जानिए कौन है तुलसी गौड़ा, जिन्हें कहा जाता है “वन की देवी”

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तुलसी गौड़ा कर्नाटक की हलक्की जनजाति (Halakki Indigenous) से हैं और वह बेहद गरीब परिवार से आती हैं। प्रकृति से अपार प्रेम करने वाली तुलसी अपना ज्यादातर वक्त जंगलों में ही बिताती आई हैं।

जंगल में रहने के साथ-साथ उन्हें जड़ी – बूटियों का अच्छा-खास ज्ञान भी हो गया है साथ ही वृक्षारोपण करने पर उनका जोर रहा है। इसका नतीजा हुआ कि उन्होंने 30 हजार से ज्यादा पेड़-पौधा लगाकर एक पूरा जंगल खड़ा कर दिया।

पर्यावरणविद् तुलसी गौड़ा को उम्र और अनुभव के साथ प्रकृति की इतनी जानकारी हो गई कि उन्हें ‘जंगलों की इनसाइक्लोपीडिया’ तक कहा जाना लगा।

करीब 10 साल की उम्र से वह पर्यावरण संरक्षण का काम कर रही हैं और अपना पूरा जीवन उन्होंने प्रकृति की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया है। नंगे पैर रहने वाली और जंगल से जुड़ी तमाम जानकारियां रखनी वालीं तुलसी गौड़ा हजारों पेड़-पौधे लगा चुकी हैं।

पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रपति भवन में सम्‍मानित की गईं कर्नाटक की 70 वर्षीय आदिवासी महिला तुलसी गौड़ा का नाम अब दुनिया आदर से ले रही है। उन्‍हें पर्यावरण की सुरक्षा में उनके योगदान के लिए सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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जंगलों की इनसाइक्लोपीडिया’ और ‘वन देवी’ जैसे नामों से प्रसिद्ध तुलसी आज तक हज़ारों पौधे लगा चुकी हैं और वन विभाग की नर्सरी की देखभाल करती हैं। अपने काम और पद्मश्री सम्मान मिलने के अलावा एक और वजह से तुलसी गौड़ा सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

दरअसल, सोमवार 8 नवंबर को जब तुलसी गौड़ा राष्ट्रपति से सम्मान लेने पहुंचीं तो उन्होंने पारंपरिक पोशाक पहन रखी थी और वे नंगे पैर थीं। उसी दौरान उनकी एक तस्वीर खिंच गई जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

इसमें पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ‘वन देवी’ को प्रणाम करते दिख रहे हैं। इस तस्वीर के वायरल होते ही कई लोगों ने इस तस्वीर पर प्रतिक्रिया दी हैं जैसे: