जानिए दुनिया के एकमात्र फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस के बारे में

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दुनिया की सबसे बड़ी डाक सेवा भारत में है लगभग 500 साल पुरानी ‘भारतीय डाक प्रणाली’ आज दुनिया की सबसे विश्वसनीय और बेहतर डाक प्रणाली में सबसे पहले स्थान पर है। भारत में 1,55,015 पोस्ट ऑफिस (डाकघर) हैं।

औसतन हर एक भारतीय पोस्ट ऑफिस सात हजार से ज्यादा लोगों को सेवा देता है,लेकिन कम ही लोगों को पता होगा कि भारत में एक डाकघर ऐसा भी है जो पूरी दुनिया में शायद अपनी तरह का अकेला है।

आज भी हमारे यहाँ हर साल क़रीब 900 करोड़ चिट्ठियों को भारतीय डाक द्वारा दरवाज़े–दरवाज़े तक पहुंचाता है।

कहाँ स्थित है यह डाकघर ?

जम्मू-कश्मीर में है ये तैरने वाला डाकघर जम्मू-कश्मीर में जहां शाम होते ही सड़क पर सन्नाटा छा जाता है, वहीं श्रीनगर में डल झील के किनारे बना डाकघर रात को भी खुला रहता है।

श्रीनगर के इस 24 घंटे खुले रहने वाले डाकघर की काया पलटने वाले यहां के पोस्टमास्टर जनरल जॉन सैमूएल थे। सैम्युअल ने आते ही इसकी सफाई की जिम्मेदारी ली।

सैम्युअल के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज यह डाकघर एक पर्यटन के केंद्र के रूप में उभरा है। सैम्युअल के प्रयत्नों से आज कश्मीर के 1700 डाक खाने काम कर रहे है। इस डाकघर को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्षन में दूसरा स्थान मिला।

दूसरे डाकघरों से अलग हैं कुछ चीजें

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की मशहूर डल झील में स्थित इस “फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस” में वो सारे कामकाज होते हैं जो दूसरे सामान्य पोस्ट ऑफिस में होते हैं।

हालांकि इस डाकघर में कुछ चीजें दूसरे डाकघरों से अलग भी हैं। यहां दी जाने वाली अन्य सेवाओं में इंटरनेट सुविधा और अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल शामिल हैं।

इसके अलावा, डाकघर के परिसर में एक डाक टिकट संग्रहालय है जिसमें अद्वितीय टिकटों का विशाल संग्रह है और एक स्मारिका की दुकान है जहां से पोस्टकार्ड, टिकट, स्थानीय आइटम और ग्रीटिंग कार्ड खरीद सकते हैं।

ये डाकघर अंग्रजों के जमाने का है। पहले इसका नाम ‘नेहरू पार्क पोस्ट ऑफिस’ था, लेकिन 2011 में तत्कालीन चीफ पोस्ट मास्टर जान सैम्युअल ने इसका नाम “फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस” रखवाया।

अगस्त, 2011 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और तत्कालीन केंद्रीय संचार और आईटी मंत्री सचिन पायलट ने इसका उद्घाटन किया।

ये डाकघर जिस हाउसबोट में है उसमें दो कमरे हैं। एक कमरा पोस्ट ऑफिस के तौर पर काम करता है और दूसरा कमरा संग्रहालय के तौर पर।