ज़िले में हुआ था। उन्होंने खेती और <a href="https://fundabook.com/longest-village-world-located-poland-hindi/">गाँव</a> को महत्व दिया। आज़ादी के बाद चौधरी चरण सिंह पूर्णत: किसानों के लिए लड़ने लगे। चौधरी चरण सिंह की मेहनत के कारण ही ‘‘<a href="https://fundabook.com/laws-and-rights-every-indian-should-know/">जमींदारी उन्मूलन बिल</a> ”साल 1952 में पारित हो सका।</p>
<p>इस एक बिल ने सदियों से खेतों में <strong>ख़ून पसीना</strong> बहाने वाले किसानों को जीने का मौका दिया। उन्होंने समस्त उत्तर प्रदेश में भ्रमण करते हुए कृषकों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया।</p>
<p>किसानों के हित में उन्होंने 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून को पारित कराया। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाक़ों में कृषि मुख्य व्यवसाय था।</p>
<p>चौधरी चरण सिंह खुद एक किसान परिवार से सम्बन्ध रखते थे और वह उनकी समस्याओं को अच्छी तरह से समझते थे। राजनेता होने से पहले वे एक अच्छे लेखक भी थे।</p>
<p>उनकी अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ थी। लेखक के तौर पर उन्होंने <strong>एबॉलिशन ऑफ जमींदारी</strong>, <strong>इंडियाज पॉवर्टी एंड इट्ज सॉल्यूशंस</strong> और <strong>लीजेंड प्रोपराइटरशिप</strong> जैसी <a href="https://fundabook.com/most-expensive-books-in-the-world/">किताबें</a> लिखी हैं।</p>
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		<title>पंडित जवाहर लाल नेहरू के 12 अनमोल विचार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Nov 2022 04:56:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interesting Facts]]></category>
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		<category><![CDATA[देश]]></category>
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		<category><![CDATA[amazing facts]]></category>
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		<category><![CDATA[प‍ंडित जवाहर लाल नेहरू]]></category>
		<category><![CDATA[रोचक तथ्य]]></category>
		<category><![CDATA[स्वतंत्रता आंदोलन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प‍ंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहबाद में हुआ था। वे एक ऐसे कश्मीरी ब्राह्मण परिवार के थे, जो अपनी प्रशासनिक क्षमताओं तथा विद्वत्ता के लिए विख्यात थे। जवाहर लाल नेहरू, संसदीय सरकार की स्थापना और विदेशी मामलों में &#8216;गुटनिरपेक्ष&#8216; नीतियों के लिए विख्यात हुए। वे आधुनिक भारतीय राष्ट्र-राज्य – एक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>प‍ंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहबाद में हुआ था। वे एक ऐसे कश्मीरी ब्राह्मण परिवार के थे, जो अपनी प्रशासनिक क्षमताओं तथा विद्वत्ता के लिए विख्यात थे।</p>
<p>जवाहर लाल नेहरू, संसदीय सरकार की स्थापना और विदेशी मामलों में &#8216;<a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%9F_%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7_%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8" target="_blank" rel="noopener noreferrer">गुटनिरपेक्ष</a>&#8216; नीतियों के लिए विख्यात हुए। वे आधुनिक भारतीय राष्ट्र-राज्य – एक सम्प्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, और लोकतान्त्रिक गणतन्त्र &#8211; के वास्तुकार मानें जाते हैं।</p>
<p>कश्मीरी पण्डित समुदाय के साथ उनके मूल की वजह से वे पण्डित नेहरू भी बुलाएँ जाते थे, जबकि भारतीय बच्चे उन्हें चाचा नेहरू के रूप में जानते हैं।</p>
<p>1930 और 1940 के दशक में <a href="https://fundabook.com/indias-5-most-holy-lake/">भारत</a> के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से प‍ंडित जवाहर लाल नेहरू एक थे। जानिए उनके 12 अनमोल विचार &#8230;</p>
<div><strong>1 नागरिकता देश की सेवा में होती हैं। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>2 संस्कृति मन और आत्मा का विस्तार है। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>3 लोकतंत्र अच्छा है।  मैं ऐसा इसलिए कहता हूं क्योंकि अन्य प्रणालियां इससे बदतर हैं। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>4 संकट में हर छोटी सी बात का महत्व होता है। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>5  तथ्य, तथ्य हैं और किसी की पसंद से गायब नहीं होते हैं। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>6 विफलता तभी होती है जब हम अपने आदर्शों, उद्देश्यों और सिद्धांतों को भूल जाते हैं। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>7 एक महान कार्य में लगन और कुशल पूर्वक काम करने पर भी, भले ही उसे तुरंत पहचान न मिले, अंततः सफल जरूर होता है। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>8 लोगों की कला उनके मन का सही दर्पण है। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>9</strong> <strong> एक पूंजीवादी समाज की शक्तियों को अगर अनियंत्रित छोड़ दिया जाए, तो वे अमीर को और अमीर तथा गरीब को और गरीब बना देती हैं। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>10 वह व्यक्ति जिसे वो सब मिल जाता है जो वो चाहता था, वह हमेशा शांति और व्यवस्था के पक्ष में होता है। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>11 शांति के बिना अन्य सभी सपने गायब हो जाते हैं और राख में मिल जाते हैं। </strong></div>
<div></div>
<div><strong>12 आप दीवार के चित्रों को बदल कर इतिहास के तथ्यों को नहीं बदल सकते हैं। </strong></div>
<div></div>
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		<title>जानिए पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाल दिवस से जुडी कुछ खास बातें !!!</title>
		<link>https://fundabook.com/special-things-related-pandit-jawaharlal-nehru-childrens-day/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Nov 2022 03:41:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interesting Facts]]></category>
		<category><![CDATA[Person]]></category>
		<category><![CDATA[CHILDREN'S DAY]]></category>
		<category><![CDATA[human life]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[life]]></category>
		<category><![CDATA[पंडित जवाहरलाल नेहरू]]></category>
		<category><![CDATA[बाल दिवस]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 इलाहाबाद के एक धनी परिवार में हुआ था। उनका जन्मदिन बाल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। उनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू और माता का नाम स्वरूपरानी था। पिता पेशे से वकील थे। उनकी 3 पुत्रियां थीं, और जवाहरलाल नेहरू उनके इकलौते पुत्र थे। [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 इलाहाबाद के एक धनी परिवार में हुआ था। उनका जन्मदिन बाल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। उनके पिता का नाम <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2_%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%82" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मोतीलाल नेहरू</a> और माता का नाम स्वरूपरानी था।</p>
<p>पिता पेशे से वकील थे। उनकी 3 पुत्रियां थीं, और जवाहरलाल नेहरू उनके इकलौते पुत्र थे। वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। नेहरू जी को बच्चों से बड़ा स्नेह और लगाव था और वे बच्चों को देश के आने वाली कल का निर्माता मानते थे।</p>
<p>बच्चे उन्हें प्यार से &#8216;<strong>चाचा नेहरू</strong>&#8216; बुलाते थे। <a href="https://fundabook.com/12-precious-views-pandit-jawaharlal-nehru/">पंडित जवाहरलाल नेहरू</a> ने देश को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए महत्त्व पूर्ण योगदान दिया है।</p>
<h4>पंडित जवाहरलाल नेहरू की शिक्षा</h4>
<p>जवाहरलाल नेहरू को दुनिया के बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिला। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो और कॉलेज की <strong>शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन</strong> से पूरी की थी। उन्होंने अपनी <strong>लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय</strong> से पूरी की।</p>
<p>हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर 1912 में नेहरूजी ने बार-एट-लॉ की उपाधि ग्रहण की और वे बार में बुलाए गए। यही कारण है कि 14 नवंबर का दिन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।  जंहा बच्चों दवारा अनेक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये जाते है।</p>
<h4>क्यूँ मनाया जाता है बाल दिवस</h4>
<p>हर साल 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। CHILDREN&#8217;S DAY यानि बाल दिवस लोगों को बच्चों के अधिकार, देखभाल और शिक्षा के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये मनाया जाता है। कहा जाता है कि देश का भविष्य बच्चों पर ही निर्भर करता है।</p>
<p>बच्चे सर्वशक्तिमान द्वारा उनके माता-पिता के लिए भगवान का उपहार हैं। वो निर्दोष, सराहनीय, शुद्ध और हर किसी को प्यारे होते हैं। 14 नवंबर को पंडित जवाहरलाल नेहरु का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।</p>
<p>चाचा नेहरु को बच्चों से बहुत प्रेम था। उन्होंने भारत की आजादी के बाद बच्चों के साथ ही युवाओं के भलें के लिए बहुत अच्छे काम किया।</p>
<h4>बाल दिवस मनाने के पीछे इरादा</h4>
<p>यह हमारे के लिए गर्व की बात है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर &#8220;चिल्ड्रेन्स डे&#8221; मनाने का प्रस्ताव पहली बार भारत के पूर्व रक्षा मंत्री श्री वी.के. कृष्ण मेनन द्वारा दिया गया था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा 20 नवम्बर 1959 को अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस (International Children&#8217;s Day) मनाने का निश्चय किया गया।</p>
<p>क्यूंकि यह दिन बच्चों, जो किसी भी देश का भविष्य होते हैं, के कल्याण से जुड़ा था।  अतः विश्व के सभी देशों ने इसे ख़ुशी से अपनाया और जल्द ही यह दिवस विश्वस्तर पर मनाया जाने लगा।</p>
<p>बाल दिवस की नींव 1925 में रखी गई थी, जिसके बाद 1953 में दुनिया भर में इसे मान्यता मिली। यह दिन बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी मूल जरूरतों को पूरा करने की याद दिलाता है।</p>
<h4>बाल दिवस पर भारत के पहले प्रधामनंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू दवारा कही गई ये 10 बातें</h4>
<ol>
<li>जो व्यक्ति भाग जाता है वह शांत बैठे व्यक्ति की तुलना में अधिक खतरे में पड़ जाता है।</li>
<li>विफलता तभी होती है जब हम अपने आदर्शों, उद्देश्यों और सिद्धांतों को भूल जाते हैं।</li>
<li>हम वास्तविकता में क्या हैं वो और लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं उससे कहीं अधिक मायने रखता है।</li>
<li>महान विचार और छोटे लोग कभी भी एक साथ नहीं रह सकते।</li>
<li>जिसमें अज्ञानता है वो बदलाव से जरूर डरते हैं।</li>
<li>सत्य हमेशा सत्य ही रहता हैं चाहे आप पसंद करें या ना करें।</li>
<li>देश के लोगों की नागरिकता, देश की सेवा में निहित हैं।</li>
<li>हर हमलावर देश यह दावा करता हैं कि वह अपनी रक्षा के लिए कार्य कर रहा हैं।</li>
<li>संकट के समय हर छोटी चीज मायने रखती है।</li>
<li>कार्य के प्रभावी होने के लिए उसे स्पष्ठ लक्ष्य की तरफ निर्देशित किया जाना चाहिए।</li>
</ol>
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		<title>आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसे लोग धनवान बनते हैं, जो जीवन में रखते हैं इन बातों का ध्यान!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Jul 2022 07:07:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Person]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Chanakya]]></category>
		<category><![CDATA[Chanakya Niti]]></category>
		<category><![CDATA[life]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महान अर्थशास्त्री और समृद्ध बुद्धि वाले आचार्य चाणक्य अपनी नीतियों के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं। आचार्य चाणक्य को समाज की गहरी समझ थी, इसलिए उन्होंने नीति शास्त्र की रचना की जिसमें उन्होंने लोगों को बताया कि कैसे एक सुखी, सफल और सम्मानजनक जीवन जीना है। चाणक्य की नीतियों को आज भी प्रासंगिक माना जाता है। [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/acharya-chanakya-people-rich-take-care-things-hindi/">आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसे लोग धनवान बनते हैं, जो जीवन में रखते हैं इन बातों का ध्यान!</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>महान <strong>अर्थशास्त्री</strong> और <strong>समृद्ध बुद्धि</strong> वाले आचार्य चाणक्य अपनी नीतियों के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं। आचार्य चाणक्य को समाज की गहरी समझ थी, इसलिए उन्होंने नीति शास्त्र की रचना की जिसमें उन्होंने लोगों को बताया कि कैसे एक <strong>सुखी, सफल</strong> और <strong>सम्मानजनक</strong> जीवन जीना है।</p>
<p>चाणक्य की नीतियों को आज भी <strong>प्रासंगिक</strong> माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति उनकी नीतियों का पालन करता है उसे जीवन में कभी असफलता का सामना नहीं करना पड़ता है।</p>
<p>आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में कुछ ऐसी बातें बताई हैं जो मनुष्य की आर्थिक प्रगति में बाधक बन जाती हैं। चाणक्य कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति इन आदतों को छोड़ दे तो वह धनवान बन सकता है।</p>
<p>तो चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से कि वह कौन सी आदतें हैं :-</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-36095 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/07/Acharya-Chanakya.gif?resize=696%2C418&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="418" /></p>
<p>[adinserter block=&#8221;1&#8243;]</p>
<h2>खाली हाथ घर न लौटें</h2>
<p>आचार्य चाणक्य के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पेशेवर है और उसका पेशा ऐसा है कि वह घर आता जाता रहता है तो उसे चाहिए की वह घर खाली हाथ न आये। घर आते समय उसे कुछ न कुछ खाने का सामान लाना चाहिए इससे घर में घर में खुशियां आती हैं।</p>
<h2>मेहमानों का अपमान न करें</h2>
<p>आचार्य चाणक्य कहते हैं कि यदि आपके घर में कोई शत्रु भी आ जाए तो इसका अर्थ है कि आपके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसकी देखभाल की जानी चाहिए। क्योंकि घर में सबसे पहले मेहमान आता है। फिर दुश्मन है। इसलिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाए।</p>
<p>[adinserter block=&#8221;1&#8243;]</p>
<h2>मेहमानों का अपमान न करें</h2>
<p>चाणक्य कहते हैं कि यदि आपके घर में कोई शत्रु भी आ जाए (जिससे आपका मनमुटाव चल रहा हो ) तो भी उसका आदर सत्कार करना चाहिए। क्योंकि मेहमान भगवान् के समान होता है। घर मेंं आया हुआ व्यक्ति पहले मेहमान है। उसके बाद दुश्मन है। इसलिए उसकी मेहमान नवाजी करनी चाहिए।</p>
<h2>कभी भी झूठा खाना नहीं छोड़ना चाहिए</h2>
<p>चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य को खाना उतना ही लेना चाहिए। जितना वो खा सके। मतलब उसे खाना जूठा नहीं छोड़ना चाहिए। चाणक्य बताते हैं कि अन्न, देवता समान होता है, इसलिए अन्न का अपमान देवता का अपमान है। ऐसा करने से <strong>मां लक्ष्मी</strong> नाराज होती हैं और वह ऐसे घर से रूठ कर चली जातीं हैं।</p>
<p>[adinserter block=&#8221;1&#8243;]</p>
<h2>बिस्तर और खुद को गंदा न रखना</h2>
<p>आपने देखा होगा कि कुछ लोग अपने बिस्तर को अव्यवस्थित और गंदा रखते हैं। वहीँ कुछ लोग बिस्तर पर बैठकर भोजन करते हैं। चाणक्य कहते हैं कि यह एक बहुत बुरी आदत है। क्योंकि बिस्तर पर बैठकर भोजन करने और गंदा रखने से दरिद्रता आती है। इसलिए इससे बचना चाहिए।</p>
<h2>सुबह देर से उठना</h2>
<p>अगर मनुष्य को आर्थिक रूप से मजबूत रहना है तो मनुष्य को सुबह जल्दी उठना चाहिए। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो लोग सुबह देर से उठते हैं उनसे <strong>मां लक्ष्मी</strong> रूठ जातीं हैं। साथ ही ऐसा व्यक्ति हमेशा आलसी बना रहता है। इसलिए सुबह जल्दी उठना चाहिए।</p>
<p>[adinserter block=&#8221;1&#8243;]</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें :-</strong></p>
<ul>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/chanakya-neeti-whom-to-wake-up-or-not-from-sleep/">चाणक्य नीति: ये सो जाएं तो जगा दें, और ये सो रहे हों तो न जगाएं</a></strong></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/four-important-things-about-life-chanakya/">चार गुप्त बातें, जिनकी आपको चर्चा नहीं करनी चाहिए!</a></strong></li>
</ul>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/acharya-chanakya-people-rich-take-care-things-hindi/">आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसे लोग धनवान बनते हैं, जो जीवन में रखते हैं इन बातों का ध्यान!</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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		<title>माँ-बेटा जो कई साल भाइयों की तरह रहे &#8211; संघर्ष से सफलता की अनोखी कहानी</title>
		<link>https://fundabook.com/annie-shiva-inspiring-story-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Apr 2022 13:49:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Person]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[Annie Shiva]]></category>
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		<category><![CDATA[Success Story]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कोरोना महामारी के बीच देश भर से अदम्य साहस और धैर्य की कई दिल को छू लेने वाली कहानियां सामने आई हैं ऐसी ही एक कहानी है एनी शिवा की, जो लोगों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं हैं और उनका संघर्ष किसी को भी प्रेरणा दे सकता है। दरअसल यह कहानी केरल पुलिस [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>कोरोना महामारी के बीच देश भर से अदम्य साहस और धैर्य की कई <strong>दिल </strong>को छू लेने वाली कहानियां सामने आई हैं ऐसी ही एक कहानी है <strong>एनी शिवा</strong> की, जो लोगों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं हैं और उनका संघर्ष किसी को भी <strong>प्रेरणा</strong> दे सकता है।</p>
<p>दरअसल यह कहानी केरल पुलिस की एक महिला पुलिस उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) के संघर्ष की है। तो चलिए जानते हैं।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-34740 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/04/Annie-Shiva.jpg?resize=696%2C390&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="390" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/04/Annie-Shiva.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/04/Annie-Shiva.jpg?resize=300%2C168&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/04/Annie-Shiva.jpg?resize=696%2C390&amp;ssl=1 696w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
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<p>जिस उम्र में लोग पढ़ते हैं तथा अपने कैरियर के बारे में सोचते हैं उस उम्र में <strong>एनी शिवा</strong> को अपने बच्चे के साथ कड़ा संघर्ष करना पड़ा।</p>
<p>दरअसल, एनी जब 18 साल की थीं तब उनके पति ने उन्हें एक बच्चे के साथ दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया। लेकिन एनी ने हिम्मत नहीं हारी और जिंदगी की चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया।</p>
<h2>उतार चढ़ाव भरी ज़िंदगी</h2>
<p>जब एनी शिवा कांजीरामकुलम के <strong>केएनएम गवर्नमेंट</strong> <a href="https://fundabook.com/10-medical-colleges-country-every-childs-dream-study-hindi/"><strong>कॉलेज</strong> </a>में प्रथम वर्ष की छात्रा थीं, उसी समय उन्हें एक लड़के से प्यार हो गया और उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ जा कर उस लड़के से <a href="https://fundabook.com/unique-wedding-people-steal-wife-hindi/">शादी</a> कर ली।</p>
<p>लेकिन दो साल बाद उसका पति  एनी को अपने 6 महीने के बच्चे के साथ अकेला छोड़कर चला गया। उस समय एनी सिर्फ 21 साल की थी उनके माता पिता ने भी उन्हें अपनाने से इनकार कर दिया, और तब वह अपनी दादी के घर में रहने के लिए चली गई। एनी ने अपने बेटे का नाम <strong>शिवसूर्य</strong> रखा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">The inspirational story of Annie Shiva, a young mother, abandoned by her husband &amp;family, becoming a Sub-Inspector of Police after14 years of struggle &amp; suffering. She is from Kanjiramkulam, in my constituency,&amp; is now an SI in Varkala Police Station: <a href="https://t.co/hX5DK0fZyy">https://t.co/hX5DK0fZyy</a></p>
<p>— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) <a href="https://twitter.com/ShashiTharoor/status/1409108442589974531?ref_src=twsrc%5Etfw">June 27, 2021</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
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<p>रोजी-रोटी कमाने के लिए उन्होंने कभी <strong>सेल्सपर्सन</strong> बनकर घर-घर सामान बेचा, तो कभी बैंको में <strong>इंश्योरेंस पॉलिसिज</strong> बेचने का काम किया।</p>
<p>बाद में, उन्होंने वर्कला के आस-पास स्थित त्यौहार में लगने वाले मेलों और पर्यटन स्थलों पर <strong>नींबू पानी</strong> व <strong>आइसक्रीम</strong> बेचना शुरू किया। लेकिन यह सब करना एक सिंगल मदर के लिए आसान नहीं था।</p>
<p>उसने एक पुरुष की तरह दिखने के लिए खुद को शारीरिक रूप से बदल लिया और 14 वर्षों तक लोगों को लगा कि वह और उसका बेटा भाई भाई हैं!</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-34754 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/04/Screenshot-2022-04-20-at-9.45.23-AM-1.png?resize=696%2C390&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="390" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/04/Screenshot-2022-04-20-at-9.45.23-AM-1.png?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/04/Screenshot-2022-04-20-at-9.45.23-AM-1.png?resize=300%2C168&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/04/Screenshot-2022-04-20-at-9.45.23-AM-1.png?resize=696%2C390&amp;ssl=1 696w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<blockquote><p>वह कहती हैं, &#8216;कुछ दिन तो दिन में एक बार का खाना भी लग्जरी लगने लगता था। मैंने बेबसी से अपने बेटे को भूख से रोते और सो जाते देखा है।&#8217;</p>
<p>उन्होंने फेसबुक पर लिखा, &#8220;इतने सालों में जिन संघर्षों का मैंने सामना किया, उसका इससे बेहतर जवाब और क्या हो सकता है? मैं किसी भी तरह मानसिक रूप से विचलित नहीं हुई। इन तमाम मुश्किलों के बाद जब एक महिला अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने में कामयाब हो जाती है तो लोग दया दिखाते हैं और उनके बारे में झूठ फैलाते रहते हैं। इसलिए, मैं और मेरा बेटा यहां एक बड़े भाई और एक छोटे भाई के रूप में रहते हैं। जीवन में जब भी कठिनाईयों ने मुझे पीछे धकेला मैंने आगे बढ़ने के लिए 10 गुना अधिक मेहनत की। यह मेरी छोटी सी जीत थी लेकिन नकारात्मकताओं से भरी दुनिया में, मुझे खुशी है कि यह इतने सारे लोगों के लिए ताकत और प्रेरणा का स्रोत हो सकता है। अब मुझे यह जानकर बहुत अच्छा लग रहा है कि मैंने यह सब अकेले किया है और मैं अपने बेटे को एक अच्छी जिंदगी दे सकूंगी।”</p></blockquote>
<p>हम जानते हैं कि एक मानसिक बीमारी है जिससे भारतीय समाज पीड़ित है, जहां वे यह मान लेते हैं कि अकेली रहने वाली महिला कमजोर है या आसानी से पकड़ में आ जाती है।</p>
<p>इस मुश्किल समय में भी एनी ने काम करने के साथ-साथ, निजी तौर पर पढ़ाई करते हुए, <strong>समाजशास्त्र</strong> में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और 2014 में <strong>तिरुवनंतपुरम</strong> में केरल राज्य <strong>लोक सेवा</strong> आयोग के लिए एक प्रशिक्षण संस्थान में शामिल हुईं, 2016 में <strong>पुलिस कांस्टेबल परीक्षा</strong> उत्तीर्ण की।</p>
<p>2019 में उन्होंने सब-इंस्पेक्टर का एग्जाम भी क्रैक कर लिया। 18 महीने की <strong>कोर्स ट्रेनिंग</strong> की बाद उन्होंने शनिवार, 26 जून 2021 को वर्कला पुलिस स्टेशन में सब-इंस्पेक्टर का पद संभाला। अब उनकी कहानी बहुत सी महिलाओं को जिंदगी में कुछ कर दिखाने की प्रेरणा दे रही है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Congratulations Annie Shiva, to show us that anything can achieve by hard work &amp; perseverance. You get what you work hard for with a focused dream and dedicated mind which brings us closer to success. Wishing you all the best for the fearless future that you have created. <a href="https://t.co/kGTd9hr7IC">pic.twitter.com/kGTd9hr7IC</a></p>
<p>— Dr Prameela Devi (@Dr_PrameelaDevi) <a href="https://twitter.com/Dr_PrameelaDevi/status/1409411316977061888?ref_src=twsrc%5Etfw">June 28, 2021</a></p></blockquote>
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		<title>बेटे ने CM चन्नी को हराया, मां नहीं छोड़ेंगी सफाईकर्मी की नौकरी, आप देखकर रह जाएंगे दंग!</title>
		<link>https://fundabook.com/son-defeated-cm-channi-mother-will-not-leave-job-of-sweeper-you-will-be-stunned-to-see-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Mar 2022 14:21:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[Person]]></category>
		<category><![CDATA[Labh Singh Ugoke]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Election]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पंजाब में आम आदमी पार्टी ने एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। (आप) के विधान सभा सदस्य (एमएलए) लाभ सिंह उगोके ने भारी मतों से जीत हासिल की है आम आदमी पार्टी ने 117 सीटों में से 92 सीटें हासिल की हैं। भदौर की आरक्षित सीट से लाभ सिंह उगोके के सामने चरणजीत सिंह चन्नी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>पंजाब में आम आदमी पार्टी ने एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। (आप) के विधान सभा सदस्य (एमएलए) लाभ सिंह उगोके ने भारी मतों से जीत हासिल की है आम आदमी पार्टी ने 117 सीटों में से 92 सीटें हासिल की हैं।</p>
<p>भदौर की आरक्षित सीट से <strong>लाभ सिंह उगोके</strong> के सामने चरणजीत सिंह चन्नी थे। पहले उगोके खुद एक मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान में काम करते थे। बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि या अनुभव के लाभ सिंह ने चन्नी को 37,558 वोटों के अंतर से हरा दिया।</p>
<p>जहाँ एक ओर लाभ सिंह उगोके ने निवर्तमान मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को हरा कर सभी को चौंका दिया है वहीँ दूसरी ओर उनकी मां के सफाईकर्मी की नौकरी न छोड़ेंने के बयान ने भी सभी को हैरान कर दिया है।</p>
<p>इस पोस्ट में हम जानेंगे कि क्यों लाभ सिंह उगोके की मां सफाईकर्मी की नौकरी नहीं छोड़ना चाहती :-</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-33937" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/03/Son-defeated-CM-Channi-mother-will-not-leave-job-sweeper-you-will-be-stunned-see.jpg?resize=696%2C390&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="390" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/03/Son-defeated-CM-Channi-mother-will-not-leave-job-sweeper-you-will-be-stunned-see.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/03/Son-defeated-CM-Channi-mother-will-not-leave-job-sweeper-you-will-be-stunned-see.jpg?resize=300%2C168&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/03/Son-defeated-CM-Channi-mother-will-not-leave-job-sweeper-you-will-be-stunned-see.jpg?resize=696%2C390&amp;ssl=1 696w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2>जीवन का एहम हिस्सा है &#8220;झाड़ू&#8221;</h2>
<p>दरअसल लाभ सिंह की मां बलदेव कौर एक संविदा (contract) सफाई कर्मचारी हैं। वह बेटे के जीतने के एक दिन बाद ही काम पर चली गईं जिसे देखकर सहकर्मी हैरान रह गए। जब उनसे पूछा कि आप आज काम पर क्यों आई हैं, तो उन्होंने कहा, “सबने सोचा कि मैं अपने बेटे की जीत की ख़ुशी में कम से कम एक दिन तक तो काम पर नहीं आऊंगी, लेकिन मैंने साफ कह दिया कि मेरा बेटा विधायक बना है, मैं नहीं। मैं अभी भी एक संविदा सफाई कर्मचारी हूँ और मुझे अपनी नौकरी क्यों छोड़नी चाहिए?”</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;हमारे परिवार ने हमेशा पैसा कमाने के लिए कड़ी मेहनत की है। मेरे बेटे के चुनाव जीतने के बावजूद, मैं स्कूल में स्वीपर के रूप में काम करना जारी रखूंगी।&#8221; आप उम्मीदवार के रूप में अपने बेटे की जीत से खुश बलदेव कौर ने कहा कि &#8216;झाड़ू&#8217; मेरे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है।</p>
<p>“मैं जो कर रही हूँ, उसपर मुझे गर्व है। जब हमारा परिवार गुज़ारे के लिए संघर्ष कर रहा था, तब मेरी नौकरी ही आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत रही है” बलदेव पिछले 22 सालों से बरनाला ज़िले के अपने पैतृक गांव उगोके में स्कूल में सफाईकर्मी का काम कर रही हैं।</p>
<p>नवनिर्वाचित विधायक के पिता दर्शन सिंह, जो मजदूरी का काम करते थे, उन्होंने कहा कि परिवार अपनी जीवन शैली नहीं बदलेगा और पहले की तरह ही रहेगा। वह चाहते हैं कि उनका बेटा अपने परिवार के बजाय लोगों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करे।</p>
<h2>ऐतिहासिक है ये जीत</h2>
<p>इस जीत को इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पंजाब के तीन पूर्व मुख्यमंत्री अपने ‘गढ़’ से हार गए जिसमें पटियाला अर्बन में कैप्टन अमरिंदर, लाम्बी में प्रकाश सिंह बादल और भदौर एवं चमकौर साहिब में चरणजीत सिंह चन्नी को हार का मुंह देखना पड़ा।</p>
<blockquote><p>अपने एक चुनावी भाषण में लाभ सिंह उगोके ने कहा था,</p>
<p>“1952 के चुनाव में भदौर सीट पर राजा निर्पाल सिंह और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के अर्जुन सिंह के बीच मुकाबला हुआ था। निर्पाल सिंह, एक राजा थे। महलों, कारों और भारी धन के मालिक थे। उनका अभियान भव्य था। दूसरी ओर भूमिहीन किसानों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले अर्जुन सिंह थे।</p>
<p>एक विनम्र परिवार से आए। बैलगाड़ियों पर प्रचार किया। भारी शक्ति प्रदर्शन के बावजूद, निर्पाल सिंह चुनाव हार गए और कॉमरेड अर्जुन सिंह प्रचंड बहुमत से जीत गए. इस बार भी ऐसा ही होगा।”</p></blockquote>
<p><strong>यह भी पढ़ें :-</strong></p>
<p><strong><a href="https://fundabook.com/first-indian-reach-british-parliament-elected-hindi/">जानिए ब्रिटिश संसद में चुन कर पहुंचने वाले पहले भारतीय के बारे में !</a></strong></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/son-defeated-cm-channi-mother-will-not-leave-job-of-sweeper-you-will-be-stunned-to-see-hindi/">बेटे ने CM चन्नी को हराया, मां नहीं छोड़ेंगी सफाईकर्मी की नौकरी, आप देखकर रह जाएंगे दंग!</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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