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बेटे ने CM चन्नी को हराया, मां नहीं छोड़ेंगी सफाईकर्मी की नौकरी, आप देखकर रह जाएंगे दंग!

पंजाब में आम आदमी पार्टी ने एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। (आप) के विधान सभा सदस्य (एमएलए) लाभ सिंह उगोके ने भारी मतों से जीत हासिल की है आम आदमी पार्टी ने 117 सीटों में से 92 सीटें हासिल की हैं।

भदौर की आरक्षित सीट से लाभ सिंह उगोके के सामने चरणजीत सिंह चन्नी थे। पहले उगोके खुद एक मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान में काम करते थे। बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि या अनुभव के लाभ सिंह ने चन्नी को 37,558 वोटों के अंतर से हरा दिया।

जहाँ एक ओर लाभ सिंह उगोके ने निवर्तमान मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को हरा कर सभी को चौंका दिया है वहीँ दूसरी ओर उनकी मां के सफाईकर्मी की नौकरी न छोड़ेंने के बयान ने भी सभी को हैरान कर दिया है।

इस पोस्ट में हम जानेंगे कि क्यों लाभ सिंह उगोके की मां सफाईकर्मी की नौकरी नहीं छोड़ना चाहती :-

जीवन का एहम हिस्सा है “झाड़ू”

दरअसल लाभ सिंह की मां बलदेव कौर एक संविदा (contract) सफाई कर्मचारी हैं। वह बेटे के जीतने के एक दिन बाद ही काम पर चली गईं जिसे देखकर सहकर्मी हैरान रह गए। जब उनसे पूछा कि आप आज काम पर क्यों आई हैं, तो उन्होंने कहा, “सबने सोचा कि मैं अपने बेटे की जीत की ख़ुशी में कम से कम एक दिन तक तो काम पर नहीं आऊंगी, लेकिन मैंने साफ कह दिया कि मेरा बेटा विधायक बना है, मैं नहीं। मैं अभी भी एक संविदा सफाई कर्मचारी हूँ और मुझे अपनी नौकरी क्यों छोड़नी चाहिए?”

उन्होंने कहा, “हमारे परिवार ने हमेशा पैसा कमाने के लिए कड़ी मेहनत की है। मेरे बेटे के चुनाव जीतने के बावजूद, मैं स्कूल में स्वीपर के रूप में काम करना जारी रखूंगी।” आप उम्मीदवार के रूप में अपने बेटे की जीत से खुश बलदेव कौर ने कहा कि ‘झाड़ू’ मेरे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है।

“मैं जो कर रही हूँ, उसपर मुझे गर्व है। जब हमारा परिवार गुज़ारे के लिए संघर्ष कर रहा था, तब मेरी नौकरी ही आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत रही है” बलदेव पिछले 22 सालों से बरनाला ज़िले के अपने पैतृक गांव उगोके में स्कूल में सफाईकर्मी का काम कर रही हैं।

नवनिर्वाचित विधायक के पिता दर्शन सिंह, जो मजदूरी का काम करते थे, उन्होंने कहा कि परिवार अपनी जीवन शैली नहीं बदलेगा और पहले की तरह ही रहेगा। वह चाहते हैं कि उनका बेटा अपने परिवार के बजाय लोगों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करे।

ऐतिहासिक है ये जीत

इस जीत को इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पंजाब के तीन पूर्व मुख्यमंत्री अपने ‘गढ़’ से हार गए जिसमें पटियाला अर्बन में कैप्टन अमरिंदर, लाम्बी में प्रकाश सिंह बादल और भदौर एवं चमकौर साहिब में चरणजीत सिंह चन्नी को हार का मुंह देखना पड़ा।

अपने एक चुनावी भाषण में लाभ सिंह उगोके ने कहा था,

“1952 के चुनाव में भदौर सीट पर राजा निर्पाल सिंह और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के अर्जुन सिंह के बीच मुकाबला हुआ था। निर्पाल सिंह, एक राजा थे। महलों, कारों और भारी धन के मालिक थे। उनका अभियान भव्य था। दूसरी ओर भूमिहीन किसानों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले अर्जुन सिंह थे।

एक विनम्र परिवार से आए। बैलगाड़ियों पर प्रचार किया। भारी शक्ति प्रदर्शन के बावजूद, निर्पाल सिंह चुनाव हार गए और कॉमरेड अर्जुन सिंह प्रचंड बहुमत से जीत गए. इस बार भी ऐसा ही होगा।”

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