
मधुमेह दिवस पर मधुमेह के रोगियों के लिए जरूरी टिप्स

मधुमेह के मरीजों को हरी चाय से होने वाले छह लाभ!
किसी व्यक्ति के शरीर में मधुमेह जैसे विकार को नियंत्रण करना एक बहुत मुश्किल काम होता है। अगर मधुमेह को नियंत्रण नहीं किया गया तो यह रोगी के शरीर में बहुत सारी जटिलताओं को पैदा कर देता है। हरी चाय(Green Tea) मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत ही लाभदायक पेय पदार्थ है।
हरी चाय(Green Tea) पीने के लाभ जो मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद हैं। हरी चाय पीने से मधुमेह के मरीजों को मिलते हैं यह छह लाभ।
- अगर किसी व्यक्ति को टाइप 1 मधुमेह हुआ है। तो उसके शरीर में रक्त शर्करा की मात्रा ज्यादा होने से, उसका शरीर जरूरी इंसुलिन पैदा करने में असमर्थ होता है। लेकिन हरी चाय पीने से वह अपने शरीर में इंसुलिन की मात्रा को नियंत्रण कर सकते हैं क्योंकि हरी चाय में ECGC (Epigallocatechin gallate) नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है।
- हरी चाय में मधुमेह विरोधी गुण होते हैं जो मधुमेह से ग्रस्त रोगी में ओक्सीडेटिव तनाव कम करता है और उनमें ग्लूकोज को बढ़ाता है। हरी चाय में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी होती है जो शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को कम करने में मदद करती है।
- टाइप 1 डाइबिटीज के रोगियों के लिए ग्रीन टी काफी फायदेमंद है। ग्रीन टी में एंटीआक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं।
- जो लोग टाइप 2 के मधुमेह से ग्रस्त होते हैं, उन्हें ग्लूकोज और लिपिड चयापचय(Lipid Metabolism) विकारों का सामना करना पड़ता है। हरी चाय में Catechins पाया जाता है। जो इन विकारों का समाधान करने में मददगार होता है। जिससे बहुत अधिक लाभ होता है
- टाइप 2 का मधुमेह, रोगी में मोटापे का कारण बनता है। लेकिन हरी चाय में ऐसे गुण होते हैं जो रोगी के शरीर में से फैटी एसिड कम करते हैं जिससे मोटापा भी कम होता है।
- मधुमेह की मुख्य वजह शरीर में इंसुलिन की कमी होती है। लेकिन हरी चाय शरीर में मधुमेह को रोककर रखने में एक सक्षम पेय पदार्थ है।
शुरू हो रहा है दीपावली का पर्व जानिए कैसा होगा आपकी राशियों पर असर !!!
दीपावली की पूजा विशाखा नक्षत्र में होगी जिसके स्वामी गुरु हैं। गुरु इस समय सिंह राशि में स्थित है एवं राहु कन्या में रहेगा। इस बार दीपावली पर गुरु सिंह राशि में रहेगा एवं राहु कन्या में रहेगा। यह योग इससे पहले 1884 में बना था। इसके बाद यह योग दोबारा 131 साल बाद सन् 2145 में बनेगा।
दीपावली यानि महालक्ष्मी के त्यौहार का आरंभ माना जाता है। इस महालक्ष्मी पर्व में देवी लक्ष्मी की आप पर कितनी कृपा रहेगी? नौकरी, व्यवसाय, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन के लिए 2019 की दिवाली तक का समय कैसा गुजरेगा? जानिए क्या कहते हैं सितारे
मेष राशि
मेष राशि के जातकों का सूर्य नीच का होकर एवं चंद्र तुला से राशि पर दृष्टि डालेगा। इसके प्रभाव से समय अच्छा रहेगा। प्रसन्नता रहेगी। त्यौहार है तो खर्च अधिक होगा, किंतु आय भी बेहतर रहेगी। इसके साथ ही मान-प्रतिष्ठा के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। यह स्थिति मेहनत से कामयाबी का बड़ा द्वार खोलेगी। विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को मेहनत के बाद ही सफलता मिलेगी। व्यापार में कुछ नया करने को मिल सकता है। दांपत्य जीवन या प्रेम में सफलता मिलेगी।
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों पर शनि की दृष्टि एवं चतुर्थ गुरु व्यर्थ विवादों का कारण बनेगा। श्रेष्ठीजनों की संगत में रहें, तो ही लाभ होगा। यह समय आपके लिए मिला-जुला रहेगा। इस काल में आपको अपनी प्रतिष्ठा के प्रति सचेत रहना चाहिए। आपको धन, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। अचानक व्यय और हानि के साथ ही लाभ की स्थितियां बनती रहेंगी। जॉब या व्यापार में बदलाव के लिए समय उत्तम नहीं है। नीच संगत से बचें। बुरी आदतें आकर्षित कर सकती हैं। दीपावली पर भूलकर भी जुआ-सट्टा न खेलें।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों का तृतीय गुरु उत्साह बढ़ाएगा। समय का सदुपयोग करने में सफल रहेंगे। धन की आवक अच्छी रहेगी। उच्च शिक्षा के प्रयास रंग लाएंगे। करियर के लिए समय उत्तम है। नए दोस्त बनेंगे व कोई बड़ा काम होने की संभावना है। जमीन संबंधी काम में भी सफलता मिल सकती है। आलस्य में वृद्धि व भाग दौड़ से थकान महसूस होगी। किसी पुराने विवाद से छूटकारा मिलेंगा। वाणी की कुशलता में वृद्धि होगी।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों का राशि से दूसरा गुरु होने के कारण दीपावली या इसके आस-पास कोई अच्छी खबर आ सकती है। आप धार्मिक कार्यों में व्यस्त रहेंगे। आय बेहतर रहेगी एवं परिवार का सहयोग मिलेगा। इस दीपावली के पर्व आपको व्यवसायिक लाभ और करियर में जबरदस्त उन्नति होगी। काम के बोझ से कभी ख़ुशी कभी गम का एहसास होगा। स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतें अन्यथा किसी रोग का शिकार भी हो सकते हैं।
सिंह राशि
सिंह राशि के लिए यह दिवाली विशेष सौगात लाएगी। सिंह राशि के जातकों का गुरु गोचर राशि में होने से त्यौहार के समय कोई उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है। आपको शनि की ढैय्या से मुक्त होने का स्पष्ट आभास होगा। सिंह राशि वालो को धन की स्थिति बेहतर रहेगी एवं मान-सम्मान में वृद्धि होगी। करियर में भी सफलता मिलेगी। परिजनों का सहयोग मिलेगा। संतान पक्ष से अच्छा समाचार मिलेगा।
कन्या राशि
कन्या राशि के जातकों का 12वां गुरु एवं नीच का शुक्र के साथ राहु का गोचर भी राशि में रहेगा। आत्मविश्वास रखें तो कोई भी कार्य में सफलता निश्चित है। चंद्र के प्रभाव से लाभ प्राप्त होगा। स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर रह सकता है। संपत्ति से जुड़ा कोई तनाव हो सकता है। विधाता का संकेत है कि सकारात्मक विचारों द्वारा नवीन योजनाओं का सूत्रपात करना सही होगा।
तुला राशि
तुला राशि के जातकों का सूर्य, बुध एवं चंद्रमा का प्रभाव राशि में रहेगा। यह संयोग नुकसान करा सकता है। संभलकर रहें। शनि की साढ़े साती भी राशि में चल रही है। यह समय आपको आर्थिक लाभ का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। हालांकि कार्यक्षेत्र में सहयोगियों से वैचारिक मतभेद और लाभ दोनों होते रहेंगे। वाहन चलाते समय सावधानी रखें व जोखिमभरा कोई काम न करें। रुपए के लेन-देन में भी सावधानी रखें। करियर में बड़ी सफलता के योग बन रहे है।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालो के लिए दिवाली का समय उत्तम रहेगा। आय-व्यय बराबर बना रहेगा। किसी अज्ञात भय का सामना करना पड़ सकता है, हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करें। वृश्चिक राशि के लोग शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। कार्य के दौरान असावधानी से उलझन का सामना करना पड़ सकता है। कर्ज संबंधी समस्या का निराकरण होगा। नए काम में हाथ नहीं डालें। व्यक्तिगत जीवन में दिमाग ठंडा और भावुकता को परे रखें। किसी नए कार्य के कारण विदेश यात्रा का योग बन सकता है।
मकर राशि
मकर राशि के लोगो के लिए का दिवाली के शुभ अवसर पर भाग्य प्रबल रहेगा। कई शुभ समाचार मिलेंगे। अटके हुए काम भी पूरे हो सकते हैं। किसी मित्र की सहायता से लाभ प्राप्ति की संभावना है। आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा। पुराने रोग से मुक्ति मिलेगी। शिक्षा में सफलता के लिए दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम की जरूरत है। कुल मिलाकर समय बहुत अच्छा रहेगा। आर्थिक लाभ के योग बन रहे है।
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों को आय के उत्तम साधन प्राप्त होंगे। संतान से सुख प्राप्त होगा। योग्यता के अनुसार काम मिलेंगे। करियर में नई योजनाएं बनेंगी, जो आगे चल कर लाभ देंगी। यह योग नए विचारों और मित्रों के सहयोग से किसी लक्ष्य की प्राप्ति का सयोंग बन सकता है। व्यक्तिगत जीवन में किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। कार्य की अधिकता होगी। जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। त्वचा संबंधी रोग भी हो सकता है।
मीन राशि
मीन राशि वालो को इस बार की जगमगाती दिवाली अपने दामन में खुशियों का खज़ाना छिपाए हुए है। आपको विदेश से लाभ मिलने की प्रबल संभावना है। शारीरिक पीड़ा से गुज़रना पड़ सकता है। इस दौरान आपको शारीरिक थकावट का अहसास हो सकता है। विरोधी पक्ष प्रभावी रहेगा। चिंता न करें दीपावली के बाद स्थिति में सुधार होगा। परिवार में ख़ुशी का माहौल होगा। वरिष्ठ सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा।
पुष्य नक्षत्र : जानिए महत्व, और खरीदारी का शुभ मुहूर्त
नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन खरीदारी और दूसरे शुभ कार्य करने का महत्व है। दिपावली के पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र को खरीदारी करना अति शुभ माना जाता है। पुष्य नक्षत्र आज और कल 21 अक्टूबर और 22 अक्टूबर 2019 को है।
पुष्य नक्षत्र का महत्त्व
इस संयोग में जो भी खरीदी की जाएगी, वह शुभ रहेगी। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, कपड़े, जेवर, भूमि, भवन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं आदि खरीदने के लिए शुभ योग है। इस नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी वस्तु अधिक समय तक उपयोगी, शुभ फल और अक्षय फल देने वाली होती है। पुष्य नक्षत्र में सोने की खरीदी का ज्यादा महत्व है। इस दिन सोने की खरीदी से घर में बरकत आती है।
21 अक्टूबर को पु्ष्य नक्षत्र का समय दोपहर 01:39 से 22 अक्टूबर की दोपहर 3:38 तक रहेगा। इस वर्ष दिवाली से पहले दो दिन पुष्य नक्षत्र होने से इसका महत्त्व कहीं गुना अधिक बढ़ जाएगा। सोम व मंगल नक्षत्र विशेष फलदायी होते हैं। सोमवार के दिन सोना, चांदी, पुस्तक, बहीखाते व धार्मिक वस्तुएं ले सकते हैं और मंगलवार को मकान, सजावट की वस्तुएं, सोफा, वाहन आदि की खरीद कर सकते हैं।
खरीदारी का शुभ मुहूर्त
21 अक्टूबर 2019,खरीदी के चौघड़िया मुहूर्त
लाभ चौघड़िया शाम 04:33 से 05:59 तक
शुभ चौघड़िया रात्रि 07:33 से 09:05 तक
22 अक्टूबर को चौघड़िया मुहूर्त
लाभ चौघड़िया दोपहर 12:12 से 01:39 तक
अमृत चौघड़िया दोपहर 01:39 से 03:05 तक
राशि के अनुसार क्या खरीदें
पुष्य नक्षत्र में कोई भी वस्तु बिना किसी मुहूर्त देखे खरीदी जा सकती है। इसके बावजूद ज्योतिषियों का कहना है कि अगर आप अपनी राशि के अनुसार वस्तुओं की खरीदी करेंगे तो वह और अधिक फलदायी व स्थाई रहेगी।
कर्क- चांदी, वाहन, आवास
कन्या- पन्ना, वाहन
तुला- डायमंड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
वृश्चिक- गोल्ड,जमीन
मकर- वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
कुंभ- वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
मीन- वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
करवा चौथ पर इस रंग के कपड़े पहनने से मिलेंगी अपार खुशियां!!
सुहागन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत बहुत मायने रखता है। इस बार चतुर्थी 17 अक्टूबर दिन गुरुवार को करवा चौथ मनाया जाएगा l इस दिन वह अपने पति की लंबी उम्र के लिए सारा दिन व्रत रखकर शाम को चांद को अर्घ्य देकर ही अन्न जल ग्रहण करती हैं। इस दिन विवाहित महिलाएं पूर्ण श्रृंगार कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है। यदि आप इस शुभ संयोग में करवा चौथ के व्रत का शुभ फल प्राप्त करना चाहते हैं, तो राशि के मुताबिक ही अपने कपड़ों का चयन करें। ऐसा करने से आप चंद्रमा और दूसरे ग्रहों की भी शुभ दृष्टि का लाभ पा सकते हैं l आइए जानते हैं राशिओं के अनुसार आपको कौन से रंग के कपड़े पहनने चाहिए।
मेष राशि
करवा चौथ के दिन मेष राशि की महिलाओं को लाल और गोल्डन कलर की साड़ी, लहंगा या फिर इस रंग का सूट पहनकर पूजा करनी चाहिए। इन रंगो के कपड़े पहनकर पूजा करने से उनके लिए यह व्रत अधिक फलदायी होगा।
वृषभ राशि
वृषभ राशि की महिलाओं को करवा चौथ के दिन सिल्वर और लाल रंग के कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस रंग के कपड़े पहनकर महिलाएं पूजा करें तो उन्हें पति का अधिक प्यार मिलेगा।
मिथुन राशि
करवा चौथ के दिन मिथुन राशि की महिलाओं को हरे रंग की साड़ी और लाल रंग की चूड़ियां पहनकर पूजा करनी चाहिए, तो यह व्रत उनके लिए अधिक फलदायक होगा। इससे उनके पति की आयु लंबी होगी और उनका व्रत भी सफल होगा।
कर्क राशि
कर्क राशि की महिलाओं को लाल और सफेद रंग की साड़ी के साथ सतरंगी चूड़ियां पहनकर करवा मैया की पूजा करनी चाहिए। साथ ही भोग में भी सफेद बर्फी का प्रयोग करने से उनका व्रत पूर्ण होगा और पति का दो गुना प्यार मिलेगा।
सिंह राशि
ज्योतिष की माने तो सिंह राशि की महिलाओं को लाल, संतरी, गुलाबी या फिर गोल्डन कलर के वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए। राशि के अनुसार, इन रंगो के कपड़े पहनने से भगवान जल्दी प्रसन्न होंगे।
कन्या राशि
कन्या राशि वाली महिलाओं को करवा चौथ के दिन लाल, हरी या फिर गोल्डन कलर की साड़ी पहननी चाहिए, ऐसा करने से उनके प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी।
तुला राशि
तुला राशि की महिलाओं को लाल, सिल्वर-गोल्डन रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से उनके लिए अधिक शुभ लाभ होगा, और पति का प्रेम और साथ अधिक मिलेगा।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि की महिलाओं को करवा चौथ के दिन लाल, मैरून या फिर गोल्डन रंग की साड़ी या लहंगा पहनकर पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्यार में बढ़ोतरी होगी।
धनु राशि
धनु राशि की महिलाओं को करवा चौथ के दिन पीले या फिर आसमानी रंग के कपड़े पहनने चाहिए। पूजा भी इन्हीं कपड़ो में करनी चहिए और पति की लम्बी उम्र की कामना करनी चाहिए। मां पार्वती उनकी मनोकामना जल्द पूरी करेंगी।
मकर राशि
मकर राशि की महिलाओं के लिए राशि के अनुसार सबसे शुभ रंग ब्लू है। इस रंग के कपड़े पहनकर चांद की पूजा करने से महिलाओं पर माता पार्वती अधिक प्रसन्न होती हैं।
कुंभ राशि
कुंभ राशि की महिलाओं को नेवी ब्लू , सिल्वर कलर या फिर दोनों मिक्स कलर के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। इससे उनके गृहस्थ जीवन में सुख व शांति बनी रहेगी और माता पार्वती का आशीर्वाद भी मिलेगा।
मीन राशि
ज्योतिषों के अनुसार, मीन राशि की महिलाओं को लाल रंग या गोल्डन कलर या दोनों मिक्स कलर के कपड़े पहनना शुभ होगा। करवा चौथ पर यह रंग चुनना सौभाग्य वृद्धि कारक होगा।
शरद पूर्णिमा के महत्व और किस देवता की पूजा करने से मिलेगा अपार धन!!!
“शरद पूर्णिमा “ इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। इसे कोजागरी व्रत के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन इतना शुभ और अच्छा होता है, कि एक छोटे से उपाय बड़ी से बड़ी मुश्किल भी टल जाती हैं। माना तो यह भी जाता है कि केवल खीर बना कर खाने से ही सेहत को कई फायदे मिल जाते हैं। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इसे रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूरे वर्ष में सिर्फ इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से निपुण होता है, और इससे निकलने वाली किरणें इस रात्रि में अमृत के सामान होती हैं। शरद पूर्णिमा की रात को दूध की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है। माना जाता है, कि चंद्रमा की किरणें जब खीर पर पड़ती है, तो वह खीर अमृत के समान गुणकारी और लाभकारी हो जाती हैं। इसलिए इस दिन खीर का सेवन किया जाता है।
शरद पूर्णिमा का व्रत 13 अक्टूबर रविवार को रखा जाएगा।
शरद पूर्णिमा व्रत मुहूर्त :-
पूर्णिमा आरंभ 13 अक्टूबर को 00:38:45 से
पूर्णिमा समाप्त 14 अक्टूबर 2019 को 02:39:58 तक रहेगी
शरद पूर्णिमा महत्व
शरद पूर्णिमा के दिन का एक विशेष महत्व है l इस दिन भगवान कृष्ण महारास रचना प्रारंभ करते हैं। देवीभागवत महापुराण के अनुसार गोपिकाओं के प्रेम को देखते हुए भगवान कृष्ण ने आज के दिन चंद्र को महारास का इशारा दिया था। चंद्र ने भगवान कृष्ण का संकेत समझते ही अपनी शीतल रश्मियों से प्रकृति को ढक दिया और उन्हीं किरणों ने भगवान कृष्ण के चेहरे की चमक को सजा दिया। कृष्ण और गोपिओं के अटूट प्रेम को देखकर चंद्रमा ने अपनी अमृत किरणों से पवित्र वर्षा आरंभ कर दी, जिसमें भीगकर गोपियाँ अमरता को प्राप्त हो गई और भगवान कृष्ण के अमर प्रेम का हिस्सा बनीं।
शरद पूर्णिमा की पूजा
शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी, चंद्र देव, भगवान शिव, कुबेर और कृष्ण की पूजा करने से घर में खुशियां आती है , और साथ अपार धन की प्राप्ति होती है। शरद पूर्णिमा को चंद्र की पवित्र किरणें आंगन में पड़ने से खुशियां आती है। इसलिए यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन रात में की गई चंद्र पूजन और आराधना से साल भर के लिए लक्ष्मी और कुबेर की कृपा प्राप्ति होती है। इसके अलावा आत्म विस्वास में वृद्धि, स्मरण शक्ति में बढ़ोतरी, अस्थमा से छुटकारा, ग्रह बाधा से रोकथाम और घर से निर्धनता मिटाने जैसी समस्याओं का समाधान होता है।
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मां लक्ष्मी की पूजा
शरद पूर्णिमा की रात में माँ लक्ष्मी की पूजा करने से धन सम्पति का लाभ प्राप्त होता है। इस दिन माँ लक्ष्मी के इस मन्त्र का जाप करना चाहिए।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
2 . कुबेर भगवान की पूजा
शरद पूर्णिमा को कुबेर महाराज की पूजा भी करनी चाहिए। इनकी पूजा करने से भी घर में धन की कमी ख़त्म होती है l उनकी पूजा के लिए भी एक मन्त्र का जाप करना चाहिए।
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये
धन धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।।
3 . भगवान शिव की पूजा
शिवलिंग का जल स्नान कराने के बाद पंचोपचार पूजा यानी सफेद चंदन, अक्षत, बेलपत्र, आंकडे के फूल व मिठाई का भोग लगाना चाहिए। इस दिन अपनी इच्छाओ की पूर्ति के लिए इस शिव मंत्र का ध्यान करना चाहिए। इससे जीवन में शुभ-लाभ प्राप्त होता है, शिव मंत्र मृत्युभय, दरिद्रता व हानि से रक्षा करने वाला माना गया है l
पंचवक्त्र: कराग्रै: स्वैर्दशभिश्चैव धारयन्।
अभयं प्रसादं शक्तिं शूलं खट्वाङ्गमीश्वर:।।
दक्षै: करैर्वामकैश्च भुजंग चाक्षसूत्रकम्।
डमरुकं नीलोत्पलं बीजपूरकमुक्तमम्।।
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गोपीकृष्ण की रासलीला
कहते हैं शरद पूर्णिमा की रात भगवान कृष्ण ने गोपियों संग रास रचाया था। इसमें हर गोपी के साथ एक कृष्ण नाच रहे थे। गोपियों को लगता रहा कि कान्हा बस उनके साथ ही थिरक रहे हैं।
महा ज्ञानी रावण दवारा किये गए 10 ऐसे कार्य जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे !!!
रावण एक महा ज्ञानी पंडित होने के साथ एक ज्योतिष था। वह वास्तु और विज्ञान का ज्ञान भी रखता था, और तो और वह दिव्य और मायावी शक्तियों का ज्ञान भी रखता था। उसके द्वारा 10 ऐसे कार्य किए गए, जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जायँगे।
1 .शिव तांडव स्त्रोत : रावण ने अपने आराध्य शिव की स्तुति में ‘शिव तांडव स्तोत्र’ की रचना की थी।
2.रावण संहिता : रावण संहिता जहां रावण के पुरे जीवन के बारे में बताती है, वहीं इसमें ज्योतिष की बहुत सी जानकारियां भी मिलती है।
- महान ग्रन्थ:- महा ज्ञानी रावण दवारा लिखत चर्चित ग्रन्थ – 1. दस शतकात्मक अर्कप्रकाश, 2. दस पटलात्मक उड्डीशतंत्र, 3. कुमारतंत्र, 4. नाड़ी परीक्षा।
3.अन्य ग्रंथ : माना जाता हैं कि रावण ने ही अरुण संहिता, अंक प्रकाश, इंद्रजाल, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, रावणीयम आदि पुस्तकों की रचना भी की थी।
4.रक्ष संस्कृति : रावण ने सभी की रक्षा करने के लिए ‘रक्ष’ संस्कृति की स्थापना की थी। रावण ने असंगठित राक्षस समाज को एकत्रित कर उनके कल्याण के लिए कई कार्य किए थे।
5.रावण की वेधशाला : रावण की सेना में अस्त्र-शस्त्र या यंत्र बनाने वाले एक से एक वैज्ञानिक थे,जिन्हे इन चीज़ो के बारे में ज्ञान था। जैसे शुक्राचार्य भार्गव, शंबूक, कुंभकर्ण और वज्रज्वला। उन्होंने मिलकर ही दारू पंच अस्त्र, सूर्यहास खड्ग, मकर मुख, आशी विष मुख, वाराह मुख जैसे विध्वंसकारी अस्त्रों का निर्माण किया था। खुद रावण ने उसकी वेधशाला में दिव्य-रथ का निर्माण किया था।
6.’रावण हत्था’ वाद्य यंत्र : भारत में एक वाद्य यंत्र है। यह प्रमुख रूप से राजस्थान और गुजरात में बजाया जाता है। रावण ने इसका आविष्कार किया था। रावण के ही नाम पर इसे ‘रावण हत्था’ या ‘रावण हस्त वीणा’ कहा जाता है। कुछ लोग इसे वायलिन का पूर्वज भी बताते हैं। बाद में इसे सारंगी के रूप में विकसित किया गया।
7.रावण के हवाई अड्डे : रावण के पास वायुसेना भी थी। कहा जाता हैं कि उसानगोड़ा, गुरुलोपोथा, तोतूपोलाकंदा और वारियापोला नामक उसके हवाई अड्डे थे, और पुष्पक नामक उसके पास एक विमान था।
8.जलपोत : रामायण के अनुसार रावण के पास वायुयानों के साथ कई समुद्री जहाज़ भी थे। रामायण में केवट प्रसंग से यह सिद्ध होता है, कि साधारण मनुष्य के पास नाव थी, तो रावण के पास समुद्री जहाज़ होना स्वाभाविक है। रामायण में कैवर्तों की कथा से तथा लोक साहित्य में रघु की विजय से स्पष्ट हो जाती है।
9.मधुमक्खी यंत्र : लंका में दूरभाष की तरह उस युग में ‘दूर नियंत्रण यंत्र’ था जिसे ‘मधुमक्खी’ कहा जाता था। विभीषण को लंका से निष्काषित कर दिया था, तब वह लंका से प्रयाण करते समय मधुमक्खी और दर्पण यंत्रों को भी राम की शरण में ले गया था।
10.लंका में लिफ्ट : लंका में यांत्रिक सेतु, यांत्रिक द्वार और ऐसे चबूतरे भी थे , जो बटन दबाने से ऊपर-नीचे होते थे। ये चबूतरे संभवत: लिफ्ट थे।
कहा जाता है कि महा ज्ञानी रावण की कुछ इच्छाएं अधूरी ही रह गई : रावण चाहता था कि उसके महल में सोने की सुगंध आए और मदिरा की दुर्गंध समाप्त हो जाए। स्वर्ग तक सीढ़ियां बनाई जाए और समुद्र के खारे पानी को मीठे पानी में बदल दिया जाए। वह यह भी चाहता था कि सभी लोग गौरे दिखाई दें कोई भी काला ना हो l
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वास्तुदोष निवारण के उपाय
वास्तुशास्त्र ज्योतिष की एक महत्वपूर्ण शाखा है। वास्तुदोष मकान-निर्माण और उसके उपयोग में पायी जाने वाली त्रुटियों के बारे में बताता है। वास्तुदोष होने के कारण घर में व्यर्थ कलह, धन-हानि, स्वास्थ्य-समस्याएँ, दुर्भाग्य और मानसिक शांति से संबन्धित समस्याएं सामने आती हैं।

माना जाता है कि घर-निर्माण में वास्तु का ध्यान रखना चाहिए। लेकिन कई बार हमें ऐसे घर में रहना पड़ता है जिसमें वास्तुदोष पाया जाता है लेकिन जिसके निर्माण में हमारी स्वयं की भूमिका नहीं होती। लेकिन कुछ खास उपायों को अपना कर हम वास्तुदोष से होने वाली समस्याओं से बच सकते हैं।
वास्तु शास्त्र एक ऐसी विद्या है जिसके अंदर मनुष्य की लगभग सभी समस्याओं का समाधान छिपा है। बस जरूरत है उस पर सही रूप से अमल करने की।
- अगर आप बीम के नीचे बैठकर काम करते हैं तो इस आदत को बदलें। बीम के नीचे बैठना सेहत खराब करता है क्योंकि बीम पूरे घर की नकारात्मकता को समेट लेता है इसलिए स्थायी रूप से यहां बैठने से बचें।
- रात्रि में दिशा देखकर ही सोएं। पूर्व एवं दक्षिण मुखी होकर सोना लाभकारी एवं शुभ होता है। उत्तर और पश्चिम मुखी सोना अशुभ होता है।
- बैडरूम में शौचालय यास्नान घर हो तो उसके प्रयोग में विशेष सावधानी रखें। उनके दरवाजे हमेशा बंद रखें क्योंकि उससे नकारात्मक ऊर्जा आती है।
- अगर घर में दवाइयों की खाली बोतलें रखी हुई हैं या प्रयोग में न आने वाली दवाइयां रखी हैं या खराब हो चुकी दवाइयां पड़ी हैं तो उनको तुरंत फैंक दें अन्यथा बीमारियां घर से कभी जाएंगी नहीं।
- घर में युद्ध अथवा दुखद तस्वीर, ठहरे जल की तस्वीर । या पेंटिंग न लगाएं अन्यथा घर में अशांति का माहौल होगा।
बच्चों को बिस्तर पर पढ़ने से रोकें। पढ़ते समय बच्चों का मुख पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। इससे पढ़ने में एकाग्रता आती है। - पूजा का कमरा मुख्य द्वार के सामने नहीं होना चाहिए। पूजा के कमरे में कभी भी अंधेरा नहीं होना चाहिए। पूजा घर में अंधेरा होने से पूरे परिवार के स्वास्थ्य की हानि होती है।
- अपने बैडरूम या ड्राइंग रूम में कभी भी पूजा का मंदिर न । रखें। यह अशुभ होता है।
- घर को साफ रखें व हर सामान सही तरह से रखें। बिखरी हुई चीजें नकारात्मकता देती हैं।
- पलंग के अंदर बाक्स में कभी भी नुकीली चीजें, टूटी-फूटी चीजें और बंद घड़ी न रखें।
- घर के नलों से पानी अगर रिसता हो तो इससे धन हानि व मानहानि होती है।
- घर में हमेशा सेंधा नमक से पोंछा लगवाएं। इससे नकारात्मकता दूर ही नहीं बल्कि खत्म हो जाती है।
- तुलसी का पौधा घर के ईशान कोण में रखने से घर के लोगों की आयु बढ़ती है।
- घर में कांटेदार और कड़वे पेड़-पौधे लगाने से घर में रहने वाले लोगों में बैर उत्पन्न होता है। इससे पिता-पुत्र भी शत्रु बन जाते हैं।
- घर में अगर जूते-चप्पल इधर-उधर पड़े होते हैं तो इससे मान-सम्मान कम हो जाता है।
- भोजन करते समय मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में ही रखें। रसोई घर में सुबह-शाम धूप-दीप जरूर करें।
- घर का मुख्य द्वार अगर दक्षिण मुखी है तो घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने बड़ा शीशा लगाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर से ही वापस चली जाएगी।
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पेड़ के पत्ते हरे क्यों होते हैं?
हम जानते हैं कि पेड़-पौधे बढ़ते हैं। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि किसी भी जीव-जन्तु के विकसित होने की भांति पेड़-पौधे भी विकसित होते हैं। इस विकास के लिए भोजन जरूरी है। तो सवाल पैदा होता है कि पेड़ भोजन कैसे करते हैं? जवाब है क्लोरोफिल जैसे घटकों की मदद से।

दरअसल पेड़-पौधे भोजन के लिए सूर्य के प्रकाश का उपयोग करते हैं। पेड़ों के पत्ते सूर्य के प्रकाश को ऊर्जा के रूप में संग्रहित (store) करते हैं। बाद में इस संग्रहित ऊर्जा का उपयोग पेड़ भोजन के रूप में करते हैं।
क्लोरोफिल
ऊर्जा के भोजन भोजन के रूप में निर्माण की इस प्रक्रिया में पत्तों में पाये जाने वाले कुछ घटक(components) मदद करते है। ऐसे ही घटकों में मुख्य घटक है क्लोरोफिल। क्लोरोफिल अधिकतर पेड़ों की भोजन-निर्माण की प्रक्रिया जिसे प्रकाश संश्लेषण कहा जाता हैं में मुख्य भूमिका अदा करता है।
क्लोरोफिल हरे रंग का होता है। सूर्य का प्रकाश क्लोरोफिल के निर्माण यानि पोषण को बढ़ा देता है जिसकी वजह से यह पत्तों में अपनी मौजूदगी को हरे रंग के रूप में दर्शाता है। यही क्लोरीफिल भोजन के निर्माण में पेड़-पौधों की सबसे अधिक सहायता करता है।
सूर्य के प्रकाश की गैरमौजूदगी के परिणाम स्वरूप पत्तों में मौजूद अन्य घटक जोकि समान्यता पीले रंग का होता है बढ़ जाता है। इसी कारण सूर्य के प्रकाश के अभाव में पेड़ों के पत्ते पीले रंग के हो जाते हैं। कुछ पेड़ों के पत्तों में मौजूद अन्य सामान्य घटक जो कि लाल, बैंगनी आदि रंगों के होते हैं भी अपना प्रभाव दिखाते हैं इसी वजह से कुछ पेड़ों के पत्ते अन्य रंग में भी प्रदर्शित करते हैं।
आपने देखा होगा कि शरद ऋतु में जब सूर्य की रौशनी अधिक ताकतवर नहीं होती पेड़ पौधों के पत्तों के रंग अधिक हरे नहीं होते बल्कि वे पीले, लाल या बैंगनी रंग के दिखते हैं। इसमें भी यही लॉजिक काम करता है। यानि अन्य घटक अधिक ताकतवर होकर अपना रंग दिखा पाते हैं।
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एक अच्छे मित्र या सच्चे मित्र के दस गुण
किसी भी व्यक्ति के जीवन को सफल और खुशनुमा बनाने में कुछ ख़ास लोगों का अहम हाथ होता है. इनमें से कुछ लोग आपके परिवार से, तो कुछ लोग बाहर से भी हो सकते हैं. सच्चे मित्र इस लिस्ट में सबसे ऊपर होते हैं. सच्चे मित्र का मिल जाना अपने आप में बेहद भाग्यशाली भेंट है.
लेकिन समस्या यह है कि सच्चे मित्र को कैसे पहचाना जाए? आईये, जानते हैं वह 10 गुण, जिनसे आप जान सकते हैं कि सच्चे मित्रों की क्या विशेषता होती हैं और जिनको जान कर आप सच्चे और स्वार्थी मित्रों में भेद कर सकते हैं.
आपकी पीठ पीछे बुराई नहीं करते

सच्चे दोस्त आपके साथ बेवजह नाटक पन या बनावटीपन नहीं दिखाते. अगर आपका मित्र आपकी व्यक्तिगत या गोपनीय बातें दूसरे लोगों से शेयर करता है, तो सच मानिए वह आपका सच्चा मित्र नहीं है. उसे तुरंत छोड़ देने में ही आपकी भलाई है.
नीचा दिखाने की कोशिश नहीं करते

आपके सच्चे मित्र आपको कभी नीचा दिखाने की कोशिश नहीं करते. वह आपसे हमेशा शांति से बात करते हैं, ना कि मतभेद को बढ़ाने का काम करते हैं. वह आपसे हमेशा आपके गुणों के बारे में बात करते हैं, ना कि आपकी कमियों के बारे में. हाँ आपकी कमियों का उल्लेख वे आपको प्रोत्साहित करने के लिए करते हैं, न की आपको नीचा दिखाने के लिए.
अच्छे दोस्त व्यर्थ की बहस में नहीं पड़ते
आपका एक सच्चा दोस्त आपसे कभी भी व्यर्थ की बहस शुरू नहीं करता. आप जैसे हो वैसे ही वह आपको अपना दोस्त मानता है और आपसे प्रतिद्वंदी की तरह व्यवहार नहीं करता. वह आपसे कभी भी ऐसी बहस नहीं शुरू करेगा, जिसमें आप कभी जीत नहीं सकते।
सच्चे मित्र आपको सुनते हैं

आपके सच्चे मित्र आपको अच्छी तरह से सुनते और समझते हैं और आपकी बातचीत के बीच बाधा नहीं डालते. एक सच्ची दोस्ती ऐसी स्थिति में कभी संतुलित नहीं रहती, जिसमें एक बातचीत कर रहा हो और दूसरा उसकी बातचीत में टोका-टोकी कर रहा हो. तो आपको भी अपने मित्र को सुनना चाहिए, क्योंकि आप भी सच्चे मित्र बनना चाहते हैं न!
आपको हतोत्साहित नहीं करते

वे आपको लक्ष्यों में आगे बढ़ने में कभी भी आपको हतोत्साहित (discourage) नहीं करते. एक अच्छा दोस्त हमेशा आपके व्यक्तिगत् विकास में बाधक आपकी कमजोरियों को आपको बताता है. वह ऐसा दया-भावना या घृणा-भावना से नहीं करते, बल्कि वह आपका भला और विकास चाहते हैं. ऐसा करके, वे आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं.
अतीत के बारे में कभी बात नहीं करते

एक अच्छा मित्र आपके अतीत के संबंध में कभी नहीं बात करेगा. यदि आप उनको अपने अतीत की कमजोरियों या गलतियों के बारे में कुछ बता भी देंगे, तो वह आपको उसे भूलने और अतीत से सीखने की सलाह देते हैं, न कि आपकी बातों को दूसरों को बताकर मज़े लेते हैं.
वे आप का साथ नहीं छोड़ते

एक अच्छा दोस्त भावनात्मक रूप से बुद्धिमान होता है. वह आपको इसलिए नहीं ठुकराता, क्योंकि लोग आपको अच्छा नहीं मानते या आपके बारे में आपके मित्रों को गलत राय देते हैं. बुरे समय में जब कोई आपके साथ नहीं होता, तब भी सच्चा मित्र आपका साथ नहीं छोड़ता.
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वे आपकी सफलता से नहीं जलते

आपका अच्छा दोस्त आपकी सफलता से कभी भी ईर्ष्या नहीं करते. उनको यह पता होता है कि उनके दोस्तों की सफलता उनके लिए सबसे बड़ी ख़ुशी है. वे जानते हैं कि आपकी सफलता आपकी मेहनत का नतीजा है. वे आपकी सफलता को दिल से मनाते हैं और इसे आपके साथ इंजॉय करते हैं.
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वे आपको आंकने की कोशिश नहीं करते

एक सच्चा दोस्त कभी भी आपको जज (judge) नहीं करेगा. यानी वह कभी आंकने की कोशिश नहीं करता कि आप कितने अच्छे, बुरे, परफेक्ट या इम्पेर्फेक्ट हो. वह आपको जैसे आप हो वैसे ही स्वीकार करता है, क्योंकि उसे पता होता है कि वह खुद भी परफेक्ट नहीं है. वह आपको आपकी कमियों के लिए उलाहना नहीं देता और न ही आपकी कमियों के लिए आपको छोड़ता है.
केवल ‘टाइमपास’ दोस्ती नहीं
आपका अच्छा दोस्त आपसे थोड़े समय के लिए या टाइम-पास दोस्ती नहीं करता, बल्कि वह लंबे समय तक आपसे दोस्ती निभाता है. जब कभी आपको कोई बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो वह हमेशा आपकी मदद के लिए तैयार रहते हैं. वह ऐसा शख्स होता है जब जरुरत पड़ने पर आपको सबसे पहले उसकी याद आती है. वह आपको निराश नहीं करता.
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यदि आपके पास ऐसे दोस्त हैं, जिनमें यह सब गुण हैं, तो यकीन मानिए आप सचमुच में भाग्यशाली हैं और आप ऐसे मित्रों को कभी नहीं छोड़ना चाहेंगे।


