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भूटान की पहचान – टाइगर नेस्ट

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भारत का पड़ोसी देश भूटान अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। इस देश में बहुत सी ऐसी जगहें और मंदिर हैं, जो इस देश को खास बनाते हैं। उन्हीं जगहों में से एक है हजारों फीट ऊंची चट्टान में बना बौद्ध मठ, जिसे टाइगर नेस्ट मठ कहा जाता है। जानिए कैसा है यह बौद्ध मठ:

टाइगर नेस्ट मठ आज पूरी दुनिया में भूटान की पहचान है। यह भूटान के सबसे पवित्र बौद्ध मठों में से एक है। यह स्थान 3000 फीट ऊंची चट्टान पर बना हुआ है। यह मठ एक पहाड़ी की चोटी पर बना है। इस मठ को 1692 में बनाया गया था। यह मठ भूटान की राजधानी थिंपू से कुछ घंटों की दूरी पर है। यह बौद्ध भिक्षुओं के रहने का विशेष स्थान है और यहां इनकी दैनिक गतिविधियों को करीब से देखा जा सकता है।

इस बौद्ध मठ को तक्तसांग मठ (Taktsang Monastery) भी कहा जाता है। यह पारो घाटी में एक ऊंची पहाड़ी पर टंगा सा दिखाई देता है। सड़क से देखने पर पहाड़ पर चढना अंसभव सा ही लगता है। रास्ते में कुछ जगहों से टाइगर नेस्ट दिखाई देता है। इस मठ में भूटान की अद्भुत कला देखने को मिलती है। इस ऊंचे धार्मिक स्थल तक पहुंचने के लिए पगडंडी से होते हुए जाना पड़ता है। इस रास्ते से पैदल चलकर मठ तक पहुंचा जा सकता है।

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पहाड़ी की चोटी पर बना मठ कई हिस्सों में बना है। चोटी के  साथ ऊपर उठते कई मंदिरों का समूह है। यहां कुल चार मुख्य मंदिर हैं। इसमें सबसे प्रमुख भगवान पद्मसंभव का मंदिर है जहां उन्होंने तपस्या की थी। इस मठ के बनने की कहानी भी भगवान पद्मसंभव से ही जुड़ी है। भूटान की लोककथाओं के अनुसार इसी मठ की जगह पर 8वीं सदी में भगवान पद्मंसभव ने तपस्या की थी।

पहाड़ी की चोटी पर बनी एक गुफा में रहने वाले राक्षस को मारने के लिए भगवान पद्मसंभव एक बाघिन पर बैठ तिब्बत से यहां उड़कर आए थे। यहां आने के बाद उन्होंने राक्षस को हराया और इसी गुफा में तीन साल, तीन महीने, तीन सप्ताह, तीन दिन और तीन घंटे तक तपस्या की। क्योंकी भगवान पद्मसंभव बाघिन पर बैठ कर यहां आए थे इसी कारण इस मठ को टाइगर नेस्ट भी बुलाया जाता है। भगवान पद्मसंभव को स्थानीय भाषा में गुरू रिम्पोचे की कहा जाता है।

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