एक मंदिर जहाँ शिवजी पर चढ़ाई जाती हैं झाडू

0

भगवान शिवजी पर बेलपत्र और धतूरे का चढ़ावा तो आपने सुना होगा, लेकिन उत्तरप्रदेश के एक शिव मंदिर में भक्त उनकी आराधना झाड़ू चढ़ाकर करते हैं. मुरादाबाद जिले के बीहाजोई गांव के प्राचीन शिवपातालेश्वर मंदिर में श्रद्धालु अपने त्वचा संबंधी रोगों से छुटकारा पाने और मनोकामना पूर्ण करने के लिए झाड़ू चढ़ाते हैं. इस मंदिर में दर्शन के लिए भारी संख्या में भक्त सिर्फ मुरादाबाद जिले से ही नहीं बल्कि आस-पास के जिलोंऔर दूसरे प्रांतों से भी आते हैं.

मंदिर के एक पुजारी का कहना है कि यह मंदिर करीब 150 वर्ष पुराना है. इसमें झाड़ू चढ़ाने की रस्म प्राचीन काल से ही है. इस शिव मंदिर में कोई मूर्ति नहीं बल्कि एक शिवलिंगजिस पर श्रद्धालु झाडू अर्पित करते हैं.पुजारी ने बताया कि वैसे तो शिवजी पर झाडू चढ़ाने वाले भक्तों की भारी भीड़ रोज लगती है, लेकिन सोमवार को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. धारणा है कि इस मंदिर की चमत्कारी शक्तियों से त्वचा के रोगों से मुक्ति मिल जाती है. इस धारणा के पीछे एक दिलचस्प कहानी है.

इस गांव में भिखारीदास नाम का एक व्यापारी रहता था,जो गांव का सबसे धनी व्यक्ति था. वह त्वचा रोग से ग्रसित था।. उसके शरीर पर काले धब्बे पड़ गए थे, जिनसे उसे पीड़ा होती थी. एक दिन वह निकट के गांव के एक वैद्यउपचार कराने जा रहा था कि रास्ते में उसे जोर की प्यास लगी. तभी उसे एक आश्रम दिखाई पड़ा. जैसे ही भिखारीदास पानी पीने के लिए आश्रम के अंदर गया वैसे ही दुर्घटनावश आश्रम की सफाई कर रहे महंत के झाडू से उसके शरीर का स्पर्श हो गया. झाडू के स्पर्श होने के क्षण भर के अंदर ही भिखारीदास दर्द ठीक हो गया. जब भिखारीदास ने महंत से चमत्कार के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह भगवान शिव का प्रबल भक्त है.

 यह चमत्कार उन्हीं की वजह से हुआभिखारीदास ने महंत से कहा कि उसे ठीक करने के बदले में सोने की अशर्फियों से भरी थैली ले लें। महंत ने अशर्फी लेने से इंकार करते हुए कहा कि वास्तव में अगर वह कुछ लौटाना चाहते हैं तो आश्रम के स्थान पर शिव

मंदिर का निर्माण करवा दें।कुछ समय बाद भिखारीदास ने वहां पर शिव मंदिर का निर्माण करवा दिया। धीरे-धीरे मान्यता हो गई कि इस मंदिर में दर्शन कर झाडू चढ़ाने से त्वचा के रोगों से मुक्ति मिल जाती है। हालांकि इस मंदिर में ज्यादातर श्रद्धालु त्वचा संबंधी रोगों से छुटकारा पाने के लिए आते हैं, लेकिन संतान प्राप्ति व दूसरी तरह की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भी श्रद्धालु भारी संख्या में मंदिर में झाडू चढ़ाने आते हैं।

 

गुस्सा कम करने के आसान उपाय

0

वैज्ञानिकों के अनुसार गुस्सा करना अपनी भावना व्यक्त करने का माध्यम है, जैसे हम जब ज्यादा परेशान हो जाते हैं, या हमारे मन में कोई डर बैठ जाता है. या फिर हमें किसी चीज के खो जाने का डर होता है. जैसे हमारे अपने, हमारी इज़्ज़त, संपत्ति, या खुद की पहचान, और ख़ास कर तब, जब हमारे पास ऐसे हालत से निपटने के लिए कोई हल नजर नहीं आता.

उदाहरण के लिए:

हम किसी को कोई बात समझाना चाहते हैं, और वह व्यक्ति उस बात को समझने की बजाय आप से वाद-विवाद करने लगे, तो आप अपनी भावना को व्यक्त करने के लिए गुस्से का सहारा लेते हैं. या फिर हमें पता चलता है, कि हमारे अपनों को, कोई नुकसान पहुंचाना चाहता है पर हम कुछ कर नहीं पाते हैं, तो हमें खुद पर गुस्सा आता है. अगर आप अपने गुस्से को काबू में नहीं रख पाते, तो इससे आपका ही नुकसान है. आपका स्वास्थ्य खराब होता है. आपके मस्तिष्क को हानि पहुँचती है. आपका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है.

यहाँ तक, इसके अधिक प्रचार से दिमाग की नसें फट सकती है, और इंसान की मौत भी हो सकती है. हम गुस्से में अपना साधारण स्वभाव भूल जाते है, क्योंकि इसकी वजह से हमारे मस्तिष्क में हॉर्मोन्स के प्रभाव से दिमाग सुन्न हो जाता है. हमारे सोचने की क्षमता पर असर पड़ता है. हम ऐसा बुरा व्यव्हार करते हैं जिसका बाद में हमें पछतावा होता है.

क्रोध से हम सिर्फ अपना ही नहीं, हमारे अपनों की भी हानि करते हैं. हमारे अतिरिक्त गुस्से से वे भी परेशान हो जाते हैं. उन्हें हमारे कठोर जवाबों से दुःख और तकलीफ होती है, धीरे धीरे वह हमसे दूर होने लगते हैं. बाहर भी, क्रोधित इंसान के स्वभाव की वजह से, कोई उन्हें पसंद नहीं करता. क्रोध को नियंत्रण में लाने के लिए, पहले उसके होने वाले कारण को पहचानना जरूरी है.

आइये जाने गुस्से को काबू में करने के कुछ गुण:

1.बात करते वक़्त, अगर वाद-विवाद की संभावना दिखे तो खुद को तर्क से दूर रखिये.
2.गुस्से को शांत करने के लिए अच्छा गाना गायें या सुनें (जो आपको पसंद हो).
3.अच्छी चीज़ें सोचें, जो चीज़ें आपको ख़ुशी देती है.
4.क्रोध को कम करने के लिए बातचीत बंद करें, और खाने में जो चीज़ पसंद है, उसे स्वयं के लिए बनाना शुरू करें, तो कुछ ही समय में आप क्रोध को भूल जायेंगे.
5.योगा, हमारे शरीर और मन की संतुलन को ठीक रखने में हमारी मदद करता है। हर रोज़ योगा का और मैडिटेशन का प्रयास, क्रोध को नियंत्रण करने में बहुत हद तक मदद करता है.

अगर कुछ काम ना आये तो ज्ञानी पुरुषों की बात मानें और अकेले में “ॐ” स्वर का प्रयोग करें.

ये हैं बॉलीवुड के वो सितारे जिन्होंने तलाक के बाद नहीं की शादी

बॉलीवुड में हमारे काफी सारे पसंदीदा सितारे की परदे की जिंदगी के साथ हम उनकी करीबी लाइफ के बारे में भी सब कुछ जानना चाहते हैं। कई ऐसे सितारे हैं जिनकी पर्सनल लाइफ इतनी अच्छी नहीं है जितना कि हम सोचते हैं।कैरियर में अपनी ऊचाईयों तक पहुंचने के बाद बहुत से स्टार्स ने अपने आप को अपने साथी के साथ रिश्ते में बांध लेना ही सही समझा और उनका यह फैसला ठीक भी साबित हुआ है। तो वहीं कुछ ऐसे स्टार्स भी हैं जिनकी शादी तलाक पर आकर ही खत्म हुई। तो आइए जानते हैं बॉलीवुड के उन स्टार्स के बारे में जिन्होंने तलाक होने के बाद दोबारा शादी नहीं की।

ऋतिक रोशन

ऋतिक रोशन और सुजैन खान की शादी 17 साल तक चली। बॉलीवुड में इनके रिश्ते की मिसाल भी दी जाती थी लेकिन इन दोनों के अचानक तलाक की खबर ने सबको चौका दिया। इन दोनों की वजह सुजैन की अर्जुन रामपाल से नजदीकियां और ऋतिक का कंगना के साथ रिलेशनशिप इसकी वजह माना जाता है। तलाक के बाद इन दोनो ने दोबारा शादी नहीं की।

करिश्मा कपूर

करिश्मा कपूर ने पहले से तलाकशुदा दिल्ली के बिजनेसमैन संजय से शादी की थी। इन दोनों का रिश्ता भी ज्यादा देर नहीं चला और दोनों ने तलाक ले लिया। दो बच्चों की मां करिश्मा कपूर ने भी अभी शादी नहीं की।

अमृता सिंह

सैफ अली खान की पहली पत्नी अमृता सिंह ने 13 साल की शादी के बाद सैफ से तलाक ले लिया सैफ अली खान ने दोबारा शादी कर ली लेकिन अमृता अभी भी सिंगल है।

मनीषा कोइराला

अपने जमाने की फेमस हीरोइन मनीषा कोइराला ने 2010 में नेपाल के बिजनेसमैन से शादी कर ली थी. अचानक की दो साल बाद इन दोनो ने तलाक ले लिया. तलाके के बाद मनीषा ने दोबारा शादी नहीं की.

कल्कि कोचलिन

इस अभिनेत्री ने अपने पति निर्देशक अनुराग कश्यप को 2015 में तलाक दे दिया, और उसके बाद से अपने अभिनय के करियर पर ध्यान देना शुरू कर दिया.

पूजा भट्ट

इस अभिनेत्री की शादी मनीष माखीजा से हुई थी. 2014 में पूजा ने अपनी 11 साल की शादी ख़तम कर दी, और मनीष से तलाक ले लिया. वे अभी भी करीबी दोस्त है.

कोंकणा सेन

रणवीर शोरी के साथ अपने चौंकाने वाले तलाक के बाद, कोंकोना अब एक अकेली मां है।

Also Read:-

“पैड मैन” अक्षय के खुलासे पर स्तब्ध रह गईं महिलायें दर्शक

 

भारत के दस मुख्‍य पर्यटन केंद्र

0

भारत अपनी संस्‍कृति में विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए हमेशा से ही दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। जहां गोवा जैसे राज्‍य इसकी समुद्र तटीय सुंदरता के लिए जाने जाते हैं, वहीं केरल और कश्‍मीर प्राकृतिक सुंदरता के लिए। इसके अलावा कन्‍याकुमारी का तो एक अलग ही अध्‍यात्मिक आकर्षण है। राजस्‍थान भारत की ऐतिहासिक धरोहर से परिपूर्ण राज्‍य है तो ताज महल भारत की एक पहचान बन चुका है। पूरे भारत में फैली विविधता, सौन्‍दर्य और आकर्षण बरबस ही दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींच लेता है। आइये देखें कि भारत के मुख्‍य पर्यटन केंद्र कौन-कौन से हैं-

आगरा

ऐतिहासिक इमारत ताजमहल के कारण आगरा हमेशा से ही पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। राजनयिक सम्‍बन्‍धों के लिए भारत आने वाले मेहमान भी इसे देखने जरूर आते हैं। आगरा में ताजमहल के अलावा आगरा का किला, फतेहपुर सीकरी, अकबर का मकबरा, रामबाग और सिकंदर का किला दर्शनीय स्‍थलों में से हैं।

कश्‍मीर

अपनी जीवंत सुंदरता के लिए कश्‍मीर दुनिया भर में प्रसिद्ध है। कश्‍मीर के दर्शनीय स्‍थलों में से श्रीनगर, गुलमर्ग, डलझील, नागिन झील, परी महल और पहलगाम है। अपनी सुरम्‍य वादियों और पहाड़ों पर बसे गांवों के लिए यह पर्यटकों के बीच अलग ही स्‍थान रखता है।

गोवा

गोवा भारत का सबसे छोटा राज्‍य है जो कि समुद्री बीच के लिए जाना जाता है। यहां का सी-फूड, जल में खेले जाने वाले खेल इसे एक आनंद के स्‍थान के रूप में पहचान देते हैं। यहां स्थित अलोना का किला, गोवा म्‍यूजियम, चापोरा का किला अन्‍य पर्यटन आकर्षण हैं।

कन्‍याकुमारी

कन्‍याकुमारी को केप कोमोरिन के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के जल का मिलन होता है। यहां से दिखने वाला सूर्यास्‍त का दृश्‍य मनोरम होता है।

जयपुर और उदयपुर

राजस्‍थान में स्थित जयपुर और उदयपुर अपनी कलात्‍मक और वास्‍तु सुंदरता के लिए जाने जाते हैं। उदयपुर में स्थित लेक पैलेस दुनिया के सबसे सुंदर स्‍थानों में से एक हैं। जयपुर में ही हवामहल भी है जो वास्‍तुकला का उत्‍कृष्‍ट उदाहरण माना जाता है।

केरल

भारत के सर्वाधिक सम्‍पन्‍न और शिक्षित राज्‍यों में से एक केरल मंत्रमुग्‍ध कर देने वाली सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। यहां फैली हरी भरी सुंदरता और नदियों में बोटिंग का अपना अलग ही आनंद है।

दिल्‍ली

दिल्‍ली भारत का आर्थिक केंद्र होने के साथ ही देश की राजधानी भी है। यहां पर स्थित इंडिया गेट, राष्‍ट्रपति भवन, जामा मस्जिद और कुतुब मीनार को देखने के लिए पर्यटक वर्ष भर आते रहते हैं।

दार्जिलिंग

दार्जिलिंग को पहाड़ों की राजधानी कहा जाता है जो कि समुद्र तल से 2134 मीटर ऊपर स्थित है। यहां पर स्थित चाय के बागानों के लिए यह दुनिया भर में जाना जाता है।

मैसूर

मैसूर कर्नाटक की सांस्‍कृतिक राजधानी है जो अपने महलों के लिए जाना जाता है। यहां पर स्थित मैसूर का महल विश्‍व प्रसिद्ध है, इस महल को ‘अंबा विला’ के नाम से भी जाना जाता है। इस महल को देखने के लिए प्रतिवर्ष लगभग 2.7 मिलियन पर्यटक आते हैं।

अजंता एलोरा

महाराष्‍ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित, चट्टानों को काटकर बनायी गयी ये मूर्तियां बौद्ध धार्मिक कला का अद्भुत उदाहरण हैं। यहां पर पत्‍थरों की गुफाओं में बने मंदिर पर्यटकों को अपनी खूबसूरती से आश्‍चर्य चकित कर देते हैं।

यह भी पढ़ें :-

विश्व के सर्वाधिक दर्शनीय स्थल

दुनिया की सबसे छोटी सीईओ

0

यह एक सबसे छोटी सीईओ बच्ची की योग्यता के बारे में है. इस बच्ची ने विभिन्न प्रकार की वेबसाइटों को डिजाइन करना 6 वर्ष की आयु में शुरू कर दिया था, और 11 वर्ष की आयु तक उसने खुद की कंपनी बना ली थी. इसी तरह वह दुनिया की सबसे छोटी सीईओ बन गई. यह लड़की श्रीलक्ष्मी सुरेश एक मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा हुई थी. उसकी कंप्यूटर के साथ हस्तक्षेप करने की जिज्ञासा ने उसके माता-पिता को उसे कंप्यूटर सीखाने पर मजबूर कर दिया था. 3 साल की उम्र में उसने कंप्यूटर सीख लीया, और 6 साल की उम्र में वह अपनी पहली वेबसाइट डिजाइन कर सकती थी। उसे कई पुरस्कारों के साथ मान्यता मिली है और उसने 11 वर्ष की उम्र में दो कंपनियां TinyLogo और eDesign को शुरू करी है ताकि उसे दुनिया के सबसे छोटे सीईओ के रूप में पहचाना जा सके.

श्रीलक्ष्मी सुरेश का जन्म 1998 में केरल राज्य में कोझिकोड (कालीकट) में श्री सुरेश मेनन और श्रीमती विजू सुरेश की बेटी के रूप में हुआ था. 3 साल की उम्र में श्रीलक्ष्मी ने कंप्यूटर के साथ हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया और 4 साल की उम्र में डिजाइन करना शुरू कर दिया था. श्री ने 6 साल की उम्र में अपनी पहली वेबसाइट बना ली थी. यह लड़की Presentation Higher Secondary School नामक एक विद्यालय में जाती है जिसका उद्घाटन वर्ष 2007 में हुआ था.  इस स्कूल की एक उचित वेबसाइट नहीं है, श्रीलक्ष्मी ने अपने स्कूल में एक वेब पोर्टल तैयार करने की पहल की और बहुत ही अच्छे डिजाइन की एक वेबसाइट तैयार की.

श्रीलक्ष्मी के जुनून ने वर्ष 2006 तक दुनिया भर में अपनी व्यापक मान्यता प्राप्त कर ली थी। उन्हें 6 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के वेब डिजाइनर और 11 वर्ष की उम्र में सबसे छोटी सीईओ (कंपनियों की शुरुआत के लिए) हर्ली जॉर्डन जैसे कई युवाओं के साथ जो की “8 साल की आयु में World’s Youngest CEO” और अजय पुरी 3 वर्ष की उम्र में “World’s Youngest Web Designer” के रूप में माना जाता हैं। इस उपलब्धि को हासिल करने वाली श्री सबसे पहली नौजवान है, उसने लगभग 20 तरह के वेबसाइटों को डिजाइन किया है अपनी कंपनि TinyLogo और eDesign के तहत.

उन्हें महिला और बाल विकास मंत्रालय (भारत) द्वारा सम्मानित किया गया.

श्रीलक्ष्मी सुरेश को कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं:

  • The National Child Award for Exceptional Achievement in 2008
  • The Won the Golden Web Award (U.S.A)
  • The Sixty Plus Education Award (Canada),
  • The Feeblemind’s Award of Excellence (UK),
  • The Webmasters Ink Award (U.S.A.) and Penmarric Bronze Award (Canada).
  • The Global Internet Directories Gold Award (USA),
  • The WM8C Stamp of Excellence Award (USA),
  • The 37th Texa’s Web Award (USA)
  • The American Association of Webmasters Merit Award
  • The Thomas Sims Greves Award of Excellence (UK)
  • The Moms Global Award for inspirational Website 2006-07 (UK)
  • The ProFish-N-Sea Charters World Class Website Award (Brazil)
  • The Wadeshi Science Movement Excellence Award 2007 (India)                                                                                                                                                                    श्री लक्ष्मी की सफलता के विभिन्न कारक है जैसे कि स्व-अनुशासन, दृढ़ता, क्रिया और समर्पण. श्रीलक्ष्मी सुरेश अपने जीवन में उच्च ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए कई युवाओं के लिए आदर्श मॉडल है।                                                                                                                                                                 यहां है श्री लक्ष्मी की वेबसाइट:-  http://www.sreekutty.com/

विश्व के सर्वाधिक दर्शनीय स्थल

पर्यटन के शौकीन लोगों के लिए कुछ दर्शनीय स्थल जहाँ वे पनी छुट्टियों का आनंद ले सकते है. यहाँ विश्व भर के कुछ ऐसे पर्यटन स्थलों के बारे में बताया जा रहा है. जिनका भ्रमण करना आपके लिए एक अविस्मरनीय अनुभव होगा.

आइजल आफ स्काई(स्कॉटलैंड)


स्कॉटलैंड का क्लाउड आइलैंड अपने समुद्र तट, बड़े बड़े महलों तथा प्राग एतिहासिक स्थलों के चलते आपको अपने जादू के पाश में बांघ लेगा. यहाँ के नगरों तथा गावों में शानदार पबों और बारों में आप स्थानीय भोजन का आनंद ले सकते है. यहाँ का मूंगे के रंग वाला पानी, शानदार द्रिश्य्वलियों वाले पर्वत तथा आश्चर्यजनक लैंडस्केप इस क्षेत्र की ख़ास पहचान है.

अटाकामा डेजर्ट (चिली)


यदि आपको भारत में लेह-लदाख बहुत पसंद है तो विश्व के सर्वाधिक सूखे स्थल ऐटाकामा मरुस्थल का भ्रमण आपके लिए शानदार रहेगा. यहाँ चाहे कोई वनस्पति नही है और शहर भी बहुत कम दिखाई देते है परन्तु यहाँ प्रदुषण बिलकुल नही है.

यहाँ आप ल्ग्ज़ुरियस कैंप में ठहर सकते है. कुछ वर्षों के अंतराल पर इस क्षेत्र में वर्षा ऋतू आती है. यदि आप खुशकिस्मत है तो यहाँ मौजूद कुछ हरे-भरे खेतों में आप शानदार गुलाबी फूलों का नज़ारा देख सकते है.

ग्रेट ब्लू होल ( बेलिज़)


प्लेसैन्सिया ताड़ के वृक्षों वाला एक बीच रिसोर्ट है जो कैरेबियन तट पर स्थित है. यह विश्व की सर्वाधिक पसंद की जाने वाली हनीमून डेस्टिनेशन है. इसका निर्माण हिम युग के दौरान हुआ था.

ग्रेट ब्लू होल विश्व में सबसे बड़ा चक्रकार समुद्री छिद्र है. यदि आप इसमें गोता न लगाना चाहते हों तो भी इसे मिस न करें. एक चार्टर्ड हेलीकाप्टर किराए पर लें और आकाश से प्रकृति के इस आश्रय का नजारा ले.

फारेस्ट ऑफ़ वाइव्स (मेडागास्कर)


यहाँ स्थित सिंजी लाइमस्टोन से बनी आकृतियाँ प्राकृतिक विभिन्नता वाले वन्य जीवों की शरणस्थली है. यहाँ आपको जीव जन्तुओं की कई प्रजातियाँ देखने को मिलेंगी. आपको यह देखकर भी आश्चर्य होगा कि किस तरह तीखे, नुकीले नाइव्ज यानी चाकू वनस्पति के मध्य इतनी ख़ूबसूरती से अस्तित्वमान है.

यहाँ का नजारा अधिक तब मिलता है जब आपके साथ कोई प्रमाणिक गाइड हो. यह नुकीले चाकुओं वाला जंगल युनैस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया है. इसे अक्सर 8वा महाद्वीप भी कहा जाता है. यहाँ का भ्रमण पर्यटन प्रेमियों के लिए एक अविस्मर्णीय अनुभव सिद्ध होगा.

लोफोटेन आइलैंड (नॉर्वे)


लोफोटेन आइलैंड जाने की योजना बनाएं और वहां पर एल्पाइन का आनंद लें और आर्कटिक में सांस लेने का अनुभव संजो लें. इस काम के लिए आपको ध्रुवीय चक्र पर पांव रखने की ज़रूरत नही. प्राकृतिक भूमि तथा ढलवा चट्टानों के पीछे रंग-रश्मियाँ लोफोटेन द्वीप को यादगार बनाती है.

यहाँ पर नार्दर्न लाइट्स की आँखों को चौंधियां देने वाला लाइट शो बहुत ही यादगार है. आप यहाँ पर रोरबुएर (मछुआरों के पुराने मकान) में रह सकते है. यदि आपको स्कीइंग या सपोर्ट फिशिंग अच्छी नही लगती तो आप इस शानदार द्वीप का नज़ारा नोर्वेजीयन क्रूज द्वारा भी ले सकते है.

मोआब (उटाह)


यहाँ स्थित ग्रैंड कैनयन 6 मिलियन वर्ष पुराना है जो आपके दिल को अपने जादू में बाँध लेगा. यहाँ की शानदार चट्टानों प्रकृति का एक अदभुत नजारा पेश करती है. यहाँ के अपने सफ़र को यादगार बनाने के लिए आप काईबाब ट्रेल से सेडार रिज तक का भ्रमण कर सकते है.

कैपाडोसिया (तुर्की)

इस स्थान की अति अर्थातवादी लैंडस्केप तुर्की के एनाटोलियन क्षेत्र में एक भौगोलिक आशर्य की तरह है. यहाँ स्थित भूमिगत शहर तथा घरों के ऊपर शानदार चिमनियाँ आपको फ्लिंट्स्टोन की याद दिला देगी.

यहाँ पर आप 21 वीं शताब्दी के केव यानी गुफा होटल में रहने का आनंद ले सकते है या सुबह के समय हॉट एयर बैलून की सवारी के माध्यम से कैपाडोसियान का विहंगम दृश्य अपनी यादों में संजो सकते है.

75 का हुआ हावड़ा ब्रिज

0

‘ गेटवे ऑफ़ कोलकाता’ के नाम से मशहूर हावड़ा ब्रिज को रबिन्द्र नाथ टैगोर के नाम रबिन्द्र सेतु कहा जाता है. देश विदेश के पर्यटकों के अलावा यह मशहूर फिल्मकारों को भी लुभाता रहा है. हाल ही में ब्रिज के 75 साल पूरे होने के मौके पर उसे रंग बिरंगी रौशनी से सजाया गया.वर्ष 1937 से 1942 के बीच बने इस ब्रिज को आम लगों के लिए 3 फरवरी, 1943 को खोला गया था लेकिन जापानी सेना की बमबारी के डर से उस दिन कोई बड़ा समारोह आयोजित नहीं किया गया था.

14 जून,1965 को इस ब्रिज का नाम बदलकर रबिन्द्र सेतु कर दिया गया था. 18वीं सदी में हुगली नदी पार करने के लिए कोई ब्रिज नहीं था. तब नावें ही नदी पार करने का एक मात्र जरिया था. बंगाल सरकार ने 1862 में ईस्ट इंडिया रेलवे कम्पनी इंजिनियर जार्ज टर्नबुल को हुगली नदी पर ब्रिज बनाने की संभावनाओं को पता लगाने का काम सौंपा था. वर्ष 1874 में 22 लाख रूपए की लागत से नदी पर पीपे का पुल बनाया गया जिसकी लम्बाई 1528 फुट और चौड़ाई 62 फुट थी.

वर्ष 1906 में हावड़ा स्टेशन बनने के बाद धीरे धीरे ट्रैफिक और लोगों की आवाजाही बढने पर इस पुल की जगह एक फ्लोटिंग ब्रिज बनाने का फ़ैसला हुआ लेकिन तब तक पहला विश्वयुद्ध शुरू हो गया था. नतीजतन काम ठप्प हो गया. वर्ष 1922 में न्यू हावड़ा ब्रिज कमीशन का गठन करने के कुछ वर्ष बाद इसके लिए निविदाएँ आमंत्रित की गई. बाद में इसके निर्माण का ज़िम्मा ब्रेथवेट, बर्न एंड जोसेफ कंस्ट्रक्शन कम्पनी को सौंपा गया.

इस कैंटरलीवर पुल को बनाने में 26 हज़ार 500 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया. इसमें से 23 हजार 500 टन स्टील की सप्लाई टाटा स्टील ने की थी. बन कर तैयार होने के बाद यह दुनिया में अपनी तरह का तीसरा सबसे लंबा पुल था. पूरा पुल महज नदी के दोनों किनारों पर बने 280 फुट ऊँचे दो पायों पर टिका है. 2150 फुट लंबा यह पुल इंजीनियरिंग का एक नायाब नमूना है. इसके दोनों पायों के बीच की दूरी 1500 फुट है.

इसकी खासियत है कि इसके निर्माण में स्टील की प्लेटों को जोड़ने के लिए नट बोल्ट की बजाय धातु की बनी किलों यानी रिवेट्स का इस्तेमाल किया गया.अब इससे रोजाना लगभग सवा लाख वाहन और 5 लाख से ज्यादा पैदल यात्री गुजरते है. ब्रिज बनने के बाद इस पर पहली बार एक ट्रेन गुजरी थी परन्तु वर्ष 1993 में ट्रैफिक बड जाने के बाद  ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी गई.द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापानी सेना ने इसे नष्ट करने के लिए भारी बमबारी की लेकिन संयोग से इसे कोई नुक्सान नही पहुंचा.

कोल्कता पोर्ट ट्रस्ट इस पुल कि देखरेख करने के साथ ही नियमित रूप से मुरम्मत भी करता है. इसके अलावा समय समय पर ब्रिज की स्थिति का पता लगाने के लिए विभिन्न शोध संस्थानों की ओर से अध्ययन भी कराए जाते है.

 

हमारे दिमाग में छुपा है सच्ची दोस्ती का राज

0

शोध मैं वैज्ञानिकों को पता चला है कि मित्रों के दिमाग की गतिविधियां अनजान लोगों की तुलना में अधिक समान होती है. विशेषकर दिमाग के उन हिस्सों की गतिविधि एक जैसी थी जो ध्यान केन्द्रण, भावनाओं तथा भाषा से जुड़े थे.न्यू हेम्पशायर  के डार्टमाउथ कॉलेज के वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए 279 ग्रेजुएट छात्रों की दोस्ती तथा सामाजिक संबंधों का अध्ययन किया. उन्होंने उनके सामाजिक संबंधों का अध्ययन किया.उन्होंने उनके सामाजिक संबंधों के बारे में जाना. उनमे से 42 छात्रों को राजनीति , विज्ञानं, हास्य, संगीत आदि विविध विषयों से जुड़े वीडियो दिखाते हुए रक्त प्रवाह के आधार पर दिमागी गतिविधि को मापने वाले ‘फंक्शनल एम.आर.आई.’ स्कैनर से उनके मस्तिष्क की गतिविधियों पर नज़र रखी गई.

उन छात्रों के मस्तिष्क में हुए ‘न्यूरल रिस्पांस’ से पता चला कि उनमे से मित्रों की दिमागी गतिविधियां काफी हद तक एक समान थी जबकि अनजान लोगों की दिमागी गतिविधियां काफी अलग थी. एक समान गतिविधियों को दिमाग के विभिन्न हिस्सों में पाया गया जिनमे भावनात्मक प्रतिक्रिया, ध्यान केंद्रण से लेकर उच्च स्तर के तर्क-वितर्क से सम्बंधित दिमाग के हिस्से विशेष रूप से शामिल थे. वैज्ञानिकों को यह भी पता चला है कि फंक्शनल एम.आर.आई के नतीजों में समानता के आधार पर केवल दो लोगों के मित्र होने का ही पता नहीं लगाया जा सकता है, बल्कि यह भी बताया जा सकता है कि सामाजिक स्तर पर वे एक दुसरे से कितने जुदा है.

एक वैज्ञानिक थालिया व्हिट्ले बताती है,” इंसान एक सामाजिक प्राणी है जिनकी जिंदगियां अन्य सभी से जुडी रहती है. अगर हम समझना चाहते है कि इंसानी मस्तिष्क किस तरह से काम करता है तो हमें यह भी समझना होगा कि हमारे मस्तिष्क जोड़ों में किस तरह से काम करते है अर्थात किस तरह से वे एक दुसरे को आकार देते है”इससे पहले वैज्ञानिकों की इसी टीम ने पता लगाया था कि किसी परिचित को देखते ही दिमाग हमें बताता है कि वे कितने महत्वपूर्ण या प्रभावशाली है तथा हमारी सामाजिक मण्डली में उनकी क्या हैसियत है.

आगे यह टीम पता लगाना चाहती है कि दुनिया को एक जैसी नज़र से देखने वाले क्या स्वाभाविक या कुदरती तौर पर एक – दुसरे की और खींचे चले जाते है ? वे यह भी जानेंगे कि क्या एक दुसरे से अपने अनुभव साँझा करने के बाद मित्रों में ज्यादा समानताएं दिखने लगती है ?

यह भी पढ़ें-

अजीबोगरीब – इस लड़की को लगातार सात बार काट चुके हैं सांप

0

आज के युग में यह यकीन करना मुश्किल हो जाता है लेकिन कोई विश्वास करे या नहीं यह बिलकुल सच है कि बी.बी.एन. कालेज चकमोह में बी.ए. द्वितीय वर्ष में पढ़ने वाली प्रियंका को पिछले साल अप्रैल माह से लेकर बीते वीरवार तक अर्थात 6 माह में 7 बार सांप दंश का शिकार होना पड़ा है।

अप्रैल में काटा पहली बार

जी हां, सर्पदंश की पीड़िता प्रियंका व उसकी मौसी गायत्री देवी ने बताया कि प्रियंका को पिछले साल यानि 2017 में अप्रैल माह में सांप ने काटा. इस पर उसके परिवार ने हमीरपुर जिला के अंतर्गत बिझड़ी विकास खंड की पंचायत दलचेहड़ा, वाहल अर्जुन गांव के निवासी बालक राम को फोन किया। बालक राम ने फोन पर ही प्रियंका के शरीर में फैला सर्पविष तांत्रिक विद्या से निकाल दिया।

तूरकाल गाँव की रहने वाली है प्रियंका

प्रियंका पुत्री बलबीर सिंह निवासी तूरकाल पी.ओ. बुधान तहसील बंगाणा जिला ऊना की रहने वाली है तथा वर्तमान में वह अपनी मौसी गायत्री देवी के घर झबोला में रहती है तथा यहीं से बाबा बालक नाथ डिग्री कालेज चकमोह में बी.ए. द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही है।

स्कूल वाली गली में घेरा था 4 सांपों ने

सर्पदंश की सबसे ताजा घटना की जानकारी देते हुए प्रियंका ने बताया कि बीते 5 अक्तूबर को वह चकमोह कालेज से मौसी के घर झबोला आ रही थी। जब वह तलाई में पहुंचकर मौसी को दवाई लाने सी.एच.सी. अस्पताल गई तो अस्पताल के पास स्कूल वाली गली में उसको 4 सांपों ने घेर लिया। जब उसने भागने की कोशिश की तो 2 सांपों ने उसे काट लिया। सर्पदंश के साथ ही वह बस में घर के लिए बैठी तथा झबोला में उतर गई लेकिन उसके बाद उसे कुछ पता नहीं चला।

गाड़ी चालक ने पहुँचाया था तांत्रिक के पास

जब झबोला सहकारी सभा के पास सड़क पर कुछ महिलाएं एकत्रित थीं तो वहां से कार (एच.पी. 01बी-0456) लेकर गुजर रहे प्रदीप उर्फ  लक्की ने गाड़ी रोकी और प्रियंका से पूछा तो उसने धीरे से बताया कि उसे सांप ने काटा है। प्रियंका की बात सुनकर प्रदीप उसे सीधे सर्वविष तांत्रिक विद्या प्राप्त बालक राम निवासी वाहल अर्जुन के पास ले गया तथा उसकी मौसी गायत्री को घटना की जानकारी दी। प्रदीप ने बताया कि जब उसने प्रियंका को देखा तो उसके मुंह से सफेद झाग निकल रहा था। अब प्रियंका बिलकुल ठीक है और उसका सारा विष निकल गया है।

74 सर्पदंश पीड़ितों का विष निकाल चुके हैं बालकराम

उधर, इस बारे बालक राम से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि उसने वर्षों पूर्व सर्वविष अर्थात किसी भी जीव का विष निकालने की सिद्धि की हुई है तथा अकेले इस साल ही 5 अक्तूबर तक फोन और सीधे पीड़ित को सामने बिठाकर 74 सर्पदंश पीड़ितों का विष निकाल चुके हैं। उन्होंने बताया कि पी.जी.आई. चंडीगढ़ में दाखिल मरीजों का भी फोन पर सर्पविष उतारा है।

Also Read:-

दिल चुरा लेंगे ये दिल जैसे आकर वाले स्थान

कैमरे ने बदली कूड़ा बीनने वाले लड़के की ज़िन्दगी

 

दिल चुरा लेंगे ये दिल जैसे आकर वाले स्थान

0

दुनिया के उन सथानों की सैर करें जहां प्रकृति ने सबसे ज्यादा प्यार बरसाया है. ये कुछ ऐसे ख़ास दिल को छु लेने वाले स्थान है जिन्हें प्रकृति ने दिल जैसा आकार दे रखा है.

ग्लासेन्सुनजाक टापू (क्रोएशिया)

‘आईलैंड ऑफ लव’ तथा ‘लवर्स आइलैंड’ के नाम से मशहूर यह टापू प्राकृतिक रूप से दिल के खूबसूरत आकार है. एड्रियाटिक सागर में पासमन चैनल में स्थित यह टापू 2009 में चर्चा में आया था. हालांकि, इस टापू के दिल के आकार को निहारने का आनंद आकाश से ही लिया जा सकता है. टापू पर पर्यटकों के रहने आदि के लिए कोई विशेष बंदोबस्त भी नही है.

ब्लू होल(गुआम)

इस स्थान का आनंद लेने के लिए आपको गोताखोरी करनी पड़ेगी. हालांकि, इस स्थान को देखने के लिए गोताखोरी में महारत होना ज़रूरी नहीं है. इलाके में पर्यटकों के लिए कई गोताखोरी स्कूल है जहां के माहिर गोताखोर पर्यटकों को दिल के आकार के इस विशाल छिद्र तक सुरक्षित ले जाते है.चूना पत्थरों के बीच दिल के आकार का यह विशाल छिद्र है. इससे होकर नीचे मौजूद मूंगा चट्टानों तक रास्ता जाता है. यहाँ तरह तरह की मूंगा, मछलियों तथा अन्य सुंदर समुद्री जीवों को देखा जा सकता है.

विल्सन स्टंप (याकूशिमा, जापान)

कुछ लोगों को यह स्थान परिकथाओं जैसा प्रतीत होता है. जादुई अहसास वाला यह स्थान अनेक प्राकृतिक नजारों से भरपूर है. हालांकि, मोहब्बत में डूबे रहने वालों के लिए यहाँ का विलसन स्टम्प ही सबसे अधिक आकर्षित करता है. यह एक गिरे हुए सूगी वृक्ष की विशालका्य जड़ है जिसने दिल का आकार ले लियाहै. 44 मीटर ऊँचा यह वृक्ष करीब 400 वर्ष पूर्व गिरा था. इस शानदार स्थान तक पहुँचने में होने वाली थकान इसे देखते ही गायब हो जाती है.

हार्ट रीफ (ऑस्ट्रेलिया)

गोताखोरी, तैराकी तथा पानी के नीचे की दुनिया में रुचि रखने वालों के लिए यह एक अहम स्थान है. ग्रेट बैरियर रीफ जैसा नजारा कुदरत कहीं-कहीं ही दिखाती है. इनमे से एक मूंगा चटटान आश्चर्यजनक रूप से हुबहू दिल के आकार की है.मूंगा ने इसमें एकदम दिल का आकार बनाया है जिसके बीच शार्क,मंटा रे तथा हर रंग की मछलियों तैरती है. आमतौर पर इस चटटान को समुद्री जहाज में सवार होकर आकाश से निहारा जाता है. इस टूर के दौरान पर्यटकों को विश्व के सबसे खूबसूरत समुद्र तटो में से एक व्हाईट हैवन बीच तथा हार्डी लैगून की सैर भी करवाई जाती है.

हार्ट रॉक (ओशिमागुन, जापान)

पत्थर से बनी इस रोमांटिक आकृति को बसंत, सर्दियों तथा पतझड के मौसम में निम्न ज्वार के वक्त दिन में कुछ समय के दौरान ही देखा जा सकता है.जापान के कागोशिमा के पूर्वी तातसूगोचो तट पर स्थित पत्थरों के बीच दिल का सुंदर आकार बना हुआ है. अपनी अनूठी आकृति के कारण यह स्थान प्यार करने वालों के बीच पवित्र स्थान जैसी अहमियत हासिल कर चूका है. कहा जाता है कि जो भी इसे देख लेता है प्यार में उसका भाग्य चमक उठता है.

अनफि देल मर (स्पेन)

 

जो लोग अपने बच्चों के साथ वैलेंटाइन्स डे मनाना चाहते है उनके लिए यह स्थान एकदम उपयुक्त है. स्पेन में ग्रैन कनेरिया के दक्षिण में स्थित एन्फी देल मार एक खूबसूरत तट है, जहाँ की महीन रेत तथा शांत पानी किसी को भी तरोताजा कर देते है. यहाँ दिल के आकार का एक छोटा टापू है जहाँ बच्चों के साथ सैर के लिए सुंदर बगीचे भी बने है.

वाटकिंस ग्लेन स्टेट पार्क (अमेरिका)

न्यूयॉर्क राज्य में स्थित इस पार्क में प्यार में गिरफ्त लोगों के लिए एक आश्चर्य है- एक छोटा प्राकृतिक रूप से बना दिल के आकार का तलाब, जो इस स्थान पर मौजूद 19 जलप्रपातों के आकर्षण में चार चाँद लगाता है. इस स्थान पर अपने साथी के साथ स्नान किसी के लिए भी यादगार बन सकता है.