जब इन 8 जोड़ों ने की अजीबों -गरीब तरीके से शादी

आजकल लोग अपनी शादी को ख़ास बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ते, और इतना ही नहीं वो अपने विवाह को ऐसे-ऐसे अजीब तरीकों से करते हैं कि कोई रिकॉर्ड बन जाता है और कोई ख़बरों में छा जाता है। वैसे तो खबरों में छाना आजकल एक आम सी बात हो गई हैं। आजकल सोशल मीडिया पर लोग कुछ भी डाल दें तो उस खबर को फैलने में ज्यादा समय नहीं लगता। तो आइए जानते है कुछ ऐसे लोगों की अनोखी शादियों के बारे में:

दुल्हन ने पहनी 200 मीटर लम्बी ड्रेस:

चीन की इस दुल्हन ने तो अपने विवाह में 200 मीटर लम्बी ड्रेस पहन कर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज़ करवा लिया है, लेकिन इस विवाह में आए मेहमानों को इनकी ड्रेस खोलने में करीब 3 घंटे लग गए। मगर बात जो भी है दुल्हन ने ऐसी अनोखी ड्रेस पहनकर अपने विवाह को ख़ास बना ही लिया।

पानी के अंदर शादी:

महाराष्ट्र के निखिल पवार ने स्लोवाकिया की युनीका पोंगरान संग विवाह कर देश की पहली अंडरवाटर शादी कर डाली।  दरअसल निखिल पवार, कोवालम में  डाइविंग इंस्ट्रक्टर हैं और इनकी मुलाकात युनीका से यहीं पर हुई थी। निखिल ने युनीका को प्रोपोज भी पानी के अंदर ही किया था और अब विवाह भी पानी के अंदर ही किया।

400 फीट की ऊंचाई पर शादी:

कैलिफ़ोर्निया के रहने वाले इस प्रेमी जोड़े ने तो 400 फीट की ऊंचाई पर जा के शादी की। विवाह के साथ – साथ फोटो खिंचवाने और जश्न बनाने में भी कोई कमी नही छोड़ी। दरअसल रयान जेन्क्स और किमबर्ले ने पहाड़ियों के ऊपर जाल बंधवाकर अपने विवाह को पूरी रस्मों के साथ किया।

हवा में लटक कर शादी:

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक ऐसा विवाह हुआ जो किसी ने सोचा तक नहीं होगा । 600 फुट से भी ज्यादा गहरी खाई के ऊपर हवा में लटकते हुए यहाँ एक जोड़े ने विवाह किया। यह जानकर आपको हैरानी  होगी लेकिन जयदीप जाधव और रेशमा पाटील नाम के जोड़े ने अनोखे अंदाज में विवाह रचाया। आपको बता दें कि जयदीप “पर्वतारोही“ है।

जयदीप और रेशमा का विवाह उनके माता-पिता द्वारा ही तय किया गया था और यह अनोखा विवाह  कोल्हापुर के विशालगढ़ और पनहला की 3000 फुट ऊंची पहाड़ियों के बीच खाई के ऊपर आसमान में सम्पन्न हुआ । जहां पंडित भी हवा में झूलते हुए शादी के मंत्र पढ़ रहे थे। सात फेरों को छोड़कर सभी रीतियां ऊपर हवा में ही हुई। दोनों ने एक-दूसरे के गले में वरमाला डाली और जयदीप ने हवा में लटकते हुए ही रेशमा के गले में मंगलसूत्र पहनाया। उस समय हल्की बारिश की बूंदा-बांदी ने इस विवाह में एक अलग ही माहोल बना दिया।

Tightrope पर शादी:

जर्मन के इस जोड़े ने तो विवाह को एक एडवेंचर समझ कर अपनी जान का जोखिम लेकर एक रस्सी पर बाइक चलवाई और उस बाइक पर रस्सी की मदद से दोनों लटक गए और अपने विवाह की सभी रस्में निभाई। इनके विवाह की फ़ोटोज़ देखकर तो कोई भी डर सकता हैं । मतलब जिनके विवाह की फ़ोटोज़ इतनी खतरनाक हैं तो इनका विवाह कितनी कठिनाइयों से हुआ होगा। इन्होंने तो अपने विवाह  को ख़ास बनाने के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया।

साईकिल पर घूम–घूम कर की शादी:

रशिया के इस कपल को साईकिल चलाना इतना पसंद हैं कि इन्होंने अपनी शादी जैसे खुशनुमा लम्हे को एन्जॉय करने के लिए साईकिल को चुना। दरअसल इन्होंने  साईकिल से पूरे शहर में घूम घूम कर शादी रचाई।

शार्क टैंक के अंदर शादी:

न्यूयॉर्क के रहने वाले April Pignataro और Michael Curry को तो अपने विवाह को ख़ास बनाने का कुछ ज्यादा ही शौक था कि इन्होंने अपनी जान तक की परवाह भी नहीं की और  बारह हज़ार गैलन शार्क टैंक के अंदर ही विवाह किया।

99,999 गुलाबों से गाड़ियों को सजाकर किया हैरान:

चीन के इन व्यक्ति ने तो अपनी पत्नी को सरप्राइज देने के लिए अपनी एक महीने की सैलरी से 99,999 गुलाब खरीद डाले और विवाह में गयी सभी गाड़ियों को पूरा गुलाब से ढक डाला। अब कुछ भी हो लेकिन इन्होंने अपने विवाह को खुशबु से महका ही लिया।

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दुनिया की सबसे रोमांटिक जगह, टनल ऑफ़ लव!

आज हम आपको दिखाते हैं एक ऐसी जगह की झलक जिसको देखने के बाद हर कपल वहां जाने की सोचेगा. यह जगह कहलाती है टनल ऑफ़ लव. यह टनल Ukraine के शहर Klevan से 7 किलोमीटर आगे स्थित है। यह 3 किलोमीटर का एक प्राइवेट रेलवे ट्रैक है जो की पेड़ो से इस तरीके से ढका हुआ है कि यह एक टनल लगता है।

टनल ऑफ़ लव लकड़ी के काम के लिए एक औद्योगिक ट्रैक है। रेलवे के निर्माण के दौरान, सैन्य हार्डवेयर के परिवहन को छिपाने के लिए ट्रैक के दोनों किनारों पर पेड़ों को जानबूझ कर लगाया गया था। पिछले कई सालों से, यहां से ट्रेनें फैक्ट्री को लकड़ी देने के उद्देश्य से गुजर रही हैं जो पश्चिम यूरोपीय बाजार के लिए प्लाईवुड का उत्पादन करती है। यह रेलवे ट्रैक 5 किलोमीटर लम्बा है और हरी भरी  मेहराब और पेड़ों से घिरा हुआ है। यह ट्रैक एक फायर बोर्ड फैक्ट्री का है। एक ट्रेन दिन में 3 बार उस फैक्ट्री को वुड सप्लाई करती है, बाकि टाइम ये ट्रैक कपल्स और नेचर लविंग लोगो के काम आता है।

पेड़ों की यह प्रकृति ट्रैक के चारों ओर स्वतंत्र रूप से उगाई गई है. कुछ साल पहले फैक्ट्री वालों ने पेड़ों को काटने की कोशिश की थी ताकि ट्रैन आराम से उस ट्रैक से गुज़र सके पर लोगों के मना करने पर 2013 के बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है ।यह सुरंग जोड़ों और नवविवाहितों के बीच लंबे टहलने और फोटोशूट के लिए लोकप्रिय है। सुरंग का उपयोग उन जोड़ों द्वारा भी किया जाता है जो अपनी इच्छाएं पूरी करना चाहते हैं।

टनल ऑफ़ लव साल में 3 बार अपना रंग बदलती है। जब बसंत आता है टनल ऑफ़ लव पूरी हरी हो जाती है तब ये जगह जन्नत नज़र आती है। गर्मियों में ये टनल हल्की भूरी होजाती है। सर्दिया आते ही ये टनल सफ़ेद बर्फ की चादर ओढ़ लती है। कपल्स में लोकप्रिय होने के कारण इसे Tunnel of Love कहा जाता है। कपल्स यहाँ आ कर रोमांटिक फोटो खिचवाना पसंद करते है। कहा जाता है यहाँ जो भी कपल इस टनल से गुज़रता है उसकी मांगी गयी हर विश जरुर पूरी होती है।

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The world’s most romantic place, Tunnel of Love!

“मृत सागर” को इसलिए मृत सागर कहा जाता है! अदभुत!

इज़राइल के एक समुद्र को मृत सागर (dead sea) के नाम से जाना जाता है। क्या आप जानते है इस समुद्र को मृत सागर ही क्यों कहा जाता है। आइए जानतें है इस से जुड़े कुछ रहस्य: यह समुद्र पृथ्वी की सतह से करीब 1375 फुट या 420 मीटर गहरा और समुद्री सतह से करीब 2400 फुट नीचे है। यह अपने उच्च घनत्व के लिए जाना जाता है। इस समुद्र की खास बात यह है कि यहाँ कोई डूब नहीं सकता। इंसान यहां बिना किसी डर के आसानी से तैर सकता है।

दुनियाभर के समुद्रों का पानी खारा या नमकीन होता है। इसमें नदियों के पानी की तुलना में समुद्र के नमकीन पानी का घनत्व यानी डेंसिटी बढ़ जाती है। आम पानी की तुलना में इस के पानी में 20 गुना ज़्यादा ब्रोमिन, 50 गुना ज़्यादा मैग्नीशियम और 10 गुना ज़्यादा आयोडिन होता है। इस वजह से न तो यह पानी पीने लायक होता है, न इसमें मौजूद नमक का उपयोग किया जा सकता है। इस समुद्र में नमक की सघनता ज्यादा होने की वजह से जल में रहने वाले जीव भी जीवित नहीं रह पाते। इसीलिए, इस समुद्र को मृत सागर कहा जाता है।

मृत सागर इज़रायल और जॉर्डन के बीच स्थित है। यह समुद्र बहुत कम जगह में फैला हुआ है। यह अरबी झील के रूप में जाना जाता है। यह हमेशा से ही विदेशी सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र रहा है। इस सागर में जॉर्डन नदी और अन्य छोटी छोटी नदियाँ आकर मिलती हैं। इसकी खूबी और उसके आसपास फैले सौंदर्य की वजह से इसे 2007 में ‘विश्व के सात अजूबों में चुनी गई 28 जगहों की सूची में शामिल किया गया था। इस समुद्र के पास अनेक पिकनिक स्पॉट और होटल बने हुए हैं। यहाँ हर समय लोगों की भीड़ लगी रहती है।

छुट्टियों और मौज-मस्ती के अन्य मौकों पर लोग इस समुद्र में तैराकी का लुत्फ उठाते हैं। लोग इसके काले कीचड़ को अपने शरीर और चेहरे पर लगाते हैं, क्युंकि इस समुद्र का कीचड़ त्वचा को निखारता है और यह कीचड़ बहुत सी बीमारियों को भी ख़त्म करता है। हालांकि इस समुद्र में नदियों और वर्षा से ताज़ा पानी आता रहता है, लेकिन यहां का वातावरण और हवा बहुत खुश्क है। यहां का तापमान पूरा साल गर्म रहता है। यहां का वाष्पीकरण तेज होने के कारण इसका पानी हर साल एक मीटर से अधिक कम होता जा रहा है।

चाहे इस सागर में कोई जीव जीवित नहीं रह पाता, पर इसका पानी बहुत सी औषधीय गुणों से भरपूर है। इस पानी को लाइलाज रोगों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। वैज्ञानिकों ने भी यह साबित कर दिया है कि यहां मिलने वाला नमक और खनिज लवण हमारे लिए मूल्यवान हो सकते हैं। इसी कारण आज मृत सागर, एशिया के मेडिकल टूरिज्म के रूप में आकर्षण का केन्द्र बनता जा रहा है।

इस के उत्तरी-पश्चिमी भाग में पर्यटन और स्वास्थ्य केन्द्र खोले गए हैं। मृत सागर के पानी की काली मिट्टी और नमक से यहां विभिन्न स्पा और मड-थेरेपी के जरिये इलाज भी किया जाता है। इस सागर के जल में ब्रोमिन, मैग्नीशियम तथा आयोडिन ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। ब्रोमीन धमनियों को शांत करता है, मैग्नीशियम त्वचा की एलर्जी से लड़ता है। जबकि आयोडिन कई ग्रंथियों की क्रियाशीलता को बढ़ाता है।

सौन्दर्य और स्वास्थ्य के लिए मृत सागर के गुणों की सिद्धि की वजह से ही कई प्रसिद्ध कंपनियाँ मृत सागर से ली गईं चीज़ों पर आधारित सौन्दर्य प्रसाधन की सामग्री बनाती हैं। इसके गर्म सल्फ़र और कीचड़ कई बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका निभाते है, ख़ासकर आर्थराइटिस और जोड़ों से संबंधित बीमारियों के इलाज में इनका योगदान अधिक है।

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आलू के बगीचे में दिखी एक अजीब चीज़ जिसे देख डर गई महिला

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why is the dead sea is called dead sea

अपने खेत में इस डरावनी चीज़ को देख कर सहम गई महिला!

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दक्षिणी ब्राज़ीलियन राज्य के सांता कैटरीना में एक कपल को अपने घर के पीछे आलू काटते हुए दिखी एक ऐसी चीज़ जिसे देखकर वह डर गए. यह ऐसी चीज़ थी जिससे शायद ही किसी ने पहले कभी देखा होगा. वो देखकर कपल को बहुत ही हैरानी हुई और उन्हें अपनी आँखों पर यकीन ही नहीं हुआ. अब वह इस अनोखी चीज़ को लोगों के लिए प्रदर्शनी के लिए रखने का मन बना रहे है.

पेशे से किसान मारली और पाउलो सिक्किनेल ने छह साल पहले अपने घर के पीछे खेत मे आलू भी लगाए थे. अब जब वह खेत से आलू काटने गए तो डर गए. उन्हें इंसान के पैर के आकार जैसी चीज़ दिखी. जब उन्होंने उसे उठाया तो पता चला वो चीज़ और कुछ नहीं आलू है जो उन्होंने खेत मे लगाया था.

मारली के मुताबिक, इंसान के पैर के आकार वाले इस आलू का वज़न करीब करीब आठ किलोग्राम है. यह आलू पैर के अकार का है जिसकी उँगलियाँ जड़ों से ढकी हुई है. यह उनके लिए एक नई चीज़ थी इसीलिए उन्होंने यह फैंसला किया है कि उसकी प्रदर्शनी लगाएंगे ताकि और लोग भी उसे देख सके.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ इससे पहली भी ऐसी अजीबोगरीब आकार की सब्जीयां देखी गई हैं. कहीं सेठ के आकार में बैठी हुई मूली तो कहीं खरगोश के आकार में टमाटर. वैज्ञानिकों की माने तो ऐसा खेतों में केमिकल या सब्जियों मे लगने वाले इंजेक्शन की वजह से होता है. वहीं कई बार पूर्ण रूप से विकसित ना हो पाने कि भी वजह से सब्जियां ऐसा आकार ले लेती है.

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550 सालों से तपस्या कर रहे हैं ये संत, आज भी बढ़ रहे हैं बाल, नाखून

550 सालों से तपस्या कर रहे हैं ये संत, अभी भी बढ़ रहे हैं बाल और नाखून

पौराणिक कथाओं में आप सब ने यह बात तो सुनी होगी कि ऋषि मुनि देवताओं को प्रसन्न करने के लिए तपस्या में लीन हो जाते थे। देवता भी इनकी तपस्या से खुश होकर इन्हें कोई न कोई वरदान देते थे। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ही संत के बारे में बताने जा रहे हैं, जो 550 सालों से ध्यान मुद्रा में बैठे हैं।

आपको यह सुनकर यकीन तो नहीं होगा परंतु यह बात बिलकुल सच है। तिब्बत से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर लाहुल स्पिती के गीयु नामक गांव में एक संत की ममी मिली है।

इस संत की ममी आज भी उसी ध्यानमग्न अवस्था में पाई गयी है। हैरानी की बात तो ये है कि इस संत की ममी के बाल और नाखून आज भी बढ़ रहे है, इसलिए एक्सपर्ट इन्हें ममी मानने से इनकार कर रहे हैं।

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गाँव वालों का कहना है कि पहले यह ममी एक स्तूप में स्थापित थी परंतु इसको मलबे से निकालकर इसका परीक्षण किया गया तो पता चला की यह 550 साल पुरानी है। एक्सपर्ट का मानना है कि बिना किसी लेप लगाये और जमीन में इतने सालों दबे रहने के बाद भी इस ममी में किसी तरह की कोई खराबी नहीं हुई है ।

गाँव के बड़े बुजुर्गों ने बताया कि 15वीं शताब्दी में यहां एक संत तपस्या कर रहें थे। उस समय गाँव में बिछुओं का प्रकोप था। गाँव को इस प्रकोप से बचाने के लिए ही संत ने ध्यान लगाना प्रारंभ किया। जैसे ही संत ने समाधि ली, वैसे ही गाँव में बिना बारिश के इन्द्रधनुष निकला और गाँव में बिछुओं का प्रकोप खत्म हो गया था।

कुछ लोगों का मानना ये है कि ममी बौद्ध भिक्षु सांगला तेनजिंग की है। तिब्बत से भारत आने के बाद वह इसी गाँव में ध्यान लगाकर बैठ गये थे और फिर कभी उठे ही नहीं। इस ममी के बाल और नाखून ही नहीं बढ़ रहे हैं, सिर से खून भी निकल रहा है।

गाँव वालों ने बताया कि खुदाई के दौरान ममी के सिर पर कुदाल लग गयी जिसके बाद उनके सिर से खून निकलने लग गया था। आज भी ममी के सिर पर चोट का निशान देखा जा सकता है।

इस ममी को एक शीशे के केबिन में रखा गया है, जिससे इस ममी को कोई नुकसान ना हों। अगर आप भी इस ममी को ध्यान से देखेंगे तो पता लग जाएगा ये ममी अभी भी ध्यान की अवस्था में है।

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इन पांच शहरों में हैं ‘जीवन का सर्वोत्तम स्तर’

सड़क पर लगे एक मील-पत्थर का रंग क्या कहता है, जानिये तथ्य!

जब आप सड़क मार्ग से सफर करते है तो आपने सड़क किनारे किलोमीटर बताने वाले पत्थर तो देखे ही होंगे, जिन्हे मील पत्थर भी कहा जाता है। ये पत्थर मार्गों में इसलिए लगाए जाते है ताकि मार्ग पर चलने वाले यात्री एक शहर से दुसरे शहर के बीच की सही दूरी जान सकें। क्या आपने कभी ध्यान दिया है, यह पत्थर अलग अलग रंगों के होते है। इन पत्थरों में सफेद रंग के साथ पीले, हरे, नीले, काले, लाल रंग की पट्टी होती है। आइये जानते है कि अलग अलग रंगों के इन पत्थरों से क्या संकेत मिलता है:

पीले रंग का पत्थर:

सड़क पर चलते वक्त या ड्राइव करते वक्त जब किलोमीटर बताने वाले पत्थर का रंग पीला हो तो समझ जाएये की आप नेशनल हाईवे या राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे हैं। इन रंगों का इस्तेमाल सिर्फ नेशनल हाईवे वाले पत्थरों पर ही किया जाता है। इन सड़कों की निर्माण और रख-रखाव की जिम्मेवारी केंद्र की होती है।

हरे रंग का पत्थर:

जब आपको सड़क पर हरे रंग का मील का पत्थर दिखाई दे तो आप नेशनल हाईवे से निकल कर स्टेट हाईवे पर पहुंच चुके हैं, जो एक राज्य से दूसरे राज्य को जोड़ता है। इन सडक़ो की देखभाल की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है।

नीले या काले रंग का पत्थर:

अगर आपको सड़क किनारे नीले या काले रंग का पत्थर दिखे तो आप किसी बड़े शहर या जिले में आ गए हैं।  ये सड़क उस जिले के अधीन है। साथ ही वह सड़क आने वाले जिले के नियंत्रण में आती है। इस सड़क का रखरखाव भी उस शहर के प्रशासन द्वारा ही किया जाता है।

सफेद रंग का पत्थर:

कई जगह पूरे सफेद रंग के मील पत्थर भी लगे होते हैं, इनका मतलब भी यही है, कि आप किसी शहर की तरफ जा रहे हैं। इस सड़क का रखरखाव भी उस शहर के प्रशासन द्वारा ही किया जाता है।

नारंगी रंग का पत्थर:

अगर आपको नारंगी रंग का मील का पत्थर नजर आ जाए तो आप किसी गांव या फिर गांव की सड़क पर हैं। यह सडकें प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के तहत बनाई गई होती हैं।

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बांस से बना एक अनोखा पुल जिसे हर साल बारिश में तोड़कर गर्मियों मे दोबारा बनाया जाता है

इन पांच शहरों में हैं ‘जीवन का सर्वोत्तम स्तर’

एक अंतर्राष्ट्रीय कंसल्टैंसी फर्म मरसर ने क़्वालिटी ऑफ़ लिविंग रैंकिंग जारी की है जिसमें दुनिया भर के शहरों को जीवन की गुणवत्ता के आधार पर रैंकिंग दी गई है। प्रतिवर्ष यह रैंकिंग नियोक्ताओं की सहायता के लिए जारी की जाती है ताकि वे शहरों के अनुसार वहां काम करने वाले अपने कर्मचारियों को भत्ते दे सकें। सूची के अनुसार ये जीवन स्तर की गुणवत्ता के लिए इन शहरों को टॉप 5 शहरों की सूचि में शामिल किया गया है।

वियना (ऑस्ट्रिया):

सर्वे के अनुसार रहने के लिए यह दुनिया का सर्वोत्तम शहर है। ऑस्ट्रिया की इस राजधानी में कला में रुचि रखने वालों के लिए बहुत कुछ है, साथ ही यहां टॉपक्लास रेस्तरां, शानदार स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

ज्यूरिख (स्विट्जरलैंड):

स्विट्जरलैंड का सबसे बड़ा वाणिज्यिक केंद्र ज्यूरिख देश की मशहूर फाइनांशियल इंडस्ट्री का केंद्र है। यहां उच्च स्तरीय जीवन के लिए सब कुछ है। हालांकि, यह महंगा भी बहुत है।

ऑकलैंड (न्यूजीलैंड):

यह शहर दो विशाल बंदरगाहों के आस पास बसा है। अपनी संतुलित अर्थव्यवस्था, रमणीय वातावरण और सुरक्षा के उच्च स्तर की वजह से यह बार बार इस सूची में शामिल होता रहा है।

म्यूनिख (जर्मनी):

जर्मनी के इस दूसरे सबसे मशहूर शहर को इस वर्ष भी गत वर्ष वाली चौथी रैंकिंग मिली है जिसका कारण यहां की मजबूत अर्थव्यवस्था और जीवन का अच्छा स्तर है।

वैंकूवर (कनाडा):

प्रशांत महासागर के सघन जनसंख्या वाले इस तटवर्ती शहर में सांस्कृतिक विविधता कूट- कूट कर भरी है जो इसे रहने के लिए एक उपयुक्त स्थान बनाती है।

भारतीय शहरों की रैंकिंग:

भारत में जिन दो शहरों को सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग मिली है वो हैदराबाद और पुणे हैं। दोनों को ही दुनिया भर में 142 वीं रैंकिंग दी गई है। इसके बाद बैंगलोर को 149, चेन्नई को 151, मुंबई को 154, कोलकाता को 160 और नई दिल्ली को 162वीं रैंकिंग दी गई है।

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प्राचीन शिव मंदिर, जहां जीवित लड़की बन गई मूर्ति

बांस से बना एक अनोखा पुल जिसे हर साल बारिश में तोड़कर गर्मियों मे दोबारा बनाया जाता है

कंबोडिया के पास मेकोंग नदी पर बांस का बना एक ऐसा अनोखा पुल है, जो अपनी संरचना के लिए दुनिया भर में काफी मशहूर है। इस पुल की ख़ास बात यह है कि इसको  गर्मी के मौसम में बनाया जाता है और बारिश शुरू होते ही इसको तोड़ दिया जाता है। यह पुल कामपोंग चाम और कोह पेन को एक-दूसरे से जोड़ता है।

कंबोडिया के इस 3300 फ़ीट लंबे पुल को बनाने के लिए हर साल तक़रीबन 50 हज़ार बांस लगते हैं| हर साल मई से नवंबर के बीच बारिश के मौसम में इस पुल में लगे बांस को खोलकर रख लिया जाता है। अगले साल फिर गर्मियों के मौसम में इसका इस्तेमाल करके फिर से पुल का निर्माण किया जाता है।

इस पुल को हर साल इसलिए तोड़ा जाता है, क्योंकि बरसात के मौसम (मई से नवंबर) में मेकोंग नदी का जल स्तर काफ़ी बढ़ जाता है, और कही  बांस पानी में बह न जाएं,इसलिए, इनको खोलकर रख लिया जाता है, और  गर्मियों में फिर से इसका इस्तेमाल कर के  पुल का निर्माण किया जाता है  |

इस पुल को इस तरह से बनाया जाता है कि इसमें पैदल यात्री, साइकिल, मोटरबाइक, कार और ट्रक भी असानी से गुजर सके |.इस पुल से गुज़रने वाले लोगों को टैक्स के रूप में 100 रिएल चुकाने पड़ते हैं,जब कि विदेशी पर्यटकों को इसके लिए 40 गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ती है|

पिछले साल मेकोंग नदी पर इस पुल के पास कंक्रीट का पुल भी बन चूका है। इससे लोगों में डर हो गया है, कि कही बांस के पुल की परंपरा खत्म ना हो जाये । मगर यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों का कहना है, कि बांस का यह पुल अब भी पूरी मजबूती से बना हुआ है। अब इस पुल का सिर्फ पैदल यात्री ही  इस्तेमाल करते हैं।

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भारत का एक अनोखा गांव जो व्हिसलिंग विलेज के नाम से मश्हूर है

भारत के मेघालय राज्य  में स्थित कांगथांग गांव एक ऐसा गांव है, जहां लोग एक दूसरे को नाम से नहीं बल्कि सीटी बजाकर बुलाते हैं। इस लिए इस गांव को व्हिसलिंग गांव के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर लोग एक दुसरे को  बुलाने के लिए अलग-अलग स्टाइल में व्हिसल करते हैं।  इस गांव में बहुत सारी ट्राइब्स के लोग रहते हैं|

जिस तरह से किसी खास काम के पीछे कोई कहानी या तथ्य जुड़ा होता है, ठीक उसी प्रकार यहां भी सीटी को प्रयोग करने के पीछे एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है। माना जाता है, कि सीटी बजाकर बात करने की परंपरा किसी पुरानी घटना से जुड़ी हुई है। कहानी के अनुसार गांव का एक आदमी दुश्मनों से अपनी जान बचाकर भागता हुआ, किसी पेड़ पर चढ़ गया था। मदद के लिए उसने अपने दोस्तों को बुलाने के लिए  किसी जंगली आवाज का प्रयोग किया ताकि उसकी आवाज दुश्मन न पहचान सकें। जिसके बाद उसके दोस्तों ने उसकी जान को  उन दुश्मनों से बचा लिया था, और इस घटना के बाद ही गांव में सीटी बजाकर बात करने की परंपरा शुरू हो गई थी |

इस गांव मे  हर शख्स को दो नाम दिए जाते  है, पहला नाम हमारी तरह ही साधारण नाम होता है और दूसरा व्हिसलिंग ट्यून नाम होता है । गांव के लोग साधारण नाम से बुलाने की बजाय व्हिसलिंग ट्यून नाम से ही एक दुसरे को
बुलाते हैं। इस लिए हर शख्स की व्हिसलिंग ट्यून अलग-अलग होती है ,जो की उनके नाम और उनकी पहचान का काम करती है। गांव में जब बच्चा पैदा होता है, तो यह धुन उसको उसकी मां देती है फिर बच्चा धीरे-धीरे अपनी धुन पहचानने लग जाता है।

कांगथांग गांव में करीब 109 परिवार के 627 लोग रहते हैं , यानी कि इस गांव में कुल 627 धुन हैं. इस गांव मे  रहने वाले लोग इस धुन को प्रकृतिक ढंग से बनाते हैं. खासकर नई धुन को चिड़ियों की आवाज से ही बनाया जाता है|

जब भी गांव के लोग कोई भी धुन बजाते  हैं, तो वो धुन दूर तक गूंजती है, कयोंकि कांगथांग गांव चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है। मतलब की  गांव के लोगों का यह बातचीत करने का तरीका भी वैज्ञानिक रूप से सही है। वक्त बदलने के साथ-साथ यहां के लोग भी बदलने लगे हैं। अब यह लोग अपने धुन वाले नाम को मोबाइल पर रिकॉर्ड कर उसे रिंगटोन भी बना लेते हैं।

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स्वर्ग लोक से कम नहीं है सिंगापुर के यह बगीचें

सिंगापुर में 9 बेहद सुंदर बगीचें हैं। इन बगीचों में 150 प्रजातियों के 30 हज़ार तरह के पौधे है। यह पौधे हर किसी का मन मोह लेते हैं। इन बगीचों में रंग-बिरंगे फूलों की महक के बीच हर किसी को स्वर्ग लोक जैसा अहसास होता हैं। सिंगापुर में 101 एकड़ में फैले इन बगीचों को “गार्डन्स बाई द बे” कहते है। यह बगीचें हर किसी को अपने सुंदर नज़ारों से आकर्षित करते है।

यहां विश्व का सबसे बड़ा कांच का ग्रीन हाउस भी है, जिसे “द फ्लॉवर डोम” के नाम से जाना जाता है। इस जगह को समुद्र में मिट्टी डालकर तैयार किया गया है। “द फ्लॉवर डोम” में बहुत सुंदर बगीचें है, जिनमें अफ्रीका, अमेरिका, एशिया आदि महाद्वीपो के एक से बढ़कर एक फूल और पौधे उगाए जातें  हैं।

फूलों की प्रदर्शनियां:

हर साल यहाँ 16 मार्च से 8 अप्रैल तक चैरी ब्लॉसम प्रदर्शनीआं लगाई जाती है, जिस के दौरान यहां गुलाबी रंग के चैरी फूलों की बहार देखने को मिलती है। फूलों से भरे चैरी ब्लॉसम पेड़ों के बीच बने मार्ग पर सैर करते हुए जापानी थीम वाली चीज़ें जैसे कि टी-हाऊस, रिक्शा, टोरी गेट्स आदि को करीब से देख सकते हैं। सारा माहौल जापानी प्रतीत होता है, और तो और वहां बड़ी बड़ी गुड़ियों ने जापान की पारम्परिक परिधान कीमोनो पहनी होती है जिसमें वह बहुत खूबसूरत दिखतीं  है।

गार्डन ऑफ मैजिकल बरोज:

इस गार्डन में अलग- अलग रंगों के ट्यूलिप फूलों की सुंदरता सबको अपनी और आकर्षित करती हैं। इस बगीचे में 13 अप्रैल से 13 मई तक “टूयूलिप मोनिया” प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है। इसके लिए बगीचे को रंग- बिरंगे अंडों, खिलौनों और खरगोशों से स्पेशल सजाया जाता है। 25 मई से 1 जुलाई के बीच “बेगोनिया ब्रिलियंस” नामक फूलों की प्रदर्शनी में बेगोनिया फूलों को रचनात्मक ढंग से पेश किया जाता है।

बादलों का जंगल:

“गार्डन्स बाई द बे” में ही स्थित ‘क्लाऊड फॉरेस्ट’ में कोहरा और 60 हज़ार पौधे एक रहस्यमयी जगत जैसे प्रतीत होते हैं। यहीं आपको विश्व का सबसे ऊंचा “इंडोर वाटरफॉल” दिखाई देगा, जिसमें 35 मीटर ऊंचाई से पानी गिरता है। इस झरने के करीब ही सैर करते हुए आप शीतल हवाओं और इस झरने का एक व्याकुल करने वाला नज़ारा देख सकते हैं। यहां ‘क्लाऊड वॉक’ से लेकर ‘ट्री टॉप वॉक’ जैसे रोमांचक बंदोबस्त भी सबको लुभाते हैं।

क्लाऊड फॉरेस्ट थिएटर तथा गैलरी:

यहां “ग्रीन वर्ल्ड” तथा +5 डिग्रीज जैसी फिल्मों को देख कर दुनिया भर को प्रभावित कर रहे जलवायु परिवर्तन के बारे में ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। यहीं एक कला दीर्घा भी है जहां तरह तरह के ग्राफिक्स, डायग्रामस तथा कलाकुर्तियां आदि प्रदर्शित है जो धरती के पर्यावरण, जीव- जंतुओं के बारे में बहुत कुछ बताती हैं।

सुपरट्रीज एंड स्काईवे:

यहां विशाल टावरों को विशाल पेड़ों जैसे रूप दे रखें हैं, जिसमें अलग- अलग  प्रकार के पौधे लगाए गए हैं, जिससे हर टावर एक विशाल पेड़ जैसा लगता है। इन में कुल मिला कर 200 प्रजातियों के डेढ़ लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इन पेड़नुमा  विशाल टावरों पर एक स्काईवे भी बना है। जहां से बगीचे के साथ लगती मरीना खाड़ी का भी सूंदर नज़ारा दिखाई देता है। शाम ढलने के बाद सिंगापुर रोशनी में नहाने लगता है। इन बगीचों में 7.45 और 8.45 बजे एक लाइट एंड साऊंड शो का आयोजन होता है, जिसका मज़ा लेने वहां बहुत लोग आते हैं।

इन सब के अलावा इस “गार्डन्स बाई द बे” में आकर्षणों की भरमार है। ठंडे, रूखे भूमध्यसागरीय जलवायु वाले इस स्थान में हज़ार वर्षों से प्राचीन जैतून के पेड़ों के बीच टहलते हुए एक अलग ही अहसास होता है। “सीक्रेट गार्डन” में चूना पत्थर के जंगलों और गुफाओं के विविधतापूर्ण वास को देख सकते हैं। यहां कुछ दुर्लभ बेगोनिया भी मौजूद हैं।

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पैसे वाला पेड़

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Gardens by the bay is like fairy land