चीन का शादी बाज़ार

मध्य बीजिंग के टैम्पल ऑफ हैवन पार्क में रविवार के दिन लगने वाले बाजार में खासी हलचल रहती है । पक्के फर्श पर क्रमबद्ध ढंग से कई पर्चे रखे हैं। दरअसल, इन सभी में शादी के विज्ञापन लिखे हैं। जिनमें से एक पर लिखा है, ‘1988 में जन्मी लड़की, कद 168 सेंटीमीटर, वजन 55 किलोग्राम, नर्स।’

इस बाजार में विवाह योग्य लड़के-लड़कियों के माता-पिता अपने बच्चों के लिए वर-वधू की तलाश में पहुंचते हैं। चीनी समाज का सम्पूर्ण हिस्सा बनने के लिए विवाह का बेहद ज्यादा महत्व माना जाता है। चीनी समाज का यह एक ऐसा दृष्टिकोण है।

जिसकी वजह से अकेली महिलाओं और समलैंगिक लोगों को अंतहीन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चीनी महिलाओं से 30 वर्ष की उम्र से पहले शादी कर लेने की उम्मीद की जाती है और 90 प्रतिशत महिलाओं के साथ ऐसा होता है।

चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार वहां महिलाओं की शादी की औसत उम्र 26 वर्ष के आस-पास है। पार्क में फर्श पर रखे पर्चों में विवाह के अधिकतर विज्ञापन इस औसत उम्र से कुछ अधिक के दिखाई देते हैं। ज्यादातर 1987, 1988 या 1989 में जन्मे लड़के-लड़कियां हैं।

कुछ पर्चों पर कोड भी लगे हैं जिसे माता-पिता अपने स्मार्टफोन्स से स्कैन करके सीधे – सोशल नेटवर्किंग वैबसाइट वी-चैट पर उक्त लड़के या लड़की के पेज पर पहुंच सकते हैं।

माता-पिता के प्रयासों से अनजान बच्चे

डिजीटल युग में यह शादी का बाजार है परंतु अक्सर बच्चों को पता ही नहीं होता कि उनके माता-पिता यहां उनके लिए जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं।

सिंगल के लिए कठिनाइयां

शादी को लेकर दीवाने चीनी समाज में अकेले रहने वाले लोगों को कई समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। करीब 20 करोड़ चीनी सिंगल हैं। उनमें से ज्यादातर पुरुष हैं। देश के सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2020 तक महिलाओं की तुलना में वहां विवाह योग्य आयु वाले पुरुषों की संख्या 2 करोड़ 40 लाख ज्यादा हो जाएगी।

हालांकि, पुरुषों के बजाय 27 वर्ष से ज्यादा उम्र की अविवाहित महिलाओं को अस्वीकृत का दर्जा दे दिया जाता है जबकि उम्र के 30 और 40 के दशक में भी पुरुषों का अविवाहित रहना कलंक नहीं माना जाता है।

चीन में विवाह को एक बुनियादी आवश्यकता के रूप में देखा जाता है और अविवाहित होने का मतलब निकाला जाता है कि आप खुद अपना ख्याल नहीं रख सकते हैं। यहां तक कि अच्छी नौकरी व आर्थिक रूप से स्वतंत्र उच्च शिक्षित महिलाएं भी वहां शादी करने का दबाव झेलती हैं।

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सिर्फ 5 महीनों में 28 वर्षीय आप्रवासी बन गया करोड़पति

किसी की लाईफ में कब क्या हो जाए कोई नहीं जानता। और कई बार एेसे सुखद इत्तफाक भी हो जाते हैं कि इंसान हैरान हो जाता हैं। एेसा ही हुआ कनाडा में रहने वाले एक 28 वर्षीय अप्रवासी अफ्रीकी युवक के साथ जिसने पांच महीने में दो बार लॉटरी में बंपर इनाम जीता और 5 महीनों में करोड़पति बन गया । मेलहिग इन दोनों लॉटरियों में कुल मिलाकर 3.5 मिलियन कैनेडियन  डॉलर (2.7 मिलियन अमरीकी डॉलर) यानी करीब 20 करोड़ रुपए जीत चुके हैं।

इसी साल अप्रैल में मेलहिग ने एक लॉटरी का टिकट खरीदा था, जिसमें उन्होंने 1.5 मिलियन कनाडाई डॉलर यानी करीब 8 करोड़ 30 लाख रुपए जीते थे। इसके बाद पिछले महीने उन्होंने एक और लॉटरी का टिकट खरीदा और किस्मत देखिए कि मेलहिग ने एक बार फिर 2 मिलियन डॉलर (कनाडाई) यानी करीब 11 करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि जीत ली।

मेलहिग दो साल पहले पश्चिमी अफ्रीका से काम की तलाश में कनाडा आए थे। लॉटरी जीतने के बाद पश्चिमी कनाडा लॉटरी निगम ने जब मेलहिग से पूछा कि वह इतने सारे रुपए का क्या करेंगे, तो उन्होंने कहा कि मैं अपनी अंग्रेजी सुधारना चाहता हूं और मैं बढ़ईगीरी जैसे कुछ उपयोगी काम भी सीखना चाहता हूं। साथ ही उन्होंने बताया कि वह एक कार धुलाई या गैस स्टेशन खरीदने की सोच रहे हैं और स्कूल भी जाना चाहते हैं।

पिछली बार जब उन्होंने 1.5 मिलियन डॉलर जीते थे, तब उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों के लिए एक घर खरीदा था। लॉटरी के अधिकारियों ने बताया कि मेलहिग ने जब पहली बार लॉटरी का  इनाम जीता था तब उनका वो 90,000वां मौका था, जबकि दूसरी बार उन्होंने एक ही बार में बंपर इनाम जीत लिया।

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आपके साथ ना हो धोखा उसके लिए गाड़ी लेने से पहले रखें इन बातों का ख्याल

अगर आप कोई नई गाड़ी ख़रीदने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले आप उस गाड़ी की अच्छे से टैस्ट ड्राइविंग कर लें, जिससे आपको पता चलेगा कि क्या वह गाड़ी आपकी जरूरतों को पूरा कर सकती है, या फिर नहीं? टैस्ट ड्राइविंग करते वक्त आपको कुछ ख़ास बातों का ध्यान रखना होगा। आज हम आपको इन्हीं ख़ास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं.

* सबसे पहले अपनी जरूरतें तथा पसंद पर खरी उतरने वाली सभी कारों की एक सूची बनाएं। इसके बाद एक-एक करके सभी कारों की टैस्ट ड्राइविंग करें।

* लम्बी टैस्ट ड्राइविंग पर जाएं क्योंकि इससे आपको कार में अधिक वक्त गुजारने का अवसर मिलेगा। यह सुनिश्चित बनाएं कि इस दौरान आप धीमी गति से ही ड्राइविंग करें, और शहर के ट्रैफिक से लेकर हाईवे पर कार को चलाये ।

* अनुभवी मित्र या किसी एक्सपर्ट मैकेनिक को अपने साथ चलने को कहें क्योंकि, वे आपकी कमियों को भी पकड़ सकेगा।

*टैस्ट ड्राइविंग पर जाने से पहले देखें कि कार पर किसी तरह का डैट, खरोंच आदि तो नहीं है| कुछ भी नुक्सान हो तो सेल्समैन को बता देना चाहिए ताकि बाद में उनका दोष आप पर न लग सके।

*कम्फर्ट, स्पोर्ट आदि विभिन्न ड्राइविंग मोड्स की जांच करें।

*कार के चलते ही तथा ड्राइविंग के दौरान भी उसकी एक्सीलिरेशन (गति पकड़ने की क्षमता) की भी जांच करें। इससे इंजन की ताकत का आपको पता चल जायेगा।

*किसी ट्रैफिक रहित सड़क पर टर्निग सर्कल (कार के मुड़ने की क्षमता) की जांच भी कर लें।

*ए.सी. तथा ऑडियो बंद करके कार के टायरों, हवा तथा इंजन की आवाज अलग-अलग तरह की सड़कों पर सुनने की कोशिश करें।

*कार के सेफ्टी फीचर्स पर भी ध्यान दें। उसमें कितने एयर बैग हैं, एक्टिव सेफ्टी इलैक्ट्रॉनिक्स तथा एडजस्टेबल सीट बेल्ट्स आदि बातों की पड़ताल करें।

* सन वाइजर, ग्लव बॉक्स, सीटों से लेकर कार की बॉडी आदि की गुणवत्ता तथा मजबूती पर भी आपको ध्यान देना होगा।

* अपनी सूची की सभी कारों की टैस्ट ड्राइविंग करने के बाद इनकी की आपस में तुलना करें और उसके आधार पर ही किसी नतीजे पर पहुंच कर कार को खरीदें।

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शैतान पहाड़ी तोते “किया” के बारे में हैरतअंगेज़ तथ्य

न्यूजीलैंड के पर्वतीय इलाकों में पाए जाने वाले ‘किया’ (Kea) विश्व के एकमात्र पहाड़ी तोते हैं। ये तोते बेहद निडर, चतुर और शरारती हैं। पर्वतीय सड़कों से गुज़रने  वाली कारों की छतों पर धम्म से बैठ कर उनकी सवारी करने से लेकर रेस्तरां से खाना चुराने और मस्ती में लोगों की चीजों को तहस-नहस करने में इन्हें खूब मजा आता है।

लगभग एक किलोग्राम वजन और आधा मीटर लम्बाई वाला एक “किया” तोता एक भेड़ को मार सकता है। इसकी चोंच एक बाज जैसी नुकीली और पंजे बेहद मज़बूत होते हैं।

उन्हें कीलें और चमकती धातु की चीजें आकर्षित करती हैं। इनमें से कई इसी चक्कर में मारे भी जाते हैं क्योंकि इन्हें वे इमारतों की छतों से उखाड़ कर निगल लेते हैं। कुछ अन्य पर्यटक स्थलों पर कारों की छत पर सवारी करते हुए उड़ान भरने के प्रयास में कारों के आगे गिर कर कुचले भी जाते हैं।

कई लोगों को इन पक्षियों से खासी परेशानी महसूस होती है। एक लोकप्रिय घटना में दो पर्वतारोही पहाड़ी पर बनी एक वीरान झोंपड़ी में तब कैद हो गए थे जब उनके सो जाने के बाद एक पहाड़ी तोते ने बाहर से कुंडी लगा दी थी। जागने पर करीब 1 घंटे की मशक्कत के बाद किसी तरह से वे दरवाजा खोल सके थे।

किया कंज़र्वेशन ट्रस्ट के ओर-वॉकर के अनुसार खुले जंगलों या पहाड़ों पर तो इन तोतों के बीच बहुत अच्छा लगता है लेकिन जब आप वीरान कैबिन में सोए हों और वे बाहर से कुंडी लगा दें, खिड़की पर पत्थर फेंक जाएं या कार की रबड़ नोच लें तो इन पर गुस्सा आना स्वाभाविक है।

न्यूजीलैंड में यूरोपियों के बसने के वक्त से ही इन पहाड़ी तोतों और इंसानों के बीच टकराव जारी है। 19वीं सदी में किसान का सब्र टूट गया जब वे पहाड़ियों पर उनकी भेड़ों को मारने लगे। सरकार ने उनके मारने पर ईनाम घोषित कर दिया और 100 वर्ष बाद जब तक इसे हटाया गया डेढ़ लाख से ज्यादा पहाड़ी तोतों को मारा जा चुका था।

अभी भी कई लोग इन्हें परेशानी का सबब ही मानते हैं और गोली से या ज़हर देकर इन्हें मारा जा रहा है। इनकी घटती संख्या को देखते हुए ही इनके संरक्षण के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अधिक शरारतें युवा तोते ही करते हैं और किया कंजर्वेशन ट्रस्ट ने लोगों को युवा तोतों के झुंड से निपटने में मदद के लिए अभियान शुरू किया है।

क्वींसटाऊन स्थित टूरिस्ट रिजॉर्ट से पर्यटकों के लिए हैलीकॉप्टर सेवा चलाने वाली कम्पनी हैलीवर्स को भी पहाड़ी तोतों को अपने हैलीकॉप्टरों से दूर रखने के लिए विशेष उपाय करने पड़ते हैं। पहाड़ी तोते हैलीकॉप्टरों के रोटर पर हमला करने, रबड़ की चीजों को नोचने से लेकर गम्भीर नुक्सान पहुंचा देते हैं।

ऐसे में जंगली इलाकों में हैलीकॉप्टर के ऊपर रात के वक्त वाटर स्प्रिकलर चलाए जाते हैं। हालांकि, इन तोतों को सबसे ज्यादा खतरा शिकारी जीवों से है। चूंकि वे जमीन में घोंसले बनाते हैं, वहां उनके अंडों और नवजात तोतों को टापू पर 19वीं सदी में विदेशों से लाकर छोड़े गए पोसम और स्टोट जैसे शिकारी अक्सर खा जाते हैं।

सरकार ने टापू से इन विदेशी शिकारी जीवों को ख़त्म करने की योजना बनाई है जो पहाड़ी तोते जैसे मूल प्रजाति के कई जीवों के लिए खतरा बने हुए हैं परंतु पहाड़ी तोतों के संरक्षण के लिए अभी और बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। जिनकी संख्या घटते हुए अब केवल 5 हजार तक पहुंच गई है।

किया के बारे में रोचक तथ्य

  • कुछ वैज्ञानिक यहां तक ​​सोचते हैं कि “किया” 4 साल के बच्चे की तरह होशियार हो सकते हैं!
  • केवल 27% किया चूजे एक वर्ष से अधिक समय तक जीवित रह पाते हैं।
  • किया के समूह में 10-13 तोते होते हैं। हालाँकि जब प्रजनन के समय संभोग करने का समय आता है तो 100 से अधिक के झुंड भी बन सकते हैं।
  • वे अत्यधिक बुद्धिमान होते हैं और उन्हें वस्तुओं को एक निश्चित क्रम में रखने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है।
  • कुछ किया ने एक निर्माणाधीन घर से काफी सारी कीलों को चुरा लिया और जब इन्हें खोजा गया तो वे एक पेड़ के नीचे क्रम- वार रखी मिलीं, जिन्हें छोटी, से बड़ी के क्रम में तरतीब से रखा गया था।
  • इन्हें नियमित रूप से उन्हें सामान चुराते और विंडस्क्रीन वाइपर, पासपोर्ट और स्की जैसी वस्तुओं को नष्ट करते देखा जाता है।
  • किया को उनके चुटीले व्यक्तित्व के कारण ‘पहाड़ का जोकर’ (clown of the mountain) भी कहा जाता है।
  • किया के पंखों का फैलाव १ मीटर तक होता है

अच्छी होती हैं यह कुछ बुरी आदतें

ऐसी कई आदतें हैं, जिनसे हमको बचपन से दूर रहने को कहा जाता है| और, इन आदतों को सेहत के लिए खराब भी माना जाता है। हालांकि, हो सकता है कि, इनमें से कुछ आदतें वास्तव में उतनी बुरी ना भी हो जितना उनके बारे में दावा किया जाता है। हम आपको कुछ ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको माना तो बुरा जाता है, परंतु आपके लिए वह काफी फायदेमंद हो सकती हैं।

नाखून चबाना

अंगूठा चूसने या नाखून चबाने वाले बच्चों को बड़े होने पर एलर्जी की सम्भावना काफी कम रहती है| क्योंकि, उनके शरीर का प्रतिरोधी तंत्र एक खास ढंग से विकसित हो जाता है। इस संबंध में शोध करने वाले प्रोफैसर मैल्कमर सीएर्स के अनुसार वह इन आदतों को प्रोत्साहित करने की सलाह नहीं देते हैं, परंतु इतना जरूरी है, कि इनके भी कुछ तो लाभ हैं।

आईसक्रीम

वैज्ञानिकों के अनुसार आईसक्रीम खाना तनावमुक्त होने का एक बढ़िया जरिया है । आईसक्रीम में दूध तथा क्रीम मिक्सचर में बड़ी मात्रा में एमिनो एसिड ट्रिप्टोफैन होता है, जो आपके दिमाग को शांत करने में मदद करता है। इससे व्यक्ति की नींद में भी काफी सुधार होता है।

शराब

एक अध्ययन के अनुसार जो लोग रोज एक गिलास वाइन या बियर पीते हैं। उन्हें डायबिटीज का खतरा काफी कम होता है। 10 साल तक 3 हजार से अधिक लोगों पर नज़र रखने के पश्चात वैज्ञानिकों ने पाया है कि, कम मात्रा में शराब पीने से इंसुलिन के प्रति कोशिकाओं की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। इस बीच डेनमार्क में हुए एक अध्ययन के अनुसार रोज दो छोटे ग्लास वाइन पीने से एलजाइमर रोगियों की मौत का ख़तरा भी कम हो सकता है।

दिन में सपने देखना

अमेरिका की नैशनल एकैडमी ऑफ साइंसिज में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार दिन में सपने देखने जैसे एहसास से दिमाग की ताकत बढ़ सकती है। स्कैन्स से पता चलता है कि, जब हमारा मस्तिष्क झपकी आने पर भटकने लगता है. तो समस्याएं सुलझाने का काम करने वाला ‘एग्जीक्यूटिव नैटवर्क’ बेहद सक्रिय हो जाता है।

पास्ता

इतालवी शोधकर्ताओं ने पाया है कि, पास्ता के सेवन से मोटापा कम हो सकता है। इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि, पास्ता खाने वाले अनेक लोग इसे स्वस्थ आहार के तहत खाते हैं। वैसे 23 हजार लोगों के खान-पान का विश्लेषण करने के बाद पाया गया है, कि मोटापा कम करने में यह वाकई कारगर है।

दौड़ना

एक लोकप्रिय धारणा यह भी है कि, दौड़ना घुटनों के लिए अच्छा नहीं है, इसके ही विपरीत एक अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि, दौड़ने से घुटनों की सोजिश कम हो सकती है। दौड़ने से पहले तथा बाद में 18 से 35 वर्ष के लोगों के घुटनों में मौजूद द्रव्य की जांच करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया है कि, आधे घंटे बाद इनमें मौजूद सोजिश पैदा करने वाले तत्वों का घनत्व कम हो गया था। उनका यह भी कहना है कि, नियमित रूप से दौड़ने से ओस्टियोआर्थराइटिस से भी अधिक वक्त तक बचा जा सकता है।

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ऐसे रखें अपने दिमाग को शांत और तनाव मुक्त

 

ऐसे रखें अपने दिमाग को शांत और तनाव मुक्त

मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही महत्वपूर्ण है। इसलिए खुद को मानसिक तौर पर उत्तेजित और व्यस्त रखना बहुत जरूरी है। यहां पेश हैं कुछ ऐसे टिप्स जो आपको शांत रखने तथा दिमागी क्षमता बढ़ाने में सहायक होंगे।

  • वैज्ञानिकों का कहना है कि जब हम संतुलन में नहीं होते या बेचैन होते हैं तो हमारे दिमाग में प्रत्यक्ष परिवर्तनों के चलते तनाव देखने को मिलता है। इस तनाव से छुटकारा पाने में शारीरिक गतिविधि और मानसिक नियंत्रण की जरूरत होती है। यह आसानी से सीखा जाने वाला कौशल है। किसी मानसिक समस्या को सुलझाने की अपेक्षा तनाव मुक्त होना अधिक बेहतर है ताकि दिमाग को अनुशासन में रखा जा सके।
  • इसकी शुरूआत इस बात से बढ़िया की जा सकती है कि आप तनाव के कारणों को जाने और उन्हें खुद से दूर रखें। दिमाग को अनुशासन में रखने में योग और मैडीटेशन बहुत बढ़िया उपाय है।
  • आप डांस क्लासेज ले सकते हैं, किसी प्रार्थना सभा में शामिल हो सकते हैं या रनिंग करें जो तनाव के लिए बहुत बढ़िया रहती है।
  • अपने कंधों या पीठ की मांसपेशियों की गांठे खोलने के लिए एक्यूप्रेशर सैशन करवाएं।
  • अच्छी नींद लें। जब हम नींद में होते हैं तो हमारा शरीर नई ऊर्जा प्राप्त करता है और उपचार करता है। नींद से कुछ घंटे पहले डिजीटल मीडिया को बंद करके कोई किताब पढ़ें या मैडीटेशन करें।
  • स्नान करने से शरीर को रिलैक्स होने में मदद मिलती है, साथ ही यह शांति भी देता है।
  • एक सुगंधित बाथटब में प्रवेश करें। वाटर थैरेपी आपके लिए बहुत बढ़िया है।
  • बादाम, अखरोट, मेवे और किशमिश का सेवन करें। ये नाड़ियों को पोषित करते हैं।
  • अपना पारम्परिक रात का खाना छोड़ दें। इसकी बजाय रात में दलिए के साथ आगैनिक मिल्क का सेवन करें जो आपको आरामदायक नींद देगा।
  • सेब, चुकंदर, अदरक, गाजर और पुदीने के पत्तों का सेवन करें।

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महिमा चौधरी एक डेब्यू फिल्म से बनी थी रातों रात स्टार

बॉलीवुड में हर दिन सैकड़ों-हजारों लोग अपनी किस्मत आज़माने आते हैं लेकिन यहां कुछ ही लोगों के सितारे चमक पाते हैं। बॉलीवुड की ऐसी ही एक स्टार एक्ट्रेस में से एक हैं महिमा चौधरी। आज उनका 45वां जन्म दिन है। आइए जानते है उनके जन्म दिन पर उनके बारे में कुछ रोचक बातें:

  • महिमा चौधरी का जन्म 13 सितंबर 1973 को दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल में हुआ था।
  • महिमा चौधरी का असली नाम रितु चौधरी है। लेकिन वो खुद को परदे पर महिमा चौधरी कहलाना पसंद करती हैं। प्रसिद्ध निर्देशक सुभाष घई ने रितु चौधरी नाम को बदलकर महिमा चौधरी रख दिया था।
  • महिमा चौधरी ने अपनी हाई-स्कूल तक की पढ़ाई डाउन हिल स्कूल से पूरी की। उसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई लोरेटो कॉलेज से पूरी की।
  • साल 1990 में वह पढ़ाई छोड़कर मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर सँवारने लगी। उन्होंने अपने मॉडलिंग करियर के दौरान कई विज्ञापनों में भी काम किया। उन्होंने आमिर खान, ऐश्वर्या राय जैसे सितारों के साथ भी ऐड शूट किए।
  • यहीं से उन पर बॉलीवुड के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर सुभाष घई की नजर पड़ी और महिमा को डेब्यू फिल्म ‘परदेस’ से बॉलीवुड में ब्रेक मिला।
  • इस फिल्म में महिमा के किरदार को काफी पसंद किया गया। उन्हें रातों रात स्टार का दर्जा मिल गया। महिमा को बेस्ट डेब्यू ऐक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।
  • बताया जाता है कि महिमा और सुभाष के बीच कॉन्ट्रैक्ट हुआ था कि महिमा 5 साल में सुभाष के लिए 3 फिल्में करेंगी। ऐसा न करने पर वह अपनी इनकम का 35% हिस्सा उनको देंगी।
  • शुरुआत में एक दूसरे की खूब तारीफ करने वाले महिमा और सुभाष बाद में इसी कॉन्ट्रैक्ट को लेकर कोर्ट तक पहुंच गए थे। सुभाष ने उनको विदेश में परफॉर्म करने से रोका था तो महिमा ने कॉन्ट्रैक्ट तोड़कर ताल में उनकी जगह ऐश्वर्या को लेने का आरोप फिल्म मेकर पर लगाया था।
  • महिमा चौधरी अपने अफेयर की खबरों को लेकर भी खूब चर्चा में रहीं। महिमा चौधरी का फेमस टेनिस प्लेयर लिएंडर पेस के साथ रिलेशन रहा, लेकिन छह साल बाद दोनों का अलगाव हो गया।
  • मीडियो रिपोर्ट्स की मानें तो इस रिश्ते के टूटने की वजह संजय दत्त की दूसरी पत्नी रिया पिल्लई थीं। दरअसल, लिएंडर की जिंदगी में रिया के आने के बाद ही महिमा चौधरी का ब्रेकअप हो गया था। हालांकि, रिया का भी इस टेनिस खिलाड़ी से शादी के बाद तलाक हो गया था।
  • 2006 में आर्किटेक्ट बॉबी मुखर्जी से शादी करके महिमा चौधरी ने खूब सुर्खियां बटोरीं। हालांकि, उन दिनों अफवाहों का बाजार इस खबर से काफी गर्म था कि प्रेग्नेंसी की वजह से महिमा ने जल्दबाजी में शादी की।
  • उन्होंने आर्किटेक्ट और बिजनेसमैन बॉबी मुखर्जी से शादी की। दोनों की एक बेटी अरियाना हैं। महिमा और बॉबी की ये शादी ज्यादा दिनों नहीं चली और 2013 से वो अपने पति से अलग रहने लगीं।
  • ‘परदेस’ फिल्म के बाद उन्होंने फिल्मों में काफी चैलेंजिंग किरदार निभाए। महिमा चौधरी ने ‘दिल क्या करे’, ‘दाग: द फायर’, ‘खिलाड़ी 420’, ‘प्यार कोई खेल नहीं’, ‘लज्जा’, ‘धड़कन’, ‘बागबान’, ‘एलओसी कारगिल’, ‘तेरे नाम’, ‘दोबारा’, ‘जमीर’, ‘गुमनाम द मिस्ट्री’ और ‘डार्क चॉकलेट’ समेत कई फिल्मों में काम किया है।
  • फिल्में छोड़ने के बाद महिमा चौधरी रियलिटी टीवी शोज़ करने लगीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपना करियर खत्म होने के पीछे इसे भी जिम्मेदार बताया। महिमा ने कहा कि सिंगल मदर होने की वजह से फिल्मों में काम करना काफी मुश्किल था। पैसे कमाने के लिए वो इवेंट्स में जाने लगीं। साथ ही रियलिटी टीवी शोज करने लगीं। जिससे उनका फिल्मी करियर खत्म हो गया।

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9 वर्षीय बच्चे का एक अनोखा आविष्कार जो परीक्षा देने में बहुत काम आएगा

जम्मू-कश्मीर के एक 9 वर्षीय बच्चे ने एक ‘काऊंटिंग पैन’ का आविष्कार किया है। गुरेज घाटी के मुजफ्फर अहमद खान का यह पैन शब्दों को गिन सकता है, जिसे ‘काऊंटिंग पैन’ का नाम दिया गया है।

हाल ही में राष्ट्रपति भवन में इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप कार्यक्रम के दौरान इस पैन को प्रदर्शित किया गया था। इस कार्यक्रम को एन.आई.एफ. (नैशनल इनोवेशन फाऊंडेशन) ने आयोजित किया था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुजफ्फर के इस आविष्कार पर उसकी खूब तारीफ की और उसे ईनाम भी दिया।

मुजफ्फर बताता है कि, “पैन के पीछे की ओर एक केसिंग (कवर) लगी है। जैसे ही कोई लिखना शुरू करता है तो, तबी से शब्दों की गिनती शुरू होने लग जाती है। जो छोटे एल.सी.डी. मॉनिटर पर दिखाई देती है। इसके साथ ही शब्दों की गिनती को किसी मैसेज द्वारा मोबाइल पर भी देखा जा सकता है।”

तीसरी कक्षा में पढ़ रहे इस बच्चे के अनुसार उसके दिमाग में इस अनूठे पैन का विचार तब आया जब पेपर में तय किये गए शब्दों को कम लिखने की वजह से उसको कम नम्बर मिले थे। उसने कहा कि,”पिछले एग्जाम में मुझे न्युनतम अंक मिले क्योंकि मैंने कम शब्द लिखे थे। इससे मैं बेचैन हो गया था और तभी से मैं किसी ऐसी चीज को बनाने के बारे में सोचने लगा जो मेरा वक्त बचा सके। |अंततः मेरे मन में ‘काऊंटिंग पैन’ बनाने का विचार आया।”

उसकी चाची मोहम्मद योनिस लोन ने बताया कि मुजफ्फर का बचपन मुश्किलों से भरा हुआ था। उसे बोलने में दिक्कत होती थी | लेकिन, 5 वर्ष की उम्र में उसने बोलना शुरू कर दिया था। मुजफ्फर का सपना है कि, वह वैज्ञानिक बने और देश के लिए काम करे। यह पैन परीक्षा में छात्रों की मदद कर सकता है| जब निबंध तथा लम्बे उत्तर वाले प्रश्नों को हल करते हुए शब्दों का ध्यान रखना पड़ता है।

एन.आई.एफ. ने इस पैन को बाजार में उतारने का फैसला किया है, और आशा की जा रही है कि यह ‘काऊंटिंग पैन मई से बाजार में उपलब्ध हो सकेगा।

एक रहस्यमयी पत्थर जो बिना किसी सपोर्ट के टिका है ढलान पर

एक रहस्यमयी पत्थर जो बिना किसी सपोर्ट के टिका है ढलान पर

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यह दुनिया आश्चर्यों से भरी हुई है। यहाँ पर ऐसे-ऐसे कारनामे होते हैं, जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं। कई ऐसी रहस्यमयी चीजें सामने आती रहती हैं जिनके रहस्यों को आज तक वैज्ञानिक सुलझा नहीं पाए हैं।दक्षिण भारत में एक शहर है महाबलीपुरम। यह तमिलनाडु राज्य का ऐतिहासिक नगर है। इस शहर में कई बहुत पुरानी जगहें हैं, जो कि दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इन्ही में से एक बहुत ही विशाल और प्राचीन पत्थर है जो अपने आप में एक रहस्य है।

यह पत्थर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यह रहस्यमयी पत्थर करीब 1200  वर्ष  पुराना  है। इस पत्थर की ऊंचाई  20 फुट  और  चौड़ाई  5 फुट है लेकिन ये पत्थर जिस तरह से अपनी जगह पर टिका है, वह इसे अनोखा बनाता है।

यह पत्थर ना ही हिलता है और ना ही लुढ़कता है। वर्ष 1908 में पहली बार यह पत्थर तब खबरों में आया था, जब वहां के गवर्नर ने इस पत्थर को अजीब तरह से खड़ा देखा। उन्हें लगा कि इससे कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

इस कारण उन्होंने करीब 7 हाथियों से इस पत्थर को खिंचवाया लेकिन 7 हाथी भी मिल कर इस पत्थर को इंच भर भी हिला नहीं सके। इस पत्थर के साथ जुड़ी एक दंतकथा भी है कि यह जमा हुआ मक्खन है जो श्री कृष्ण ने अपनी बाल अवस्था में यहां गिरा दिया था।

वही माखन अब पत्थर बन चुका है। तभी लोग इस पत्थर को ‘कृष्ण की मक्खन गेंद’ के नाम से भी जानते हैं। वैज्ञानिक भी अभी तक इस पत्थर के रहस्य को नहीं समझ पाए हैं। यहां तक कि वे यह भी नहीं जान पाए हैं कि यह पत्थर इंसान द्वारा खड़ा किया गया है या प्रकृति द्वारा।

इस तथ्य को लेकर वैज्ञानिक भी असमंजस में हैं। इतना विशाल और वज़नी पत्थर होने के बाद भी यह कैसे सैकड़ों सालों से एक ढलान पर टिका हुआ है, यह किसी रहस्य से काम नहीं है। इस पत्थर को जो भी देखता है, देखकर हैरान हो जाता है।

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गर्दै हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। इस लिए हमें अपने गुर्दों का धयान रखना बहुत जरूरी है| गर्दै शरीर से पानी तथा रासायनिक व्यर्थ पदार्थों को मूत्र के रूप में बाहर निकालते हैं। ये शरीर में विभिन्न तत्वों का संतुलन बनाए रखने का भी अहम काम करते हैं।

कैसे होता है गुर्दों को नुक्सान

गुर्दों को कई वजहों से नुक्सान पहुंच सकता है। शरीर में पैदा होने वाले व्यर्थ पदार्थ ही नहीं, बल्कि व्यक्ति जो कुछ भी खाता या पीता है, चाहे वह दवाई हो, शराब, या  किसी भी तरह का नशा और पाऊडर आदि सब कुछ गुर्दों से होकर ही गुज़रता है।

यही कारण है, कि डॉक्टर हमको दर्द निवारक या आसानी से मिलने वाली अन्य आम दवाओं का सेवन करने से परहेज करने की सलाह देतें हैं| क्योंकि, यह दवाईयां गुर्दों के लिए विषैली साबित हो सकती हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो कोई भी ऐसी चीज जो गुर्दो में छानने की प्रक्रिया में रुकावट पैदा करे चाहे वह गम्भीर इंफैक्शन हो,या फिर कोई चोट हो,आदि गुर्दों पर अतिरिक्त भार डालती हैं।

इसके अलावा अनियंत्रित डायबिटीज तथा उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं भी गुर्दों को क्षतिग्रस्त कर सकती हैं। इनकी वजह से ही गुर्दों को अपनी क्षमता से अधिक कार्य करना पड़ता है, जिससे गुर्दों की रक्त वाहिकाएं चोटिल हो सकती हैं, तथा शुगर की अधिक मात्रा से गुर्दों के नेफ्रोन्स (छननी जैसे हिस्से) भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।

वास्तव में गुर्दें खराब होने की सबसे आम वजहों में से डायबिटीज तथा उच्च रक्तचाप भी शामिल हैं। दूसरी ओर उच्च रक्तचाप भी गुर्दों को नुक्सान पहुंचाने का एक लक्षण हो सकता है| क्योंकि, तब शरीर को खून का प्रवाह तेजी से करना पड़ता है। पानी कम पीने, अत्यधिक शराब पीने से तथा मोटापे की वजह से भी गुर्दें प्रभावित होते हैं।

उपचार

हालांकि, विभिन्न रोगों तथा नुक्सान पहुंचाने वाली गतिविधियों (नशों का सेवन, गम्भीर इंफैक्शन आदि) का गुर्दे ताकत से सामना करते हैं, और समय रहते ही उपयुक्त उपचार होने पर पूरी तरह से ठीक होने की काफी सम्भावनाएं रहती हैं।

डायलिसिस की तकनीक ने गुर्दे फेल हो चुके रोगियों को नया जीवनदान दिया है। डायलिसिस एक मशीन है, जो कृत्रिम गुर्दो की तरह काम करती है। अस्पताल में रोगी के शरीर का रक्त इस मशीन से गुज़ारा जाता है, ताकि वह साफ हो जाए।

ऐसे रोगियों के गुर्दों का प्रत्यारोपण करवाना पड़ता है। गुर्दे सबसे सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किए जाने वाले अंग हैं। सही तरीके तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किए जाने पर गुर्दे का प्रत्यारोपण रोगी को नया जीवन देता है। प्रत्यारोपण के बाद भी सेहत का पूरा ध्यान रखना अति आवश्यक होता है। एक गुर्दा ही जीवनभर स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त होता है।

इस तरह रखें गुर्दो को स्वस्थ

सेहत का अच्छे से ध्यान रखें, रोग होने पर समय रहते उपयुक्त उपचार करवाएं, शारीरिक रूप से सक्रिय रहें, अपने आप दवाइयों के सेवन से परहेज करें, आवश्यकता से अधिक प्रोटीन (जिम वाले) सेवन न करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। गुदों की नियमित जांच करवा कर उन्हें किसी प्रकार के पहुंचे हुए नुक्सान अथवा जोखिम के बारे में जान सकते हैं।

अंग दान का प्रण लें

यह बात भी ध्यान में रखें कि गुर्दो सहित शरीर के महत्वपूर्ण अंगों का दान एक बेहद पुण्य का काम है, जो कई लोगों को जीवनदान दे सकता है।

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