बेहतरीन फोटोग्राफर बनने के लिए 10 मददगार टिप्स

क्या आप एक बेहतर फोटोग्राफर बनना चाहते हैं ? बेहतर फोटोग्राफर बनने के लिए आपको सिर्फ थोड़ा सा अनुभव चाहिए. यह हैं अच्छा फोटोग्राफर बनने के लिए 10 बेहतरीन टिप्स.

अच्छे चित्र लेने के लिए 10 टिप्स.

अपने कैमरे के फोकस को अपने विषय (Subject) की ओर रखें

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अपने कैमरे के माध्यम से सीधी आँख से विषय (subject) को देखने से आपको बेहतरीन तस्वीर मिलेगी. जब आप किसी की फोटो ले रहे हो, तो अपने कैमरे के फोकस को व्यक्ति की आँख की तरफ टिका लें और उनके मुस्कराते हुए दृश्य की फोटो अपने कैमरे से खींच लें.

एक सादे पृष्ठभूमि का उपयोग करें (use a plain background)

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एक सादे पृष्ठभूमि (background) से आपके फोटोग्राफर के विषय के बारे में पता चलता है. जब आप कैमरे के दृश्यदर्शी (viewfinder) के माध्यम से अपने विषय (subject) को देखते हैं, तो आपको विषय के आसपास के खेत्र का अध्ययन करना चाहिए.

बाहर फ़्लैश का प्रयोग करें (use the flash outdoors)

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उज्ज्वल सूरज, आपके विषय के आसपास बदसूरत गहरी छाया बना सकता है. आप अपने कैमरे के फ़्लैश का उपयोग करते हुए अपने विषय के चेहरे पर पड़ रही छाया को हटा सकते हैं. जब आप धूप में लोगों की तस्वीरें ले रहे हैं, तो आपको अपने कैमरे की फ़्लैश चालू रखनी चाहिए.

कैमरे को विषय के पास ले जाएँ (move in close)

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अगर आपका विषय (Subject) एक कार से छोटा है, तो आपको विषय की तस्वीर जूम लेकर या एक-दो कदम पास जाकर खींचनी चाहिए. आपके द्वारा ली गयी पूरी तस्वीर आपके विषय की ही होनी चाहिए. यही आपका मुख्य लक्ष्य होना चाहिए.

बीच से स्थान-परिवर्तन करें (move it from the middle)

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आपके विषय का कैमरे के फोकस में मिडिल में होना एक अच्छी जगह नहीं है. आप अपने द्वारा ली जाने वाली तस्वीर में अपने विषय को कैमरे के फोकस में एक तरफ करके अपनी तस्वीर में जान डाल सकते हैं. ऐसा करने से पहले आपको अपने कैमरे के फोकस को लॉक करना पड़ेगा.

फोकस को लॉक करना (Lock the focus)

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अगर आपका विषय केंद्र (Center) में नहीं है, तो आपको कैमरे के फोकस को लॉक करना पड़ेगा. अगर आप धुंधलेपन वाली तस्वीर नहीं लेना चाहते, तो आपको पहले अपने कैमरे के फोकस को अपने विषय पर लॉक करना पड़ेगा, जिससे आपके विषय की तस्वीर अच्छी तरह से आएगी.

आपको अपने कैमरे की फ़्लैश की सीमा का पता होना चाहिए (know your flash range)

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हम में से कई लोगों को अपने फ़्लैश की रेंज के बारे में नहीं पता होता. इसी वजह से हमारे द्वारा ली गयी ज़्यादातर तस्वीरें अच्छी नहीं होती. ज़्यादातर कैमरों में फ़्लैश की सीमा 15 फीट या 5 कदम दूरी से अधिक नहीं होती. एक फोटोग्राफर को अपने विषय की तस्वीर अपने कैमरे की फ़्लैश रेंज में ही लेनी चाहिए.

तस्वीर हमेशा रौशनी वाली जगह पर लें (watch the light)

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हर एक तस्वीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रौशनी होती है. रौशनी आपके फोटोग्राफी में बहुत मायने रखती है. अगर आपको विश्वास नहीं होता, तो आप अँधेरे में अपने विषय की तस्वीर लेकर देखें. रौशनी में ली गयी तस्वीर, अँधेरे में ली गयी तस्वीर से ज़्यादा बेहतर होगी.

कुछ लंबरूप (vertical) तस्वीरें भी लें

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यह खूबी आपके कैमरे की विशेषताओं को जानने में बहुत मददगार होगी. तो अगली बार अपने कैमरे से तस्वीर लेने से पहले अपने कैमरे को बगल (sideways) वाली स्थिति में कर लें और फिर तस्वीर लें.

तस्वीर निर्देशक बनो (be a picture director)

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तस्वीर लेने से पहले आपके द्वारा ध्यान में रखे गये उपरोक्त टिप्स आपके द्वारा ली गयी तस्वीरों में बहुत सुधार लायेंगे.

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दुनिया में 10 सबसे अजीबोगरीब डर!!!

शायद हम सभी किसी ना किसी चीज़ के भय से ग्रस्त रहते हैं, कुछ लोग ज़्यादा डरते हैं और कुछ लोग कम. लेकिन कई लोगों को बहुत ही अजीब चीज़ों से डर लगता है. जैसे कि यह 10 अजीबोगरीब डर (Phobia) जो बहुत बेतुके हैं, फिर भी लोगों को इन से डर लगता है. तो आइए जानते हैं दुनिया के 10 सबसे अजीबोगरीब डर के बारे में…..

सड़क को पार करने से डरना (Agyrophobia)

जो लोग इस फोबिया से ग्रस्त होते हैं, उन्हें सड़कों, राजमार्गों और अन्य मार्गों को पार करने से भय लगता है. इस डर से ग्रस्त लोगों को शहर में आराम से रहने के लिए बहुत समस्या आती है.

खाना पकाने का डर (Mageirocophobia)

यह डर बहुत दुर्लभ होता है. इस डर से ग्रस्त व्यक्ति में कमज़ोरी आ जाती है और अस्वस्थ भी होने लगता है. यह दुर्लभ डर (Phobia) ज़्यादातर अकेले रहने वाले लोगों में होता है. यह डर अत्यंत कौशल व्यक्तियों में भी हो सकता है.

गुड़िया के खिलौने से डरना (Pediophobia)

यह डर बहुत ही तर्कहीन है. इस डर से पीड़ित व्यक्ति को गुड़िया के खिलौनों से डर लगता है. पीड़ित व्यक्ति गुड़िया के खिलौनों के साथ-साथ रोबोट जैसे दिखने वाले खिलौनों से भी डरता है. इस डर में पीड़ित व्यक्ति को लगता है कि गुड़िया का खिलौना जीवित हो उठेगा.

रात के खाने में वार्तालाप का डर (Fear of Dinner Conversation)

बेशक कई बार रात के खाने में वार्तालाप का डर बहुत अजीब हो सकता है, लेकिन कई लोग रात के खाने के समय साथ वाले लोगों से वार्तालाप करने में बहुत ज़्यादा डरते हैं.

दर्पण को देखने का डर (Eisoptrophobia)

यह डर बहुत ही भावनात्मक होता है. इस डर से पीड़ित व्यक्ति को दर्पण देखने से बहुत भय लगता है. पीड़ित व्यक्ति को दर्पण देखते समय बहुत ही चिंता होने लगती है. बेशक उसे पता होता है कि यह चिंता तर्कहीन है. असल में यह डर अंधविश्वास पर आधारित डर है, इस डर से पीड़ित व्यक्ति को लगता है कि अगर वह दर्पण के सामने आएगा, तो वह अलोकिक दुनिया के साथ संपर्क में आ जायेगा.

शैतान का डर (Demonophobia)

यह डर बहुत आसामान्य और डरावना होता है. यह डर उन लोगों में होता है, जो अलौकिक शक्तियों, आत्माओं में विश्वास रखते हैं. उनको भूतों के बारे में बातें करने से, भूतों की फिल्मों देखने में बहुत डर लगने लगता है.

सास से डरना (Pentheraphobia)

शादीशुदा लोगों में यह डर पाया जाता है. यह डर पश्चिमी समाज में बहुत आम है. इस डर में शादीशुदा लोग अपनी सास से डरते हैं. इस डर को कई तरह के उपायों से खत्म किया जा सकता है. लेकिन सबसे आम उपाय तालाक होता है.

पी-नट बटर को खाते समय मुंह में चिपकने का डर (Arachibutyrophobia)

इस डर का मुख्य कारण होता है, यह कल्पना करना कि यदि खाते समय मूंगफली का मक्खन या उसके जैसी मिलती जुलती खाने वाली चीजें यदि मुंह में ही चिपक जाए. तो क्या होगा? इस डर से पीड़ित व्यक्ति को इसी बात का डर लगा रहता है. यह डर बहुत विचित्र है. यह डर किसी को भी बहुत आसानी से लग सकता है.

बैठने का डर (Cathisophobia)

इस डर से पीड़ित व्यक्ति को कहीं पर बैठने से डर लगता है. इस डर कि शुरुआत उस समय होती है, अगर कोई व्यक्ति गलती से किसी बुरी चीज़ पर बैठ जाता है. जिसके बाद उसे बैठने से डर लगने लगता रहता है. लेकिन कई मामलों में यह डर पीड़ित में तब जन्म लेता है, जब उसको स्कूल के समय किसी प्रभावशाली व्यक्ति के सामने बैठने के लिए कहा जाता है.

वेंत्रिलोक्विस्ट डम्मी से डर (Automatonophobia)

वेंत्रिलोक्विस्ट (Ventriloquist’s) एक ऐसा खिलौना होता है, जो कलाकारों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. इस खिलौने में कलाकार अपना हाथ डाल कर अलग-अलग आवाज़ें निकालते हैं. जिससे दर्शकों को लगता है कि खिलौना बोल रहा है. बहुत से लोगों को इन खिलौनों से भी डर लगता है. इस डर से पीड़ित व्यक्ति को लगता है कि खिलौना सच्च में बोलने लग गया.

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दुनिया के अजीबोगरीब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड!!

दुनिया में अजीबोगरीब लोगों की कमी नहीं है। आपको दुनिया के हर कोने में ऐसे कई शख्स मिलेंगे, जो अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं हैं। कुछ अजूबे तो ऐसे हैं, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए बरसों प्रैक्टिस करते हैं, कई तरह के त्याग करते हैं और फिर जब वे रिकॉर्ड बना लेते हैं, तो रातों रात दुनियाभर में फेमस हो जाते हैं। हटके करने की चाह में कुछ लोगों ने ऐसे कारनामे कर डाले, जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा। आज हम आपको बताने जा रहे हैं, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज अजीबोगरीब रिकॉर्डस।

सबसे लम्बी टांगों का रिकॉर्ड

रूस की एकैटेरिना लिसिना दुनिया की सबसे लंबी टांगों वाली महिला है। वह दुनिया की सबसे लंबी प्रोफेशनल मॉडल है। उनकी बाईं टांग 132.8 सेंटीमीटर और दाहिनी टांग 132.2 सेंटीमीटर लम्बी है। महिलाओं की श्रेणी में सबसे लम्बी टांगों का वर्ल्ड रिकॉर्ड एकैटेरिना लिसिना के नाम है। उनसे पहले यह रिकॉर्ड रूसी महिला स्वेतलाना के पास था। उसके घर में प्रत्येक सदस्य की लम्बाई छह फीट से ज़्यादा है।

सबसे लंबी पलकें

चीन की महिला यू जियांक्सिया के नाम सबसे लंबी पलकों का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। यू जियांक्सिया की ऊपरी बांई पलक की लंबाई 12.40 सेंटीमीटर नापी गई थी। उनकी पलकें 12.40 सेंटीमीटर यानी कि 4.88 इंच लंबी हैं।

सबसे लंबे नाखून

अमेरिका के टेक्‍सास की रहने वाली महिला अयाना विलियम्‍स के नाम सबसे लंबे नाखून रखने का रिकॉर्ड है। उनके नाखूनों की लंबाई 8 फीट 10.9 इंच है। अयाना पिछले 20 सालों से अपने नाखून बढ़ा रही हैं। आपको बता दें कि उन्‍हें अपने नाखूनों को पॉलिश करने में 20 घंटे का समय लगता है।

सबसे जल्दी बैलून फुलाने का रिकॉर्ड

जब कभी हमें कोई गुब्बारे फुलाने के लिए कहे, तो हम दो-तीन गुब्बारे फुलाकर थक जाते हैं। अमेरिका के कोलाराडो में हंटर इवन नाम के शख्स के पास एक घंटे में सबसे जल्दी बैलून फुलाने का रिकॉर्ड है। इवान ने पास एक घंटे में अपने मुंह से 910 गुब्बारे फुलाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

7 साल की उम्र में कमाता है करोड़ों रुपए

रेयान खिलौनों का रिव्यू करता है और उसका अपना यूट्यूब चैनल है, जो ‘रेयान टॉय्ज रिव्यू’, के नाम से चलता है। इसमें कारें, सामान्य खिलौने, एक्शन फिगर्स आदि शामिल हैं। वह अपने घर पर ही खिलौनों का रिव्यू करता है और उसके पैरेंटस उन वीडियो को अपलोड करते हैं। मात्र 7 साल के रेयान ने एक साल ने 155 करोड़ रुपए की कमाई की और फोर्ब्स की लिस्ट में शामिल हो गया। यूट्यूब के अनुसार, रेयान के चैलन के कुल 1.73 करोड़ फॉलोअर्स हैं। उनके चैनल को कुल 26 अरब से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। रेयान के माता-पिता ने मार्च 2015 में रेयान टॉय्ज-रिव्यू चैनल शुरू किया था।

सबसे लंबी पूंछ वाली बिल्ली

साइगनस नाम की पालतू बिल्ली का सबसे लंबी पूंछ का गिनीज रिकॉर्ड है। साइगनस की पूंछ की लंबाई 44.66 सेंटीमीटर है।

बालों का सबसे ऊँचा घोंसला

लॉस एंजिल्स, अमेरिका के बेनी हार्लेम का हाई टॉप फेड, यानी बालों का सबसे ऊँचा घोंसला है। बेनी हारलेम को अपने बाल बनाने में दो घंटे का समय लगता है और दरवाजे से गुज़रते वक्त ध्यान रखना पड़ता है, वरना 2 घंटों की मेहनत बर्बाद भी हो सकती है। उन्होंने 10 सालों से बाल नहीं कटवाए हैं। उनके नाम सबसे ऊंचे टॉप फेड (एक तरह का हेयर स्टाइल, जिसमें किनारे के बाल तो कटवाए जाते हैं, लेकिन ऊपर के बाल बढ़ने के लिए छोड़ दिए जाएं) का गिनीज रिकॉर्ड है। उनके टॉप फेड की ऊंचाई 52 सेंटीमीटर है।

सबसे जल्दी क्यूब सॉल्व करना

ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले फैलिक्स जैमडेग के पास सबसे कम टाइम में रूबिक क्यूब सॉल्व करने का रिकोर्ड है। ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले इस स्टूडेंट ने महज 4.73 सेकेंड में क्यूब सॉल्व कर लिया था।

सबसे भारी साइकिल

बेल्जियम के इंजीनियर जेफ पीटर्स ने दुनिया की सबसे भारी साइकिल बनाई है। बताया जा रहा है कि इस साइकिल का वजन 860 किलो है।

सबसे लंबे बाल

गुजरात की नीलांशी पटेल 16 साल की उम्र में 5 फीट 7 इंच लंबे बाल बढ़ाकर दुनिया की पहली टीन-एजर बन गई हैं। इसी के साथ उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। महेसाणा की रहने वाली नीलांशी बताती हैं कि 6 साल की उम्र में हेयरड्रेसर ने उनके बाल अच्छे से नहीं काटे थे। तब उन्होंने ठान लिया था कि वे कभी बाल नहीं काटेंगी।

मधुमक्खियों के लिए शरीर को बनाया घर

यदि एक मधुमक्खी आपको डंक मार दे, तो आपके शरीद के अंदर सिहरन पैदा हो जाती है। लेकिन चीन का बीकीपर शी पिंग मधुमक्खियों से खेलता है। जी हां, बीकीपर शी पिंग ने अपने शरीर पर 3 लाख 31 हजार मधुमक्खियों को बैठाकर वल्र्ड रिकॉर्ड बनाया।

सबसे बूढ़े बॉडी बिल्डर

अमेरिका के जिम एरिंगटन पिछले 70 सालों से बॉडी बिल्डिंग से जुड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। उनकी उम्र 84 साल है। इस साल उन्होंने सबसे बूढ़े बॉडी बिल्डर के रूप में गिनीज बुक में जगह बनाई है।

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भारतीय संविधान से जुड़ी कुछ खास बातें!!

भारत राज्‍यों का एक समूह है। य‍ह संसदीय प्रणाली की सरकार का एक स्‍वतंत्र गणराज्‍य है। यह गणराज्‍य भारत के भारतीय संविधान के अनुसार चलता है, जिसे संविधान सभा द्वारा 26 नवम्‍बर 1949 को ग्रहण किया गया था और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। विश्व में भारत का संविधान सबसे बड़ा लिखित संविधान है।

संविधान की विशेषता 

भारत के संविधान की मुख्य विशेषता यह है कि वह संघात्मक भी है और एकात्मक भी। भारत के संविधान में संघात्मक संविधान की विशेषताएं दी गई हैं। दूसरी विशेषता यह है कि आपातकाल में भारतीय संविधान में एकात्मक संविधानों के अनुसार केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए नियम बनाये गए हैं।

आइए जानते है कुछ ऐसे ही महत्वपूर्ण तथ्य भारतीय संविधान के बारे में :-

    • संविधान किसी भी देश का सर्वोच्च कानून होता है।
    • ‘संविधान का निर्माता’ डॉ. भीमराव अम्बेडकर को कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने भारतीय संविधान में निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई थी।
    • जब भारत का संविधान बनाया गया, तो उसमें प्रेस और जनता को भाग लेने की पूरी स्वतंत्रता थी। संविधान सभा को बनाने में 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन का समय लगा था तथा इसमें 114 दिन बैठकें कर के संविधान बनाया गया था।
    • भारतीय संविधान को हाथों से लिखा गया था, इसमें किसी भी प्रकार की टाइपिंग या प्रिंटिंग का उपयोग नहीं किया गया था।
    • जवाहरलाल नेहरू, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम संविधान सभा के मुख्य सदस्य थे.constitution
    • 11 दिसंबर, 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान का अध्यक्ष चुना गया था, जो कि अंत तक भारतीय संविधान के अध्यक्ष बने रहे।
    • भारतीय संविधान में 465 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं, जिन्हें 22 भागों में विभाजित किया गया हैं।
    • संविधान की धारा 74 (1) में यह बताया गया है कि मंत्रि परिषद राष्‍ट्रपति की सहायता से होगी और इसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा।
    • भारतीय संविधान अब तक का सबसे लंबा लिखित संविधान है और इसके अब तक 100 संशोधन हो चुके हैं।
    • ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। यह सभी धर्मों की समानता और धार्मिक सहिष्णुता सुनिश्चित करता है।
    • भारत मे किसी भी नागरिक को दोहरी नागरिकता प्राप्त नहीं है।  जाति, रंग, नस्ल, लिंग, धर्म या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता और सभी को बराबर का दर्जा और अवसर प्राप्त है।
    • भारत में संविधान बनने से पहले ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए एक्ट 1935 को मानते थे।
    • भारतीय संविधान को बनाने के लिए संविधान सभा पर कुल अनुमानित लागत 1 करोड़ रुपये थी।

जानिए कैसे बना सकते है अपने बालों को खूबसूरत और सिल्की

जब हम हेयर वॉश करते हैं, तो बालों का पसीना और अनावश्यक ऑयल बाहर निकल जाता है। इसके लिए अपने शैंपू की किस्म पर भी विशेष ध्यान दें, क्योंकि कोई भी शैंपू इस्तेमाल करना या उसे बदलते रहना भी बालों की ग्रोथ के लिए हानिकारक हो सकता है। विंटर में स्ट्रांग शैंपू इस्तेमाल करने की अपेक्षा माइल्ड शैंपू ही इस्तेमाल करें। एक भ्रम के अनुसार अधिक झाग वाले शैंपू से बाल अच्छी तरह साफ हो जाते हैं, जिसके कारण अधिकांश महिलाएं इसी प्रकार के शैंपू इस्तेमाल करना चाहती हैं, परन्तु इससे बाल जल्दी ड्राई हो जाते हैं। इसलिए बिना कैमिकल वाले शैंपू का ही इस्तेमाल करें। आप चाहें तो हेयर्स को शैंपू करते समय इसका दो बार भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

ऐसा हो शैंपू

शैंपू की किस्म की बात करें, तो अधिक पी.एच. का शैंपू हेयर्स को नुक्सान पहुंचा सकता है। इसलिए 4 से 6 के बीच वाले पी.एच. शैंपू का ही प्रयोग करें। इससे जहां हेयर्स की नमी बरकरार रहेगी, वहीं ये अधिक ड्राई भी नहीं होंगे।

जैसे हेयर वैसा शैंपू

कर्ली हेयर के लिए सॉफ्टनैस शैंपू तथा स्ट्रेट ऑयली हेयर के रूटीन वॉश के लिए नैचुरल शैंपू का इस्तेमाल करना चाहिए। रूखे हेयर्स को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती, है, सो इसके लिए मॉयश्चराइजर युक्त शैंपू का ही इस्तेमाल करें। हेयर्स की चमक बरकरार रखने के लिए इन्हें कंडीशन करना न भूलें, परन्तु इस बात का ध्यान रखें कि इसे सिर की त्वचा पर न लगाएं।

नैचुरल हेयर ब्रिसल ब्रश करें इस्तेमाल

हेयर्स में नैचुरल ऑयल बरकरार रखने के लिए हमेशा नैचुरल ब्रिसल ब्रश का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इससे सिर की स्किन से ऑयल हेयर्स तक पहुंचता है और हेयर्स को पोषण मिलता है। इस बात का ध्यान रखें कि प्लास्टिक हेयर ब्रश के इस्तेमाल से बाल टूटते और बेजान बनते हैं। नैचुरल ब्रिसल ब्रश का यह फायदा भी है कि इससे सिबेशियस ग्लैंड्स में ऑयल उत्पन्न होता है। जब यह ऑयल और हेयर्स का पसीना मिलता है, तो एसिड मैंटल बनता है, जो एक प्रोटैक्टिव लेयर बनाता है, जिससे हेयर्स की नैचुरल तरीके से रक्षा होती है।

मौसम का असर

अक्सर देखा जाता है कि सर्दियों में महिलाएं तेल लगा लेती हैं, परन्तु जब हम घर से बाहर निकलते हैं, तो इनमें मिट्टी के कण अधिक फंस जाते हैं। ऐसे में शैंपू का इस्तेमाल भी बार-बार करना पड़ता है और ज़्यादा बार शैंपू इस्तेमाल करने से बाल अधिक रूखे हो जाते हैं। मायश्चराइजर ट्रीटमैंट कम से कम सप्ताह में एक बार कराने से इस समस्या से छुटकारा मिलता है।

बायोलॉजिकल प्रोसैस और बालों की हाइजीन

हेयर केयर एवं सिर की स्किन की देखभाल दोनों बातें ही एक-दूसरे के साथ जुड़ी हैं, क्योंकि हेयर्स की ग्रोथ त्वचा में से ही होती है। हेयर्स के जैविक भाग हेयर फोलिकल, हेयर रूट, सिबेशियस ग्लैंड्स त्वचा के अंदर ही होते हैं। यही कारण है कि हर मौसम में बालों के रखरखाव हेतु सिर की स्किन की सफाई नियमित रूप से करना बेहद ज़रूरी है।

मसाज करें

हेयर्स को जड़ से मज़बूत बनाने के लिए ऑयल बेहद ज़रूरी है। इससे हेयर्स को पोषण मिलता है। हफ्ते में 3 बार हेयर्स में ऑयल लगा कर अच्छी तरह से मसाज करें। इससे ये जड़ से मज़बूत होते हैं।

सर्दियों में डेंड्रफ की समस्या

डेंड्रफ की समस्या से बचने के लिए तेल को गुनगुना कर सिर पर लगाएं और बाद में तौलिए को गर्म पानी में भिगो कर निचोड़ने के बाद बालों में दस-पन्द्रह मिनट तक लपेट कर रखें।

संतुलित भोजन लें

बालों को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में प्रोटीन की मात्रा अधिक लें। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दूध आदि। ड्राई फूट्स और ओमेगा थ्री फैटी एसिड्स लेने से बाल स्ट्रांग एवं शाइनी बनते हैं। आयरन एवं आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों का भी सेवन करें। ये बालों का पोषण कर उन्हें जड़ से मज़बूत बनाते हैं। तली भुनी चीजों एवं मसालेदार भोजन से परहेज करें।

इन बातों का रखें ख्याल

  • कभी भी गीले बालों में रबड़ बैंड का इस्तेमाल न करें और रात के वक्त बालों में रोलर न लगाएं।
  • बाल धोने के लिए बहुत ज़्यादा गर्म पानी इस्तेमाल न करें। इसके इस्तेमाल से बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और ये जल्दी टूटने लगते हैं।

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दुनिया के 10 अजीबोगरीब रेस्टोरेंट

किसी भी रेस्टोरेंट की पहचान उसकी खास सर्विस या डिशेज से होती है। यहीं वजह है कि खाने के शौकीन लोगों की भीड़ इन रेस्टोरेंट्स में हर वक्त लगी रहती हैं। मगर दुनिया में कई ऐसे रेस्टोरेंट भी है, जो अपनी अजीबोगरीब थीम के कारण मशहूर है। यह अजीबोगरीब रेस्टोरेंट किसी अजूबे से कम नहीं हैं। इन रेस्टोरेंट्स में खाने के साथ-साथ ग्राहकों को मोहित करने वाली अनेकों प्रकार की कई अजीबोगरीब चीज़े देखने को मिलती है। आज हम आपको दुनिया के ऐसे ही 10 अजीबोगरीब रेस्टोरेंट्स के बारे में बताने जा रहे हैं।

कायाबुकिया टेवर्न, जापान

कायाबुकिया टेवर्न नाम का यह रेस्टोरेंट जापान की राजधानी टोक्यो में स्थित है। इस रेस्टोरेंट में दूर-दूर से लोग वेटर्स को देखने के लिए आते हैं, क्योंकि इस रेस्टोरेंट में खाना परोसने का काम कोई पुरुष या महिला नहीं करते हैं, बल्कि यह काम बंदरों द्वारा किया जाता है। इस रेस्टोरेंट के मालिक ने बंदरों को इस कदर तक तैयार किया हुआ है कि वह आप को आप के आर्डर अनुसार ही सही खाना लाकर देंगे साथ ही हाथ साफ़ करने के लिए तौलीया भी बंदर ही लाकर आप के हाथ में खुद देंगे। इन बंदरों के फायदा मालिक को इस रूप में है कि बंदरों के इन कामों के लिए ना तो उसे उन्हें सैलेरी देनी पड़ती है और लोग भी बंदरों के काम करने के तरीकों को देखने के लिए भारी संख्या में रेस्टोरेंट का रुख करते हैं। जिस से यह बंदर कमाई का भी एक बेहतरीन जरिया बने हुए हैं।

प्रीजन थीम रेस्टोरेंट, चीन

प्रीजन थीम रेस्टोरेंट चीन के तियाजीन शहर में स्थित है। यह एक ऐसा रेस्टोरेंट है, जिसका लुक एक जेल जैसा है। यहां आलिशान रूम के काउंटर पर नहीं, बल्कि सलाखों के पीछे टेबल पर खाना परोसा जाता है। जेल में बंद किसी कैदी की तरह लोग यहां सलाखों के बीच बैठकर खाना खाते हैं। रेस्टोरेंट स्टाफ कैदी और जेलर की ड्रेस में मेहमानवाजी करते हैं। आप लोग भी इस रेस्टोरेंट में बिना जुर्म किए जेल की हवा और टेस्टी फूड खा सकते हैं।

आइस रेस्टोरेंट, दुबई

इस रेस्तरां को पूरी तरह से बर्फ से बनाया गया है। यहाँ की हर चीज कुर्सी, टेबल, सजावट का सामान बर्फ से बना है। इस रेस्तरां को दुबई में गर्मियों से बचने के लिए बनाया गया है। दुबई की गर्मी से परेशान होने के बाद अक्सर लोग यहीं आते हैं। यहां आपको अंटार्कटिका जैसी ठंडक का एहसास होगा, क्योंकि यहाँ का तापमान हमेशा शून्य से नीचे ही रहता है। इस रेस्तरां में आने वाले हर व्यक्ति को एक जैकेट दी जाती है, जो कि रेस्तरां के अंदर की ठंड से बचने के लिए होती है। खास बात है कि यहां आपको खाने के लिए सिर्फ बर्फ से बनी चीजें ही मिलेगी।

न्यू लकी रेस्टोरेंट, भारत

न्यू लकी रेस्टोरेंट भारत के अहमदाबाद में स्थित है। यहां आने से पहले व्यक्ति को बहुत बार सोचना पड़ता है, क्योंकि यहां पर ग्राहकों को कब्रों के बीच खाना परोसा जाता है। इस रेस्तरां को एक पुरानी कब्र के ऊपर बनाया गया है। इस में कुल मिलाके 12 कब्रें है, फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं है कि यह कब्रें किनकी है। इस रेस्तरां के मालिक के अनुसार जब उन्हों ने इस रेस्टोरेंट को खोलने के बारे में विचार किया, तो उन्होंने कब्रों को वहां से हटाने की बजाय उनके आस पास ही कुर्सियों और मेज रख दिए। इसी कारण यह और भी आकर्षित लगने लगा और अब यहां हर रोज भारी संख्या में लोग बिना किसी भय के खाना खाने आते हैं। सुबह इस रेस्तरां के खुलते ही सबसे पहले इन कब्रों की साफ़ सफाई कर के इन के ऊपर फूल चढ़ाएं जाते हैं।

हार्ट अटैक ग्रिल रेस्टोरेंट, अमेरिका

हार्ट अटैक ग्रिल रेस्टोरेंट अमेरिका के लास वेगास में है। यहां के शेफ डॉक्टर की ड्रेस में होते है और महिला वेट्रेस नर्स की यूनिफॉर्म में खाना सर्व करती हैं। खासियत है कि यहां खाना खाने के लिए आपको भी अस्पताल की ड्रैस पहननी पड़ेगी। खाने में आपको लाइन फ्राइज, बायपास बर्गर और कोरोनेरी हॉट डॉग जैसी चीजें मिलेगी।

द मॉडर्न टॉयलेट रेस्टोरेंट, जापान

जापान के इस अजीबोगरीब रेस्टोरेंट ने तो सभी हदें ही पार कर दी है। इस रेस्तरां में सभी क्रियाएँ एक टॉयलेट के रूप में की जाती है। यहां बर्तनो की जगह टॉयलेट में काम आने वाली चीजें, जैसे फ़्लैश सीट, बात टब, मग आदि का प्रयोग किया जाता है। होटल के अंदरूनी भाग को भी एक टॉयलेट के रूप में सजाया गया है। यहां आने वाले ग्राहकों को टॉयलेट सीट पर ही बिठाया जाता है। उन्हें फ़्लैश सीट, बात टब, मग जैसी चीजों में ही खाने को दिया जाता है।

स्काई रेस्टोरेंट, बेल्जियम

अगर आपको आसमान में बैठकर कर खाने का मौका मिले, तो क्या आप यह मौका अपने हाथ से जाने देंगे। अगर नहीं तो आपको बता दें कि बेल्जियम का अकेला रेस्टोरेंट, जो हवा में लटका हुआ है। यहां क्रेन की मदद से 50 मीटर की ऊंचाई पर एक डाइनिंग टेबल लटकाई जाती है, जहां बैठकर लोग खाने के साथ-साथ दूर-दूर का नज़ारा भी लेते है।

द रोबोट रेस्टोरेंट, भारत

यह अनोखा रेस्टोरेंट भारत के तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में स्थित है। इस रेस्तरां में मुख्य काम सात रोबोट्स की टीम द्वारा किया जाता है। होटल के रिसेप्शन पर भी रोबोट्स ही आप का स्वागत करेंगे। यहां उपस्तिथ एक रोबोट की कीमत तकरीबन 5 लाख तक की है। होटल के अन्य कर्मचारियों को इन के साथ काम करने के लिए विशेष रूप से ट्रेनिंग भी दी जाती है। इस रेस्तरां के मालिक के अनुसार इन रोबोट्स को इस तरीके से बनाया गया है कि ग्राहक से आर्डर प्राप्त करने के बाद यह शेफ को देते हैं और फिर ग्राहक का सही आर्डर उनके टेबल तक पहुंचा देते हैं।

ओपाक्यू कैफे

ओपीक्यू कैफे नाम का यह अजीबोगरीब रेस्टोरेंट वेस्ट हॉलीवुड में है। यहां अंधेरे में खाना सर्व होता है। यहीं नहीं यहां के सभी वेटर्स भी नेत्रहीन हैं। हालांकि अंधेरे कमरे में खाना खाने में लोगों को एक अलग ही आनंद आता है। यही वजह है कि यहां काफी सारे लोग आते हैं।

कैट कैफे रेस्टोरेंट, जापान

कैट कैफे रेस्टोरेंट अनोखे अंदाज़ के लिए दुनिया भर में मशहूर है। आमतौर पर सभी प्रसिद्ध देशों में कैट कैफे खुले हुए हैं। जापान में भी एक ऐसा ही रेस्टोरेंट है। इस रेस्टोरेंट में अलग-अलग नस्ल की खूबसूरत बिल्लियां मौज़ूद है, जो कि कैफ़े में आए हर एक व्यक्ति का अलग तरीकें से स्वागत करती हैं और उनके लिए मनोरंजन का माध्यम भी बनती हैं। इन बिल्लियों को एक विशेष ट्रेनिंग दी गई है, जिस से वह किसी भी व्यक्ति को नुक्सान न पहुंचाएं। साथ ही कैफे के अन्य कर्मचारियों को भी बताया गया है कि बिल्लियों से कैसे व्यवहार करना है। इन बिल्लियों की विशेष बात यह है कि ग्राहक के साथ-साथ यह खुद भी कॉफी पीती हैं।

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दुनिया की सबसे दिलचस्प इमारतें!!!!

दुनिया में आपने बहुत-सी खूबसूरत इमारतें देखी होगी, लेकिन दुनिया में ऐसी दिलचस्प इमारतें भी है, जिनकी बनावट और आकृति सबको हैरत में डाल देती हैं. इन इमारतों को देखकर कोई भी इन्हें इमारत नहीं कहेगा. लेकिन ऐसी अजीबोगरीब इमारतें दुनिया के हर कोने में बनी हैं. तो आइए जानें दुनिया की सबसे दिलचस्प इमारतें, जिनकी बनावट और आकृति है सबसे खास!!!!

यह इमारत पोलैंड शहर के एक छोटे से गांव स्जिमबर्ग में बनी है. इसकी बनावट और आकृति ऐसी है कि दूर से यह इमारत उल्‍टी दिखाई पड़ती है. पोलैंड का यह उल्टा घर 2007 में मनाया गया है. इस अजीबोगरीब इमारत का‍ डिजाइन जैपिएव्सिकी ने तैयार किया था.

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यह अजीबोगरीब इमारत चीन के कुनमिंग शहर में बनी हुई है. इसका आकार एक मोबाइल फोन जैसा है. दिलचस्प बात यह है कि इस इमारत की खिड़कियों की आकृति ऐसी है कि दूर से देखने पर यह फ़ोन के बटन और स्‍क्रीन जैसी नज़र आती है.

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जापान के ओहियो शहर में बनी इस इमारत का‍ डिजाइन 1997 में अमेरिकी मैन्‍युफैक्‍चरर ने बनाया था. यह ईमारत लॉन्‍गबर्जर कंपनी का ऑफिस है. इस इमारत को देखने के लिए लोग यहाँ आते रहते हैं.

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चाय के कप जैसी बालकनी वाला यह घर जापान में है. इस इमारत को मशहूर टी कंपनी नीमी ने प्रमोशन के लिए डिजाइन करवाया है.

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घोसले जैसे प्रतीत यह स्टेडियम 2008 में चीन में आयोजित ओलंपिक खेलों के लिए बनाया गया था. यह स्टेडियम चीन का सबसे आकर्षक पर्यटन स्थल है. इस स्टेडियम का डिजाइन चीन के आर्किटेक्ट ली शिंगांग, जैक्‍यूज हेरजोंग और पाइरेर ने मिलकर किया था.

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भारत के 5 सबसे पवित्र सरोवर

आज भी प्राचीन काल की कई ऐसी निशानियां मौज़ूद हैं, जिनका संबंध देवी-देवताओं या ऋषि-मुनियों से माना जाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार मंदिरों के साथ-साथ कई पवित्र सरोवर और नदियां भी तीर्थस्थलों में शामिल हैं। ‘सरोवर’ का अर्थ तालाब, कुंड या ताल नहीं होता, सरोवर को आप झील भी कह सकते हैं। भारत में सैकड़ों झीलें और सरोवर हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 5 का ही अधिक धार्मिक महत्व है। इन पवित्र सरोवरों के बारे में कहते हैं कि इनमें स्नान करने से पाप से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानते हैं, भारत के 5 सबसे पवित्र सरोवर।

कैलाश मानसरोवर

कैलाश मानसरोवर हिमालय के केंद्र में है। यह समुद्र तल से लगभग 4,556 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। संस्कृत शब्द ‘मानसरोवर’, मानस तथा सरोवर को मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है- ‘मन का सरोवर’। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह सरोवर ब्रह्माजी मन से उत्पन्न हुआ था। इस सरोवर के पास ही कैलाश पर्वत है, जो भगवान शिव का निवास स्‍थान माना जाता है। कहा जाता है कि यहीं पर माता पार्वती स्नान करती हैं। यहां देवी सती के शरीर का दायां हाथ गिरा था, इसलिए यहां एक पाषाण शिला को उनका रूप मानकर पूजा जाता है। बौद्ध धर्म में भी इसे पवित्र माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि रानी माया को भगवान बुद्ध की पहचान यहीं हुई थी। जैन धर्म तथा तिब्बत के स्थानीय बोनपा लोग भी इसे पवित्र मानते हैं।

नारायण सरोवर, गुजरात

नारायण सरोवर गुजरात के कच्छ जिले के लखपत तहसील में स्थित है। ‘नारायण सरोवर’ का अर्थ है- ‘विष्णु का सरोवर’। मान्यता है कि इस सरोवर में स्वयं भगवान विष्णु ने स्नान किया था। कई पुराणों और ग्रंथों में इस सरोवर के महत्व का वर्णन पाया जाता है। यहां सिंधु नदी का सागर से संगम होता है। पवित्र नारायण सरोवर के तट पर भगवान आदिनारायण का प्राचीन और भव्य मंदिर है। नारायण सरोवर में कार्तिक पूर्णिमा से 3 दिन का भव्य मेला आयोजित होता है। नारायण सरोवर से 4 किमी दूर कोटेश्वर शिव मंदिर है। नारायण सरोवर में श्रद्धालु अपने पितरों का श्राद्ध भी करते हैं। कहा जाता है कि इस सरोवर में स्‍नान करने से पाप से मुक्‍ति मिलती है।

पुष्कर सरोवर, अजमेर, राजस्थान

पुष्कर झील राजस्थान के अजमेर शहर से 14 किलोमीटर दूर है। इस झील का संबंध भगवान ब्रह्माजी से है। यह कई प्राचीन ऋषियों की तपभूमि भी रही है। कहा जाता है कि ब्रह्माजी ने यहां आकर यज्ञ किया था। ब्रह्माजी ने पुष्कर में कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णमासी तक यज्ञ किया था, जिसकी स्मृति में अनादिकाल से यहां कार्तिक मेला लगता आ रहा है। इस सरोवर को लेकर एक यह मान्यता भी प्रचलित है कि भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध भी यहीं पर किया था। कहा जाता है कि ब्रह्माजी के हाथ से यहीं पर कमल पुष्प गिरने से जल प्रस्फुटित हुआ, जिससे इस झील का उद्भव हुआ। झील के चारों ओर 52 घाट व अनेक मंदिर बने हैं। इनमें गऊघाट, वराहघाट, ब्रह्मघाट, जयपुर घाट प्रमुख हैं। पुष्कर सरोवर 3 हैं- ज्येष्ठ (प्रधान) पुष्कर, मध्य (बूढ़ा) पुष्कर और कनिष्ठ पुष्कर। ज्येष्ठ पुष्कर के देवता ब्रह्माजी, मध्य पुष्कर के देवता भगवान विष्णु और कनिष्ठ पुष्कर के देवता भगवान रुद्र हैं।

पंपा सरोवर, मैसूर

मैसूर के पास स्थित पंपा सरोवर एक ऐतिहासिक स्थल है। कर्नाटक में बैल्‍लारी जिले के हास्‍पेट से हम्‍पी जाकर, तुंगभद्रा नदी पार करते हैं, तो हनुमनहल्‍ली गांव की ओर जाते हुए पंपा सरोवर आता है। ऐसी मान्‍यता है कि इस सरोवर में स्‍नान करने से भगवान सारे पाप माफ कर देते है। पंपा सरोवर के निकट पश्चिम में पर्वत के ऊपर कई जीर्ण-शीर्ण मंदिर दिखाई पड़ते हैं। यहीं पर एक पर्वत है, जहां एक गुफा है, जिससे शबरी की गुफा कहा जाता है। कहते हैं इसी गुफा में शबरी ने भगवान राम को बेर खिलाएं थें। इसी के निकट शबरी के गुरु मतंग ऋषि के नाम पर प्रसिद्ध ‘मतंगवन’ था।

बिंदु सरोवर, सिद्धपुर, गुजरात

बिंदु सरोवर अहमदाबाद से उत्तर में 130 किमी दूरी पर स्थित है। यहां कपिलजी के पिता कर्मद ऋषि का आश्रम था और इस स्थान पर कर्मद ऋषि ने 10,000 वर्ष तक तप किया था। इस सरोवर का उल्लेख रामायण और महाभारत में मिलता है। कपिल मुनि सांख्य दर्शन के प्रणेता और भगवान विष्णु के अवतार हैं। भगवान परशुराम ने अपनी माता का श्राद्ध यहीं सिद्धपुर में बिंदु सरोवर के तट पर किया था। इस स्थल को गया की तरह दर्जा प्राप्त है। इसे मातृ मोक्ष स्थल भी कहा जाता है।

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शीर्ष 10 सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा की खोजें

इतिहास गवाह है कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कई युगांतकारी खोजें हुई हैं, जिन्होंने मनुष्य जीवन को पूरी तरह से बदल के रख दिया. आग की खोज हो या पहिये का अविष्कार. इन जीवनोपयोगी खोजों ने जहाँ मनुष्य के जीवन को सरल बनाया, वहीँ चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ ऐसी क्रांतिकारी खोजें हुईं, जिन्होंने मानव के औसत जीवन काल में अचानक कई वर्षों की वृद्धि कर दी. उदाहरण के तौर पर आज हम कुछ ऐसी ही शीर्ष 10 चिकित्सा की खोजों के बारे में बात करेंगे, जिन्होंने मानव स्वास्थ्य और जीवन को बेहतर बनाने में अत्यधिक मदद की.

अनेस्थेटिक (Anesthetic)

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अगर आपने नौसेना इतिहास के किसी संग्रहालय का दौरा किया है, तो आपको पता होगा कि पहले सर्जिकल ऑपरेशन कैसे होते थे. रोगी ऑपरेशन के दर्द को सहने के लिए लकड़ी के दुकड़े को मुंह में दबाकर काटता था. 19वीं सदी के आखिर में अनेस्थेटिक की खोज हुई, जिसने रोगी को ऑपरेशन के वक्त होने वाले दर्द को खत्म कर दिया.

जन्म पर नियंत्रण

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एक और ईजाद 19वीं सदी में हुई, वो थी जन्म पर नियंत्रण. ब्रिटेन में 1870 में जन्म दर 35.5 प्रति 1000 लोगों की थी और वर्ष 1900 में यह जन्म दर 29 प्रति 1000 हो गई. इसकी वजह सेक्स के बारे में अच्छी शिक्षा थी. बाद में यह कैंप अमेरिका में चला और वहां भी इसके नतीजे अच्छे निकले.

एम.एम.आर (MMR)

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एम्.एम्.आर. के ईजाद से खरा के मरीज़ों में काफी गिरावट आयी. एम्एम्आर टीका खसरा, कंठमाला और रूबेला के खिलाफ एक प्रतिरक्षण टीका है. इस टीके के माध्यम से खसरा बीमारी से पीड़ित मरीज़ को ठीक किया जाता है. इसे पहली बार मौरिस हिलमेंन ने विकसित किया था.

एक्स-रे (X-RAY)

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एक्स-रे एक चिकित्सा प्रक्रिया है, जो आज-कल बहुत आम है. जिसका अविष्कार अचानक से हुआ था. विल्हेल्म कोनार्ड ने 8 नवंबर 1895 में इसकी खोज की थी. उसने सबसे पहले इसका परीक्षण अपनी पत्नी पर किया था और जिसके नतीजे आज के एक्सरों से मिलते-जुलते थे.

इंसुलिन (Insulin)

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इंसुलिन की ईजाद से मधुमेह के मरीज़ों को बहुत राहत मिली. अब मधुमेह के मरीज़ अपनी शुगर को देख सकते थे. इसको सबसे पहले 1921 में टोरंटो विश्वविद्यालय के विज्ञानी ने आविष्कार किया था और बाद में उसको इस आविष्कार पर नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया.

आई.वी.ऍफ़ (IVF)

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जन्म नियंत्रण अनचाहे गर्भधारण को सीमित करने के लिए बहुत बड़ी सफलता थी. इस अविष्कार को आलोचकों का भी सामना करना पड़ा था. यह अविष्कार न सिर्फ अनचाहे गर्भ को सीमित करता था, जिनके बच्चा होने की सम्भावना नहीं होती थी, उनको भी बच्चा पैदा करने के लिए सहायता करती थी.

रोगाणु सिद्धांत (Germ Theory)

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रोगाणु सिद्धांत की खोज चिकित्सा विज्ञान में इतनी बड़ी सफलता थी कि इसने चिकित्सक प्रकिया को पूरी तरह से बदल के रख दिया था. रोगाणु सिधांत की खोज वर्ष 1854 में हुई, जब लन्दन में हैजे का प्रकोप था और इस खोज ने कई हैजा मरीज़ों को ठीक किया था और उनकी जान बचाई थी.

पेनिसिलिन (Penicillin)

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पेनिसिलिन की खोज एक अभूतपूर्व खोज थी. पेनिसिलिन की खोज एलेग्जेंडर फ्लेमिंग द्वारा एक 1928 में एक अप्रत्याशित घटना से हुई. अब यह कई तरह के वायरस और संक्रमण के लिये इस्तेमाल होती है. पेनिसिलिन पहली एंटीबायोटिक थी और अब भी 60 वर्ष बाद इसका कई तरह की बीमारियों से लड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

चेचक टीकाकरण (Smallpox Vaccination)

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पहले चेचक एक बहुत भयंकर बीमारी थी, जो लाखों लोगों की जान ले रही थी. चेचक टीकाकरण की खोज के बाद चेचक को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया था. चेचक बीमारी से हज़ारों की तादाद में कस्बे में बसने वाले लोग मर जाते थे और ये बीमारी एक कस्बे से दुसरे कस्बे तक फैलती रहती थी.

डी.एन.ऐ (DNA)

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सभी खोजों में सबसे ऊपर है डीएनऐ की खोज. जिसकी वजह से पता लग पाया कि हमारा शरीर दूसरों से अलग कैसे है ? इसने आईवीऍफ़, फोर्सन्सिक और अन्य क्षेत्रों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसकी खोज फ़्रांसिक और जेम्स वाटसन ने की थी, जिन्होंने पहला डीऍनए का मॉडल पेश किया था.

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भारत में एक ऐसा मंदिर, जहां बारिश होने से पहले ही मिल जाते है संकेत…

भारत में हर धर्म हर जाति के अलग-अलग भगवान होते हैं और हर भगवान के अलग-अलग मंदिर बने होते हैं. सब की अपनी अपनी अलग विशेषताएं होती है. जैसे कि मंदिर में मुराद मांगने से आपकी सभी परेशानियां दूर हो जाएगी, इस मंदिर में प्रसाद चढ़ाने से आपका स्वास्थ्य ठीक हो जाएगा, ऐसी अनेक कहानियाँ है. लेकिन आज हम जिस मंदिर की बात करने का रहे है, उसकी अलग ही विशेषता है. भारत में एक ऐसा मंदिर है, जिस में 7 दिन पहले ही बारिश होने के संकेत मिल जाते हैं.
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जी हां, यह सच है और यह ऐसा मंदिर उत्तर प्रदेश के कानपुर में जनपद के भीतरगांव विकासखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर की दूरी पर बेंहटा गांव में स्थित है. इस मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ जी की पूजा की जाती है और यहां के स्थानीय लोग इन्हें ठाकुर बाबा जी के नाम से बुलाते हैं. इस मंदिर की मुख्य विशेषता यह है कि इस मंदिर में बारिश होने के 7 दिन पहले ही हल्की-हल्की बूंदा-बांदी होनी शुरु हो जाती है.

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पुरातत्व विभाग (Department of Archaeology) भी इस रहस्य को अभी तक सुलझा नही पाएं है कि यह मौसमी बदलाव के कारण होता है या कोई चमत्कार है. इस मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ जी की मूर्ति के अलावा सूर्य भगवान और पद्मनाभन की भी मूर्ति भी रखी हुई है.
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर के ऊपर मानसूनी पत्थर लगे हुए हैं. जिनसे निकलने वाली बूंदे बिलकुल बारिश की बूंदों की तरह ही होती हैं, जिसके कारण ही यहां हल्की-हल्की बूंदा-बांदी होती है. जिससे वहां के स्थानीय लोग समझ जाते है की बारिश होने वाली है और खुद को सुरक्षित करते है. लेकिन आज तक यह रहस्य ही बना हुआ है.

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