जाने कहानी साइकिल की!!

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बाइसइकिल यानी साइकिल किसी समय आवागमन का एक महत्वपूर्ण माध्यम था। आधुनिकता की दौड़ और तेज रफ्तार जिंदगी ने धीरे-धीरे साइकिल को उच्च तथा मध्यम वर्ग के लोगों से दूर कर दिया, जिसकी जगह तेज रफ्तार मोटर गाड़ियों ने ले ली।

हालांकि एक बड़े वर्ग, जिसमें निम्न वर्ग के गरीब लोग शामिल हैं, मैं अभी भी साइकिल परिवहन का एक लोकप्रिय माध्यम है। इन दिनों पर्यावरण तथा प्रदूषण को लेकर वैश्विक स्तर पर छिड़ी चर्चा के बीच साइकिल का महत्व एक बार फिर सामने आया है।

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वाहनों में इस्तेमाल होने वाले जैव ईंधन से होने वाले वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के मद्देनजर सही सोच वाले लोगों, जिनमें हर वर्ग के लोग शामिल हैं, ने पेट्रोल डीजल से चलने वाले वाहनों को त्याग कर साइकिल अपनाने पर विचार करना शुरू कर दिया है।

साइकिल चालन न केवल प्रदूषण कम करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान डालता है बल्कि स्वास्थ्य और फिटनैस में भी अपनी भूमिका को लेकर भी यह लोकप्रिय हो रहा है।

शहरों में तो साइक्लिंग क्लब तक बन गए हैं, जिनके सदस्यों को सुबह शाम रंग-बिरंगे हैल्मैट पहनकर सड़कों पर स्पोर्टी साइकिल चलाते देखा जा सकता है।

यहां तक की इस की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई शहरों में पार्कों में तथा गलियों व सड़कों के साथ-साथ साइकिल चालकों के लिए विशेष लेंस बनाई गई हैं।

साइकिल परिवहन का अब तक का सर्वाधिक सस्ता, सबसे भरोसेमंद माध्यम है तथा 1920 के दशक में बहुत से व्यापारियों ने इस्तेमाल के लिए इसे अपनाया था।

आज इस पोस्ट में हम जानेंगे साइकिल से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में :-

  • पहला बाइसाइकिल तथा 1818 का ‘बैरन डी ड्रेस’ का ‘ड्रेसिएन’। चालक को आगे बढ़ने के लिए जमीन पर अपने पांव से इसे धकेल ना पड़ता था।
  • 1839 में स्कॉटिश लोहार किर्कपैट्रिक मैकमिलन ने पैडलों तथा ब्रेक वाले पहले बाइसिकल का आविष्कार किया।
  • मैकमिलन की वेलोसिपीड में पैडल पिछले पहिए पर क्रैंक्स के साथ एक रोड़ के माध्यम से जुड़े थे। यह पहिए को धीरे-धीरे घूमाते थे।
  • 1861 में फ्रांसीसी पिता व बेटे पियरे तथा अर्नस्ट मिचौक्स ने पहली सफल बाइसिकल बनाने के लिए पैडलोंको सीधे आगे वाले पहिए के साथ जोड़ दिया और इसे बोनशेकर उपनाम दिया।
  • 1870 जेम्स स्टार्ले ने बोनशेकर में सुधार करके ऑर्डिनरी नाम दिया। एक विशाल अगले पहिए के कारण जरा से पैडल मारने पर ही काफी रफ्तार मिल जाती थी ।
  • 1874 में एच.जे.लॉसन ने चेन से चलने वाला दुनिया का पहला बाई साइकिल बनाया। उस में इसे ‘सेफ्टी बाय साइकिल ‘कहा जाता थ क्योंकि यह काफी ऊंचे का लंबे ऑर्डिनरी’ साइकिल से सुरक्षित था।
  • 1885 में स्टार्ले के भतीजे जॉन ने ‘रोवर सेफ्टी’ नामक बाइसिकल। बनाया 1890 में इसमें हवा भरे टायर शामिल किए गए और आधुनिक बाइसिकल का जन्म हुआ।
  • 1895 तक 40 लाख, अमरिकी साइकिल की सवारी कर रहे थे। बाकी दुनिया भी में साइकिल चलाने वालों की संख्या बढ़ती गई।

सारी दुनिया में जितने लोग साइकिल चलाते हैं, उनकी कुल संख्या से अधिक लोग आज चीन में साइकिल चलाते हैं।

पंजाब केसरी से साभार….।

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