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	<title>लाइफ Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>विजयादशमी : दशानन रावण के जीवन से सीखने योग्य बातें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 05:27:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आज विजयादशमी है। राम ने रावण को मारकर धरती को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। रावण अधर्म का प्रतीक था, पापी था, लेकिन ज्ञानी भी था। जिस तरह हम भगवान राम के जीवन की घटनाओं से सीखते हैं कि हमें अपनी जिंदगी में क्या करना चाहिए, वैसे ही रावण का जीवन सिखाता है कि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>आज विजयादशमी है। राम ने रावण को मारकर धरती को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। रावण अधर्म का प्रतीक था, पापी था, लेकिन ज्ञानी भी था। जिस तरह हम भगवान राम के जीवन की घटनाओं से सीखते हैं कि हमें अपनी जिंदगी में क्या करना चाहिए, वैसे ही रावण का जीवन सिखाता है कि हमें क्या-क्या नहीं करना चाहिए।</p>
<p>तो आज दशानन रावण के जीवन की 5 कहानियों से सीखें कि क्या गलतियां हमें नहीं करनी चाहिए।</p>
<h2>मन की शांति सबसे बड़ा सुख है</h2>
<p>रावण का मन शांत नहीं रहता था। संतुष्टि का भाव उसमें था ही नहीं। तीनों लोकों को जीतने के बाद भी रावण के मन में एक अशांति थी कि इतना शक्तिशाली होने के बाद भी कोई उसकी पूजा नहीं करता। नतीजतन उसने ऋषि-मुनियों को मारना शुरू कर दिया।</p>
<p>सारी दुनिया जीतने के बाद भी मन में एक असंतुष्टि थी कि लोग उसकी पूजा क्यों नहीं करते। जब रावण के अत्याचार बढ़ने लगे तो ऋषियों ने तप शुरू किए। यज्ञ और ज्यादा होने लगे। यज्ञ होने लगे तो रावण ने अपने अत्याचार और बढ़ा दिए। दुनियाभर में रावण का आतंक हो गया।</p>
<p>पूरी धरती परेशान हो गई। तब भगवान को उसे मारने के लिए अवतार लेना पड़ा। ये असंतुष्टि उसे पापके रास्ते पर ले गई और उसे अंतत: इसी असंतुष्टि के कारण मरना पड़ा। इसलिए हमेशा मन में संतुष्टि का भाव रखें। जो हमारे पास है, उसे स्वीकार करें।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-29307 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?resize=512%2C336&#038;ssl=1" alt="" width="512" height="336" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?w=512&amp;ssl=1 512w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?resize=300%2C197&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 512px) 100vw, 512px" /></p>
<h2>बिना किसी की शक्ति का अनुमान किए चुनौती ना दें</h2>
<p>रावण की नजर में सिर्फ वो खुद ही महान योद्धा था। वो हर किसी को युद्ध की चुनौती देता रहता था। ऐसे ही एक बार उसे वानरों के राज किष्किंधा के बारे में पता चला। वहां का राजा बाली काफी शक्तिशाली है ऐसा उसे पता चला। रावण ने बिना किसी विलंब के किष्किंधा का रूख किया।</p>
<p>रावण ने बाली को ललकारा, उस समय बाली अपने महल में नहीं था। उसका छोटा भाई सुग्रीव मौजूद था। सुग्रीव ने रावण से पूछा कि तुम कौन हो और क्यों बाली को पुकार रहे हो तो रावण ने जवाब दिया कि मैं बाली से युद्ध करना चाहता हूं या तो वो मुझसे युद्ध करे या फिर अपनी हार स्वीकार कर मेरी दासता स्वीकार करे।</p>
<p>सुग्रीव को रावण की इस बात पर हंसी आ गई। उसने कहा- महाराज बाली अभी संध्यापूजन के लिए समुद्र तट पर गए हैं।<br />
कुछ ही देर में वो यहां चार समद्रों की परिक्रमा करके लौटेंगे। तब तुम्हारी इच्छा वैसे ही पूरी हो जाएगी।</p>
<p>रावण से रहा नहीं गया। उसने जैसे ही सुना कि बाली अभी पूजा करने समुद्र तट पर गया है, वो समुद्र किनारे पहुंच गया। बाली उस समय सूर्य को अर्घ्य दे रहा था, रावण ने पीछे से वार करने की कोशिश की, लेकिन बाली ने उसे पकड़ कर अपनी बाजू में दबा लिया। रावण छूटने की कोशिश करता रहा, लेकिन नहीं छूट पाया।</p>
<p>बाली ने चार समुद्र की परिक्रमा उसे अपनी कांख में दबाकर की। तब तक रावण को अपनी गलती का अहसास हो गया था कि उसने बिना बाली की ताकत का अंदाजा लगाए उस पर हमला करने की गलती कर दी।</p>
<p>जैसे ही बाली ने उसे छोड़कर पूछा कि बता तू क्या चाहता है, तो युद्ध करने की इच्छा से आए रावण ने बाली को मित्रता का प्रस्ताव दिया। रावण की ये गलती सिखाती है कि किसी की ताकत और कमजोरी को समझे बिना उसे चुनौती नहीं देनी चाहिए। इससे हमारी हार ही होती है।</p>
<h2>अगर सही सलाह मिले तो उसे स्वीकार करें</h2>
<p>वाल्मीकि रामायण का एक प्रसंग है। जब राम से शादी करने की जिद कर रही शूर्पणखा के नाक लक्ष्मण ने काट दिए तो वो अपने भाई रावण के पास पहुंची। उसने रावण को बताया कि उसके राज्य में कोई संन्यासी है, जो उसके लिए घातक हो सकता है। रावण तुरंत अपने रथ पर बैठकर निकल गया। वो सीधा अपने मामा मारिच के पास पहुंचा।</p>
<p>उसने मारिच से कहा कि उसके राज्य में कोई दो संन्यासी घुस आए हैं, उन्हें मारना है। मारिच एक बार पहले राम से युद्ध कर चुका था, राम ने घास के तिनके को तीर बनाकर छोड़ा &#8216; और मारिच समुद्र पार जाकर गिरा था। मारिच ने रावण को समझाया कि राम से युद्ध करना उसके हित में नहीं है।</p>
<p>वो लौट जाए। रावण मान गया। वो फिर लौटकर अपने महल में आ गया। शूर्पणखा को जब पता चला कि रावण ने राम से बदला लेने का विचार त्याग दिया है तो उसने फिर जाकर रावण को बोलै कि वन में जो दो संन्यासी हैं, उनके साथ एक बड़ी सुंदर सी स्त्री भी है, जिसे रावण के पास होना चाहिए क्योंकि उसके जैसी कोई और सुंदर महिला संसार में नहीं है।</p>
<p>सीता की सुंदरता के बारे में सुनकर रावण ने सीता के हरण की योजना बनाई। वो फिर मारिच के पास पहुंचा। मारिच ने उसे फिर वही सलाह दी कि राम कोई सामान्य संन्यासी नहीं है, अवतारी पुरुष हैं।</p>
<p>उनसे दुश्मनी ना लें, लेकिन इस बार रावण नहीं माना और मारिच से कहा कि अगर वो सीता के हरण में उसकी सहायता नहीं करेगा तो उसे मार दिया जाएगा। मारिच ने सोचा, रावण के हाथ से मरने से बेहतर है, राम के हाथों मारा जाऊं। फिर मारिच ने स्वर्ण मृग बनने की योजना बनाई।</p>
<p>ये सीता हरण ही रावण के पूरे वंश का नाश का कारण बन गया। इस पूरे प्रसंग से सीख सकते हैं कि अगर कोई सही सलाह मिले तो उसे मानें, अपनी जिद और लालच में उस सलाह को ना ठुकराएं। ये आपके लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता है।</p>
<h2>रिश्ते अधिकार से नहीं चलते, समर्पण से टिकते हैं</h2>
<p>वाल्मीकि रामायण कहती है, रावण के पास पुष्पक विमान तो था ही, जो उसने अपने भाई कुबेर से छीना था। इसके साथ ही रावण के पास एक दिव्य रथ भी था। रावण ने तीनों लोकों को इसी रथ पर बैठकर जीता था।</p>
<p>रावण जहां भी जाता वहां से राजकूमारियों, रानियों और अन्य सुंदर औरतों को उठाकर अपने महल में ले आता था। रावण के महल में करीब 10 हजार ऐसी औरतें थीं, जिन्हें वो अलग-अलग राज्यों से अपहरण करके लाया था।</p>
<p>रावण एक बार ऐसे ही लंका में सैंकडों महिलाओं को जीत कर ले आया। तब विभीषण ने रावण को बताया कि तुम अपने बल के अभिमान में कितनी औरतों को उनके पति और पिता को मार कर उठा लाए। तुम्हारे इन्हीं पापकर्मों का परिणाम हमारे परिवार को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p>रावण ने पूछा &#8211; ऐसा क्या हो गया जो तुम मुझसे इस तरह की बातें कर रहे हो। विभीषण ने जवाब दिया &#8211; तुम विश्वविजय के लिए निकले थे, दूसरे राजाओं के परिवार की औरतें लाने में व्यस्त थे, तब एक राक्षस ने हमारे राज्य पर हमला कर दिया। वो हमारी मौसी की बेटी, हमारी बहन को उठाकर ले गया। तुम दुनिया के साथ जो कर रहे थे. वो हमारे ही परिवार के साथ घट गया।</p>
<p>रावण को अपनी गलती का एहसास हुआ। वो अपनी बहन को बचाने निकला, लेकिन तब तक उसकी बहन ने उस राक्षस को अपना पति मान कर शादी कर ली।</p>
<p>ये कहानी सिखाती है कि हम दुनिया को जो देते हैं, वो ही लौटकर हमारे पास आता है। इसलिए, संसार में रहकर अच्छे काम करें। आप अच्छा करेंगे तो आपके साथ भी अच्छा ही होगा।</p>
<h2>आप दुनिया के साथ जो करते हैं, वो आपके साथ भी होगा</h2>
<p>रावण परम शिव भक्त था। भगवान शिव को उसने ऐसा प्रसन्न किया कि खुद भगवान शिव ने घोषित किया कि रावण उनका परमभक्त है। रावण ने खुद को शिव का सबसे बड़ा भक्त मान लिया। इस बात का उसे अहंकार हो गया।</p>
<p>एक दिन जब रावण सोने की लंका में बैठा था, तो उसे ख्याल आया कि उसके आराध्य भगवान शिव कैलाश पर्वत पर रहते हैं, जहां ना कोई भवन है ना कोई महल। रावण ने तय किया कि वो भगवान शिव को लंका में लेकर आएगा, ताकि वो उनके पास भी रह सके और भगवान भी सोने की लंका का वैभव भोग सके। रावण कैलाश पर्वत की ओर चल दिया।</p>
<p>उसने भगवान शिव को लंका ले जाने के लिए कैलाश पर्वत को उठाने की कोशिश की। एक हाथ कैलाश पर्वत के नीचे लगाया और उठाने लगा तो भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया। रावण का हाथ दब गया। वो कुछ कर नहीं पा रहा था।</p>
<p>तब उसने शिवतांडव स्तोत्र की रचना कर शिव को प्रसन्न किया। भगवान ने उसे समझाया कि वो अपनी भक्ति का अहंकार ना करे। अहंकार ही उसके विनाश का कारण हो सकता है। रावण ने रिश्तों में समर्पण से ज्यादा अधिकार पर जोर दिया, इसलिए उसे लगभग हर रिश्ते से हाथ धोना पड़ा।</p>
<p>भाई विभीषण छोड़ गया, कुंभकर्ण मारा गया, सारे बेटे मारेगए,पत्नियां अकेली रह गईं। रिश्तों में अधिकार की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि समर्पण रिश्तों को बचाता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें :-</strong></p>
<ul>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/celebrate-vijayadashami-importance-10-heads-ravana-hindi/">क्यों मनाते हैं विजयादशमी, जाने रावण के 10 सिरों का अर्थ !!</a></strong></li>
</ul>
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		<title>महात्मा गांधी के जीवन से सीखने योग्य 10 बातें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 00:00:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[mahatma gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[महात्मा गांधी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महात्मा गांधी भारत के इतिहास के महान व्यक्तित्व थे। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। महात्मा गांधी ने भारत को ब्रिटिश शासन से आज़ाद करवाने के लिए सत्याग्रह और अहिंसा का सहारा लिया और देश के लोगों को भारत की आज़ादी के लिए प्रेरित किया। वे अंगेजों को यह मनवाने में सफल रहे कि [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महात्मा गांधी भारत के इतिहास के महान व्यक्तित्व थे। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। महात्मा गांधी ने भारत को ब्रिटिश शासन से आज़ाद करवाने के लिए सत्याग्रह और अहिंसा का सहारा लिया और देश के लोगों को भारत की आज़ादी के लिए प्रेरित किया। वे अंगेजों को यह मनवाने में सफल रहे कि भारत पर ब्रिटिश हकूमत मानवता के अधिकार का घोर उल्लंघन थी।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-14639" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/mahtma-gandhi-1.jpg?resize=500%2C417&#038;ssl=1" alt="" width="500" height="417" /></p>
<p>वैसे तो गांधी जी का पूरा जीवन ही अनुकरणीय है, लेकिन हम यहाँ 10 ऐसी चुनिन्दा बातें रख रहे हैं, जो देखने सुनने में बहुत ही साधारण लगती हैं, लेकिन अगर इन पर अमल किया जाए, तो मनुष्य कोई भी मंजिल पा सकता है।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/some-precious-words-on-gandhi-jayanti/">गांधी जयंती पर कुछ अनमोल वचन</a> </div></strong></p>
<h2>&#8220;जो हम सोचते हैं हम वही बन जाते हैं&#8221;</h2>
<p>महात्मा गांधी का मानना था कि हम जो सोचते हैं वही बन जाते हैं। अगर हम यह सोचेंगे कि हम लक्ष्य तक पहुंचने से पहले असफल हो जायेंगे, तो असल जिंदगी में भी वैसा ही होगा।</p>
<p>हमारा मन सकारात्मक और नकारात्मक विचारों से हमेशा भरा रहता है, लेकिन हमें नकारात्मक विचारों को मन से हटा देना चाहिए और सिर्फ सकारात्मक विचारों को मन में रखने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<h2>&#8220;कभी हार ना मानो और लगातार प्रयास करते रहो&#8221;</h2>
<p>महात्मा गांधी जी को अपने जीवन में भारत की आज़ादी के लिए कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करते रहे। इसी तरह हमें भी अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार संघर्ष करना चाहिए।</p>
<div class="inpost-ad">महात्मा गांधी की आत्मकथा &#8220;<a href="https://fundabook.com/recommends/amazon-satya-ke-prayog-paper-back/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">सत्य के साथ मेरे प्रयोग</a>&#8221; महात्मा गांधी जी ने मूलत: गुजराती में लिखी थी। विभिन्न भाषाओं में इसके अनुवाद हुए हैं और यह किताब बेस्ट-सेलर रही है। हिन्दी भाषा में अनुवादित किताब <a href="https://fundabook.com/recommends/amazon-satya-ke-prayog-paper-back/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">सत्य के प्रयोग (Satya Ke Prayog)</a> काफी रोचक व आसान भाषा में है। Amazon से इसे खरीदा जा सकता है।</div>
<h2>&#8220;आपके कर्म आपकी प्राथमिकता को दर्शाते हैं&#8221;</h2>
<p>अगर हमारे जीवन का लक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण है और हम उसको पूरा करने के लिए कोई भी कदम नहीं उठा रहे है, तो हमें अपनी प्राथमिकता के बारे में सोचना होगा। इसका अर्थ यह है कि हम अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर नहीं हैं। आपको अपनी प्राथमिकता अपने लक्ष्य को देनी चाहिए।</p>
<h2>&#8220;लक्ष्य का रास्ता भी लक्ष्य जैसा सुंदर होता है&#8221;</h2>
<p>महात्मा गांधी एक मजबूत चरित्र वाले आदमी थे। वह भारत की आज़ादी के लिए ऐसा कोई भी विधि नहीं अपनाना चाहते थे, जिनसे उनकी अंतरआत्मा को ठेस पहुंचे। इसीलिए उन्होंने भारत को आज़ाद करवाने के लिए हिंसा का सहारा ना लेते हुए, अहिंसा का सहारा लिया था। हमें भी उसी तरह अपने लक्ष्य को पाने के लिए एक नैतिक मार्ग का सहारा लेना चाहिए।</p>
<div class="inpost-ad">कैसा था महात्मा गांधी का जीवन? कैसे वह अति-साधारण जीवन जीने के साथ-2 इतने महान कार्य कर पाये? लेखक Louis Fischer द्वारा अँग्रेजी भाषा में लिखी <a href="https://fundabook.com/recommends/the-life-of-mahatma-gandhi/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">The Life of Mahatma Gandhi</a> किताब काफी कुछ बताती है।</div>
<h2>&#8220;ईमानदारी से “ना” कहना बेइमानी से “हाँ” कहने से कहीं बेहतर है&#8221;</h2>
<p>लोग अक्सर दूसरे लोगों को नाराज़ न करने के लिए “ना” कहने की बजाए “हां” कर देते हैं। वह अक्सर उन लोगों के साथ कई गतिविधियों में बिना अपनी दिलचस्पी के हिस्सा भी लेते रहते हैं।</p>
<p>महात्मा गांधी का कहना था, दूसरों को खुश करने के लिए की गयी &#8220;हां&#8221; आपको कहीं भी नहीं लेकर जाती. दूसरी तरफ यह आपकी जिंदगी को आक्रोश और कुंठा की तरफ ले जाती है।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/some-places-associated-with-mahatma-gandhis-life/">महात्मा गांधी जी के जीवन से जुड़े कुछ स्थान</a> </div></strong></p>
<h2>&#8220;शांति आपको अपने अंदर से ही मिलती है&#8221;</h2>
<p>क्या हम वास्तव में खुद के भीतर शांति को तलाशने की कोशिश करते हैं? ज्यादतर जवाब होगा “नहीं” क्योंकि असल में हम अपनी पूरी जिंदगी शांति को बाहर तलाशते रहते हैं।</p>
<p>जैसे कि हम जिंदगी में पहली बार किसी से मिलते हैं, हम उनके विचारों को इतनी गंभीरता से ले लेते हैं, जिससे हमारा अपने ऊपर से <a href="https://fundabook.com/recommends/mahatma-gandhi-complete-archive-of-thoughts-hindi/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">विश्वास</a> हट जाता है और हम अपने आपको दूसरों की नज़रों से देखने लग जाते हैं। लेकिन असल में हमें बाहरी आवाज़ों को अनसुना कर के अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को सुनना चाहिए।</p>
<h2>&#8220;सदभावना से किया गया काम आपको ख़ुशी देगा&#8221;</h2>
<p>आज की दुनिया में ख़ुशी और सदभावना दुर्लभ होती जा रही है। महात्मा गांधी जी का कहना था कि हमें अपने सदभावना के विचारों से और अपने कार्यों को संतुलित रखना चाहिए। इसी से हमें सच्ची ख़ुशी प्राप्त होगी।</p>
<div class="inpost-ad">लेखक राजेन्द्र अत्री ने महात्मा गांधी के बहुमूल्य विचारों का संग्रह अपनी किताब <a href="https://fundabook.com/recommends/the-life-of-mahatma-gandhi/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">महात्मा गांधी &#8211; सम्पूर्ण विचारों का संग्रह</a> में खूबसूरत ढंग से सँजोया है। इस किताब का अँग्रेजी में ऑनलाइन संस्करण डाउनलोड करने के लिए <a href="https://www.mkgandhi.org/ebks/An-Autobiography.pdf" target="_blank" rel="noopener noreferrer">यहाँ क्लिक करें</a></div>
<h2>&#8220;माफ़ करना मज़बूत लोगों की निशानी है&#8221;</h2>
<p>माफ़ करना बहुत कठिन होता है। वह आदमी जो माफ़ करके जिंदगी में आगे बढ़ता जाता है, वही महान है। हमें दूसरे लोगों की गलतियों को माफ़ कर देना चाहिए, ताकि हम जीवन शांति से व्यतीत कर सकें। माफ़ करना मज़बूत लोगों की निशानी है, ना कि कमज़ोर लोगों की।</p>
<h2>&#8220;मानसिक शक्ति शारीरिक शक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण है&#8221;</h2>
<p>शक्ति के विभिन्न रूप हो सकते हैं। ज़िंदगी में मज़बूत दिमाग का होना मज़बूत शरीर से ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक मज़बूत इच्छाशक्ति वाला आदमी पर्वतों को हिला सकता है, भले ही वह भीम या हनुमान नहीं है। महात्मा गांधी शारीरिक रूप से मज़बूत नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति से ब्रिटिश राज्य को घुटनों के बल झुका दिया था।</p>
<h2>&#8220;अगर आप अपनी जिंदगी में परिवर्तन करना चाहते हैं तो अपने आपको बदलें&#8221;</h2>
<p>गांधी जी ने कहा था कि हम अपने वांछित गुणों को दूसरों में देखने का प्रयास करते हैं। असल में हम सभी अंदर से बहुत अदभुत और सुंदर हैं। जितना हम दूसरों की मदद करेंगे, जवाब में वह भी हमारी मदद करेंगे। हमें सभी से प्यार और दया की भावना रखनी चाहिए। ऐसा करने से हमारे जीवन में अअदभुत बदलाव आएगा।</p>
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		<title>जानिए नवरात्रि में कौन से कार्य करने से होगी मनोकामना पूर्ण !!</title>
		<link>https://fundabook.com/know-which-tasks-will-be-fulfilled-by-doing-actions-chaitra-navratri/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 11:15:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu religion]]></category>
		<category><![CDATA[human life]]></category>
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		<category><![CDATA[Sharadiya Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[spiritually]]></category>
		<category><![CDATA[शारदीय नवरात्रि]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नवरात्रि वर्ष के महत्वपूर्ण चार पवित्र माह में आती है। यह चार माह है:- चैत्र, आषाढ़, अश्विन और पौष। चैत्र माह में चैत्र नवरात्रि जिसे बड़ी नवरात्रि या वसंत नवरात्रि भी कहते हैं। आषाढ़ और पौष माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। अश्‍विन माह की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। हर साल [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नवरात्रि वर्ष के महत्वपूर्ण चार पवित्र माह में आती है। यह चार माह है:- <strong>चैत्र, आषाढ़, अश्विन</strong> और <strong>पौष</strong>। चैत्र माह में चैत्र नवरात्रि जिसे बड़ी <a href="https://fundabook.com/effects-of-chaitra-navratri-on-zodiac-signs/">नवरात्रि</a> या वसंत नवरात्रि भी कहते हैं। आषाढ़ और पौष माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं।</p>
<p>अश्‍विन माह की नवरात्रि को<strong> शारदीय नवरात्रि</strong> कहते हैं। हर साल मां अंबे के भक्त पूरी <strong>श्रद्धा, भक्ति</strong> और <strong>उत्साह</strong> के साथ शारदीय नवरात्रि का त्यौहार मनाते हैं। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।</p>
<p>इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे <strong>शारदीय नवरात्रि</strong> में कौन से कार्य करने से होगी मनोकामना पूर्ण :-</p>
<h2>उपवास</h2>
<p>नवरात्रों में उपवास रखने चाहिए। उपवास रखने से अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई हो जाती है। उपवास रखकर ही साधना की जा सकती है। नवरात्रों में नमक और मीठा (चीनी मिष्ठानादि) नहीं खाना चाहिए । उपवास में रहकर इन नौ दिनों में की गई हर तरह की साधनाएं और मनोकामनाएं पूर्ण होती है।</p>
<h2 data-start="606" data-end="641">सत्य और अहिंसा का पालन</h2>
<p data-start="644" data-end="724">नवरात्रि के दिन <strong data-start="660" data-end="692">सत्य बोलना और अहिंसा का पालन</strong> करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय झूठ बोलना, गुस्सा करना या किसी को नुकसान पहुँचाना, कार्यों में बाधा डाल सकता है। यही कारण है कि माँ दुर्गा की कृपा पाने के लिए <strong data-start="865" data-end="889">सदाचार और पुण्य कर्म</strong> करना अनिवार्य है।</p>
<h2>नियम-संयम से रहें</h2>
<p>इन नौ दिनों में भोजन, मद्यपान, मांस-भक्षण और स्‍त्रिसंग शयन वर्जित माना गया है। जो व्यक्ति इन नौ दिनों में  नियम-संयम में  नहीं रहता उसका बुरा समय कभी खत्म नहीं होता।</p>
<p>यदि आपने 9 दिनों तक साधना का संकल्प ले लिया है, तो उसे बीच में तोड़ा नहीं जा सकता। मन और विचार से पवित्रता बनाकर रखनी चाहिए । छल, कपट और अपशब्दों का प्रयोग नहीं चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और गलत लोगों की संगति से बचना चाहिए ।</p>
<div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/some-interesting-facts-related-to-the-nine-days-of-navratri/">नवरात्रि के नौ दिनों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य</a> </div>
<h2>साधारण साधना</h2>
<p>नवरात्रों में गृहस्थ मनुष्य को साधारण साधना ही करना चाहिए। इस दौरान उसे घट स्थापना करके, माता की ज्योत जलाकर चंडीपाठ, देवी महात्म्य परायण या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।</p>
<p>यदि आप यह नहीं कर सकते हैं तो इन नौ दिनों के दौरान प्रतिदिन एक माला के साथ मंत्रों का जाप करना चाहिए। सामान्यजन माता के बीज  मंत्रों का जाप कर सकते हैं। सप्तश्लोकी दुर्गा के पाठ का 108 बार अष्टमी की रात्रि में पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।</p>
<p><a href="https://fundabook.com/perfect-remedies-to-please-durga-in-chaitra-navaratri/">नवरात्रि</a> में कम से कम दोनों काल (प्रातःकाल  एवं सायं काल) में  समय निकाल कर 26 माला प्रति दिन नियमित समय पर जाप करना चाहिए। जाप करते  समय घी का दीपक जलाकर रखें और जल का एक पात्र निकट में रखें।</p>
<h2>कन्या भोज व दान</h2>
<p>सप्तमी, अष्टमी और नौवमी के दिन कन्या पूजन करके उन्हें अच्छे से भोजन ग्रहण कराना चाहिए। यदि आप कन्या भोज नहीं करवा  सकते तो आप गरीब कन्याओं को दान दक्षिणा दे सकते हैं।</p>
<p>खासकर उन्हें हरे वस्त्र या चुनरी भेंट करें। आप यह कार्य किसी मंदिर में जाकर भी कर सकते हैं। वहां माता को खीर का भोग लगाकर कन्याओं को दान देना चाहिए।</p>
<h2 data-start="1453" data-end="1493">घर और कार्यस्थल की साफ-सफाई</h2>
<p data-start="1496" data-end="1567">नवरात्रि में घर और कार्यस्थल को साफ-सुथरा रखना बहुत शुभ माना जाता है। साफ वातावरण में पूजा करने से <strong data-start="1599" data-end="1647">धन, स्वास्थ्य और संबंधों में सकारात्मक ऊर्जा</strong> बनी रहती है। माँ दुर्गा को स्वच्छ स्थान बहुत प्रिय है।</p>
<h2 data-start="1715" data-end="1745">दान और सेवा कार्य</h2>
<p data-start="1748" data-end="1836">जरूरतमंदों को <strong data-start="1762" data-end="1807">दान देना, भोजन बाँटना या किसी की मदद करना</strong> अत्यंत पुण्यदायक कार्य है। दान और सेवा से माँ दुर्गा की कृपा बढ़ती है और <strong data-start="1885" data-end="1919">मनोकामना पूर्ण होने की संभावना</strong> बढ़ जाती है। यह कार्य केवल धन ही नहीं, बल्कि समय और प्रयास से भी किया जा सकता है।</p>
<h2>हवन</h2>
<p>नवरात्रि के अंतिम दिन विधिवत रूप से साधना और पूजा को समाप्त करके हवन करना चाहिए। हवन करते वक्त हवन के नियमों का पालन करना चाहिए। ऐसा करने से <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%BE" target="_blank" rel="noopener noreferrer">माँ दुर्गा</a> प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।</p>
<h2 data-start="2014" data-end="2050">मंत्र जाप और भजन-कीर्तन</h2>
<p data-start="2053" data-end="2129">नवरात्रि में देवी दुर्गा के मंत्रों का जाप और भजन-कीर्तन करना शुभ होता है। उदाहरण: <strong data-start="2140" data-end="2180">“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”</strong> मंत्र का नियमित जाप करने से मन की शांति और इच्छाओं की पूर्ति होती है। प्रतिदिन सुबह और शाम ध्यान करके मंत्र का उच्चारण करना लाभकारी माना जाता है।</p>
<h2 data-start="2339" data-end="2374">सकारात्मक सोच और ध्यान</h2>
<p data-start="2377" data-end="2432">नवरात्रि में सकारात्मक सोच रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। नेगेटिव विचार या ईर्ष्या रखने से इच्छाओं की पूर्ति में बाधा आती है। ध्यान और प्राणायाम करने से मन शांत रहता है और <strong data-start="2553" data-end="2569">देवी की कृपा</strong> अधिक समय तक बनी रहती है।</p>
<p data-start="2617" data-end="2715">नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि यह <strong data-start="2663" data-end="2700">मनोकामना पूर्ण करने का विशेष अवसर</strong> है। इस दौरान</p>
<ul data-start="2716" data-end="2869">
<li data-start="2716" data-end="2748">
<p data-start="2718" data-end="2748">सत्य और अहिंसा का पालन करें,</p>
</li>
<li data-start="2749" data-end="2777">
<p data-start="2751" data-end="2777">व्रत और कन्या पूजन करें,</p>
</li>
<li data-start="2778" data-end="2813">
<p data-start="2780" data-end="2813">घर और कार्यस्थल को स्वच्छ रखें,</p>
</li>
<li data-start="2814" data-end="2835">
<p data-start="2816" data-end="2835">दान और सेवा करें,</p>
</li>
<li data-start="2836" data-end="2869">
<p data-start="2838" data-end="2869">मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करें।</p>
</li>
</ul>
<p data-start="2871" data-end="2994">इन सभी कार्यों का पालन करने से न केवल मनोकामनाएँ पूरी होती हैं, बल्कि जीवन में <strong data-start="2950" data-end="2981">शांति, स्वास्थ्य और खुशहाली</strong> भी आती है।</p>
<p data-start="2996" data-end="3115"><strong data-start="2996" data-end="3113">इस नवरात्रि, माँ दुर्गा की भक्ति और अनुशासन से अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ और मनोकामनाओं को साकार करें।</strong></p>
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		<title>क्यों नवरात्रि के दौरान लहसुन-प्याज खाना वर्जित होता है?</title>
		<link>https://fundabook.com/eating-garlic-onion-prohibited-during-navratri-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 09:39:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[healthy life]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu religion]]></category>
		<category><![CDATA[human life]]></category>
		<category><![CDATA[life]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[traditions]]></category>
		<category><![CDATA[Traditions in India]]></category>
		<category><![CDATA[नवरात्रि]]></category>
		<category><![CDATA[लहसुन-प्याज]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नवरात्रि का हिन्दु धर्म में बहुत महत्व है। नवरात्रि में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता यह है कि जो व्यक्ति मां दुर्गा की पूजा आराधना सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से करता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है इस बार शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 से आरंभ हो रही [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नवरात्रि का हिन्दु धर्म में बहुत महत्व है। नवरात्रि में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता यह है कि जो व्यक्ति मां दुर्गा की पूजा आराधना सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से करता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है</p>
<p>इस बार शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 से आरंभ हो रही है इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है।</p>
<p>भक्त नवरात्रि के दौरान तन मन को शुद्ध करने के लिए व्रत भी रखते हैं। नवरात्रि के व्रत के दौरान कई नियमों का पालन भक्तों को करना होता है।</p>
<p>ऐसा ही एक नियम नवरात्रि के दौरान भोजन को लेकर भी है। नवरात्रि के व्रत लेने वाले लोग और जो व्रत नहीं लेते वह भी लहसुन प्याज का इस्तेमाल भोजन में नहीं करते। इसके पीछे वजह क्या है, आइए जानते हैं।</p>
<h2><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone wp-image-25025" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?resize=696%2C522&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="522" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?resize=300%2C225&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?resize=560%2C420&amp;ssl=1 560w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?resize=80%2C60&amp;ssl=1 80w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?resize=265%2C198&amp;ssl=1 265w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></h2>
<h2>तामसिक गुण पाए जाते हैं लहसुन-प्याज में</h2>
<p>नवरात्रि के व्रत मन की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अहम माने जाते हैं इसलिए नवरात्रि के नौ दिनों में <a href="https://fundabook.com/health-benefits-of-eating-garlic/">लहसुन</a> <a href="https://fundabook.com/know-why-tears-come-when-cutting-onions-what-to-do-so-that-tears-do-not-come-out/">प्याज</a> का सेवन वर्जित होता है, क्योंकि यह तामसिक प्रकृति के भोज्य पदार्थ होते हैं।</p>
<p>इनके सेवन से अज्ञानता और वासना में वृद्धि होती है। इसके साथ ही लहसुन-प्याज जमीने के नीचे उगते हैं और इनकी सफाई में कई सूक्ष्मजीवों की मृत्यु होती है, इसलिए भी इन्हें व्रत के दौरान खाना शुभ नहीं माना जाता है।</p>
<div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <strong><a href="https://fundabook.com/know-which-tasks-will-be-fulfilled-by-doing-actions-chaitra-navratri/">जानिए नवरात्रि में कौन से कार्य करने से होगी मनोकामना पूर्ण !!</a></strong> </div>
<h2>मन की चंचलता बढ़ाते हैं लहसुन-प्याज</h2>
<p>तामसिक गुणों के कारण लहसुन-प्याज के सेवन से मन चंचल होता है। व्रत के दौरान मन की चंचलता व्यक्ति को विचलित करती है। इससे भोग-विलास की ओर मन आकर्षित होता है और व्यक्ति व्रत के नियमों का उल्लंघन कर सकता है।</p>
<h2>पवित्रता को बनाए रखने के लिए ही लहसुन</h2>
<p>प्याज का सेवन भोजन में नहीं करना चाहिए। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, जैसा अन्न व्यक्ति खाता है उसका मन भी वैसा हो जाता है इसलिए व्रत के दौरान सात्विक भोजन करने की सलाह हिंदू धर्म में दी गई है।</p>
<h2>पौराणिक कहानी</h2>
<p>पौराणिक कथा के अनुसार, स्वरभानु नाम के दैत्य ने समुद्रमंथन के बाद देवताओं के बीच बैठकर छल से अमृत का सेवन कर लिया था।</p>
<p>यह बात जब मोहिनी रूप धारण किये हुए भगवान विष्णु को पता चली तो उन्होंने अपने चक्र से स्वरभानु का सिर, धड़ से अलग कर दिया। स्वरभानु के सिर और धड़ को ही राहु-केतु कहा जाता है।</p>
<p>सिर कटने के बाद स्वरभानु के सिर और धड़ से अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरी और इन्हीं से लहसुन-प्याज की उत्पत्ति हुई। लहसुन-प्याज का जन्म अमृत की बूंदों से हुआ इसलिए रोगों को मिटाने में यह दोनों कारगर साबित होते हैं।</p>
<p>परंतु यह राक्षस के मुंह से होकर उत्पन्न हुई हैं, इसलिए यह अपवित्र मानी जाती हैं और भगवान को इनका भोग लगाना वर्जित है। इसके साथ ही व्रत के दौरान भी इनको खाना वर्जित है।</p>
<div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <strong><a href="https://fundabook.com/9-days-navratri-know-which-day-indulge-in-hindi/">नवरात्रि के 9 दिनों में, जानिए किस दिन कौन सा भोग लगाएं!!</a></strong> </div>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>नवरात्रि में कन्या पूजन का है विशेष महत्व, ध्यान रखें ये बातें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 23:56:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
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		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2023]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu religion]]></category>
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		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[Kanya pooja]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>चैत्र नवरात्रि हो या शारदीय नवरात्रि देवी माँ की पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक कन्या पूजन न हो जाए। नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्त्व होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके कुछ नियम भी होते हैं जिनका विशेष ध्यान रखना होता है। मान्यता है कि अगर इन [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/kanya-worship-special-significance-navratri-keep-these-things-hindi/">नवरात्रि में कन्या पूजन का है विशेष महत्व, ध्यान रखें ये बातें</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>चैत्र नवरात्रि हो या शारदीय नवरात्रि देवी माँ की पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक <strong>कन्या पूजन</strong> न हो जाए। नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्त्व होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके कुछ नियम भी होते हैं जिनका विशेष ध्यान रखना होता है।</p>
<p>मान्यता है कि अगर इन नियमों पालन किया जाए तो देवी माँ अत्यंत प्रसन्न होती हैं। तो आइए जानते हैं कन्या पूजन का महत्त्व और नियम?</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-34434 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/chaitra-navratri-girl-worship.jpg?resize=696%2C390&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="390" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/chaitra-navratri-girl-worship.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/chaitra-navratri-girl-worship.jpg?resize=300%2C168&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/chaitra-navratri-girl-worship.jpg?resize=696%2C390&amp;ssl=1 696w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2 data-start="620" data-end="644">कन्या पूजन का महत्व</h2>
<ol data-start="646" data-end="1217">
<li data-start="646" data-end="849">
<p data-start="649" data-end="675"><strong data-start="649" data-end="673">देवी स्वरूपा की पूजा</strong></p>
<ul data-start="679" data-end="849">
<li data-start="679" data-end="782">
<p data-start="681" data-end="782">नवरात्रि के आठवें या नवें दिन (अष्टमी या नवमी) कन्याओं को माता दुर्गा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है।</p>
</li>
<li data-start="786" data-end="849">
<p data-start="788" data-end="849">प्रत्येक कन्या में देवी दुर्गा के नौ रूपों का आभास होता है।</p>
</li>
</ul>
</li>
<li data-start="851" data-end="1066">
<p data-start="854" data-end="887"><strong data-start="854" data-end="885">सांस्कृतिक और धार्मिक संदेश</strong></p>
<ul data-start="891" data-end="1066">
<li data-start="891" data-end="979">
<p data-start="893" data-end="979">कन्या पूजन यह सिखाता है कि <strong data-start="920" data-end="944">नारी शक्ति का सम्मान</strong> समाज की मजबूती के लिए आवश्यक है।</p>
</li>
<li data-start="983" data-end="1066">
<p data-start="985" data-end="1066">यह हमें अहंकार और लालच से दूर, <strong data-start="1016" data-end="1037">सादगी और सेवा भाव</strong> अपनाने की प्रेरणा देता है।</p>
</li>
</ul>
</li>
<li data-start="1068" data-end="1217">
<p data-start="1071" data-end="1101"><strong data-start="1071" data-end="1099">सकारात्मक ऊर्जा का संचार</strong></p>
<ul data-start="1105" data-end="1217">
<li data-start="1105" data-end="1217">
<p data-start="1107" data-end="1217">माना जाता है कि कन्याओं को भोजन, मिठाई और उपहार देने से घर में <strong data-start="1170" data-end="1202">सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति</strong> बनी रहती है।</p>
</li>
</ul>
</li>
</ol>
<h2>नियम</h2>
<p>कन्या पूजन <strong>षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी</strong> या <strong>नवमी</strong> में किसी भी दिन किया जाता है। ख्याल रखें कि कन्याओं की उम्र 2 से 7 साल के बीच होनी चाहिए। कन्या पूजन में बालक को जरूर आमंत्रित करना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा न करने पर कन्या पूजन पूर्ण नहीं होता।</p>
<p>सबसे पहले कन्याओं के पैर दूध या फिर पानी से अपने हाथों से साफ करें। इसके बाद उनके पैर छूकर उन्हें साफ स्थान पर बैठाएं। कन्याओं के माथे पर <strong>अक्षत, फूल</strong> और <strong>कुमकुम</strong> का <strong>तिलक</strong> लगाएं। कन्याओं को खीर-पूड़ी का प्रसाद खिलाएं।</p>
<p>नमकीन में चना भी खिला सकते हैं कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें दान में <strong>रूमाल, लाल चुनरी, फल</strong> और खिलौने देकर उनके चरण छुकर आर्शीवाद लें। इसके बाद कन्याओं को खुशी-खुशी विदा करें। ऐसा करने से मातारानी की कृपा और उनका आर्शीवाद आप के ऊपर हमेशा बना रहेगा।</p>
<h2 data-start="1781" data-end="1808">ध्यान रखने योग्य बातें</h2>
<ol data-start="1810" data-end="2298">
<li data-start="1810" data-end="1924">
<p data-start="1813" data-end="1839"><strong data-start="1813" data-end="1837">साफ-सफाई और स्वच्छता</strong></p>
<ul data-start="1843" data-end="1924">
<li data-start="1843" data-end="1924">
<p data-start="1845" data-end="1924">कन्या पूजन में उपयोग होने वाले थाल, कपड़े और भोजन पूरी तरह स्वच्छ होने चाहिए।</p>
</li>
</ul>
</li>
<li data-start="1926" data-end="2043">
<p data-start="1929" data-end="1948"><strong data-start="1929" data-end="1946">सादगी और संयम</strong></p>
<ul data-start="1952" data-end="2043">
<li data-start="1952" data-end="2043">
<p data-start="1954" data-end="2043">पूजन में महंगे उपहार और भव्य भोजन की तुलना में <strong data-start="2001" data-end="2027">सादगी और हृदय की भक्ति</strong> को महत्व दें।</p>
</li>
</ul>
</li>
<li data-start="2045" data-end="2173">
<p data-start="2048" data-end="2070"><strong data-start="2048" data-end="2068">सुरक्षा का ध्यान</strong></p>
<ul data-start="2074" data-end="2173">
<li data-start="2074" data-end="2127">
<p data-start="2076" data-end="2127">बच्चों और कन्याओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।</p>
</li>
<li data-start="2131" data-end="2173">
<p data-start="2133" data-end="2173">भीड़ वाले आयोजन में अनुशासन बनाए रखें।</p>
</li>
</ul>
</li>
<li data-start="2175" data-end="2298">
<p data-start="2178" data-end="2199"><strong data-start="2178" data-end="2197">उचित समय और दिन</strong></p>
<ul data-start="2203" data-end="2298">
<li data-start="2203" data-end="2251">
<p data-start="2205" data-end="2251">अष्टमी या नवमी का दिन सबसे शुभ माना जाता है।</p>
</li>
<li data-start="2255" data-end="2298">
<p data-start="2257" data-end="2298">समय सुबह या दोपहर के पहले भाग में करें।</p>
</li>
</ul>
</li>
</ol>
<h2>पौराणिक कथा</h2>
<p>मान्यता है कि माता के भक्त पंडित श्रीधर की कोई संतान नहीं थी। एक दिन उन्होंने नवरात्र में कुंवारी कन्याओं को आमंत्रित किया। इसी बीच मां वैष्णों कन्याओं के बीच आकर बैठ गईं।</p>
<p>सभी कन्याएं तो भोजन करके और दक्षिणा लेकर चली गईं लेकिन मातारानी वहीं बैठी रहीं। उन्होंने पंडित श्रीधर से कहा कि तुम एक भंडारा रखो और उसमें पूरे गांव को आमंत्रित करो।</p>
<p>इसी भंडारे में भैरोनाथ भी आया और वहीं उसके अंत का आरंभ हुआ। माँ ने <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AD%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5" target="_blank" rel="noopener">भैरोनाथ</a> का अंत करने के साथ ही उसका उद्धार किया।</p>
<h2 data-start="2305" data-end="2318">निष्कर्ष</h2>
<p data-start="2319" data-end="2545">कन्या पूजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह हमें <strong data-start="2375" data-end="2415">समानता, सेवा और नारी शक्ति का सम्मान</strong> सिखाता है। नवरात्रि में इस पूजन के माध्यम से हम अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सामूहिक सौहार्द और भक्ति की भावना बढ़ा सकते हैं।</p>
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		<title>डाॅ. वेदप्रताप वैदिक: 13 वर्ष की आयु में हिंदी भाषा के लिए सत्याग्रह करने वाले महान विद्वान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Sep 2024 22:28:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>महान हिंदी विद्वान,चिंतक,पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डाॅ. वेदप्रताप वैदिक की गणना राष्ट्रीय अग्रदूतों में होती है। मात्र 13 वर्ष की आयु में मातृभाषा हिंदी के लिए सत्याग्रह करने वाले डा. वेद प्रताप वैदिक का जन्म सन 1944 में इंदौर में हुआ था। वह देश के जाने माने व बड़े हिंदी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक थे। [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महान हिंदी विद्वान,चिंतक,पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डाॅ. वेदप्रताप वैदिक की गणना राष्ट्रीय अग्रदूतों में होती है। मात्र 13 वर्ष की आयु में मातृभाषा हिंदी के लिए सत्याग्रह करने वाले डा. वेद प्रताप वैदिक का जन्म सन 1944 में इंदौर में हुआ था। वह देश के जाने माने व बड़े हिंदी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक थे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में पीएचडी की थी।</p>
<h2>13 वर्ष की आयु में सत्याग्रह</h2>
<p>डा. वैदिक ने हिंदी भाषा के लिए सत्याग्रह किया और अपनी पहली जेल-यात्रा सिर्फ 13 वर्ष की आयु में की थी। हिंदी सत्याग्रही के तौर पर वे 1957 में पटियाला जेल में रहे। बाद में छात्र नेता और भाषाई आंदोलनकारी के तौर पर कई जेल यात्राएं कीं।</p>
<p>हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा का स्थान दिलाने के लिए सबसे अधिक जेल यात्रा करने वाले वह पहले भाषाई आंदोलनकारी थे।, जिन्होंने हिंदी को मौलिक चिंतन की भाषा बनाया और भारतीय भाषाओं को उनका उचित स्थान दिलवाने के लिए सतत संघर्ष और त्याग किया।</p>
<p>महर्षि दयानंद, महात्मा गांधी और डाॅ. राममनोहर लोहिया की महान परंपरा को आगे बढ़ानेवाले योद्धाओं में डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का नाम अग्रणी है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-52011 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik1.jpg?resize=696%2C365&#038;ssl=1" alt="Dr-vedpratap-vaidik" width="696" height="365" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik1.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik1.jpg?resize=300%2C158&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2>हिंदी भाषा में पी.एच.डी. करने वाले पहले व्यक्ति</h2>
<p>वह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में पीएच.डी. कर रहे थे। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर शोध ग्रंथ वह हिंदी में लिखना चाहते थे परंतु उनको अनुमति नहीं मिली।</p>
<p>इस प्रश्न पर उन्होंने आंदोलन किया और कहा कि देश की राष्ट्रभाषा पर मुझे शोध ग्रंथ लिखने और पीएच.डी. करने की अनुमति मिलनी चाहिए। मामला न्यायालय में गया, भारत की संसद में भी मामला गूंजा।</p>
<p>डा. राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी वाजपेयी, मधु लिमये, चंद्रशेखर, प्रकाश वीर शास्त्री, रामधारी सिंह दिनकर, डा. धर्मवीर भारती और डा. हरिवंश राय बच्चन जैसे विद्वानों ने उनका प्रबल समर्थन किया।</p>
<p>इसके बाद इंदिरा गांधी सरकार की पहल पर JNU के नियमों में बदलाव हुआ और उन्हें वापस लिया गया। इसके बाद डा. वैदिक पहले भारतीय छात्र बने जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी में शोध लिख कर पीएच. डी. की। इस दृष्टि से उन्होंने भारत में एक नया इतिहास बनाया।</p>
<p>डा. वैदिक ने अपने लेखन के 60 वर्षों में हजारों लेख लिखे और भाषण दिए! वे लगभग 10 वर्षों तक पीटीआई भाषा (हिन्दी समाचार समिति) के संस्थापक-संपादक रहे और उसके पहले नवभारत टाइम्स के संपादक (विचारक) रहे।</p>
<p>डा. भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर उनके लेख राष्ट्रीय समाचार पत्रों तथा प्रदेशों और विदेशों के लगभग 200 समाचार पत्रों में हर सप्ताह प्रकाशित होते रहे हैं। उनका अंतिम लेख उनकी मृत्यु से महज़ एक दिन पहले ही प्रकाशित हुआ था।</p>
<p>ख़ास: उन्होंने 2014 में आतंकी हाफिज सईद का इंटरव्यू लिया था।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-52014 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?resize=696%2C313&#038;ssl=1" alt="Dr.-vedpratap-vaidik" width="696" height="313" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?resize=300%2C135&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?resize=696%2C313&amp;ssl=1 696w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2>हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई का दिया था सुझाव</h2>
<p>अक्तूबर 2022 से देश में पहली बार मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में होने का फ़ैसला लिया गया था। मध्य प्रदेश के सभी 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस पहल की शुरुआत की गयी थी। दरअसल इसका सुझाव सन 2019 में डॉ वेद प्रताप वैदिक ने ही दिया था।</p>
<h2>मीडिया ने की हर बार उपेक्षा</h2>
<p>दोगले चरित्र वाले भारतीय मीडिया चैनलों ने हिंदी भाषा को उसका उचित सम्मान दिलाने में  हमेशा डा. वैदिक के प्रयास की हमेशा उपेक्षा की। वैसे तो हर बार हिंदी दिवस पर सभी चैनल पर हिंदी भाषा को लेकर बड़े-२ प्रोग्राम चलते हैं लेकिन डा. वैदिक के किसी भी प्रयास और यहाँ तक की उनकी मृत्यु पर किसी चैनल ने प्रोग्राम चलाना तो दूर इस खबर को हाई लाइट करना भी ज़रूरी नहीं समझा।</p>
<h2>डा. वैदिक की जीवन यात्रा</h2>
<p><strong>जन्म</strong>: डॉ. वेद प्रताप वैदिक का जन्म 30 दिसंबर 1944 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ।</p>
<p><strong>शिक्षा</strong>:</p>
<p>(1) पीएच.डी (अंतरराष्ट्रीय राजनीति), स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज, जवाहरलाल नेहरु वि.वि., 1971. विषय — अफगानिस्तान के साथ सोवियत संघ और अमेरिका के संबंधों का तुलनात्मक अध्ययन, 1946-1963 (पीएच.डी. शोध-कार्य के दौरान न्यूयार्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय, वाशिंगटन डी. सी. की लायब्रेरी आॅफ कांग्रेस, मास्को की विज्ञान अकादमी, लंदन के प्राच्य-विद्या संस्थान तथा काबुल विश्वविद्यालय में विशेष अध्ययन का अवसर)</p>
<p>(2) एम.ए. (राजनीति शास्त्र), प्रथम श्रेणी इंदौर क्रिश्चियन काॅलेज, इंदौर विश्वविद्यालय, 1965</p>
<p>(3) बी.ए. (राजनीति शास्त्र, दर्शनशास्त्र, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी) प्रथम श्रेणी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, 1963</p>
<p>(4) संस्कृत (सातवलेकर परीक्षाएं),1955 प्रथम श्रेणी</p>
<p>(5) रूसी भाषा (स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज),1967प्रथम श्रेणी</p>
<p>(6) फारसी भाषा (स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज), 1968 प्रथम श्रेणी</p>
<p><strong>छात्रवृत्तियां</strong>:</p>
<p>(1) राष्ट्रीय प्रतिभा छात्रवृत्ति, 1963-64. एवं</p>
<p>(2) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग शोधवृत्ति, 1964-1966</p>
<p><strong>शोधवृत्तियां</strong>:</p>
<p>(3) वरिष्ठ शोधवृत्ति, इंडियन काॅसिल आॅफ सोश्यल साइंस रिसर्च, 1981-1983</p>
<p>‘इंस्टीट्यूट फाॅर डिफेंस स्टडीज एण्ड एनालिसस’ तथा ‘स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज’ (ज.नेहरू.वि.वि.) में दो साल तक ‘सीनियर फेलो’ के तौर पर शोधकार्य.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-52013 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C392&#038;ssl=1" alt="Dr-vedpratap-vaidik" width="696" height="392" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C392&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=746%2C420&amp;ssl=1 746w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p><strong>अध्यापन</strong>:</p>
<p>हस्तिनापुर काॅलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में राजनीति शास्त्र का अध्यापन, 1970-74। 30 वर्षों में अनेक भारतीय एवं विदेशी विश्वविद्यालयों में अन्तरराष्ट्रीय राजनीति एवं पत्रकारिता पर अल्पकालिक अध्यापन-कार्यक्रम चलाते रहे।</p>
<p><strong>पुस्तकें</strong>:</p>
<p>(1) ‘हिन्दी पत्रकारिता: विविध आयाम’, संपादित (नेशनल, 1976),पाँच संस्करण (हिन्दी बुक सेंटर), हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास, कला और अधुनातन प्रवृत्तियों का विवेचन करने वाले इस ग्रंथ को समीक्षकों ने ‘हिन्दी पत्रकारिता का विश्वकोष’ कहा है. लगभग सभी विश्वविद्यालयों में इसका संदर्भ ग्रंथ के तौर पर उपयोग किया जाता है. इसके कई संस्करण आ चुके हैं।</p>
<p>(2) ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा’ (नेशनल पब्लिशिंग हाउस, 1973). : अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी का यह पहला शोधग्रंथ है, विद्वान समीक्षकों ने इसे अपने विषय का ‘प्रामाणिक’ और ‘मौलिक’ संदर्भ ग्रंथ कहा है. यह फारसी, रूसी और अंग्रेजी स्रोतों के आधार पर लिखा गया है. इस ग्रंथ पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।</p>
<p>(3) ‘भारतीय विदेश नीति: नये दिशा संकेत’ (नेशनल, 1971) इस ग्रंथ को समीक्षकों ने ‘मौलिक चिंतन और भविष्य दृष्टि’ का उल्लेखनीय दस्तावेज घोषित किया है।</p>
<p>(4) ‘एथनिक क्राइसिस इन श्रीलंका: इंडिया’ज़ आॅप्शंस’ (नेशनल, 1985).श्रीलंका की तमिल समस्या पर किसी भारतीय द्वारा लिखा गया यह पहला ग्रंथ है।</p>
<p>(5) ‘अफगानिस्तान: कल, आज और कल’ (राजकमल प्रकाशन, 2002). अफगानिस्तान के इतिहास, समाज और राजनीति पर इस तरह का गवेषणात्मक और मौलिक व्याख्यासम्पन्न ग्रंथ दुनिया की किसी भी अन्य भाषा में उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>(6) ‘वर्तमान भारत’ (राजकमल प्रकाशन, 2002)। समसामयिक भारत की राजनीति पर लिखे गए विश्लेषणात्मक निबंधों का संग्रह !</p>
<p>(7) ‘महाशक्ति भारत’ (राजकमल प्रकाशन, 2002)। इस ग्रंथ में भारत को महाशक्ति बनाने का स्वप्न देखा गया है और उस स्वप्न को साकार करने के उपायों पर विचार किया गया है।</p>
<p>(8) ‘अंग्रेजी हटाओ: क्यों और कैसे ? (प्रभात प्रकाशन, दिल्ली प्रथम संस्करण 1973, सातवां संस्करण, 1998) : इस पुस्तक की 75 हजार प्रतियां बिक चुकी हैं और इसका मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, संस्कृत, गुजराती, मराठी, बांग्ला, असमिया, पंजाबी,उर्दू, सिंधी, मणिपुरी, कश्मीरी, कोंकणी तथा ओडि़या आदि में अनुवाद हो चुका है।</p>
<p>(9) हिंदी का सम्पूर्ण समाचार-पत्र कैसा हो ? (प्रवीण प्रकाशन, 1994), तीन संस्करण।</p>
<p>(10) ‘भाजपा, हिंदुत्व और मुसलमान’ (राजकमल प्रकाशन)</p>
<p>(11)‘कुछ महापुरूष और कुछ मित्र’ शीघ्र प्रकाश्य</p>
<p>(12) मोरिशस, मध्य एशिया और चीन के तीन यात्रा-वृतांत प्रकाशनाधीन</p>
<p><strong>पत्रकारिता</strong>:</p>
<p>(1) 1958 में प्रूफ रीडर के तौर पर पत्रकारिता में प्रवेश. तब से अब तक लगभग 1000 लेख, दर्जनों शोधपत्र, लगभग दो हजार संपादकीय तथा सैकड़ों समीक्षाएं प्रकाशित. पिछले तीन दशकों में ‘नई दुनिया’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिंदुस्तान’, ‘जनसत्ता’, ‘भास्कर’, ‘टाइम्स आॅफ इंडिया’, ‘धर्मयुग’, ‘दिनमान’, ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘इंटरनेशनल स्टडीज’, ‘स्ट्रटेजिक एनालिसिस’, ‘वल्र्ड फोकस’ आदि पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर लेख और भेंट वार्ताएं।</p>
<p>अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, श्रीलंका, चेकोस्लोवाकिया, सूरिनाम आदि राष्ट्रों के शीर्ष नेताओं से की गई भेंट-वार्ताओं को अंतरराष्ट्रीय ख्याति। देश के लगभग दर्जन भर अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-52012 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C428&#038;ssl=1" alt="Dr.-vedpratap-vaidik" width="696" height="428" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?w=699&amp;ssl=1 699w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=300%2C185&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C428&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=683%2C420&amp;ssl=1 683w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=356%2C220&amp;ssl=1 356w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p>(2) संपादक, ‘पी.टी.आई.-भाषा’, 1986-96 :  प्रेस ट्रस्ट आॅफ इंडिया द्वारा स्थापित ‘भाषा’ नामक हिंदी की समाचार समिति के संस्थापक-संपादक। ‘भाषा’ ने अपनी नवीन खबर-शैली, देशी और विदेशी नामों के मानकीकरण और अनेक महत्त्वपूर्ण अवसरों पर अपने ‘स्कूपों’ द्वारा हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय ख्याति अर्जित की।</p>
<p>(3) संपादक (विचार), नवभारत टाइम्स, 1986. सहायक संपादक, नवभारत टाइम्स 1974-85, संपादक, ‘अग्रवाही (मासिक), इंदौर, 1962-66. संपादक, इंदौर क्रिश्यिचन काॅलेज पत्रिका, 1963-64. हिंदी पत्रकारिता: विविध आयम’ नामक 1100 पृष्ठों के महग्रंथ का संपादन, 1976।</p>
<p>(4) निदेशक, हिंदुस्तान समाचार, 1974-77</p>
<p>(5) संपादकीय निदेशक, नेटजाल.काॅम (भारतीय भाषाओं का महापोर्टल)</p>
<p><strong>सम्मान</strong>:</p>
<p>(1) हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पत्रकारिता के लिए इक्कीस हजार रूपये की एवं  सम्मान राशि, 1990.</p>
<p>(2) पुरस्कार मधुवन (भोपाल) द्वारा पत्रकारिता में ‘श्रेष्ठ कला आचार्य’ की उपाधि से सम्मानित, 1989.</p>
<p>(3) उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिंदी सेवा के लिए ‘पुरूषोत्तमदास टण्डन’ स्वर्ण पदक, 1988.</p>
<p>(4) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा’ ग्रंथ पर गोविंदवल्लभ पंत पुरस्कार, 1976.</p>
<p>(5) काबुल वि.वि. द्वारा अफगानिस्तान संबंधी शोधगं्रथ पर दस हजार रूपये की सम्मान राशि, 1972.</p>
<p>(6) इंडियन कल्चरल सोसायटी द्वारा ‘लाला लाजपतराय सम्मान’, 1992.</p>
<p>(7) मीडिया इंडिया सम्मान, नई दिल्ली, 1992.</p>
<p>(8) डाॅ. राममनोहर लोहिया सम्मान, कानपुर, 1990.</p>
<p>(9) प्रधानमंत्री द्वारा प्रदत्त रामधारीसिंह दिनकर शिखर सम्मान, 1992.</p>
<p>(10) छात्रकाल में राजनीतिशास्त्र, दर्शन और हिंदी में सर्वोच्च अंक पाने पर कई बार ‘स्पेशल मेरिट सर्टिफिकेट’</p>
<p><strong>मृत्यु</strong>:</p>
<p>14 मार्च 2023, गुरुग्राम</p>
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		<title>जानिए होली के अजब-गजब टोटके, जो कि जीवन के हर संकट को रोके</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Mar 2024 10:46:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>होली के अजब-गजब टोटके &#8211; हिन्दू पंचांग के अनुसार होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में यह त्यौहार दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन होलिकादहन किया जाता है, होलिकादहन के दिन लकड़ी के ढेर की पूजा की जाती है और उसकी परिक्रमा की जाती है। दूसरे दिन होली वाले [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>होली के अजब-गजब टोटके &#8211;</strong> हिन्दू पंचांग के अनुसार होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में यह त्यौहार दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन होलिकादहन किया जाता है, होलिकादहन के दिन लकड़ी के ढेर की पूजा की जाती है और उसकी परिक्रमा की जाती है। दूसरे दिन होली वाले दिन रंगों, अबीर और गुलाल से होली खेली जाती है, होली को धुलेंडी भी कहा जाता है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-17526 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?resize=614%2C352&#038;ssl=1" alt="" width="614" height="352" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?w=400&amp;ssl=1 400w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?resize=300%2C172&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 614px) 100vw, 614px" /></p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/astrology-holi-special-miraculous-tricks-2/">जानिए होली के अजब-गजब टोटके, जो कि जीवन के हर संकट को रोके</a> </div></strong></p>
<h2>होली 2024 तिथि</h2>
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा 24 मार्च को सुबह 9 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ हो रही है, जो 25 मार्च को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में होलिका दहन 24 मार्च और रंगों वाली होली 25 मार्च को खेली जाएगी।</p>
<h2>होली के अजब-गजब टोटके</h2>
<p>आज हम आपको होली पर किए जाने वाले कुछ साधारण उपाय बता रहे हैं, ये उपाय बहुत ही जल्दी शुभ फल प्रदान करते हैं। आइए जानते हैं ये खास उपाय :</p>
<h2>रोग नाश के लिए उपाय</h2>
<p><em><strong>मंत्र- ॐ नमो भगवते रुद्राय मृतार्क मध्ये संस्थिताय मम शरीरं अमृतं कुरु कुरु स्वाहा।</strong></em></p>
<p>होली वाले दिन ऊपर दिए गए मंत्र का जाप तुलसी की माला से करें। अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं, तो इस मंत्र का जाप करने से आपकी बीमारी दूर हो जाएगी।</p>
<h2>धन की कमी को दूर करने के उपाय</h2>
<p>होली की रात चंद्रमा के उदय होने के बाद अपने घर की छत पर या खुली जगह, जहां से चांद नज़र आए, वहां खड़े हो जाएं। फिर चंद्रमा का स्मरण करते हुए चांदी की प्लेट में सूखे छुहारे तथा कुछ मखाने रखकर शुद्ध घी के दीपक के साथ धूप एवं अगरबत्ती अर्पित करें।</p>
<p>अब दूध से चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य के बाद सफेद मिठाई तथा केसर मिश्रित साबूदाने की खीर अर्पित करें। चंद्रमा से समृद्धि प्रदान करने का निवेदन करें। बाद में प्रसाद और मखानों को बच्चों में बांट दें। फिर लगातार आने वाली प्रत्येक पूर्णिमा की रात चंद्रमा को दूध का अर्घ्य दें।</p>
<h2>शीघ्र विवाह के लिए उपाय</h2>
<p>होली के दिन सुबह एक साबुत पान पर साबुत सुपारी एवं हल्दी की गांठ शिवलिंग पर चढ़ाएं और पीछे पलटे बगैर अपने घर आ जाएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। जल्दी ही आपके विवाह के योग बन सकते हैं।</p>
<h2>ग्रहों की शांति के लिए उपाय</h2>
<p><em><strong>मंत्र- ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानु शशि भूमि-सुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव: सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु।।</strong></em></p>
<p>होली की रात उत्तर दिशा में बाजोट (पटिया) पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर मूंग, चने की दाल, चावल, गेहूं, मसूर, काले उड़द एवं तिल की ढेरी बनाएं। अब उस पर नवग्रह यंत्र स्थापित करें। उस पर केसर का तिलक करें, घी का दीपक लगाएं और ऊपर दिए गए मंत्र मंत्र का जाप करें। जाप स्फटिक की माला से करें। जाप पूरा होने पर यंत्र को पूजा स्थान पर स्थापित करें, ग्रह अनुकूल होने लगेंगे।</p>
<h2>व्यापार में सफलता पाने का उपाय</h2>
<p><em><strong>मंत्र- ॐ श्रीं श्रीं श्रीं परम सिद्धि व्यापार वृद्धि नम:।</strong></em></p>
<p>एकाक्षी नारियल को लाल कपड़े में गेहूं के आसन पर स्थापित करें और सिन्दूर का तिलक करें। अब मूंगे की माला से ऊपर दिए गए मंत्र का जाप करें। 21 माला जाप होने पर इस पोटली को दुकान में ऐसे स्थान पर टांग दें, जहां ग्राहकों की नज़र इस पर पड़ती रहे। इससे व्यापार में सफलता मिलने के योग बन सकते हैं।</p>
<h2>होली की पूजा कैसे करें</h2>
<p>लकड़ी और कंडों की होली के साथ घास लगाकर होलिका खड़ी करके उसका पूजन करने से पहले हाथ में <strong>असद, फूल, सुपारी, पैसा</strong> लेकर पूजन कर जल के साथ होलिका के पास छोड़ दें और <strong>अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल</strong> तथा <strong>गूलरी</strong> की माला पहनाएं।</p>
<p>इसके बाद होलिका की तीन परिक्रमा करते हुए नारियल का गोला, गेहूं की बाली तथा चना को भूंज कर इसका प्रसाद सभी को वितरित करें। होली की पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/astrology-holi-special/">आपको हर संकट से बचाएंगें, होली पर किए गए यह 7 अनोखे काम</a> </div></strong></p>
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		<title>इस शुभ महूर्त में करें होलिका दहन, रखें इन बातों का ध्यान !!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Mar 2024 10:45:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
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		<category><![CDATA[human life]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
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		<category><![CDATA[होलिका दहन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>होलिका दहन, हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें होली के एक दिन पहले यानी पूर्व सन्ध्या को होलिका का सांकेतिक रूप से दहन किया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है। होली का त्यौहार हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों के लिए विशेष होता [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>होलिका दहन, हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें होली के एक दिन पहले यानी पूर्व सन्ध्या को होलिका का सांकेतिक रूप से दहन किया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है।</p>
<p>होली का त्यौहार हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों के लिए विशेष होता हैं। यह प्रमुख पर्वो में से एक माना जाता हैं। हिंदू धर्म में होली त्यौहार दो दिवसीय होता हैं इसकी शुरुआत होलिका दहन से होती हैं।</p>
<p>यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता हैं। पुराणों में होलिका दहन और पूजा का खास महत्व होता है। इस दिन होली की पूजा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं।</p>
<p>ऐसी मान्यता है कि देवी लक्ष्मी के साथ सुख समृद्धि और खुशहाली भी आती हैं। तो आज हम आपको इस लेख में होलिका दहन के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-24795" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A4%A8.jpg?resize=696%2C364&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="364" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A4%A8.jpg?resize=300%2C157&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A4%A8.jpg?w=535&amp;ssl=1 535w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/astrology-holi-special-miraculous-tricks-2/">जानिए होली के अजब-गजब टोटके, जो कि जीवन के हर संकट को रोके</a> </div></strong></p>
<h2>होलिका दहन 2024</h2>
<p>24 मार्च को होलिका दहन है। इस दिन होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त देर रात 11 बजकर 13 मिनट से लेकर 12 बजकर 27 मिनट तक है। ऐसे में होलिका दहन के लिए आपको कुल 1 घंटे 14 मिनट का समय मिलेगा।</p>
<h2>विधि</h2>
<p>होलिका दहन के बाद जल से अर्घ्य देना चाहिए। शुभ मुहूर्त में होलिका में स्वयं या परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य से आग जलाई जाती है।</p>
<p>आग में किसी भी फसल को सेंक लें और अगले दिन इसे सपरिवार ग्रहण करें। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार के सदस्यों को रागों से मुक्ति प्राप्त होती हैं।</p>
<h2>कथा</h2>
<p>प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक असुर था। उसने कठिन तपस्या कर भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न कर वरदान मांगा कि वह न किसी मनुष्य द्वारा नहीं मारा जा सके, न पशु, न दिन- रात में, न घर के अंदर न बाहर, न किसी अस्त्र और न किसी शस्त्र के प्रहार से।</p>
<p>इस वरदान के कारण वह अहंकारी बन गया था, वह खुद को भगवान समझने लगा था। वह चाहता था कि सब उसकी पूजा करें। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा पर पाबंदी लगा दी थी।</p>
<p>हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्राद विष्णु जी का परम उपासक था। <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%81" target="_blank" rel="noopener">हिरण्यकश्यप</a> अपने बेटे के द्वारा भगवान विष्णु की आराधना करने पर बेहद नाराज रहता था, ऐसे में उसने उसे मारने का फैसला लिया।</p>
<p>हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से कहा कि वह अपनी गोद में प्रह्लाद को लेकर प्रज्जवलित आग में बैठ जाएं, क्योंकि होलिका को वरदान था कि वह अग्नि से नहीं जलेगी। जब होलिका ने ऐसा किया तो प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका जलकर राख हो गई।</p>
<h2><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-24794" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/holika-dehan-1.jpg?resize=696%2C578&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="578" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/holika-dehan-1.jpg?resize=300%2C249&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/holika-dehan-1.jpg?resize=506%2C420&amp;ssl=1 506w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/holika-dehan-1.jpg?w=650&amp;ssl=1 650w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></h2>
<h2>होलिका दहन के दिन क्या नहीं करना चाहिए</h2>
<ul>
<li>इस दिन सफेद खाद्य पदार्थ ग्रहण नहीं करना चाहिए।</li>
<li>इस दिन होलिका दहन के समय सिर ढककर ही पूजा करनी चाहिए।</li>
<li>नवविवाहित <a href="https://fundabook.com/some-interesting-facts-about-women-hindi/">महिलाओं</a> को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए।</li>
<li>सास बहू को एक साथ मिलकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए।</li>
<li>इस दिन को भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।</li>
</ul>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>होली पर इस चमत्कारी टोटके से घर में हमेशा के लिए ठहर जाएगी समृद्धि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Mar 2024 10:30:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण है। होली के आते ही वातावरण में एक मस्ती का आलम छा जाता है। होली के दिन रंगों के माध्यम से सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन<strong> हरे, पीले, लाल, गुलाबी</strong> आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण है। होली के आते ही वातावरण में एक मस्ती का आलम छा जाता है।</p>
<p>होली के दिन रंगों के माध्यम से सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस एक रंग के हो जाते हैं। हर किसी का तन-मन, प्रेम-उल्लास और उमंग के रंगों की फुहार से भर जाता है। आज हम आपको इस पोस्ट में एक टोटका बताने जा रहे हैं, जिससे घर में हमेशा के लिए समृद्धि ठहर जाती है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-17526 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?resize=673%2C385&#038;ssl=1" alt="" width="673" height="385" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?w=400&amp;ssl=1 400w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?resize=300%2C172&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 673px) 100vw, 673px" /></p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/astrology-holi-special-miraculous-tricks-2/">जानिए होली के अजब-गजब टोटके, जो कि जीवन के हर संकट को रोके</a> </div></strong></p>
<h2>कब है होली</h2>
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा 24 मार्च को सुबह 9 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ हो रही है, जो 25 मार्च को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में होलिका दहन 24 मार्च और रंगों वाली होली 25 मार्च को खेली जाएगी।</p>
<h2>क्यों मनाई जाती है होली</h2>
<p>हिन्दू मान्यताओं के अनुसार हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे। उनकी इस भक्ति से उनके पिता हिरण्यकश्यप नाखुश थे, इसीलिए उनके पिता ने अपने पुत्र को भगवान की भक्ति से हटाने के लिए कई प्रयास किए।</p>
<p>हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जल सकेगी। एक बार हिरण्यकश्यप ने अपनी ही बहन होलिका के जरिए प्रह्लाद को जिंदा जला देने का आदेश दिया, लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।</p>
<p>जब होलिका प्रह्लाद को जलाने के लिए आग में बैठी, तो वह खुद जल कर मर गई। तभी से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में जाना जाता है और हिन्दू धर्म में होलिका दहन की परंपरा प्रचलित है। होलिका दहन से अगले दिन दुलहंडी (होली) खेला जाता है।</p>
<h2>होली का मटकी टोटा</h2>
<p>जिस स्थान पर होली जलाई जाती रही हो, वहां पर होली जलने से एक दिन पहले की रात में एक मटकी में गाय का घी, तिल का तेल, गेहूं और ज्वार तथा एक तांबे का पैसा रखकर मटकी का मुंह बंद करके गाड़ आएं।</p>
<p>रात्रि में जब होली जल जाए, तब दूसरे दिन सुबह उसे उखाड़ लाएं। फिर यह सारी वस्तुएं पोटली में बांधकर जिस जगह रख दी जाएगी, वहां समृद्धि रूक जाएगी। घर में फिर किसी चीज की कभी कमी नहीं होगी।</p>
<h2>होली पूजन विधि</h2>
<p>लकड़ी और कंडों की होली के साथ घास लगाकर होलिका खड़ी करके उसका पूजन करने से पहले हाथ में असद, फूल, सुपारी, पैसा लेकर पूजन कर जल के साथ होलिका के पास छोड़ दें और अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल तथा गूलरी की माला पहनाएं।</p>
<p>इसके बाद होलिका की तीन परिक्रमा करते हुए नारियल का गोला, गेहूं की बाली तथा चना को भूंज कर इसका प्रसाद सभी को वितरित करें। होली की पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/easy-and-accurate-tricks-of-attaining-lakshmi/">लक्ष्मी व धन लाभ प्राप्ति के आसान व अचूक टोटके</a> </div></strong></p>
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		<title>जन्मदिन विशेष : अल्बर्ट आइंस्टीन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य</title>
		<link>https://fundabook.com/interesting-facts-about-albert-einstein/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Mar 2024 09:44:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interesting Facts]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[Albert Einstein]]></category>
		<category><![CDATA[Father of Modern Physics]]></category>
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		<category><![CDATA[आइंस्टीन का दिमाग]]></category>
		<category><![CDATA[रोचक तथ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>“फादर ऑफ मॉडर्न फिजिक्स” कहे जाने वाले अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी में हुआ था। अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म जर्मनी में वुटेमबर्ग के एक यहूदी परिवार में हुआ। आइंस्टीन के पिता एक इंजीनियर और सेल्समैन थे तथा उनकी मां पौलिन एक आइंस्टीन थी। आइंस्टीन को दुनिया का सबसे महान वैज्ञानिक माना जाता है, लेकिन क्या [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>“फादर ऑफ मॉडर्न फिजिक्स”</strong> कहे जाने वाले अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी में हुआ था।</li>
<li><strong>अल्बर्ट आइंस्टीन </strong>का जन्म जर्मनी में <strong>वुटेमबर्ग</strong> के एक <strong>यहूदी परिवार</strong> में हुआ।<strong> आइंस्टीन</strong> के पिता एक <strong>इंजीनियर</strong> और सेल्समैन थे तथा उनकी मां पौलिन एक <strong>आइंस्टीन</strong> थी।</li>
<li>आइंस्टीन को दुनिया का सबसे महान वैज्ञानिक माना जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि वह बचपन में <strong>पढ़ने</strong> और <strong>लिखने</strong> में कमजोर और धीमे थे। एक बार वह <strong>यूनिवर्सिटी</strong> में दाखिले के लिए पहले <strong>एंट्रेंस एग्जाम</strong> में फेल हो गए थे।</li>
<li>मशहूर वैज्ञानिक आइंस्टीन का दिमाग एक डॉक्टर द्वारा चोरी कर लिया गया था, जिसने उनके शरीर के साथ परीक्षण किए। उस डॉक्टर ने आइंस्टीन का दिमाग 20 वर्षों तक एक जार में संभाल कर रखा था।</li>
<li>ऐल्बर्ट आइंस्टाइन ने कभी भी मोज़े नहीं पहने और न ही ज़िंदगी में कभी शेविंग क्रीम का उपयोग किया।</li>
<li><strong>ज्यूरिख विश्वविद्यालय</strong> में उनको प्रोफेसर की नियुक्ति मिली और लोगों ने उन्हें महान वैज्ञानिक मानना शुरू कर दिया। इन्हें लोगों के द्वारा महान वैज्ञानिक का दर्जा दिया गया और यही से इनकी चर्चा सम्पूर्ण विश्व में होने लगी।</li>
<li>आइंस्टीन अपनी खराब याददाश्त के लिए बदनाम थे। अक्सर वह <strong>तारीखें</strong>, <strong>नाम</strong> और <strong>फोन नंबर</strong> भूल जाते थे।</li>
<li>1952 में अमेरिका ने ऐल्बर्ट आइंस्टाइन को इजरायल का राष्ट्रपति बनने की पेशकश की, परन्तु आइंस्टीन ने यह पेशकश यह कहकर ठुकरा दी कि वह राजनीति के लिए नहीं बने।</li>
<li>आइंस्टीन अपने ऑटोग्राफ के लिए <strong>$5</strong> और भाषण के लिए <strong>$1000</strong> लेते थे, ये सारा पैसा वह गरीबों में दान कर देते थे।</li>
<li>एक बार आइंस्टीन से किसी ने प्रकाश की गति पूछी, तो वो कहते थे, मैं वो चीज़ याद नहीं रखता हूँ, जो कि किताबों में देख के बताई जाती है।</li>
<li>आइंस्टीन ने कई नए विचारों की खोज की, जिसमें से <strong>सापेक्षतावाद का सिद्धांत</strong> (Theory of Relativity; <strong>E=mc^2</strong>) बहुत प्रसिद्ध हैं।</li>
<li>सापेक्षता के सिद्धांत की मदद से आइंस्टीन ने यह अनुमान लगाया था की ब्रह्माण्ड के बढ़ने की कोई निश्चित दर नहीं है, ब्रह्माण्ड की सभी चीज़े एकदूसरे के सापेक्ष बढ़ रही हैं। इसलिए इसे सामान्य सापेक्षता का सिध्धांत कहाँ जाता है।</li>
</ul>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/albert-einstein-biography/">अल्बर्ट आइंस्टीन जीवनी</a> </div></strong></p>
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