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डाॅ. वेदप्रताप वैदिक: 13 वर्ष की आयु में हिंदी भाषा के लिए सत्याग्रह करने वाले महान विद्वान

महान हिंदी विद्वान,चिंतक,पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डाॅ. वेदप्रताप वैदिक की गणना राष्ट्रीय अग्रदूतों में होती है। मात्र 13 वर्ष की आयु में मातृभाषा हिंदी के लिए सत्याग्रह करने वाले डा. वेद प्रताप वैदिक का जन्म सन 1944 में इंदौर में हुआ था। वह देश के जाने माने व बड़े हिंदी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक थे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में पीएचडी की थी।

13 वर्ष की आयु में सत्याग्रह

डा. वैदिक ने हिंदी भाषा के लिए सत्याग्रह किया और अपनी पहली जेल-यात्रा सिर्फ 13 वर्ष की आयु में की थी। हिंदी सत्याग्रही के तौर पर वे 1957 में पटियाला जेल में रहे। बाद में छात्र नेता और भाषाई आंदोलनकारी के तौर पर कई जेल यात्राएं कीं।

हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा का स्थान दिलाने के लिए सबसे अधिक जेल यात्रा करने वाले वह पहले भाषाई आंदोलनकारी थे।, जिन्होंने हिंदी को मौलिक चिंतन की भाषा बनाया और भारतीय भाषाओं को उनका उचित स्थान दिलवाने के लिए सतत संघर्ष और त्याग किया।

महर्षि दयानंद, महात्मा गांधी और डाॅ. राममनोहर लोहिया की महान परंपरा को आगे बढ़ानेवाले योद्धाओं में डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का नाम अग्रणी है।

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हिंदी भाषा में पी.एच.डी. करने वाले पहले व्यक्ति

वह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में पीएच.डी. कर रहे थे। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर शोध ग्रंथ वह हिंदी में लिखना चाहते थे परंतु उनको अनुमति नहीं मिली।

इस प्रश्न पर उन्होंने आंदोलन किया और कहा कि देश की राष्ट्रभाषा पर मुझे शोध ग्रंथ लिखने और पीएच.डी. करने की अनुमति मिलनी चाहिए। मामला न्यायालय में गया, भारत की संसद में भी मामला गूंजा।

डा. राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी वाजपेयी, मधु लिमये, चंद्रशेखर, प्रकाश वीर शास्त्री, रामधारी सिंह दिनकर, डा. धर्मवीर भारती और डा. हरिवंश राय बच्चन जैसे विद्वानों ने उनका प्रबल समर्थन किया।

इसके बाद इंदिरा गांधी सरकार की पहल पर JNU के नियमों में बदलाव हुआ और उन्हें वापस लिया गया। इसके बाद डा. वैदिक पहले भारतीय छात्र बने जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी में शोध लिख कर पीएच. डी. की। इस दृष्टि से उन्होंने भारत में एक नया इतिहास बनाया।

डा. वैदिक ने अपने लेखन के 60 वर्षों में हजारों लेख लिखे और भाषण दिए! वे लगभग 10 वर्षों तक पीटीआई भाषा (हिन्दी समाचार समिति) के संस्थापक-संपादक रहे और उसके पहले नवभारत टाइम्स के संपादक (विचारक) रहे।

डा. भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर उनके लेख राष्ट्रीय समाचार पत्रों तथा प्रदेशों और विदेशों के लगभग 200 समाचार पत्रों में हर सप्ताह प्रकाशित होते रहे हैं। उनका अंतिम लेख उनकी मृत्यु से महज़ एक दिन पहले ही प्रकाशित हुआ था।

ख़ास: उन्होंने 2014 में आतंकी हाफिज सईद का इंटरव्यू लिया था।

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हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई का दिया था सुझाव

अक्तूबर 2022 से देश में पहली बार मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में होने का फ़ैसला लिया गया था। मध्य प्रदेश के सभी 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस पहल की शुरुआत की गयी थी। दरअसल इसका सुझाव सन 2019 में डॉ वेद प्रताप वैदिक ने ही दिया था।

मीडिया ने की हर बार उपेक्षा

दोगले चरित्र वाले भारतीय मीडिया चैनलों ने हिंदी भाषा को उसका उचित सम्मान दिलाने में  हमेशा डा. वैदिक के प्रयास की हमेशा उपेक्षा की। वैसे तो हर बार हिंदी दिवस पर सभी चैनल पर हिंदी भाषा को लेकर बड़े-२ प्रोग्राम चलते हैं लेकिन डा. वैदिक के किसी भी प्रयास और यहाँ तक की उनकी मृत्यु पर किसी चैनल ने प्रोग्राम चलाना तो दूर इस खबर को हाई लाइट करना भी ज़रूरी नहीं समझा।

डा. वैदिक की जीवन यात्रा

जन्म: डॉ. वेद प्रताप वैदिक का जन्म 30 दिसंबर 1944 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ।

शिक्षा:

(1) पीएच.डी (अंतरराष्ट्रीय राजनीति), स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज, जवाहरलाल नेहरु वि.वि., 1971. विषय — अफगानिस्तान के साथ सोवियत संघ और अमेरिका के संबंधों का तुलनात्मक अध्ययन, 1946-1963 (पीएच.डी. शोध-कार्य के दौरान न्यूयार्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय, वाशिंगटन डी. सी. की लायब्रेरी आॅफ कांग्रेस, मास्को की विज्ञान अकादमी, लंदन के प्राच्य-विद्या संस्थान तथा काबुल विश्वविद्यालय में विशेष अध्ययन का अवसर)

(2) एम.ए. (राजनीति शास्त्र), प्रथम श्रेणी इंदौर क्रिश्चियन काॅलेज, इंदौर विश्वविद्यालय, 1965

(3) बी.ए. (राजनीति शास्त्र, दर्शनशास्त्र, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी) प्रथम श्रेणी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, 1963

(4) संस्कृत (सातवलेकर परीक्षाएं),1955 प्रथम श्रेणी

(5) रूसी भाषा (स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज),1967प्रथम श्रेणी

(6) फारसी भाषा (स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज), 1968 प्रथम श्रेणी

छात्रवृत्तियां:

(1) राष्ट्रीय प्रतिभा छात्रवृत्ति, 1963-64. एवं

(2) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग शोधवृत्ति, 1964-1966

शोधवृत्तियां:

(3) वरिष्ठ शोधवृत्ति, इंडियन काॅसिल आॅफ सोश्यल साइंस रिसर्च, 1981-1983

‘इंस्टीट्यूट फाॅर डिफेंस स्टडीज एण्ड एनालिसस’ तथा ‘स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज’ (ज.नेहरू.वि.वि.) में दो साल तक ‘सीनियर फेलो’ के तौर पर शोधकार्य.

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अध्यापन:

हस्तिनापुर काॅलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में राजनीति शास्त्र का अध्यापन, 1970-74। 30 वर्षों में अनेक भारतीय एवं विदेशी विश्वविद्यालयों में अन्तरराष्ट्रीय राजनीति एवं पत्रकारिता पर अल्पकालिक अध्यापन-कार्यक्रम चलाते रहे।

पुस्तकें:

(1) ‘हिन्दी पत्रकारिता: विविध आयाम’, संपादित (नेशनल, 1976),पाँच संस्करण (हिन्दी बुक सेंटर), हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास, कला और अधुनातन प्रवृत्तियों का विवेचन करने वाले इस ग्रंथ को समीक्षकों ने ‘हिन्दी पत्रकारिता का विश्वकोष’ कहा है. लगभग सभी विश्वविद्यालयों में इसका संदर्भ ग्रंथ के तौर पर उपयोग किया जाता है. इसके कई संस्करण आ चुके हैं।

(2) ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा’ (नेशनल पब्लिशिंग हाउस, 1973). : अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी का यह पहला शोधग्रंथ है, विद्वान समीक्षकों ने इसे अपने विषय का ‘प्रामाणिक’ और ‘मौलिक’ संदर्भ ग्रंथ कहा है. यह फारसी, रूसी और अंग्रेजी स्रोतों के आधार पर लिखा गया है. इस ग्रंथ पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

(3) ‘भारतीय विदेश नीति: नये दिशा संकेत’ (नेशनल, 1971) इस ग्रंथ को समीक्षकों ने ‘मौलिक चिंतन और भविष्य दृष्टि’ का उल्लेखनीय दस्तावेज घोषित किया है।

(4) ‘एथनिक क्राइसिस इन श्रीलंका: इंडिया’ज़ आॅप्शंस’ (नेशनल, 1985).श्रीलंका की तमिल समस्या पर किसी भारतीय द्वारा लिखा गया यह पहला ग्रंथ है।

(5) ‘अफगानिस्तान: कल, आज और कल’ (राजकमल प्रकाशन, 2002). अफगानिस्तान के इतिहास, समाज और राजनीति पर इस तरह का गवेषणात्मक और मौलिक व्याख्यासम्पन्न ग्रंथ दुनिया की किसी भी अन्य भाषा में उपलब्ध नहीं है।

(6) ‘वर्तमान भारत’ (राजकमल प्रकाशन, 2002)। समसामयिक भारत की राजनीति पर लिखे गए विश्लेषणात्मक निबंधों का संग्रह !

(7) ‘महाशक्ति भारत’ (राजकमल प्रकाशन, 2002)। इस ग्रंथ में भारत को महाशक्ति बनाने का स्वप्न देखा गया है और उस स्वप्न को साकार करने के उपायों पर विचार किया गया है।

(8) ‘अंग्रेजी हटाओ: क्यों और कैसे ? (प्रभात प्रकाशन, दिल्ली प्रथम संस्करण 1973, सातवां संस्करण, 1998) : इस पुस्तक की 75 हजार प्रतियां बिक चुकी हैं और इसका मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, संस्कृत, गुजराती, मराठी, बांग्ला, असमिया, पंजाबी,उर्दू, सिंधी, मणिपुरी, कश्मीरी, कोंकणी तथा ओडि़या आदि में अनुवाद हो चुका है।

(9) हिंदी का सम्पूर्ण समाचार-पत्र कैसा हो ? (प्रवीण प्रकाशन, 1994), तीन संस्करण।

(10) ‘भाजपा, हिंदुत्व और मुसलमान’ (राजकमल प्रकाशन)

(11)‘कुछ महापुरूष और कुछ मित्र’ शीघ्र प्रकाश्य

(12) मोरिशस, मध्य एशिया और चीन के तीन यात्रा-वृतांत प्रकाशनाधीन

पत्रकारिता:

(1) 1958 में प्रूफ रीडर के तौर पर पत्रकारिता में प्रवेश. तब से अब तक लगभग 1000 लेख, दर्जनों शोधपत्र, लगभग दो हजार संपादकीय तथा सैकड़ों समीक्षाएं प्रकाशित. पिछले तीन दशकों में ‘नई दुनिया’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिंदुस्तान’, ‘जनसत्ता’, ‘भास्कर’, ‘टाइम्स आॅफ इंडिया’, ‘धर्मयुग’, ‘दिनमान’, ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘इंटरनेशनल स्टडीज’, ‘स्ट्रटेजिक एनालिसिस’, ‘वल्र्ड फोकस’ आदि पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर लेख और भेंट वार्ताएं।

अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, श्रीलंका, चेकोस्लोवाकिया, सूरिनाम आदि राष्ट्रों के शीर्ष नेताओं से की गई भेंट-वार्ताओं को अंतरराष्ट्रीय ख्याति। देश के लगभग दर्जन भर अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन।

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(2) संपादक, ‘पी.टी.आई.-भाषा’, 1986-96 :  प्रेस ट्रस्ट आॅफ इंडिया द्वारा स्थापित ‘भाषा’ नामक हिंदी की समाचार समिति के संस्थापक-संपादक। ‘भाषा’ ने अपनी नवीन खबर-शैली, देशी और विदेशी नामों के मानकीकरण और अनेक महत्त्वपूर्ण अवसरों पर अपने ‘स्कूपों’ द्वारा हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय ख्याति अर्जित की।

(3) संपादक (विचार), नवभारत टाइम्स, 1986. सहायक संपादक, नवभारत टाइम्स 1974-85, संपादक, ‘अग्रवाही (मासिक), इंदौर, 1962-66. संपादक, इंदौर क्रिश्यिचन काॅलेज पत्रिका, 1963-64. हिंदी पत्रकारिता: विविध आयम’ नामक 1100 पृष्ठों के महग्रंथ का संपादन, 1976।

(4) निदेशक, हिंदुस्तान समाचार, 1974-77

(5) संपादकीय निदेशक, नेटजाल.काॅम (भारतीय भाषाओं का महापोर्टल)

सम्मान:

(1) हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पत्रकारिता के लिए इक्कीस हजार रूपये की एवं  सम्मान राशि, 1990.

(2) पुरस्कार मधुवन (भोपाल) द्वारा पत्रकारिता में ‘श्रेष्ठ कला आचार्य’ की उपाधि से सम्मानित, 1989.

(3) उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिंदी सेवा के लिए ‘पुरूषोत्तमदास टण्डन’ स्वर्ण पदक, 1988.

(4) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा’ ग्रंथ पर गोविंदवल्लभ पंत पुरस्कार, 1976.

(5) काबुल वि.वि. द्वारा अफगानिस्तान संबंधी शोधगं्रथ पर दस हजार रूपये की सम्मान राशि, 1972.

(6) इंडियन कल्चरल सोसायटी द्वारा ‘लाला लाजपतराय सम्मान’, 1992.

(7) मीडिया इंडिया सम्मान, नई दिल्ली, 1992.

(8) डाॅ. राममनोहर लोहिया सम्मान, कानपुर, 1990.

(9) प्रधानमंत्री द्वारा प्रदत्त रामधारीसिंह दिनकर शिखर सम्मान, 1992.

(10) छात्रकाल में राजनीतिशास्त्र, दर्शन और हिंदी में सर्वोच्च अंक पाने पर कई बार ‘स्पेशल मेरिट सर्टिफिकेट’

मृत्यु:

14 मार्च 2023, गुरुग्राम

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