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	<title>America Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>मार्टिन लूथर किंग के बारे में रोचक तथ्य एवं जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Mar 2024 07:41:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[America]]></category>
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		<category><![CDATA[Martin Luther King]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मार्टिन लूथर किंग जूनियर अमेरिका के एक पादरी, आन्दोलनकारी (ऐक्टिविस्ट), एवं अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकारों के संघर्ष के प्रमुख नेता थे। उन्हें अमेरिका का गांधी भी कहा जाता है। उनके प्रयत्नों के परिणामस्वरूप अमेरिका में मतदान अधिकार अधिनियम पारित हुआ। इस कानून ने अफ्रीकी अमेरिकियों को वोट देने के अपने अधिकार का प्रयोग करने में मदद [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>मार्टिन लूथर किंग जूनियर अमेरिका के एक पादरी, आन्दोलनकारी (ऐक्टिविस्ट), एवं अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकारों के संघर्ष के प्रमुख नेता थे।</p>
<p>उन्हें अमेरिका का गांधी भी कहा जाता है। उनके प्रयत्नों के परिणामस्वरूप अमेरिका में मतदान अधिकार अधिनियम पारित हुआ। इस कानून ने अफ्रीकी अमेरिकियों को वोट देने के अपने अधिकार का प्रयोग करने में मदद की।</p>
<p>आज इस पोस्ट में हम जानेगें मार्टिन लूथर किंग के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य एवं जानकारी, चलिए शुरू करते हैं।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-61718 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/03/Interesting-facts-information-about-Martin-Luther-King.gif?resize=600%2C353&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="353" /></p>
<h2>जन्म के समय उनका नाम मार्टिन नहीं था</h2>
<p>किंग का जन्म 15 जनवरी 1929 को <strong>अटलांटा, जॉर्जिया</strong> में <strong>माइकल किंग जूनियर</strong> के रूप में हुआ था। उनके पिता माइकल, अटलांटा के <strong>एबेनेज़र बैपटिस्ट चर्च</strong> के पादरी थे। वे बैपटिस्ट वर्ल्ड एलायंस के लिए रोम, मिस्र, जेरूसलम और बर्लिन जैसे स्थानों की विदेश यात्रा के दौरान प्रोटेस्टेंट सुधार नेता मार्टिन लूथर के काम से बहुत प्रेरित हुए।</p>
<p>स्टैनफोर्ड में मार्टिन लूथर किंग जूनियर रिसर्च एंड एजुकेशन इंस्टीट्यूट के अनुसार, जब वे 1934 में वापस लौटे, तो उन्होंने अपना और अपने बेटे का नाम माइकल किंग से बदलकर मार्टिन लूथर किंग रखने का फैसला किया।</p>
<p>1957 में मार्टिन लूथर जब 28 वर्ष के थे तब उन्होंने आधिकारिक तौर पर अपने जन्म प्रमाण पत्र पर नाम माइकल किंग जूनियर से बदलकर मार्टिन लूथर किंग जूनियर कर लिया था।</p>
<h2>किंग ने 15 साल की उम्र में कॉलेज शुरू कर दिया था</h2>
<p>एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका से किंग की जीवनी के अनुसार, 1944 में किंग ने एक युद्धकालीन कार्यक्रम के तहत अटलांटा के मोरहाउस कॉलेज में प्रवेश किया, जिसमें प्रतिभाशाली हाई स्कूल के छात्रों को प्रवेश दिया गया।</p>
<p>उनका शुरू में नेता बनने का इरादा नहीं किया था, लेकिन पीएच.डी. के लिए अध्ययन करते समय बोस्टन विश्वविद्यालय में, मार्टिन लूथर को धर्मशास्त्री और नागरिक अधिकार नेता हॉवर्ड थुरमन ने मार्गदर्शन दिया था, जिनका उन पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा।</p>
<h2>मार्टिन लूथर का परिवार</h2>
<p>18 जून 1953 में उनकी मुलाकात संगीत की छात्रा और महत्वाकांक्षी गायिका <strong>कोरेटा स्कॉट</strong> से हुई और उन्होंने उनसे शादी की। उनके चार बच्चे थे: योलान्डा, मार्टिन लूथर किंग III, डेक्सटर स्कॉट और बर्निस।</p>
<figure id="attachment_61716" aria-describedby="caption-attachment-61716" style="width: 600px" class="wp-caption aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="wp-image-61716 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/03/Martin-Luther-King-family.gif?resize=600%2C605&#038;ssl=1" alt="Interesting facts and information about Martin Luther King" width="600" height="605" /><figcaption id="caption-attachment-61716" class="wp-caption-text">मार्टिन लूथर किंग अपनी पत्नी कोरेटा स्कॉट और बच्चों के साथ</figcaption></figure>
<h2>वह ग्रैमी विजेता थे</h2>
<p>किंग को 1970 में मरणोपरांत ग्रैमी से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 1967 में दिए गए एक उपदेश से रिकॉर्ड किए गए &#8220;<strong>व्हाई आई ओपोज़ द वॉर इन वियतनाम</strong>&#8221; के लिए सर्वश्रेष्ठ स्पोकन वर्ड एल्बम का पुरस्कार जीता।</p>
<p>उन्हें पहले &#8220;<strong>आई हैव ए ड्रीम</strong>&#8221; और &#8220;<strong>वी शैल ओवरकम</strong>&#8221; की रिकॉर्डिंग के लिए स्पोकन-वर्ड श्रेणी में भी ग्रैमी के लिए नामांकित किया गया था।</p>
<h2>1958 में भी उन पर पहला हत्या के प्रयास किया गया था</h2>
<p>1968 में लोरेन मोटल में उनकी हत्या से लगभग एक दशक पहले भी उन पर हत्या का प्रयास हुआ था। 20 सितंबर, 1958 को 29 वर्षीय किंग न्यूयॉर्क शहर में एक पुस्तक पर हस्ताक्षर कर रहे थे, जब इज़ोला वेयर करी नाम की औरत ने उनसे पूछा, क्या आप मार्टिन लूथर किंग है? जब किंग ने जवाब दिया, &#8220;हां,&#8221; तो करी ने लेटर ओपनर उनके सीने में घोंप दिया था।</p>
<h2>मोंटगोमरी बस बहिष्कार भाषण &#8211; मोंटगोमरी, अलबामा, 5 दिसंबर, 1955 को</h2>
<p>जब रोजा पार्क्स को सिटी बस में अपनी सीट छोड़ने से इनकार करने के लिए गिरफ्तार किया गया, तो उसने मोंटगोमरी बस बहिष्कार को बढ़ावा दिया और किंग को सार्वजनिक भाषण देने का पहला मौका दिया। इसी भाषण में उन्होंने अपने कुछ प्रसिद्ध विचारों को प्रस्तुत किया, जिनमें अहिंसक विरोध भी शामिल था।</p>
<p>भाषण ने उनको राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया और उन्हें नागरिक अधिकार आंदोलन में सबसे आगे चलने वालों में से एक बना दिया। मोंटगोमरी बस बहिष्कार 381 दिनों तक चला लेकिन अंततः अलबामा में सार्वजनिक बसों पर नस्लीय अलगाव को समाप्त कर दिया गया। इसमें 100 से अधिक अन्य लोगोंको भी गिरफ्तार किया गया था।</p>
<figure id="attachment_61720" aria-describedby="caption-attachment-61720" style="width: 700px" class="wp-caption aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="wp-image-61720 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/03/Martin-Luther-King-and-roza-parks-fotor-20240306121625.jpg?resize=700%2C525&#038;ssl=1" alt="" width="700" height="525" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/03/Martin-Luther-King-and-roza-parks-fotor-20240306121625.jpg?w=700&amp;ssl=1 700w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/03/Martin-Luther-King-and-roza-parks-fotor-20240306121625.jpg?resize=300%2C225&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/03/Martin-Luther-King-and-roza-parks-fotor-20240306121625.jpg?resize=150%2C113&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/03/Martin-Luther-King-and-roza-parks-fotor-20240306121625.jpg?resize=696%2C522&amp;ssl=1 696w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /><figcaption id="caption-attachment-61720" class="wp-caption-text">मोंटगोमरी बस बहिष्कार के वर्षों बाद रोजा पार्क्स और मार्टिन लूथर किंग जूनियर</figcaption></figure>
<h2>किंग के &#8220;आई हैव ए ड्रीम&#8221; भाषण में 250,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे।</h2>
<p>अगस्त 1963 में नौकरियों और स्वतंत्रता के लिए वाशिंगटन में मार्च के दौरान दिए गए भाषण को सुनने के लिए दुनिया भर से लोग आए थे। नेशनल कॉन्स्टिट्यूशन सेंटर के अनुसार, जब किंग ने वाशिंगटन, डीसी में अपना प्रसिद्ध &#8220;आई हैव ए ड्रीम&#8221; भाषण दिया था तब 250,000 से अधिक लोग उपस्थित थे।</p>
<h2>किंग को 1964 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था</h2>
<p>1964 में समान नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। वह 35 वर्ष की उम्र में नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे। सम्मान के साथ, उन्हें $54,600 दिए गए थे, जिसे उन्होंने आंदोलन को दान कर दिया था।</p>
<h2>सेल्मा, अलबामा, 25 मार्च 1965</h2>
<p>मार्च 1965 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अफ्रीकी अमेरिकी मतदान अधिकारों के लिए लड़ने के लिए सेल्मा से मोंटगोमरी, अलबामा तक 25,000 लोगों के साथ मार्च किया। मार्च के अंत में मार्टिन लूथर ने &#8221; हमारा ईश्वर आगे बढ़ रहा है &#8221; भाषण दिया, जो नागरिक अधिकार आंदोलन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।</p>
<p>कानूनी और राजनीतिक अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय किंग के भाषण ने आंदोलन को आर्थिक समानता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। भाषण के अंत में किंग ने कॉल-एंड-रिस्पॉन्स तकनीक का इस्तेमाल किया जिसने इस भाषण को वास्तव में प्रतिष्ठित बना दिया।</p>
<h2>किंग महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थे</h2>
<p>किंग <a href="https://fundabook.com/top-10-lesson-we-can-learn-from-mahatma-gandhi-life/">महात्मा गांधी</a> से बहुत प्रभावित थे। मदरसा के छात्र के रूप में पढ़ाई के दौरान किंग पहली बार गांधीजी के शांतिपूर्ण तरीकों से परिचित हुए। वह उस व्यक्ति से कभी नहीं मिल पाए जिसके वे इतने बड़े प्रशंसक थे, लेकिन 1959 में वह एक महीने की लंबी यात्रा के लिए भारत आए, जहां वह गांधी के कई रिश्तेदारों से मिले।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-61717 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/03/Interesting-facts-information-Martin-Luther-King.gif?resize=600%2C386&#038;ssl=1" alt="Interesting facts and information about Martin Luther King " width="600" height="386" /></p>
<h2>अन्य तथ्य</h2>
<ul>
<li>एक बच्चे के रूप में किंग को बताया गया था कि वह अपने श्वेत मित्र के साथ नहीं खेल सकता क्योंकि काले और श्वेत बच्चों को एक साथ नहीं रहना चाहिए ।</li>
<li>मई 1957 में किंग ने वाशिंगटन में तीर्थयात्रा के दौरान अपना प्रसिद्ध &#8220;<strong>गिव अस द बैलट</strong>&#8221; भाषण दिया।</li>
<li>उनके अंतिम महान भाषण को &#8220;<strong>आई हैव बीन टू द माउंटेन टॉप</strong>&#8221; संबोधन के रूप में जाना जाता है और यह 3 अप्रैल, 1968 को उनकी मृत्यु से एक दिन पहले दिया गया था।</li>
<li>4 अप्रैल 1968 को मेम्फिस, टेनेसी में मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्या कर दी गई थी। उन्हें जेम्स अर्ल रे ने गोली मार दी थी। कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि किंग की हत्या एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी और रे सिर्फ बलि का बकरा था।</li>
<li>किंग का पसंदीदा गाना &#8220;<strong>टेक माई हैंड, प्रीशियस लॉर्ड</strong>&#8221; था। यह गाना उनके अंतिम संस्कार में उनकी दोस्त <strong>महलिया जैक्सन</strong> ने गाया था।</li>
<li>अपने जीवन के अंत में किंग ने अपना ध्यान नागरिक अधिकारों से हटकर गरीबी उन्मूलन और वियतनाम युद्ध को रोकने के अभियानों पर केंद्रित कर दिया था।</li>
<li>लोरेन मोटल जहां मार्टिन लूथर की हत्या हुई थी, अब राष्ट्रीय नागरिक अधिकार संग्रहालय का स्थान है।</li>
<li>उनकी मृत्यु के बाद किंग को 1977 में प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ़ फ़्रीडम और 2004 में कांग्रेसनल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।</li>
</ul>
<figure id="attachment_61719" aria-describedby="caption-attachment-61719" style="width: 600px" class="wp-caption aligncenter"><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-61719 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/03/Interesting-facts-and-information-about-Martin-Luther-King.gif?resize=600%2C450&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="450" /><figcaption id="caption-attachment-61719" class="wp-caption-text">एक भाषण के दौरान मार्टिन लूथर किंग जूनियर</figcaption></figure>
<ul>
<li>1983 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने एक विधेयक पर हस्ताक्षर किए, जिसने मार्टिन लूथर किंग को सम्मानित करने के लिए एक संघीय अवकाश बनाया, लेकिन 2000 तक ऐसा नहीं हुआ क्योंकि कुछ राज्य नई छुट्टी को अपनाने के लिए अनिच्छुक थे, लेकिन वर्ष 2000 के बाद से, सभी 50 राज्यों ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर दिवस मनाया है।</li>
</ul>
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		<title>ऐसे दस कारण जिसकी वजह से भारत दुनिया में सुपर पॉवर नहीं बन सकता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Oct 2018 09:15:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[America]]></category>
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		<category><![CDATA[indias negative]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[Super Power]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>10 कारण जिसकी वजह से भारत कभी सुपर पॉवर देश नहीं बन पायेगा. क्या भारत अमेरिका, रूस, चीन की तरह एक महाशक्ति (Super Power) देश बन पायेगा? इस सवाल का जवाब शायद हर भारतीय जानना चाहेगा. वर्तमान में भारत जिस तरह की समस्याओं का सामना कर रहा है, उस से तो लगता है कि भारत [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>10 कारण जिसकी वजह से भारत कभी सुपर पॉवर देश नहीं बन पायेगा.<br />
क्या भारत अमेरिका, रूस, चीन की तरह एक महाशक्ति (Super Power) देश बन पायेगा? इस सवाल का जवाब शायद हर भारतीय जानना चाहेगा. वर्तमान में भारत जिस तरह की समस्याओं का सामना कर रहा है, उस से तो लगता है कि भारत का महाशक्ति बनने का सपना सिर्फ सपना ही रह जायेगा.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-2998" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2015/08/10-reason-why-india-will-not-become-the-super-power.jpg?resize=600%2C500&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="500" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2015/08/10-reason-why-india-will-not-become-the-super-power.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2015/08/10-reason-why-india-will-not-become-the-super-power.jpg?resize=300%2C250&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2015/08/10-reason-why-india-will-not-become-the-super-power.jpg?resize=504%2C420&amp;ssl=1 504w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<h2>धार्मिक उग्रवाद</h2>
<p>भारत में धार्मिक उग्रवाद की समस्या बहुत लंबे समय से है, जो भारत की तरक्की के रास्ते को बहुत मुश्किल बना देती है. भारत के इतिहास में ऐसी कई घटनाएँ हो चुकी हैं, जिनके पीछे धार्मिक उग्रवाद मुख्य कारण था.</p>
<h2>वामपंथी उग्रवाद</h2>
<p>भारत में नक्सलियों द्वारा वामपंथी उग्रवाद चलाया जाता है, जो भारत की पिछले एक दशक से सबसे बढ़ी समस्या बनी हुई है. नक्सलियों ने भारत के कई हिस्सों में अपना अधिकार जमाया हुआ है और यह नक्सली साल में कई बार हमला करते हैं. यह नक्सली समाजिक और राजनितिक ताकतों में आने वाली अस्थिरता की वजह से वजूद में आये. इस उग्रवाद के चलते भारत कभी भी सुपर पॉवर बनने के बारे में सोच भी नहीं सकता.</p>
<h2>भ्रष्टाचार</h2>
<p>भारत में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ी समस्या है. जिसकी वजह से भारत में 2 जी, कैग जैसे घोटाले हुए. यह समस्या बहुत ही गंभीर है. जिसकी वजह से भारत में विदेशी निवेश बहुत कम है और जिससे दुनिया के विकसित देश यहां पर व्यपार चलाने का जोखिम नहीं लेते. इस समस्या से भारत में गरीब ओर गरीब और अमीर ओर अमीर होते जा रहे हैं.</p>
<h2>सार्वजनिक संस्थाओं का पतन</h2>
<p>भारत की उच्च न्यायपालिका को छोड़कर भारत के विश्वविद्यालय, पुलिस विभाग, सिविल सेवाएं, न्यापालिकाएं तेज़ी से पतन की तरफ जा रहे हैं. यह विभाग लोगों को अच्छी सेवाएं देने से बुरी तरह से असफल रहे हैं.</p>
<h2>अमीर और गरीब में अंतर</h2>
<p>भारत में अमीर और गरीब लोगों में खाई बढ़ती ही जा रही है, भारत में किसानों द्वारा की जाने वाली आत्महत्याओं ने ही पूरे देश का ध्यान यहां पर रहने वाले गरीबों की तरफ खींचा है. जिससे भारत में पिछले 10-15 वर्षों से गरीबों की स्थिति को सुधारने के प्रयास किये जा रहे हैं. भारत को अगर दुनिया में सुपर पॉवर बनना है, तो सबसे पहले देश में गरीबी की समस्या को खत्म करना होगा. जिसको शायद कई दशक लग जायेंगे.</p>
<p><a href="https://fundabook.com/10-things-you-will-hate-about-india-as-tourist/">एक पर्यटक के नजरिये से भारत के बारे में 10 सबसे बुरी बातें</a></p>
<h2>पर्यावरणीय दुर्दशा</h2>
<p>भारत के पर्यावरण में भी एक स्थानीय स्तर पर गिरावट हो रही है, इसमें से नदियों में रसायनिक प्रदूशन, भूमिगत जलवाही स्तर में भारी कमी और नदियों के पानी का सूखना मुख्य हैं. जिसने लोगों के जीवन को बहुत बुरी तरह से प्रभावित किया है. भारत को विकसित देश बनने से पहले इन कुदरती स्रोतों को बचाना होगा.</p>
<h2>मीडिया की उदासीनता</h2>
<p>भारतीय मीडिया कई मुख्य मुद्दे जैसे की बढ़ती आय में असमानता और पर्यावरण की समस्याओं को कवर करने में बुरी तरह से असफल रही है.</p>
<h2>राजनितिक अराजकता</h2>
<p>भारत में राजनितिक अराजकता भी मुख्य मुद्दा है, जिसका मुख्य कारण यहां की केंद्र और राज्य की सरकारों के बीच गठबंधन की कमी है, जिसके परिणामस्वरूप लोगों के लिए लंबे समय की अच्छी स्वास्थ्य, शिक्षा आदि नीतियाँ बनाने में बहुत मुश्किलें आती है.</p>
<h2>अस्थिर पढ़ोसी</h2>
<p>भारत के लंबे समय से अपने पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान से सीमा को लेकर मतभेद दिन पर दिन बढ़ रहे हैं. जिसकी वजह से भारत की सरकार को सीमा रक्षा बजट भी बढ़ाना पड़ता है और ज्यादातर धन लोगों की भलाई में ना लगकर रक्षा बजट में लग जाता है.</p>
<h2>सीमा विवाद</h2>
<p>भारत में आज़ादी के 68 साल बाद भी अनसुलझे सीमा विवाद हैं. इन विवादों में मुख्य कश्मीर और भारत के उत्तर पूर्वी (नागालैंड और मणिपुर) हिस्से हैं. जो भारत का हिस्सा नहीं बनना चाहते और इन हिस्सों में आतंकवाद भी सबसे ज्यादा है.</p>
<p>यह भी पढ़ें:-</p>
<p><a href="https://fundabook.com/amazing-facts-about-the-indian-railways/">भारतीय रेल के बारे में आश्चर्यजनक तथ्य</a></p>
<p><a href="https://fundabook.com/top-10-corruption-scams-in-india/">भारत में अब तक के 10 सबसे बड़े घोटाले</a></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/10-reason-why-india-will-not-become-the-super-power/">ऐसे दस कारण जिसकी वजह से भारत दुनिया में सुपर पॉवर नहीं बन सकता</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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		<title>अमेरिकी संसद का लोकप्रिय &#8216;कैंडी डैस्क&#8217;</title>
		<link>https://fundabook.com/the-popular-candy-desk-of-the-american-parliament/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Sep 2018 09:45:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>अमेरिकी संसद के सीनेट में दाहिनी ओर के एक मेज का दराज हमेशा टॉफियों और चॉकलेट से भरा रहता है। मीठा पसंद करने वाले सीनेटर इस &#8216;कैंडी डैस्क&#8217; का लाभ कभी भी ले सकते हैं। हालांकि, इसे डैमोक्रेट्स का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यह &#8216;कैंडी डैस्क&#8217; सीनेट में रिपब्लिकन्स वाले हिस्से में है। ‘कैंडी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी संसद के सीनेट में दाहिनी ओर के एक मेज का दराज हमेशा टॉफियों और चॉकलेट से भरा रहता है। मीठा पसंद करने वाले सीनेटर इस &#8216;कैंडी डैस्क&#8217; का लाभ कभी भी ले सकते हैं। हालांकि, इसे डैमोक्रेट्स का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यह &#8216;कैंडी डैस्क&#8217; सीनेट में रिपब्लिकन्स वाले हिस्से में है।</p>
<p>‘कैंडी डैस्क&#8217; की परम्परा 1965 में शुरू हुई, जब सीनेटर जॉर्ज मर्फी हमेशा अपने सहयोगियों के लिए अपने मेज की दराज में कैंडी रखा करते थे। 1971 में उनके सीनेट छोड़ने के बाद उनके उत्तराधिकारियों ने इस परम्परा को जारी रखा। चैम्बर में खाने पर भले ही पाबंदी हो, लेकिन कोई भी चॉकलेट्स से दूर नहीं रहना चाहता है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-14274" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/09/candy-desk.jpg?resize=600%2C338&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="338" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/09/candy-desk.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/09/candy-desk.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p>इस परम्परा की शुरूआत एक ऐसे व्यक्ति ने की जिसे मीठा खूब पसंद था और वह हमेशा इन्हें अपने पास रखता था। फिर उसने पाया कि उसका कैंडी और चॉकलेट से भरे दराज वाला मेज रुकने, मुंह मीठा करने तथा गुफ्तगू करने की एक लोकप्रिय जगह बन गया है।</p>
<p>मर्फी का मेज चैम्बर के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले प्रवेश द्वार के निकट है। जिस ढंग से सीनेट में सीटें विभाजित हैं। &#8216;कैंडी डैस्क&#8217; के कभी भी डैमोक्रेट्स के पास जाने की सम्भावना नहीं है। इस बात में भी सभी की रुचि रहती है कि किस सीनेटर को ‘कैंडी डैस्क&#8217; मिलेगा।</p>
<p>इसका हकदार वह सीनेटर होता है जिसे सीनेट में सबसे ज्यादा वक्त हो चुका हो। इस मेज को जीतने वाला सीनेटर आमतौर पर अपने राज्य की कंफैक्शनरी इंडस्ट्री के संकेत को अपने डैस्क पर लटकाता है और कैंडी डैस्क में रखने के लिए केंडी और चॉकलेट उसी के राज्य की कंफैक्शनरी इंडस्ट्री दान करती है।</p>
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<p>यद्यपि सीनेटर्स द्वारा 100 डॉलर से ज्यादा मूल्य के उपहार प्राप्त करने पर पाबंदी है, यह रोक उन उत्पादों पर लागू नहीं होती जो उनके गृह राज्य में निर्मित हों और जिन्हें तीसरे पक्ष को दिया जाए। पैट टूमी से पहले &#8216;कैंडी डैस्क&#8217; पर बैठने वाले मार्क किर्क ने इसे मार्स बार, मिल्की वे, जैली बेलीज से भर दिया था। जो सभी उनके राज्य इलिनोइस में बनने वाली कंफैक्शनरी हैं।</p>
<p>उनसे पहले &#8216;कैंडी डैस्क&#8217; पर पूर्व राष्ट्रपति उम्मीदवार जॉन मैक्केन शामिल रहे हैं। पैट टूमी को यह सीट अंतिम वर्ष ही मिली है। वह कहते हैं, सभी जानते हैं कि पैंसिलवेनिया अमेरिका की कैंडी राजधानी है।</p>
<p>यह एकदम सही है कि मुझे कैंडी मैन बनाया गया। उनका राज्य 200 कंफैक्शनरी कम्पनियों का केंद्र है और वह अपने &#8216;कैंडी डैस्क&#8217; को भर कर रखते हैं। यहां तक कि डैमोक्रेट्स भी कैंडी डैस्क पर आते हैं। उन्होंने भी कैंडी और चॉकलेट्स रखनी शुरू कर दी हैं लेकिन उन्हें उन पर अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है।</p>
<p>Read in English:-</p>
<p><a href="http://en.fundabook.com/the-popular-candy-desk-of-the-american-parliament/">The popular ‘candy desk’ of the American Parliament</a></p>
<p>Read More:</p>
<p><a href="https://fundabook.com/mummy-gets-new-head-look/">ममी को मिला नया अवतार, लगा नया सिर!</a></p>
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		<title>कैश और कार्ड की जरूरत नहीं: स्टोर में आएं, सामान लें और चले जाएं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Sep 2018 11:28:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[तकनीक]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Amazon]]></category>
		<category><![CDATA[America]]></category>
		<category><![CDATA[foreign]]></category>
		<category><![CDATA[technology]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अमेरिका में 2016 में अमेजन (Amazon) ने स्टोर खोला था। ग्रोसरी स्टोर, जहां न कैशियर हैं न लंबी लाइनें, चेकआउट की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। अमेजन गो ने यहां कन्वीनियंस स्टोर &#8216;अमेजन गो&#8217; शुरू किया था। कस्टमर को यहां जो भी सामान पसंद आए, ट्रॉली में रखकर घर ले जाएं। उसे खरीदारी के बाद बिलिंग [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका में 2016 में अमेजन (Amazon) ने स्टोर खोला था। ग्रोसरी स्टोर, जहां न कैशियर हैं न लंबी लाइनें, चेकआउट की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। अमेजन गो ने यहां कन्वीनियंस स्टोर &#8216;अमेजन गो&#8217; शुरू किया था। कस्टमर को यहां जो भी सामान पसंद आए, ट्रॉली में रखकर घर ले जाएं। उसे खरीदारी के बाद बिलिंग के लिए लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। रही बात पेमेंट की तो वो कंपनी में बनाए गए यूजर के अकांउट से डिडक्ट हो जाएगा।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-14234" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/09/amazon_go.jpg?resize=600%2C400&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="400" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/09/amazon_go.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/09/amazon_go.jpg?resize=300%2C200&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<h3>एंट्री से पहले ऑन करना होगा ऐप</h3>
<ul>
<li>सिएटल में 1800 स्क्वेयर फीट में बने इस स्टोर में एंट्री के लिए अपने स्मार्टफोन में अमेजन के खास ऐप को खोलना होगा और सेंसर के पास जाना होगा। स्टोर का गेट खुल जाएगा।</li>
<li>स्टोर में जाने वाले हर कस्टमर की टैगिंग होगी। स्टोर का सर्विलांस सिस्टम कस्टमर की पहचान कर लेगा और स्टोर में कहीं पर भी हों, उन पर नजर रख सकेगा।</li>
<li>कस्टमर जिस भी शेल्फ के सामने रुकेंगे, वहां उनकी इमेज कैप्चर हो जाएगी।</li>
<li>यह भी कैप्चर होगा कि उन्होंने कौन-सा सामान उठाया और किसे वापस रख दिया।</li>
</ul>
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<h3>जो सामान ट्रॉली में गया उसी की होगी बिलिंग</h3>
<ul>
<li>कैमरा वो सभी इमेज कैप्चर करेगा जिस दौरान सामान कस्टमर के हाथ में है, ताकि तय हो सके कि सामान वापस शेल्फ में रखा गया या ट्रॉली में रख लिया गया है।</li>
<li>जो सामान वापस अपनी जगह पर रख दिया जाएगा, उसकी बिलिंग नहीं होगी।</li>
<li>स्टोर के शेल्फ में इन्फ्रारेड, प्रेशर और लोड सेंसर भी लगाए गए हैं, जो सामान उठाने से रखने तक की पूरी प्रॉसेस को नोट करेंगे।</li>
<li>स्टोर में सेल्फ ड्राइविंग कार में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी (कम्प्यूटर विजन, सेंसर फ्यूजन और डीप लर्निंग) इस्तेमाल की गई है। इससे पता लगता है कि कौन-सा सामान उठाया या वापस रखा गया है।</li>
<li>ट्रॉली भी वर्चुअल कार्ट की तरह काम करती है (ऑनलाइन शॉपिंग की तरह)।</li>
</ul>
<h3>माइक्रोफोन से भी होगी कस्टमर की पहचान</h3>
<ul>
<li>स्टोर में जगह-जगह माइक्रोफोन भी लगाए गए हैं, जिससे कस्टमर्स को आवाज के जरिए भी पहचाना जा सकेगा।</li>
<li>स्टोर से खरीदे गए सामान का बिल कस्टमर को बाहर निकलते समय मिल जाएगा और उसकी रिसिप्ट उनके मोबाइल पर भेज दी जाएगी।</li>
</ul>
<p>वॉलमार्ट (Walmart) भी अमेज़ॅन गो स्टोर योजना के समान कैशियर के बिना एक स्वचालित स्टोर का परीक्षण कर रहा है।</p>
<p>Read in English :-</p>
<p><a href="http://en.fundabook.com/no-cash-or-card-needed-come-to-the-store-pick-up-the-stuff-and-go-away/">No Cash or Card Needed: Come to the store, pick up the stuff and go away</a></p>
<p>Read more:</p>
<p><a href="https://fundabook.com/now-the-chinese-started-the-construction-of-waterfalls-in-the-building/">चीनीओं का नया कमाल, अब बनने लगीं झरने वाली इमारतें</a></p>
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		<title>भूतहा जेल जहाँ भटकती आत्मा खींचती है लोगों के बाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Jun 2017 06:01:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[OMG!!]]></category>
		<category><![CDATA[हॉरर]]></category>
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		<category><![CDATA[essex county jail]]></category>
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		<category><![CDATA[nevark Street Prison]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आपने भूत-प्रेतों से जुड़े बहुत सारे किस्से सुने होंगे. भूतों को लेकर लोगों द्वारा अलग-अलग तर्क दिए जाते हैं. भूत होते हैं या नहीं यह बहस का विषय है लेकिन इस पोस्ट को पढ़ कर शायद आपके रौंगटे खड़े हो जाएँ क्योंकि यहाँ हम अमेरिका की एक भूतहा जेल और उसमें रहने वाले भूत की [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/haunted-jail-nevark-ghost-pulls-visitor-hair/">भूतहा जेल जहाँ भटकती आत्मा खींचती है लोगों के बाल</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>आपने<a href="https://fundabook.com//?s=+%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82" target="_blank" rel="noopener noreferrer"> भूत-प्रेतों</a> से जुड़े बहुत सारे किस्से सुने होंगे. भूतों को लेकर लोगों द्वारा अलग-अलग तर्क दिए जाते हैं. भूत होते हैं या नहीं यह बहस का विषय है लेकिन इस पोस्ट को पढ़ कर शायद आपके रौंगटे खड़े हो जाएँ क्योंकि यहाँ हम अमेरिका की एक भूतहा जेल और उसमें रहने वाले भूत की सच्ची कहानी बता रहे हैं.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-11505" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/06/essex-county-jail-newark.jpg?resize=650%2C325&#038;ssl=1" alt="" width="650" height="325" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/06/essex-county-jail-newark.jpg?w=650&amp;ssl=1 650w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/06/essex-county-jail-newark.jpg?resize=300%2C150&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" />अमेरिका के <strong>न्यूजर्सी</strong> में स्थित <strong>एसेक्स काउंटी जेल</strong> को दुनिया में सबसे डरावनी जेल माना जाता है. कहा जाता है कि इसके भीतर भूत लोगों के बाल खींचते हैं जिसको वजह से इसके अंदर जाने की हिम्मत किसी ही नहीं होती है. लेकिन कुछ दिन पहले <strong>विल एलिस</strong> नामक एक फोटोग्राफर ने इस जेल के भीतर तस्वीरें ली हैं, जो की सोशल साइट्स पर वायरल भी हो गए हैं.</p>
<p>सन 1837 में इस जेल को बनाया गया था. उस समय इस जेल में 300 सैल थे. है कई वर्षो तक जेल में कैदियों का आना-जाना लगा रहा, लेकिन अजीबोगरीब गतिविधिया की वजह से इसे 1970 में बंद कर दिया गया. दरअसल इस जेल में मैजूद भूतों को लेकर कई तरह की कहानियाँ प्रचलित हैं.</p>
<p>कुछ लोगों के अनुसार जेल के <strong>सैंट्रल हॉल</strong> में एक कैदी ने खुद को आग लगा ली थी जिससे उसकी मौत हो गयी. इसके बाद से ही उसकी आत्मा जेल में भटकती रहती है. वही कुछ लोगों का मानना है कि यह भुत एक <strong>सिक्योरिटी गार्ड</strong> का है जो यहाँ आने वाली लोगों के बाल खिंचता है.</p>
<div class="youtube-embed" data-video_id="XAuZEwB3q3k"><iframe loading="lazy" title="Essex County Jail (Abandoned)" width="500" height="281" src="https://www.youtube.com/embed/XAuZEwB3q3k?feature=oembed&#038;enablejsapi=1" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></div>
<p>न्यूजर्सी  की इस जेल को <strong>नेवार्क स्ट्रीट जेल </strong>के नाम से भी जाना जाता है. इसकी बिल्डिंग यहाँ की सबसे पुरानी इमारतों में से है. ऐसा माना जाता है कि इसके बंद होने के बावजूद भी जेल के अंदर अनजान लोगों के पदचिन्ह (food print) दिखाई देते हैं. दुनिया में सबसे डरावनी मानी जाने वाली इस जेल की अंदरूनी दीवारें पेड़ों से घिर चुकी हैं</p>
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