पुलिस कांस्टेबल को बहादुरी का अनोखा इनाम

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बेंगलुरु पुलिस ने एक कांस्टेबल को उसकी बहादुरी के लिए न सिर्फ नकद इनाम दिया, बल्कि एक हफ्ते का हनीमून पैकेज पेड लीव के साथ दिया. अब जैसे ही ये खबर फैली किसी अनजान शख्स ने एक हज़ार रुपये का इनाम आपनी तरफ से भी भेजा है. कांस्टेबल वेंकटेश ने शायद ही कभी सोंचा होगा कि डीसीपी की मौजूदगी में वो न सिर्फ कुर्सी पर बैठेगा, बल्कि उसे सम्मानित भी किया जाएगा.

रात के तक़रीबन ढाई बजे होंगे जब वो सड़क पर किसी शख्स की चीख सुनकर अकेला ही दौड़ पड़ा. उस शख्स से मोटरसाइकिल पर सवार तीन लोग मोबाइल और पैसे छीन रहे थे और पुलिस को आते देख भाग खड़े हुए, लेकिन वेंकटेश ने उन्हें नहीं छोड़ा. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने बताया कि, ‘कांस्टेबल वेंकटेश ने उनको 4 किलोमीटर तक चेस करके उनमे से एक अपराधी को अकेले ही पकड़ लिया.

वहीं, किसी अनजाव शख्स ने कांस्टेबल वेंकटेश की हौसला अफजाई के लिए एक हज़ार रुपये का चेक भी भेजा है. वेंकटेश की नवंबर में शादी है और अब उसे हनीमून के खर्चे की भी चिंता नहीं है.

वाइटफील्ड के डीसीपी अब्दुल अहद ने कहा, ‘हमने उसे 10 हज़ार रुपये का इनाम दिया. हम चाहते थे कि उसके परिवार को दक्षिण भारत की यात्रा पर भेजे, लेकिन जब पता चला कि उसकी शादी होने वाली है तो हमने उसे हनीमून पैकेज दे दिया है.

इस पहल की भी काफी तारीफ हो रही है. इनाम तो मिला ही बड़े अधिकारियों की नज़र में भी आये और अब वेंकटेश का नाम भी सबकी जुबान पर है.

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चित्तौड़गढ़ किला- जौहर का गढ़

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आपको बता दें कि चित्तौड़गढ़ भारत के सबसे बेहतरीन स्मारकों में से एक है और भारत का सबसे बड़ा किला हैं. चित्तौड़गढ़, जिसे चित्तौड़ भी कहा जाता है, 7वीं से 16वीं शताब्दी तक, राजपूतों के तहत यह किला मेवाड़ की राजधानी था.

चित्तौड़गढ़ किला राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध किला है. यह किला 7वीं शताब्दी में विभिन्न मौर्य शासकों द्वारा बनाया गया था. ऐसा कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडव भाईयों में से भीम ने इस किले का निर्माण किया था. चित्तौड़गढ़ किला, 180 मीटर ऊंचा पहाड़ी पर खड़ा है, और 700 एकड़ में फैला है.

यह उदयपुर से 112 किलोमीटर की दूरी पर, राजस्थान में चित्तौड़गढ़ में गम्भरी नदी के पास एक उच्च पहाड़ी पर स्थित है. किले में रोमांस, साहस, दृढ़ संकल्प और त्याग की एक लंबी कहानी है. इस राजसी किले का इतिहास खिलजी के समय में देखा जा सकता है. किले पर तीन बार हमला किया गया और हर बार राजपूत योद्धाओं द्वारा इस किले को बचाया गया था. 1303 में रानी पद्मावती को अपना बनाने की अपनी इच्छा पूरी करने के लिए अल्लाउद्दीन खिलजी द्वारा पहली बार किले पर हमला किया गया था.

यह माना जाता है कि रानी पद्मावती और राजदबार की महिलाओं ने अल्लाउद्दीन खिलजी के समाने प्रस्तुत होने के बजाय आग की चिता में बलिदान दे दिया था. इस बलि को किले की महिलाआं द्वारा ‘जौहर’ कहा जाता था. दूसरी बार, किले को 1535 में गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने बर्खास्त कर दिया था, जिससे विशाल विनाश हुआ. तीसरा हमला मुगल सम्राट अकबर द्वारा 1567 में महाराणा उदय सिंह पर विजय प्राप्त करने के लिए किया गया था। अंततः 1616 में मुगल सम्राट जहांगीर के शासन के तहत किले को राजपूतों में वापस कर दिया गया था.

चित्तौड़ का किला देश के सबसे उत्कृष्ट किलों में से एक माना जाता है और वास्तव में ‘राजस्थान राज्य का गौरव’ है. यह माना जाता है कि चित्तौड़गढ़ का नाम चित्ररंगा से लिया गया है, जो स्थानीय कबीले के शासक थे और खुद को मौर्य बताते थे. एक अन्य लोककथा का मानना था कि भीम ने किले के निर्माण के लिए, जमीन पर जोर से मारा और जिससे सतह पर भीमलेट कुंड बना है.

किले के अंदर भगवान कृष्ण और खूम्बा श्याम के प्रफुल्लित भक्त मीरा के मंदिर हैं. चित्तौड़गढ़ किले को जल किले के रूप में भी जाना जाता है. किले में 84 जल स्त्रोत थे, उनमे से केवल 22 मौजूद हैं, जिनमे कुँए, कुंड, और बावरी शामिल हैं. यह किला 700 हेक्टेयर से अधिक में फैला हुआ है, जिसमें जल स्त्रोत का 40 प्रतिशत हिसा हैं. औसत जलाशय की गहराई लगभग 2 मीटर है इसलिए, इन जलाशयों में लगभग 4 बिलियन लीटर पानी जमा कर सकते हैं और चार साल तक 50,000 की सैनिकों की प्यास बुझा सकते है.

विजय स्तंभ (स्तंभ), किर्ती स्तम्भ, गौमुख जलाशय, राणा कुंभ पैलेस, पद्मिनी पैलेस और किले के सात दरवाजें इसके कुछ प्रमुख आकर्षण हैं. किले मोटे तौर पर एक मछली के आकार में बना हुआ हैं. किले परिसर में 65 ऐतिहासिक इमारतें हैं, जिनमें से 4 महल परिसर, 19 मुख्य मंदिर और 4 स्मारक हैं. किले की संरचनाएं और विशेषताएं राजस्थानी वास्तुकला की शैली को दर्शाती हैं.

चित्तौड़गढ़ शहर और यह किला ‘जौहर मेला’ नामक सबसे बड़े राजपूत त्योहार की मेजबानी करता है. ध्वनि और यहां  लाइट शो भी आयोजित किया जाता है और यह 7 बजे से शुरू होता है. वर्ष 2013 में चित्तौड़गढ़ किला को यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया था.

खेत में लगाये गए काजल अग्रवाल के पोस्टर

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वैसे तो फसलों को बचाने के लिए किसान टोटकों का प्रयोग करते हैं. लेकिन हैदराबाद के 30 वर्षीय किसान अनवर ने अपने दो एकड़ खेत पर साउथ से बॉलीवुड में आने वाली एक्ट्रेस काजल अग्रवाल के कटआउट लगाये है. किसान का कहना है कि इससे उसे लाभ भी मिलने लगा है. बताते चलें कि गांवों में अपनी फसलों को बुरी नज़र से बचाने के लिए तरह तरह के तरीके अपनाये जाते हैं.

मामला हैदराबाद से 120 किमी दूर संगारेड्डी जिले के गोलापल्ली गांव का है. मुंबई मिरर में छपी खबर के मुताबिक, किसान का कहना है कि उसने जब से काजल की फोटो लगवाई है, उसके खेतों की फसल में अंतर देखने को मिला है. पहले पौधे सूख जाते थे, लेकिन अब नहीं सूख रहे. सड़क के किनारे खेत होने के कारण हर राहगीर फसल पर नज़र डालता है. पहले फसले सूख जाया करती थी और बहुत नुक्सान झेलना पड़ता था, लेकिन अब फंसले खराब नहीं होती. गांवों में मानते हैं कि फसल पर बुरी नज़र पड़ने से पौधे सूख जाते हैं या फिर मर जाते हैं. इस खेत में अनवर सब्जियां उगाता हैं.

किसान का कहना है कि काजल की फोटो लगाने के बाद से हर किसी की नज़र सीधे पौधे पर नहीं पढ़ती. भले ही लोग उसके इस आइडिया पर मजा लेते होंगे, लेकिन उसे इस तरीके से फायदा हो रहा है. वह कहते है कि वहां काजल के सबसे बड़े फैन हैं. बता दें कि इससे पहले नेल्लोर जिले में किसान ए चेंचू रेड्डी ने फसल को बचाने के लिए सनी लियोनी का पोस्टर खेतों में लगवाया था. किसान ने ‘मुझसे जलना मत’ भी लिखा था. रेड्डी ने भी लियोनी की तस्वीर लगाने के बाद फसलों के बचने का दावा किया था.

भूतिया गुड़िया- 5 पौंड में मोल ली गई मुसीबत 866 पौंड में बिकी!

वैज्ञानिकों को क्यों हैरान करता है इंसान का शरीर?

यह स्थापित तथ्य है कि इंसान का शरीर प्रकृति की सर्वोतम रचना है. वैसे तो सभी प्राणियों में कोई न कोई विचित्र बात है लेकिन जितने अदभुत तथ्य इंसान के बारे में खोजे गये हैं उतना शायद किसी और प्राणी के बारे में नहीं खोजे गये हैं. इंसान के बारे में कुछ ऐसे ही रोचक और हैरान कर देने वाले कुछ जाने-अनजाने विचित्र तथ्य हमें सोशल मीडिया के जरिये मिलते रहते हैं, जिन्हें हमने यहाँ फंडाबुक के नियमित पाठकों के लिए संकलित किया है. तो आप भी देखिये इंसानी शरीर में वे कौन से अंग और गतिविधियां हैं जो सचमुच में हैरान करने वाले हैं.

जबरदस्त फेफड़े

हमारे फेफड़े हर दिन 20 लाख लीटर हवा को फिल्टर करते हैं. हमें इस बात की भनक भी नहीं लगती. फेफड़ों को अगर खींचा जाए तो यह टेनिस कोर्ट के एक हिस्से को ढंक देंगे.

इंसान का शरीर, ऐसी और कोई फैक्ट्री नहीं

इंसान का शरीर हर सेकंड 2.5 करोड़ नई कोशिकाएं बनाता है. साथ ही, हर दिन 200 अरब से ज्यादा रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है. हर वक्त शरीर में 2500 अरब रक्त कोशिकाएं मौजूद होती हैं. एक बूंद खून में 25 करोड़ कोशिकाएं होती हैं.

लाखों किलोमीटर की यात्रा

इंसान का खून हर दिन शरीर में 1,92,000 किलोमीटर का सफर करता है. हमारे शरीर में औसतन 5.6 लीटर खून होता है जो हर 20 सेकेंड में एक बार पूरे शरीर में चक्कर काट लेता है.

धड़कन, धड़कन

एक स्वस्थ इंसान का हृदय हर दिन 1,00,000 बार धड़कता है. साल भर में यह 3 करोड़ से ज्यादा बार धड़क चुका होता है. दिल का पम्पिंग प्रेशर इतना तेज होता है कि वह खून को 30 फुट ऊपर उछाल सकता है.

सारे कैमरे और दूरबीनें फेल

इंसान की आंख एक करोड़ रंगों में बारीक से बारीक अंतर पहचान सकती है. फिलहाल दुनिया में ऐसी कोई मशीन नहीं है जो इसका मुकाबला कर सके.

नाक में एंयर कंडीशनर

हमारी नाक में प्राकृतिक एयर कंडीशनर होता है. यह गर्म हवा को ठंडा और ठंडी हवा को गर्म कर फेफड़ों तक पहुंचाता है.

400 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार

तंत्रिका तंत्र 400 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से शरीर के बाकी हिस्सों तक जरूरी निर्देश पहुंचाता है. इंसानी मस्तिष्क में 100 अरब से ज्यादा तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं.

इंसान का शरीर, जबरदस्त मिश्रण

शरीर में 70 फीसदी पानी होता है. इसके अलावा बड़ी मात्रा में कार्बन, जिंक, कोबाल्ट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फेट, निकिल और सिलिकॉन होता है.

बेजोड़ झींक

झींकते समय बाहर निकले वाली हवा की रफ्तार 166 से 300 किलोमीटर प्रतिघंटा हो सकती है. आंखें खोलकर झींक मारना नामुमकिन है.

बैक्टीरिया का गोदाम

इंसान के वजन का 10 फीसदी हिस्सा, शरीर में मौजूद बैक्टीरिया की वजह से होता है. एक वर्ग इंच त्वचा में 3.2 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं.

ईएनटी की विचित्र दुनिया

आंखें बचपन में ही पूरी तरह विकसित हो जाती हैं. बाद में उनमें कोई विकास नहीं होता. वहीं नाक और कान पूरी जिंदगी विकसित होते रहते हैं. कान लाखों आवाजों में अंतर पहचान सकते हैं. कान 1,000 से 50,000 हर्ट्ज के बीच की ध्वनि तरंगे सुनते हैं.

दांत संभाल के

इंसान के दांत चट्टान की तरह मजबूत होते हैं. लेकिन शरीर के दूसरे हिस्से अपनी मरम्मत खुद कर लेते हैं, वहीं दांत बीमार होने पर खुद को दुरुस्त नहीं कर पाते.

मुंह में नमी

इंसान के मुंह में हर दिन 1.7 लीटर लार बनती है. लार खाने को पचाने के साथ ही जीभ में मौजूद 10,000 से ज्यादा स्वाद ग्रंथियों को नम बनाए रखती है.

झपकती पलकें

वैज्ञानिकों को लगता है कि पलकें आंखों से पसीना बाहर निकालने और उनमें नमी बनाए रखने के लिए झपकती है. महिलाएं पुरुषों की तुलना में दोगुनी बार पलके झपकती हैं.

नाखून भी कमाल के

अंगूठे का नाखून सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ता है. वहीं मध्यमा या मिडिल फिंगर का नाखून सबसे तेजी से बढ़ता है.

तेज रफ्तार दाढ़ी

पुरुषों में दाढ़ी के बाल सबसे तेजी से बढ़ते हैं. अगर कोई शख्स पूरी जिंदगी शेविंग न करे तो दाढ़ी 30 फुट लंबी हो सकती है.

खाने का अंबार

एक इंसान आम तौर पर जिंदगी के पांच साल खाना खाने में गुजार देता है. हम ताउम्र अपने वजन से 7,000 गुना ज्यादा भोजन खा चुके होते हैं.

बाल गिरने से परेशान

एक स्वस्थ इंसान के सिर से हर दिन 80 बाल झड़ते हैं.

सपनों की दुनिया

इंसान दुनिया में आने से पहले ही यानी मां के गर्भ में ही सपने देखना शुरू कर देता है. बच्चे का विकास वसंत में तेजी से होता है.

नींद का महत्व

नींद के दौरान इंसान की ऊर्जा जलती है. दिमाग अहम सूचनाओं को स्टोर करता है. शरीर को आराम मिलता है और रिपेयरिंग का काम भी होता है. नींद के ही दौरान शारीरिक विकास के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स निकलते हैं.

ऑनलाइन आर्डर की गुड़िया और डिलीवर हुई भटकती आत्मा!!

आज हम आपको एक ऐसी घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे डरकर आप भी ऑनलाइन आर्डर करते समय हज़ार बार सोचोगे। आपको बता दें कि इंग्लैंड की डैबी मेर्रिक ने ऑनलाइन तीन गुड़िया आर्डर की लेकिन उसे क्या पता था जो डिलीवर होगा या होगी वह उसके जीवन में कभी न थमने वाला भूचाल ला देगा।

जुलाई 2017 में इंग्लैंड की डैबी मेर्रिक ने ebay पर तीन चीनी गुड़िया आर्डर की. टाइम पर आर्डर की डिलीवरी हुई. गुड़िया प्रेमी डैबी मेर्रिक बहुत खुश थी. खास कर दुल्हन की ड्रेस पहने इस गुड़िया को देख कर. सुनहरी और चांदी के मिश्रित लिबास में यह गुड़िया किसी असली दुलहन से कम नहीं लग रही थी. लेकिन असलियत से डैबी बिलकुल अनजान थी.

दरअसल, इस गुड़िया को खरीदने के एक दो दिन के बाद से ही घर में अजीबोगरीब घटनाएँ होने लगी. जैसे कि आपने फिल्मों में देखा होगा, दरवाजे का अपने आप ही खुल जाना, फायर अलार्म बजने लग जाना, लाइट का अचानक जलने-बुझने लगना, और भी न जाने क्या क्या. डैबी और उसका पति डर की एक अजीब सी स्थिति में घिर गए.

हद तो तब हो गयी, जब इसके बाद कुछ ही दिनों में डैबी के पति के हाथों में खरोंचों और चोटों के निशान दिखने लग गए. पहले तो दोनों को समझ नहीं आया कि यह सब हो क्या रहा है. थक हार कर भयभीत डैबी ने इलाके के जाने माने ओझा यानि तांत्रिक को बुलवा भेजा।

चीन निर्मित भूतिया गुड़िया जिसने डैबी मेरिक के परिवार का जीना हराम कर दिया

तांत्रिक ने गहन छानबीन की. छानबीन करने के बाद ओझा ने बताया कि यह सब उस खूबसूरत चीनी गुड़िया की वजह से हो रहा था. तांत्रिक के कहने पर डरी हुई डैबी ने गुड़िया को घर के तहखाने यानी बेसमेंट में रख दिया और प्रार्थना करने लगी की सब कुछ ठीक हो जाये.

जब डैबी ने कुछ देर बाद नीचे जा के देखा तो गुड़िया ने अपना नेकलेस उतार दिया था जो कि तब उसके गले में था जब उसे नीचे रखा गया था.

इसके बाद डैबी ने उस भूतिया गुड़िया को ऑनलाइन बेचने का फ़ैसला किया. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने उस डॉल कि तस्वीरें लेकर ऑनलाइन डालने की कोशिश कि तब उन्हें बहुत मुश्किल आई, ऐसा उनके साथ पहले कभी नही हुआ था. कुछ ही दिनों बाद एक पारलौकिक विशेषज्ञ ली स्टीर की नज़र उस पोस्ट पर पड़ गई और उसने इसे 70 हज़ार में खरीद लिया.

भूतिया गुड़िया को घर ला कर ली स्टीर बहुत ही खुश था, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह ख़ुशी ज्यादा दिन की नही है. कुछ समय बाद स्टीर के पिता पॉल पर वैसे ही हमले होने लग गए जैसे कि डैबी के पति पर हुआ करते थे. उनके हाथों में भी कई निशान आ गए.

ली स्टीर के घर गुड़िया आने के बाद कई तरह की घटनाएँ घटने लग गई जैसे कि सामानों का हिलना जुलना, चीज़ों का टूटना, लाइट्स का खुद ही जलना-बुझना, घर में कई तरह की आवाजें भी आती थी. इतना होने के बाद ली कि माँ ने उस गुडिया को फेंकने को कहा लेकिन ली नहीं माना, क्यूंकि वह अभी भी उस पर अध्ययन करना चाहते थे.

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यदि आप भारत के इन राज्यों में “पाकिस्तान जिंदाबाद” चिल्लाते हैं तो क्या होगा?

कुछ समय पहले Quora पर एक बहुत ही रोचक प्रश्न मिला था. प्रश्न का विषय कुछ ऐसे था, “यदि आप भारत के किसी भीड़ भरे इलाके में “पाकिस्तान जिंदाबाद” चिल्लाते हैं तो क्या होगा?”  इस पर  काफी सारे रोचक जवाब दिए गए थे. इनमें से एक जवाब का हिंदी अनुवाद यहाँ अक्षरश: पोस्ट कर रहा हूँ. [लिंक पोस्ट के अंत में है]

तो चलिए देखते है कि यदि आप भारत के इन अलग अलग राज्यों में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ चिल्लाते हैं तो वहाँ के लोगों की प्रतिक्रिया क्या होगी। यानी ऐसा नारा लगाने पर वहां की जनता आपके साथ कैसा व्यवहार करेगी.

  1. जम्मू -कश्मीर : कुछ संवेदनशील क्षेत्रों जैसे अनंतनाग, पुलवामा, बड़गांव आदि के लोग आपका अनुसरण करेंगे और वे हाथ में पत्थर लेकर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ बोलते हुए जोश में आगे बढ़ सकते हैं.
  2. हिमाचल प्रदेश: यदि आप हिमाचल की सार्वजनिक जगहों पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाओगे तो इससे पहले की प्रशासन को पता चले आपको किसी बहती हुई नदी में फेंक दिया जाएगा.
  3. पंजाब: पंजाब के लोग बहुत केयर करने वाले होते हैं. वो आपकी भी अच्छी केयर करेंगे. आप समझ रहे हैं न मेरा क्या मतलब है?
  4. उत्तराखंड: उत्तराखंड में जहाँ पर कि भाजपा की सरकार है, तो यहाँ आपकी हड्डियों को गंगा में बहा दिया जायेगा औए आपको पता भी नहीं चलेगा.
  5. उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में हिंदुओं की तो छोड़िए, यहां के भारतीय मुसलमान आपकी अच्छी-खासी खबर ले लेंगे.
  6. राजस्थान : यहाँ लोग आपके हाथ-पैर बांधकर आपको एक ऊंट पर बिठाकर आपको आपके आखिरी सफर पर छोड़ देंगे. जरा सोचिये राजस्थान के किसी निर्जन रेगिस्तान में आग बरसाती धूप और गर्मी में बिना कपड़ों के आपको कैसा लगेगा?
  7. दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आप शायद मेहफ़ूज़ ही रहेंगे क्योंकि यहाँ जेएनयू के छात्र और कुछ मौकापरस्त नेता लोग अभिव्यक्ति की आजादी का सही इस्तेमाल करने के लिए आपकी प्रशंसा करेंगे और जब आप मीडिया में आएंगे तो आपको *** ** जैसे नेताओं समर्थन भी मिल सकता है .
  8. बिहार: यहां लोग आपको जिन्दा दफन भी कर देंगे और किसी को कानो–कान खबर नहीं होने देंगे. बिहार के लोग बेहद देशप्रेमी लोग हैं.
  9. असम: असम में आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है. यहाँ आपको पकड़ लिया जायेगा और अगले दिन आप अपने आप को किसी पेड़ से लटके हुए पाओगे.
  10. पश्चिम बंगाल: यहाँ आपको *** का समर्थन मिल सकता है और आपको उनकी पार्टी में सीट और कुछ पुरस्कार भी मिल सकता है .
  11. गुजरात: गुजरात में वैसे तो न्याय व्यवस्था काफी मजबूत है, लेकिन फिर भी लोग आपके चेहरे पर काफी सारे “हाई-फाइव” लगा कर, लात-घूंसो से आपकी अच्छी खातिरदारी करेंगे.
  12. तमिलनाडु: तमिलनाडु में लोग आपको घूरेगे और अपने अपने काम में बिजी हो जाएंगे. आपके बार-बार बोलने पर भी उनका यही रिएक्शन होगा जब तक को कोई हिंदी का जानकार आपको सुन न ले .
  13. महाराष्ट्र: आपने राज ठाकरे, शिवसेना या आरएसएस का नाम सुना है? अगर नहीं सुना तो मेरा यकीन करें, जो एकमात्र शब्द आपके मुँह से निकलेगा, वो होगा  “हिंदुस्तान ज़िंदाबाद”. और कुछ नहीं.

[पोस्ट Quora में प्रकाशित “What will happen if you shout ‘Pakistan Zindabad’ in a crowded area of India?” पर Akshay Kumar द्वारा दिए गए एक उत्तर का हिंदी अनुवाद है. किसी की व्यक्तिगत भावनाओं को ठेस पहुँचाने का हमारा कोई मकसद नहीं है और इसे फंडाबुक  पर केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है]

केस्टेलफोलिट डे ला रोका: बेहद खतरनाक जगह पर बसा गांव!

दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें ऊँची जगहों पर रहना बहुत पसंद है. लेकिन ऐसी जगहों पर रहना बहुत मुश्किल है और एक छोटी सी गलती भी आपकी जान तक ले सकती है. स्पेन में भी एक ऐसी ही जगह है जिसे केस्टेलफोलिट डे ला रोका (Castellfollit de la Roca) गांव के नाम से जाना जाता है. स्पेन का यह गांव बेसाल्ट की चट्टानों पर बसा हुआ है.

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केस्टेलफोलिट डे ला रोका गांव फ्लूविया और टोरोनेल (Fluvià and Toronell) नदीयों के बीच बसा हुआ है. खड़ी चट्टानों पर जमीन से लगभग 50 मीटर ऊपर बसा यह गांव बेहद साँस चढ़ने वाला और सुरम्य प्राकृतिक दृश्यावली प्रस्तुत करता है.

ऐसा माना जाता है कि यहां लाखों साल पहले दो ज्वालामुखी विस्फोट हुए थे जिसके कारण ज्वालामुखी का लावा धीरे-धीरे बेसाल्ट चट्टानों के रूप में बदल गया. उसके बाद मध्य युग में केस्टेलफोलिट डे ला रोका गाँव बसा, जो अपनी मध्ययुगीन निर्माण शैली, संकरी गलियों और विलक्षण चौराहों के लिए जाना जाता है.

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इस गांव के पुराने घर ज्वालामुखी से बनी चट्टानों से बने हैं. यहाँ लगभग 13वीं शताब्दी में बनी सेंट साल्वाडोर चर्च है जो एक किलोमीटर लम्बे इस गाँव के एक मुहाने पर बनी है.

यह गांव जमीन से लगभग 50 मीटर ऊपर चट्टान पर बना है. यह एक तीखी खड़ी चट्टान है और इसके किनारों पर बसे घर बेहद खतरनाक ढलान पर बने हैं, अगर आप ने जहाँ से गलती की तू आपका बचना नामुमकिन है. ऐसे में घरों की मुरम्मत और रंग-रोगन का काम करना बेहद ही मुश्किल और जान हथेली पर लेकर चलने के समान है. लेकिन फिर भी यहाँ के लोग सैकड़ों सालों से बेहद जिंदादिली से यहाँ पर रहते आ रहे हैं और जीवन का लुत्फ़ उठाते हैं.

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जयपुर का आमेर किला: भव्यता की मिसाल

आमेर किला जिसे आमेर का किला या आंबेर का किला नाम से भी जाना जाता है, भारत के पश्चिमी राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर के आमेर क्षेत्र में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित एक पर्वतीय दुर्ग है. यह जयपुर नगर का प्रधान पर्यटक आकर्षण है.

आमेर का कस्बा मूल रूप से स्थानीय मीणाओं द्वारा बसाया गया था. बाद में कछवाहा राजपूत मान सिंह प्रथम ने आमेर पर राज किया व आमेर के दुर्ग का निर्माण करवाया।

अम्बर या आमेर शब्द माँ अंबा देवी से लिया गया है. आमेर का किला अपने बड़े प्रांगण, तंग रास्तों और कई फाटकों के साथ, चित्रकारी की हिंदू शैली में बनाई कलाकृतियों के लिए जाना जाता है. यह मुगल और राजपूत वास्तुकला का समावेश है जिसे बनाने के लिए संगमरमर और लाल पत्थरों का प्रयोग हुआ है. आमेर किले के नीचे स्थित माहोठा झील इस जगह की खूबसूरती में चार चाँद लगाती है.

आमेर किला राजस्थान में सबसे बडे किलों में से एक है और इसकी भव्य स्थापत्य कला समृद्ध अतीत का एक प्रतीक है. आमेर राजस्थान राज्य का एक शहर है और यह अब यह जयपुर नगर निगम का हिस्सा है. यह 1727 तक कछवाहा राजपूतों की राजधानी थी.

आमेर किले को बाहर से देखने पर ये एक चट्टानी किला लगता है लेकिन इंटीरियर में इसके निर्माण में चार चाँद लगे हुए है. इसमें विशाल हॉल, शाही ढंग से डिजाइन किए गए महल, सुंदर मंदिर और बहुत खूबसूरत हरी घास का उद्यान शामिल है. किले की वास्तुकला हिंदू और मुगल शैली का सही संयोजन है. अंदरूनी काम को शानदार दर्पण, पेंटिंग और नक्काशियों के साथ सजाया गया है.

किले के परिसर को लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से सजाया गया है. यहाँ विशिष्ट भवन और स्थल बने हैं जिसमें शामिल है – दीवान-ए-आम या “सार्वजनिक दर्शको का हॉल” , दीवान-ए-खास या “निजी दर्शकों का हॉल”, शीश महल ( दर्पण महल) या जय मंदिर और सुख निवास.

आमेर किला

हर दिन औसतन 4000-5000 पर्यटक इस अद्भुत किले को देखने आते है. 2005 में किले के परिसर में 80 से अधिक हाथियों के ठहरने की सूचना है. यहाँ के मुख्य चैम्बर के चालीस खम्भों पर कीमती स्टॉन्स लगे है और पत्थरों पर विभिन्न सुंदर चित्रों की नक्काशी है.

सुख निवास, दीवान-ए-आम के विपरीत दिशा में है जिसमे चंदन के दरवाजे है और जिन्हें हाथी दांत के साथ सजाया गया है. कहा जाता है कि राजा अपनी रानियों के साथ समय बिताने के लिए इस जगह का प्रयोग किया करते थे और यही कारण है कि इसे खुशनुमा पलों के भरपूर या सुख निवास के रूप में जाना जाता है.

शीश महल आमेर किले का प्रसिद्ध आकर्षण है जिसमें कई दर्पण घर हैं. इस हॉल का निर्माण इस तरह से है कि जब भी प्रकाश की एक किरण महल में रोशनी करती है तो यहाँ स्थापित अन्य दर्पणों के साथ मिलकर वह पूरे हाल को प्राकृतिक प्रकाश से रोशन कर देती हैं. माना जाता है कि एक मोमबत्ती ही पूरे हॉल को हल्का प्रकाश देने के लिए पर्याप्त है.

आमेर किले में और भी बहुत सी चीजें देखने लायक है. पुराने विशाल बर्तन, दरवाजे, औजार, संदूक, चबूतरे और विशाल खाली स्थान इस जगह की भव्यता की गाथा स्वंय कह देते हैं।

आमेर किला साल में कभी भी विजिट किया जा सकता है. खासकर सितम्बर से लेकर अप्रैल तक का समय उत्तम रहता है.

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दुनिया के सबसे खतरनाक पुल

आज हम आपको दुनिया के सबसे खतरनाक पुलों के बारे में बताने जा रहे हैं। वैसे तो आप बहुत बार गाड़ी दुवारा पुल के ऊपर से गुज़रे होंगे लेकिन आपको बता दें कि जिन पुलों के बारे हम बात कर रहे हैं उन पर सफर करना मज़ेदार के साथ जानलेवा भी है। ज्यादातर एडवेंचर के शौकीन लोग ही इन पुलों के ऊपर से गुज़ारना पसंद करते हैं। आइए जानिए इन खरतनाक पुलों के बारे में:-

ग्लास बॉटमड ब्रिज

सबसे पहले आपको बता दें कि चीन में बना ग्लास बॉटमड ब्रिज दुनिया का सबसे लम्बा और ऊँचा पुल है। यह पुल कांच का बना हुआ है और इस पर चलने से पहले आपको अपनी जान हथेली पर रखनी होगी।

Titlis क्लिफ वॉक

यह ब्रिज दो पहाड़ियों को आपस में जोड़ने वाला यूरोप का सबसे ऊंचा पुल है। इसकी लंबाई 320 फुट और चौड़ाई 3 फुट है। यह पुल स्विट्जरलैंड में बना हुआ है और यह समुद्र तल से करीब 10 हज़ार फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

ग्लास सस्पेंशन ब्रिज

ग्लास सस्पेंशन ब्रिज भी चीन में बना हुआ है और यह भी खतरनाक ब्रिज में से एक है। इसकी लंबाई 430 मीटर और ऊंचाई 300 मीटर है।

कैरिक ए रेडे ब्रिज

कैरिक ए रेडे ब्रिज नार्थ आयरलैंड में बना हुआ है और इसकी ऊंचाई जमीन से लगभग 100 फुट है। दो पहाड़ों को आपस में जोड़ने वाले इस ब्रिज पर चलना खतरे से खाली नहीं है।

कैपिलोनो सस्पेंशन ब्रिज

कैपिलोनो सस्पेंशन ब्रिज कनाडा में स्थित है और इसका का निर्माण 1889 में हुआ था। आपको बता दें कि इस ब्रिज को नदी पार करने के लिए बनाया गया था। इसकी ऊंचाई 230 फुट है और लंबाई 460 फुट है।

मिलौ वायाडक्ट

फ्रांस में बना मिलौ वायाडक्ट ब्रिज आसमान की उचांईयां नापता हुआ दिखाई देता है। 2004 में बने इस ब्रिज की लागत €400 मिलियन की है।

लैंगकावी स्काई ब्रिज

लैंगकावी स्काई ब्रिज समुद्र तल से से लगभग 2000 फ़ीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। आपको बता दें कि लोग इस ब्रिज पर पैदल सफर करते हुए मलेशिया के खूबसूरत और अद्भुत दृश्य का नजारा देख सकते हैं।

रॉयल जॉर्ज ब्रिज

इसके अलावा यह रॉयल जॉर्ज ब्रिज दुनिया के सबसे ऊँचे सस्पेंशन ब्रिज की सूची में अपना स्थान रखता है क्योंकि यह ब्रिज अमेरिका का सबसे ऊंचा ब्रिज है। यह ब्रिज अर्कांसस नदी के ऊपर 955 फ़ीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। अगर आप इस पुल पर चल रहे तो आप नीचे की ओर मत देखें इससे आपको चक्कर आने लग जाएंगे।

कुंडिन्स्की ब्रिज ऑफ बीइंग

नदी विटिम पर बना  Kuandinsky Bridge रूस के ट्रांस-बायकल क्षेत्र का एक बेहद खतरनाक ब्रिज है।
इस ब्रिज की चौड़ाई कार के व्हील बेस से ज्यादा लम्बी नहीं है, और तो और इस ब्रिज के किनारों पर कोई भी रेलिंग नही है। ऐसा लगता जैसे कि वहाँ की तेज़ चलती हवाएं गाड़ियों को बर्फ से जमी नदी में ढकेलने की धमकी देती हो।

एशशिमा ओहाशी पुल

पश्चिमी जापान में स्थित एहशिमा ओहासी पुल सड़क से ज्यादा एक रोलर कॉस्टर (rollar coaster) कि तरह दिखता है। इस पुल पर ड्राइविंग करना एक रोमांचकारी कार की सवारी करना जैसा ही प्रतीत होता है. यह पुल कंक्रीट से बना दो रास्तों वाला ब्रिज है। इस ब्रिज की सीधी खड़ी चढ़ाई की वजह से यह सबसे बहादुर ड्राइवर्स के दिलों में भी डर भर देता है।

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इस मंदिर में चढ़ाए जाते हैं गाड़ियों के पुर्जे!!

गाड़ियों के पुर्जे

यूं तो आपने मंदिर में धूपबाती जलाकर प्रसाद के रूप में लडडू, मिठाई, नारियल या फल चढ़ाए होंगे। लेकिन आज हम आपको जिस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं उसमें ऐसा कुछ नहीं चढ़ाया जाता। यहां चढ़ाए जाते हैं गाड़ियों के पुर्जे, नंबर प्लेट और घर के पुराने औजार। आप भी जानिए इस अनोखे मंदिर के बारे में।

सराज में है यह मंदिर

हिमाचल प्रदेश में एक अनोखा मंदिर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृहक्षेत्र सराज में है। यह काफी दुर्गम क्षेत्र है और देव संस्कृति को लेकर बहुत आस्थावान और प्रसिद्ध है। इसी क्षेत्र में मगरूगला नामक स्थान के पास है देवता बनशीरा का मंदिर। देवता बनशीरा को जंगल का देवता कहा जाता है और यही कारण है कि इनका मंदिर जंगल के बीचों बीच स्थित है।

न छत है न पुजारी

इस मंदिर की न तो कोई छत है और न यहां कोई पुजारी है। मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक है। मगरू महादेव मंदिर के पुजारी हेतराम बताते हैं कि देवता के इतिहास के तो कोई प्रमाण नहीं लेकिन देवता सदियों से इसी स्थान पर विराजमान हैं और इन्हे जंगल का देवता कहा जाता है।

पहले चढ़ाते थे पुराने औज़ार

हेतराम बताते हैं कि यदि लोग प्राचीन समय से ही मंदिर में अपने घरों के पुराने औजार देवता के मंदिर में चढ़ाते थे और समय के साथ-साथ इसमें गाड़ियों के पुर्जे और नम्बर प्लेट भी शामिल हो गई। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से उस वस्तु पर देवता की कृपा दृष्टि बनी रहती है और कोई संकट नहीं आता। मंदिर परिसर में पड़े ढेरों पुर्जे और नम्बर प्लेट इस बात की तरफ इशारा कर रही हैं कि वाहन चालकों में इस मंदिर के प्रति कितनी आस्था है।

चालकों में है गहरी आस्था, इसलिए चढ़ाते हैं गाड़ियों के पुर्जे

यहां से गुजरने वाले वाहन चालक मंदिर के आगे अपनी गाड़ी को ब्रेक जरूर लगाते हैं और माथा टेककर आशीवार्द प्राप्त करते हैं। टैक्सी चालक खेम सिंह यादव बताते हैं कि यदि गाड़ी का कोई पुर्जा बार-बार खराब हो और उसे इस मंदिर में चढ़ाया जाए तो फिर वह पुर्जा खराब नहीं होता। वहीं गाड़ियों की नम्बर प्लेट इसलिए चढ़ाई जाती हैं ताकि देवता की कृपा गाड़ी पर बनी रहे।

देवभूमि की है अलग पहचान

हालांकि इन बातों पर यकीन करना संभव नहीं लगता लेकिन यह लोगों की आस्था ही है जो इस बात का दर्शा रही है कि मंदिर के प्रति उनकी कितनी अटूट श्रद्धा है। यह आस्था इस बात का प्रमाण है कि विभिन्न प्रकार के मंदिर और उनकी अपनी विशेष प्रकार की मान्यताओं के कारण ही हिमाचल प्रदेश का देवभूमि कहा जाता है।