साउथ कोरिया से जुड़े अजीबोगरीब तथ्य!!

साउथ कोरिया बड़ा अजीबोगरीब देश है। यहां के लोग पूजा-पाठ भी बहुत करते हैं और अंधविश्वासी भी बहुत हैं। लोग नंबर 4 से डरते हैं, लाल स्याही (रेड इंक) का इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे ही कई अजीबोगरीब तथ्य हैं, जो इस देश को बहुत अनोखा बनाते हैं। आइए आज जानते है साउथ कोरिया से जुड़े अजीबोगरीब तथ्य।

  • साउथ कोरिया में पैदा होते ही उम्र 1 साल की मानी जाती है। हालांकि, यह सुनने में बहुत अजीब लगता है, लेकिन ये यहां का कानून है। यहां हर आदमी अपनी असली उम्र से एक साल बड़ा होता है।
  • यह भी एक संयोग है कि भारत का स्वतंत्रता दिवस और साउथ कोरिया का स्वतंत्रता दिवस एक ही दिन, 15 अगस्त को मनाया जाता है। दक्षिण कोरिया साल 1910 से लेकर साल 1945 तक कोरियाई प्रायद्वीप जापान के कब्जे में रहा। दक्षिण कोरिया, जापान से 15 अगस्त, 1945 को आज़ाद हुआ था।
  • इस देश में कहीं भी शराब पी जा सकती है। बार, शॉप, ट्रेन कहीं भी। यहां वेंडिंग मशीन से भी शराब बेची जाती है। इसलिए झूमते हुए लोगों का सड़क पर मिलना यहां आम बात है।
  • इस देश में आत्महत्या की दर विश्व में नंबर 2 पर है।
  • यहां ब्लड ग्रुप को अहम माना जाता है। ब्लड ग्रुप से शख्स की पहचान होती है। कौन अच्छा है, कौन बुरा या कौन धोखेबाज है, इसका फैसला ब्लड से ही होता है।
  • यहां के लोग बहुत पूजा-पाठ करते हैं। खासकर रात को चर्च जाते हैं। यहां के सबवे से अगर रात को गुज़रा जाए, तो लोग पूजा-पाठ करते मिल जाएंगे।
  • इस देश में मर्द मेकअप पर हजारों रुपए खर्च करते हैं। बीबी क्रीम फाउंडेशन उनका पसंदीदा ब्यूटी प्रोडक्ट है। यहां कई टीवी चैनल शो हैं, जो मर्दों के ब्यूटी टिप्स पर फोकस करते हैं।
  • यहां के लोग बहुत अंधविश्वासी है। यहां के लोगों का मानना है कि अगर एक इलेक्ट्रिक फैन को रात भर चालू रखे, तो उसके पास सोने वाली की मौत हो सकती है।
  • इस देश में नंबर 4 जब भी बोला जाता है, तो वो ‘मौत’ शब्द जैसा प्रोनाउंस होता है। इसलिए वहां लोग इससे बचते हैं। हालात ये हैं कि किसी भी जगह, लिफ्ट या हॉस्पिटल में 4 का इस्तेमाल नहीं होता।
  • इंटरनेट स्पीड के मामले में यह देश वर्ल्ड में नंबर 1 है। साउथ कोरिया की 93% आबादी इंटरनेट का इस्तेमाल करती है।
  • यहां के लोग लाल स्याही (रेड इंक) का इस्तेमाल करने से भी डरते हैं। इन लोगों का मानना है कि लाल रंग मौत का सिंबल होता है। इसलिए यहां के लोग लाल रंग का इस्तेमाल नहीं करते।
  • इस देश में एक ही सरनेम वाले लोग आपस में शादी नहीं कर सकते। यहां ये मान्यता सदियों पुरानी है कि एक ही सरनेम वाले लोगों की शादी करने से ब्लड अशुद्ध हो जाता है।
  • यहां हर महीने का 14वां दिन रोमांटिक डे होता है। हालांकि, यहां कई तरह के रिवाज हैं। यहां वैलेंटाइन डे पर लड़कियां लड़कों को या वाइफ हसबैंड को गिफ्ट देती हैं। 14 मार्च को लड़के इस गिफ्ट से तीन गुना ज़्यादा लड़कियों या वाइफ पर खर्च करते हैं।
  • साउथ कोरिया में प्लास्टिक सर्जरी आम है। यहां ऐसा कराने वाले की तारीफ की जाती है। यहां के लोग बड़ी आंखों, बड़ी नाक और अच्छी चिन के लिए सर्जरी कराते हैं। यहां इस तरह की सर्जरी सस्ती भी है।

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भारत के 10 सबसे क्रूर और खतरनाक शासक

मध्य युग में भारत सोने की चिड़िया कहलाता था। शायद इसलिए हमारा देश शुरू से ही विदेशी आक्रांताओं के निशाने पर रहा। देश के उत्तर-पश्चिमी मार्गों से कई विदेशी आक्रमणकारियों ने यहां पर बहुत हमले किए, लूटपाट मचाई और साथ ही अपना साम्राज्य भी स्थापित किया।

इन विदेशी आक्रांताओं में से अधिकतर बहुत ही क्रूर और खतरनाक हद तक मानवता के दुश्मन थे। अपने हर हमले में ये बहुत ही भयानक विनाश लीला मचा देते, जिसमें लाखों की संख्या में इंसानी क़त्ल, बच्चों और औरतों से बेहरमी और बलात्कार, आगजनी, लूटपाट आदि इनके लिए महज खेल भर थे।

इस पोस्ट में हमने हिंदुस्तान में हमला करने वाले ऐसे 10 सबसे क्रूर और खतरनाक हमलावरों की लिस्ट बनाई है जिन्होंने भारत में लूटपाट और क्रूरता का ऐसा भयानक इतिहास बनाया जिसका इतिहास में अन्यत्र उदाहरण मिलना मुश्किल है।

मुहम्मद बिन कासिम (Muhammad bin Qasim)

सउदी अरब में जन्मा मुहम्मद बिन कासिम अत्यंत ही क्रूर और खतरनाक शासक था। भारत में इस्लामिक शासन का विस्तार 7वीं शताब्दी के अंत में मोहम्मद बिन कासिम के सिन्ध पर आक्रमण और बाद के मुस्लिम शासकों द्वारा हुआ। लगभग 712 इस्वी में इराकी शासक अल हज्जाज के भतीजे एवं दामाद मुहम्मद बिन कासिम ने 17 वर्ष की अवस्था में सिन्ध और पंजाब के अभियान का सफल संचालन किया। सिन्ध पर ईस्वी सन् 638 से 711 ई. तक के 74 वर्षों के काल में 9 खलीफाओं ने 15 बार आक्रमण किया।

15वें आक्रमण का संचालन मोहम्मद बिन कासिम ने किया। कहते हैं कि मुहम्मद बिन कासिम का दिल सिंध के तत्कालीन दीवान की बेटी पर आ गया था, वो उसे अपनी बेगम बनाना चाहता था। लेकिन जब वो नहीं मानी, तो कासिम ने उसका सिर कलम करवा दिया था। ऐसे ही सिंध के राजा दाहिर और उनकी पत्नियों और पुत्रियों ने भी अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी।

महमूद गज़नवी (Mahmud Ghaznavi)

महमूद गज़नवी ने भारत के कई हिस्सों पर हमला बोला था। उसने भारत पर 1001 से 1026 ई. के बीच 17 बार आक्रमण किए। इन सभी आक्रमण में उसने बुंदेलखंड, किरात, लोहकोट, ग्वालियर, कालिंजर लोदोर्ग (जैसलमेर), चिकलोदर (गुजरात) और अन्हिलवाड़ (गुजरात) को जीता और लूट लिया। माना जाता है कि महमूद गज़नवी ने अपना 16वां आक्रमण (1025 ई.) सोमनाथ पर किया। उसने वहां के प्रसिद्ध मंदिरों को तोड़ा और वहां अपार धन प्राप्त किया। इस मंदिर को लूटते समय महमूद ने लगभग 50,000 ब्राह्मणों का कत्ल कर दिया। 17वां आक्रमण उसने सिन्ध और मुल्तान के तटवर्ती क्षेत्रों के जाटों के पर किया।

चंगेज खान (Changez Khan)

चंगेज खान एक मंगोल क्रूर और खतरनाक शासक था। उसका मंगोलियाई नाम चिंगिस खान था। वह बौद्ध धर्म का अनुयायी था। उसने मुस्लिम साम्राज्य को लगभग नष्ट ही कर दिया था। भारत सहित पूरे एशिया और अरब देश चंगेज खान के नाम से ही कांपते थे। चंगेज खान ने अपने अभियान चलाकर ईरान, गजनी सहित पश्‍चिम भारत के काबुल, कन्धार, पेशावर सहित उसने कश्मीर पर भी अधिकार कर लिया। उसने अपने हमलों में इस कदर लूटपाट और खूनखराबा किया कि एशिया में चीन, अफगानिस्तान सहित उजबेकिस्तान, तिब्बत और बर्मा आदि देशों की बहुत बड़ी आबादी का सफाया हो गया था।

तैमूर लंग (Timur lang)

तैमूल लंग भी चंगेज खान जैसा क्रूर और खतरनाक शासक बनना चाहता था। जब तैमूर ने भारत पर आक्रमण किया, तब उत्तर भारत में तुगलक वंश का राज था। 1399 में तैमूर लंग द्वारा दिल्ली पर आक्रमण के साथ ही तुगलक साम्राज्य का अंत हो गया। तैमूर मंगोलों की फौज लेकर आया, तो उसका कोई कड़ा मुकाबला नहीं हुआ और वह कत्लेआम करता हुआ आगे बढ़ता गया। तैमूर इतना क्रूर था कि उसने दो हजार जिंदा आदमियों की एक मीनार बनवाई और उन्हें ईंट और गारे में चुनवा दिया था। दिल्ली में वह 15 दिन रहा और उसने इस बड़े शहर को कसाईखाना बना दिया। बाद में कश्मीर को लूटता हुआ, वह समरकंद वापस लौट गया। तैमूर के जाने के बाद दिल्ली मुर्दों का शहर रह गया था। Read more:-वहशी क्रूर योद्धा तैमूरलंग से जुड़े कुछ रौंगटे खड़े करने वाले तथ्य

औरंगजेब (Aurangzeb)

भारत में मुगल शासकों में सबसे क्रूर और खतरनाक शासक के रुप में औंरगजेब का ही नाम लिया जाता है। औरंगजेब, शाहजहां और मुमताज का बेटा था। औरंगजेब की क्रूरता का पता इस बात ही चलता है कि उसने गद्दी के लिए अपने पिता को कैद करवाया लिया था और अपने सगे भाईयों, भतीजों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इतना ही नहीं औरंगजेब ने ही गुरु तेग बहादुर जी का सर कलम करवाया था और गुरु गोविन्द सिंह जी के बच्चों को जिंदा दीवार में चुनवा दिया था। औरंगजेब ने हिन्दू त्योहारों को सार्वजनिक तौर पर मनाने पर प्रतिबन्ध लगाया और उसने हिन्दू मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया। इस दौरान सोमनाथ मंदिर, वाराणसी का मंदिर, मथुरा का केशव राय मंदिर के अलावा कई हिंदू देवी-देवताओं के प्रसिद्ध मंदिर तोड़ दिए गए थे।

बाबर (Babur)

मुगलवंश का संस्थापक बाबर एक लूटेरा था। उसने उत्तर भारत में कई लूट को अंजाम दिया। बाबर का टकराव दिल्ली के शासक इब्राहिम लोदी से हुआ। बाबर के जीवन का सबसे बड़ा टकराव मेवाड़ के राणा सांगा के साथ था। बाबरनामा में इसका विस्तृत वर्णन है। संघर्ष में 1927 ई. में खन्वाह के युद्ध में, अन्त में उसे सफलता मिली। बाबर की आज्ञा से मीर बाकी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर निर्मित प्रसिद्ध मंदिर को नष्ट कर मस्जिद बनवाई, इसी भांति ग्वालियर के निकट उरवा में अनेक जैन मंदिरों को नष्ट किया। उसने चंदेरी के प्राचित और ऐतिहासिक मंदिरों को भी नष्ट करवा दिया था, जो आज बस खंडहर है।

मुहम्मद गोरी (Muhammad Ghori)

मुहम्मद बिन कासिम के बाद महमूद गजनवी और उसके बाद मुहम्मद गोरी ने भारत पर आक्रमण कर अंधाधुंध कत्लेआम और लूटपाट मचाई। इसका पूरा नाम शिहाबुद्दीन उर्फ मुईजुद्दीन मुहम्मद गोरी था। भारत में तुर्क साम्राज्य की स्थापना करने का श्रेय मुहम्मद गोरी को ही जाता है। उसने पहला आक्रमण 1175 ईस्वी में मुल्तान पर किया, दूसरा आक्रमण 1178 ईस्वी में गुजरात पर किया।

इसके बाद 1179-86 ईस्वी के बीच उसने पंजाब पर फतह हासिल की। इसके बाद उसने 1179 ईस्वी में पेशावर तथा 1185 ईस्वी में स्यालकोट अपने कब्जे में ले लिया। 1191 ईस्वी में उसका युद्ध पृथ्वीराज चौहान से हुआ। इस युद्ध में मुहम्मद गोरी को बुरी तरह पराजित होना पड़ा। इस युद्ध में गौरी को बंधक बना लिया गया, लेकिन पृथ्वीराज चौहान ने उसे छोड़ दिया। इसके बाद मुहम्मद गोरी ने अधिक ताकत के साथ पृथ्वीराज चौहान पर आक्रमण कर दिया।

नादिर शाह (Nader Shah)

नादिरशाह का पूरा नाम नादिर कोली बेग था। यह ईरान का शासक था। उसने भारत पर आक्रमण कर कई तरह की लूटपाट और कत्लेआम को अंजाम दिया। उस वक्त दिल्ली की सत्ता पर आसीन मुगल बादशाह मुहम्मद शाह को हराने के बाद उसने वहां से अपार सम्पत्ति अर्जित की, जिसमें कोहिनूर हीरा भी शामिल था। युद्ध में हारने के बाद दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद शाह ने यह अफवाह फैलाई कि नादिरशाह मारा गया। इससे दिल्ली में भगदड़ मच गई और फारसी सेना का कत्ल शुरू हो गया। नादिर को जब यह पता चला तो उसने इस का बदला लेने के लिए दिल्ली पर आक्रमण कर दिया। उसने यहां भयानक खूनखराबा किया और एक दिन में हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा उसने शाह से भारी धनराशि भी लूट ली।

अहमद शाह अब्दाली (Ahmad Shah Abdali)

अहमदशाह अब्दाली को अहमदशाह दुर्रानी भी कहते हैं। उसने भारत पर सन् 1748 से 1758 तक कई बार आक्रमण किए और लूटपाट करके अपार धन संपत्ति को इकट्ठा किया। सन 1757 में जनवरी के माह में दिल्ली पर किया। वह एक माह तक दिल्ली में ठहरकर लूटमार और कत्लेआम करता रहा। दिल्ली लूटने के बाद अब्दाली का लालच बढ़ गया। वहां से उसने आगरा, बल्लभगढ़, मथुरा आदि स्थानों पर आक्रमण किया। उसने अपने सिपाहियों से कहा प्रत्येक हिन्दू के एक कटे सिर के बदले इनाम दिया जाएगा। अब्दाली द्वारा मथुरा और ब्रज की भीषण लूट बहुत ही क्रूर और बर्बर थी।

अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin Khilji)

भारतीय इतिहास के पन्नों में अलाउद्दीन खिलजी का नाम भी सबसे क्रूर शासकों में दर्ज है। अलाउद्दीन खिलजी पर जंग जीतने का ऐसा जुनून सवार हो गया था कि लोगों को मारने में उसके हाथ तक नहीं कांपते थे। जिस वक्त महज मंगोलों का नाम सुनकर लोगों के हाथ कांप जाते थे, अलाउद्दीन खिलजी ने कई जगहों पर मंगोलों पर विजय पाई। कहते हैं कि खिलजी ने 30 हजार मंगोलों को मौत के घाट उतार दिया था और उनके परिवार को अपना गुलाम बना लिया था। उसका साम्राज्य अफगानिस्तान से लेकर उत्तर-मध्य भारत तक फैला था।

भारतीय सिनेमा जगत की कुछ दिलचस्प बातें

भारतीय सिनेमा जगत की कुछ दिलचस्प बातें :-

    1. भारत में पहली फिल्म 1899 में बनी थी, जिसके निर्देशक हरिश्चंद्र सखाराम भाटवडेकर थे.
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    2. प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार “बॉम्बे टॉकीज” में लैब सहायक का काम करते थे और 1936 में वह अभिनेता बने.
    3. सुनील दत्त एक दिलचस्प हीरो थे. उन्हें बॉलीवुड के खलनायक भी कहा जाता है. सुनील दत्त ने अपने करियर में 20 फिल्मों में एक डकैत की भूमिका निभाई है.
    4. वहीदा रहमान ने फिल्मों में अमिताभ बच्चन के साथ प्रेमी और माँ दोनों तरह की भूमिकाएँ निभाई हैं. 1976 में उन्होनें “अदालत” फिल्म में प्रेमी का रोल अदा किया और 1978 में “त्रिशूल” फिल्म में माँ का.
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    5. डिंपल कपाड़िया केवल सोलह वर्ष की थी, जब 1973 में राज कपूर ने उन्हें “बॉबी” फिल्म में पेश किया था. डिंपल ने 16 साल की उम्र में ही बॉलीवुड के सुपर स्टार राजेश खन्ना से शादी की.
    6. “मुगल-ए-आजम” फिल्म के सभी दृश्यों की शूटिंग हिंदी, तमिल और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में की गई थी. यह तमिल में बुरी तरह फ्लॉप हो गई, लेकिन अंग्रेजी भाषा में काफ़ी सफल हुई है.
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    7. 1978 में “सत्यम् शिवम् सुन्दरम्” फिल्म रिलीज होने से पहले राज कपूर बहुत ही अंधविश्वासी थे और खाने-पीने के साथ-साथ मांसाहारी भोजन से भी दूर रहते थे.
    8. 1962 में दिलीप कुमार को निर्देशक डेविड लीन ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म “लॉरेंस ऑफ़ अरबिया” में प्रमुख किरदार करने की पेशकश की थी, लेकिन अज्ञात कारणों के कारण, दिलीप कुमार ने प्रस्ताव से इनकार कर दिया, बाद में इस किरदार के लिए मिस्र के अभिनेता उमर शरीफ को चुन लिया गया था.
    9. “सिलसिला” फिल्म एकमात्र ऐसी फिल्म है, जिसमें शशि कपूर ने अमिताभ बच्चन के बड़े भाई का रोल किया है. अन्य सभी फ़िल्मों में छोटे भाई का रोल अदा किया है, जैसे कि “दीवार, सुहाग, नमक हलाल, दो और दो पांच”.
    10. अभिनेता धर्मेंद्र जवानी के दिनों में अभिनेत्री सुरैया के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं. उनकी फ़िल्में देखने वह मीलों दूर चल कर जाते थे. 1949 में फिल्माई गई फिल्म “दिल्लगी” उन्होनें 40 से भी ज़्यादा बार देखी हैं.
    11. मोहम्मद रफी बॉक्सिंग के बहुत बड़े प्रशंसक थे. वे शिकागो दौरे पर अपने आयोजकों से अनुरोध करके मोहम्मद अली से मिलने गए.
    12. धर्मेंद्र की पहली फिल्म 1960 में “दिल भी तेरा हम भी तेरे” थी. इस फिल्म में अभिनय करने के लिए उन्हें 51 रूपये मिले थे.
    13. देविका रानी पहली अभिनेत्री थी, जिसने फिल्म निर्माण में डिग्री प्राप्त की थी.
    14. फिल्म “हीरोइन” में करीना कपूर ने 130 से अधिक विभिन्न प्रकार के डिजाइनर कपडें पहने थे, जो कि दुनिया के अलग-अलग देशों से मंगवाएं गए थे.
    15. राज कपूर की फिल्म “मेरा नाम जोकर” पहली हिंदी फिल्म है, जिसमें दो अंतराल हैं.mera naam joker movie
    16. देव आनंद अखबार की सुर्खियों और कहानियों से फिल्म के शीर्षक और कहानी की लाइनें लेते थे.
    17. “एलओसी कारगिल (LOC)” फिल्म बॉलीवुड की सबसे लंबी फिल्म है. एलओसी कारगिल 4 घंटे और 15 मिनट लंबी है. अगर आप इस फिल्म को देखना चाहते है, तो हमारा सुझाव है कि आप आराम से बैठे.
    18. आमिर खान की फिल्म “लगान” में ब्रिटिश अभिनेताओं की सबसे अधिक संख्या है और यह बॉलीवुड सिनेमा के इतिहास में सबसे अधिक है.lagaan movies image
    19. “खलनायक” फिल्म के गीत “चोली के पीछे” का 42 राजनीतिक दलों द्वारा विरोध किया गया था.
    20. भारतीय लोग सालाना 2.7 अरब से भी ज़्यादा मूवी टिकट्स खरीदते हैं, जो कि दुनिया में सबसे अधिक है, लेकिन औसत टिकट की कीमतें दुनिया में सबसे कम है.
    21. भारतीय फिल्म पुरस्कार के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि जब सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पुरस्कार खलनायक फिल्म में “चोली के पीछे” गाने के लिए इला अरुण और अलका याग्निक के बीच साँझा हुआ था.
    22. “कहो ना प्यार है” फिल्म ने 2000 में सबसे अधिक पुरस्कार जीत कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया था. इस फिल्म ने कुल मिलाकर 92 पुरस्कार जीते थे.kaho-na-pyar-hai

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क्रिकेट के कुछ कमाल के तथ्य, जो आपके होश उड़ा देंगे।

क्या आप खुद को बहुत बड़ा क्रिकेट प्रेमी मानते हैं? तो आईये आपकी इस गलत-फहमी को दूर करते हैं. खैर, बुरा न माने, यदि आप इन अदभुत क्रिकेट के कुछ कमाल के तथ्य पहले से जानते थे, तो आप सचमुच में अदभुत क्रिकेट प्रेमी हैं.

शाहिद अफरीदी ने सबसे तेज़ वनडे शतक के लिए सचिन तेंदुलकर के बल्ले का इस्तेमाल किया था.

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यह मैच 1996 में श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच खेला गया था. जब शाहिद अफरीदी को बल्लेबाजी करने के लिए भेजा गया, तो उस समय उनके पास बल्लेबाजी करने के लिए उचित बैट नही था.

उस समय वकार यूनिस ने अफरीदी को खेलने के लिए सचिन तेंदुलकर का बल्ला दिया था. उस बल्ले से अफ्रीदी ने 11 छक्के और 6 बाउंड्रीस जड़ते हुए श्रीलंका के खिलाफ मात्र 37 गेंद पर अपनी सेंचुरी पूरी की.

इसी के साथ अफरीदी ने सबसे तेज़ सेंचुरी बनाने का रिकार्ड भी अपने नाम किया था. हालांकि बाद में कोरी एंडरसन ने 36 गेंद पर सेंचुरी बनाकर यह रिकार्ड तोड़ दिया था.

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अब्बास अली बेग पहले भारतीय क्रिकेटर हैं, जिन्हें एक टेस्ट मैच के दौरान एक ऑस्ट्रलियन लड़की ने चूमा था.

पचास के दशक के सबसे खूबसूरत क्रिकेटर अब्बास अली बेग की दुनिया दीवानी थी. सन 1960 में कानपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में गर्ल्स स्टैंड से निकलकर एक लड़की मैदान पर आई और उसने अब्बास को किस कर लिया.

कुछ पलों की चुप्पी के बाद स्टेडियम में बैठे लोग तालियां बजाने लगे. अब्बास अली का चेहरा तो शर्म से लाल हो गया. यह भारतीय क्रिकेट के इतिहास में संभवत: पहला ‘किस’ था.

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विनोद कांबली की टैस्ट मैच औसत अपने बचपन के दोस्त सचिन तेंदुलकर से बेहतर है.

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विनोद कांबली ने केवल 17 टेस्ट मैच खेले हैं, जो कि अपने बचपन के दोस्त सचिन तेदुंलकर के मुकाबले में बहुत ही कम है. लेकिन टेस्ट मैच एवरेज की बात की जाए, तो कांबली सचिन से इस मामले में एक कदम आगे हैं. कांबली की 17 मैचों में टेस्ट एवरेज 54.20 है, जबकि सचिन की 200 टेस्ट मैचों की एवरेज 53.78 है.

सुनील गावस्कर अपने करियर में लगातार तीन बार टेस्ट मैचों की पहली गेंद को आउट होने का रिकॉर्ड बनाया है.

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सुनील गावस्कर तीन बार टेस्ट मैचों में पहली ही गेंद पर आउट हुए है. पहली बार 1974 में एजबेस्टन में इंग्लैंड के ज्योफ अर्नाल्ड ने गावस्कर को टेस्ट मैच की पहली गेंद पर ही आउट कर दिया.

दूसरी बार 1984 में कोलकाता में हुए मैच के दौरान वेस्ट इंडीज के मैल्कम मार्शल ने आउट किया और तीसरी बार 1987 में जयपुर में हुए पाकिस्तान के खिलाफ मैच में इमरान खान ने किया.

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एमएल जैसिम्हा और रवि शास्त्री भारत के ऐसे खिलाडी है, जिन्होंने टैस्ट मैच के पाचों दिन बल्लेबाजी की है.

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सैफ अली खान के दादा इफ्तिखार अली खान पटौदी वो खिलाड़ी थे, जिन्होंने भारत और इंग्लैंड के लिए टैस्ट मैच खेला था.

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सैफ अली खान के दादा इफतीहार अली खान पटोदी एकमात्र ऐसे खिलाड़ी है, जिन्होंने टेस्ट मैच दो देशो से खेला हैं. उन्होने भारत और इंग्लैंड दोनों की टीम से टेस्ट मैच खेला हुआ है.

उन्होंने अपना पहला मैच इंग्लैंड की तरफ से खेला था, जो कि 2 दिसम्बर 1932 को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया था. वह 1932 से लेकर 1934 तक इंग्लैंड के लिए खेले.

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लाला अमरनाथ ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टैस्ट मैच में डॉन ब्रैडमैन की विकेट ली थी.

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लाला अमरनाथ भारत के पहले क्रिकेट कप्‍तान थे. उन्होने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की ओर से पहला शतक जमाया था. वे भारत के पहले आलराउंडर भी थे. उन्‍होंने ब्रिसबेन में ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ हुए एक मैच में ऐसा कारनामा किया, जो अभी तक कोई नहीं कर सका है.

पूर्व ऑस्‍ट्रेलियाई बल्‍लेबाज डॉन ब्रैडमैन को हिट विकेट आउट करना. लाला अमरनाथ ने इस मैच में डॉन ब्रेडमैन को हिट विकेट आउट किया था. ब्रेडमैन ने इस मैच में 185 रन बनाए थे. ऑस्ट्रेलिया के इस दिग्गज ने भी उनकी तारीफ करते हुए उन्हें क्रिकेट का बेहतरीन ख़िलाड़ी करार दिया था.

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1986 के आस्ट्रेलिया कप और 2014 के एशिया कप में भारत-पाक मैच के बीच एक विलक्षण समानता है.

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भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने 60 ओवर, 50 ओवर और 20 ओवर का विश्व कप जीता है.

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इंग्लैंड के एलेक स्टीवर्ट का जन्म 8-4-63 को हुआ था और टेस्ट मैच में 8463 रन बनाए.

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Alec-Stewart

आसिफ करीम अपने देश केन्या के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और डेविस कप (टेनिस) खेले है.

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इंग्लैंड के विल्फ्रेड रोड्स 52 साल के थे, जब उन्होंने टेस्ट क्रिकेट खेला था!

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Wilfred-Rhodes

ऑस्ट्रेलिया के एलन बॉर्डर ने लगातार 153 टेस्ट मैच खेले हैं.

allan broder

विजयनगरम के महाराजा को भारतीय टेस्ट क्रिकेटर नाइट की उपाधि दी गयी हैं.

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ऑस्ट्रेलिया ने 1877 में अपने पहले टेस्ट मैच में इंग्लैंड को 45 रन से हराया था.

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australia beat england

एक ही दिन में सभी चार पारियों का परीक्षण (सन:2000 में लॉर्ड्स टेस्ट, इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के बीच).

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अनिल कुंबले एकमात्र गेंदबाज हैं, जिन्होंने एक पारी में 10 विकेट ली हैं.

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कुंबले ने पाकिस्तान के विरूद्ध 4 फ़रवरी 1999 को आरंभ हुए दिल्ली टेस्ट की चौथी पारी में अपने 26.3 ओवरों में 9 मेडन रखते हुए 74 रन देकर सभी 10 विकेट लेने का कारनामा कर दिखाया था.

उनसे पहले इंग्लैंड के जिम लेकर ने ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध 26 जुलाई 1956 को आरंभ हुए मैनचेस्टर टेस्ट की कुल तीसरी पारी में और ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में 51.2 ओवरों में 23 मेडन रखते हुए 53 रन देकर एक टेस्ट पारी में सभी दसों विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने थे.

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11/11/11 में दक्षिण अफ्रीका को जीतने के लिए 111 रन की दरकार थी 11:11 ओवर में.

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पीटर सिडल ने अपने जन्मदिन पर हैट्रिक लेने वाले इकलौते गेंदबाज है.

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भारत के मोहिंदर अमरनाथ बेहतरीन गेंदबाज होने के साथ साथ बेहतरीन फील्डर भी थे.

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Mohinder-Amarnath

वेस्टइंडीज के क्रिकेटर लेस्ली हिल्टन को हत्या के लिए फांसी दी गई थी.

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“रॉबिन सिंह” नाम के दो भारतीय पूर्व क्रिकेट खिलाडियों ने एकमात्र टेस्ट मैच खेला और बाद में कभी मौका नहीं मिला.

Robin-Shing

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने भारत से पहले पाकिस्तान के लिए मैच खेला है.

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क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि सचिन तेंदुलकर ने भारत से पहले पाकिस्तान के लिए मैच खेला. ब्रेबोर्न स्टेडियम 1987 में भारत और पाकिस्तान के बीच अभ्यास मैच चल रहा था, तब उन्होंने पाकिस्तान की तरफ से फील्डर करने आये थे.

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भारत के सर्वप्रिय पारंपरिक लोक-नाच

भारत एक विविध संस्कृति वाला देश है. यहां के लोक और आदिवासी नाच बहुत मशहूर हैं. यह हैं भारत के 14 सबसे मशहूर पारंपरिक लोक-नाच, जो भारत की संस्कृति का अमूल्य हिस्सा हैं. अब यह भारतीय लोक नाच भारतीय फिल्मों का भी अटूट हिस्सा बन चुके हैं.

रौफफ – जम्मू एंड कश्मीर

kashmiri_girls_folk_danceरौफफ, जम्मू एंड कश्मीर का प्रसिद्ध पारंपरिक लोक-नाच है. “दुमहल” भी जम्मू एंड कश्मीर का मशहूर लोक नाच है. यह लोक नाच विशेष अवसरों और विशेष जगहों पर वहां के लोगों द्वारा प्रदर्शित किये जाते हैं.

भंगड़ा – पंजाब

Bhangra-Punjab“भंगड़ा” पंजाब का प्रसिद्ध लोक नाच है. यह लोक नाच पंजाब में बैसाखी के त्यौहार के दौरान लोगों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है. अब तो यह लोक नाच भारतीय फिल्मों में, शादी के अवसरों में भी प्रदर्शित किया जाता है.

रास लीला-उत्तर प्रदेश

rasLeela-uttar-pradeshरास लीला भारत का सबसे मशहूर लोक नाच है. यह भारत में कृष्ण जन्माष्टमी के दौरान और होली के त्यौहार में लोगों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है. यह खास कर उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृन्दावन की जगहों पर मनाया जाता है.

गरबा-गुजरात

garba-gujarat“गरबा” गुजरात में नवरात्रि के अवसर में मनाया जाता है. “गरबा” और “डांडिया” भारत में दो सबसे मशहूर लोक नाच हैं.

घूमर-राजस्थान

ghoomar-rajasthanयह लोक नाच राजस्थान में भील जनजातियों के समुदाय की महिलाओं द्वारा किया जाता है. यह एक पारम्परिक लोक नाच है.

बिहू-आसाम

bihu-assam“बिहू” के आसाम का मशहूर नाच है, यह नाच आसाम के लोगों द्वारा बिहू के त्यौहार पर किया जाता है. यह नाच लोग ग्रुप बनाकर आपस में करते है.

लावणी-महाराष्ट्र

lavani–maharashtra“लावणी” महाराष्ट्र का प्रसिद्ध लोक नाच है. यह नाच ढोलकी की धुन पर किया जाता है. महाराष्ट्र के इलावा यह लोक नाच मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तमिल नाडु में भी मशहूर है.

राउत नचा- छत्तीसगढ़

rautNacha–chhattisgarh“राउत नचा” का लोक नाच छत्तीसगढ़ में यादव जनजातियों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है. राउत लोक नाच छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में लोकप्रिय है.

घूमरा -ओडिशा

ghumura–odishaघूमरा उड़ीसा का लोकप्रिय नाच है. यह उड़ीसा का आदिवासी लोक नाच है. घूमरा लोक नाच देश में अलग-अलग जगहों पर खास अवसरों पर भी प्रदर्शित किया जाता है.

पुलिकाली-केरला

pulikali–keralaपुलिकाली केरल का सबसे मशहूर लोकन्रत्य है. यह केरल में ओणम के त्यौहार के दौरान लोगों के बीच किया जाता है. यह केरल का पारम्परिक शहर है.

कराकट्टम

karakattam–tamil-nadukarakattam–tamil-nadu“कराकट्टम” तमिलनाडु का प्राचीन लोक न्रत्य है. इस लोक नाच को लोग अपने सर पर बर्तन रख कर उसका संतुलन बनाकर करते हैं.

मटकी डांस- मध्य प्रदेश

matki-dance-madhya-pradesh“मटकी डांस” मध्यप्रदेश के लोगों द्वारा मनाया जाता है. इस लोक नाच को मध्यप्रदेश में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. भारत का राज्य मध्यप्रदेश अपने नाच, परम्पराओं और संस्क्रति के लिए मशहूर है.

डोल्लू कुनिथा-कर्नाटक

dolluKunitha-karnataka“डोल्लू कुनिथा” कर्नाटक का लोकप्रिय नाच है. डोल्लू कुनिथा कर्नाटक के मुख्य नाचों में से एक है. यहां पर लोगों में शास्त्रीय नाच भी बहुत मशहूर हैं.

वीरनाट्यम

veeranatyam-andhra-pradesh“वीरनाट्यम” लोक नाच के पीछे बहुत सारे धार्मिक महत्व जुड़े हुए हैं. यह आंध्रप्रदेश का लोकप्रिय नाच है. इसके इलावा आंध्रप्रदेश में कोलातम, विलासिनी नाट्यम और लम्बाड़ी भी प्रसिद्ध लोक नाच हैं.

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OMG!!- भारत की 10 सबसे डरावनी जगहें

भूत-प्रेत की कहानियां हमेशा से ही लोगों को रोमांचित करती रही हैं. क्या भूत वास्तविकता में होते हैं या यह सिर्फ डरावनी जगहें की बातें हैं? एक और जहाँ विज्ञानी आत्मा और भूत आदि को महज इंसानी दिमाग की उपज और भ्रम बताते हैं, वहीँ दूसरी और कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो भूत-प्रेत की बातों और अनुभवों को दावों के साथ कहते हैं. कई डाक्युमेंटरीज और डिस्कवरी चैनल पर आने वाले haunted आदि कार्यक्रम भी पारलौकिक जीवन के दावे को सच करते दिखते हैं.

भारत में कुछ ऐसी डरावनी जगहें भी हैं जो पारलौकिक घटनाओं और गतिविधियों के लिए जानी जाती हैं. भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जहां हकीकत में भूत देखे जाने को लोग लगभग सच मानते हैं. आइए जानते है भारत की सबसे डरावनी जगहों के बारें में.

भानगढ़ का किला

bhangarh-fortभानगढ़ का किला भारत की सबसे डरावनी जगह मानी जाती है. सरकार ने भी पर्यटकों को यहाँ अंधेरा होने से पहले चले जाने की चेतावनी जारी कर रखी है. लोगों के मुताबिक 16वीं शताब्दी में इसी शहर में रहने वाले एक जादूगर को भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती के साथ प्यार हो गया. जिस पर तांत्रिक ने काला जादू कर दिया था. इसके बाद राजकुमारी को अपने वश में करके तांत्रिक ने उसका शारीरिक शोषण किया, लेकिन एक दुर्घटना के चलते उस तांत्रिक की मृत्यु हो गई. ऐसा कहा जाता है कि जादूगर ने मरते वक्त भानगढ़ के किले को श्राप दिया कि यह जल्दी ही नष्ट-भ्रष्ट हो जाएगा. उस श्राप के बाद इस किले में रहने वाले लोगों की मृत्यु हो जाती है और उनकी आत्मा  इस किले के अंदर भ्रमण करती है.Read more:-भानगढ़ का किला जहां शाम ढलते ही जाग उठती हैं आत्माएं

सैफरन बीपीओ, दिल्ली की सबसे भुतहा जगह

saffron-bpo-gurgaon-most-haunted-placeकब्रिस्तान के ऊपर बना गुडगाँव का सैफरन काल सेंटर (BPO) गुड़गाँव की सबसे भुतहा जगह मानी जाती है. कहा जाता है इस बीपीओ में रोज (Rose) नाम की समयनिष्ठ (punctual) और मेहनती लड़की काम करती थी. वह कई महीनों तक लगातार “Employee of the Month” का ख़िताब जीतती रही. एक दिन अचानक फ़ोन पर बहुत लम्बी बातचीत करने के बाद उसने लम्बी छुट्टी ले ली जो आश्चर्यजनक रूप से बढती चली गयी. उसके सह-कर्मियों ने उसके मकान-मालिक से बात की तो पता चला कि वहां इस नाम की कोई लड़की नहीं रहती थी. बहुत खोजबीन के बाद उसके परिवार को ढूँढा गया जिन्होंने बताया की रोज़ आठ साल पहले मर चुकी थी! उसके दोस्त और सहकर्मी महीनों तक सदमे और दहशत की स्थिति में रहे, और अभी तक भी यह राज कायम है.Read more:-कब्रिस्तान पर बना हुआ एक कॉल सेंटर, जहां भूत करते है काम

जतिंगा घाटी, असम

assam-mysterious-jatinga-valleyअसम में जतिंगा घाटी, बहुत सुंदर और मनोरम दृश्‍यों वाली है. लेकिन सितम्‍बर के महीने में हर अमावस रात को यहां भारी संख्‍या में रहस्‍यमयी रूप से पक्षी मर जाते हैं. ये पक्षी प्रवासी होते है लेकिन यहाँ से कभी वापस नहीं जाते हैं. इन पक्षियों के यहाँ आकर मरने के पीछे क्‍या कारण है आज तक किसी को भी पता नहीं चला है. लेकिन ऐसा होता है.Read more:-रहस्यमयी जतिंगा वैली, जहाँ पक्षी करते हैं सुसाइड!!

रामोजी फिल्म सिटी, हैदराबाद

ramuji-filam-cityअगर आपको ऐसा लगता है कि भूतों को सिर्फ खंडहर ही रास आते हैं तो आपको रामू जी फिल्‍म सिटी के बारे में जानना होगा. रामोजी फिल्‍म सिटी के कई होटलों में भूतों का निवास माना जाता है. स्‍थानीय लोगों का मानना है कि यह फिल्म सिटी उसी जगह पर बनी है, जहां पर कभी हैदराबाद के निजाम की सेना ने विरोधियों की सेना से दो-दो हाथ किया था. इस युद्ध में काफी सैनिक मारे गए थे, जिन्हें यही दफना दिया गया था. कहा जाता है कि यहां उनकी आत्मा आज भी भटकती है. मृत सैनिक यहां आने वाले लोगों को बहुत परेशान करते हैं.

कुलधारा गांव, जैसलमर

kuldhara-village-jaisalmerराजस्थान का यह गांव पिछले 170 से अधिक सालों से वीरान पड़ा हुआ है. इस गाँव में पालीवाल ब्राह्मण रहा करते थे. एक बार एक मंत्री गांव की सुंदर लड़की से शादी करना चाहता था. ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो मंत्री ने उनका लगान दो गुना कर दिया. जिससे गाँव वालों ने वह जगह छोड़ दी और तब से यहां कोई नहीं रहता. सालों से वीरान पड़ा यह गाँव खंडहर बन गया है. यहाँ आने वाले टुरिस्टों का कहना है कि यहां गांववासियों को आज भी महसूस किया जाता है. यहाँ भी सूर्यास्त के बाद जाना मना है. इसके इलावा राजस्थान में और भी बहुत डरावनी जगहें हैं, जो पारलौकिक घटनाओं और गतिविधियों के लिए जानी जाती हैं.Read more:-170 सालों से कुलधरा गाँव पड़ा है वीरान

थ्री किंग्स चर्च, गोवा

three-kings-church-in-goaगोवा के इस चर्च में तीन पुर्तगाली राजाओं की आत्मा भटकती है. यहाँ के लोगों के अनुसार यहाँ रहने वाले तीनों राजाओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई होती रहती थी. एक बार होल्गेर नाम के एक राजा ने अन्य दोनों राजाओं को इस चर्च में आमंत्रित किया और धोखे से जहर देकर मार दिया. जब लोगों को होल्गेर की इस करतूत का पता चला तो उन्होंने इसके महल को घेर लिया. जनता के आक्रोश को देखकर तीसरे राजा ने आत्महत्या कर ली. तीनों राजाओं के शव को इसी चर्च में दफना दिया गया. इसके बाद से ही इस चर्च में भूतों का निवास माना जाता है.

सवॉय होटल, मसूरी

savoy-hauntedसन 1910 अंग्रेजी शासन काल में इस होटल में एक ब्रिटिश लड़की की हत्या की गई थी, जिसकी आत्मा आज भी अपने हत्यारे को ढूंढ़ रही है. इस स्थान को सीरियल किलिंग से भी जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अधिकांश लोगों का मानना है कि इन हत्याओं के पीछे उसी लड़की लेडी ऑर्मे का हाथ है.

राज किरन होटल, मुंबई

raj-kiran-hotalराज किरन होटल के ग्राउंड फ्लोर वाले कमरे में ठहरने वालों की शिकायत है कि रात को उनकी कोई चादर खींचता है तो कोई उन्हें मार के जगाता है. इस कमरे की शुरुआती खामोशी ही आपको डराने के लिए काफी है. इस होटल के ग्राउंडफ्लोर में कई सारी अजीबोगरीब हरकतें होती है जो इस जगह को डरावनी बना देती हैं.

मेरठ का जीपी ब्‍लॉक

block-meerut-uttar-pradeshयूपी के मेरठ में जी.पी. ब्‍लॉक स्थित एक घर को कई लड़के-लड़कियों के भूत का निवास स्‍थल बताया जाता है.  मेरठ के भूत बंगले को लेकर कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह बंगला गंगानगर के जीपी ब्लॉक में है.

बड़ोग सुरंग

brog-tunnel-no-33-himacl-stateइस सुरंग का निर्माण एक अंग्रेज़ इंजीनियर बड़ोग ने करवाया था. इसलिए इसे बड़ोग सुरंग भी कहते है, लोगों का मानना है कि इस सुरंग को बनाने वाले अंग्रेज इंचार्ज बड़ोग ने एक बड़ी भूल यह कर दी कि एक ही बार में दोनों ओर से सुरंग बनाने का कार्य शुरू कर दिया. अंदाजे की भूल से सुरंग के दोनों छोर मिल नहीं पाए जिसके कारण उन पर एक रुपया जुरमाना किया गया. अपनी इस चूक से वह इतने अधिक दुखी हुए कि उन्होंने एक दिन अपने कुत्ते के साथ सैर पर जाते हुए स्वयं को गोली मार कर आत्म ह्त्या कर ली. आज भी इसमें उस अंग्रेज इंजीनियर की रूह भटकती है. लोगों को इस सुरंग में जाने से रोकने के लिए बाकायदा बोर्ड लगा है.

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आई सी सी विश्व कप के कुछ यादगार क्षण

आई सी सी विश्व कप के 44 सालों के इतिहास में वैसे तो एक से बढ़कर एक यादगार क्षण भरे पड़े हैं। इनमें से चुनिन्दा 5 यादगार लमहें हम अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।

1975 विश्व कप – गैरी गिल्मोर (Gary Gilmour) का शानदार और यादगार प्रदर्शन

1975 के विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया की अपेक्षाकृत कमज़ोर टीम सेमीफाइनल में मज़बूत इंग्लैंड से भिड़ी। ऑस्ट्रेलिया के पास डेनिस लिली और जेफ़ थॉमसन जैसे गेंद से कहर ढाने वाले गेंदबाज थे। फिर भी ऑस्ट्रेलिया ने जुआ खेला और स्विंग के माहिर आलराउंडर गैरी गिल्मोर पर जिन्होंने उस विश्व कप मे एक भी मैच नहीं खेला था। 23 वर्ष के इस खिलाड़ी ने पहले तो 14 रन पर 6 विकेट लेकर अपने चिरप्रतिद्वंदी को तहस-नहस कर डाला और पूरी इंग्लैंड की टीम 93 रन पर ढेर हो गयी।

जवाब में ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत भी खौफनाक रही और उसके 39 रन पर 6 विकेट उड़ चुके थे। ऐसे में गैरी गिल्मोर ने बल्लेबाजी में भी कमाल दिखाते हुए 28 गेंदों में नाबाद 28 रन ठोक कर ऑस्ट्रेलिया को फ़ाइनल की टिकट कटा दी। फ़ाइनल में भी गैरी ने शानदार प्रदर्शन किया और 48 रन देकर 5 विकेट झटके और बल्लेबाजी में 11 गेंदों में 14 रन बनाए, हालांकि ऑस्ट्रेलिया वेस्ट इंडीज से यह फ़ाइनल हार गया।

1983 विश्व कप – कपिल देव की अविस्मरणीय पारी

विश्व कप 1983 ग्रुप बी का एक महत्वपूर्ण मैच भारत-जिम्बावे के बीच में खेला गया। जिम्बावे पिछले मैच में ऑल राउंडर डंकन फ्लेचर के हरमनफ़ौला प्रदर्शन से ऑस्ट्रेलिया को हरा चुकी थी। भारत ने पहले बल्लेबाजी शुरू की। पहले 4 विकेट 9 रन पर उड़ चुके थे, जब कपिल देव क्रीज़ पर आए। 17 रन पर पांचवा विकेट उड़ गया। 77 पर छठा और 78 पर सातवाँ। लेकिन दूसरे छोर पर कपिल देव अलग ही लय में थे।

कपिल ने इस मैच में 138 गेंदों में नाबाद 175 रन ठोक डाले, जिसमें 16 चौके और 6 छक्के शामिल थे। दुर्भाग्यवश उस दिन बीबीसी के टेकनिशयन्स हड़ताल पर थे, इसलिए इस मैच का न तो प्रसारण हो पाया न ही रिकॉर्डिंग! कपिल की इस पारी से भारत ने 266 का स्कोर बनाया, जो जिम्बावे के लिए बहुत ज़्यादा साबित हुआ और भारत अपने ग्रुप में दूसरे नंबर पर आ गया। 1983 विश्व कप भारत ने ही जीता!

1999 विश्व कप – सेमी फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की नाटकीय जीत

1999 विश्व कप दक्षिण अफ्रीका खिताब की प्रबल दावेदार थी लेकिन दुर्भाग्य ने यहाँ भी उनका पीछा नहीं छोड़ा। लांस क्लूजनर विस्फोटक फॉर्म में थे और अफ्रीका अपना लगभग हर मैच जीत रहा था। सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए 213 का साधारण स्कोर बनाया। जबाव में अच्छी ओपेनिंग साझेदारी और जोंटी रोड्स, जैक कॅलिस और मार्क बाउचर की उपयोगी पारियों की बदौलत जीत सामने ही थी। अंतिम ओवर में जीत के लिए 9 रन चाहिए थे और स्ट्राइक लांस क्लूजनर के पास थी। अगर कोई परेशानी थी तो यह कि अंतिम विकेट साझेदारी मैदान थी।

पहली दो गेंदों में क्लूजनर ने दो चौके ठोक डाले। अब स्कोर बराबर हो चुका था और जीत महज ओपचारिकता ही थी। तीसरी गेंद पर कोई रन नहीं बना। चौथी गेंद को क्लूजनर ने मिड ऑफ पर मार्क वॉ के पास खेला और रन के लिए भागे। लेकिन दूसरे छोर पर खड़े एलन डोनाल्ड उनकी कॉल को नहीं सुन सके और गेंद को देखते रहे। जब तक उन्हे कुछ समझ आता तब तक देर हो चुकी थी। गेंदबाज डेमियन फ्लेमिंग ने गेंद पिच पर से लुढ़काते हुये विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट की और भेजी जिन्होंने गिल्लियाँ बिखेर दी। हालांकि मैच टाई हो चुका था लेकिन बेहतर रन रेट के आधार पर ऑस्ट्रेलिया की टीम फ़ाइनल में पहुँच गयी।

2011 विश्व कप – आयरलैंड के केविन ओब्रायन का करिश्माई प्रदर्शन

बेंगलूर में खेले गए इस मैच में इंग्लैंड ने आयरलैंड के खिलाफ 50 ओवर मे 7 विकेट के नुकसान पर 327 का विशाल स्कोर बनाया। इससे पहले कभी भी इतने बड़े स्कोर का सफलतापूर्वक पीछा नहीं किया गया था लेकिन छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे केविन ओब्रायन कुछ और ही मंशा लेकर उतरे थे। मैदान पर आते ही उन्होने ताबड़तौड़ बैटिंग शुरू की और इंग्लैंड को बैकफुट पर ला दिया जिससे इंग्लैंड अंत तक नहीं उबर सका।

केविन ओब्रायन ने विश्व कप के इतिहास का सबसे तेज शतक महज़ 50 गेंदों मेँ जड़ दिया। उन्होने 63 गेंदों मेँ 113 रन बनाए और आयरलैंड को जीत के दरवाजे तक ले गए। जीत से 10 रन दूर 317 पर अनावश्यक दूसरा रन भागने के चक्कर मेँ रन आउट हो गए लेकिन बाकि बल्लेबाजों ने संभल कर खेलते हुए आयरलैंड को उलटफेर भरी जीत दिला दी।

2015 विश्व कप – इलियट ने दक्षिण अफ्रीका का दिल तोड़ा

दक्षिण अफ्रीका ने आकलैंड सैमीफाइनल में 5 विकेट पर 281 रन बनाए थे, लेकिन बारिश के कारण इसे 43-43 ओवर का कर दिया गया था। न्यूजीलैंड के लिए आलराऊंडरग्रांट इलियट ने अपनी ज़िंदगी की बेहतरीन पारी खेली थी। न्यूजीलैंड को जीत के लिए 5 रन की ज़रूरत थी और उनकी 2 गेंदें बची थीं, इलियट ने तेज़ गेंदबाज डेल स्टेन की गेंद पर मिड-आन पर शानदार छक्का जड़कर टीम को जीत दिलाई थी। दक्षिण अफ्रीका की हार में खराब क्षेत्ररक्षण की भी भूमिका रही, क्योंकि उसने विरोधी बल्लेबाजों को आउट करने के कुछ मौके भी गंवाए। इलियट भी दो बार आउट होने से बचे थे।

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क्यों फटते हैं बादल?

क्यों फटते हैं बादल? बादल फटना, बारिश का एक चरम रूप है। इस घटना में बारिश के साथ कभी – कभी गरज के साथ ओले भी पड़ते हैं। सामान्यत: बादल फटने के कारण सिर्फ कुछ मिनट तक मूसलाधार बारिश होती है, लेकिन इस दौरान इतना पानी बरसता है कि क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है.

क्यों फटते हैं बादल?

मार्ग में अवरोध

मौसम विज्ञान के अनुसार जब बादल भारी मात्रा में आर्द्रता यानि पानी लेकर आसमान में चलते हैं और उनकी राह में कोई बाधा आ जाती है, तब यह अचानक फट पड़ते हैं, यानि संघनन बहुत तेज़ी से होता है। इस स्थिति में एक सीमित इलाके में कई लाख लीटर पानी एक साथ पृथ्वी पर गिरता है, जिसके कारण उस क्षेत्र में तेज़ बहाव वाली बाढ़ आ जाती है। इस पानी के रास्ते में आने वाली हर वस्तु क्षतिग्रस्त हो जाती है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में आबादी वाले स्थानों में बादल फटने से भारी विनाश होता है.

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गर्म हवा से टकराना

जब कोई गर्म हवा का झोंका ऐसे बादल से टकराता है, तब भी उसके फटने की आशंका बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर 26 जुलाई 2005 को मुंबई में बादल फटे थे, तब वहां बादल किसी ठोस वस्तुस से नहीं, बल्कि गर्म हवा से टकराए थे।

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अजब: इस गुफा में रहता है पूरा गाँव!

आपको पता ही होगा कि आदिमानव के ज़माने में लोग गुफाओं में रहा करते थे, लेकिन ये तो पुराने ज़माने की बात है. लोग अब घरों मे रहते है, जिनमें सम्पूर्ण सुविधाएं उपलब्ध होती हैं. आजकल के तकनीकी युग में गुफाओं में रहने का तो कोई सोच भी नहीं सकता. लेकिन आज भी एक ऐसा गाँव है, जहां के लोग अभी भी गुफा में रहते हैं और इसी गुफा में अपना जीवन खुशी-खुशी व्यतीत कर रहे हैं. यहाँ पर एक स्कूल, खेल का मैदान व् बहुत सी सुविधाएं उपलब्ध है. आइए आपको बताते है कि दुनिया में ऐसी कौन सी जगह है, जहां गुफा में लोग आज भी रह रहे हैं.
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चीन के गुइझोऊ प्रांत में झॉन्डॉन्ग गाँव के लोग सदियों से इसी गुफा में रहते आए हैं और इसी गुफा में अपना पूरा जीवन व्यतीत करते हैं. दरअसल ये गाँव पहाड़ी गुफा से ढंका हुआ है. इस गुफा के अंदर पूरा गाँव बसा हुआ हैं. इस गाँव में 100 से ज़्यादा लोग रहते हैं. यह गुफा समुद्र तल से 1800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.

झॉन्डॉन्ग गाँव में एक स्कूल था, जिसे चीनी सरकार में 2008 में बंद कर दिया था. चीनी सरकार के अनुसार चीन की सभ्यता में गुफाओं में लोग नहीं रहते. लेकिन 2011 में चीनी सरकार द्वारा स्कूल फिर से शुरू कर दिया गया. इस स्कूल में बच्चे सुबह दो घंटे तक पढ़ाई करते हैं.
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यहाँ के लोगों ने स्थानीय प्रशासन से इस क्षेत्र को विकसित करने के काफी प्रयास किए, लेकिन अभी भी ये गाँव बाहर की दुनिया से काफी अनजान है. आज भी यहाँ के लोग सामान खरीदने के लिए 15 किलोमीटर पैदल चल कर जाते हैं. दुनिया से अलग रह रहें ये लोग अपनी ज़रूरतों की सारी चीज़ों का इंतज़ाम खुद ही करते हैं.

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न्यूयॉर्क शहर की कुछ अदभुत तस्वीरें

डेनिस रामोस: डेनिस रामोस एक अदभुत फोटोग्राफर हैं, जो कि अपने ब्लैक एंड वाइट चित्रों के लिए जाने जाते हैं. डेनिस रामोस का जन्म फिलीपींस में हुआ और उसके बाद वह अमेरिका चले गए, जहाँ उन्होंने एक फोटोग्राफर के रूप में अपना करियर शुरू किया. डेनिस ने एक बार कहा था कि वह प्रकाश और आकृति से प्रेरित है. हालांकि उन्होंने करियर की शुरुआत चित्रांकन फोटोग्राफर के रूप में शुरू की थी. बाद में वे एक परिदृश्य फोटोग्राफर बनें. ब्लैक एंड वाइट फाइन आर्ट में उनके द्वारा खींची गयी न्यूयॉर्क शहर के प्रसिद्ध स्थलों की कुछ मनमोहक तस्वीरें.

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मैनहटन म्युनिसिपल बिल्डिंग

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गुगगेंहें म्यूजियम

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एम्पायर स्टेट बिल्डिंग

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मैनहट्टन कोर्ट

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