- 2,500 साल पहले लोकतंत्र प्रणाली की शुरुआत ग्रीक के एथेंस (Athens) शहर से हुई थी. तब एथेंस शहर के सभी नागरिक एक जगह इकट्ठा होकर राज्य के फैसले लेते थे और यह प्रकिया लगभग 200 साल तक चली थी.
- दुनिया का सबसे पुराना लोकतांत्रिक ढांचा आइसलैण्ड में है. यह 930 ईसवी से चला आ रहा है.
- दुनिया की पहली भूमिगत रेल सेवा 10 जनवरी 1863 को शुरू हुई थी. यह रेल सेवा इंग्लैंड के पैडिंगटन स्टेशन से फ़ैरिंगटन स्ट्रीट के बीच शुरु हुई और पहले ही दिन इसमें चालीस हज़ार यात्रियों ने सफ़र किया था.
- इतिहास का सबसे छोटा युद्ध 1896 में इंग्लैंड और ज़ांज़ीबार (पुर्वी अफ्रीका में) के बीच हुआ था. जिसमें ज़ांज़ीबार ने 38 मिनट बाद ही सरेंडर कर दिया था.
- $ चिन्ह की शुरूआत 1788 से हुई थी.
- विश्व की 88 प्रतिशत भूमि पर राज करने वाला इकलौता देश इंग्लैंड था.
- रोम ऐसा देश है जिसकी जनसंख्या ने सबसे पहले 10 लाख का आकड़ा पार किया था.
- प्रथम विश्व युद्ध 1914 से लेकर 1919 तक लड़ा गया था. प्रथम विश्व युद्ध में मध्य यूरोप, एशिया और अफ्रीका, इन तीनो महाद्वीपों के देशों ने भाग लिया था.
- 1883 में क्राकाटोआ (Krakatoa, इंडोनेशिया) में दुनिया का सबसे भयंकर ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था. यह इतना भीषण था कि इसकी आवाज 3,000 मील (4800 किलोमीटर) दूर तक सुनाई दी थी. यह इतिहास में दर्ज अब तक की सबसे तीव्रतम ध्वनि है.

क्राकाटोआ के भयंकर ज्वालामुखी विस्फोट का शिला-चित्रण (फुल इमेज) - जब प्रथम विश्वयुद्ध की शुरूआत हुई थी उस समय अमेरिकी एयरफोर्स के पास केवल 18 पायलट और 5-12 जहाज थे.
- T-Shirt का आविष्कार 1904 में किया गया था.
- जिओरडनो ब्रूनो (Giordano Bruno) इटली का दार्शनिक, गणितज्ञ एवं खगोल-विज्ञानी था. जिन्हें 1592 में सिर्फ इसलिए गिरफ़्तार किया था क्योंकि उनका यह मानना था कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है.
- मोटोरोला के इंजीनियर मार्टिन कूपर ने 3 अप्रैल 1973 को पहली बार मोबाइल फोन से बात की थी. मार्टिन कूपर को मोबाइल फोन को बाजार में लाने में 10 साल लग गए थे.
- ऐसा माना जाता है कि लगभग 14 करोड़ साल पहले अफ्रीका, एशिया, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे महाद्वीप आपस में जुड़े हुए थे.
- प्राचीन रोमन कैलेंडर में जनवरी और फरवरी के महीने नहीं होते थे. अतः उनका नव वर्ष 1 मार्च को मनाया जाता था.
- अल्बर्ट आइंस्टीन को इसराइल सरकार ने राष्ट्रपति बनने की पेशकश की थी परन्तु उन्होंने इसराइल सरकार द्वारा दी गई पेशकश को मना कर दिया था.
- रबर के अविष्कार से पहले, पेंसिल से लिखे हुए को ब्रेड से मिटाते थे.
- डेरेक जे. डी-सोला के अनुसार एंटीकाईथेरा प्रक्रिया को शुरुवाती यान्त्रिक अनुरूप कंप्यूटर माना जाता है.

- इसे खगोलीय स्थितियो की गडना के लिये बनाया गया था. इसे एंटीकाईथेरा के युनानी द्धीप के एंटीकाईथेरा भग्नावशेष मे 1901 मे खोजा गया था.
- ऐसा माना जाता है कि एंटीकाईथेरा प्रक्रिया वाले यन्त्र अगले 1,000 वर्षो तक मिलना मुश्किल है.
विश्व के हैरान कर देने वाले तथ्य जिनके बारे में आपको पता नहीं होगा !
इस विडियो में आपको विश्व के सबसे हैरान कर देने वाले तथ्य मिलेंगे. जैसे कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा इंग्लिश भाषा बोलने वाला देश बन जायेगा और भारत में पढ़े-लिखे लोगों की आबादी अमेरिका में रहने वाले कुल लोगों की आबादी से भी ज्यादा है.
गर्मियों में क्या करें और क्या ना करें!
गर्मी के मौसम में सूरज की तपिश और भीषण गर्मी के कारण लोगों का हाल बेहाल हो है. गर्मियों में कहीं-कहीं तो पारा 47-48 डिग्री पार कर जाता है. पूरे देशभर में गर्मी और ऊष्माघात यानि लू की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या बढ़ जाती है। गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण लोगों को कई बीमारियां भी हो जाती हैं.
इस पोस्ट में हम गर्मियों में होने वाली परेशानियों और परेशानियों से बचने के लिए कुछ खास टिप्स आपके लिए लेकर आयें हैं।

गर्मी में होने वाले आम रोग:
गर्मी में लापरवाही व पानी की कमी के कारण शरीर में निर्जलीकरण (dehydration), लू का लगना, चक्कर आना,घबराहट होना, नकसीर आना, उलटी-दस्त, सन-बर्न(sun-burn), घमोरिया जैसी कई बीमारियाँ हो सकती हैं.
गर्मियों में क्या न करें
- गर्मियों के मौसम में खुली धूप में खुले शरीर, नंगे सर, नंगे पाँव न चलें.
- तेज गर्मी और धूप में घर से खाली पेट या प्यासे बाहर न जाएँ. जाना जरूरी हो तो एक-दो गिलास ठंडा पानी पी लें.
- कूलर या एसी से निकल कर तुरंत धूप में न जाएँ.
- बाहर धूप से आकर तुरंत ठंडा पानी पीना और सीधे कूलर या एसी के पास ना बैठें.
- तेज मिर्च-मसाले, बहुत गर्म खाना, चाय, और शराब इत्यादि का सेवन ज्यादा ना करें.
- सूती और ढीले कपड़ो की जगह सिंथेटिक और कसे हुए कपडे ना पहनें.
- आधे बाजू वाली शर्ट या ऐसे कपड़े न पहने जिनसे धूप आपकी त्वचा पर पड़ती हो.
पढ़े: ऊष्माघात यानि लू क्या है और इससे कैसे बचें?
क्या करें: गर्मी और लू से राहत पाने के लिए घरेलू नुस्खे जो आपके काफी काम आ सकते हैं
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- घर से बाहर निकलते वक़्त कच्चे आम का शरबत यानि ‘आम का पन्ना’ ज़रूर पियें. यह आपको भीषण गर्मी से तो राहत देगा और साथ ही आपको लू लगने से भी बचाएगा.
- गर्मियों में छाछ का सेवन काफी फायदेमंद होता है. पतली दही से तैयार होने वाला छाछ पेट को ठंडक देता है.यह गर्मियों के मौसम में होने वाली डिसेंट्री को भी दूर भगाता है.
- नींबू पानी हर मौसम में फायदेमंद होता है. लेकिन गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिए बीच-बीच में नींबू पानी का सेवन काफ़ी कारगर साबित होता है.

- नारियल पानी गर्मियों के लिए सबसे बेहतर है. इसमें बहुत अधिक मात्रा में कैल्शिेयम क्लोराइड और पोटैशियम पाया जाता है.
- खीरा गर्मियों के लिए बहुत उत्तम माना जाता है. यह गर्मियों में होने वाले गैस, एसीडिटी, सीने में जलन की समस्याओं को दूर करता है
- गर्मी में जब भी घर से निकले, कुछ खा कर और पानी पी कर ही निकलें, खाली पेट ना निकलें.
- गर्मी में सूती और हलके रंग के कपडे पहनने चाहिये.
- चेहरा और सिर रुमाल या साफी से ढक कर निकलना चाहिये.
- शीतल पानी का सेवन, 3 से 6 लीटर रोजाना करें.
- बाजारू ठंडी चीजे नहीं बल्कि घर की बनी ठंडी चीजो का सेवन करना चाहिये.
- त्वचा को धूप से बचाने के लिए अच्छी सी सन-स्क्रीन (Sun Screen) त्वचा और चेहरे पर लगायें.
घरेलू उपचार प्राकृतिक होते हैं और इनसे साइड-इफैक्ट्स होने की आशंका न के बराबर होती है. फ्रूट्स से बनी क्रीम आपकी त्वचा के लिए उत्तम होती है. फिर भी किसी भी चीज को उपयोग करने से पहले अपनी त्वचा के अच्छी प्रकार को जान लें। हो सके तो इस बारे में किसी एक्सपर्ट से भी सलाह ले लें।
भारत का आखिरी गांव, जहां से है स्वर्ग जाने का रास्ता
हिमालय की खूबसूरती को शब्दों में बयां कर पाना असंभव है. हिमालय की मनमोहक वादिया किसी को भी दीवाना बना सकती हैं. लेकिन एक जगह ऐसी भी है, जिसे भारत का आखिरी गांव कहते हैं. इस गांव का नाम है माणा गांव. इसके बारे में शायद ही लोग जानते होंगे.
हम आपको बता दें कि यह गांव उत्तराखंड के चमोली जिले में और बद्रीनाथ से तीन किमी आगे समुद्र तल से 18,000 फुट की ऊँचाई पर बसा एक खूबसूरत गाँव है. यह गांव भारत-तिब्बत सीमा पर बसा है. इस गांव को देश का आखिरी गांव या सीमान्त ग्राम भी कहा जाता है.
माणा गांव में सरस्वती और अलकनंदा नदियों का संगम भी होता है तथा यहाँ कुछ प्राचीन मंदिर और गुफाएं हैं जो कि बहुत ही प्रसिद्ध हैं. जो भी भक्त ‘बद्रीनाथ’ के दर्शन के लिए आते हैं, वह माणा गाँव व भारत के आखिरी गांव में आने का मौका नहीं छोड़ते हैं.
स्वर्ग जाने का रास्ता

कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडव जब स्वर्ग जाने के लिए यहाँ से गुजरे थे, तो वहां दो पहाड़ियों के बीच में खाई थी जिसे पार करना बहुत ही मुश्किल था. उस समय भीम ने दो बड़ी शिलाएं डालकर पुल बनाया था और पांडव इसी पुल से होकर स्वर्ग की ओर गए थे. आज भी लोग इसे स्वर्ग का मार्ग मानकर इस रास्ते से चले जाते हैं.
गणेश जी ने दिया था सरस्वती नदी को श्राप

माणा गाँव में जब प्रवेश करते है तो सबसे पहले गणेश गुफा नजर आती है. ऐसा कहा जाता है कि गणेश जी यहाँ पर वेदों की रचना किया करते थे तो पास में ही सरस्वती नदी अपने पूरे वेग में बहने के कारण शोर कर रही थी. जिससे गणेश जी को कार्य में बाधा पड़ रही थी. गणेश जी के आग्रह करने के बाद भी सरस्वती नदी ने उनकी बात नहीं मानी. गणेश जी ने नाराज होकर उन्हें श्राप दिया कि अब आगे वह किसी को भी नहीं दिखाई देगी. जिसके कारण ही सरस्वती नदी कुछ दूरी पर जाकर अलकनंदा नदी में मिल जाती है.
दुनिया के सबसे जहरीले पौधे, पल भर में ले सकते है आपकी जान
पेड़-पौधे इंसानों के अस्तित्व के लिए कितने जरूरी हैं यह तो सभी जानते ही हैं। पेड़ न केवल हमें ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि वातावरण को अनुकूल बनाए रखने में भी मदद करते हैं।
पेड़-पौधों से इंसान के लिए उपयोगी दवाएं मिलती हैं। जहां पेड़-पौधे इंसान के लिए बहुत उपयोगी हैं वहीं दूसरी तरफ बेहद खतरनाक और जानलेवा भी होते हैं। कुछ पौधों के बीज, फूल और फल इतने जहरीले होते हैं कि कुछ ही देर में इंसान की जान ले लेते हैं।
ये पौधे देखने में जितने खूबसूरत और आकर्षक लगते हैं, उतने ही खतरनाक और जानलेवा भी होते हैं। तो आइए जानें कुछ खतरनाक पेड़-पौधों के बारे में
विस्टेरिया (Wisteria) :
यह विस्टेरिया फूल बैंगनी रंग का होता है और यह दुनिया के हर कोने में पाया जाता है। विस्टेरिया एक रेंगने वाली बेल है जो कि 60 फीट तक बढ़ सकती हैं। देखने में यह फूल सुंदर लगता है लेकिन उतना ही खतरनाक भी होता है। इस पौधे के किसी भी हिस्से को खाने से निम्नलिखित बीमारियाँ हो सकती हैं जैसे कि माइग्रेन और सिरदर्द, सुस्ती और कमजोरी, बुखार और दस्त इत्यादि।

गुलाबी मटर (Rosary Pea):
गुलाबी मटर बारहमासी पौधा होता है जो आमतौर पर 20 फीट की ऊंचाई तक पेड़ों के आसपास लगा होता है। गुलाबी मटर भी मटर फली के आकार के होते हैं। लेकिन इसका बीज लाल रंग का होता है। इस पौधे का बीज बेहद जहरीला होता हैं। जोकि एक व्यक्ति को ख़त्म करने के लिए काफी है। इस फल के मुख्य लक्षण बुखार और पेट खराब होना, अति-उत्तेजना, दस्त और उल्टी आना आदि है।
ओलियंडर (Oleander) :
ओलियंडर एक फाणरोफाईट (Phanerophyte) झाड़ी होती है जोकि 13 फीट लम्बी हो सकती है। ओलियंडर फूल लाल-भूरे रंग के होते हैं। इस पौधे की दिलचस्प बात यह है कि इसके फूल, बीज, पत्ते, छाल और यहाँ तक की जड़ भी खतरनाक होती हैं। इनसे होने वाली बीमारियाँ नींद और थकान आना, पेट में दर्द और उल्टी आना इत्यादि है।
यूरोपीय यू (European Yew):
यूरोपीय यू पौधा यूरोप में सबसे पुराने पेड़ों में से एक है। यह 132 फीट लंबा तथा धीमी गति से बढ़ता है। इस पौधे की पत्तियाँ गहरे-हरे रंग की होती हैं जो कि खतरनाक होती है। इनसे होने वाली बीमारियाँ दिल का दौरा, साँस लेने में परेशानी, दिल की धड़कन बढ़ना आदि है।
एकोनाईट (Aconite):
यह पौधे मुख्य तौर पर यूरोप के पहाड़ी इलाकों से पाया जाता है। इस पौधे में काले-नीले रंग के फूल होते है जो कि बेहद खतरनाक होते है। इनसे होने वाली बीमारियां में चेहरे की झुर्रियां, साइनस टचीकार्डिया, पेट और सीने में परेशानी और उल्टी आना है।
एक ऐसा मंदिर, जहाँ प्रसाद में मिलते हैं सोने चांदी के जेवर…
जब भी हम किसी मंदिरों या धार्मिक स्थलों में जाते हैं तो हमें प्रसाद के रूप में मिठाई या फल जरूर मिलते है. लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में ऐसे मंदिर भी हैं जहां प्रसाद के रूप में भक्तों को सोने और चांदी के आभूषण दिए जाते हैं. आज हम इस लेख में भारत के एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जहां भक्तों को प्रसाद के रूप में मिलते हैं सोने चांदी के जेवर…
हिन्दू धर्मग्रंथों और पुराणों में धन और समृद्धि के लिए महालक्ष्मी देवी की पूजा की जाती है. मध्यप्रदेश में रतलाम नामक स्थान पर महालक्ष्मी देवी सबसे प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है. यहाँ साल भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है और भक्त यहां करोड़ों रुपए के जेवर और नकदी चढ़ाते हैं. खासतौर पर धनतेरस से लेकर दिवाली के दिन परिसर को सोने, चांदी और नोटों की मालाओं से सजाया जाता है.
लेकिन भक्त यहां से खाली हाथ नहीं जाते है. दिवाली के बाद जाने वाले भक्तों को आभूषण और नगदी, प्रसाद के रुप में दी जाती है. प्रसाद को लेने के लिए लोग दूर-दूर से इस मंदिर में पहुंचते हैं. लेकिन प्रसाद के रूप में मिलें आभूषण और नगदी को लोग माता का आशीर्वाद मानते है और हमेशा संभाल कर रखते हैं.

विश्व के विभिन्न देशों के अजीबोगरीब नियम!!
दुनिया में ऐसे ऐसे कानून बनाए गए है जिन पर यकीन कर पाना बहुत ही मुश्किल है. आज हम कुछ ऐसे ही अजीबोगरीब नियमों के बारे मे बात करेंगे.
गम चबाना सिंगापुर में अवैध है

आपने कभी सोचा है की गम चबाने से आपको जेल हो सकती है? जी हाँ, ऐसा हो सकता है. 1992 के बाद से सिंगापुर में गम चबाना अवैध है. अगर आप गम चबाते पकड़े जाते है तो आपको जेल तक हो सकती है. सिंगापुर में गम के आयात पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. नियम के तहत सिर्फ निकोटीन गम का ही उपयोग कर सकते है वो भी तब, जब किसी डॉक्टर से लिखवा कर लाए हो.
अमेरिका के यूटा राज्य में पहले चचेरे भाई के साथ विवाह पर प्रतिबंध है.

अमेरिका के यूटा राज्य में चचेरे भाई से साथ शादी नहीं कर सकते हैं, लेकिन फिर भी शादी करना चाहते है तो उसके लिए एक नियम बनाया गया है जिसमे दोनों 65 साल की उम्र के बाद ही शादी कर सकते हैं.
जापान में अधिक वजन बढ़ाना अवैध माना जाता है.

कैलिफोर्निया में महिलाओं को ड्रेसिंग गाउन पहनकर गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं हैं.

सऊदी अरब में महिलाएं गाड़ी नहीं चला सकती, क्योंकि यहां के नियम के अनुसार महिलाओं को गाड़ी चलाना अपराध है.

फ्रांस में महिलाओं का पैंट पहनना गैरकानूनी है.

यूरोपियन देश साइप्रस में कार में कुछ भी नहीं खा पी सकते है यहाँ तक कि आप पानी भी नहीं पी सकते है. कार में पानी पीना भी अपराध है.

संयुक्त राज्य अमेरिका के मिनेसोटा में एक अजीब ही कानून है जिसके तहत महिला और पुरुष के अंडरवियर एक साथ सूखने नहीं डाल सकते है.

दुनिया में सिर्फ फिलीपींस और वेटिकन ही ऐसे देश है जहां तलाक लेना अवैध माना जाता है.

भारतीयों द्वारा माने जाने वाले 10 अंधविश्वास और उनके पीछे संभावित तर्क!
भारत में लोगों द्वारा माने जाने वाले 10 अंधविश्वास और उनके पीछे सम्भावित तर्क
भारत एक ऐसा देश है जहाँ आज के तकनीकी युग में भी लोगों द्वारा कई अंधविश्वास माने जाते हैं. जो आपको हैरान कर देंगे. हम भारतीय खुद को कई बार अंधविश्वासों और तकनीकी युग के बीच खड़े हुए पाते हैं. इन अंधविश्वासों पर सवाल उठाना हमारे लिए बहुत ही जरूरी बनता जा रहा है. यह हैं 10 अंधविश्वास जो भारतीय लोगों द्वारा आज भी माने जाते हैं. अंधविश्वास से जुड़े कुछ और दिलचस्प तथ्य जानने के लिए यहाँ क्लिक करें
सूर्य ग्रहण के दौरान घर के बाहर पैर नहीं रखने का अंधविश्वास

अपनी आँख से सूर्य ग्रहण को देखने से आँखों की दृष्टि खत्म होने का डर रहता है. हमारे पूर्वजों ने शायद इसी वजह से सूर्य ग्रहण को नुकसानदायक समझा और फिर सूर्य ग्रहण के समय लोगों को घर से ना बाहर निकलने का नियम बनाया और पीड़ी दर पीड़ी यह अंधविश्वास चलता गया और आज भी भारतीय इस अंधविश्वास को मानते हैं.
उत्तर दिशा की तरफ सिर करके नहीं सोना

हमारे पूर्वज जानते थे कि मानव के शरीर और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में क्या संबंध हैं. इस वजह से हमारे पूर्वजों ने नियम बनाया होगा कि हमें दक्षिण की तरफ सिर करके सोना चाहिए क्योंकि उत्तर कि तरफ सर करके सोने से हमें रक्तचाप जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने इस वजह के पीछे यह अंधविश्वास जोड़ दिया कि उत्तर की तरफ से मरने का खतरा बढ़ जाता है.
रात के समय पीपल के पेड़ के पास नहीं जाना

जन वन हेल्मोंत (Jan van Helmont) ने 17वीं सदी में खोजा था कि पौधे सूरज से रौशनी लेकर बढ़ते हैं. उससे पहले लोगों को यह तक पता नहीं था कि सूरज कि रोशनी और कार्बन डाइऑक्साइड का पौधों से क्या संबंध होता है? लेकिन हमारे पूर्वजों को प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के बारे में पता था जिससे उन्होंने लोगों को रात के समय पेड़ों के नजदीक सोने के लिए मना कर दिया था. लेकिन लोगों ने पीपल के पेड़ के साथ यह तथ्य जोड़ लिए कि पीपल के पेड़ पर भूत रहते हैं इसलिए इस पेड़ के पास रात के समय नहीं जाना चाहिए.
नींबू और मिर्ची का इस्तेमाल बुरी नजर से बचने के लिए करना

इस अंधविश्वास को “नींबू टोटका” भी कहते हैं, नींबू और मिर्ची में बहुत विटामिन होते हैं. इसी वजह से पूर्वजों द्वारा नींबू और मिर्ची का इस्तेमाल शादी जैसे अवसरों पर किया जाता था क्योंकि वह नींबू और मिर्ची को अच्छा प्रतीक मानते थे. लेकिन धीरे-धीरे लोग नींबू और मिर्ची को बुरी नजर से बचाने वाला प्रतीक मानने लगे.
अंतिम संस्कार समारोह में भाग लेने के बाद स्नान

हमारे पूर्वजों के पास हेपेटाइटिस, चेचक और अन्य घातक रोगों से बचने के लिए टीकाकरण जैसी चिकित्सक सुविधाएं नहीं थी. इसलिए उन्होंने इन घातक बीमारियों से बचने के लिए कई नियम बनाये. उनमें से एक था कि किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार के बाद घर आकर स्नान करना चाहिए. जिससे लोग इन घातक बीमारियों से बच सकते हैं. लेकिन धीरे-धीरे इस नियम को अंधविश्वास बना दिया गया इस नियम से भूत प्रेतों की कहानियां जोड़ दी.
मृत व्यक्ति के परिवार वालों को घर में श्राद्ध तक खाना नहीं पकाने का अंधविश्वास

हमारे पूर्वजों ने यह भी एक नियम बनाया था कि घर में अगर किसी कि मृत्यु होती है तो परिवार वालों को खाना नहीं पकाना चाहिए. यह नियम इसलिए बनाया था क्योंकि मृत व्यक्ति के सभी परिजन तो शोक में डूबे होते हैं. जिससे उनको बहुत थकान होती है और खाना पकाने में बहुत मुश्किल आती है. लेकिन आज के दौर में भारतीयों ने इस नियम को अंध विश्वास मान लिया और इसके पीछे एक काल्पनिक सोच रख दी कि अगर वह अंतिम संस्कार वाले दिन घर में खाना बनाएंगे तो मृतक के शरीर की आत्मा को शान्ति नहीं मिलेगी.
सूर्यास्त के बाद अपने नाखूनों को नहीं काटना चाहिए

हमारे पूर्वजों ने सूर्यास्त के बाद नाखूनों को इसलिए काटने के लिए मना किया था क्योंकि सूर्यास्त के बाद अँधेरे में नाखून काटना हमारे लिए नुकसानदायक हो सकता है. लेकिन लोगों ने इसके पीछे भी अंधविश्वास बना डाला जिससे लोग अपने नाख़ून दिन में ही काटते हैं अगर रात में रोशनी हो तब भी नहीं काटते.
कुछ निश्चित दिनों पर बाल नहीं धोने चाहिए

यह भी पूर्वजों द्वारा एक नियम बनाया गया था कि लोगों को पानी बचाने के लिए कभी-कभी अपने सर के बाल नहीं धोने चाहिए. धीरे-धीरे यह लोगों में अंधविश्वास बन गया.
शाम के समय झाड़ू लगाने से बुरा समय आता है

आचरण और अनुशासन भारतीय समाज की आधारशिला है. लेकिन भारतीयों में यह अंधविश्वास भी है कि सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू लगाना किस्मत के लिए बुरा होता है. लेकिन असल में पूर्वजों ने यह नियम इसलिए बनाया था कि अगर आप सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाते हो तो कम रोशनी के कारण आप जमीन पर गिरी कोई विशेष वस्तु को भी खो सकते हो.
घर से बाहर निकलने से पहले चीनी और दही खाना

भारत का पर्यावरण अत्यधिक गर्मी वाला है. इस पर्यावरण में दहीं आप पर एक शीतल प्रभाव छोड़ता है और इसमें थोड़ी मात्रा में चीनी मिलाने से दहीं एक तरह का ग्लूकोज बन जाता है. जो मनुष्य के शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. लेकिन भारतीयों ने मीठी दही को अच्छी किस्मत का प्रतीक मान लिया.
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सर्प द्वीप – यहाँ चलता है सांपों का राज!

ब्राज़ील के साओ पाउलो (Sao Paulo) से 93 मील दूर समुद्र के बीचोबीच स्थित इल्हा दे क्वेइमाडा ग्रैंड ( Ilha de Queimada Grande) आइलैंड है. जहाँ दुनिया के सबसे विषैले सांप पाए जाते हैं. जो पल भर में किसी की भी जान ले सकते है. इस आइलैंड पर जहरीलें गोल्डन पिट वाइपर पाए जाते हैं. इस आइलैंड को गोल्डन लांसहेड सांप की प्रजाति का घर भी कहा जाता है.
मार्सेलो दुआर्ते एक जीवविज्ञानी है जिन्होंने 20 से अधिक बार इस आइलैंड का दौरा किया है. उनका कहना है कि इस आइलैंड पर सांपो की संख्या इतनी अधिक है कि हर एक वर्ग मीटर में पांच सांप रहते है.
इन सांपो की गिनती विश्व के सबसे जहरीले सांपो में की जाती है. यह सांप इतने जहरीले होते हैं कि अगर किसी को काट ले तो आदमी 10 से 15 मिनट के अंदर मर जाता है. ब्राज़ील मे अधिकतर 90 प्रतिशत लोगों की मौत साँपो के काटने से होती है.
जीवविज्ञानी भी इस बात को मानते हैं कि गोल्डन लांसहेड(lanceheads) सांप सबसे जहरीले होते है. इसलिए ब्राजील नौसेना ने इस आइलैंड पर किसी को भी जाने से मना किया है.
स्थानीय लोगों के अनुसार ब्राजील का यह आइलैंड शुरु से ऐसा नहीं था. इस आइलैंड पर पहले सांप बहुत कम पाए जाते थे. इल्हा दे क्वेइमाडा ग्रैंड आइलैंड के तट के पास एक लाइट हाउस बना हुआ है जोकि ब्राजील नौसेना द्वारा बनाया गया था. इस लाइट हाउस में नौसेना का कर्मचारी काम किया करता था. इस आइलैंड में वह कर्मचारी अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ इस लाइट हाउस में रहते थे.
स्नेक आइलैंड पर धीरे धीरे सांपो की तादाद बढ़ने लगी और तट के आस पास के इलाकों में भी सांपो की संख्या बढ़ने लगी. इस लाइट हाउस में रहने वाला कर्मचारी व् उसका परिवार जहरीलें गोल्डन पिट वाइपर सांपो का शिकार बन गए थे. सांपो के काटने से उनका शरीर काला पड़ गया था.
इस आइलैंड से जुड़ी एक और घटना है. ब्राज़ील के इल्हा दे क्वेइमाडा ग्रैंड आइलैंड में केले के बहुत सारे पेड़ पाए जाते हैं. बताया जाता है कि एक बार एक व्यक्ति अपने साथियों के मना करने के बावजूद केले लेने इस आइलैंड के अंदर चला गया और सांपो के काटने के कारण उसकी मृत्यु हो गयी. इस घटना के बाद आइलैंड पर इंसानों के जाने पर प्रतिबद्ध लगा दिया था.
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ब्लैक टाइगर की कहानी: जासूसी करना बाएं हाथ का खेल नहीं है। और फिर बात पाकिस्तान जैसे देश में जाकर जासूसी करने की हो तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह काम जान हथेली पर लेकर चलने से कम नहीं। हर वक्त पकड़े जाने का डर, यातना और मौत का डर और अपने देश, घर-परिवार से दूर रहने और शायद कभी न मिल पाने का दुःख और साथ ही पकड़े जाने पर देश के द्वारा त्यागे जाने की मजबूरी लेकर चलना अपने आप में एक जासूस की जांबाजी, समर्पण, देशभक्ति और दिलेरी की कहानी कह देते हैं।