डाॅ. वेदप्रताप वैदिक: 13 वर्ष की आयु में हिंदी भाषा के लिए सत्याग्रह करने वाले महान विद्वान

महान हिंदी विद्वान,चिंतक,पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डाॅ. वेदप्रताप वैदिक की गणना राष्ट्रीय अग्रदूतों में होती है। मात्र 13 वर्ष की आयु में मातृभाषा हिंदी के लिए सत्याग्रह करने वाले डा. वेद प्रताप वैदिक का जन्म सन 1944 में इंदौर में हुआ था। वह देश के जाने माने व बड़े हिंदी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक थे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में पीएचडी की थी।

13 वर्ष की आयु में सत्याग्रह

डा. वैदिक ने हिंदी भाषा के लिए सत्याग्रह किया और अपनी पहली जेल-यात्रा सिर्फ 13 वर्ष की आयु में की थी। हिंदी सत्याग्रही के तौर पर वे 1957 में पटियाला जेल में रहे। बाद में छात्र नेता और भाषाई आंदोलनकारी के तौर पर कई जेल यात्राएं कीं।

हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा का स्थान दिलाने के लिए सबसे अधिक जेल यात्रा करने वाले वह पहले भाषाई आंदोलनकारी थे।, जिन्होंने हिंदी को मौलिक चिंतन की भाषा बनाया और भारतीय भाषाओं को उनका उचित स्थान दिलवाने के लिए सतत संघर्ष और त्याग किया।

महर्षि दयानंद, महात्मा गांधी और डाॅ. राममनोहर लोहिया की महान परंपरा को आगे बढ़ानेवाले योद्धाओं में डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का नाम अग्रणी है।

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हिंदी भाषा में पी.एच.डी. करने वाले पहले व्यक्ति

वह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में पीएच.डी. कर रहे थे। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर शोध ग्रंथ वह हिंदी में लिखना चाहते थे परंतु उनको अनुमति नहीं मिली।

इस प्रश्न पर उन्होंने आंदोलन किया और कहा कि देश की राष्ट्रभाषा पर मुझे शोध ग्रंथ लिखने और पीएच.डी. करने की अनुमति मिलनी चाहिए। मामला न्यायालय में गया, भारत की संसद में भी मामला गूंजा।

डा. राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी वाजपेयी, मधु लिमये, चंद्रशेखर, प्रकाश वीर शास्त्री, रामधारी सिंह दिनकर, डा. धर्मवीर भारती और डा. हरिवंश राय बच्चन जैसे विद्वानों ने उनका प्रबल समर्थन किया।

इसके बाद इंदिरा गांधी सरकार की पहल पर JNU के नियमों में बदलाव हुआ और उन्हें वापस लिया गया। इसके बाद डा. वैदिक पहले भारतीय छात्र बने जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी में शोध लिख कर पीएच. डी. की। इस दृष्टि से उन्होंने भारत में एक नया इतिहास बनाया।

डा. वैदिक ने अपने लेखन के 60 वर्षों में हजारों लेख लिखे और भाषण दिए! वे लगभग 10 वर्षों तक पीटीआई भाषा (हिन्दी समाचार समिति) के संस्थापक-संपादक रहे और उसके पहले नवभारत टाइम्स के संपादक (विचारक) रहे।

डा. भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर उनके लेख राष्ट्रीय समाचार पत्रों तथा प्रदेशों और विदेशों के लगभग 200 समाचार पत्रों में हर सप्ताह प्रकाशित होते रहे हैं। उनका अंतिम लेख उनकी मृत्यु से महज़ एक दिन पहले ही प्रकाशित हुआ था।

ख़ास: उन्होंने 2014 में आतंकी हाफिज सईद का इंटरव्यू लिया था।

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हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई का दिया था सुझाव

अक्तूबर 2022 से देश में पहली बार मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में होने का फ़ैसला लिया गया था। मध्य प्रदेश के सभी 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस पहल की शुरुआत की गयी थी। दरअसल इसका सुझाव सन 2019 में डॉ वेद प्रताप वैदिक ने ही दिया था।

मीडिया ने की हर बार उपेक्षा

दोगले चरित्र वाले भारतीय मीडिया चैनलों ने हिंदी भाषा को उसका उचित सम्मान दिलाने में  हमेशा डा. वैदिक के प्रयास की हमेशा उपेक्षा की। वैसे तो हर बार हिंदी दिवस पर सभी चैनल पर हिंदी भाषा को लेकर बड़े-२ प्रोग्राम चलते हैं लेकिन डा. वैदिक के किसी भी प्रयास और यहाँ तक की उनकी मृत्यु पर किसी चैनल ने प्रोग्राम चलाना तो दूर इस खबर को हाई लाइट करना भी ज़रूरी नहीं समझा।

डा. वैदिक की जीवन यात्रा

जन्म: डॉ. वेद प्रताप वैदिक का जन्म 30 दिसंबर 1944 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ।

शिक्षा:

(1) पीएच.डी (अंतरराष्ट्रीय राजनीति), स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज, जवाहरलाल नेहरु वि.वि., 1971. विषय — अफगानिस्तान के साथ सोवियत संघ और अमेरिका के संबंधों का तुलनात्मक अध्ययन, 1946-1963 (पीएच.डी. शोध-कार्य के दौरान न्यूयार्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय, वाशिंगटन डी. सी. की लायब्रेरी आॅफ कांग्रेस, मास्को की विज्ञान अकादमी, लंदन के प्राच्य-विद्या संस्थान तथा काबुल विश्वविद्यालय में विशेष अध्ययन का अवसर)

(2) एम.ए. (राजनीति शास्त्र), प्रथम श्रेणी इंदौर क्रिश्चियन काॅलेज, इंदौर विश्वविद्यालय, 1965

(3) बी.ए. (राजनीति शास्त्र, दर्शनशास्त्र, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी) प्रथम श्रेणी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, 1963

(4) संस्कृत (सातवलेकर परीक्षाएं),1955 प्रथम श्रेणी

(5) रूसी भाषा (स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज),1967प्रथम श्रेणी

(6) फारसी भाषा (स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज), 1968 प्रथम श्रेणी

छात्रवृत्तियां:

(1) राष्ट्रीय प्रतिभा छात्रवृत्ति, 1963-64. एवं

(2) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग शोधवृत्ति, 1964-1966

शोधवृत्तियां:

(3) वरिष्ठ शोधवृत्ति, इंडियन काॅसिल आॅफ सोश्यल साइंस रिसर्च, 1981-1983

‘इंस्टीट्यूट फाॅर डिफेंस स्टडीज एण्ड एनालिसस’ तथा ‘स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज’ (ज.नेहरू.वि.वि.) में दो साल तक ‘सीनियर फेलो’ के तौर पर शोधकार्य.

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अध्यापन:

हस्तिनापुर काॅलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में राजनीति शास्त्र का अध्यापन, 1970-74। 30 वर्षों में अनेक भारतीय एवं विदेशी विश्वविद्यालयों में अन्तरराष्ट्रीय राजनीति एवं पत्रकारिता पर अल्पकालिक अध्यापन-कार्यक्रम चलाते रहे।

पुस्तकें:

(1) ‘हिन्दी पत्रकारिता: विविध आयाम’, संपादित (नेशनल, 1976),पाँच संस्करण (हिन्दी बुक सेंटर), हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास, कला और अधुनातन प्रवृत्तियों का विवेचन करने वाले इस ग्रंथ को समीक्षकों ने ‘हिन्दी पत्रकारिता का विश्वकोष’ कहा है. लगभग सभी विश्वविद्यालयों में इसका संदर्भ ग्रंथ के तौर पर उपयोग किया जाता है. इसके कई संस्करण आ चुके हैं।

(2) ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा’ (नेशनल पब्लिशिंग हाउस, 1973). : अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी का यह पहला शोधग्रंथ है, विद्वान समीक्षकों ने इसे अपने विषय का ‘प्रामाणिक’ और ‘मौलिक’ संदर्भ ग्रंथ कहा है. यह फारसी, रूसी और अंग्रेजी स्रोतों के आधार पर लिखा गया है. इस ग्रंथ पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

(3) ‘भारतीय विदेश नीति: नये दिशा संकेत’ (नेशनल, 1971) इस ग्रंथ को समीक्षकों ने ‘मौलिक चिंतन और भविष्य दृष्टि’ का उल्लेखनीय दस्तावेज घोषित किया है।

(4) ‘एथनिक क्राइसिस इन श्रीलंका: इंडिया’ज़ आॅप्शंस’ (नेशनल, 1985).श्रीलंका की तमिल समस्या पर किसी भारतीय द्वारा लिखा गया यह पहला ग्रंथ है।

(5) ‘अफगानिस्तान: कल, आज और कल’ (राजकमल प्रकाशन, 2002). अफगानिस्तान के इतिहास, समाज और राजनीति पर इस तरह का गवेषणात्मक और मौलिक व्याख्यासम्पन्न ग्रंथ दुनिया की किसी भी अन्य भाषा में उपलब्ध नहीं है।

(6) ‘वर्तमान भारत’ (राजकमल प्रकाशन, 2002)। समसामयिक भारत की राजनीति पर लिखे गए विश्लेषणात्मक निबंधों का संग्रह !

(7) ‘महाशक्ति भारत’ (राजकमल प्रकाशन, 2002)। इस ग्रंथ में भारत को महाशक्ति बनाने का स्वप्न देखा गया है और उस स्वप्न को साकार करने के उपायों पर विचार किया गया है।

(8) ‘अंग्रेजी हटाओ: क्यों और कैसे ? (प्रभात प्रकाशन, दिल्ली प्रथम संस्करण 1973, सातवां संस्करण, 1998) : इस पुस्तक की 75 हजार प्रतियां बिक चुकी हैं और इसका मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, संस्कृत, गुजराती, मराठी, बांग्ला, असमिया, पंजाबी,उर्दू, सिंधी, मणिपुरी, कश्मीरी, कोंकणी तथा ओडि़या आदि में अनुवाद हो चुका है।

(9) हिंदी का सम्पूर्ण समाचार-पत्र कैसा हो ? (प्रवीण प्रकाशन, 1994), तीन संस्करण।

(10) ‘भाजपा, हिंदुत्व और मुसलमान’ (राजकमल प्रकाशन)

(11)‘कुछ महापुरूष और कुछ मित्र’ शीघ्र प्रकाश्य

(12) मोरिशस, मध्य एशिया और चीन के तीन यात्रा-वृतांत प्रकाशनाधीन

पत्रकारिता:

(1) 1958 में प्रूफ रीडर के तौर पर पत्रकारिता में प्रवेश. तब से अब तक लगभग 1000 लेख, दर्जनों शोधपत्र, लगभग दो हजार संपादकीय तथा सैकड़ों समीक्षाएं प्रकाशित. पिछले तीन दशकों में ‘नई दुनिया’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिंदुस्तान’, ‘जनसत्ता’, ‘भास्कर’, ‘टाइम्स आॅफ इंडिया’, ‘धर्मयुग’, ‘दिनमान’, ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘इंटरनेशनल स्टडीज’, ‘स्ट्रटेजिक एनालिसिस’, ‘वल्र्ड फोकस’ आदि पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर लेख और भेंट वार्ताएं।

अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, श्रीलंका, चेकोस्लोवाकिया, सूरिनाम आदि राष्ट्रों के शीर्ष नेताओं से की गई भेंट-वार्ताओं को अंतरराष्ट्रीय ख्याति। देश के लगभग दर्जन भर अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन।

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(2) संपादक, ‘पी.टी.आई.-भाषा’, 1986-96 :  प्रेस ट्रस्ट आॅफ इंडिया द्वारा स्थापित ‘भाषा’ नामक हिंदी की समाचार समिति के संस्थापक-संपादक। ‘भाषा’ ने अपनी नवीन खबर-शैली, देशी और विदेशी नामों के मानकीकरण और अनेक महत्त्वपूर्ण अवसरों पर अपने ‘स्कूपों’ द्वारा हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय ख्याति अर्जित की।

(3) संपादक (विचार), नवभारत टाइम्स, 1986. सहायक संपादक, नवभारत टाइम्स 1974-85, संपादक, ‘अग्रवाही (मासिक), इंदौर, 1962-66. संपादक, इंदौर क्रिश्यिचन काॅलेज पत्रिका, 1963-64. हिंदी पत्रकारिता: विविध आयम’ नामक 1100 पृष्ठों के महग्रंथ का संपादन, 1976।

(4) निदेशक, हिंदुस्तान समाचार, 1974-77

(5) संपादकीय निदेशक, नेटजाल.काॅम (भारतीय भाषाओं का महापोर्टल)

सम्मान:

(1) हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पत्रकारिता के लिए इक्कीस हजार रूपये की एवं  सम्मान राशि, 1990.

(2) पुरस्कार मधुवन (भोपाल) द्वारा पत्रकारिता में ‘श्रेष्ठ कला आचार्य’ की उपाधि से सम्मानित, 1989.

(3) उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिंदी सेवा के लिए ‘पुरूषोत्तमदास टण्डन’ स्वर्ण पदक, 1988.

(4) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा’ ग्रंथ पर गोविंदवल्लभ पंत पुरस्कार, 1976.

(5) काबुल वि.वि. द्वारा अफगानिस्तान संबंधी शोधगं्रथ पर दस हजार रूपये की सम्मान राशि, 1972.

(6) इंडियन कल्चरल सोसायटी द्वारा ‘लाला लाजपतराय सम्मान’, 1992.

(7) मीडिया इंडिया सम्मान, नई दिल्ली, 1992.

(8) डाॅ. राममनोहर लोहिया सम्मान, कानपुर, 1990.

(9) प्रधानमंत्री द्वारा प्रदत्त रामधारीसिंह दिनकर शिखर सम्मान, 1992.

(10) छात्रकाल में राजनीतिशास्त्र, दर्शन और हिंदी में सर्वोच्च अंक पाने पर कई बार ‘स्पेशल मेरिट सर्टिफिकेट’

मृत्यु:

14 मार्च 2023, गुरुग्राम

गणपति विसर्जन कब है? जानें, गणपति विसर्जन विधि और मुहूर्त

गणपति विसर्जन सनातन धर्म में एक महत्पूर्ण त्यौहार है। ये गणेश चतुर्थी के 10 दिन बाद आता है। इसे गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan 2024) और अनंत चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। गणेश विसर्जन भक्तों के लिए श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। इस त्यौहार का उद्देश्य भगवान गणेश की प्रतिमा को जल में विसर्जित करके उन्हें सम्मानपूर्ण विदाई देना है।

गणेश विसर्जन कब है (Ganpati Visarjan 2024 Date and Time)

इस साल गणेश चतुर्थी शनिवार, 7 सितम्बर को है। इसके ठीक दस दिन बाद मंगलवार, 17 सितम्बर को गणेश विसर्जन का आयोजन किया जाएगा। गणेश चतुर्थी को गणेश स्थापना के बाद कुछ भक्त 3,5 या 7 दिन में भी विसर्जन कर देते हैं। आप पांचवें दिन गणेश विसर्जन करना चाहते हैं तो 11 सितम्बर को विसर्जन कर सकते हैं। वैसे शास्रों के अनुसार अनंत चतुर्दशी ही गणेश विसर्जन के लिए सबसे अच्छा दिन है। गणेश विसर्जन के अलावा, अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करने का भी विधान है। विष्णु भक्त इस दिन व्रत भी करें ताकि इसका शुभफल मिल सके।

गणपति विसर्जन 2024 शुभ मुहूर्त (Ganpati Visarjan Muhurat 2024)

चतुर्दशी तिथि 16 सितंबर, 2024 को दोपहर 03:10 बजे से शुरू हो रही है और ये 17 सितंबर, 2024 को सुबह 11:44 बजे तक रहेगी। इस साल गणपति विसर्जन 2024(Ganpati Visarjan 2024)का मुहूर्त इस प्रकार है –

मुहूर्त  समय 
सुबह का मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) 09:11 बजे से 01:47 बजे तक
दोपहर का मुहूर्त (शुभ) 03:19 बजे से 04:51 बजे तक
शाम का मुहूर्त (लाभ) 07:51 बजे से 09:19 बजे तक

 

हीरोइन ऑफ हाईजैक – ‘नीरजा भनोट’ – आतंकियों से बचाई थी 360 यात्रियों की जान

नीरजा भनोट एक सफल मॉडल और एयरहोस्टेस थीं। 5 सितम्बर, 1986 को हुए प्लेन हाईजैक में उन्होंने बहादुरी का परिचय देते हुए 300 से ज्यादा लोगों की जान बचाई थी।

पत्रकार पिता की लाडली नीरजा खूबसूरत और चुलबुली थीं। जज्बे, हिम्मत और हौसले की मिसाल इस लड़की का नाम एविएशन हिस्ट्री में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। पढ़ाई, खेल और दिखने में 90 की दशक की अभिनेत्रियों को टक्कर देने वाली नीरजा हर मामले में अव्वल थीं

उनकी जिंदगी में सब कुछ सही चल रहा था। फिर एक ऐसी तारीख आई, जिसने साहस की एक नई परिभाषा लिखी। 5 सितम्बर, 1986 : ‘पैन एएम 73’ फ्लाइट ने मुंबई से उड़ान भरी। फ्लाइट को न्यूयॉर्क जाना था, लेकिन पाकिस्तान का कराची शहर उसका पहला पड़ाव था।

कराची के जिन्ना एयरपोर्ट पर फ्लाइट लैंड हुई। कुछ यात्री उतरे तो कुछ आगे की यात्रा के लिए सवार हुए। पायलट ने टेकऑफ की तैयारी शुरू की। इसी बीच 4 आतंकी विमान में दाखिल हो गए और एक दम से आवाज आई ‘हाईजैक’। हालांकि, अपने नापाक इरादों वाले आतंकियों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि इस प्लेन में भारत की एक ‘शेरनी’ भी है।

प्लेन में 4 आतंकी, 360 यात्री और क्रू मेंबर्स समेत 379 लोग सवार थे। इन्हीं क्रू मैम्बरों में से एक थीं नीरजा भनोट। वह चाहतीं तो अपनी जान बचाकर वहां से भाग सकती थीं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और अपनी सूझबूझ से सभी यात्रियों को वहां से सुरक्षित निकाला।

नीरजा ने आतंकियों के कहने पर सभी यात्रियों के पासपोर्ट इकठ्ठा किए परंतु बड़ी सफाई से 43 अमेरिकी यात्रियों के पासपोर्ट छुपा दिए जिससे हाईजैकर्स उन्हें पहचान कर मार न पाएं। करीब 17 घंटे बंधक बनाए रहने के बाद भी जब आतंकवादियों की प्लेन उड़ाने के लिए मांग नहीं मानी गई तो उन्होंने विमान में विस्फोटक लगाना शुरू किया। नीरजा ने चतुराई से प्लेन का एमरजैंसी दरवाजा खोल दिया।

सबसे पहले प्लेन से बाहर निकल सकने के अवसर के बावजूद नीरजा ने कर्मठता का परिचय देते हुए यात्रियों की मदद की और अंत में 3 बच्चों को गोली से बचाने के प्रयास में उन्हें खुद के शरीर से ढंक लिया और वीरगति को प्राप्त हुईं।

नीरजा भनोट के बलिदान के बाद भारत सरकार ने उनको सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘अशोक चक्र’ प्रदान किया, तो वहीं पाकिस्तान की सरकार ने भी नीरजा को ‘तमगा-ए-इंसानियत’ प्रदान किया। वर्ष 2005 में अमरीका ने उन्हें ‘जस्टिस फॉर क्राइम अवार्ड’ दिया। सन् 2004 में नीरजा भनोट के सम्मान में डाक टिकट भी जारी हो चुका है।

सन् 2004 में नीरजा भनोट के सम्मान में डाक टिकट भी जारी हो चुका है।
भारत सरकार द्वारा सन् 2004 में नीरजा भनोट के सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नीरजा का नाम ‘हीरोइन ऑफ हाईजैक’ के तौर पर मशहूर है। उनकी कहानी पर आधारित 2016 में एक फिल्म भी बनी, जिसमें उनका किरदार सोनम कपूर ने अदा किया था।

प्रारंभिक जीवन और परिवार

नीरजा भनोट का जन्म 7 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ में एक पंजाबी हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह पत्रकार हरीश भनोट और रमा भनोट की बेटी थीं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ के सेक्रेड हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्राप्त की।

जब परिवार बॉम्बे चला गया, तो उन्होंने बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रखी और फिर सेंट जेवियर्स कॉलेज, बॉम्बे से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। यह बॉम्बे ही था जहाँ उन्हें पहली बार एक मॉडलिंग असाइनमेंट के लिए देखा गया था जहाँ से उनके मॉडलिंग करियर की शुरुआत हुई।

नीरजा भनोट ने 20 से अधिक विज्ञापनों में काम किया है
नीरजा भनोट ने 20 से अधिक विज्ञापनों में काम किया है, जिनमें विनोद कुकवेयर, वेपोरेक्स, बिनाका, बेनजर, बेस्टो, साड़ियां और अन्य काम शामिल हैं

वह अभिनेता राजेश खन्ना की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं और जीवन भर उनकी फिल्मों के उद्धरणों का उल्लेख करती थीं।

हाईजैकिंग घटनाक्रम

नीरजा भनोट फ़्लाइट पैन एम फ्लाइट 73(Pan Am Flight 73) में मुख्य फ़्लाइट प्रबंधक थीं। यह बोइंग 747 बॉम्बे से कराची और फ्रैंकफर्ट होते हुए न्यूयॉर्क जा रहा था, जिसे 5 सितंबर 1986 को चार फिलिस्तीनी आतंकीयों ने हाईजैक कर लिया था। विमान में 380 यात्री और 13 चालक दल के सदस्य सवार थे। अपहरणकर्ता अबू निदाल आतंकवादी संगठन का हिस्सा थे।

आतंकी साइप्रस में अपने आतंक ग्रुप के साथी कैदियों को मुक्त करवाने के लिए साइप्रस और इजराइल के लिए उड़ान भरना चाहते थे। जैसे ही अपहरणकर्ता विमान में चढ़े, और जैसे ही विमान एप्रन पर था, पायलट, सह-पायलट और फ्लाइट इंजीनियर के तीन सदस्यीय कॉकपिट क्रू कॉकपिट में एक ओवरहेड हैच के माध्यम से विमान से निकल भागे। इसके बाद सबसे वरिष्ठ केबिन क्रू सदस्य के रूप में, भनोट ने विमान के अंदर की स्थिति को संभाला।

अपहरण के शुरुआती घंटे में, आतंकियों ने एक भारतीय-अमेरिकी नागरिक राजेश कुमार की पहचान की। पायलटों को विमान में न पाकर बौखलाए आतंकियों ने राजेश कुमार को गोली मार कर उसके शव को विमान से बाहर फेंक दिया। इसके बाद ही यात्रियों को आतंकियों के ख़ौफ़नाक इरादों और उनकी भयवहता का पता चला।

आतंकवादियों ने भनोट को सभी यात्रियों के पासपोर्ट एकत्र करने का निर्देश दिया ताकि वे विमान में सवार अन्य अमेरिकियों की पहचान कर सकें। उसने और उसके अधीन अन्य परिचारकों ने विमान में सवार शेष 43 अमेरिकियों के पासपोर्ट छिपा दिए, कुछ को एक सीट के नीचे और बाकी को कूड़ेदान में छिपा दिया ताकि अपहरणकर्ता अमेरिकी और गैर-अमेरिकी यात्रियों के बीच अंतर न कर सकें।

हालाँकि फ़्लाइट में किसी भी अमेरिकी को न पाकर आतंकियों ने कुछ ब्रिटिश नागरिकों को चुन लिया। उनको को फर्श पर बैठा दिया गया और अन्य यात्रियों की तरह उन्हें भी अपने हाथ सिर के ऊपर रखने को कहा गया।

17 घंटे के बाद भी पायलटों को ना पाकर, अपहरणकर्ताओं ने गोलीबारी शुरू कर दी और विमान में विस्फोटक लगाने शुरू कर दिए। भनोट ने विमान का एक दरवाज़ा खोला, और भले ही वह विमान से कूदकर भागने वाली पहली व्यक्ति हो सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और इसके बजाय अन्य यात्रियों को भागने में मदद करना शुरू कर दिया।

जीवित बचे एक यात्री के अनुसार, “वह यात्रियों को आपातकालीन निकास की ओर ले जा रही थी। तभी आतंकवादी कमांडो हमले के डर से लगातार गोलीबारी कर रहे थे। उन्होंने देखा कि नीरजा तीन अकेले बच्चों और अन्य को बाहर निकालने की लगातार कोशिश कर रही थी और तभी उन्होंने उसके बाल पकड़े और उसे ब्लैंक प्वाइंट रेंज से गोली मार दी।”

विमान में सवार एक बच्चा, जो उस समय सात वर्ष का था, बाद में एक प्रमुख एयरलाइन में कैप्टन बन गया। उसने अनुसार भनोट उसकी प्रेरणा रही है और वह अपने जीवन के हर एक दिन के लिए उनका ऋणी है।

नीरजा भनोट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “अपहरण की नायिका” (The Heroine of the Hijacking) के रूप में मान्यता मिली। शांतिकाल में बहादुरी के लिए भारत के सबसे प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र पुरस्कार की सबसे कम उम्र की प्राप्तकर्ता (मरणोपरंत) बनीं।

प्रशंसापत्र

विमान में सवार एक अमेरिकन यात्री माइक थेक्सटन ने अपनी पुस्तक ‘व्हाट हैपेंड टू द हिप्पी मैन?‘ में नीरजा और अन्य फ़्लाइट स्टाफ़ का वर्णन “अत्यंत साहसी, निस्वार्थ और चतुर” के रूप में किया है।

“मैं पक्षपातपूर्ण हो सकता हूं, लेकिन मुझे लगता है कि उस दिन यह साबित हो गया कि विमान में मौजूद फ्लाइट अटेंडेंट अपने उद्योग में सर्वश्रेष्ठ थे।”, माइक लिखते हैं।

माइक बताते हैं कि एक जोरदार लात के अलावा उसके साथ कोई शारीरिक दुर्व्यवहार नहीं किया गया और बाद में मची अफरा-तफरी में वह दूसरों के साथ भाग निकला।

इसके अलावा इस हाईजैकिंग में बचे बहुत सारे यात्रीयों ने नीरजा भनोट को एक मसीहे की संज्ञा दी जिसने अपने प्राणों की परवाह किए बिना बेहद समझदारी और चालाकी से काम लेते हुए ना बल्कि आतंकियों से यात्रियों की रक्षा की अपितु उन्हें भागने में भी मदद की, जबकि वे विमान से बाहर निकलने वाली पहली यात्री हो सकती थीं। अपने इस अभियान ने हालाँकि उन्हें अपनी जान गवानी पड़ी लेकिन अपने काम के प्रति समर्पण और इंसानियत की वह एक ऐसी बनकर उभरी जिसमें वह आने वाली पीढ़ियों का हमेशा मार्गदर्शन करती रहेंगी।

5 सितंबर 2024

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Fundabook पर आप जान सकते है अपना आज 5 सितंबर 2024 के दिन का राशिफल। हमसे जानिए कैसा होगा आपका आज का दिन! किसे मिलेगा प्यार, किसका`चलेगा व्यापार, करियर में किसे मिलेगी उड़ान, किसे मिलेगा धन अपार आदि। चंद्रमा की गति और अन्य ग्रहों के साथ उनके द्वारा निर्मित योगों का सभी राशियों पर शुभ अशुभ प्रभाव कैसा रहेगा, आइये इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं। राशिफल को निकालते समय ग्रह-नक्षत्र के साथ साथ पंचांग की गणना का विश्लेषण किया जाता है।

दैनिक राशिफल (Dainik Rashifal) ग्रह-नक्षत्र की चाल पर आधारित फलादेश है, जिसमें सभी राशियों (मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन) का दैनिक भविष्यफल विस्तार से बताया जाता है। आज के राशिफल में आपके लिए नौकरी, व्यापार, लेन-देन, परिवार और मित्रों के साथ संबंध, सेहत और दिनभर में होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं का भविष्यफल होता है।

इस राशिफल को पढ़कर आप अपनी दैनिक योजनाओं को सफल बनाने में कामयाब रहेंगे। जैसे दैनिक राशिफल ग्रह-नक्षत्र की चाल के आधार पर आपको यह बताएगा कि आज के दिन आपके सितारे आपके अनुकूल हैं या नहीं। आज आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है या फिर किस तरह के अवसर आपको प्राप्त हो सकते हैं। दैनिक राशिफल को पढ़कर आप दोनों ही परिस्थिति (अवसर और चुनौतियों) के लिए तैयार हो सकते हैं।

आज 4 सितंबर 2024 का दिन उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। कई मोर्चों पर आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। किसी खास दोस्त अथवा रिश्तेदार से अनबन हो सकती है। रक्त संबंधी रोग संभव स्वाद पर नियंत्रण आवश्यक है, शीत वायु से बात रोग हो सकता है अतएव स्वास्थ्य का ध्यान रखें। शत्रु पक्ष प्रबल रहेगा परंतु शासकीय क्षेत्र में लाभ मिलेगा।

Ganesh Chaturthi 2024 : जानें सही तारीख और मुहूर्त

Ganesh Chaturthi 2024 : भगवान गणेश पूजा की महिमा हम सब जानते हैं, जब भी कोई बड़ा काम शुरू किया जाता है, या घर पर मंगलकार्य होते हैं तो सबसे पहले गणेश पूजन का विधान है। गणेश जी शुभ-लाभ प्रदान करते हैं, और वो ज्ञान-सद्बुद्धि के प्रदाता हैं।

पुराणों के अनुसार, भादो की शुक्लपक्ष चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था। उनके जन्म के उपलक्ष में हिन्दू परिवारों में दस दिवसीय उत्सव आयोजित किया जाता है जिसे गणेश चतुर्थी या विनायक संकष्टी के नाम से जाना जाता है।

गणेश जी की पूजा-अर्चना के लिए ये अवधि बहुत शुभ मानी जाती है, विशेष रूप से महाराष्ट्र में इस त्यौहार को बहुत धूम-धाम से मनाते हैं।

तो आइए, इस ब्लॉग में जानते हैं इस साल 2024 में गणेश चतुर्थी कब है और इस दिन किस मुहूर्त में गणेश चतुर्थी पूजा करें?

गणेश चतुर्थी कब है (Ganesh Chaturthi 2024 Date and Time) 

आपको बता दें, गणेश चतुर्थी उत्सव पूरे दस दिनों तक चलता है। इस साल 2024 में ये उत्सव 7 सितम्बर शनिवार को शुरू हो रहा है और गणेश जी की मूर्ति विर्सजन 17 सितंबर, 2024 को है। गणेश चतुर्थी के दिन भक्तजन गणेश जी की सुंदर प्रतिमाओं को घर लाते हैं और दोपहर में उनका विधिवत पूजन करते हैं। इस साल पूजा का समय सुबह 6:30 बजे शुरू होगा और दोपहर 2:30 बजे समाप्त होगा।

गणेश चतुर्थी 2024 पूजा विधि (Ganesh Chaturthi 2024 Puja Vidhi)

आमतौर पर गणेश पूजा मध्याह्न काल में की जाती है क्योंकि भगवान गणेश का जन्म इसी समय हुआ था। हिन्दू काल गणना में दिन को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है जिन्हें प्रहर कहा जाता है।पूर्वाह्न, मध्याह्न, अपराह्न और सायंकाल, प्रदोष, निशिथ, त्रियामा एवं उषा, ये सभी प्रहर हैं। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति को मध्याह्न चरण में स्थापित किया जाता है जिसके बाद उनकी पूजा की जाती है। पूजा के लिए नीचे लिखी विधि अपनाई जा सकती है –

  • सुबह उठकर नहा धो लें और घर को स्वच्छ रखें।
  • पूजा के लिए पूर्व दिशा या उत्तर पूर्व कोण में एक प्लेटफॉर्म तैयार रखें जहाँ आप गणेश स्थापना करेंगें।
  • गणेश जी का सपरिवार स्वागत करें और उनकी मूर्ति को स्थापित करें।
  • भगवान गणेश को हाथ जोड़कर नमस्कार करें।
  • तीन बार आचमन विधि द्वारा खुद को पवित्र करें और सभी के माथे पर तिलक लगाएं।
  • अब गणेश जी को पंचामृत से नहलाएं।
  • इसके बाद उन्हें वस्त्र, जनेऊ, चंदन, दूर्वा, अक्षत, धूप, दीप, शमी पत्ता, पीले पुष्प और फल चढ़ाएं।
  • पूजन आरंभ करें और गणेश वन्दना इत्यादि गाएं।
  • गणेश जी से मनोकामना पूर्ति का वरदान मांगें और सभी को प्रसाद बाँट दें।
  • इसी तरह आप अपनी श्रद्धानुसार 3,5,7 या 10 दिन तक गणेश जी को घर में रखें और शाम को इसी विधि से रोजाना पूजा करें।

गणेश चतुर्थी पर क्या न करें (Things to Avoid During Ganesh Chaturthi)

परंपरा के अनुसार, गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2024) के दौरान विशिष्ट समय पर चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए।हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति चंद्रमा को देखता है, तो उस पर चोरी का आरोप लगता है और ये पाप तब तक रहता है, जब तक कि वह एक विशिष्ट मंत्र का जाप न कर ले। ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने इस दिन चन्द्रमा को देख लिया था जिसके फलस्वरूप उनपर एक बहुमूल्य रत्न चुराने का आरोप लगा। इसलिए इस मान्यता का ख़ास ध्यान रखें और चन्द्रमा दर्शन न करें।

गणेश चतुर्थी का महत्व (Significance of Ganesh Chaturthi in Hindi)

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2024) एक सिर्फ एक हिन्दू त्यौहार नहीं है बल्कि एक सांस्कृतिक आयोजन है जिसमें गणेश विसर्जन के समय ढोल-नगाड़े बजते हैं, नृत्य होता है और आतिशबाजी होती है।साथ ही मूर्ति कला के सुंदर नमूने देखने को मिलते हैं और सामूहिक आयोजन किए जाते हैं। इस तरह से ये त्यौहार भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। महाराष्ट्र में ये उत्सव बड़े स्तर पर इसलिए मनाया जाता है क्योंकि लोकमान्य तिलक ने 1894 में जातीय भेदभाव को कम करने के लिए सामूहिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी। तब से लेकर आजतक ये एक सामाजिक पर्व के रूप में मनाया जा रहा है जिसमें सभी जाति के लोग मिलकर हर्ष और उल्लास के साथ गणपति जी की पूजा करते हैं। इसलिए ये पर्व न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि ये सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।

तो आपने जाना कि गणेश चतुर्थी 2024 (Ganesh Chaturthi 2024) कब है और पूजा के लिए सबसे शुभ समय कौन सा है? इस जानकारी के साथ हम आपको गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ भेजते हैं और ये मंगलकामना करते हैं कि ये त्यौहार जनसामान्य के बीच सद्भावना का विस्तार करता रहे।

Krishan Janmashtami 2024: कैसे मनाएं जन्माष्टमी

Krishan janmashtmi 2024: कृष्ण जन्माष्टमी हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में एक है। यह त्योहार इस वर्ष 26 अगस्त 2024 को पड़ रहा है। इस दिन विष्णु जी के आठवें अवतार श्री कृष्ण जी का जन्म उत्सव मनाया जाता है।

2024 में श्री Krishan janmashtmi कब है?

भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म मध्य रात्रि अष्टमी तिथि में हुआ इस लिए इस रात्रि को कृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है। परन्तु भगवान जी उसी रात्रि में मथुरा से गोकुल पहुच गये। गोकुल और वृन्दावन के वासी अलगे दिन उनके होने का उत्सव मनाते हैं।

हर वर्ष लोगों में श्री Krishan janmashtmi को लेकर भ्रम होता है, व्रत किस दिन किया जाए। आपको बता रहे हैं व्रत की तारीख…

  • 26 अगस्त 2024 के दिन कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत और उत्सव मनाया जाएगा
  • 25 तारीख की रात्रि 03:38 से अष्टमी तिथि शुरू हो रही है जो…26 अगस्त की रात्रि 02:19 तक रहेगी। 
  • मध्य रात्रि में जन्म के अनुसार 26 अगस्त की रात्रि व्रत और उत्सव के लिए श्रेष्ठ है।

26 अगस्त 2024 की रात्रि 23:21 बजे दिल्ली में चन्द्र उदय होगा।

जिन स्थानों पर जन्म के बाद उत्सव मनाया जाता है, वहाँ ये उत्सव 27 अगस्त को भी मनाया जाएगा।

विष्णु और ब्रह्म पुराण के अनुसार श्री कृष्ण जी का जन्म योगनिद्रा द्वारा हुआ है, वर्षा ऋतु भाद्रपद के मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की अर्ध रात्रि में जन्म लिया और अगले ही दिन नवमी तिथि में योग माया जा जन्म हुआ,

गर्ग सहिंता के अनुसार भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की रात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हर्षन योग और वृष लग्न के समय आधि रात में जब सृष्टी अंधकार में डूबी हुई थी तो सृष्टी को प्रकाश में लाने के लिए श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ

हरिवंश पुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म रात्रि के अभिजीत काल में जयंती नाम रात्रि और विजय नामक मुहूर्त में हुआ था,

Krishan janmashtmi पूजा कैसे करें 

  • सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ़ धुले हुए कपड़े पहनें।
  • भगवान जी की पूजा के लिए सबसे पहले भगवान जी की पूजा का समान जोड़ लें।
  • पूजा शुरू करने से पहले भगवान जी का ध्यान करें।
  • भगवान कृष्ण की बाल रूप की प्रतिमा को प्यार से पालने में रखें।
  • आपके घर में पालना नहीं है, तो लकड़ी की चौंकी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • भगवान जी को 5 बार जल से आचमन अर्पण करें।
  • बाल गोपल जी को दूध दही शहद घी शक्कर से अलग अलग और पंचामृत बना कर भी स्नान करवाएं।
  • भगवान जी के स्नान के जल को प्रसाद के रूप में लें।
  • भगवान जी को नये वस्त्र और श्रृंगार अर्पण करें।
  • भगवान की पूजा में जनेऊ जरुर अर्पण करें।
  • भगवान जी को चन्दन का लेपन जरुर करें।
  • भगवान की प्रतिमा को मुकुट, आभूषण, मोर पंख और बांसुरी से सजाएं।
  • भगवान को तुलसी दल अर्पण करें।
  • धूपबत्ती और घी का दीपक जलाएं।
  • भगवान को माखन और मिश्री का भोग जरुर लगाएं।
  • अपने सामर्थ्य के अनुसार पकवान बना कर भेंट अर्पण करें।
  • रात्रि में कीर्तन अकरने और आरती गाएं, फिर परिक्रमा करें।
  • अपने परिवार और विश्व शांति के लिए प्रार्थना करें।.

श्रीकृष्ण जी की कथा

श्री कृष्ण जी ने मथुरा में पिता वासुदेव और  माता देवकी जी के गर्भ से जन्म लिया। योग माया द्वारा रची हुई विधि के द्वारा गोकुल में माता यशोदा और पिता नन्दलाल जी के घर में उनका लालन पालन हुआ।

श्री कृष्ण माता देवकी की आठवीं सन्तान हुए। हिन्दू धर्म के आदर्श ग्रन्थ श्रीमद्भगवत गीता का उपदेश श्री कृष्ण जी ने ही दिया है। प्रमाणों के अनुसार आज से लगभग 5252 वर्ष पहले श्री कृष्ण जी ने अवतार लिया और धरती पर धर्म की स्थापना के लिए महाभारत जैसे बड़े संग्राग की रचना करवाई।

महायोद्धा अर्जुन जब युद्ध से भय भीत हुए और युद्ध से मना कर के अस्त्र छोड़ दिए, तो श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को उपदेश दिया उसे गीता के उपदेश के नाम से जाना जाता है।

श्री कृष्ण जी का जन्म एक पापी राजा, कंस से पीड़ित लोगों को बचाने के लिए हुआ था। प्राप्त कथाओं से ज्ञात होता है, कि कंस की मृत्य के लिए आकशवाणी हुई कि,  वो केवल अपनी बहन देवकी के पुत्र से ही मारा जाएगा।

कंस ने देवकी और उसके बहनोई वासुदेव जी को जेल में डाल बंद कर दिया। जब वो जेल में थे तो देवकी ने 7 पुत्रियों को जन्म दिया। लेकिन जब कृष्ण जी में आठवीं सन्तान के रूप में जन्म लिया, तो दूसरी तरफ यशोदा के गर्भ से योग माया ने जन्म लिया।

भगवान की लीला से प्रेरित हो कर वासुदेव जी कृष्ण जी को गोकुल में छोड़ आए। गोकुल से योग माया रूपी कन्या को साथ ले आए। जैसे ही कंस को पता लगा कि देवकी ने आठवीं भी कन्या को जन्म दिया है।

कंस अपनी मृत्यु के कारण को समाप्त करने के लिए जेल गया। तभी योग माया कसं के हाथों से छुट कर आकाश में चली गई और दुबारा भविष्यवाणी हुई की तेरी मृत्यु करने वाला पैदा हो चुका है।

 

24 अगस्त 2024

23 अगस्त 2024

5 जून का इतिहास

5 जून का इतिहास:-

  • 1901 – ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मलयालम भाषा के एक प्रसिद्ध साहित्यकार गोविंद शंकर कुरुप का जन्म।
  • 1942 – प्रतिभाशाली ग़ज़ल और गीत गायक मास्टर मदन का निधन।
  • 1944 – द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी, इटली और जापान की नाज़ी तिकड़ी वाले देशों की राजधानियों में से मित्र सेनाओं के कब्ज़े में आने वाला पहला शहर रोम था।
  • 1953 – डेनमार्क में आज ही के दिन नया संविधान लागू हुआ।
  • 1961 – भारत के प्रसिद्ध टेनिस प्रशिक्षक और पूर्व टेनिस खिलाड़ी रमेश कृष्णन का जन्म।
  • 1967 – इजरायल ने मिस्र पर हमला कर उसके करीब चार सौ लड़ाकू विमान नष्ट कर दिए। युद्ध तो इजरायल मिस्र सीमा पर ही शुरू हुआ था, लेकिन जल्द ही ये कई और अरब मुल्कों तक फैल गया।
  • 1968 – अमेरीका के शहर लॉस एंजेलस के एक होटल में मशहूर अमेरिकी सांसद रॉबर्ट कैनडी के ऊपर जानलेवा हमला हुआ था।
  • 1984 – सिखों के धर्म स्थल पंजाब के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू–स्टार को भारतीय सेना ने अंजाम दिया था।
  • 1989 – ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्ला रोहेल्लाह खुमैनी का निधन।
  • 1990 – सोवियत संघ के आखिरी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव को आज ही के दिन नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। सोवियत संघ और शीतयुद्ध के अंत में उनकी बहुत अहम भूमिका रही है।
  • 2001 – शाही हत्याकांड जांच आयोग के एक सदस्य माधवन के इस्तीफ़ा से नेपाल में शाही परिवार की जांच का कार्य अवरुद्ध।
  • 2002 – भारत की सीमा पर साझा गश्त के प्रस्ताव को पाकिस्तान ने खारिज किया।
  • 2005 – ताइवान ने अपनी पहली क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
  • 2008 – एलेन परेरा ने बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक का कार्यभार सम्भाला।
  • 2008 – अमेरिका ने भारत व चीन को निगरानी सूची में डाला।
  • 2013 – पहली बार एक अंग्रेजी अखबार में छपा कि अमेरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी अमेरीका में लाखों लोगों के फोन रिकॉर्ड जुटा रही है। इसका खुलासा अमेरिकी जासूस स्‍नोडेन ने किया था।
  • 2017- सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 डी-1 का सफल प्रक्षेपण।

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History of 4 June 

4 जून का इतिहास

4 जून का इतिहास:-

  • 1845 – मैक्सिको–अमेरिका युद्ध शुरू हुआ।
  • 1936 – भारत की बेमिसाल अदाकारा नूतन का जन्म।
  • 1944 – अमेरिकन आर्मी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रोम में प्रवेश किया।
  • 1948 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल शास्त्री का जन्म।
  • 1962 – आयुर्वेदिक औषधियों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रसिद्ध अचंत लक्ष्मीपति का निधन।
  • 1964 – मालदीव ने संविधान का निर्माण किया।
  • 1975 – अमेरिकी अभिनेत्री एंजेलिना जोली का जन्म।
  • 1989 – चीन की राजधानी बीजिंग में तियानानमेन चौक पर शांति पूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों का हिंसक दमन किया गया। इस दमन का पूरे विश्व में विरोध हुआ।
  • 2001 – नेपाल में ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह ने अपने भाई और बेटे की मौत के बाद सत्ता संभाली।
  • 2003 – डोमिनिक गणराज्य की 18 वर्षीय सुंदरी एमीलिया वेगा ‘मिस यूनीवर्स-2003′ बनीं।
  • 2005 – लालकृष्ण आडवाणी ने कराची में मोहम्मद जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति बताया।
  • 2006 – यूगोस्लाविया के पूर्व गणराज्य मोंटेनेग्रो ने स्वतंत्रता की घोषणा की।
  • 2007 – चीन के उप प्रधानमंत्री हांग चू का निधन।
  • 2007 – ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लुला डि सिल्वा को वर्ष 2006 का जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • 2008 – हरियाणा सरकार ने पारिवारिक पेंशन का लाभ 25 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों को भी देने की घोषणा की।
  • 2008 – न्यूयार्क की सीनेटर हिलेरी क्लिंटन को पछाड़ते हुए बराक ओबामा ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी हासिल की।
  • 2011 – नए सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि भारतीय लोग आर्थिक वृद्धि पर पर्यावरण रक्षा को मामूली रूप से प्राथमिकता देते हैं।
  • 2011 – अमेरिका की प्रमुख सर्वेक्षण एजेंसी ‘गैलप’ने अपने ताजा सर्वेक्षण में कहा कि ज़्यादातर आबादी अर्थव्यवस्था से ज़्यादा पर्यावरण पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं।
  • 2011 – अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय अर्थशास्त्री डॉ. अमर्त्य सेन ने पश्चिमी देशों को भारत और चीन से सीख लेने की सलाह दी है। डॉक्टर सेन का कहना है कि पश्चिमी देशों को नए विचारों की ज़रूरत है।
  • 2018 – मॉरीशस में हिन्दी कथा साहित्य के सम्राट साहित्यकार अभिमन्यु अनत का निधन।

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3 जून का इतिहास

3 जून का इतिहास:-

  • 1844 – आधुनिक हिन्दी साहित्य के शीर्ष निर्माताओं में से एक बालकृष्ण भट्ट का जन्म।
  • 1867 – भारत के प्रसिद्ध शिक्षाविद, राजनीति, समाज सुधारक, न्यायविद और लेखक हरविलास शारदा का जन्म।
  • 1901 – ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले पहले कवि जी शंकर कुरूप का तिरूवंतपुरम में निधन।
  • 1915 – ब्रिटिश सरकार ने रवींद्रनाथ टैगोर को नाइटहुड की उपाधि से नवाजा।
  • 1918 – गांधी जी की अध्यक्षता इन्दौर में ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन‘ आयोजित हुआ और उसी में पारित एक प्रस्ताव के द्वारा हिन्दी राजभाषा मानी गयी।
  • 1941 – भारत की प्रसिद्ध महिला न्यायाधीश रूमा पाल का जन्म।
  • 1943 – संयुक्त राष्ट्र संघ ने राहत और पुनर्वास प्रशासन की स्थापना की।
  • 1947 – ब्रिटिश राज में भारत के आखिरी वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के बंटवारे का ऐलान किया था।
  • 1959 – सिंगापुर को सेल्फ गर्वनिंग स्टेट घोषित किया गया, इससे पहले ये ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा था।
  • 1962 – एयर फ्रांस का एक निजी विमान, बोइंग 707, पैरिस के ओर्ली हवाई अड्डे पर उड़ान भरने के समय दुर्घटना ग्रस्त हो गया।
  • 1974 – बिहार के मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण बल्लभ सहाय का निधन।
  • 1994 – सामुदायिक नेतृत्व त्रिभुवनदास कृषिभाई पटेल का निधन।
  • 1994 – भारत सहायता क्लब का नया नाम ‘भारत सहायता मंच‘ किया गया।
  • 1999 – हावरक्राफ्ट विमानों के अविष्कारक क्रिस्टोफ़र कॉकेरेल का निधन।
  • 1999 – यूगोस्लाविया द्वारा कोसोवो शांति योजना को मंजूरी।
  • 2004 – केन फ़ोर्ड नासा के अंतरिक्ष खोज पैनल के नेतृत्वकर्ता बने।
  • 2005 – फ्रांस ने सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का समर्थन दुहराया।
  • 2008 – जापानी प्रयोगशाला के साथ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का डिस्कवरी यान अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुँचा।
  • 2008 – वैज्ञानिकों को सौर परिवार के बाहर अब तक का सबसे छोटा ग्रह मिला।
  • 2008 – तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चन्द्रशेखर राव ने उपचुनाव में क़रारी हार के बाद अपने पर से इस्तीफ़ा दिया।
  • 2014 – नई दिल्ली में पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे का सड़क हादसे में निधन।

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2 जून का इतिहास

2 जून का इतिहास:-

  • 1909 – अल्फ्रेड डेकिन लगातार तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री चुने गए।
  • 1930 – ‘भारतीय जनता पार्टी‘ के नेता और मध्य प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का जन्म।
  • 1953 – ब्रिटिश राजगद्दी पर महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय की ताजपोशी हुई।
  • 1955 – भारत के प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशकों में से एक मणिरत्नम का जन्म।
  • 1955 – भारतीय उपक्रमी, नौकरशाह, नेता और प्रसिद्ध सॉफ़्टवेयर कंपनी ‘इन्फ़ोसिस‘ के सह-संस्थापक सदस्यों में से एक नन्दन नीलेकणी का जन्म।
  • 1966 – अमेरिका का पहला अंतरिक्ष यान चांद की जमीन पर सफलतापूर्वक उतरा था।
  • 1978 – ‘पद्म भूषण‘ से सम्मानित भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्राण कृष्ण पारिजा का निधन।
  • 1980 – तीरंदाज महिला खिलाड़ी डोला बनर्जी का जन्म।
  • 1987 – बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा का जन्म।
  • 1988 – बॉलीवुड के महान अभिनेता, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और शोमैन राज कपूर का निधन।
  • 1996 – उक्रेन अपने अंतिम परमाणु युद्धास्त्र रूस को सौंपने के साथ ही परमाणु मुक्त देश बना।
  • 1999 – दक्षिण एवं उत्तर कोरिया के बीच उच्च स्तरीय वार्ता पर सहमति।
  • 1999 – भूटान में टी.वी. प्रसारण की शुरुआत।
  • 2000 – मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर में स्थित विश्व की सबसे ऊँची इमारत पेट्रोनास ट्रिवन टावर्स दर्शकों के लिए खुला।
  • 2003 – म्यांमार की जनतांत्रिक नेता आन सांग सूची की गिरफ़्तारी के बाद देश की सभी शिक्षण संस्थाएँ बंद।
  • 2004 – ऑस्ट्रेलियाई मॉडल जेनिफर हॉकिन्स, मिस यूनिवर्स बनीं।
  • 2006 – अमेरिका ने दाऊद इब्राहिम तथा उनके संगठन पर प्रतिबंध लगाया।
  • 2008 – टाटा मोटर्स लिमिटेड ने फोर्ड मोटर कंपनी के दो ब्रांडों ‘जगुआर‘ व ‘लैंड‘ रोवर के अधिग्रहण का सौदा पूरा किया।
  • 2008 – लेफ्टिनेंट जनरल नरेश कुमार परमार को थल सेना की चिकित्सा सेवा का महानिशेदक नियुक्त किया गया।
  • 2012 – मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को 2011 की अरब क्रांति के दौरान प्रदर्शनकारियों की हत्या का आदेश देने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
  • 2014 – तेलंगाना, भारत का 29 राज्य बना।

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