सुंदर त्वचा के लिए उपाय

आज के टाइम में आखिर कौन सुंदर नहीं दिखना चाहता। महिलाएं और लड़कियां सुंदर दिखने के लिए क्या क्या नहीं करतीं। घर से बाहर निकलने के बाद आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों और प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। सूर्य की हानिकारक किरणों के कारण आपको ऑयली स्किन (Oily Skin), दाग-धब्बे, मुहांसों और पिंपल्स जैसी कई ब्यूटी प्रॉब्लमस  का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में आप इन प्रॉब्लमस को दूर करने के लिए कई तरह के महंगे ब्यूटी प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। पर उसके लिए जरूरी नहीं है कि महंगे प्रोडक्ट का ही इस्तेमाल किया जाए। सुंदर  दिखने  के  लिए  आप  कुछ घरेलू तरीके भी अपना सकते है, जिनसे आप एकदम ग्लोइंग स्किन और गोरा रंग पा सकेंगे।

  • हफ्ते में एक बार चेहरे की क्लींजिंग, टोनिंग, स्क्रबिंग या मसाज जरूरी है। इस से चेहरे पर जमा डेड स्किन हट जाते हैं, जिससे चेहरे में चमक आ जाती है। आप चाहें तो पार्लर या घर पर इसे आसानी से कर सकते हैं।
  • आप अपना चेहरा साफ करने के लिए नारियल पानी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। क्लींजिंग के बाद स्किन के पोर्स बंद करने के लिए अल्कोहल फ्री टोनर का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • त्वचा की डेड सेल्स और इस पर जमी धूल मिट्टी की सफाई के बाद अच्छा बॉडी लोशन या मॉइश्चराइजर लगाएं। त्वचा में नमी बनाए रखने के लिए एलोवेरा, जैतून का तेल, शिया बटर आदि से बने मॉइश्चराइजर या बॉडी लोशन का उपयोग करें।
  • सूर्य की हानिकारक किरणें झुर्रियों, भूरे रंग के धब्बे, मुहांसे, पिंपल्स और स्किन कैंसर का कारण भी बन सकती हैं। इसलिए धूप में निकलने से पहले अपनी स्किन को अच्छी तरह से ढक लें और जितना हो सके सूरज की किरणों से सुरक्षित रहें।
  • 2 चम्मच बेसन में थोड़ा सा चंदन पाउडर, 1 चुटकी हल्दी और थोड़ा सा दूध मिलाकर पेस्ट बना लें और चेहरे पर लगा लें। 1 से 2 घंटे तक इस मास्क को सूखने के लिए छोड़ दें और फिर ठंडे पानी से धो दें। फेस पैक में दूध की जगह सादा पानी या फिर गुलाब जल भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रहे कि चेहरे को धोने के बाद किसी भी तरह के फेसवॉश और साबुन का उपयोग ना करें।
  • चेहरे पर सबसे पहले आंखों के आसपास झुर्रियां आती हैं। इन झुर्रियों को दूर करने के लिए नारियल के तेल का इस्तेमाल करें। नारियल के तेल को अपनी आंखों के पास लगाकर हल्के से मसाज करें। ऐसा करने से आपकी आंखों के आसपास की झुर्रियां दूर हो जाती है। साथ ही स्किन की ड्राइनेस भी खत्म हो जाती है।
  • भोजन में विटामिन सी की मात्रा बढ़ाएं जैसे नीबू, संतरा और आंवला आदि का सेवन करें। डाइट में टमाटर, तरबूज, अमरूद और सैलेड को शामिल करें।
  • शरीर के साथ-साथ पानी चेहरे की स्किन को भी हाइड्रेट रखता है। स्किन को प्राकृतिक रूप से खूबसूरत बनाना हो तो प्रतिदिन 8-10 लीटर पानी पीएं। पानी पीने से शरीर और त्वचा से हानिकारक टॉक्सिन और तेल पसीने के रूप में बाहर निकल जाता है और आपकी त्वचा स्वस्थ रहती है। दिन भर में कम से कम दस ग्लास पानी पिएं।
  • गर्मियों में हैवी ब्यूटी प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल न करें। इससे प्रॉब्लम कम होने की बजाए और भी बढ़ जाती है। इसलिए समर सीज़न में जितना हो सकें लाइट मेकअप करें।
  • स्किन के सीबम ऑयल को नियंत्रित रखने के लिए अधिक तेल और मसालेदार वाला भोजन खाना छोड़ दें।
  • उचित समय में नींद न लेने से भी त्वचा तनावपूर्ण और थकी हुई दिखती है। उचित समय पर नींद लेने से आपकी त्वचा स्वस्थ और जवान रहती है। जब आप सोते हैं तो आपका शरीर पुनर्जीवन की प्रक्रिया से होकर गुज़रता है और अधिक स्वस्थ त्वचा कोशिकाएं उत्पन्न करती है जो झुर्रियों और बुढ़ापे को रोकता है।
  • तुलसी की सिर्फ पूजा ही नहीं होती बल्कि खूबसूरती बढ़ाने के लिए भी ये बहुत गुणकारी है। तुलसी के पत्तों को पीसकर लगाने से चेहरे का रंग तो साफ होता ही है, स्किन भी ग्लो करने लग जाती है।
  • रात को सोने से पहले चेहरा धोकर नाइट क्रीम जरूर लगाएं। नाइट क्रीम लगाने से त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है। नियमित रूप से मॉस्चराइजर का उपयोग झुर्रियों को आने से रोकता है और आपकी त्वचा को कोमल और चमकदार बनाए रखने में सहायता करता है।

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आईये जानते है कि कब तक चलेगा आपका प्यार

अक्सर प्यार में छोटी -छोटी  बातों से कुछ रिश्ते टूट जाते है, और कई बार प्यार का रिश्ता जीवन भर का  बन जाता है. ऐसे में प्यार के अलग-अलग ढंग होने के कारण इसको कुछ हिस्सों में बांट दिया गया है. जिससे आप पता कर सकते है कि आपका प्यार कब तक चलेगा और किस श्रेणी में से है.

नाटकीय

यदि आपका संबंध उतार-चढ़ाव से भरा हुआ है, तो आप प्यार के पहले समूह मे शामिल हैं| जिनको ‘नाटकीय ‘ कहा जाता है|

वैज्ञानिकों ने माना है, कि इस समूह में रहने वाले जोड़ों के प्यार में निरंतरता नहीं होती है और वह अक्सर अपने संबंधों की नकारात्मक बातों को यह कहकर जायज़ ठहराते है, कि उन दोनों का साथ अच्छा नहीं है| वह अपने साथी पर हमेशा यह आरोप लगाते हैं कि वह एक दूसरे को वक्त नहीं देते |ऐसे में अगर उनका रिश्ता टूट जाता है तो इसमे कोई हैरानी की बात नहीं है क्योंकि, इन जोड़ों के संबंध के टूटने की सम्भावनाएं सबसे ज्यादा होती है|

झगड़ालू

नाटकीय जोड़ों के साथ ही वैज्ञानिकों ने दुसरे समूह की पहचान की है, जिनको ‘झगड़ालू’ कहा जाता है| इस समूह में शामिल जोड़े एक-दुसरे से बहुत बहस करते हैं|

हालांकि, नाटकीय जोड़ों के विपरीत इनके संबंध टूटने की सम्भावनाएं कम होती हैं और भविष्य में भी इनके संबंधों में बिगड़ाव दिखाई नहीं देता है|

सामाजिक

तीसरा समूह सामाजिक मेल-मिलाप वाला है, जो सामाजिक स्वीकार्यता को उच्च महत्व देता है | ऐसे में जोड़े अपने अच्छे संबंधों का श्रेय सामाजिक कारणों को भी देते रहते हैं|

इस श्रेणी के जोड़ों के प्यार का भवष्यि उज्ज्वल रहता है, क्योंकि वह सांझे समाजिक के ताने-बाने को समान महत्व देते हैं, और अपने साथी को अपना प्रेमी ही नहीं, ‘सच्चा दोस्त’ भी मानते हैं |

 प्रतिबद्ध

अंतिम तथा सबसे सफल स्मूह को प्रतिबद्ध माना जाता है|इस समूह के जोड़ों के संबंध में अनेक सकरात्मक मोड़ आते है,और अपने प्यार की सफलता का श्रेय एक-दुसरे के सांझेपन के साथ ही एक-दुसरे की जरूरतों का भी ध्यान रखते है|

शायद ही किसी को हैरानी होगी, कि इस समूह में शामिल जोड़ों के संबंध टूटने की सम्भावनाएं सबसे कम होती हैं, और वह हमेशा अपने प्यार को अपना प्रमुख उद्देश्य मानते हैं |

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इस बच्ची के है 6 लाख इंस्टाग्राम फॉलोअर्स जानिए कैसे

रूस  की 6 वर्षीय इस बच्ची को विश्व की सबसे सुंदर लड़की बताया जा रहा है| इस बच्ची का नाम अनास्तासिया कानेजेवा है. इस बच्ची की सुंदर तस्वीरें लगातार लोगों का मन मोह रही है. अनास्तासिया कानेजेवा को एना के नाम से भी बुलाया जाता है. इंस्टाग्राम पर इसके 6 लाख फॉलोअर्स है. उसे इंटरनैट जगत की सनसनी माना जा रहा है।एना अपनी अनोखी नीली-हरी आँखों और गुड़िया जैसे चेहरे कारन लोगों के आकर्षण का केंद्र है.

अपने मासूम सुंदर चेहरे के कारण एना रूस में सफल मॉडल है. एना का इंस्टाग्राम उसकी माँ चलाती है और एना की कई तस्वीरें भी सांझा करती है. वह जुलाई 2015 से अपनी बेटी की तस्वीरें सांझा कर रही है, और तब एना 4 वर्ष की थी. उसकी हर तस्वीर को हजारों लाइक्स मिलते है. नीली आंखों वाली यह मासूम लड़की लोगों के दिलों पर राज कर रही है। वह कई ब्रॉंड की लीड स्टार है।

माना जा रहा है, की एना फ़्रांसिसी मॉडल थायलेन के नक़्शे कदम पर चल रही है. क्योंकि 16 वर्षीय हो चुकी थायलेन को भी 6 वर्ष की उम्र में विश्व की सबसे सुंदर लड़की के रूप मी प्रसिद्धि मिलने लगी थी. और वह आगे चल कर फ़्रांसिसी वोग मैगज़ीन में छपने वाली सबसे कम उम्र की मॉडल बनी थी.

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एक गाँव जहाँ सांपों को मेहमान नहीं माना जाता, बल्कि…

सांप का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के रौंगटे खड़े हो जाते है, लेकिन महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक गांव है जिसके हर घर में सांप पाए जाते हैं. है न अजीब?, लेकिन या सच है. यानि इस गाँव में सांप मेहमान नहीं बल्कि घर के ही सदस्य माने जाते हैं!

सोलापुर जिले का शेतपाल गाँव मुंबई-हैदराबाद मार्ग पर स्थित है, जो बीजापुर और गडग को जाने वाली छोटी लाइनों से भी जुड़ा है। सोलापुर कपास और अन्य कृषि उत्पादों के व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। सोलापुर के सिद्धेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से बड़ी संख्या में आते हैं। सोलापुर एक औद्योगिक केंद्र भी है, सूती वस्त्र के क्षेत्र में यह मुंबई के बाद दूसरा केंद्र है।

सोलापूर मे मराठी से ज़्यादा तेलुगू और कन्नड़ भाषा बोली जाती है। इस गांव के हर घर में सांप पाए जाते हैं | खतरनाक कोबरा इस गांव के बच्चों के लिए खिलौने जैसा हैं | गांव के लोग घरों में कोबरा सांप पालते हैं. हैरानी की  बात यह है, कि ये सांप किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते | लोग इस अनोखे गांव को देखने के लिए दूर-दूर से आते है| इस गांव में सांपों की पूजा की जाती है, और इस गांव में सांपों के बहुत से मंदिर है|आज तक इस गांव में किसी ने सांपों  को नहीं मारा है| स्थानीय निवासियों का कहना है, कि शायद इसलिए आज तक किसी को भी यहां सांप ने नहीं काटा|

यहाँ स्कूल-कॉलेज के अलावा सार्वजनिक स्थ्लों पर भी आपको सांप घूमते हुए मिल जाएंगे, और छोटे बच्चे भी यहां सांपों से खूब खेलते है| गांव में चाहे मकान कच्चा हो या पक्का पर सांपों के रहने के लिए विशेष स्थान बनाया जाता है|

ज्यादातर लोग घरों की टाइलों वाली छत में सापों के लिए छेद रखते है, क्योंकि इसके बीच  मिट्टी में कोबरा आसानी से आराम कर सकता है| यहां तक कि नया मकान बनाते वक्त भी यह बात ध्यान में रखी जाती है, कि उसमे सांपों के लिए आरामदयाक स्थान है या नहीं।

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मुफ्त सीखने के लिए सर्वश्रेष्ठ शिक्षा ऐप्स

मैकग्रा-हिल द्वारा किए गए एक हालिया सर्वेक्षण में यह पाया गया है कि 75 प्रतिशत से अधिक छात्र अपने अकादमिक ग्रेड में सुधार लाने के लिए स्मार्ट फोन और टैबलेट जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग करते हैं। यह ऐप्स छात्रों को बेहतर शिक्षा सीखने में मदद करती है।

नीचे हम कुछ ऑनलाइन ऐप्स की लिस्ट दे रहे हैं जोकि ऑनलाइन एजुकेशन में उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं।

ड्रॉपबॉक्स (Dropbox)

एक छात्र को बहुत सारी फाइलें भेजने और प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। ड्रॉपबॉक्स एक मुफ़्त ऐप है, जो कि सुरक्षित स्थान के माध्यम से सभी फोटो, दस्तावेज़, नोट्स और वीडियो को साझा करना बहुत आसान बना देता है। यह उन फ़ाइलों के नोट्स को जोड़ने की अनुमति देता है, जिन्हें उपयोगकर्ता साझा करना चाहते हैं। जब आप समूह प्रोजेक्ट तैयार कर रहे है, तो यह सबसे उपयोगी है। ड्रॉपबॉक्स की माइक्रोसॉफ्ट के साथ पार्टनरशिप है ,इसलिए यूजर इसके जरिए एमएस ऑफिस का सारा काम बड़ी आसानी से निपटा सकता हैं।बाद में इन फ़ाइलों को ड्रॉप बॉक्स खातों में सेव किया जा सकता है। ड्रॉप बॉक्स की ‘नोट्स’ सुविधा एक से ज्यादा उपयोगकर्ताओं को एक ही दस्तावेज़ को संपादित करने की अनुमति देता है।

खान अकादमी (khan Academy)

इस ऐप से शैक्षिक मैथ, कंप्यूटर और संगीत के बारे में 4000 से अधिक वीडियो देख सकते है। यह ऐप विभिन्न कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया के बारे में व्यापक जानकारी भी प्रदान करता है। एक छात्र इस ऐप की मदद से एसएटी (SAT) के लिए भी तैयारी कर सकता है। खान अकादमी (khan Academy) सर्वश्रेष्ठ मुफ़्त शिक्षा ऐप्स में से एक है।

एवरनोट (Evernote)

यह ऐप मुफ़्त शिक्षा ऐप्स में से एक है, और यह 2008 में शुरू हुई थी, और वह तब से लोकप्रिय रही है। हाल ही में ऐप के कई अपडेट हुए हैं, जो उपयोगकर्ताओं को अधिक स्वतंत्रता की अनुमति देते हैं। ऐप एक सरल और साफ इंटरफ़ेस प्रदान करती है, जो कि छात्रों के लिए बिल्कुल सही रहता है। छात्र इस ऐप से नोट्स ले सकते हैं, और टू-डू सूचियां भी तैयार कर सकते हैं, और किसी भी डेटा तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं। इसके कैमरे के जरिए किसी भी डाक्यूमेंट की तस्वीर लेकर उसके नोट्स तैयार कर सकते हैं। आप लिस्ट बना सकते हैं, अपने एजेंडा भी तैयार कर सकते हैं, और रिमाइंडर भी ले सकते हैं।

इजीबिब (EasyBib)

EasyBib सबसे सर्वश्रेष्ठ मुफ़्त शिक्षा ऐप्स में से एक है। ईज़ी बिब (Easy Bib) छात्रों की रिसर्च वर्कलोड को हल्का कर देता है। या यूं कहें कि आपको स्मार्टली बहुत सी चीजे करने के लिए सक्षम बना देता है। आप बस किताब का नाम टाइप करिए और आपके सामने विषय और उसकी व्याख्याओं की विकल्प खुलकर आ जाएंगे।

माय स्टडी लाइफ (My Study Life)

माय स्टडी लाइफ (My Study Life)  एक सधारण और शानदार ऐप है, जिसके जरिए आप अपनी क्लासेस, अपनी तैयारी, अपने सारे कॉलेज के काम ट्रैक कर सकते हैं। यह ऐप कक्षाओं, परीक्षणों और परीक्षाओं के साथ उपयोगकर्ता को अद्यतित रखने के लिए अधिसूचनाएं भी देता हैं। एक सरल इंटरफेस दुवारा इस ऐप का उपयोग करना बेहद आसान है।

माइक्रोसऑफ्ट ऑफिस मोबाइल (Microsoft Office Mobile)

एंड्रॉयड यूजरों के लिए माइक्रोसऑफ्ट ऑफिस मोबाइल (Microsoft Office Mobile) गज़ब  का ऐप है।यह ऐप भी मुफ़्त शिक्षा ऐप्स में से एक है, आपके पास लैपटॉप न होने पर भी आप इसके जरिए अपने मोबाइल से ही सारे काम कर सकते हैं। आप एमएस वर्ल्ड, एक्सल, पावरप्वॉइंट इन सब पर काम कर सकते हैं।

स्लीप साइकल अलार्म क्लॉक (Sleep Cycle Alarm Clock)

पढ़ने-लिखने के दौरान अक्सर छात्रों की नींद उड़ जाती है। नींद आती है तो खूब आती है। इसलिए खुद को स्वस्थ्य रखने और पर्याप्त नींद लेने के लिए स्लीप साइकल अलार्म क्लॉक (Sleep Cycle Alarm Clock) ऐप की मदद ली जा सकती है। ये ऐप स्लीप साइंस नींद पर किए गए शोधों के आधार पर आपकी नींद को जांचता है। कब और कितना ब्रेक लेना है, और कब चैन की नींद सो जाना है। ये सब बताता है।

स्क्रिब्ड (Scribd)

स्क्रिब्ड (Scribd) ऐप को किताबों के नेटफ्लिक्स के रूप में माना जाता है,यह ऐप उन लोगों के लिए सफलता की चाबी साबित हो सकता है, जिन्हें बहुत सारी किताबे पढ़ने के लिए कॉलेज की लाइब्रेरी में जाना पड़ता है, तो कभी उन्हें किताबों को ख़रीदना पड़ता है। इस ऐप के जरिए लाखों किताबें आपकी पहुंच में होती हैं। यूजर इसके जरिए अपने मोबाइल में किताबें स्टोर भी कर सकते हैं।

 डुओलिंगो (Duolingo)

यह ऐप एक नई भाषा सीखने के लिए मजेदार है जब आप इस ऐप को इस्तेमाल करेंगे तो यह एक नशे की लत की तरह आपको लग जायेगी क्यूंकि यह बहुत ही मज़ेदार ऍप है । यह ऐप बोलता है, और गेमिंग स्टाइल में भाषा सिखाता है|  यह Rosetta पत्थर के रूप में फोटो के साथ शब्दों को जोड़ता है। इसके जरिए आप फ्रेंच, इटैलियन, स्पेनिश और पोर्तुगीज़  जैसी भाषाएं खेल-खेल में सीख सकते हैं ।

वोल्फ्राम (Wolfram)

यह ऐप 10 ट्रिलियन डेटा आइटम और 50,000 समीकरणों की पेशकश करता है, इसलिए इस ऐप को  ‘स्टार ट्रेक’ के रूप में भी जाना जाता है। । यह ऐप जानकारी और स्पष्टीकरण, और सूत्रों के विवरण के साथ ग्राफ भी बनाता है। वोल्फ्राम ऐप को छात्र का सबसे अच्छा दोस्त भी माना जाता है.

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उड़ने वाला ऑटोमेटिक छाता

क्या आप ने कभी उड़ने वाला छाता देखा है? या फिर हम ऐसा फिल्मों और कहानियों में देखते है। लेकिन ये उड़ने वाला छाता सच में बनाया गया है। आइए जानते है ऐसे छाते के बारे में:

जापान की एक आईटी कंपनी ने उड़ने वाला छाता विकसित किया है। जो कि ड्रोन की मदद से उड़ सकता है। इसकी खास बात यह है कि बारिश में व्यक्ति को इसे पकड़कर चलना नहीं होता है। सेंसर लगा होने के कारण यह व्यक्ति के आसपास ही घूमता रहता है।

इसका वजन 5 किलोग्राम है, जो फिलहाल 5 मिनट तक उड़ सकता है। लिहाजा दोनों हाथों में सामान पकड़े होने की स्थिति में यह छाता काफी काम का हो सकता है। जापान में सिविल एयरोनॉटिक्स के नियमों के मुताबिक, ड्रोन को सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद व्यक्ति या बिल्डिंग से करीब 30 मीटर की दूरी पर होना चाहिए।

शुरुआत में इस उड़ने वाले छाते का इस्तेमाल निजी जगहों पर हो सकता है। कंपनी का लक्ष्य है कि 2020 में होने ओलिंपिक और पैरालिंपिक से पहले यह  व्यावहारिक उपयोग में लाया जा सके। दूरसंचार प्रणाली विकसित करने वाली कंपनी आशी पावर इस नमूने पर काफी समय से काम कर रही है। इस प्रोटोटाइप में अभी दिक्कतें हैं।

वजन ज्यादा होने के कारण यह देर तक उड़ नहीं पाता। अगर व्यक्ति धीरे नहीं चलता है, तो यह अपने आप उसके पीछे नहीं चल पाता है। जाल से बने होने के कारण बारिश होने पर अभी इससे बचाव होना भी मुश्किल है। कंपनी के प्रेसिडेंट केंजी सुजुकी ने बताया कि इस तरह का छाता बनाने का प्लान उन्होंने 3 साल पहले बनाया था।

उनका मानना था कि ऐसा छाता होना चाहिए कि दोनों हाथ व्यस्त होने के बावजूद भी उसका इस्तेमाल किया जा सके। प्रेसिडेंट केंजी सुजुकी ने कहा कि फिलहाल तो नियामक कानूनों की वजह से इस छाते को बाजार में उतारने में कुछ परेशानियां हैं। मगर, हमें उम्मीद है कि एक दिन सड़कों पर यह छाता दिखना आम बात हो जाएगी।

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Have you ever seen a flying Umbrella

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पतझड़ में पत्तों का रंग क्यों बदलता है?

पतझड़ के मौसम में पेड़ो से पत्ते झड़ने लगते है। गर्मियों के दौरान पेड़ों की पत्तियां हरे रंग की होती हैं। सितंबर के आसपास ये पत्तियां नारंगी, लाल और गहरे मरून जैसे सुंदर रंगों में बदल जाती है। क्या आपको पता है कि मौसम के अनुसार पत्ते रंग क्यों बदलते हैं? खास कर पतझड़ के मौसम में ऐसा क्यों होता है?

अगर नहीं तो आइए जानते है कि पत्ते अपना रंग क्यों बदलते हैं

पतझड़ में पत्तों का रंग

गर्मियों के दौरान क्लोरोफिल या रंगद्रव्य जिनके कारण पत्तियों का रंग हरे रंग का होता है वे सूर्य से काफी ज्यादा प्रकाश का अवशोषण करते हैं, और गर्मी के दिनों में हरा रंग ज्यादा प्रभावी होता है। सर्दियों से ठीक पहले दिन छोटे होने लगते हैं। पेड़ों को बहुत कम सूरज की किरणें मिलती हैं। तापमान ठंडा होने लगता है, जो chlorophyll के उत्पादन को धीमा कर देता हैं। इसलिए पत्तों के  रंग में परिवर्तन होता है।

पेड़ अपना भोजन सूर्य की किरणों और अपनी जड़ों की सहायता से बनाते हैं। पतझड़ का मौसम अक्सर वो होता है, जिसमें पेड़ स्थानीय जलवायु की प्रतिकूलता का अनुभव करते हैं या करने वाले होते हैं। जब पौधों को पर्याप्त मात्रा में सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता है तो वो अपने संचय किये गए खाने में ही निर्भर रहते है परन्तु, पेड़ अपना बहुत सारा पानी पत्तो के छोटे- छोटे छेदों में से निकाल देते है। इससे पेड़ो का संचय किया गया बहुत सारा पानी नष्ट हो जाता है।

इसी के बचाव के लिए पेड पत्तों तक जाने वाले खाने को रोक देते हैं और खाना न मिलने की वजह से पत्ते पीले पड जाते हैं। जिन्हें हम पतझड कहते हैं गर्मियाँ आने से ठीक पहले कई पेड़ों की पत्तियों का रंग सुनहरा, लाल या भूरा और यहाँ तक कि नीला या बैंगनी होने लगता है। फिर ये पत्ते झड़कर पेड़ से गिर जाते हैं। लेकिन जैसे ही पौधों को उपयुक्त भोजन मिलने लग जाता है, तो नये पत्ते निकल आते हैं।

मध्य भारत में सर्दी खत्म होते ही बसन्त का मौसम शुरु हो जाता है जो कि फरवरी से अप्रैल तक रहता है। वहीं कश्मीर में पतझड़ का ये मौसम सर्दियों के सितम्बर से लेकर दिसम्बर के महीने तक रहता है। पतझड़ के मौसम में अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँचकर चिनार के सूखते पत्ते कई रंग बिखेर देते हैं। कश्मीर में पतझड़ की इस अनोखी खूबसूरती को देखने वाला हर इन्सान इसका कायल है।

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लाहौर से लेकर आये थे जयपुर के राजा मान सिंह इस चीज को

मीनाकारी एक पुरानी और काफी प्रचलित कलाकारी है| असल में मीना नाम फारसी के शब्द मीनू से लिया गया है, जिसका अर्थ है स्वर्ग| ईरान के कारीगरों ने इस कला का अविष्कार किया था | भारत का जयपुर भी मीनाकारी की कला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है |

जयपुर में मीनाकारी की कला महाराजा मानसिहं द्वारा लाहौर से लाई गई थी| जयपुर में मीनाकारी का कार्य सोने, चांदी और पीतल के अभूषणों के अलावा मार्बल से बनने वाले इंटीरियर सजावटी समान और खिलौनों पर भी किया जाता है |  जयपुर के अलावा राजसमंद जिले में भी मीनाकारी का काम किया जाता है.

मीनाकारी में मुख्य रूप से फूल-पत्तियां और जानवरों के पैटर्न को ही शामिल करके उन पर आर्टवर्क किया जाता है, जिसके लिए हरे, लाल, नारंगी और गुलाबी रंगो का इस्तेमाल किया जाता है|मीना शीशे जैसे पत्थर के रूप में होता है, जिसे पीसकर बारीक पाउडर बनाया जाता है| इस पाउडर में पानी, तेल और गोंद को मिलाकर एक गाड़ा घोल तैयार किया जाता है|उत्कीरित डिज़ाइन में इस घोल से नकाशी की जाती है|इसके बाद वस्तु को ज्यादा तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे मीना वस्तु पर चिपक जाता है.

संगमरमर पर मीनाकारी द्वारा इंटीरियर डैकोरेशन का सामान, किचन क्रॉकरी और खिलौने भी तैयार किए जाते हैं | नकाशी को आप हाथ लगाकर महसूस भी कर सकते है जो पत्थर में जड़ी नहीं बल्कि उभार में नजर आती है | मीनाकारी से कटोरियां, मोमबत्ती स्टैंड, फ्रेम, फ्लावर पॉट, चम्मच व अन्य सजावटी वस्तुएं बनाई जाती है | मीनाकारी करने मे काफी समय और मेहनत लगती है | हमें शिल्पकारियों के काम को बढ़ावा देना चाहिए ताकि विरासती चीजों को कायम रखा जा सके|अगर आप घर में एंटीक लुक की डैकोरेशन चाहते है, तो इंटीरियर में ऐसी चीजें को शामिल करे|

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जीवन बेहतर बनाने के लिए 6 टिप्स

अपने जीवन में ज्यादातर लोग दिन के 24 घंटों में से कई घंटे मोबाइल का उपयोग करने और टी.वी. देखने में बीता देते हैं। यहां हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं, जिससे आपका जीवन बेहतर हो जायेगा और साथ ही  साथ आप ये समझ पाएंगे कि कैसे  दिन के  24 घंटों  को सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा  सकता  हैं।

सुबह जल्दी उठें

सुबह जल्दी उठना दिन को बेहतर बनाने का अच्छा उपाय है। ऐसे में आप दिन की योजना बना सकते हैं। काम का  समय शुरू होने के 2-3 घंटे पहले उठने से पूरा दिन व्यवस्थित रहता है और  काम को लेकर हड़बड़ी नहीं होती।

सैर के लिए

आप रोज कई घंटे कंप्यूटर के सामने बैठकर बिताते है, इससे शरीर तो सुस्त होता ही है, और तनाव भी बढ़ता है। इसलिए जरूरी है, कि रोज कुछ समय आप सैर के लिए जाऐ। सैर करने से ह्रदय सही ढंग से काम करता है, जिससे रक्त और ऑक्सीजन पुरे शरीर में पहुंचती है, और आप ताज़गी महसूस करते हैं।

कम करे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग

  एक अध्ययन के मुताबिक हर एक व्यक्ति औसतन आठ घंटे मोबाइल, टी.वी., कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ बिताता है। यदि यह समय कसरत करने, पड़ने-लिखने, संगीत सुनने जैसे कामों में लगाया जाये तो इससे आपका दिन व्यर्थ नहीं जाएगा और सेहत पर बुरा प्रभाव भी नहीं पड़ेगा।

एक काम पूरा होने के बाद ही दूसरा शुरू करें

दिन का बढ़िया उपयोग करने का एक तरीका यह भी है, कि आप तब तक दूसरा काम शुरू ना करे जब तक पहला खत्म न कर लें। एक समय पर कई काम करने से समय और ऊर्जा की बर्बादी होती है। रोज अपने कामों की लिस्ट बनाएं, जो मुश्किल कामों से शुरू होकर आसान पर खत्म होते हो।

  ‘ ना‘ कहना सीखें

यदि आप हर काम को हां कहकर उसे करने की कोशिश करेंगे तो आपका बोझ बढ़ेगा। इन्कार करना आपकी कमजोरी नहीं दर्शाता बल्कि, यह अपने काम को एहमियत देने की प्रक्रिया है।

छुटूटी के दिन करे प्लानिंग

विशेषज्ञों का मानना है, कि रविवार आराम करने का दिन होता है, लेकिन यदि आप रविवार के आखिरी कुछ घंटे अगले दिन और सप्ताह की योजना बनाने में बिताएंगे तो आपको इससे लाभ मिलेगा।

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10 बड़े अंतर जिनकी वजह से अलग-अलग हैं हॉलीवुड-बॉलीवुड

 

10 बड़े अंतर जिनकी वजह से अलग-अलग हैं हॉलीवुड-बॉलीवुड

भारत के महानगर मुंबई में स्थित भारतीय सिने जगत इंडस्ट्री को बॉलीवुड के नाम से भी जाना जाता है. वहीँ दूसरी और, संयुक्त राज्य अमेरिका के लॉस-एंजलिस महानगर के पड़ोस में स्थित हॉलीवुड को विश्व सिनेमा की राजधानी भी कहा जाता है.

एक और जहाँ उच्च-तकनीक और अर्थव्यवस्था के कारण हॉलीवुड में बेहतरीन एनीमेशन, साइंस फिक्शन  और एपिक(Epic) और वार (War) मूवीज बनती हैं वहीँ बॉलीवुड में ड्रामा, रोमांस, एक्शन आदि पर आधारित फ़िल्में प्रमुख होती हैं. जाहिर है यहाँ हम बात करेंगे उन बातों की जो बॉलीवुड और हॉलीवुड को एक दूसरे से अलग करती हैं. यदि आप हॉलीवुड और बॉलीवुड, दोनों तरह की फिल्मों के शौकीन हैं, तो यकीनन ये अंतर आपने भी महसूस किये होंगे.

ये रहे वह 10 अन्तर, जो एक बॉलीवुड फ़िल्म को, हॉलीवुड फ़िल्मों से अलग करते हैं.

तकनीक का अंतर

हॉलीवुड में बनने वाली फिल्मों में फिल्म के फिल्मांकन से लेकर फिल्म की प्रमोशन तक में उच्च तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है.

आमतौर पर हॉलीवुड में हल्के रंगों का प्रयोग किया जाता है. वहीं, बॉलीवुड की अधिकतर फिल्मों में Costume से लेकर सेट्स तक, सबकुछ एकदम रंगीन और तड़क-भड़क होता है.

2. हॉलीवुड में आम पारिवारिक फिल्मों में पारंपरिक चीज़ें नहीं दिखाई जातीं. इनमें सबकुछ आधुनिक तरीके में दिखाया जाता है. इसके उलट, बॉलीवुड में शादी से लेकर गोदभराई तक, दीपावली से लेकर होली तक, सबकुछ पारंपरिक अंदाज़ में ही दिखाया जाता है.

3. बॉलीवुड की फिल्मों में इमोशनल सीन में, कलाकार खुल कर अपनी भावनाएं दिखाते हैं. जबकि हॉलीवुड में कलाकार अपने चेहरे पर बहुत ज़्यादा भाव नहीं लाते.

4. हॉलीवुड में गानें बैकग्राउंड में बजते हैं, लेकिन बॉलीवुड में ये कहानी का हिस्सा होते हैं, जिन पर फ़िल्म में सब लोग नाच कर अपनी भावनाओं का आनंद लेते है.

5. हॉलीवुड की कॉमेडी फ़िल्म में, मुख्य किरदार की लाइफ़ में होने वाली अजीबोगरीब घटनाएं दिखा कर हंसाया जाता है, तो दूसरी तरफ़ बॉलीवुड फ़िल्मों की कॉमेडी Loud होती है.

बॉलीवुड फ़िल्मों में चुटकुलों और कलाकारों के आपसी संवाद के माध्यम से दर्शकों को हंसाने की कोशिश की जाती है.

6. हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों इन्डस्ट्री में बनने वाली साइन्स फ़िक्शन फ़िल्मों में काफ़ी अन्तर होता है. हॉलीवुड की सुपरहीरो वाली फ़िल्म, तकनीकी तौर पर काफ़ी बेहतर होती हैं. वहीं बॉलीवुड की साइन्स फ़िक्शन फ़िल्में, बचकाने कॉस्ट्यूम और बेकार विज़ुअल इफ़ेक्ट्स के कारण कॉमेडी फ़िल्म ज़्यादा लगती हैं.

7. हॉलीवुड फ़िल्म में Couple का एक-दूसरे को छोड़ देना आम बात होती है. बॉलीवुड फ़िल्मों में ऐसा नहीं होता है, बॉलीवुड में हीरो और हीरोइन को सिर्फ़ मौत ही जुदा कर सकती है.

8. हॉलीवुड फ़िल्मों की अभिनेत्रियां पतली, लम्बी और फ़िट होती हैं. उनका शरीर बिल्कुल परफ़ेक्ट होता है. लेकिन बॉलीवुड की अभिनेत्रियां ज़ीरो साइज़ में विश्वास नहीं करती हैं. इनका ज़्यादा फ़ोकस चेहरे की सुन्दरता पर होता है.

9. हॉलीवुड में फ़िल्म मशहूर होती हैं. बॉलीवुड में फ़िल्म स्टार मशहूर होते हैं. हॉलीवुड में अगर फ़िल्म अच्छी है, तो उस फ़िल्म के अभिनेता भी मशहूर होते हैं और स्टार बन जाते हैं. जबकि बॉलीवुड में दर्शक तभी फ़िल्म देखने जाते हैं, जब फ़िल्म का स्टार मशहूर हो. बॉलीवुड फ़िल्म स्टार से मशहूर होती है.

10. हॉलीवुड फ़िल्में आमतौर पर जो Message देना चाहती हैं, उसका संकेत भर देती हैं. उसके बाद दर्शक अपने आपको Message से जोड़ लेते हैं. जबकि बॉलीवुड फ़िल्मों में मेसेज काफ़ी क्लियर होता है.

अगर देखा जाए तो हॉलीवुड की फ़िल्में हमारे दिमाग़ से बात करती हैं, जबकि बॉलीवुड फ़िल्में सीधे दिल को छू जाती हैं. हर इन्डस्ट्री और फ़िल्म का अपना एक दर्शक वर्ग होता है. भारत को फिल्म इंडस्ट्री में काफ़ी धनी कहा जा सकता है, क्योंकि यहां पर हर तरह के सिनेमा और संस्कृति को पसंद करने वाले लोग रहते हैं. बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों फ़िल्म इन्डस्ट्री अपने आप में बेहतरीन हैं.

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