मानवाधिकार दिवस के बारे में कुछ रोचक तथ्य !

‘मानव अधिकार दिवस’  दुनिया भर में  हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। वर्ष 1948 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर को हर साल ‘मानव अधिकार दिवस’  मनाये जाने की घोषणा की गयी थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में मानव अधिकार दिवस आधिकारिक (Official) तौर पर 4 दिसंबर 1950 को स्थापित किया गया था।

यह दिन मानव अधिकारों के सभी मसलों पर चर्चा करके तथा राजनीतिक सम्मेलनों, बैठकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, का आयोजन करके मनाया जाता है। इस दिन को मानाने के लिए बच्चों तथा युवाओं द्वारा कई कार्यक्रम जैसे: संगीत, नाटक, नृत्य, कला सहित आदि प्रस्तुत जाते हैं। मानवाधिकार क्षेत्र में कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठन भी इस दिन को मनाने के लिए विशेष कार्यक्रम निर्धारित करते हैं।

इसके अलावा 10 दिसंबर को पारंपरिक रूप से मानवाधिकार और नोबेल शांति पुरस्कार के क्षेत्र में पांच वर्षीय संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। यह सभी कार्यक्रम लोगों को अपने अधिकारों को जानने में मदद करने के लिये आयोजित किये जाते हैं।

मानव अधिकार दिवस का उद्देश्य

मानव अधिकार दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को मानव अधिकारों के प्रति जागरुक करना है। मानव अधिकारों का उद्देश्य मुख्य रूप से आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक अधिकार और अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता शामिल करना हैं।

मानव अधिकार दिवस पूरी दुनिया में मानवता के खिलाफ हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए  मनाया जाता है। यह दिवस मुख्य रूप से  ‘अपने  अधिकारों के लिए कदम उठाना’ के लिए मनाया जाता  है।

विश्व मानव अधिकार दिवस की शुरुआत

10 दिसंबर को दरभंगा में यूनेस्को क्लब की बैठक में मानवाधिकारों के लिए जन जागरुकता अभियान चलाय जाने की घोषणा की गई । इसके साथ ही समाज के लोगों को उनके मानव अधिकारों के विषय में जानकारी देकर उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरुक किया जाये।

मुख्य मानवाअधिकार

मानव अधिकार का अर्थ उन मूल अधिकारों से है, जो सभी को समान रुप से जीवन जीने, स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और एक समान व्यवहार की प्राप्ति का अधिकार प्रदान करता है। कुछ ऐसे ही खास मौलिक अधिकार है जो हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है।

  • बोलने की आजादी
  • सुरक्षा का अधिकार
  • आर्थिक शोषण के खिलाफ आजाव उठाने का अधिकार
  • रंग, नस्ल, भाषा, धर्म के आधार पर समानता का अधिकार
  • कानून के सामने समानता का अधिकार
  • कानून के सामने अपना पक्ष रखने का अधिकार
  • अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार

मानव अधिकार कानून

भारत में 28 सितंबर 1993 से मानव अधिकार कानून पारित किया गया l भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 1993 को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किया। इस आयोग के कार्यक्षेत्र में नागरिक के  राजनीतिक , आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार भी आते हैं।

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सच्चे रक्षकों को धन्यवाद का दिन – सशस्त्र सेना झंडा दिवस

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सशस्त्र सेना झंडा दिवस या झंडा दिवस भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मियों के कल्याण हेतु भारत की जनता से धन-संग्रह के प्रति समर्पित एक दिन है। हर वर्ष 7 दिसंबर को सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जाता है।

‘सशस्त्र सेना झंडा दिवस‘ देश की सेना के प्रति सम्मान ज़ाहिर करने के रूप में मनाया जाता है। ये उन बहादुर सैनिकों के प्रति एकजुटता दिखाने का दिन है, जो देश की तरफ आंख उठाकर देखने वालों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। सशस्त्र  झंडा दिवस 7 दिसंबर, 1949 से भारतीय सेना द्वारा हर साल मनाया जा रहा है।


इस दिवस पर धन-संग्रह सशस्त्र सेना के प्रतीक चिन्ह झंडे को बाँट कर किया जाता है। इस झंडे में तीन रंग (लाल, गहरा नीला और हल्का नीला) तीनों सेनाओं को प्रदर्शित करते है।

क्यों मनाया जाता है ये दिन

‘सशस्त्र झंडा दिवस’ देश की सुरक्षा में शहीद हुए सैनिकों के परिवार के कल्याण के लिए मनाया जाता है। इस दिन झंडे की खरीद से जो पैसा इकठा होता है, उसे सैनिको के परिवार के कल्याण के लिए खर्च किया जाता है।


ऐसे मिला ‘सशस्त्र’ नाम

जब हमारा देश आज़ाद हुआ तो उस समय बहुत ही जान माल का नुक़साम हुआ था। जिसका अधिक नुकसान सैनिको के परिवार को उठाना पड़ा। इसी वजह से सैनकों के परिवारों की मदद करने के लिए 7 दिसंबर, 1949 का दिन चुना गया।

शुरुआत में यह दिन केवल झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता था, लेकिन साल 1993 में इस दिन को ‘सशस्त्र झंडा दिवस’ का नाम दे दिया गया। इसके बाद से ये दिन प्रत्येक वर्ष सशस्त्र सेना द्वारा मनाया जाने लगा।


सशस्त्र झंडा दिवस पर जमा हुई राशि युद्ध वीरांगनाओं, सैनिकों की विधवाओं, दिव्यांग सैनिक और उनके परिवार वालों के कल्याण पर खर्च की जाती है।


तीन प्रमुख भाग

भारतीय सशस्त्र सेना में तीन प्रमुख भाग है, जिसमें भारतीय थलसेना, भारतीय जलसेना और भारतीय वायुसेना हैं।  भारत के राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं। भारतीय सशस्त्र बल भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के तहत आता है।

प्रेरक महिलाएँ जिन्होंने देश को गौरवान्वित किया

भारत की ऐसी अनगिनत महिलाएँ हैं जिन्होंने अपने अतुलनीय कार्यों और योगदान से दुनिया में अपना लोहा मनवाया है।

सदियों से ही पुरुषों के समाज में हावी रहने के चलते महिलाओं को तुच्छ निगाह से देखा जाता रहा। लेकिन समय-समय पर महिलाओं ने अपनी अद्भुत बौधिक, शारीरिक और राजनीतिक क्षमता का इस्तेमाल करके पुरुषों के भ्रम और अभिमान को तोड़ा है।

आज महिलाएँ हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। शिक्षा के अवसरों का सदुपयोग करके महिलायें आज हर क्षेत्र में पुरुषों से इक्कीस नज़र आती हैं।

आज हम कुछ ऐसी ही महिलाओं के बारे में चर्चा करेंगे जिन्होंने अपने अभूतपूर्व कारनामों से भारत देश का नाम रोशन किया है।

मदर टेरेसा

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मदर टेरेसा पहली भारतीय महिला थीं जिन्होंने नोबेल पुरस्कार जीता। मदर टेरेसा ऐसे व्यकतित्व की धनी थी, जिन्होंने दुखी और पीडित व्यक्तियों की सेवा साधना में अपना सम्मपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया था। सभी वर्गों और आम जन को अपना मानने वाली इस महान संत को विश्व का सर्वोच्च नोबेल पुरस्कार, शांति और सदभावना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया।

रीता फारिया पॉवेल

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रीता फारिया पॉवेल का जन्म मुंबई में हुआ. वह एक भारतीय मॉडल होने के साथ साथ एक डॉक्टर भी थीं। सन 1966 में उन्हें मिस-वर्ल्ड ख़िताब से नवाजा गया और वह ऐसा करना वाली पहली एशियाई महिला थीं। एक ऐसे दौर में जहां महिलाओं को हर चीज़ की मनाही थी इस बेहद सुंदर और प्रतिभाशाली महिला ने सारी बाधाओं पर विजय पाई।

किरण बेदी

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किरण बेदी का जन्म 9 जून 1949 को हुआ. वह एक भारतीय राजनीतिज्ञ व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इसके साथ-साथ वह एक पूर्व टेनिस खिलाड़ी भी हैं। सन1972 में वह भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में शामिल हुईं ।वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला हैं।

सरोजिनी नायडू

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सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ।  उनका पैतृक घर बांग्लादेश में था। वह भारत की पहली महिला थीं जो राज्यपाल चुनी गयी थीं।

कल्पना चावला

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कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को पंजाब के करनाल (अब हरियाणा में) में हुआ था। वह भारतीय व अमेरिका की पहली महिला थी जिन्होंने अंतरिक्ष की यात्रा की थी।

इंदिरा गांधी

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इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवम्बर 1917 हुआ। वह भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनी। वह 1966 से लेकर 1977 तक तथा  फिर 1980 से लेकर 1984 तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं।

सुरेखा यादव

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सुरेखा यादव का जन्म 2 सितम्बर 1965 को हुआ। वह भारतीय रेलवे की पहली महिला ट्रेन चालक हैं।

बछेंद्री पाल

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बछेंद्री पाल का जन्म 24 मई 1954 को बम्पा, चमोली जिला, उतराखंड, भारत में हुआ। 1984 में वह माउंट एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचने वाली पहली महिला बनीं।

सरला ठकराल

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सरला ठकराल का जन्म 1914 में नयी दिल्ली में हुआ। वह भारत की पहली विमान उड़ान भरने वाली महिला थी। सन1936 में, केवल 21 साल की उम्र में उन्होंने विमानन पायलट लाइसेंस अर्जित किया और उड़ान भरी।

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प्रतिभा पाटिल

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प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का जन्म 19 दिसंबर, 1934 हुआ। वह भारत के राष्ट्रपति के रूप में काम करने वाली पहली महिला हैं. उन्होंने भारत के राष्ट्रपति के रूप में 2007 से लेकर 2012 तक अपनी सेवाएँ प्रदानं की।

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दुर्बा बनर्जी

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दुर्बा बनर्जी ने अपनी विमानन कैरियर की शुरुआत सन 1959 में की. उन्होंने हवाई सर्वेक्षण पायलट के रूप में डकोटा राज्य की कलिंग एयरलाइंस कम्पनी में अपनी पहली उडान से की।

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सुष्मिता सेन

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सुष्मिता सेन का जन्म हैदराबाद, आंध्र प्रदेश, भारत में हुआ। वह 1994 में मिस यूनिवर्स का ताज जीतने वाली पहली भारतीय हैं।

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आनंदीबाई जोश

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आनंदीबाई जोश का जन्म 31 मार्च 1865 में कल्यान में हुआ। वह पहली महिला डॉक्टर थीं। आनंदीबाई गोपालराव जोशी पहले दक्षिण एशियाई महिला चिकित्सकों में से एक है। साथ ही वह पहली भारतीय महिला चिकित्सक थीं।[adinserter block=”14″]

साइना नेहवाल

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साइना नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 को हिसार, हरियाणा में हुआ। वह ओलिंपिक बैडमिंटन में कांस्य पदक जीतने वाले पहली भारतीय महिला हैं। साइना नेहवाल ने लन्दन ओलंपिक 2012 में यह पदक जीता था। साइना नेहवाल महिला एकल में दुनिया की पूर्व नंबर 1 खिलाडी भी हैं।

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सानिया मिर्जा

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सानिया मिर्जा का जन्म 15 नवम्बर 1986 हैदराबाद, तेलंगाना, भारत में हुआ। सानिया मिर्जा एक पेशेवर टैनिस खिलाड़ी है जो वर्तमान में महिला युगल रैंकिंग में नंबर 1 पर हैं। टेनिस की दुनिया में उन्होंने 2003 में कदम रखा था। जूनियर खिलाड़ी के तौर पर सानिया मिर्जा10 सिंगल्स और 13 डबल खिताब जीत चुकी हैं। 2006 में सानिया मिर्जा पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी जिन्होंने ग्रैंड स्लेम में प्रवेश किया था।

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यह है कुछ चुनिंदा महिलाएँ जिन्होंने भारत का नाम रोशन किया है। ये वह महिलाएँ है जिनकी वजह से  भारत का नाम इतिहास के सुनहरे पन्नों में लिखा गया है।

कब और क्यों मनाया जाता है, नौसेना दिवस

4 दिसंबर 1971 को ‘ऑपरेशन ट्राईडेंट’ के तहत भारतीय नौसेना ने कराची में पाकिस्तान नौसेना पर हमला कर उसे करारा सबक़ दिया था। इस युद्ध में पहली बार जहाज पर प्रहार करने वाली एक एंटी शिप मिसाइल से हमला किया गया था। इसी वजह से हर साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है।

इससे पहले 3 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी सेना ने भारत के हवाई क्षेत्र और सीमावर्ती क्षेत्रों में हमला किया था जबाव में भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान जोकि अब बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है में सैन्य अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था।

नौसेना के शौर्य के सम्मान दिवस से तौर पर 4 दिसंबर को पूरे देश में  नौसेना दिवस मनाया जाता है।

भारतीय नौसेना कब अस्तित्व में आई

वर्तमान में 55000 नौसैनिकों से लैस भारतीय नौसेना विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी नौसेना है।

17वीं शताब्दी में आधुनिक भारतीय नौसेना की नींव रखी गई थी। ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक समुद्री सेना के रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की थी। इसी प्रकार 1934 में रॉयल इंडियन नेवी की स्थापना भी की गई थी।

नौसेना की भूमिका

भारत की नौसेना देश की समुद्री सीमाओं को सुरक्षित करने और साथ ही साथ बंदरगाह यात्राओं, संयुक्त अभ्यास, मानवीय मिशन, पर आने वाली मुसीबतों से भी सहायता करती है। नौसेना भारत के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को बढ़ाने में एक बड़ी भूमिका निभाती है।

नौसेना विश्लेषकों (Naval Analyses) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में परमाणु-संचालित पनडुब्बी मिसाइलें और एक परमाणु संचालित पनडुब्बी चक्र के साथ 15 पारंपरिक पनडुब्बियां, और दो परमाणु संचालित पनडुब्बियां हैं l

भारतीय नौसेना का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। नौसेना का मुख्यालय अधिकारी-एडमिरल के नियंत्रण में होता है।

भारतीय नौसेना के बारे में कुछ रोचक तथ्य

भारतीय नौसेना विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी नौसेना है।

  1. भारतीय नौसेना 3 क्षेत्रों की कमांडों के द्वारा तैनात की गई है, जिसमें से प्रत्येक का नियंत्रण एक फ्लैग अधिकारी द्वारा किया जाता है l
  • पश्चिमी नौसेना कमांड (मुंबई में मुख्यालय)
  • पूर्वी नौसेना कमांड (विशाखापत्तनम में मुख्यालय)
  • दक्षिणी नौसेना कमांड (कोच्चि में मुख्यालय)
  1. पश्चिमी और पूर्वी नौसेना कमांड ‘ऑपरेशनल कमांड’ हैं, और अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में क्रमशः संचालन पर नियंत्रण करते हैं। वहीं दक्षिणी कमांड प्रशिक्षण कमांड है।
  2. 17वीं शताब्दी के मराठा सम्राट, छत्रपति शिवाजी भोसले को भारतीय नौसेना के पिता के रूप में माना जाता है।
  3. भारतीय नौसेना के युद्धपोत और पनडुब्बी के डिजाइन बड़े पैमाने पर रूस से प्रभावित हैं।
  4. केरल में Ezhimala नौसेना अकादमी एशिया में सबसे बड़ी नौसेना अकादमी है।
  5. INS (भारतीय नौसेना जहाज़) विराट नौसेना का पहला विमान वाहक और दुनिया का सबसे पुराना विमान वाहक था।
  6. पहले भारतीय नौसेना को रॉयल इंडियन नेवी कहा जाता था लेकिन, 26 जनवरी, 1950 के बाद इसका नाम भारतीय नौसेना रख दिया गया था।
  7. द्वितीय विश्व युद्ध में भारत की नौसैनिक बलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  8. भारतीय नौसेना दुनिया की शीर्ष दस नौसेना बलों में से एक है।
  9. मार्कोस या समुद्री कमांडो, भारतीय नौसेना के विशेष संचालन इकाई है।

जानिए श्री काल भैरव जी को प्रसन्न करने योग्य 10 उपाय

भगवान काल भैरव की महिमा तो अनेक शास्त्रों में मिलती है। भैरव जहां शिव के गण के रूप में जाने जाते हैं, वहीं वे दुर्गा माता के भक्त माने गए हैं। कृष्ण अष्टमी के दिन भगवान महादेव ने काल भैरव के रूप में अवतार लिया था।

जीवन में हर तरह के संकटों से मुक्ति के लिए भैरव आराधना का बहुत महत्व है। खास तौर पर काल भैरवाष्टमी के दिन भैरव भगवान् भैरव की पूजा कर व्यापार-व्यवसाय, शत्रु पक्ष से आने वाली परेशानियां, विघ्न, बाधाएं, कोर्ट कचहरी तथा निराशा आदि से मुक्ति पाई जा सकती है।

काल भैरव जी की पूजा करते समय सरसों के तेल का दीप व लड्डू चढ़ाने चाहिए। इनका वाहन कुत्ता माना जाता है, अत: कुत्ते को दूध आदि पिलाते रहना चाहिए। वैसे तो भगवान काल भैरव नाथ जी को खुश करना बहुत आसान है, लेकिन अगर वे रूठ जाएं तो मनाना भी बहुत मुश्किल होता है। आइये जानते है, कुछ ऐसी 10 बातों के बारे में जिनसे बहुत प्रसन्न होते हैं काल भैरव महाराज।

  1. रविवार, बुधवार या गुरुवार के दिन एक रोटी पर अपनी तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तेल में डुबोकर लाइन खींचें। यह रोटी किसी भी दो रंग वाले कुत्ते को खाने को दें । अगर कुत्ता यह रोटी खा लें तो समझ जाना चाहिए कि आपको भैरव नाथ का आशीर्वाद मिल गया। अगर कुत्ता रोटी सूंघ कर आगे बढ़ जाए तो इस कार्य को जारी रखें लेकिन सिर्फ हफ्ते के इन्हीं तीन दिनों में (रविवार, बुधवार या गुरुवार) आपको यह कार्य करना है। यही तीन दिन भैरव नाथ के माने गए हैं।
  2. उड़द के पकौड़े शनिवार की रात को कड़वे तेल में बनाएं और रात भर उन्हें ढंककर रखें। सुबह जल्दी उठकर प्रात: 6 से 7 के बीच बिना किसी से कुछ बोलें घर से निकले और रास्ते में मिलने वाले पहले कुत्ते को खिलाएं। याद रखें पकौड़े डालने के बाद कुत्ते को पलट कर ना देखें। यह कार्य आप सिर्फ रविवार के दिन कर सकते हैं।
  3. शनिवार के दिन शहर के किसी भी ऐसे भैरव नाथ जी का मंदिर की तलाश करे जहाँ  लोगों ने  करना लगभग छोड़ दिया हो। रविवार की सुबह सिंदूर, तेल, नारियल, पुए और जलेबी लेकर उस  जाए और  मन लगाकर उनकी पूजन करें। बाद में 5 से लेकर 7 साल तक के  लड़कों को चने-चिरौंजी का प्रसाद बांट दें। साथ लाए जलेबी, नारियल, पुए आदि भी उन्हें बांटे। याद रखिए कि जिस मिन्दर लोगो ने पूजा करना छोड़ दिया गया है वहां पूजा करने से  भैरवनाथ विशेष प्रसन्न होते हैं।
  4. प्रत्येक गुरुवार कुत्ते को गुड़ खिलाएं।
  5. रेलवे स्टेशन पर जाकर किसी कोढ़ी, भिखारी को मदिरा की बोतल दान करें।
  6. सवा किलो जलेबी बुधवार के दिन भैरव नाथ को चढ़ाएं और कुत्तों को खिलाएं।
  7. शनिवार के दिन कड़वे तेल में पापड़, पकौड़े, पुए जैसे विविध पकवान तलें और रविवार को गरीब बस्ती में जाकर बांट दें।
  8. रविवार या शुक्रवार को किसी भी भैरव मं‍दिर में गुलाब, चंदन और गुगल की खुशबूदार 33 अगरबत्ती जलाएं।
  9. पांच नींबू, पांच गुरुवार तक भैरव जी को चढ़ाएं।
  10. सवा सौ ग्राम काले तिल, सवा सौ ग्राम काले उड़द, सवा 11 रुपए, सवा मीटर काले कपड़े में पोटली बनाकर भैरव नाथ के मंदिर में बुधवार के दिन चढ़ाएं।

मधुमेह दिवस पर मधुमेह के रोगियों के लिए जरूरी टिप्स

14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है। मधुमेह के रोगी का आहार केवल पेट भरने के लिए ही नहीं होता, उसके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को संतुलित रखने में सहायक होता है। चूंकि यह रोग मनुष्य के साथ जीवन भर रहता है इसलिए जरूरी है कि वह अपने खानपान पर हमेशा ध्यान रखा जाए। डायबिटीज रोगियों के लिए बेहद जरूरी हैं ये 20 टिप्स। आइए जानें…
1. डायबिटीज ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति को काफी परहेज से रहना होता है। बदपरहेजी करने के दूरगामी परिणाम बुरे होते है।
2. इन्सुलिन हार्मोन के स्रावण में कमी से डायबिटीज रोग होता है। डायबिटीज आनुवांशिक या उम्र बढ़ने पर या मोटापे के कारण या तनाव के कारण हो सकता है।
3. आमतौर मरीज ब्लडशुगर की नार्मल रिपोर्ट आते ही लापरवाह हो जाता है। मधुमेह के मरीज के मुंह में गया हर कौर उसके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसलिए जो भी खाएं सोच समझकर खाएं।
4. मधुमेह के रोगी को आंखों व किडनी के रोग, सुन्नपन आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए सदैव यही प्रयत्न करना चाहिए कि ब्लड ग्लूकोज लेवल फास्टिंग 70-110 मिलीग्राम/ डीएल व खाना खाने के 2 घंटे बाद का 100-140 मिलीग्राम डीएल बना रहे।
5. इसके लिए इन्हें खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 45 मिनट से 1 घंटा तेज गति से पैदल चलना या अन्य कोई भी व्यायाम करना चाहिए।
6. सही समय पर दवाई या इंसुलिन लेना चाहिए। डायबिटिक व्यक्ति को अपने वजन व लंबाई के अनुसार प्रस्तावित कैलोरीज से 5 प्रतिशत कम कैलोरी का सेवन करना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति की लंबाई 5 फुट 4 इंच है तो उसका आदर्श वजन 55 किग्रा होना चाहिए। व्यक्ति की क्रियाशीलता यदि कम है, जैसे कि वह बैठे-बैठे कार्य करता है तो उसे 2400 कैलोरी लेना चाहिए।
7. डायबिटिक हो तो इसका 5 प्रतिशत कम अर्थात 2280 कैलोरी आहार उसके लिए सही रहेगा। यदि वह मोटा हो तो उसे 200-300 कैलोरी और घटा देना चाहिए।
8. ब्लड ग्लूकोज लेवल फास्टिंग 70-110 मिलीग्राम/ डीएल व खाना खाने के 2 घंटे बाद का 100-140 मिलीग्राम डीएल बना रहे। इसके लिए इन्हें खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
9. 45 मिनट से 1 घंटा तीव्र गति से पैदल चलना या अन्य कोई भी व्यायाम करना चाहिए।
10. सामान्य डायबिटिक व्यक्ति को अपने आहार में कुल कैलोरी का 40 प्रश कार्बोहाइड्रेटयुक्त पदार्थों से, 40 प्रतिशत फेट (वसा) युक्त पदार्थों से व 20 प्रतिशत प्रोटीनयुक्त पदार्थों से लेना चाहिए।
11. एक वयस्क अधिक वजनी डायबिटिक व्यक्ति को 60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट से, 20 प्रतिशत फेट से व 20 प्रतिशत प्रोटीन से कैलोरी लेना चाहिए।
12. डायबिटिक व्यक्ति को प्रोटीन अच्छी मात्रा में व उच्च गुणवत्ता वाला लेना चाहिए जैसे दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली, सोयाबीन आदि का सेवन करना चाहिए।
13. इंसुलिन ले रहे डायबिटिक व्यक्ति एवं गोलियां ले रहे डायबिटिक व्यक्ति को खाना सही समय पर लेना चाहिए। ऐसा न करनेपर हायपोग्लाइसीमिया हो सकता है, जिसके लक्षण निम्न हैं –
(1) कमजोरी लगना, (2) अत्यधिक भूख लगना, (3) पसीना आना, (4) नजर से धुंधला या डबल दिखना, (5) हृदयगति तेज होना, (6) झटके आना एवं गंभीर स्थिति होने पर कोमा भी हो सकता है।
14. डायबिटिक व्यक्ति को हमेशा अपने साथ कोई मीठी चीज जैसे ग्लूकोज, शकर, चॉकलेट, मीठे बिस्किट में से कुछ रखना चाहिए एवं ऐसे लक्षण होने पर तुरंत इनका सेवन करना चाहिए।
15. एक सामान्य डायबिटिक व्यक्ति को अपने आहार में निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए कि वे थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ खाते रहें। दो या ढाई घंटे में कुछ खाएं। एक समय पर बहुत सारा खाना न खाएं।
16. तले हुए पदार्थ, मिठाइयां, बेकरी के पदार्थों से परहेज करें। सदैव डबल टोन्ड दूध (स्किम्ड मिल्क) का प्रयोग करें।
17. कम कैलोरीयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें जैसे भुना चना छिलके वाला, परमल, अंकुरित अनाज, सूप, सलाद आदि का ज्यादा सेवन करें। दही (स्किम्ड मिल्क) से बनाया हुआ ले सकते हैं। छाछ का सेवन श्रेयस्कर होता है।
18. मैथीदाना (दरदरा पिसा हुआ) 1/2-1 चम्मच खाना खाने के 15-20 मिनट पहले लेने से शुगर कंट्रोल में रहती है व फायदा होता है। रोटी के आटे को बिना चोकर निकाले प्रयोग में लाएं व इसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इसमें सोयाबीन मिला सकते हैं।
19. हरी पत्तेदार सब्जियां खाना चाहिए। अपनी कैलोरीज का निर्धारण कुशल डायटिशियन से बनाकर उसके अनुसार चलें तो अवश्य ही लाभ होगा व भोजन में विकल्प ज्यादा मिल सकते हैं जिससे आपका भोजन वैरायटी वाला हो सकता है व बोरियत नहीं होगी।
20. घी व तेल का सेवन दिनभर में 20 ग्राम (4 चम्मच) से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अतः सभी सब्जियों को कम से कम तेल का प्रयोग करके नॉनस्टिक कुकवेयर में पकाना चाहिए।

मधुमेह के मरीजों को हरी चाय से होने वाले छह लाभ!

किसी व्यक्ति के शरीर में मधुमेह जैसे विकार को नियंत्रण करना एक बहुत मुश्किल काम होता है।  अगर मधुमेह को नियंत्रण नहीं किया गया तो यह रोगी के शरीर में बहुत सारी जटिलताओं को पैदा कर देता है।  हरी चाय(Green Tea) मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत ही लाभदायक पेय पदार्थ है।

हरी चाय(Green Tea) पीने के लाभ जो मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद हैं। हरी चाय पीने से मधुमेह के मरीजों को मिलते हैं यह छह लाभ।

  1. अगर किसी व्यक्ति को टाइप 1 मधुमेह हुआ है।  तो उसके शरीर में रक्त शर्करा की मात्रा ज्यादा होने से, उसका शरीर जरूरी इंसुलिन पैदा करने में असमर्थ होता है।  लेकिन हरी चाय पीने से वह अपने शरीर में इंसुलिन की मात्रा को नियंत्रण कर सकते हैं क्योंकि हरी चाय में ECGC (Epigallocatechin gallate) नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है।
  2. हरी चाय में मधुमेह विरोधी गुण होते हैं जो मधुमेह से ग्रस्त रोगी में ओक्सीडेटिव तनाव कम करता है और उनमें ग्लूकोज को बढ़ाता है।  हरी चाय में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी होती है जो शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को कम करने में मदद करती है।
  3. टाइप 1 डाइबिटीज के रोगियों के लिए ग्रीन टी काफी फायदेमंद है। ग्रीन टी में एंटीआक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं।
  4. जो लोग टाइप 2 के मधुमेह से ग्रस्त होते हैं, उन्हें ग्लूकोज और लिपिड चयापचय(Lipid Metabolism) विकारों का सामना करना पड़ता है।  हरी चाय में Catechins पाया जाता है।  जो इन विकारों का समाधान करने में मददगार होता है। जिससे बहुत अधिक लाभ होता है
  5. टाइप 2 का मधुमेह, रोगी में मोटापे का कारण बनता है।  लेकिन हरी चाय में ऐसे गुण होते हैं जो रोगी के शरीर में से फैटी एसिड कम करते हैं जिससे मोटापा भी कम होता है।
  6. मधुमेह की मुख्य वजह शरीर में इंसुलिन की कमी होती है।  लेकिन हरी चाय शरीर में मधुमेह को रोककर रखने में एक सक्षम पेय पदार्थ है।

शुरू हो रहा है दीपावली का पर्व जानिए कैसा होगा आपकी राशियों पर असर !!!

दीपावली की पूजा विशाखा नक्षत्र में होगी जिसके स्वामी गुरु हैं। गुरु इस समय सिंह राशि में स्थित है एवं राहु कन्या में रहेगा। इस बार दीपावली पर गुरु सिंह राशि में रहेगा एवं राहु कन्या में रहेगा। यह योग इससे पहले 1884 में बना था। इसके बाद यह योग दोबारा 131 साल बाद सन् 2145 में बनेगा।

दीपावली यानि महालक्ष्मी के त्यौहार का आरंभ माना जाता है। इस महालक्ष्मी पर्व में देवी लक्ष्मी की आप पर कितनी कृपा रहेगी? नौकरी, व्यवसाय, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन के लिए 2019 की दिवाली तक का समय कैसा गुजरेगा? जानिए क्या कहते हैं सितारे

मेष राशि

मेष राशि के जातकों का सूर्य नीच का होकर एवं चंद्र तुला से राशि पर दृष्टि डालेगा। इसके प्रभाव से समय अच्छा रहेगा। प्रसन्नता रहेगी। त्यौहार है तो खर्च अधिक होगा, किंतु आय भी बेहतर रहेगी। इसके साथ ही मान-प्रतिष्ठा के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। यह स्थिति मेहनत से कामयाबी का बड़ा द्वार खोलेगी। विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को मेहनत के बाद ही सफलता मिलेगी। व्यापार में कुछ नया करने को मिल सकता है। दांपत्य जीवन या प्रेम में सफलता मिलेगी।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों पर शनि की दृष्टि एवं चतुर्थ गुरु व्यर्थ विवादों का कारण बनेगा। श्रेष्ठीजनों की संगत में रहें, तो ही लाभ होगा। यह समय आपके लिए मिला-जुला रहेगा। इस काल में आपको अपनी प्रतिष्ठा के प्रति सचेत रहना चाहिए। आपको धन, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। अचानक व्यय और हानि के साथ ही लाभ की स्थितियां बनती रहेंगी। जॉब या व्यापार में बदलाव के लिए समय उत्तम नहीं है। नीच संगत से बचें। बुरी आदतें आकर्षित कर सकती हैं। दीपावली पर भूलकर भी जुआ-सट्टा न खेलें।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों का तृतीय गुरु उत्साह बढ़ाएगा। समय का सदुपयोग करने में सफल रहेंगे। धन की आवक अच्छी रहेगी। उच्च शिक्षा के प्रयास रंग लाएंगे। करियर के लिए समय उत्तम है। नए दोस्त बनेंगे व कोई बड़ा काम होने की संभावना है। जमीन संबंधी काम में भी सफलता मिल सकती है। आलस्य में वृद्धि व भाग दौड़ से थकान महसूस होगी। किसी पुराने विवाद से छूटकारा मिलेंगा। वाणी की कुशलता में वृद्धि होगी।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों का राशि से दूसरा गुरु होने के कारण दीपावली या इसके आस-पास कोई अच्छी खबर आ सकती है। आप धार्मिक कार्यों में व्यस्त रहेंगे। आय बेहतर रहेगी एवं परिवार का सहयोग मिलेगा। इस दीपावली के पर्व आपको व्यवसायिक लाभ और करियर में जबरदस्त उन्नति होगी। काम के बोझ से कभी ख़ुशी कभी गम का एहसास होगा। स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतें अन्यथा किसी रोग का शिकार भी हो सकते हैं।

सिंह राशि

सिंह राशि के लिए यह दिवाली विशेष सौगात लाएगी। सिंह राशि के जातकों का गुरु गोचर राशि में होने से त्यौहार के समय कोई उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है। आपको शनि की ढैय्या से मुक्त होने का स्पष्ट आभास होगा। सिंह राशि वालो को धन की स्थिति बेहतर रहेगी एवं मान-सम्मान में वृद्धि होगी। करियर में भी सफलता मिलेगी। परिजनों का सहयोग मिलेगा। संतान पक्ष से अच्छा समाचार मिलेगा।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों का 12वां गुरु एवं नीच का शुक्र के साथ राहु का गोचर भी राशि में रहेगा। आत्मविश्वास रखें तो कोई भी कार्य में सफलता निश्चित है। चंद्र के प्रभाव से लाभ प्राप्त होगा। स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर रह सकता है। संपत्ति से जुड़ा कोई तनाव हो सकता है। विधाता का संकेत है कि सकारात्मक विचारों द्वारा नवीन योजनाओं का सूत्रपात करना सही होगा।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों का सूर्य, बुध एवं चंद्रमा का प्रभाव राशि में रहेगा। यह संयोग नुकसान करा सकता है। संभलकर रहें। शनि की साढ़े साती भी राशि में चल रही है। यह समय आपको आर्थिक लाभ का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। हालांकि कार्यक्षेत्र में सहयोगियों से वैचारिक मतभेद और लाभ दोनों होते रहेंगे। वाहन चलाते समय सावधानी रखें व जोखिमभरा कोई काम न करें। रुपए के लेन-देन में भी सावधानी रखें। करियर में बड़ी सफलता के योग बन रहे है।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालो के लिए दिवाली का समय उत्तम रहेगा। आय-व्यय बराबर बना रहेगा। किसी अज्ञात भय का सामना करना पड़ सकता है, हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करें। वृश्चिक राशि के लोग शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल  रहा है। कार्य के दौरान असावधानी से उलझन का सामना करना पड़ सकता है। कर्ज संबंधी समस्या का निराकरण होगा। नए काम में हाथ नहीं डालें। व्यक्तिगत जीवन में दिमाग ठंडा और भावुकता को परे रखें। किसी नए कार्य के कारण विदेश यात्रा का योग बन सकता है।

मकर राशि

मकर राशि के लोगो के लिए का दिवाली के शुभ अवसर पर भाग्य प्रबल रहेगा। कई शुभ समाचार मिलेंगे। अटके हुए काम भी पूरे हो सकते हैं। किसी मित्र की सहायता से लाभ प्राप्ति की संभावना है। आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा। पुराने रोग से मुक्ति मिलेगी। शिक्षा में सफलता के लिए दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम की जरूरत है। कुल मिलाकर समय बहुत अच्छा रहेगा। आर्थिक लाभ के  योग बन रहे है।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों को आय के उत्तम साधन प्राप्त होंगे। संतान से सुख प्राप्त होगा। योग्यता के अनुसार काम मिलेंगे। करियर में नई योजनाएं बनेंगी, जो आगे चल कर लाभ देंगी।  यह योग नए विचारों और मित्रों के सहयोग से किसी लक्ष्य की प्राप्ति का सयोंग बन सकता है। व्यक्तिगत जीवन में किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। कार्य की अधिकता होगी। जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। त्वचा संबंधी रोग भी हो सकता है।

मीन राशि

मीन राशि वालो को इस बार की जगमगाती दिवाली अपने दामन में  खुशियों का खज़ाना छिपाए हुए है। आपको विदेश से लाभ मिलने की प्रबल संभावना है। शारीरिक पीड़ा से गुज़रना पड़ सकता है। इस दौरान आपको शारीरिक थकावट का अहसास हो सकता है। विरोधी पक्ष प्रभावी रहेगा। चिंता न करें दीपावली के बाद स्थिति में सुधार होगा। परिवार में ख़ुशी का माहौल होगा। वरिष्ठ सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा।

पुष्य नक्षत्र : जानिए महत्व, और खरीदारी का शुभ मुहूर्त

नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन खरीदारी और दूसरे शुभ कार्य करने का महत्व है। दिपावली के पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र को खरीदारी करना अति शुभ माना जाता है। पुष्य नक्षत्र आज और कल 21 अक्टूबर और 22 अक्टूबर 2019 को है।

पुष्य नक्षत्र का महत्त्व

इस संयोग में जो भी खरीदी की जाएगी, वह शुभ रहेगी। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, कपड़े, जेवर, भूमि, भवन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं आदि खरीदने के लिए शुभ योग है। इस नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी वस्तु अधिक समय तक उपयोगी, शुभ फल और अक्षय फल देने वाली होती है। पुष्य नक्षत्र में सोने की खरीदी का ज्यादा महत्व है। इस दिन सोने की खरीदी से घर में बरकत आती है।

21 अक्टूबर को पु्ष्य नक्षत्र का समय दोपहर 01:39 से 22 अक्टूबर की दोपहर 3:38 तक रहेगा। इस वर्ष दिवाली से पहले दो दिन पुष्य नक्षत्र होने से इसका महत्त्व कहीं गुना अधिक बढ़ जाएगा। सोम व मंगल नक्षत्र विशेष फलदायी होते हैं। सोमवार के दिन सोना, चांदी, पुस्तक, बहीखाते व धार्मिक वस्तुएं ले सकते हैं और मंगलवार को मकान, सजावट की वस्तुएं, सोफा, वाहन आदि की खरीद कर सकते हैं।

खरीदारी का शुभ मुहूर्त

21 अक्टूबर 2019,खरीदी के चौघड़िया मुहूर्त

लाभ चौघड़िया शाम 04:33 से 05:59 तक
शुभ चौघड़िया रात्रि 07:33 से 09:05 तक

22 अक्टूबर को चौघड़िया मुहूर्त

लाभ चौघड़िया दोपहर 12:12 से 01:39 तक
अमृत चौघड़िया दोपहर 01:39 से 03:05 तक

राशि के अनुसार क्या खरीदें

पुष्य नक्षत्र में कोई भी वस्तु बिना किसी मुहूर्त देखे खरीदी जा सकती है। इसके बावजूद ज्योतिषियों का कहना है कि अगर आप अपनी राशि के अनुसार वस्तुओं की खरीदी करेंगे तो वह और अधिक फलदायी व स्थाई रहेगी।

मेष- गोल्ड, डायमंड

वृषभ- गोल्ड, डायमंड

मिथुन- पन्ना, गोल्ड, वस्त्र

कर्क- चांदी, वाहन, आवास

सिंह-सोना, प्लेटिनम, वाहन

कन्या- पन्ना, वाहन

तुला- डायमंड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

वृश्चिक- गोल्ड,जमीन

धनु- सोना, वस्त्र, पुखराज

मकर- वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

कुंभ- वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

मीन- वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

करवा चौथ पर इस रंग के कपड़े पहनने से मिलेंगी अपार खुशियां!!

सुहागन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत बहुत मायने रखता है। इस बार चतुर्थी 17 अक्टूबर दिन गुरुवार को करवा चौथ मनाया जाएगा l इस दिन वह अपने पति की लंबी उम्र के लिए सारा दिन व्रत रखकर शाम को चांद को अर्घ्य देकर ही अन्न जल ग्रहण करती हैं। इस दिन विवाहित महिलाएं पूर्ण श्रृंगार कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है। यदि आप इस  शुभ संयोग में करवा चौथ के व्रत का शुभ फल प्राप्त करना चाहते हैं, तो राशि के मुताबिक ही अपने कपड़ों का चयन करें। ऐसा करने से आप चंद्रमा और दूसरे ग्रहों की भी शुभ दृष्टि का लाभ पा सकते हैं l आइए जानते हैं राशिओं के अनुसार आपको कौन से रंग के कपड़े पहनने चाहिए।

मेष राशि

करवा चौथ के दिन मेष राशि की महिलाओं को लाल और गोल्डन कलर की साड़ी, लहंगा या फिर इस रंग का सूट पहनकर पूजा करनी चाहिए। इन रंगो के कपड़े पहनकर पूजा करने से उनके लिए यह व्रत अधिक फलदायी होगा।

वृषभ राशि

वृषभ राशि की महिलाओं को करवा चौथ के दिन सिल्वर और लाल रंग के कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस रंग के कपड़े पहनकर महिलाएं पूजा करें तो उन्हें पति का अधिक प्यार मिलेगा।

मिथुन राशि

करवा चौथ के दिन मिथुन राशि की महिलाओं को हरे रंग की साड़ी और लाल रंग की चूड़ियां पहनकर पूजा करनी चाहिए, तो यह व्रत उनके लिए अधिक फलदायक होगा। इससे उनके पति की आयु लंबी होगी और उनका व्रत भी सफल होगा।

कर्क राशि

कर्क राशि की महिलाओं को लाल और सफेद रंग की साड़ी के साथ सतरंगी चूड़ियां पहनकर करवा मैया की पूजा करनी चाहिए। साथ ही भोग में भी सफेद बर्फी का प्रयोग करने से उनका व्रत पूर्ण होगा और पति का दो गुना प्यार मिलेगा।

सिंह राशि

ज्योतिष की माने तो सिंह राशि की महिलाओं को लाल, संतरी, गुलाबी या फिर गोल्डन कलर के वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए। राशि के अनुसार, इन रंगो के कपड़े पहनने से भगवान जल्दी प्रसन्न होंगे।

कन्या राशि

कन्या राशि वाली महिलाओं को करवा चौथ के दिन लाल, हरी या फिर गोल्डन कलर की साड़ी पहननी चाहिए, ऐसा करने से उनके प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी।

तुला राशि

तुला राशि की महिलाओं को लाल, सिल्वर-गोल्डन रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से उनके लिए अधिक शुभ लाभ होगा, और पति का प्रेम और साथ अधिक मिलेगा।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि की महिलाओं को करवा चौथ के दिन लाल, मैरून या फिर गोल्डन रंग की साड़ी या लहंगा पहनकर पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्यार में बढ़ोतरी होगी।

धनु राशि

धनु राशि की महिलाओं को करवा चौथ के दिन पीले या फिर आसमानी रंग के कपड़े पहनने चाहिए। पूजा भी इन्हीं कपड़ो में करनी चहिए और पति की लम्बी उम्र की कामना करनी चाहिए। मां पार्वती उनकी मनोकामना जल्द पूरी करेंगी।

मकर राशि

मकर राशि की महिलाओं के लिए राशि के अनुसार सबसे शुभ रंग ब्लू है। इस रंग के कपड़े पहनकर चांद की पूजा करने से महिलाओं पर माता पार्वती अधिक प्रसन्न होती हैं।

कुंभ राशि

कुंभ राशि की महिलाओं को नेवी ब्लू , सिल्वर कलर या फिर दोनों मिक्स कलर के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। इससे उनके गृहस्थ जीवन में सुख व शांति बनी रहेगी और माता पार्वती का आशीर्वाद भी मिलेगा।

मीन राशि

ज्योतिषों के अनुसार, मीन राशि की महिलाओं को लाल रंग या गोल्डन कलर या दोनों मिक्स कलर के कपड़े पहनना शुभ होगा। करवा चौथ पर यह रंग चुनना सौभाग्य वृद्धि कारक होगा।