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चार गुप्त बातें, जिनकी आपको चर्चा नहीं करनी चाहिए!

जीवन के ऐसे कई रहस्य हैं जो आज भी रहस्य ही हैं. कई सारे प्रश्न हर व्यक्ति के दिमाग में उठते हैं. मसलन, मनुष्य क्यों जन्म लेता है, उसकी मृत्यु क्यों होती है, उसका जन्म से पहले और मरने के बाद क्या होता है? लेकिन इनका सही जवाब इंसान अभी तक खोज नहीं पाया है.

इन सारे रहस्यों और प्रश्नों के बीच मनुष्य इस धरती पर जीवन-मृत्यु की एक सतत प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है. मनुष्य अपने जीवन को सार्थक और खुशहाल बनाये रखने का हरसंभव प्रयास करता रहता है. यहाँ हम बात चाणक्य द्वारा प्रदत, मनुष्य से जुड़ी कुछ आदतों और सुझावों की करेंगे जिन्हें अपना कर मनुष्य स्वंय के जीवन में गुणात्मक सुधार कर सकते हैं.

चाणक्य (See Wikipedia) एक महान शिक्षक, दार्शनिक, अर्थशास्त्री, न्यायिक और शाही सलाहकार और अर्थशास्त्री थे जिन्होंने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन के बहुत सारे पहलुओं के बारे में लिखा है. इनमें से कुछ-एक बातें आज के बदलते सन्दर्भ परिवेश में बेमानी हो चुकी हैं लेकिन अधिकतर बातें अभी उतनी ही व्यावहारिक और उपयोगी हैं जितनी वे उस समय थीं.

चाणक्य ने चाणक्य नीति में चार ऐसे काम बताएँ हैं जो कि एक व्यक्ति को अपने जीवन में कभी नहीं करने चाहिएं. यह ख़ास सुझाव, चाणक्य द्वारा रचित चाणक्य-नीति नामक ग्रंथ से उल्लिखित हैं जिसमें मनुष्य के लिए कुछ बहुत ही उपयोगी बातें कही गयी हैं.

धन-हानि या व्यापार में घाटे के बारे में चर्चा

चाणक्य नीति में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपने धन की हानि या व्यापार में हो रहे घाटे के बारे में चर्चा नहीं करनी चाहिए. जहां तक संभव हो सके तो इस बात को निजी स्तर पर ही रखें.

वजह

जब आप किसी को अपनी गरीबी या आर्थिक तंगी के बारे में बताते हैं अधिकतर लोग आपसे मुंह फेर लेते हैं. सब आपको झूठी तसल्ली देते हैं और मौका मिलने पर दूसरे लोगों के सामने आपका मजाक भी उड़ाते हैं. इसलिए अपनी गरीबी के बारें में केवल किसी खास या नजदीकी को बताएं जिससे आपको मदद की आशा हो.

गरीब कोई सम्मानजनक स्थान नहीं

चाणक्य के अनुसार, समाज में गरीब की कोई इज्जत नहीं है, इसलिए गरीबी को अपने तक सीमित रखें और इससे बाहर निकलने का प्रयास करते रहें, क्योकिं परिश्रम से भाग्य को बदला जा सकता है.

व्यक्तिगत समस्या

दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपनी निजी जिंदगी की समस्याओं को कभी भी बाहरी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए. इससे होगा यह कि वह आपकी समस्याओं को और बढ़ा देंगे और आपकी पीठ पीछे आपके ऊपर हँसेंगे भी. जिंदगी का कडवा सत्य यह भी है कि लोग दूसरे लोगों को दु:खी देख कर खुश होते हैं.

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पति-पत्नी के चरित्र के बारे में चर्चा

चाणक्य द्वारा इस बाबत कही गयी तीसरी बात यह है कि एक बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी पत्नी के चरित्र के बारे में किसी से कुछ भी चर्चा नहीं कहना चाहिए. इनमे कुछ ऐसी बातें भी हो सकती हैं जिन्हें आप दूसरे को नहीं बताना चाहते हों लेकिन एक बार चर्चा छिड़ जाने पर आप उन्हें भी कह दें. कुछ निजी बातें ऐसी भी होती है जिनके बारे में बताने से आपको भविष्य में गंभीर और दूरगामी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. यह बात स्त्री-पुरुष दोनों पर समान रूप से लागू होती हैं.

निम्न-स्तर के व्यक्ति द्वारा बेइज्जत होने की बात

चाणक्य की चौथी और सबसे महत्वपूर्ण बात कि कभी भी किसी व्यक्ति को यह ना बताएं कि किसी निम्न-स्तर के या समाज में बदनाम किसी आदमी ने आप की बेइज्जती की है या मजाक बनाया है. यदि आप यह बात दूसरों को बताएँगे तो हो सकता है वह आपका मजाक उड़ायें, जिससे आपकी गरिमा को ठेस पहुंच सकती है और आपका आत्मविश्वास डगमगा सकता है.

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