अपनी भावनाओं को काबू में कैसे रखें?

खुद को भावनात्मक रूप से सुन्न ऐसे बनाएं

कभी-कभी आप सोचते होगे कि भावनात्मक रूप से सुन्न होने से आप भावनात्मक रूप से चोट खाने से बच सकते हो. अपनी भावनाओं को दबाने से आप भावनात्मक रूप से चोट खाने से बच सकते हो.

1. अपनी जिंदगी से नकरात्मक लोगों को निकाल दो या फिर उनसे बातचीत ना करो. ऐसा करने से आपको कुछ समय के लिए अकेलेपन का सामना करना पड़ सकता है.

2. उचित सावधानी बरतें, जैसे कि ”मनोवैज्ञानिक दमन” कई मानसिक विकारों में अपनी प्रमुख भूमिका निभाता है. हमेशा लोगों से दूरी बनाये रखना या अकेला रहना भी आपके लिए अच्छा संकेत नहीं है.

3. जितनी जरूरत हो उतनी ही बात करें या अगर आप ज्यादा बातें करते हो तो कम बातें करें. अगर आप से कोई “ हाँ या ना” में कोई जवाब मांग रहा है तो आप अपना सर हिलाकर भी जवाब दे सकते हो. जो लोग अपनी भावनाओं को छिपाते हैं वह लोग अक्सर बहुत कम बोलते हैं.

4. आपसे चाहे कोई भी बड़बड़ा रहा है या आपको नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है उस के सामने कभी भी ना झुकें. जब आप किसी गंभीर मुद्दे पर बात कर रहे हो तो आपको अपनी स्थिति नहीं छोड़नी चाहिए.

5. अपने चेहरे के भावों को दूसरों को दिखाने से बचें. हमेशा एक खाली चेहरा बनाकर रखें.

6. अपनी आँखों की पलकों को कम झपको क्योंकि आँखों का ज्यादा झपकना आपके कमज़ोर होने की निशानी को दर्शाता है.

7. भावनाओं में ना बहकर, तर्क लगाकर सोचें. जो लोग भावनात्मक रूप से सुन्न होते हैं वह अपनी भावनाओं को सामने रखकर नहीं सोचते बल्कि तर्क लगाकर सोचते हैं.

8. कभी भी बाध्यकारी आवेगी या जुनून में आकर बात नहीं करनी चाहिए बल्कि लोगों से शांतिपूर्ण ढंग से बात करनी चाहिए.

9. अपने गुस्से और चिंता को नियंत्रण में रखो और समस्याओं को मौकों में बदल दो.

10. अपने आप को लोगों से अलग एकांत में रखो और ज्यादा से ज्यादा आराम करो.

एशिया का सबसे अमीर गांव!!

हिमाचल प्रदेश पूरी दुनिया में सेब की खेती के लिए मशहूर है. यहां के सेब विदेशों में बहुत पसंद किए जाते हैं. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और सेबों की वजह से जानी जाती है.

लेकिन क्या आपको पता है शिमला जिले की चौपाल तहसील में स्थित मड़ावग गाँव को एशिया का सबसे अमीर गांव माना जाता है. मड़ागव गाँव के लोगों की आय का मुख्य साधन खेती ही है.
appleचौपाल तहसील में स्थित मड़ावग गांव की जनसंख्या करीब 2000 हैं. इस गांव में प्रत्येक परिवार की सालाना आया 70 से 75 लाख के करीब है। मड़ावग गाँव में आपको हर जगह सेब के बाग ही देखने को मिलेंगे.

इस गाँव में हर व्यक्ति के पास आलीशान मकान हैं. मड़ावग गाँव के सेब अधिकतर विदेशों में निर्यात किए जाते हैं. इस गाँव में हर साल 150 करोड़ रुपए के सेबों का उत्पादन किया जाता हैं.

mdhavg-villageमड़ावग गाँव के लोग नई नई तकनीकों का प्रयोग करके सेबों की खेती करते हैं. यहाँ के लोग इंटरनेट के माध्यम से विदेशों से भी जानकारी हासिल करते रहते हैं.

मड़ावग गाँव के किसान इंटरनेट के माध्यम से बाजार का भाव जानकर ही सेबों को बेचते हैं. हम आपको बता दें कि सेबों की खेती दो प्रकार से की जाती है एक तो ऑन इयर प्रोडक्शन और दूसरी ऑफ ईयर प्रोडक्शन.

मड़ावग गाँव से पहले गुजरात के कच्छ जिले में स्थित माधवपर गाँव एशिया का सबसे अमीर गाँव रह चुका है. इससे पहले 1982 में भी शिमला जिले का क्यारी गाँव एशिया का सबसे अमीर गांव रह चुका है. क्यारी गाँव के लोगों की आय का मुख्य साधन भी सेब की खेती ही थी.

इतिहास

1954 में मड़ावग गाँव का किसान चैइंयां राम मेहता एक बार कोटखाई से कुछ सेब के पौधे लेकर आया था. कोटखाई से लाए गए सेब के पौधों को उसने अपनी जमीन पर लगाया. कोटखाई में उस समय सेबों का उत्पादन बहुत होता था.

राम मेहता द्वारा लगाए गए पौधों में पहली बार फल लगे और राम मेहता ने उन्हें मंडी में बेचा. जब वह सेबों को बेच का वापिस आए तो उसके पास आठ हजार रुपए थे.

धीरे-धीरे मड़ावग गांव के लोगों ने भी सेब के पौधे लगाने शुरू किए. इसका नतीजा सब जानते है कि मड़ावग गांव एशिया का सबसे अमीर गांव बन गया है.

एशिया का सबसे साफ सुथरा गाँव, मावलिननॉन्ग मेघालय

एशिया का सबसे साफ सुथरा गाँव मेघालय में स्थित है जिसका नाम मावलिननॉन्ग है. मेघालय के इस छोटे से गाँव में प्लास्टिक पूरी तरह से प्रतिबंधित है. मावलिननॉन्ग गाँव 2003 में भारत का ही नहीं बल्कि एशिया का भी सबसे साफ सुथरा गाँव बना. 2003 तक इस गाँव में केवल 500 व्यक्ति ही रहा करते थे और इस गाँव में सैलानियों का आना जाना भी नहीं था. पहले इस गाँव में सड़कें भी नहीं थी और गाँव में सिर्फ पैदल ही आया-जाया जा सकता था. लेकिन काफी साल पहले डिस्कवर इंडिया मैगजीन के एक पत्रकार की बदौलत यह गाँव दुनिया की नजरों के सामने आया था.

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मावलिननॉन्ग गाँव शिलॉंन्ग और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से 90 किलोमीटर दूर स्थित है. साल 2014 की गणना के अनुसार यहाँ 95 परिवार रह-रहे थे. इस गाँव की आजीविका का मुख्य साधन सुपारी की खेती है. इस गाँव के लोग घर से निकलने वाले कूड़े-कचरे को बांस से बने कूड़ेदान में जमा करते हैं और उसे एक जगह इकट्ठा कर खेती के लिए खाद के रूप में उपयोग करते है. इस गाँव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ की सफाई ग्रामवासी स्वयं करते है, सफाई व्यवस्था के लिए वो किसी भी प्रकार से प्रशासन पर निर्भर नहीं है. इस पूरे गाँव में जगह-जगह बांस के बने कूड़ेदान लगे हैं. किसी भी गाँववासी को जहां गंदगी नज़र आती है तो वे सफाई पर लग जाते है. चाहें फिर वह महिला, पुरुष या बच्चे ही क्यों न हो.

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मावलिननॉन्ग गाँव में सैलानियों के देखने के लिए कई अदभुत स्थल हैं, जैसे वाटरफॉल, पेड़ों की जड़ों से बने ब्रिज और बैलेंसिंग रॉक्स भी हैं. यह गाँव एक पहाड़ी पर स्थित है जहाँ पर बैठ कर पर्यटक शिलांग की खूबसूरत प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं. पेड़ों की जड़ों से बने प्राकृतिक पुल या झूले जो समय के साथ-साथ मज़बूत होते जाते हैं. इस तरह के ब्रिज पूरे विश्व में केवल मेघालय में ही मिलते हैं.mawlynnong

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ऐसा माना जाता है कि 130 साल पहले इस गाँव को हैजे की बीमारी ने बुरी तरह से जकड़ लिया था. मेडिकल सुविधा न होने की वजह से गाँव वालों को इस बीमारी से छुटकारा पाने का एक मात्र उपाय बचा था. केवल सफाई करके ही इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता था. इस गाँव के लोगों का मानना है कि हमारे पूर्वजों ने कहा था कि तुम सफाई के जरिए ही खुद को बचा सकते हो. फिर चाहे वह खाना, घर, ज़मीन, गाँव या फिर आपका शरीर ही क्यों न हो, सफाई ज़रूरी है. यही वजह है कि घर-घर में शौचालय के मामले में भी यह गाँव सबसे आगे है और 100 में से लगभग 95 घरों में शौचालय बना हुआ है.

हमारे लिए नींद लेना क्यों आवश्यक है ?

हमें नींद लेने की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?

नींद सभी जीवों के लिए जरूरी होती है और इन जीवों में आप भी आते हैं. सोने कि वजह से ही हम जीवित रहते हैं. हमको लगता है कि जब हम सोते हैं तो हम कुछ नहीं कर रहे होते. असल में सोते समय हमारा शरीर बढ़ने में, अपने आप को स्वस्थ करने में और सीखने में व्यस्त रहता है.

लेकिन ऐसा क्यों होता है?

हमारे शरीर में एक घड़ी होती है जिसको “सिरकादियन” कहते हैं. इसी घड़ी से हमें पता चलता है कि कब सोने का समय है और कब जागने का ?. यह घड़ी असली घड़ी जैसी नहीं होती जो हम अपनी आम जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं. इस घड़ी को नयूरोंस या दिमाग की कोशिकाओं द्वारा नियंत्रण किया जाता है. यह घड़ी हमें बताती है कि हमें दिन के समय जागते रहना है और रात के समय सोना है.

लेकिन ऐसा क्यों होता है?

मानव का मस्तिष्क बहुत समय पहले विकसित हो चुका था जब रौशनी के बल्ब भी इजाद नहीं हुए थे. हमने देखा होगा कि जब हम रात को कंप्यूटर पर काम कर रहे होते हैं. तो हमें जल्दी नींद नहीं आती क्योंकि कंप्यूटर से निकलने वाली रौशनी हमारी शरीर में मौजूद इस घड़ी को चकमा दे देती है जिसकी वजह से हमें रात भी दिन जैसे लगती है. जब आप देर रात तक कंप्यूटर पर काम करते रहते हो और नींद नहीं लेते तो आप अगले दिन थकावट महसूस करते हैं. जिससे आपको नई-नई चीजों को सीखने में मुश्किलें आती है और नींद पूरी ना लेने की वजह से पुरानी चीजों को भी भूलने लगते हैं.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य…

संयुक्त राज्य अमेरिका के 45 वें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक अमेरिकी व्यवसायी, टेलीविजन व्यक्तित्व, लेखक और निश्चित रूप से एक राजनीतिज्ञ हैं। आइये डोनाल्ड ट्रम्प के बारे कुछ रोचक जानकारी और तथ्य सांझा करते हैं।

  • डोनाल्ड ट्रंप एक अमीर खानदान से ताल्लुक रखते हैं. 1975 डोनाल्ड ट्रंप के पिता ने लगभग 1 करोड़ डॉलर उधार लेकर अपनी कंपनी शुरू की थी. आज इस कंपनी का नेट वर्थ लगभग 1000 करोड़ डॉलर हैं.
  • डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची में शामिल हैं.
  • अमेरिका में 63 साल बाद कोई गैर राजनैतिक व्यक्ति राष्ट्रपति बना है. इससे भी ज्यादा आश्चर्यजनक बात यह है कि ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव से सिर्फ डेढ़ साल पहले राजनीति में आए थे.
  • अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं जिनके कसीनो और होटल हैं.
  • अमेरिका के इतिहास में 70 वर्षीय डोनाल्ड ट्रंप सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति हैं. इससे पहले रिकॉर्ड रोनाल्ड रीगन 1981 से लेकर 1989 तक अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे. रीगन उस समय 69 साल में राष्ट्रपति बने थे.
  • डोनाल्ड ट्रंप ने तीन शादियां की है. डोनाल्ड ट्रंप ने पहली शादी 1977 में, दूसरी 1993 में और तीसरी 2005 में की. ट्रंप की तीनों पत्नियों से कुल पांच बच्चे हैं जिनमें तीन बेटे और दो बेटियां हैं.donald-trump-family
  • डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि वो सिर्फ 4 घण्टे ही सोते है. साल 1990 में ट्रंप पर 97 करोड़ डॉलर का कर्ज़ था. घाटे की वजह से उन्होंने 3 बार दिवालिया होने की अर्जी दायर की थी.
  • ट्रंप महिलाओं पर भद्दे कमेंट को लेकर काफी बदनाम हो चुके हैं. 2006 मेंडोनाल्ड ट्रंप की एक वीडियो के अनुसार, उन्होंने कहा कि “वो बहुत ही अमीर और शक्तिशाली व्यक्ति है और किसी भी महिला से कुछ भी कर सकते है”.
  • ट्रंप के दफ्तर में सोने की परत चढ़े पर्दे लगे हुए है और उनके घर करीब 213 एकड़ जमीन में फैला हुआ है. ट्रंप के पास खुद का एक प्लेन है जिसकी कीमत 10 करोड़ डॉलर (करीब 660 करोड़) हैं.
  • ट्रंप मुस्लिमों पर कमेंट को लेकर काफी विवादों में रहे है. ट्रंप ने कहा था कि यदि वो राष्ट्रपति बनते है तो मुस्लिमों के अमेरिका आने पर बैन लगा देंगे और अमेरिका की हर मस्जिद की निगरानी करवाएंगे.

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रोने से होने वाले बड़े फायदे !

दुर्भाग्य से हमारी सभी भावनाएं एक समान नहीं होती। ऐसा ज्यादातर देखा गया है कि हंसने वाले लोगों को सफल समझा जाता है और हमें यह भी सिखाया जाता है कि ज्यादा हंसने से आपके अधिक मित्र बनेंगे और ज्यादा लोग आपको पसंद करेंगे। जबकि उदासी को भावनाओं से पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया गया।

अगर कोई उदास होकर रोने लगता है तो उसे कमजोर और असुरक्षित समझा जाता है। लेकिन असल में जो लोग रोने में कोई शर्म महसूस नहीं करते वह मानसिक रूप से मजबूत होते हैं। यह हैं 5 कारण जो दर्शाते हैं कि ज्यादा रोने वाले लोग असल में मानसिक रूप में मजबूत होते हैं।

ज्यादा रोने वाले लोग अपनी भावनाओं को दूसरों के सामने लाने से नहीं डरते

अगर आप को किसी बात की ख़ुशी हो रही है, तो आप जोर-जोर से हंसते हैं। आपके हंसने की वजह ख़ुशी हो सकती है लेकिन अगर आप उदास हैं तो आप रोने से क्यों शर्माते हैं ? लोग जो अपनी उदासी की अनदेखी करते हैं असल में वह अपने आप को धोखा दे रहे होते हैं। उदास होना या रोने का यह अर्थ नहीं है कि आप कमज़ोर हैं।

ज्यादा रोने वाले लोगों को पता होता है कि रोने के भी चिकित्सक गुण होते हैं

रोने से आपका शरीर चिंता, दुख और निराशा से आजाद हो जाता है। रोने से आपकी आत्मा की सफाई, मन समर्द्ध हो जाता है और आप में नकरात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है। अगर आप बहुत ज्यादा दुखी हैं लेकिन आप रो नहीं रहे तो नकरात्मक ऊर्जा आपके अंदर ही रहेगी। जो आपको मानसिक और शरीरक रूप से बुरी तरह प्रभावित करेगी।

रोना एक उपचारात्मक क्रिया है

हाल ही में मनोवैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि रोना एक बहुत ही उपचारात्मक क्रिया है। रोने से हमारे दिमाग में एंडोर्फिन (endorphin) में संतुलन बना रहता है। रोने को प्राकृतिक दर्द दूर (Natural Pain Killer) करने वाली प्रक्रिया भी कहा जाता है।

ज्यादा रोने वाले लोग समाजिक उम्मीद की प्रवाह नहीं करते

ज्यादातर लोग समाज के डर से सभी के सामने नहीं रोते। हमारे समाज में अगर औरत रो रही है तो उसे अस्थिर, मजबूर माना जाता है अगर आदमी रो रहा हो तो उसे कमज़ोर या डरपोक माना जाता है। इसी वजह से कई लोग अपने दुख को अपने अंदर तक छुपा लेते हैं। असल में जो लोग समाज के सामने रोने से नहीं डरते वह मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं।

ज्यादा रोने वाले लोग दूसरों को रोने के लिए प्रोत्साहित करते हैं

जब हम दूसरों के सामने दुखी होकर रोने लगते हैं तो उस समय हम दूसरों को भी रोने के लिए प्रोत्साहित कर रहे होते हैं। आपके द्वारा अपनी भावनाओं को अपने ही अंदर दबा देना आपके लिए बहुत ही खतरनाक हो सकता है। जब हम अपने शरीर के प्रति ईमानदार होते हैं तो हमारा शरीर भी अपनी अधिकतम क्षमता से काम करता है।

स्वर्ण मंदिर के बारे में कुछ रोचक बातें..

स्वर्ण मंदिर सिखों का एक पवित्र धार्मिक मंदिर है. स्वर्ण मंदिर को “हरमंदिर साहिब” और “अथ सत तीर्थ” नाम से भी जाना जाता है. स्वर्ण मंदिर दुनिया के सबसे आकर्षित स्थानों में से हैं. इस मंदिर की सुंदरता सभी के मन को लुभाती है और यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं. आइये जानें स्वर्ण मंदिर से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में…
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  • सिख धर्म का सबसे पवित्र ग्रन्थ “गुरु ग्रंथ” साहिब सबसे पहले हरमंदिर साहिब में ही स्थापित किया गया था.
  • जिस जगह पर स्वर्ण मंदिर बना है उस जगह पर पहले सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी ने ध्यान किया था. हरमंदिर साहिब की स्थापना सिख धर्म के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी ने की थी.
  • महाराजा रणजीत सिंह, 19वी सदी में पंजाब के राजा थे और उनके कार्यकाल में ही स्वर्ण मंदिर का नवीनीकरण हुआ था.
  • हरमंदिर साहिब को जब शुरू में बनाया गया तो इसमें सोने की पॉलिश नहीं की गई थी.
  • हरमंदिर साहिब में लगने वाले लंगर में प्रतिदिन लगभग 35000 लोग खाना खाते हैं. सारा खाना भक्तों द्वारा दान किया जाता है. इस मंदिर की लंगर सेवा भी दुनिया की सबसे बड़ी सेवा है,
  • हरमंदिर साहिब के पहले पुजारी बाबा बुड्ढा जी थे.
  • हरमंदिर साहिब में प्रवेश करने के लिए चार रास्ते हैं. स्वर्ण मंदिर में बने चार मुख्य रास्तों का मतलब कोई भी व्यक्ति, किसी भी धर्म, समुदाय का इंसान उस मंदिर में आ सकता है.
  • हरमंदिर साहिब में सिख धर्म की प्राचीन ऐतिहासिक वस्तुओं का प्रदर्शन भी किया गया है, जिन्हें देखने प्रतिदिन देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु यहाँ आते हैं.
  • सिखों का मुख्य उत्सव बैसाखी, गुरु राम दास का जन्मदिन, गुरू तेग़ बहादुर का मृत्युदिन, गुरु नानक देव जी का जन्मदिन इत्यादि शामिल हैं.

जुगाड़ में हमारा कोई जबाव नहीं!

जुगाड़ हम भारतीयों की खासियत है. जहाँ कुछ और न चले वहां जुगाड़ चलता है। ‘जुगाड़’ एक ऐसा शब्द है जो जरुरत आने पर सभी के दिमाग में सबसे पहले आता है। वास्तव में हम सभी जुगाड़ी ही हैं जो अपना काम निपटाने के लिए कोई न कोई रास्ता यानि जुगाड़ निकाल ही लेते हैं चाहे लोग उस पर हंस-हंस कर लोटपोट क्यों ना हो जाएँ।

आज हम आपको कुछ ऐसी जुगाड़ की तस्वीरें दिखाने जा रहे हैं, जिन्हें देखकर आपकी हंसी नहीं रुकेगी। ये कारनामे इतने दिलचस्प हैं कि आप इन्हें कम से कम एक बार तो जरुर देखना चाहेंगे।

चित्र 1- इंडियन हाई-टेक खेती. चित्र 2- माल्स(मील्स) ओन व्हील्स

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मोटर साइकिल टुल्लू पंप

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मिल्क फॉर आयरन मैन

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साइकिल और मोटरसाइकिल का संगम

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प्लेबॉय की हाई सिक्योरिटी कार

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सौर उर्जा चलित फोन बैटरी की छावं में

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मोटर साइकिल मैन का साइकिल-अवतार

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ऐसा जुगाड़ पहले देखा है क्या अपने

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जुताई करने के लिए देसी जुगाड़

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