1 अक्टूबर इतिहास

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1 अक्टूबर इतिहास

  • 1574 – सिखों के तीसरे गुरू अमर दास का निधन हुआ।
  • 1842 – स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्‌ और सामाजिक कार्यकर्ता एस. सुब्रह्मण्य अय्यर का जन्म हुआ।
  • 1847 – प्रख्यात समाजसेवी, लेखिका और स्वतंत्रता सेनानी एनी बेसेंट का जन्म हुआ।
  • 1854 – भारत में डाक टिकट का प्रचलन आरंभ हुआ l
  • 1895 – पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाक़त अली ख़ाँ का जन्म हुआ।
  • 1901 – स्वतंत्रता सेनानी एवं पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों का जन्म हुआ।
  • 1904 – केरल के प्रसिद्ध कम्युनिस्ट नेता और भारत के स्वतंत्रता सेनानी ए. के. गोपालन का जन्म हुआ।
  • 1919 – हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म हुआ।
  • 1922 – अमेरिकी वकील और राजनितिज्ञ बर्क मार्शल का जन्म हुआ।
  • 1924 – अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति जिमी कार्टर का जन्म हुआ।
  • 1927 – प्रसिद्ध तमिल अभिनेता शिवाजी गणेशन का जन्म हुआ।
  • 1928 – भारतीय राजनीतिज्ञ एवं दलित नेता सूरज भान का जन्म हुआ।
  • 1938 – भारत के महान् बिलियर्ड्स खिलाड़ी माइकल फ़रेरा का जन्म हुआ।
  • 1945 – भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का जन्म हुआl
  • 1949 – चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के शासन की शुरुआत हुई।
  • 1953 – आंध्र प्रदेश अलग राज्य बना।
  • 1966 – राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत त्रिलोक सिंह ठकुरेला का जन्म हुआ।
  • 1967 – भारतीय पर्यटन विकास निगम की स्थापना हुई।
  • 1978 – लड़कियों की शादी की उम्र को 14 से बढा कर 18 और लड़कों का 18 से बढा कर 21 वर्ष किया गया।
  • 1979 – भारत के क्रांतिकारी चन्दन सिंह गढ़वाली का निधान हुआ।
  • 1996 – अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा पश्चिम एशिया शिखर सम्मेलन का उद्घाटन हुआ ।
  • 2000 – सिडनी में 27वें ओलम्पिक खेल सम्पन्न  हुआ।
  • 2002 – एशियाड खेलों में स्नूकर प्रतिस्पर्द्धा में भारत को पहला स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ।
  • 2003 – नदियों को जोड़ने के सम्बन्ध में बांग्लादेश की आशंकाओं को भारत ने दूर किया।
  • 2004 – इज़रायली प्रधानमंत्री एरियल शैरोन के मंत्रिमंडल ने गाजा पट्टी में बड़े पैमाने पर सैनिक कार्रवाई की योजना को मंजूरी दी।
  • 2007 – जापान ने उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबन्धों को अगले छ: महीनों तक बढ़ाने की घोषणा की।
  • 2008 – आतंकवादियों ने त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बम ब्लास्ट किया।
  • 2015 – ग्वाटेमाला के संता काटरीना पिनुला में भारी बारिश और भूस्खलन से 280 लोगों की मौत।

नवरात्रि के नौ दिनों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

“नवरात्रि” हिंदुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है जिसे दुर्गा माँ की पूजा को समर्पित किया जाता है। नवरात्रि के त्यौहार को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, बहुत से लोग तो इन दिनों में नंगे पांव रहते है। आज हम आपके लिए लेकर आये हैं नवरात्रि के नौं दिनों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:-

  • “नवरात्रि” – शब्द दो शब्दों का संयोजन है- नवा (अर्थ नौ) और रात्री (अर्थ रात)। नौ रातों और नौ दिनों को नवरात्रों के रूप में मनाया जाता है।
  • भारत में मनाए जाने वाले तीन मुख्य नवरात्रि शरद नवरात्रि, वसंत नवरात्रि और अशदा नवरात्रि हैं।
  • नवरात्रि त्यौहारों में शरद नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण है। यह सर्दियों की शुरूआत में मनाया जाता है, यानी शरद ऋतु में (सितंबर / अक्टूबर का महीना) यह मनाने का ख़ास कारण है कि इस वक्त देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध किया गया था जिसका जश्न मनाया जाता है।
  • वसंत नवरात्रि गर्मियों की शुरुआत के दौरान मनाया जाता है जो मार्च /अप्रैल के महीने में होता है। मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है।
  • अशदा सीजन के दौरान हिमाचल प्रदेश राज्य में अशदा नवरात्रि मनाया जाता है जो जुलाई-अगस्त महीने में होता है।
  • नवरात्रि के साथ सर्द और वसंत ऋतु का भी आगमन होता है।
  • गुजरात और मुंबई में, नवरात्रि की हर रात को गरबा नृत्य किया जाता है जो बहुत प्रसिद्ध है।
  • नवरात्रि के दिनों में अगर आपको सपने में सफेद सांप दिखाई देता है तो यह बहुत ही शुभ होता है। इससे लक्ष्मी की कृपा होती है।
  • अगर कोई कन्या आपको नवरात्रि के दिनों में सिक्का देती है तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है , इससे धन का लाभ होता है।
  • बंगाल में नवरात्रि के दिनों मे दुर्गा पूजा की जाती है जो बंगाल का पुरे साल का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है।
  • दुर्गा देवी आठ भुजाओं से युक्त हैं जिन सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होते हैं।
  • हिन्दू ग्रन्थों में वे शिव की पत्नी पार्वती के रूप में वर्णित हैं, जिन्हें दुर्गा का 8वां रूप गौरी कहा जाता है।
  • वेदों में तो दुर्गा का व्यापाक उल्लेख है, किन्तु उपनिषद में देवी “उमा हैमवती” (उमा, हिमालय की पुत्री) का वर्णन है।
  • पुराण में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है।
  • इसी आदि शक्ति देवी ने ही सावित्री (ब्रह्मा जी की पहली पत्नी), लक्ष्मी, और पार्वती (सती) के रूप में जन्म लिया और उसने ब्रह्मा, विष्णु और महेश से विवाह किया था।
  • तीन रूप मिलकर दुर्गा (आदि शक्ति) को पूरा करते हैं।

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नवरात्रि के दिनों में ना करे यह काम

जानिए नवरात्रि में कौन से कार्य करने से होगी मनोकामना पूर्ण !!

नवरात्रि वर्ष के महत्वपूर्ण चार पवित्र माह में आती है। यह चार माह है:- चैत्र, आषाढ़, अश्विन और पौष। चैत्र माह में चैत्र नवरात्रि जिसे बड़ी नवरात्रि या वसंत नवरात्रि भी कहते हैं। आषाढ़ और पौष माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं।

अश्‍विन माह की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। हर साल मां अंबे के भक्त पूरी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ शारदीय नवरात्रि का त्यौहार मनाते हैं। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।

इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे शारदीय नवरात्रि में कौन से कार्य करने से होगी मनोकामना पूर्ण :-

उपवास

नवरात्रों में उपवास रखने चाहिए। उपवास रखने से अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई हो जाती है। उपवास रखकर ही साधना की जा सकती है। नवरात्रों में नमक और मीठा (चीनी मिष्ठानादि) नहीं खाना चाहिए । उपवास में रहकर इन नौ दिनों में की गई हर तरह की साधनाएं और मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

सत्य और अहिंसा का पालन

नवरात्रि के दिन सत्य बोलना और अहिंसा का पालन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय झूठ बोलना, गुस्सा करना या किसी को नुकसान पहुँचाना, कार्यों में बाधा डाल सकता है। यही कारण है कि माँ दुर्गा की कृपा पाने के लिए सदाचार और पुण्य कर्म करना अनिवार्य है।

नियम-संयम से रहें

इन नौ दिनों में भोजन, मद्यपान, मांस-भक्षण और स्‍त्रिसंग शयन वर्जित माना गया है। जो व्यक्ति इन नौ दिनों में  नियम-संयम में  नहीं रहता उसका बुरा समय कभी खत्म नहीं होता।

यदि आपने 9 दिनों तक साधना का संकल्प ले लिया है, तो उसे बीच में तोड़ा नहीं जा सकता। मन और विचार से पवित्रता बनाकर रखनी चाहिए । छल, कपट और अपशब्दों का प्रयोग नहीं चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और गलत लोगों की संगति से बचना चाहिए ।

साधारण साधना

नवरात्रों में गृहस्थ मनुष्य को साधारण साधना ही करना चाहिए। इस दौरान उसे घट स्थापना करके, माता की ज्योत जलाकर चंडीपाठ, देवी महात्म्य परायण या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।

यदि आप यह नहीं कर सकते हैं तो इन नौ दिनों के दौरान प्रतिदिन एक माला के साथ मंत्रों का जाप करना चाहिए। सामान्यजन माता के बीज  मंत्रों का जाप कर सकते हैं। सप्तश्लोकी दुर्गा के पाठ का 108 बार अष्टमी की रात्रि में पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि में कम से कम दोनों काल (प्रातःकाल  एवं सायं काल) में  समय निकाल कर 26 माला प्रति दिन नियमित समय पर जाप करना चाहिए। जाप करते  समय घी का दीपक जलाकर रखें और जल का एक पात्र निकट में रखें।

कन्या भोज व दान

सप्तमी, अष्टमी और नौवमी के दिन कन्या पूजन करके उन्हें अच्छे से भोजन ग्रहण कराना चाहिए। यदि आप कन्या भोज नहीं करवा  सकते तो आप गरीब कन्याओं को दान दक्षिणा दे सकते हैं।

खासकर उन्हें हरे वस्त्र या चुनरी भेंट करें। आप यह कार्य किसी मंदिर में जाकर भी कर सकते हैं। वहां माता को खीर का भोग लगाकर कन्याओं को दान देना चाहिए।

घर और कार्यस्थल की साफ-सफाई

नवरात्रि में घर और कार्यस्थल को साफ-सुथरा रखना बहुत शुभ माना जाता है। साफ वातावरण में पूजा करने से धन, स्वास्थ्य और संबंधों में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। माँ दुर्गा को स्वच्छ स्थान बहुत प्रिय है।

दान और सेवा कार्य

जरूरतमंदों को दान देना, भोजन बाँटना या किसी की मदद करना अत्यंत पुण्यदायक कार्य है। दान और सेवा से माँ दुर्गा की कृपा बढ़ती है और मनोकामना पूर्ण होने की संभावना बढ़ जाती है। यह कार्य केवल धन ही नहीं, बल्कि समय और प्रयास से भी किया जा सकता है।

हवन

नवरात्रि के अंतिम दिन विधिवत रूप से साधना और पूजा को समाप्त करके हवन करना चाहिए। हवन करते वक्त हवन के नियमों का पालन करना चाहिए। ऐसा करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

मंत्र जाप और भजन-कीर्तन

नवरात्रि में देवी दुर्गा के मंत्रों का जाप और भजन-कीर्तन करना शुभ होता है। उदाहरण: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का नियमित जाप करने से मन की शांति और इच्छाओं की पूर्ति होती है। प्रतिदिन सुबह और शाम ध्यान करके मंत्र का उच्चारण करना लाभकारी माना जाता है।

सकारात्मक सोच और ध्यान

नवरात्रि में सकारात्मक सोच रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। नेगेटिव विचार या ईर्ष्या रखने से इच्छाओं की पूर्ति में बाधा आती है। ध्यान और प्राणायाम करने से मन शांत रहता है और देवी की कृपा अधिक समय तक बनी रहती है।

नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि यह मनोकामना पूर्ण करने का विशेष अवसर है। इस दौरान

  • सत्य और अहिंसा का पालन करें,

  • व्रत और कन्या पूजन करें,

  • घर और कार्यस्थल को स्वच्छ रखें,

  • दान और सेवा करें,

  • मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करें।

इन सभी कार्यों का पालन करने से न केवल मनोकामनाएँ पूरी होती हैं, बल्कि जीवन में शांति, स्वास्थ्य और खुशहाली भी आती है।

इस नवरात्रि, माँ दुर्गा की भक्ति और अनुशासन से अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ और मनोकामनाओं को साकार करें।

क्यों नवरात्रि के दौरान लहसुन-प्याज खाना वर्जित होता है?

नवरात्रि का हिन्दु धर्म में बहुत महत्व है। नवरात्रि में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता यह है कि जो व्यक्ति मां दुर्गा की पूजा आराधना सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से करता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है

इस बार शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 से आरंभ हो रही है इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है।

भक्त नवरात्रि के दौरान तन मन को शुद्ध करने के लिए व्रत भी रखते हैं। नवरात्रि के व्रत के दौरान कई नियमों का पालन भक्तों को करना होता है।

ऐसा ही एक नियम नवरात्रि के दौरान भोजन को लेकर भी है। नवरात्रि के व्रत लेने वाले लोग और जो व्रत नहीं लेते वह भी लहसुन प्याज का इस्तेमाल भोजन में नहीं करते। इसके पीछे वजह क्या है, आइए जानते हैं।

तामसिक गुण पाए जाते हैं लहसुन-प्याज में

नवरात्रि के व्रत मन की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अहम माने जाते हैं इसलिए नवरात्रि के नौ दिनों में लहसुन प्याज का सेवन वर्जित होता है, क्योंकि यह तामसिक प्रकृति के भोज्य पदार्थ होते हैं।

इनके सेवन से अज्ञानता और वासना में वृद्धि होती है। इसके साथ ही लहसुन-प्याज जमीने के नीचे उगते हैं और इनकी सफाई में कई सूक्ष्मजीवों की मृत्यु होती है, इसलिए भी इन्हें व्रत के दौरान खाना शुभ नहीं माना जाता है।

मन की चंचलता बढ़ाते हैं लहसुन-प्याज

तामसिक गुणों के कारण लहसुन-प्याज के सेवन से मन चंचल होता है। व्रत के दौरान मन की चंचलता व्यक्ति को विचलित करती है। इससे भोग-विलास की ओर मन आकर्षित होता है और व्यक्ति व्रत के नियमों का उल्लंघन कर सकता है।

पवित्रता को बनाए रखने के लिए ही लहसुन

प्याज का सेवन भोजन में नहीं करना चाहिए। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, जैसा अन्न व्यक्ति खाता है उसका मन भी वैसा हो जाता है इसलिए व्रत के दौरान सात्विक भोजन करने की सलाह हिंदू धर्म में दी गई है।

पौराणिक कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार, स्वरभानु नाम के दैत्य ने समुद्रमंथन के बाद देवताओं के बीच बैठकर छल से अमृत का सेवन कर लिया था।

यह बात जब मोहिनी रूप धारण किये हुए भगवान विष्णु को पता चली तो उन्होंने अपने चक्र से स्वरभानु का सिर, धड़ से अलग कर दिया। स्वरभानु के सिर और धड़ को ही राहु-केतु कहा जाता है।

सिर कटने के बाद स्वरभानु के सिर और धड़ से अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरी और इन्हीं से लहसुन-प्याज की उत्पत्ति हुई। लहसुन-प्याज का जन्म अमृत की बूंदों से हुआ इसलिए रोगों को मिटाने में यह दोनों कारगर साबित होते हैं।

परंतु यह राक्षस के मुंह से होकर उत्पन्न हुई हैं, इसलिए यह अपवित्र मानी जाती हैं और भगवान को इनका भोग लगाना वर्जित है। इसके साथ ही व्रत के दौरान भी इनको खाना वर्जित है।

 

30 सितम्बर का इतिहास

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30 सितम्बर का इतिहास

  • 1681 – नीदरलैंड एवं स्वीडन ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये।
  • 1687 – औरंगजेब ने हैदराबाद के गोलकुंडा के किले पर क़ब्जा किया।
  • 1880 – हेनरी ड्रेपर ने ओरायन नेब्यूला का पहला चित्र लिया।
  • 1882 – एप्लेटन में विश्व का पहला हाइड्रोइलेक्ट्रिक ऊर्जा संयंत्र शुरु हुआ।
  • 1895 – लेबनान के प्रसिद्ध कलाकार, कवि और लेखक जिबरान ख़लील ने शिक्षा आरंभ की।
  • 1898 – अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क की स्थापना हुई।
  • 1938 – जर्मनी में मूनीख़ का ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित हुआ। जिसमें जर्मनी के नेता हिटलर, इटली के नेता मोसोलीनी, फ़्रांस के प्रधानमंत्री एडवर्ड डेलाडी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री नोबल चेम्बरलन ने भाग लिया। इस सम्मेलन का उदेदश्य जर्मनी और चेकेस्लवाकिया के बीच मतभेदों के दूर करने का मार्ग खोजना था।
  • 1939 – जर्मनी और रूस पोलैंड के विभाजन पर सहमत हुए।
  • 1947 – पाकिस्तान और यमन संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल हुए।
  • 1966 – दक्षिण अफ्रीका के ब्रिटिश संरक्षित राज्य बेचुआनालैंड ने स्वतंत्रता की घोषणा की और बोत्सवाना गणतंत्र बना।
  • 1993 – भारत के महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद में भूकम्प के कारण 10,000 हज़ार से अधिक लोग मारे गए एवं लाखों बेघर हो गए।
  • 2002 – पाकिस्तान में कट्टरपंथी मुसलमानों ने एक मंदिर को तोड़ा, चीन ने भारत के साथ स्वेच्छा वार्ता को और सार्थक बनाने की इच्छा व्यक्त की।
  • 2003 – विश्वनाथन आनंद ने विश्व रैपिड शतरंज चैम्पियनशिप जीती।
  • 2007 – संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गांबरी ने विपक्षी नेता आंग सान सूकी और म्यांमार की सैनिक सरकार से मुलाकात की।
  • 2007 – पॉप स्टार शकीरा ने पेरू और निकारागुआ में भूकम्प से हुए तबाही के लिए 159.1 करोड़ रुपये दान देने की घोषणा की।
  • 1837 – हिन्दी और पंजाबी के प्रसिद्ध साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी पंडित श्रद्धाराम शर्मा का जन्म हुआ।
  • 1922 – भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध निर्माता एवं निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी का जन्म हुआ।
  • 1962 – भारतीय गायक शान का जन्म हुआ। on 30 September
  • 1914 – अपने समय के प्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार व कवि अल्ताफ़ हुसैन हाली का निधन हुआ।
  • 1994 – भारतीय कवियित्री एवं लेखिका सुमित्रा कुमारी सिन्हा का निधन हुआ।
  • 2001 – वरिष्ठ कांग्रेसी नेता माधव राव सिंधिया का मैनपुरी में वायुयान दुर्घटना में मौत हुई।

 

नवरात्रि में कन्या पूजन का है विशेष महत्व, ध्यान रखें ये बातें

चैत्र नवरात्रि हो या शारदीय नवरात्रि देवी माँ की पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक कन्या पूजन न हो जाए। नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्त्व होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके कुछ नियम भी होते हैं जिनका विशेष ध्यान रखना होता है।

मान्यता है कि अगर इन नियमों पालन किया जाए तो देवी माँ अत्यंत प्रसन्न होती हैं। तो आइए जानते हैं कन्या पूजन का महत्त्व और नियम?

कन्या पूजन का महत्व

  1. देवी स्वरूपा की पूजा

    • नवरात्रि के आठवें या नवें दिन (अष्टमी या नवमी) कन्याओं को माता दुर्गा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है।

    • प्रत्येक कन्या में देवी दुर्गा के नौ रूपों का आभास होता है।

  2. सांस्कृतिक और धार्मिक संदेश

    • कन्या पूजन यह सिखाता है कि नारी शक्ति का सम्मान समाज की मजबूती के लिए आवश्यक है।

    • यह हमें अहंकार और लालच से दूर, सादगी और सेवा भाव अपनाने की प्रेरणा देता है।

  3. सकारात्मक ऊर्जा का संचार

    • माना जाता है कि कन्याओं को भोजन, मिठाई और उपहार देने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति बनी रहती है।

नियम

कन्या पूजन षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी या नवमी में किसी भी दिन किया जाता है। ख्याल रखें कि कन्याओं की उम्र 2 से 7 साल के बीच होनी चाहिए। कन्या पूजन में बालक को जरूर आमंत्रित करना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा न करने पर कन्या पूजन पूर्ण नहीं होता।

सबसे पहले कन्याओं के पैर दूध या फिर पानी से अपने हाथों से साफ करें। इसके बाद उनके पैर छूकर उन्हें साफ स्थान पर बैठाएं। कन्याओं के माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम का तिलक लगाएं। कन्याओं को खीर-पूड़ी का प्रसाद खिलाएं।

नमकीन में चना भी खिला सकते हैं कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें दान में रूमाल, लाल चुनरी, फल और खिलौने देकर उनके चरण छुकर आर्शीवाद लें। इसके बाद कन्याओं को खुशी-खुशी विदा करें। ऐसा करने से मातारानी की कृपा और उनका आर्शीवाद आप के ऊपर हमेशा बना रहेगा।

ध्यान रखने योग्य बातें

  1. साफ-सफाई और स्वच्छता

    • कन्या पूजन में उपयोग होने वाले थाल, कपड़े और भोजन पूरी तरह स्वच्छ होने चाहिए।

  2. सादगी और संयम

    • पूजन में महंगे उपहार और भव्य भोजन की तुलना में सादगी और हृदय की भक्ति को महत्व दें।

  3. सुरक्षा का ध्यान

    • बच्चों और कन्याओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

    • भीड़ वाले आयोजन में अनुशासन बनाए रखें।

  4. उचित समय और दिन

    • अष्टमी या नवमी का दिन सबसे शुभ माना जाता है।

    • समय सुबह या दोपहर के पहले भाग में करें।

पौराणिक कथा

मान्यता है कि माता के भक्त पंडित श्रीधर की कोई संतान नहीं थी। एक दिन उन्होंने नवरात्र में कुंवारी कन्याओं को आमंत्रित किया। इसी बीच मां वैष्णों कन्याओं के बीच आकर बैठ गईं।

सभी कन्याएं तो भोजन करके और दक्षिणा लेकर चली गईं लेकिन मातारानी वहीं बैठी रहीं। उन्होंने पंडित श्रीधर से कहा कि तुम एक भंडारा रखो और उसमें पूरे गांव को आमंत्रित करो।

इसी भंडारे में भैरोनाथ भी आया और वहीं उसके अंत का आरंभ हुआ। माँ ने भैरोनाथ का अंत करने के साथ ही उसका उद्धार किया।

निष्कर्ष

कन्या पूजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह हमें समानता, सेवा और नारी शक्ति का सम्मान सिखाता है। नवरात्रि में इस पूजन के माध्यम से हम अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सामूहिक सौहार्द और भक्ति की भावना बढ़ा सकते हैं।

नवरात्रि में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो जरूर जाएं देश की इन जगहों पर, मन होगा भक्तिमय

नवरात्रि में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो जरूर जाएं देश की इन जगहों पर। हिंदी कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक शारदीय नवरात्रि मनाई जाती है। अगले दिन विजयादशमी मनाई जाती है। इस दिन को दशहरा भी कहा जाता है।

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस मौके पर पूरे देश में उत्सव का माहौल रहता है। आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा सभी स्थानों पर भक्ति के साथ की जाती है।

शारदीय नवरात्रि के दौरान, लोग मां के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए देश भर में स्थित दुर्गा मंदिरों में जाते हैं। अगर आप भी शारदीय नवरात्रि घूमने का प्लान कर रहे हैं तो देश की इन जगहों पर जरूर जाएं।

Shardiya Navratri

पश्चिम बंगाल

दुर्गा पूजा के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां भव्य तरीके से मां का आवाहन किया जाता है। इस अवसर पर विधि विधान से माता की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि महाराष्ट्र में जिस तरह से गणपति पूजा की जाती है। इसी तरह, बंगाल में दुर्गा पूजा मनाई जाती है। हर घर में कलश की स्थापना कर मां की पूजा की जाती है।

अहमदाबाद

गुजरात में नवरात्रि के मौके पर डांडिया का आयोजन किया जाता है। वर्तमान में यह मुंबई में भी लोकप्रिय है। नवरात्रि के नौ दिनों में उत्सव की शुरुआत आरती से होती है।

इस अवसर पर गरबा का आयोजन किया जाता है। इसमें माता का आह्वान किया जाता है। अगर आप डांडिया और गरबा डांस देखना चाहते हैं तो अहमदाबाद जरूर जाएं।

बस्तर

छत्तीसगढ़ में स्थित बस्तर में दुर्गा पूजा भव्य और पारंपरिक तरीके से मनाई जाती है। 52 शक्तिपीठों में से एक दंतेवाड़ा में स्थित है। इस शक्तिपीठ मंदिर को दंतेश्वरी मंदिर कहा जाता है।

इस अवसर पर रथ यात्रा भी निकाली जाती है। वहीं मां को महुआ के लड्डू का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा आप मुंबई, वाराणसी, कुल्लू मनाली आदि जगहों पर जा सकते हैं।

29 सितम्बर का इतिहास

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29 सितम्बर का इतिहास

  • 1789 – अमेरिका के युद्ध विभाग ने स्थायी सेना स्थापित की।
  • 1901 – दुनिया के जाने-माने फिजिसिस्‍ट एनरिको फर्नी का जन्‍म हुआ था।
  • 1913 – डीजल इंजन का आविष्‍कार करने वाले रुडॉल्‍फ डीजल का निधन हुआ था।
  • 1915 – टेलीफोन से पहला अंतरमहाद्वीपीय संदेश भेजा गया।
  • 1927 – अमेरिका और मैक्सिको के बीच टेलीफोन सेवा की शुरुआत हुई।
  • 1928 – भारत के पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बृजेश मिश्र का जन्म हुआ।
  • 1932 – अभिनेता, निर्माता-निर्देशक महमूद अली का जन्‍म हुआ था।
  • 1942 – प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी मातंगिनी हज़ारा का निधन हुआ।
  • 1943 – ईरान के पाँचवें राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी का जन्म हुआ।
  • 1944 – पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध क्रांतिकारी गोपाल सेन का निधन हुआ।
  • 1959 – आरती साहा ने इंग्लिश चैनल को तैरकर पार किया।
  • 1962 – कोलकाता में बिड़ला तारामंडल खुला।
  • 1970 – मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासिर का निधन हुआ।
  • 1971 – बंगाल की खाड़ी में चक्रवातीय तूफान से करीब 10 हज़ार लोगों की मौत हुई।
  • 1977 – सोवियत संघ ने स्पेस स्टेशन साल्युत 6 को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया।
  • 1978 – दिन पोप जॉन पॉल प्रथम की रहस्यमय हालात में मौत हो गई थी। वे केवल 33 दिनों पहले पोप चुने गए थे और बिस्तर पर पढ़ाई करते-करते अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।
  • 1979 – कैथोलिक ईसाइयों के धार्मिक गुरू पोप जॉन पॉल द्वितीय ने आज ही के दिन आयरलैंड के लोगों से हिंसा को त्याग कर शांति के रास्ते पर चलने की अपील की थी।
  • 2000 – चीन की मुन्चोनाक कोयला खान में 100 लोगों की मृत्यु।
  • 2001 – संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवाद विरोधी अमेरिकी प्रस्ताव पारित किया।
  • 2002 –बुसान में 14वें एशियाई खेलों का उद्घाटन हुआ।
  • 2003 – ईरान ने यूरेनियम परिशोधन कार्यक्रम जारी रखने का निर्णय लिया।
  • 2006 – विश्व की पहली महिला अंतरिक्ष पर्यटक ईरानी मूल की अमेरिका नागरिक अनुशेह अंसारी पृथ्वी पर सकुशल लौटीं।
  • 2017 – भारतीय सिनेमा के अभिनेता टॉम ऑल्टर का निधन हुआ।

28 सितम्बर का इतिहास

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28 सितम्बर का इतिहास

  • 1836 – आध्यात्मिक गुरु शिरडी साईं बाबा का जन्म हुआ
  • 1837 – मुग़ल वंश का 18वाँ बादशाह अकबर द्वितीय का निधन हुआ था ।
  • 1837 – अंतिम मुग़ल बादशाह बहादुर शाह द्वितीय ने दिल्ली का शासन संभाला।
  • 1885 – हिन्दी के साहित्यकार तथा सरस्वती पत्रिका के संपादक श्री नारायण चतुर्वेदी का जन्म हुआ था ।
  • 1895 – फ्रांस के प्रसिद्ध जैव वैज्ञानिक लुईस पाश्चर का निधन हुआ था ।
  • 1907 – महान् स्वतंत्रता सेनानी भगतसिंह का जन्म हुआ था ।
  • 1909 – अभिनेता पी. जयराज का जन्म हुआ था।
  • 1928 – अमेरिका ने चीन की राष्ट्रवादी च्यांग काई–शेक की सरकार को मान्यता दी।
  • 1929 – भारतीय पार्श्वगायिका लता मंगेशकर का जन्म हुआ था।
  • 1949 – भारत के 41वें मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मल लोढ़ा का जन्म हुआ था।
  • 1953 – प्रसिद्ध अमेरिकी खगोलशास्त्री एडविन हब्बल का निधन हुआ था ।
  • 1958 – फ्रांस में संविधान लागू हुआ था।
  • 1982 – प्रसिद्ध भारतीय निशानेबाज़ अभिनव बिन्द्रा का जन्म हुआ था।
  • 1982 – बालीवुड अभिनेता रणबीर कपूर का जन्म हुआ था।
  • 1997 – अमेरिकी अंतरिक्ष शटल अटलांटिक रूसी अंतरिक्ष केन्द्र ‘मीर’ से जुड़ा।
  • 2001 – अमेरिका व ब्रिटिश सेना एवं सहयोगियों ने ‘ऑपरेशन एंड्योरिंग फ़्रीडम’ प्रारम्भ किया।
  • 2004 – विश्व बैंक ने भारत को विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहा।
  • 2006 – जापान के नव निर्वाचित एवं 90वें प्रधानमंत्री के रूप में शिंजो एबे ने शपथ ली।
  • 2006 –फ़्रांस की चिकित्सा टीम ने लगभग शून्य गुरुत्वाकर्षण में एक व्यक्ति का सफल आपरेशन किया।
  • 2007 – मेक्सिको के तटीय क्षेत्रों में आये चक्रवर्ती तूफ़ान लोरेंजो ने भारी तबाही मचाई।
  • 2007 – नेशनल एयरोनॉटिक्स स्पेस एडमिनिशस्ट्रशन (नासा) ने विशेष यान डॉन का प्रक्षेपण किया।
  • 2008 – हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार शिवप्रसाद सिंह का निधन।
  • 2009 – स्टार खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा पैन पैसिफिक ओपन के पहले राउंड में हार के बाद बाहर हुई।
  • 2011 – मुख्यमंत्री मायावती ने 72 जिलों वाले उत्तर प्रदेश में पंचशील नगर, प्रबुद्धनगर और संभल नामक तीन और जिले के निर्माण की घोषणा की।
  • 2012 – भारत के पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बृजेश मिश्र का निधन हुआ था ।
  • 2015 – हिन्दी के प्रसिद्ध कवि वीरेन डंगवाल का निधन हुआ था ।

 

26  सितम्बर का इतिहास

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26  सितम्बर का इतिहास

  • 1820 – प्रसिद्ध समाज सुधारक, शिक्षाशास्त्री और स्वाधीनता सेनानी ईश्वर चन्द्र विद्यासागर का जन्म हुआ।
  • 1876 – भारतीय कवि, वकील, और राजनीतिज्ञ गुलाम गुलाम भीख नैरंग का जन्म हुआ।
  • 1888 – नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकन, अंग्रेज़ी लेखक टी.एस. इलियट का जन्म हुआ।
  • 1921 – परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक सूबेदार जोगिन्दर सिंह का जन्म हुआ।
  • 1923 – फ़िल्म अभिनेता और निर्माता देव आनंद का जन्म हुआ।
  • 1923 – बेयर्न में गुस्ताव रीटर वॉन कारा ने बर्लिन से स्वतंत्रता की घोषणा की।
  • 1932 – भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म हुआ।
  • 1950 – संयुक्त राष्ट्र सैनिकों ने उत्तर कोरिया के सैनिकों से सोल को अपने कब्जे में लिया।
  • 1950 – इंडोनेशिया ने संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता ग्रहण की।
  • 1956 – भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति लक्ष्मण काशीनाथ किर्लोस्कर का निधन हुआ।
  • 1958 – गोवा के स्वतंत्रता सेनानी टी. बी. कुन्हा का निधन हुआ।
  • 1959 – जापान के इतिहास में सबसे शक्तिशाली तूफान ‘वेरा’ से 4580 लोगों की मौत और 16 लाख लोग बेघर हुए।
  • 1960 – अमेरिका में राष्ट्रपति पद के दो उम्मीदवारों जॉन एफ केनेडी और रिचर्ड निक्सन के बीच बहस का पहली बार टेलीविज़न पर प्रसारण।
  • 1973 – सुपरसैनिक कॉन्कॉर्ड यात्री हवाई जहाज ने अटलांटिक की यात्रा को रिकॉर्ड समय में यानी महज 3 घंटा 32 मिनट में पूरा किया।
  • 1977 – भारत के प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य के नर्तक, नृत्य निर्देशक और और बैले निर्माता उदय शंकर का निधन हुआ।
  • 1984 – यूनाइटेड किंगडम हांगकांग को चीन के हवाले करने के लिए सहमत हुआ।
  • 1986 – ब्रिटेन और चीन के बीच हांगकांग को लेकर समझौता हुआ।
  • 1989 – हिन्दी फ़िल्मों के पार्श्वगायक और संगीतकार हेमन्त कुमार का निधन हुआ।
  • 1998 – सचिन तेंदुलकर ने जिम्बाब्वे के ख़िलाफ़ एक दिवसीय क्रिकेट मैच में 18वां शतक लगाकर डेसमंड हेन्स का विश्व रिकार्ड तोड़ा।
  • 2001 – अमेरिका ने लादेन के बाद कश्मीरी आतंकवादियों से निपटने का भारत को आश्वासन दिया।
  • 2004 – अमेरिका ने असैनिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए भारत को तकनीक देने का निर्णय किया।
  • 2007 – वियतनाम के दक्षिणी शहर कैनथो में एक निर्माणाधीन पुल के ध्‍वस्त हो जाने से 62 श्रमिकों की मृत्‍यु हो गई।
  • 2011 – संयुक्त राष्ट्र ने “स्वच्छ विकास तंत्र” योजना के तहत हरित गृह गैसों में कमी लाने के लिए दिल्ली मेट्रो को दुनिया का पहला “कार्बन क्रेडिट” दिया जिसके अंतर्गत उसे सात सालों के लिए 95 लाख अमेरिकी डॉलर मिलेंगे।
  • 2014  –मेक्सिको के इगुआला में सामूहिक अपहरण की घटना।
  • 2015 – सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला ने चुनाव में महिलाओं के मतदान करने तथा शूरा परिषद में शामिल होने की अनुमति देने की घोषणा 2011 में की।