आज शारदीय नवरात्र का दूसरा दिन है। आज मां दुर्गा के दूसरे रूप, मां ब्रह्मचारिणी, की पूजा होती है।कल हमने मां शैलपुत्री की पूजा की थी। आज की देवी तपस्या और धैर्य की मिसाल हैं। उनकी कहानी सिखाती है कि मेहनत और सब्र का फल जरूर मिलता है।
आज की तारीख और तिथि
इस साल दूसरा नवरात्र सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को पड़ रहा है। यह दिन द्वितीया तिथि का है। नवरात्र का समापन 20 अक्टूबर को दशहरे के साथ होगा। आज घटस्थापना नहीं होती। वह कल हो चुकी है। आज बस कलश के आगे दीया जलाना है और मां की पूजा करनी है।

ध्यान दें: द्वितीया तिथि का सही समय हर शहर में थोड़ा अलग होता है। पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग में एक बार देख लें।
कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी?
“ब्रह्म” का मतलब है तप। “चारिणी” का मतलब है आचरण करने वाली। यानी तप का आचरण करने वाली देवी। मां ब्रह्मचारिणी का रूप बहुत सादा और शांत है। वे यह नहीं दिखातीं कि ताकत कैसे दिखाई जाए। वे यह बताती हैं कि ताकत कैसे बनाई जाती है।
मां का स्वरूप
| अंग | कैसा है |
|---|---|
| वस्त्र | सफेद रंग की साड़ी |
| दाहिना हाथ | जप की माला |
| बायां हाथ | कमंडल |
| वाहन | कोई वाहन नहीं, मां पैदल चलती हैं |
| भाव | शांत, तेजस्वी और गंभीर |
मां के नंगे पांव यह दिखाते हैं कि तप में सुख-सुविधा की जगह नहीं होती।
मां ब्रह्मचारिणी की कथा
कथा बहुत पुरानी है, लेकिन आज भी दिल को छू जाती है।
जन्म और नारद जी की बात
मां पिछले जन्म में सती थीं। इस जन्म में वे पर्वतराज हिमालय के घर पैदा हुईं। जब वे बड़ी हुईं, तो देवर्षि नारद उनसे मिलने आए। नारद जी ने कहा, “बेटी, तुम्हारा विवाह भगवान शिव से होगा। लेकिन उन्हें पाना आसान नहीं है। इसके लिए कठिन तपस्या करनी पड़ेगी।” मां ने यह बात मन में बिठा ली। उन्होंने तय कर लिया कि शिव जी को ही पति बनाना है।
कठिन तपस्या
मां ने घर छोड़ दिया और तप में लग गईं। कथा के अनुसार:
- पहले हजार साल उन्होंने सिर्फ फल-फूल खाए।
- फिर सौ साल तक सिर्फ साग-पत्ते खाए।
- कई दिन उन्होंने खुले आसमान के नीचे बिताए। धूप, बारिश और ठंड सब सही।
- फिर उन्होंने सूखे बेलपत्र खाए।
- आखिर में उन्होंने वह भी छोड़ दिया। बिना अन्न-जल के तप किया।
पत्ते तक छोड़ देने के कारण उनका एक नाम अपर्णा पड़ा। “अपर्णा” का मतलब है, जिसने पत्ता भी न खाया।
तपस्या का फल
तप के कारण मां का शरीर बहुत कमजोर हो गया। तब देवताओं और ऋषियों ने उनकी तपस्या की प्रशंसा की। आकाशवाणी हुई कि “तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी होगी।” इसके बाद भगवान शिव ने उन्हें अपनाया। मां ब्रह्मचारिणी की यह कथा बताती है कि सच्ची लगन कभी बेकार नहीं जाती।
आज इनकी पूजा क्यों होती है?
माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से ये बातें मिलती हैं:
- धैर्य: मुश्किल वक्त में टिके रहने की ताकत।
- संयम: अपने मन और इच्छाओं पर काबू।
- ज्ञान: पढ़ाई और समझ में बढ़ोतरी।
- आत्मविश्वास: अपने लक्ष्य पर भरोसा।
इसीलिए विद्यार्थियों और मेहनत करने वालों के लिए यह दिन खास माना जाता है। मान्यता है कि मां की साधना से स्वाधिष्ठान चक्र मजबूत होता है। इस बात को लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार मानते हैं।
पूजा की सामग्री
| सामग्री | किसलिए |
|---|---|
| मां की तस्वीर या मूर्ति | पूजा के लिए |
| रोली, अक्षत (चावल), चंदन | तिलक और पूजा के लिए |
| सफेद या पीले फूल | मां को चढ़ाने के लिए |
| घी का दीपक | आरती के लिए |
| धूप और अगरबत्ती | वातावरण शुद्ध करने के लिए |
| गंगाजल | शुद्धि के लिए |
| रुद्राक्ष या तुलसी की माला | मंत्र जाप के लिए |
| चीनी, मिश्री और पंचामृत | भोग के लिए |
पूजा की आसान विधि
पहला कदम: स्नान करें
सुबह जल्दी उठें। नहाकर साफ कपड़े पहनें। सफेद या हल्के रंग के कपड़े अच्छे माने जाते हैं।
दूसरा कदम: जगह साफ करें
पूजा की जगह पर गंगाजल छिड़कें। कलश के सामने मां की तस्वीर रखें।
तीसरा कदम: संकल्प लें
हाथ में थोड़ा जल और चावल लें। मन में कहें कि आप श्रद्धा से मां की पूजा कर रहे हैं।
चौथा कदम: मां का ध्यान करें
आंखें बंद करें। मां के शांत और तेजस्वी रूप को याद करें। ध्यान मंत्र पढ़ें।
पांचवां कदम: पूजन करें
मां को रोली, चंदन और अक्षत चढ़ाएं। फिर फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप दिखाएं।
छठा कदम: भोग लगाएं
मां को चीनी, मिश्री या पंचामृत का भोग लगाएं।
सातवां कदम: मंत्र जाप
माला लेकर बीज मंत्र का जाप करें। 108 बार कर सकें तो बहुत अच्छा। न कर सकें तो जितना हो सके उतना करें।
आठवां कदम: आरती करें
अंत में आरती उतारें। फिर प्रसाद सबको बांट दें। साथ ही घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।
मां ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएं
मां को चीनी और मिश्री बहुत प्रिय मानी जाती हैं। मान्यता है कि इस भोग से लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।
| भोग | खास बात |
|---|---|
| चीनी | सबसे प्रिय भोग माना जाता है |
| मिश्री | साफ कटोरी में रखकर चढ़ाएं |
| पंचामृत | दूध, दही, घी, शहद और चीनी से बनता है |
| दूध से बनी मिठाई | खीर या सफेद बर्फी |
| फल | केला या सेब |
ध्यान रहे: भोग बनाते समय साफ-सफाई रखें। लहसुन-प्याज का इस्तेमाल न करें। भोग का कुछ हिस्सा घर के बड़ों को जरूर दें।
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
बीज मंत्र
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
ध्यान मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
प्रार्थना मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मंत्र शुद्ध उच्चारण से पढ़ें। न आए तो धीरे-धीरे सीख लें। भाव सबसे जरूरी है।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥
ब्रह्म मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा॥
जय गायत्री वेद की माता।
जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता॥
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए॥
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने॥
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर॥
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना॥
ब्रह्मचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम॥
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी॥
क्या करें और क्या न करें
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| सुबह जल्दी उठकर पूजा करें | पूजा में जल्दबाजी न करें |
| सफेद या हल्के कपड़े पहनें | भड़कीले या काले कपड़ों से बचें |
| शांत मन से मंत्र जाप करें | गुस्सा और बहस न करें |
| बड़ों का सम्मान करें | किसी का दिल न दुखाएं |
| सात्विक भोजन करें | लहसुन-प्याज और मांसाहार न खाएं |
| रोज कलश के आगे दीया जलाएं | कलश की जगह बार-बार न बदलें |
| जरूरतमंद की मदद करें | झूठ और बुरे शब्दों से बचें |
विद्यार्थियों के लिए खास बातें
अगर आप पढ़ाई कर रहे हैं, तो आज का दिन आपके लिए खास है।
- सुबह मां के आगे दीया जलाएं।
- पढ़ाई शुरू करने से पहले दो मिनट शांत बैठें।
- आज मोबाइल कम चलाएं।
- अपना लक्ष्य कागज पर लिखें।
- रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ने का वादा करें।
मां की कथा यही सिखाती है। एक दिन की मेहनत से नहीं, रोज की लगन से बात बनती है।
व्रत रखने वालों के लिए सुझाव
- दिन भर में फल, दूध और मेवे लेते रहें।
- खूब पानी पिएं।
- सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करें।
- ज्यादा तला-भुना न खाएं।
- तबीयत ठीक न हो, तो डॉक्टर से पूछकर ही व्रत रखें। अपनी सेहत भी जरूरी है।
इस कथा से हम क्या सीखें?
मां ब्रह्मचारिणी की कहानी सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है। उसमें जिंदगी का पाठ छिपा है।
- लगन रखें: लक्ष्य बड़ा हो, तो रास्ता लंबा होगा।
- धैर्य रखें: नतीजे तुरंत नहीं आते।
- हार न मानें: मां ने हजारों साल तप किया, फिर भी डटी रहीं।
- सादगी अपनाएं: असली ताकत दिखावे में नहीं, मन की मजबूती में है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. नवरात्र के दूसरे दिन किसकी पूजा होती है?
मां ब्रह्मचारिणी की।
2. मां को कौन सा भोग पसंद है?
चीनी, मिश्री और पंचामृत।
3. मां ब्रह्मचारिणी का वाहन क्या है?
मां का कोई वाहन नहीं है। वे पैदल चलती हुई दिखाई जाती हैं।
4. दूसरे दिन कौन सा रंग पहनना चाहिए?
सफेद रंग शुभ माना जाता है। क्षेत्र और पंचांग के अनुसार कुछ जगह अलग रंग भी बताए जाते हैं। आप अपनी परंपरा के अनुसार चलें।
5. क्या घर में अकेले पूजा की जा सकती है?
बिल्कुल। मां श्रद्धा देखती हैं, भीड़ नहीं।
नवरात्र का दूसरा दिन हमें ठहरना सिखाता है। जल्दबाजी की दुनिया में मां कहती हैं कि सब्र रखो और मेहनत करते रहो। आज थोड़ा समय अपने लिए निकालें। मां के आगे दीया जलाएं। अपने मन की बात उनसे कह दें। मां ब्रह्मचारिणी आपको ज्ञान, धैर्य और हिम्मत दें। आपकी हर मेहनत सफल हो।
जय माता दी!

