अमेरिका में 2016 में अमेजन (Amazon) ने स्टोर खोला था। ग्रोसरी स्टोर, जहां न कैशियर हैं न लंबी लाइनें, चेकआउट की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। अमेजन गो ने यहां कन्वीनियंस स्टोर ‘अमेजन गो’ शुरू किया था। कस्टमर को यहां जो भी सामान पसंद आए, ट्रॉली में रखकर घर ले जाएं। उसे खरीदारी के बाद बिलिंग के लिए लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। रही बात पेमेंट की तो वो कंपनी में बनाए गए यूजर के अकांउट से डिडक्ट हो जाएगा।
एंट्री से पहले ऑन करना होगा ऐप
सिएटल में 1800 स्क्वेयर फीट में बने इस स्टोर में एंट्री के लिए अपने स्मार्टफोन में अमेजन के खास ऐप को खोलना होगा और सेंसर के पास जाना होगा। स्टोर का गेट खुल जाएगा।
स्टोर में जाने वाले हर कस्टमर की टैगिंग होगी। स्टोर का सर्विलांस सिस्टम कस्टमर की पहचान कर लेगा और स्टोर में कहीं पर भी हों, उन पर नजर रख सकेगा।
कस्टमर जिस भी शेल्फ के सामने रुकेंगे, वहां उनकी इमेज कैप्चर हो जाएगी।
यह भी कैप्चर होगा कि उन्होंने कौन-सा सामान उठाया और किसे वापस रख दिया।
जो सामान ट्रॉली में गया उसी की होगी बिलिंग
कैमरा वो सभी इमेज कैप्चर करेगा जिस दौरान सामान कस्टमर के हाथ में है, ताकि तय हो सके कि सामान वापस शेल्फ में रखा गया या ट्रॉली में रख लिया गया है।
जो सामान वापस अपनी जगह पर रख दिया जाएगा, उसकी बिलिंग नहीं होगी।
स्टोर के शेल्फ में इन्फ्रारेड, प्रेशर और लोड सेंसर भी लगाए गए हैं, जो सामान उठाने से रखने तक की पूरी प्रॉसेस को नोट करेंगे।
स्टोर में सेल्फ ड्राइविंग कार में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी (कम्प्यूटर विजन, सेंसर फ्यूजन और डीप लर्निंग) इस्तेमाल की गई है। इससे पता लगता है कि कौन-सा सामान उठाया या वापस रखा गया है।
ट्रॉली भी वर्चुअल कार्ट की तरह काम करती है (ऑनलाइन शॉपिंग की तरह)।
माइक्रोफोन से भी होगी कस्टमर की पहचान
स्टोर में जगह-जगह माइक्रोफोन भी लगाए गए हैं, जिससे कस्टमर्स को आवाज के जरिए भी पहचाना जा सकेगा।
स्टोर से खरीदे गए सामान का बिल कस्टमर को बाहर निकलते समय मिल जाएगा और उसकी रिसिप्ट उनके मोबाइल पर भेज दी जाएगी।
वॉलमार्ट (Walmart) भी अमेज़ॅन गो स्टोर योजना के समान कैशियर के बिना एक स्वचालित स्टोर का परीक्षण कर रहा है।
झरने, प्रकृति का एक ऐसा रूप हैं, जिन्हें देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहाड़ों-जंगलों में जाते हैं। लेकिन चीन के लाइबियन इंटरनेशनल बिल्डिंग को इस तरह डिजाइन किया गया है कि 121 मीटर ऊंची इमारत से करीब 108 मीटर (350 फीट) की ऊंचाई से एक झरना नीचे गिरता है। Guizhou Ludiya Property Management कंपनी ने इस इमारत को बनाया है।
उन्होंने एक गगनचुंबी इंमरात में ही झरना फ़िट कर दिया, कुछ लोगों को ये बेहद आकर्षक लग रहा है, तो कुछ ने इसे पैसे की बर्बादी कहा है। लोगों की नजर में इमारत से झरना नहीं, पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है जिसकी कोई जरूरत नहीं है। झरना जब से बन कर तैयार हुआ, तब से अब तक इसे सिर्फ 6 बार ही चलाया जा सका है।
दरअसल, झरने को एक घंटा चलाने का खर्च करीब 100 डॉलर है, इसी को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने बिल्डिंग का मजाक बनाना शुरू कर दिया है। पानी को री-साइकल करने के बाद उतनी ऊंचाई पर चढ़ाने के लिए चार बड़ी-बड़ी मोटर की ज़रूरत पड़ती है, ऐसा मानना है कि चारों मोटरों को चलाने में प्रतिघंटे उर्जा की लागत सौ डॉलर आती है।
इसमें एक शॉपिंग मॉल, कई दफ्तर और एक लक्जरी होटल तैयार किया गया है। झरने के लिए बारिश और जमीन के पानी का इस्तेमाल होता है, जिसे विशालकाय भूमिगत टैंक में जमा किया जाता है। इमारत को बनाने वाली कंपनी का कहना है कि बिल्डिंग में उच्च क्षमता वाले चार पंप लगाए गए हैं जो पानी के नीचे गिरते ही उसे 350 फीट ऊपर पहुंचा देंगे। हालांकि, इस काम में काफी बिजली की खपत होगी।
हालांकि इसका एक और पहलू ये है कि ये अब शहर का प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट बन गया है। लोग दूर-दूर से इस झरने वाली बिल्डिंग को देखने आते हैं। ये झरना हर वक़्त नहीं चलता, इसे ख़ास मौके पर ही चलाया जाता है। यानी ज्यादातर समय ये झरना बंद ही रहता है । चीन की साइट वीबो पर एक आदमी ने लिखा कि अगर होटल महीने में एक बार झरना चलाएगा तो उसे अपनी खिड़की साफ करने का खर्च भी नहीं देना होगा क्योंकि झरने के पानी से वो भी हो साफ़ हो जाएँगी ।
रेगिस्तान के बीचों-बीच आप क्या मिलने की उम्मीद करेंगे? रेत के टीले, तेज हवाएं और दूर-दूर तक जीवन का कोई नामोनिशान नहीं। लेकिन कुदरत वह चीज़ है जो ऐसी जगहों पर भी अपना सौंदर्य बिखेर देती है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।
आज की युवा पीढ़ी गांवों से दूर भागती है, उनके दिमाग में गांव का नाम आते ही यही ख्याल आता है कि गांव एक ऐसी जगह होती है जहां बुनियादी सुविधाएं यानि पानी, बिजली आदि का कमी होती है। लेकिन एक गांव ऐसा भी है जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं।
दरअसल रेगिस्तान के बीच में एक खूबसूरत गांव बसा हुआ है, जो आपका मन मोह लेगा। उस गांव का नाम है हुआकाचाइना (huacachina)। साउथ पेरू के आइसा शहर से महज 8 किलोमीटर की दूरी ये गांव बसा हुआ है। यह गांव दूर से देखने पर एक 3D पेंटिंग की तरह नज़र आता है।
इस गांव की सबसे खास बात है की ये गांव रेगिस्तान के बीचो बीच बसा हुआ है, दूर -दूर तक अगर नज़र दौड़ा कर देखी जाए तो आपको सिर्फ रेत नज़र आएगी पर इस गांव में आपको सुख-सुविधा के अलावा प्रकृति के ऐसा अनमोल दृश्य देखने को मिलेगा जिसकी तारीफ किये बिना आप नहीं रह पाएंगे। यहां पर एक प्राकृतिक झील है, इस झील के बारे में कहा जाता है कि यहां एक राजकुमारी नहा रही थी और एक शिकारी ने उस पर निशाना साधा।
राजकुमारी शिकारी से बचकर निकल गई लेकिन उसके कपड़ों से वहां पर बालू का टीला बन गया। इस गांव में हवा के झोकों से कई टीले बनते रहते हैं। यहां से सनसेट का नजारा देखने योग्य है, यह गांव बहुत ही खूबसूरत है और जब टूरिस्ट इसे देखने के लिए यहां आते हैं तो यहां के स्थानीय निवासी खुशी से उनका स्वागत करते हैं।
यह गांव बिल्कुल सपने की दुनिया जैसा है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। यहां होटल, दुकानों समेत सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि यह गांव काफी छोटा है, यहां सिर्फ 96 परिवार ही रहते हैं। गांव का नाम, यहां के रहने वाले लोगों के नाम पर रखा गया है। कहा जाता है कि यह झील का पानी औषधीय गुणों से भरपूर है और इसमें बीमारियों को दूर करने की क्षमता है।
शहरी भागमभाग से दूर इस गाँव में जाकर पर्यटकों को मानसिक शान्ति का अहसास होता है। रात के समय तो हुआकाचाइना (huacachina) किसी जादुई नगरी जैसा लगता है। पर्यटकों के आनुरोध पर स्थानीय लोग उन्हे टॉप तक अध्ययन-यात्रा के लिए ले जाते हैं। जहां से सनसेट का नज़ारा बहुत ही खूबसूरत दिखाई देता है।
यहां आने वाले लोग जल्दी वापस जाने को तैयार नहीं होते हैं। यहां लोग बोटिंग और बग्गी राइट का आनंद भी ले सकते हैं। पेरु देश में इस गांव की काफी मान्यता है, यहां तक की वहां की करंसी पर भी इसी गांव की तस्वीर लगी हुई है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में टूरिस्ट यहां आते हैं। रेत के टीले और उसके बीचों-बीच बसा एक हरा-भरा गांव ऐसी जगह पर जाकर आप रोमांचित हो उठेंगे।
घर बिकाऊ है ये तो सुना था, लेकिन पूरा का पूरा आइलैंड बिकाऊ है ये पहली बार सुना। जी हां, खुद के आइलैंड का सपना देखने वालो जल्दी से पैसे का जुगाड़ कर लो और इस ख़ूबसूरत आइलैंड को अपना बना लो।
Wisconsin’s Pewaukee लेक पर स्थित Wilsons Island एक निजी आइलैंड है, जो अब बिकने के लिए तैयार है। करीब 3 एकड़ में फ़ैले इस Island में दो कॉटेज बने हुए हैं जिनकी कीमत 890,000 डॉलर रखी गयी है।
इस Island की सबसे बड़ी ख़ासियत है इसके चारों ओर फ़ैला समंदर, हरे भरे पेड़, शांत वातावरण और ख़ूबसूरत कॉटेज हैं। ये Island जन्नत जैसा ही है। इस छोटे से Island तक पहुंचने के लिए बोट का सहारा लेना पड़ता है।
फ़ैमिली के साथ हॉलिडे टूर पर जाना हो या फिर दोस्तों के साथ वीकेंड की मस्ती, अगर ऐसे आइलैंड पर एन्जॉय करने का मौका मिल जाये, तो फिर बात ही अलग है।
घूमने-फिरने का शौक तो हर किसी को होता है, लेकिन ख़ुद के Island पर मस्ती करने का मौका मिल रहा है। तो दोस्तो सोच क्या रहे हो? अगर इस Island को अपना बनाना है, तो आज से ही पैसे बचाना शुरू कर दो।
हमारे देश भारत में फ्रेंड सर्किल में जिन दोस्तों की सैलरी लाख रुपए महीना होती है, उन्हें सफल समझा जाता है। समाज और परिवार में भी उसे सफलता के प्रतीक के तौर पर पेश किया जाता है। लाख रुपए महीना सैलरी लेने वाले को लोग अक्सर यह बात बोलते है: “भाई…तुम्हारी सैलरी तो लाखों में है, तुम…करते क्या हो इतने पैसों का? तेरी तो ऐश है भाई”
पर दुनिया में एक ऐसा शहर भी है जहां 80 लाख रुपए महीना कमाने वाले को भी गरीब समझा जाता है। इस शहर का नाम है सैन फ्रांसिस्को (अमेरीका) । अमेरीका की आवासीय और शहरी विकास विभाग की हालिया रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है।
रिपोर्ट कहती है कि सैन फ्रांसिस्को, सैन माटियो और उसके आस-पास रहने वाला चार सदस्यों का परिवार अगर महीने का 80 लाख रुपए कमाता है तो वो ‘कम वेतन’ पाने वाला परिवार माना जाएगा। वहीं अगर कोई परिवार 50 लाख रुपए कमाता है तो वो और भी गरीब है। देश के अन्य इलाकों के मुकाबले इन शहरों में ग़रीबी का यह पैमाना कहीं अधिक है।
अमेरिका में कौन गरीब, कौन अमीर:
ब्रूकिंग इंस्टीट्यूट की वेबसाइट द हैमिल्टन प्रोजेक्ट का एक सर्वे यह दर्शाता है कि अमेरिका में लोगों की कमाई में काफी अंतर है। अमेरिका की लगभग दो-तिहाई परिवारों की कमाई सैन फ्रांसिस्को के 80 लाख रुपए कमाने वाले ग़रीब परिवार से कम है। अमेरिका में चार सदस्यों के परिवार की औसत कमाई करीब 62 लाख रुपए है।
वहीं इससे ज्यादा सदस्यों वाले परिवारों की औसत कमाई करीब 41 लाख रुपए है। 326 करोड़ की आबादी वाले अमेरिका में चार करोड़ से ज्यादा लोग ग़रीबी रेखा से नीचे हैं। ऐसे चार सदस्यों वाले परिवार की कमाई करीब 17 लाख रुपए है। कुछ बड़े शहरों की तुलना में देश के अन्य भागों की कमाई कहीं कम है।
सैन फ्रांसिस्को दूसरे शहरों से अलग कैसे:
इस श्रेणी में सैन फ्रांसिस्को भी है। इस शहर में आईटी और टेक्नोलॉजी उद्योगों की भरमार है। जिससे यहां रहने वाले लोगों की कमाई भी अच्छी-खासी होती है। बेहतर कमाई की चाहत रखने वाले लोगों के लिए यह शहर उनके सपनों का ठिकाना बन चुका है। सैन फ्रांसिस्को के शहरी इलाकों में साल 2008 से 2016 के बीच 25 से 64 साल उम्र वाले नौकरीपेशा लोगों की कमाई 26 प्रतिशत तक बढ़ी है।
दूसरे शहरी इलाकों के मुकाबले यह काफी अधिक है। साल 2016 तक यहां की लोगों की औसत कमाई करीब 43 लाख रुपए हो चुकी थी। बेशक, अमेरिका के अन्य क्षेत्रों में लोगों को ज्यादा सैलरी दी जाती है। सैन जोस में 25 से 64 साल के नौकरीपेशा लोगों की औसत कमाई करीब 45 लाख रुपए, वॉशिंगटन डीसी में करीब 42 लाख रुपए और बॉस्टन में करीब 38 लाख रुपए है।
किस पेशे में सबसे ज्यादा कमाई:
हालांकि,वहां कुछ लोग ऐसी भी होते हैं जो कम कमाते हैं। सैन फ्रांसिस्को में सबसे कम कमाई करने वाला किसान होता है। यहां किसान औसतन करीब 13 लाख रुपए कमाता है, वहीं बच्चों की देख-रेख करने वालों की औसतन कमाई करीब 15 लाख रुपए होती है। सैन फ्रांसिस्को में डॉक्टर सबसे अधिक कमाई करने वाला होता है।
डॉक्टरों की औसतन कमाई एक करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक होती है। सरकारी अधिकारियों की औसतन कमाई एक करोड़ 15 लाख रुपए होती है। वहीं सॉफ्टवेयर डेवलपर करीब 80 लाख रुपए औसतन कमाते हैं।
आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया:
कमाई अधिक ज़रूर है पर यहां रहन-सहन के ख़र्च भी कम नहीं हैं। सबसे ज्यादा खर्च यहां रहने पर होता है। सैन फ्रांसिस्को में रहन-सहन पर देश के औसत खर्च के मुक़ाबले 25 प्रतिशत अधिक खर्च करना पड़ता है। हालांकि राष्ट्रीय औसत से यहां के लोगों की कमाई 45 प्रतिशत अधिक है।
सैन फ्रांसिस्कों में 2 बीएचके अपार्टमेंट का किराया हर महीने करीब 2 लाख रुपए से ज़्यादा होता है। 2008 में यह करीब एक लाख रुपए था। ओहियो जैसे राज्यों में यह किराया 58 हज़ार के करीब होता है। इन शहरों के मुकाबले सैन फ्रांसिस्को में कमाई के अनुपात में किराए पर खर्च कहीं अधिक है।
दूसरे शहरों के मुकाबले यहां कमाई दोगुनी ज़रूर होती है पर किराए पर 270 प्रतिशत अधिक खर्च करना होता है। ऐसे में सैन फ्रांसिस्को में रहना किसी आर्थिक चुनौती से कम नहीं है। अमेरिकी सरकार यह मानती है कि अगर समान क्षेत्र में, समान सदस्यों वाला परिवार औसत कमाई से 80 प्रतिशत या उससे कम कमाता है तो वो गरीब है।
सैन फ्रांसिस्को की सरकार ने अधिक किराए के चलते 80 लाख रुपए की आमदनी को ‘कम आय’ माना है। यहां चार सदस्यों वाले परिवार की औसत कमाई करीब 81 लाख रुपए है। हालांकि 80 लाख से कम कमाने वाले सरकार की तरफ से दिए जाने वाले किराया भत्ता या फिर सहायता के हक़दार नहीं माने जाते हैं।
सैन फ्रांसिस्को एक महंगी जगह है ज़रूर है पर यहां का अच्छा मौसम और समृद्ध संस्कृति लोगों को आकर्षित करती है। अच्छी ज़िंदगी जीने की चाहत रखने वाले यहां रहने आते हैं।
भारत में लाखों की सैलरी पाने वाले को भले ही अमीर समझा जाता हो पर सैन फ्रांसिस्को में मंहगाई इतनी है कि 80 लाख कमाने वाला भी गरीब होता है।
दुनिया में कई खतरनाक रास्तों के बारे में तो आपने सुना होगा और देखा भी होगा, जहां घूमने-फिरने के लिए जाना अपनी मौत को मुंह लगाने जैसा प्रतीत होता है। आज हम आपको एक ऐसे ही खतरनाक पुल के बारे में बताने जा रहें है, जो एशिया का सबसे लंबा और ऊंचा पुल कहलाता है।
एशिया का सबसे बड़ा लटकता हुआ ब्रिज कहां है? अगर आपका जवाब भारत है तो आप गलत सोच रहे हैं। समूचे एशिया का सबसे बड़ा लटकता हुआ ब्रिज चीन में है, जो इसी महीने आम लोगों के लिए खुला है। इस ब्रिज का नाम लॉगजिआंग ग्रैंड ब्रिज है। ये एशिया का सबसे लंबा और सबसे ऊंचा लटकता हुआ ब्रिज है।
इस ब्रिज की खास बात यह है की यह समुद्र तल से 8100 फुट की ऊंचाई पर बना है । ये चीन के युन्नान प्रांत में बना है। ये ब्रिज चीन के दो शहरों बाओशन और चेंगचोंग को जोड़ता है, जो आगे चीन को म्यांमार से जोड़ते हैं।
ये ब्रिज दो पहाड़ों के बीच बना है। दक्षिण-पश्चिम चीन के युन्नान प्रान्त में लांगजियांग नदी पर बने इस ब्रिज को पूरा करने में करीब 5 साल का समय लगा है। ये ब्रिज घाटी से 920 फुट ऊंचा है। और दुनिया के सबसे ऊंचे पुल से हजारों फिट ऊंचा है। यह ब्रिज पहाड़ के दो तरफ बसे बाओशान्द और तेंगचोंग नाम के चीनी शहरों को जोड़ने का काम करेगा।
इस ब्रिज को बनाने में करीब 151 मीलियन पाउन्ड का खर्च आया है। समुद्र से 8100 फुट ऊंचे पुल पर चलने में बड़े से बड़े बहादुर को भी हल्का सा डर तो लगेगा ही। ये पुल जब से खुला है, तब से लोगों की भीड़ उमड़ रही है ।
चीन में इस तरह के कई लटकते ब्रिज हैं, जो लोगों के बीच में चर्चा का विषय हैं। इस ब्रिज के बाद दुनिया में दूसरे नंबर का ब्रिज सैन फ्रांसिस्को का मशहूर गोल्डन गेट ब्रिज है। जो समुद्र तल से 3924 फिट की उंचाई पर बना है।
चीन के हांगकांग में सीसे से बना पुल भी है। जो लोगों के बीच आकर्षण का विषय है। ये पुल अब चीन के साथ ही समूचे एशिया की शान बन चुका है।
जब देश में नोटबंदी हुई थी, 500 और 2000 के नए नोट जारी हुए थे। इसी तरह आज हम आपको दुनिया के कुछ बेहतरीन नोटों के बारे में बताते हैं। ये करंसी नोट दुनिया के सर्वोत्तम बैंक नोट अवार्ड की दौड़ में शामिल हैं।
न्यूजीलैंड का 50 डॉलर
न्यूजीलैंड के 50 डॉलर नोट को 2015 में पहला ईनाम मिला था। इसमें एक सुंदर प्लास्टिक की खिड़की में नक्शा छापा गया था और रंग बदलने वाली पीले रंग की पेंगुइन भी बनी थी। अब 50 डॉलर का नोट भी इसी सीरीज का हिस्सा है जिसमें माओरी जनजाति के एक प्रमुख राजनीतिज्ञा सर एपिराना नगाता की फोटो छापी गई है।
स्कॉटलैंड का 5 यूरो
स्कॉटलैंड के नोट यूनाइटेड किंगडम में भी खूब स्वीकार किए जाते हैं। कई लोगों के बीच किए गए अध्ययन तथा सुझावों के आधार पर 5 तथा 10 यूरो नोटों के लिए ‘द फैब्रिक ऑफ नेचर’ की थीम का चयन किया गया। इस नोट पर लेखिका नॉन शैफर्ड की फोटो है जो अपनी पुस्तक ‘द लिविंग माऊंटेन’ के लिए विख्यात हैं।
स्विट्जरलैंड का 50 स्विस फ्रैंक
इसमें किसी शख्सियत के चेहरे को नहीं, बल्कि देश की प्रमुख चीजों, स्थानों तथा विशेष गुणों पर जोर दिया गया है। यह नोट हवा को प्रदर्शित करता है।
ऑस्ट्रेलिया का 5 डॉलर
ऑस्ट्रेलिया के नए नोट में ऊपर से नीचे तक एक पारदर्शी पट्टी का नवीन डिजाइन पेश किया गया है। ऐसा इसे सुंदर बनाने के साथ-साथ नकली नोट बनाने वालों का काम कठिन करने की वजह से किया गया है। नोट पर इंगलैंड की महारानी का चेहरा है। उनके अलावा इस पर ‘ईस्टर्न स्पाइनबिल’ नामक पक्षी तथा ‘प्रिकली मोसेस वैटल’ नामक पेड़ के फूल भी दिखाई देते हैं।
इंग्लैंड का 5 पौंड
बैंक ऑफ इंगलैंड ने एक प्लास्टिक का नोट जारी किया था। बैंक के गवर्नर मार्क कार्ने एक नोट को फूड मार्कीट ले गए। उसे वहां सूप में डुबो कर यह दिखाने की कोशिश की कि यह पूरी तरह से वाटरप्रूफ नोट है। हालांकि, उनका यह पैंतरा उस वक्त बुरा साबित हुआ।
मालदीव का 1000 रुपया
इस नौट की थीम हमारे आसपास मौजूद कुदरती सुंदरता पर आधारित है। इसके मुख्य हिस्से पर एक व्हेल शार्क बनी है जिसकी त्वचा पर शेडिंग है। इसकी दूसरी ओर हरे रंग का एक सुंदर कछुआ छापा गया हैं।
जॉर्जिया का 50 लारी
इस नोट के एक ओर रानी तमार की फोटो है जिन्होंने देश पर 1184 से 1213 तक शासन किया था जिसे जॉर्जिया का सुनहरा काल माना जाता है। नोट पर होलोग्राफिक स्ट्रिप और मजैंटा से हरा रंग बदलने वाला सुरक्षा धागा भी लगा है।
टीनएजर्स के लिए स्किन केयर करना बेहद जरूरी है परंतु इसके लिए स्ट्रांग कैमिकल वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स से बचना बेहद जरूरी होता है क्योंकि इस उम्र में त्वचा काफी संवेदनशील होती है। बिना सोचे समझे कोई भी ब्यूटी प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से त्वचा को नुक्सान पहुंच सकता है। घरेलू स्किन केयर टिप्स को इस्तेमाल करके टीनएजर्स बिना किसी साइड इफैक्ट के आप अपनी त्वचा को खूबसूरत और हैल्दी बना सकती हैं।
चेहरा धोने के लिए माइल्ड फेसवॉश या माइल्ड क्लींजिंग जैल का ही प्रयोग करें।
सूर्य की यू.वी. किरणों से त्वचा की रक्षा करने के लिए 15 एस.पी.एफ. वाला सनस्क्रीन लगाएं।
सनस्क्रीन नहीं लगाना चाहतीं तो एक ककड़ी को छील कर मैश कर लें तथा उसे पतले कपड़े से छान लें। इसमें 1 छोटा चम्मच गुलाब जल और ग्लिसरीन मिला लें। अब इसे सनस्क्रीन लोशन की तरह इस्तेमाल करें। यह सन टैन भी दूर करता है।
त्वचा का प्राकृतिक निखार बनाए रखने के लिए हफ्ते में एक बार फेस मास्क लगाएं परंतु स्क्रब करने से बचें।
यदि आपकी त्वचा ऑयली है तो पोटैटो पैक ट्राई करें। इसके लिए 1-1 छोटा चम्मच आलू का रस और मुलतानी मिट्टी को मिला कर पेस्ट तैयार करें। इसे चेहरे पर लगाकर सूखने दें। पहले चेहरा गुनगुने पानी से और फिर ठंडे पानी से धो लें।
ऑयली त्वचा के लिए पपीता पैक भी लाभदायक होता है। इसके लिए 2 बड़े चम्मच पपीता को मैश करके चेहरे पर लगाएं। जब सूख जाए तब गुनगुने पानी से धो लें। आप चाहें तो इसमें नींबू का रस भी मिला सकती हैं।
यदि पिंपल्स अर्थात मुंहासे हो जाएं, तो उन्हें छूने और दबाने की गलती न करें। इससे त्वचा पर दाग पड़ जाते हैं।
यदि आपको ब्लैकहैड्स की समस्या है, तो दालचीनी के पाऊडर में थोड़ा-सा नींबू का रस मिलाएं और जहां ब्लैकहैड्स हैं वहां लगाएं। इससे ब्लैकहैड्स से छुटकारा मिलेगा।
ऋषि कपूर बॉलीवुड फिल्मों के एक जाने-माने हीरो हैं। फिल्मों के साथ-साथ वे निर्देशक भी रह चुकें हैं। ऋषि कपूर एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते जिसनें बॉलीवुड में 85 वर्ष से ज़्यादा का योगदान दिया है। आइए जानते है उनके बारे में कुछ बातें:
ऋषि कपूर का जन्म 4 सितम्बर 1952 को मुंबई के चेंबूर में हुआ था । ऋषि कपूर बॉलीवुड के शो मैन यानी राज कपूर के बेटे हैं। राज कपूर की माँ का नाम कृष्णा राज कपूर है।
ऋषि कपूर का निक नेम चिंटू हैं। ऋषि कपूर के दो भाई हैं। रणधीर कपूर और राजीव कपूर। ऋषि कपूर के दोनों भाई उन्ही की तरंह बॉलीवुड अभिनेता हैं।
ऋषि कपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ से एक बाल कलाकार के रूप में अपना फ़िल्मी सफ़र शुरू किया था। इस फ़िल्म के लिए उन्हें डेब्यू चाइल्ड अभिनेता का नेशनल अवार्ड मिला था।
ऋषि कपूर ने बॉलीवुड में बतौर एक्टर 1973 में अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत फिल्म बॉबी से की थी । इस फिल्म में उनके साथ डिंपल कपाड़िया भी थीं।
ऋषि कपूर को बॉलीवुड में रोमांस का राजकुमार माना जाता है।
बॉबी फिल्म की जबरदस्त सफलता के बाद वे 90 से भी ज्यादा फिल्मों में रोमांटिक रोल करते नज़र आए।
ऋषि कपूर ने अपने करियर में 1973-2000 तक 92 फिल्मों में रोमांटिक हीरो का किरदार निभाया है। इन्होने बतौर सोलो लीड एक्टर 51 फिल्मों में अभिनय किया है। उन्होने बॉलीवुड में कई रोमांटिक हिट फ़िल्में दीं है । ऋषि ने अपनी पत्नी के साथ 12 फिल्मों में अभिनय किया हैं।
ऋषि कपूर अपने जमाने में चॉकलेटी बॉय के नाम से जाने जाते थे।
ऋषि का अफेयर अपनी पहली कोस्टर डिंपल कपाड़िया से भी रह चूका है। लेकिन डिम्पल ने अचानक राजेश खन्ना से शादी कर सभी को चौंका दिया था।
ऋषि कपूर की शादी बॉलीवुड अभिनेत्री नीतू कपूर से हुई है। बता दें, ऋषि कपूर और नीतू ने शादी से पहले एक दूसरे को पांच साल तक डेट किया। उन्होंने 5 साल के लम्बे अफेयर के बाद शादी की थी।
ऋषि कपूर शूटिंग के समय नीतू सिंह के साथ सेट पर शरारतें कर उन्हें तंग करते थे और नीतू को इससे बेहद चिढ़ थी। ‘अमर अकबर एंथोनी’ के सेट पर ऋषि ने नीतू के चेहरे पर काजल फैला दिया था। इस वजह से नीतू को फिर से मेकअप करना पड़ा था।
फिल्म अमर अकबर एंथोनी (1977) में ऋषि कपूर (अकबर इलाहबादी) की भूमिका के रूप में नीतू को उनके वास्तविक नाम “नीतू”से पुकारते हैं। इस गलती को ठीक नहीं किया गया और फिल्म में इस दृश्य को देखा जा सकता है।
ऋषि कपूर के दो बच्चे हैं। रणबीर कपूर और रिधिमा कपूर। रणबीर कपूर अपने पिता ऋषि कपूर की तरह बॉलीवुड के चॉकलेटी हीरो हैं। बेटी रिधिमा पेशे से फैशन डिजाइनर हैं।
ऋषि कपूर के साथ 20 से ज्यादा अभिनेत्रियों ने अपना करियर शुरू किया।
आपको हैरानी होगी, ऋषि कपूर और रणबीर कपूर दोनों नें ही अपनी डेब्यू फिल्म में टॉवल सीन किया है।
ऋषि कपूर ने अपने चालीस साल के फ़िल्मी करियर में पहली बार फिल्म अग्निपथ के लिए ऑडिशन दिया था। अग्निपथ में उन्हों ने नकारत्मक भूमिका निभाई, जो उनके फैंस को बेहद पसंद आई थी
एकनवविवाहितब्रिटिशजोड़ेनेनीलगिरीकीवादियोंमेंअपनेहनीमूनकेलम्होंकोयादगारबनानेकेलिएदक्षिणरेलवेद्वाराशुरूकीगईपूरीस्पैशलट्रेनकिराएपरलेली। युगलनेइंडियनरेलवेकैटरिंगएंडटूरिज्मकार्पोरेशनकीवैबसाइटकेजरिएपूरीट्रेनबुककरवाईथी।नीलगिरी माऊंटेन रेलवे को यूनेस्को को ओर से विश्व विरासत का दर्जा प्राप्त है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार ब्रिटेन के ग्राहम विलियम्स लिन (30) और पोलैंड की सिल्विया प्लासिक (27) भारत यात्रा पर हैं। इंटरनेट पर स्पेशल ट्रेन के बारे में जानकर ग्राहम ने भारतीय रेलवे से संपर्क किया। तय किया गया कि 3 कोच की ट्रेन की सभी टिकटों की राशि पर विदेशी जोड़े के लिए स्पैशल ट्रेन चलाई जा सकती है। यह राशि 2 लाख 85 हजार रुपए बनती है। विदेशी जोड़े ने इस पर सहमति जताई। अधिकारियों ने फोन पर उन्हें नीलगिरी माऊंटेन ट्रेन के इतिहास के बारे में जानकारी दी।
नीलगिरी की वादियों में हनीमून के लम्हे बनाए यादगार
ब्रिटिश जोड़े ने अपने हनीमून को यादगार बनाने के लिए स्पेशल ट्रेन की 3 को चीज की सभी सीटों को बुक कर लिया. इसस्पैशलट्रेनमें 120 यात्रियोंकेबैठनेकीक्षमताहै।सूत्रोंनेबतायाकियुगलइस तरह की अद्भुत सेवाकालाभउठानेवालेपहलेयात्रीबनेहैं। इस तरह नीलगिरी की हसीन वादियों में इस जोड़े ने अपने हनीमून के लम्हे यादगार बनाए।
पहली बार स्टीम इंजन में मिले थे ग्राहम और सिल्विया
पेशेसेअभियंताग्राहमनेबतायाकिसिल्वियासेउसकीपहलीमुलाकात भी कम रोमांटिक नहीं थी. दरअसल ग्राहम और सिल्विया की पहली मुलाकातएकस्टीमइंजनमेंहुई थी। इसलिए यह जोड़ा अपने हनीमून को पर कुछ ऐसा करना चाहता था जिससे उनका हनीमून हमेशा के लिए यादगार बन जाए.
हनीमून के लिए भारत सबसे अच्छा देश
दोनोंनेबतायाकिहनीमूनकेलिएभारतसेअच्छादेशशायदहीकोईहै।यहांकेलोग बहुतमिलनसारहैं।यहअपनीप्राचीनसत्यता, स्थापत्य, अध्यात्मवभूगोलकीवजहसेअनठाहै। इसीलिए हम दोनों ने तय किया की हनीमून के लिए भारत से बेहतर और कोई जगह नहीं है हम यहां पर आकर बहुत ही खुश और रोमांच का अनुभव कर रहे हैं.
सैंकड़ोंसालपुरानेइंजनकेखींचेफोटो
शुक्रवारकोमेत्तुपलयमऔरकुन्नुरमेंस्टेशनप्रबंधकोंने इस ब्रिटिश युगलकाउत्साहसेस्वागतकिया।ट्रेनकोदेखजोड़ारोमांचितथा।दोनोंनेसैंकड़ोंसालपुरानेइंजनकेफोटोखींचे।रेलवेनेबतायाकिट्रेनसुबह 9.10 बजेमेंत्तुपलयमसेचलीथीऔरदोपहर 2.40 बजेऊटीपहुंचीथी।