6 अक्टूबर का इतिहास

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6 अक्टूबर का इतिहास

  • 1582 – ग्रेगरी के पंचांग के लागू होने के कारण पोलैंड, स्पेन, इटली तथा पुर्तगाल में यह दिन रद्द किया गया। यानि इस साल ऐसा कोई दिन नहीं आया।
  • 1661– सिक्खों के सातवें गुरु हरराय का निधन हुआ।
  • 1679 – मुग़ल वंश का 12वाँ बादशाह नेकसियर का जन्म हुआ।
  • 1683 – 13 जर्मन परिवार जर्मनी के क्रेफेल्ड से फिलाडेल्फिया आए थे। इस दिन हर साल जर्मन अमेरिकी दिवस मनाया जाता है।
  • 1862 – भारतीय दंड संहिता कानून पारित हुआ और एक जनवरी से लागू हुआ।
  • 1935 – भारत में 32 साल के सबसे लंबे समय तक अंपायरिंग करने वाले जीवन डी घोष का बंगाल में जन्म हुआ।
  • 1946 – प्रसिद्ध अभिनेता एवं राजनीतिज्ञ विनोद खन्ना का जन्म हुआ।
  • 1957 – सोवियत संघ ने नोवाया त्रेमल्या में परमाणु परीक्षण किया।
  • 1963 – पंजाब के स्वतंत्रता सेनानी और ग्रैंड ओल्ड मैन बाबा खड़क सिंह का निधन हुआ।
  • 1973 – इसी दिन इसरायल के ऊपर मिस्र और सीरिया के फ़ौजों ने दो तरफा हमला शुरू कर दिया था।
  • 1983 –  पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
  • 1986 – राजस्थान के प्रसिद्ध क्रांतिकारी तथा समाज सेवक गोकुलभाई भट्ट का निधन हुआ।
  • 1995 – यूनेस्को ने वर्ष संयुक्त राष्ट्र सहिष्णुता वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा 1994 में की।
  • 1995 – दो स्विस वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के सौर व्यवस्था के बाहर गृह की पहली बार पहचान की।
  • 1999 – संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सम्मेलन ऑस्ट्रेलिया की राजधानी वियना में प्रारम्भ।
  • 2002 – नेपाल के नरेश ज्ञानेन्द्र वीर विक्रम शाह देव ने सत्ता नहीं संभालने की घोषणा की।
  • 2006 – संयुक्त राष्ट्र ने लेबनान में शांति रक्षकों को बल प्रयोग का अधिकार दिया।
  • 2007 – राजनीतिज्ञ, महाराष्ट्र के 9वें मुख्यमंत्री बाबासाहेब भोसले का निधन हुआ।
  • 2012 – प्रसिद्ध भारतीय वकील, नेता एवं पश्चिम बंगाल के 19वें राज्यपाल बी सत्या नारायण रेड्डी का निधन हुआ।
  • 2014 – अमेरिकी अभिनेत्री मारियन सेल्डस का निधन हुआ।

5 अक्टूबर का इतिहास

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5 अक्टूबर का इतिहास

  • 1524 – भारतीय इतिहास की प्रसिद्ध वीरागंना रानियों में से एक रानी दुर्गावती का जन्म हुआ।
  • 1676 – ईस्ट इंडिया कंपनी को इंग्लैंड के राजा से मुंबई में भारतीय मुद्रा ढालने का अधिकार मिला।
  • 1793 – फ्रांसीसी क्रांति के दौरान फ्रांस में ईसाई धर्म विस्थापित हुआ।
  • 1796 – स्पेन ने इंग्लैंड के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा की।
  • 1805 – भारत में ब्रिटिश राज के दूसरे गवर्नर जनरल व कमांडर इन चीफ लार्ड कार्नवालिस का गाजीपुर में निधन हुआ।
  • 1864 – कलकत्ता शहर में चक्रवात से लगभग 50,000 लोगों की मौत हुई।
  • 1890 – समाज सुधारक तथा स्वतंत्रता सेनानी किशोरी लाल मशरूवाला का जन्म हुआl
  • 1944 – फ्रांस में महिलाओं को मताधिकार मिला।
  • 1981 – हिन्दी जगत् के प्रमुख साहित्यकार भगवतीचरण वर्मा का निधन हुआ।
  • 1988 – ब्राजील की संविधान सभा ने संविधान को मंजूरी दी।
  • 1989 – मीरा साहिब बीवी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनी।
  • 1989 – तिब्बत के 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो को मानवाधिकारों के क्षेत्र में कार्य के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला।
  • 1997 – राजधानी कम्पाला से नील नदी को स्रोत जिन्जा में प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया, भारतीय टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेसतथा महेश भूपति ने जिम कूरियर तथा एलेक्स ओ ब्रायन को पराजित कर ‘चाईना ओपन टेनिस टूर्नामेंट’ का ख़िताब जीता।
  • 1999 – भारत ने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) पर होने वाली विशेष बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया।
  • 2004 – पश्चिम एशिया पर अरब देशों के प्रस्ताव का अमेरिका ने विरोध किया।
  • 2011 – भारत में दुनिया का सबसे सस्ता 2250 रुपये का टैबलेट पीसी ‘आकाश’ जारी किया गया।
  • 2011 – भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि सरकार या उसके विभागों द्वारा किसी विशेष उद्देश्य से अधिगृहीत की गई जमीन का उपयोग नहीं बदला जा सकता है। न ही इस जमीन को निजी प्रयोग के लिए किसी व्यक्ति को या व्यवसायिक कंपनियों को दिया जा सकता है।
  • 2011 – एप्पल द्वारा सिर्फ बोलने से एसएमएस व ई-मेल करने में सक्षम आईफोन 4एस जारी किया गया।
  • 2011 – ऐपल के पूर्व मुख्य कार्यकारी और सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स का 56 वर्ष की आयु में निधन हो गया है।

4 अक्टूबर का इतिहास 

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4 अक्टूबर का इतिहास

  • 1824 – मेक्सिको एक गणराज्य बना।
  • 1830 – नीदरलैंड से अलग होकर बेल्जियम साम्राज्य बना।
  • 1857 – प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं लेखक श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म हुआ।
  • 1884 – बीसवीं शताब्दी के हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार रामचन्द्र शुक्ल का जन्म हुआ।
  • 1927 – ‘भारतीय प्रशासनिक सेवा’ में भारत की दूसरी महिला अधिकारी तथा मध्य प्रदेश की भूतपूर्व राज्यपाल सरला ग्रेवाल का जन्म हुआ।
  • 1931 – हिंदी और बांग्ला पार्श्व गायिका संध्या मुखोपाध्याय का जन्म हुआ।
  • 1957 – सोवियत संघ ने पहला उपग्रह स्पुतनिक सफलता पूर्वक अंतरिक्ष में भेजा था।
  • 1974 – भारत ने दक्षिण अफ्रिका की सरकार की रंभेदी नीति का प्रतिरोध करने के लिए वहाँ जाकर डेविस कप में भाग लेने से इनकार कर दिया।
  • 1977 – भारत के विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक को हिंदी में संबोधित किया। हिंदी में दिया गया यह पहला संबोधन था।
  • 1996 – पाकिस्तान के 16 वर्षीय बल्लेबाज़ शाहिद अफ़रीदी ने एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच में 37 गेंदों में शतक बनाकर विश्व कीर्तिमान रचा।
  • 2002 – पाकिस्तान में शाहीन प्रक्षेपास्त्र का परीक्षण किया गया।
  • 2006 – जूलियन असांजे ने विकीलीक्स की स्थापना की थी।
  • 2008 – अमेरिका की विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस एक दिन के लिए भारत यात्रा पर रहीं।
  • 2011 – अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) के मुखिया अबू बकर अल बगदादी को वैश्विक आतंकवादी के रूप में चिन्हित किया और साथ ही उस पर एक करोड़ डॉलर का ईनाम भी रखा।
  • 2011 – अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई की भारत यात्रा के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई बैठक में सामरिक मामले, खनिज संपदा की साझेदारी और तेल और गैस की खोज पर साझेदारी संबंधी तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
  • 2011 – सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में मंगलवार को शिक्षा मंत्रालय के समीप हुए एक आत्मघाती कार बम विस्फोट में कम से कम 65 लोग मारे गए।
  • 2011 – अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंध्रप्रदेश में 22वें दिन भी हड़ताल जारी रही।
  • 2011 – दक्षिण पश्चिम पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा के अख्तराबाद इलाके में शिया मुस्लिम समुदाय के 12 व्यक्तियों को हथियारबंद लोगों ने उनकी गाड़ी से उतारकर हत्या कर दी।
  • 2011 – भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की यात्रा के दौरान भारत और स्विट्जरलैंड ने वित्तीय क्षेत्र में सहयोग के लिए द्विपक्षीय समझौता किया गया जिससे आयकर विभाग के बीच सहयोग बढने और स्विस बैंकों में भारतीयों के खातों का पता लगाने में मदद मिलेगी।
  • 2011 – मैक्सिको के राष्ट्रीय मानव विज्ञान एवं इतिहास संस्थान ने उत्तर में स्थित दुरांगो प्रांत से प्राप्त मानवीय अस्थियों के आधार पर दावा किया है कि प्राचीन समय में यहां के आदिवासी नरभक्षी थे।
  • 2012 – चीन में आये भूस्खलन के बाद 19 लोग दबकर मरे।
  • 2015 – भारतीय फिल्म निर्देशक एवं निर्माता इदिदा नागेश्वर राव का निधन हुआ।

3 अक्टूबर का इतिहास

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3 अक्टूबर का इतिहास

  • 1657 – फ्रांसीसी सैनिकों ने मैड्रिक पर कब्जा किया।
  • 1735 – फ्रांस और छठे कैरल सम्राट ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • 1831 – मैसूर (अब मैसुरु) पर ब्रिटेन ने कब्जा किया।
  • 1863 – अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने अमेरिका में ‘थैंक्स गिविंग डे’ मनाए जाने की घोषणा की गई।
  • 1866 – इटली और ऑस्ट्रिया साम्राज्य के प्रतिनिधियों के बीच वियना समझौते पर हस्ताक्षर हुए। जिसके आधार पर ऑस्ट्रिया ने वेंनसी राज्य को इटली के हवाले कर दिया।
  • 1880 – पहले मराठी संगीत नाटक ‘संगीत शाकुन्ताल’ का पुणे में मंचन किया गया।
  • 1890 – उड़ीसा के समाजसेवी और सार्वजनिक कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण साहू का जन्म हुआ।
  • 1923 – भारत की पहली महिला स्नातक और पहली महिला फ़िजीशियन कादम्बिनी गांगुली का निधन हुआ।
  • 1949 – भारतीय फ़िल्म निर्देशक जे. पी. दत्ता का जन्म हुआ।
  • 1953 – प्रसिद्ध न्यायविद, अधिवक्ता और शिक्षाशास्त्री अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर का निधन हुआ।
  • 1953 – भारत के 45वें मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा का जन्म हुआ।
  • 1977 – पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
  • 1978 – कलकत्ता (अब कोलकाता) में पहला और दुनिया के दूसरे टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म हुआ।
  • 1984 – भारत की सबसे लंबी दूरी की ट्रेन हिमसागर एक्सप्रेस कन्याकुमारी से जम्मू तवी के लिए रवाना की गयी।
  • 1994 – भारत ने सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए औपचारिक रूप से अपना दावा पेश किया।
  • 1995 – चीन एवं इंग्लैंड के बीच हांगकांग के सुगम हस्तांतरण पर सहमति।
  • 1995 – पाकिस्तानी बल्लेबाज शाहिद अफरीदी ने एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच में 37 गेंदों में शतक बनाकर इतिहास रचा।
  • 2004 – लश्कर–ए–तैयबा का राजनीतिक संगठन दो हिस्सों में बंटा।
  • 2007 – भारतीय लेखक एम.एन. विजयन का निधन हुआ।
  • 2008 – टाटा मोटर्स के चेयरमैन रतन टाटा ने सिंगूर से नैनो कार परियोजना अन्यत्र ले जाने की घोषणा की।
  • 2011 – अमेरिका में भ्रष्टाचार, वैश्विक उष्मण, गैरबराबरी आदि के विरुद्ध पिछले एक सप्ताह से ऑक्युपाइड वॉलस्ट्रीट आंदोलन चला रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्यवाई की गई एवं 700 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
  • 2011 – विश्व के चौथी वरीयता प्राप्त ब्रितानी टेनिस खिलाड़ी एंडी मरे ने अमेरिका के डोनल्ड यंग को हराकर एटीपी थाईलैंड ओपन का एकल खिताब जीत लिया है।

 

भारत के वे स्थान जहां दशहरा पर होती है रावण की पूजा!!!

दशहरा यानी विजयादशमी एक ऐसा दिन जब वैसे तो पूरे देश में रावण का दहन किया जाता रहा है, लेकिन देश के कुछ हिस्से ऐसे भी है जहाँ इस दिन रावण की पूजा करने का रिवाज़ हैं। ऐसा करने के पीछे उनके पास अपनी अपनी मान्यताएं हैं।

मंदसौर, मध्य प्रदेश

मंदसौर मध्य प्रदेश-राजस्थान की सीमा पर स्थित है। रामायण के अनुसार, मंदसौर रावण की पत्नी मंडोडरी का पैतृक घर था और इसीलिए रावण को मंदसौर के लोग दामाद मानते है। इसलिए वहाँ रावण की पूजा और सम्मान अद्वितीय ज्ञानी और भगवान शिव के भक्त के रूप में होती है । इस जगह में रावण की 35 फुट लंबी मूर्ति है। दशहरा पर, गाँव के लोग रावण की मौत पर शोक करते हैं और प्रार्थना करते हैं।

बिसरख, उत्तर प्रदेश

बिसरख को अपना नाम ऋषि विश्वरा के नाम पर मिला है – जो दानव राजा रावण के पिता थे । बिसरख में रावण का जन्म हुआ था और उन्हें यहां महा-ब्राह्मण माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि विश्वा ने बिसरख में एक स्वयंभू (स्वयं प्रकट) शिव लिंग की खोज की थी और तब से स्थानीय लोग ऋषि विश्वरा और रावण के सम्मान के रूप में उनकी पूजा करते है। बिसरख में, लोग नवरात्रि उत्सव के दौरान रावण की मृत आत्मा के लिए यज्ञ और शांति प्रार्थना करते हैं।

गडचिरोली, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र गडचिरोली की गोंड जनजाति रावण और उनके पुत्र मेघनादा की देवताओं के रूप में पूजा करती हैं। गोंड जनजातियों के अनुसार, रावण को वाल्मीकि रामायण में कभी भी बुरा नहीं दिखाया गया था और ऋषि वाल्मीकि ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि रावण ने कुछ भी गलत नहीं किया था और ना ही सीता को बदनाम किया था । यह तुलसीदास रामायण में ही था कि रावण एक क्रूर और शैतानी राजा था।

काँगड़ा, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा के खूबसूरत जिले में भी रावण दहन की प्रथा को मनाया नहीं जाता । पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण ने भगवान शिव को बैजनाथ, कांगड़ा में ही अपनी भक्ति और तपस्या के साथ प्रसन्न किया था । ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने उन्हें यहां ही वरदान दिया था। इसीलिए यहाँ रावण को भगवान शिव के महान भक्त के रूप में सम्मानित किया जाता है।

मांड्या और कोलर, कर्नाटका

भगवान शिव के कई मंदिर हैं जहां रावण की भगवान शिव के लिए उनकी अतुलनीय भक्ति के लिए पूजा की जाती है। फसल के त्यौहार के दौरान कर्नाटक के कोलार जिले के लोगों द्वारा लंकादिपति रावण की पूजा की जाती है। एक जुलूस में, भगवान शिव की मूर्ति के साथ, रावण के दस-सर वाले (दशानन) और बीस सशस्त्र मूर्तियों की भी स्थानीय लोगों द्वारा पूजा की जाती है। इसी प्रकार, कर्नाटक के मंड्या जिले में मलावल्ली तालुका में, भगवान शिव के लिए अपने समर्पण का सम्मान करने के लिए हिंदू भक्तों द्वारा रावण के एक मंदिर में उनकी पूजा की जाती है।

जोधपुर, राजस्थान

कहा जाता है कि राजस्थान के जोधपुर के मौदगील में ब्राह्मण रावण के विवाह के दौरान लंका से आए थे। मंडोडरी और रावण का विवाह किण चनवारी में हुआ था। जोधपुर के मौडिल ब्राह्मणों द्वारा हिंदू अनुष्ठानों के अनुसार लंकेश्वर रावण की प्रतिमाओं को जलाने के बजाय, श्राध और पिंड दान किया जाता है क्यूंकि वह खुद को उनके वंशजों मानते है ।

कर्नाटक – कोलार 

कर्नाटक में कुछ ग्रामीण इलाकों में दशहरा पर रावण की पूजा की जाती है। यहाँ के लोग रावण को विद्या और ज्ञान का प्रतीक मानते हैं। रावण के प्रतीक पुतले को सजाया जाता है और उसे देवी-देवताओं के समक्ष सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाता है। यह परंपरा यह सिखाती है कि सभी पक्षों का सम्मान करना आवश्यक है, भले ही वह दुष्ट पात्र हो।

महाराष्ट्र – नागपुर 

महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में रावण को योग और विद्या का गुरु मानकर पूजा की जाती है। लोग मानते हैं कि रावण ने महर्षि ऋषियों से अनेक ज्ञान प्राप्त किया था। इसलिए, रावण का सम्मान कर उसका ज्ञान और वीरता याद किया जाता है।

उत्तराखंड 

उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में दशहरा पर रावण के सांकेतिक पूजन की परंपरा है। यह परंपरा स्थानीय देवी-देवताओं और पुरानी कथाओं से जुड़ी हुई है। ग्रामीण मानते हैं कि रावण की पूजा करने से शत्रु नष्ट नहीं होते बल्कि उनके साथ बुद्धिमानी से निपटना आता है।

विजयादशमी : दशानन रावण के जीवन से सीखने योग्य बातें

आज विजयादशमी है। राम ने रावण को मारकर धरती को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। रावण अधर्म का प्रतीक था, पापी था, लेकिन ज्ञानी भी था। जिस तरह हम भगवान राम के जीवन की घटनाओं से सीखते हैं कि हमें अपनी जिंदगी में क्या करना चाहिए, वैसे ही रावण का जीवन सिखाता है कि हमें क्या-क्या नहीं करना चाहिए।

तो आज दशानन रावण के जीवन की 5 कहानियों से सीखें कि क्या गलतियां हमें नहीं करनी चाहिए।

मन की शांति सबसे बड़ा सुख है

रावण का मन शांत नहीं रहता था। संतुष्टि का भाव उसमें था ही नहीं। तीनों लोकों को जीतने के बाद भी रावण के मन में एक अशांति थी कि इतना शक्तिशाली होने के बाद भी कोई उसकी पूजा नहीं करता। नतीजतन उसने ऋषि-मुनियों को मारना शुरू कर दिया।

सारी दुनिया जीतने के बाद भी मन में एक असंतुष्टि थी कि लोग उसकी पूजा क्यों नहीं करते। जब रावण के अत्याचार बढ़ने लगे तो ऋषियों ने तप शुरू किए। यज्ञ और ज्यादा होने लगे। यज्ञ होने लगे तो रावण ने अपने अत्याचार और बढ़ा दिए। दुनियाभर में रावण का आतंक हो गया।

पूरी धरती परेशान हो गई। तब भगवान को उसे मारने के लिए अवतार लेना पड़ा। ये असंतुष्टि उसे पापके रास्ते पर ले गई और उसे अंतत: इसी असंतुष्टि के कारण मरना पड़ा। इसलिए हमेशा मन में संतुष्टि का भाव रखें। जो हमारे पास है, उसे स्वीकार करें।

बिना किसी की शक्ति का अनुमान किए चुनौती ना दें

रावण की नजर में सिर्फ वो खुद ही महान योद्धा था। वो हर किसी को युद्ध की चुनौती देता रहता था। ऐसे ही एक बार उसे वानरों के राज किष्किंधा के बारे में पता चला। वहां का राजा बाली काफी शक्तिशाली है ऐसा उसे पता चला। रावण ने बिना किसी विलंब के किष्किंधा का रूख किया।

रावण ने बाली को ललकारा, उस समय बाली अपने महल में नहीं था। उसका छोटा भाई सुग्रीव मौजूद था। सुग्रीव ने रावण से पूछा कि तुम कौन हो और क्यों बाली को पुकार रहे हो तो रावण ने जवाब दिया कि मैं बाली से युद्ध करना चाहता हूं या तो वो मुझसे युद्ध करे या फिर अपनी हार स्वीकार कर मेरी दासता स्वीकार करे।

सुग्रीव को रावण की इस बात पर हंसी आ गई। उसने कहा- महाराज बाली अभी संध्यापूजन के लिए समुद्र तट पर गए हैं।
कुछ ही देर में वो यहां चार समद्रों की परिक्रमा करके लौटेंगे। तब तुम्हारी इच्छा वैसे ही पूरी हो जाएगी।

रावण से रहा नहीं गया। उसने जैसे ही सुना कि बाली अभी पूजा करने समुद्र तट पर गया है, वो समुद्र किनारे पहुंच गया। बाली उस समय सूर्य को अर्घ्य दे रहा था, रावण ने पीछे से वार करने की कोशिश की, लेकिन बाली ने उसे पकड़ कर अपनी बाजू में दबा लिया। रावण छूटने की कोशिश करता रहा, लेकिन नहीं छूट पाया।

बाली ने चार समुद्र की परिक्रमा उसे अपनी कांख में दबाकर की। तब तक रावण को अपनी गलती का अहसास हो गया था कि उसने बिना बाली की ताकत का अंदाजा लगाए उस पर हमला करने की गलती कर दी।

जैसे ही बाली ने उसे छोड़कर पूछा कि बता तू क्या चाहता है, तो युद्ध करने की इच्छा से आए रावण ने बाली को मित्रता का प्रस्ताव दिया। रावण की ये गलती सिखाती है कि किसी की ताकत और कमजोरी को समझे बिना उसे चुनौती नहीं देनी चाहिए। इससे हमारी हार ही होती है।

अगर सही सलाह मिले तो उसे स्वीकार करें

वाल्मीकि रामायण का एक प्रसंग है। जब राम से शादी करने की जिद कर रही शूर्पणखा के नाक लक्ष्मण ने काट दिए तो वो अपने भाई रावण के पास पहुंची। उसने रावण को बताया कि उसके राज्य में कोई संन्यासी है, जो उसके लिए घातक हो सकता है। रावण तुरंत अपने रथ पर बैठकर निकल गया। वो सीधा अपने मामा मारिच के पास पहुंचा।

उसने मारिच से कहा कि उसके राज्य में कोई दो संन्यासी घुस आए हैं, उन्हें मारना है। मारिच एक बार पहले राम से युद्ध कर चुका था, राम ने घास के तिनके को तीर बनाकर छोड़ा ‘ और मारिच समुद्र पार जाकर गिरा था। मारिच ने रावण को समझाया कि राम से युद्ध करना उसके हित में नहीं है।

वो लौट जाए। रावण मान गया। वो फिर लौटकर अपने महल में आ गया। शूर्पणखा को जब पता चला कि रावण ने राम से बदला लेने का विचार त्याग दिया है तो उसने फिर जाकर रावण को बोलै कि वन में जो दो संन्यासी हैं, उनके साथ एक बड़ी सुंदर सी स्त्री भी है, जिसे रावण के पास होना चाहिए क्योंकि उसके जैसी कोई और सुंदर महिला संसार में नहीं है।

सीता की सुंदरता के बारे में सुनकर रावण ने सीता के हरण की योजना बनाई। वो फिर मारिच के पास पहुंचा। मारिच ने उसे फिर वही सलाह दी कि राम कोई सामान्य संन्यासी नहीं है, अवतारी पुरुष हैं।

उनसे दुश्मनी ना लें, लेकिन इस बार रावण नहीं माना और मारिच से कहा कि अगर वो सीता के हरण में उसकी सहायता नहीं करेगा तो उसे मार दिया जाएगा। मारिच ने सोचा, रावण के हाथ से मरने से बेहतर है, राम के हाथों मारा जाऊं। फिर मारिच ने स्वर्ण मृग बनने की योजना बनाई।

ये सीता हरण ही रावण के पूरे वंश का नाश का कारण बन गया। इस पूरे प्रसंग से सीख सकते हैं कि अगर कोई सही सलाह मिले तो उसे मानें, अपनी जिद और लालच में उस सलाह को ना ठुकराएं। ये आपके लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

रिश्ते अधिकार से नहीं चलते, समर्पण से टिकते हैं

वाल्मीकि रामायण कहती है, रावण के पास पुष्पक विमान तो था ही, जो उसने अपने भाई कुबेर से छीना था। इसके साथ ही रावण के पास एक दिव्य रथ भी था। रावण ने तीनों लोकों को इसी रथ पर बैठकर जीता था।

रावण जहां भी जाता वहां से राजकूमारियों, रानियों और अन्य सुंदर औरतों को उठाकर अपने महल में ले आता था। रावण के महल में करीब 10 हजार ऐसी औरतें थीं, जिन्हें वो अलग-अलग राज्यों से अपहरण करके लाया था।

रावण एक बार ऐसे ही लंका में सैंकडों महिलाओं को जीत कर ले आया। तब विभीषण ने रावण को बताया कि तुम अपने बल के अभिमान में कितनी औरतों को उनके पति और पिता को मार कर उठा लाए। तुम्हारे इन्हीं पापकर्मों का परिणाम हमारे परिवार को भुगतना पड़ रहा है।

रावण ने पूछा – ऐसा क्या हो गया जो तुम मुझसे इस तरह की बातें कर रहे हो। विभीषण ने जवाब दिया – तुम विश्वविजय के लिए निकले थे, दूसरे राजाओं के परिवार की औरतें लाने में व्यस्त थे, तब एक राक्षस ने हमारे राज्य पर हमला कर दिया। वो हमारी मौसी की बेटी, हमारी बहन को उठाकर ले गया। तुम दुनिया के साथ जो कर रहे थे. वो हमारे ही परिवार के साथ घट गया।

रावण को अपनी गलती का एहसास हुआ। वो अपनी बहन को बचाने निकला, लेकिन तब तक उसकी बहन ने उस राक्षस को अपना पति मान कर शादी कर ली।

ये कहानी सिखाती है कि हम दुनिया को जो देते हैं, वो ही लौटकर हमारे पास आता है। इसलिए, संसार में रहकर अच्छे काम करें। आप अच्छा करेंगे तो आपके साथ भी अच्छा ही होगा।

आप दुनिया के साथ जो करते हैं, वो आपके साथ भी होगा

रावण परम शिव भक्त था। भगवान शिव को उसने ऐसा प्रसन्न किया कि खुद भगवान शिव ने घोषित किया कि रावण उनका परमभक्त है। रावण ने खुद को शिव का सबसे बड़ा भक्त मान लिया। इस बात का उसे अहंकार हो गया।

एक दिन जब रावण सोने की लंका में बैठा था, तो उसे ख्याल आया कि उसके आराध्य भगवान शिव कैलाश पर्वत पर रहते हैं, जहां ना कोई भवन है ना कोई महल। रावण ने तय किया कि वो भगवान शिव को लंका में लेकर आएगा, ताकि वो उनके पास भी रह सके और भगवान भी सोने की लंका का वैभव भोग सके। रावण कैलाश पर्वत की ओर चल दिया।

उसने भगवान शिव को लंका ले जाने के लिए कैलाश पर्वत को उठाने की कोशिश की। एक हाथ कैलाश पर्वत के नीचे लगाया और उठाने लगा तो भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया। रावण का हाथ दब गया। वो कुछ कर नहीं पा रहा था।

तब उसने शिवतांडव स्तोत्र की रचना कर शिव को प्रसन्न किया। भगवान ने उसे समझाया कि वो अपनी भक्ति का अहंकार ना करे। अहंकार ही उसके विनाश का कारण हो सकता है। रावण ने रिश्तों में समर्पण से ज्यादा अधिकार पर जोर दिया, इसलिए उसे लगभग हर रिश्ते से हाथ धोना पड़ा।

भाई विभीषण छोड़ गया, कुंभकर्ण मारा गया, सारे बेटे मारेगए,पत्नियां अकेली रह गईं। रिश्तों में अधिकार की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि समर्पण रिश्तों को बचाता है।

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महात्मा गांधी का एक विचार दिला सकता है मनचाही सफलता

महात्मा गांधी जी को हम बापू के नाम से जानते हैं। उनका पूरा जीवन अपने आप में एक स्कूल की तरह है जिसे अपना कर आप अपने जीवन में नई ऊंचाइयां पा सकते हैं। गांधी जी ने अपने अनुभव पर कई किताबें लिखीं जो आज हमें जीवन की नई राह दिखाती हैं।

उनकी सोच हमें राह दिखाती है और उनके विचार आज भी उतने ही सार्थक हैं जितने कि वह तब थे। यदि उनके विचारों पर अमल किया जाए तो हम जीवन में कई तरह से आनंद पा सकते हैं।

ऐसे जिएं जैसे आपको कल मरना है, सीखें ऐसे कि आपको हमेशा जीवित रहना है

गांधी जी का यह विचार हमें लगातार सीखने की ओर प्रेरित करता है। कई बार हम यह सोचकर कुछ नया नहीं सीखते कि अब सीख कर क्या करना है। हमें जीना ही कितना है मगर गांधी जी के अनुसार सीखने की कोई उम्र नहीं होती जब जागो तब सवेरा।

जो समय बचाते हैं वे धन को बचाते। बचाया धन, कमाए धन के समान ही महत्वपूर्ण है

हममें से कई लोग हैं जो अक्सर यह कहते हैं कि क्या करें टाइम ही नहीं मिलता मगर भगवान ने सभी को 24 घंटे ही दिए हैं किसी को कम या ज्यादा नहीं तो फिर कोई और क्या कर सकता है तो हम क्यों नहीं। क्या हममें काबिलियत नहीं है।

कुछ अलग से करने की इच्छा नहीं है। इसका कारण टाइम मैनेजमैंट का न होना है। यदि हम लगातार अपना समय बचाएं, अपने समय को अनावश्यक रूप से व्यर्थ न करके उसका सदुपयोग करें तो हम अपने साथ-साथ दूसरों का जीवन भी संवार सकते हैं।

आंख के बदले आंख पूरे विश्व को अंधा बना देगी

आज के समय हर कोई किसी दूसरे की तरक्की नहीं देख सकता। हर समय एक दूसरे की टांग खींचने पर लगे रहते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी की उन्नति में बाधा बनता है तो कोई दूसरा व्यक्ति उसकी उन्नति में बाधा बन जाता है।

जैसा हम दूसरे के लिए करते हैं वैसा ही हम अपने लिए पाते हैं इसलिए अपनी सोच को सदैव सकारात्मक रखें। बदला लेने की भावना अपने मन पर हावी न होने दें ताकि खुद भी तरक्की कर सकें और दूसरों की तरक्की पर हमें मलाल न हो। – प्रसन्नता ही एक मात्र ऐसा इत्र है जिसे आप दूसरे पर डालते हैं तो कुछ बूंद आप पर भी पड़ती है।

व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से नहीं उसके चरित्र से होती है

कई बार हम बाहरी आवरण को देख कर किसी की तरफ आकर्षित हो जाते हैं मगर जब हम उसके करीब जाते हैं तो हम सच्चाई से रू-ब-रू हो पाते हैं।

किसी व्यक्ति के कपड़ों से हम उसके व्यक्तित्व को नहीं समझ सकते।वह उसके व्यक्तित्वका आवरण मात्र है। उसका व्यक्तित्व उसके चरित्र से उजागर होता है।

आप जो कुछ भी करते हैं वह कम महत्वपूर्ण हो सकता है मगर सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप कुछ करें

कई बार किसी कार्य को करने से पहले ऐसे विचार हमारे दिमाग में चलते रहते हैं कि “वह जरूरी नहीं है” या “वह कम महत्वपूर्ण है”। ऐसे में हम उस कार्य को शुरू ही नहीं कर पाते।

यदि हम किसी कार्य को करेंगे ही नहीं तो कैसे पता चलेगा कि वह महत्वपूर्ण है या नहीं। कार्य महत्वपूर्ण है या नहीं यह जरूरी नहीं है कार्य का होना जरूरी है।

गांधी जयंती 2 अक्तूबर

गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था जिनका जन्म 2 अक्तूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। इस दिन को सारा देश गांधी जयंती के रूप में मनाता है। अहिंसा के पथ पर चल कर देश को अंग्रेजों की दास्ता से मुक्ति दिलाने वाले गांधी जी ने पूरी दुनिया को अपने विचारों से प्रभावित किया था। । अहिंसा केरास्ते पर चलने की बात गांधीजी |ने आजादी की लड़ाई में शामिल हर शख्स से कही थी। उन्होंने त्याग को अपने जीवन में सदा अपनाए रखा और सादगी भरे जीवन के साथ-साथ कम से कम चीजों से अपना जीवनयापन किया।

गांधी जी के तीन महत्वपूर्ण सूत्र

पहला : सामाजिक गंदगी को दूर करने के लिए झाड़ का सहारा।
दूसरा : सामूहिक प्रार्थना को बल देना जिससे एकजुट होकर व्यक्ति जात-पात और धर्म की बंदिशों को दरकिनार कर प्रार्थना करे।
तीसरा: चरखा जोआत्मनिर्भर और एकता का प्रतीक माना जाने लगा था।

हंसता हुआ चेहरा हर किसी को पसंद होता है। हर हंसने वाले चेहरे के साथ दुनिया हंसती है। यदि आप अपनी छवि को हमेशा अच्छा बनाए रखना चाहते हैं, सदैव प्रसन्न रहकर अपने आसपास का माहौल खुशनुमा बना सकते हैं।

क्यों मनाते हैं विजयादशमी, जाने रावण के 10 सिरों का अर्थ !!

इस पर्व को भगवती ‘विजया’ के नाम पर भी ‘विजयादशमी‘ कहते हैं। इस दिन भगवान रामचंद्र चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण का वध कर अयोध्या पहुँचे थे। इसलिए भी इस पर्व को ‘विजयादशमी’ कहा जाता है।

ऐसा माना जाता है कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय ‘विजय’ नामक काल होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है यह भी यह कारण है कि इसे विजयादशमी कहते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, रावण ने देवी सीता का हरण कर लिया था। इस दौरान देवी सीता की रक्षा के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने अधर्म और अन्यायी रावण को युद्ध के लिए ललकारा। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और लंकापति रावण के बीच 10 दिनों तक युद्ध चला।

भगवान श्री राम ने आश्विन शुक्ल की दशमी तिथि को मां दुर्गा से प्राप्त दिव्यास्त्र की मदद से रावण का वध कर दिया था। श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी और यह दशमी तिथि भी थी, ऐसे में इस दिन को विजयदशमी कहा जाता है।

विजया दशमी का अर्थ

विजयादशमी भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग कारणों से अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है। कुछ क्षेत्रों में, यह भैंस राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा की जीत के उत्सव के साथ दुर्गा पूजा के अंत का प्रतीक है।

उत्तरी, मध्य और कुछ पश्चिमी राज्यों में इसे लोकप्रिय रूप से दशहरा कहा जाता है, यह रामलीला के अंत का प्रतीक है। भगवान राम की रावण पर विजय के लिए उत्साह है।

महत्व

इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के असुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। वहीं इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था।

इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग शस्त्र पूजन के साथ ही वाहन पूजन भी भी करतें हैं। वहीं आज के दिन से किसी भी नए कार्य की शुरुआत करना भी शुभ माना जाता है।

रावण के 10 सिरों का महत्व

रावण ने ब्रह्मा के लिए कई वर्षों तक गहन तपस्या की थी l अपनी तपस्या के दौरान, रावण ने ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए 10 बार अपने सिर को काट दिया। हर बार जब वह अपने सिर को काटता था तो एक नया सिर प्रकट हो जाता था l इस प्रकार वह अपनी तपस्या जारी रखने में सक्षम हो गया।

अंत में, ब्रह्मा, रावण की तपस्या से प्रसन्न हुए और 10 वें सिर कटने के बाद प्रकट हुए और उन्हें वरदान मांगने को कहा l इस पर रावण ने अमरता का वरदान माँगा पर ब्रह्मा ने निश्चित रूप से मना कर दिया, लेकिन उन्हें अमरता का आकाशीय अमृत प्रदान किया, जिसे हम सभी जानते हैं कि उनके नाभि के तहत संग्रहीत किया गया था।

रावण के दस सिर दस कमजोरियों या दस पापों का प्रतीक हैं जिनसे मनुष्य को छुटकारा पाना चाहिए। मनुष्य के दस बुरे भाव या गुण जिन्हें रावण के दस सिरों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, वे इस प्रकार हो सकते हैं।

  1. काम (वासना)
  2. क्रोध (क्रोध)
  3. मोह (आकर्षण)
  4. लोभ (लालच)
  5. मद (गर्व)
  6. मत्सर (ईर्ष्या)
  7. स्वर्थ (स्वार्थ)
  8. अन्याय (अन्याय)
  9. अमानवीयता (क्रूरता)
  10. अहंकार (अहंकार)

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भारत के वे स्थान जहां दशहरा पर होती है रावण की पूजा!!!

2 अक्टूबर का इतिहास

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2 अक्टूबर का इतिहास

  • 1492 – ब्रिटेन के किंग हेनरी सप्तम ने फ्रांस पर आक्रमण किया।
  • 1869 – भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का जन्म हुआ
  • 1898 – बिहार के प्रमुख गाँधीवादी रचनात्मक कार्यकर्ता और स्वतंत्रता सेनानी प्रजापति मिश्र का जन्म हुआ।
  • 1904 – भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का जन्म हुआ।
  • 1906 – विख्यात चित्रकार राजा रवि वर्मा का निधन हुआ।
  • 1924 – में राष्ट्रसंघ को शक्तिशाली बनाने के उद्देश्य से जेनेवा प्रस्ताव लाया गया।
  • 1924 – प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक तपन सिन्हा का जन्म हुआ।
  • 1933 – हिन्दी के प्रसिद्ध नाटककार तथा सिनेमा कथा लेखक शंकर शेष का जन्म हुआ।
  • 1942 – प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेत्री आशा पारेख का जन्म हुआ।
  • 1951 – श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की।
  • 1952 – सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरूआत हुई।
  • 1961 – बम्बई (अब मुंबई) में शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया का गठन हुआ।
  • 1964 – भारत की एक प्रख्यात गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और एक सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमारी अमृत कौर का निधन हुआ।
  • 1971 – तत्कालीन राष्ट्रपति वी.वी. गिरि ने गांधी सदन के नाम से प्रसिद्ध बिड़ला हाउस देश को समर्पित किया।
  • 1974 – भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान प्रीतम सिवाच का जन्म हुआ।
  • 1975 – भारत रत्न सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. कामराज का निधन हुआ।
  • 1976 – प्रविण उदासि का जन्म हुआ।
  • 1979 – ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित भारतीय सेना के जांबाज सैनिक हंगपन दादा का जन्म हुआ।
  • 1975 – भारत रत्न सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. कामराज का निधन हुआ।
  • 1982 – ब्रिटिश शासन के अधीन आई.सी.एस. अधिकारी और स्वतंत्रता के बाद भारत के तीसरे वित्त मंत्री सी. डी. देशमुख का निधन हुआ।
  • 1984 – मारियोन बार्तोली का जन्म हुआ।
  • 1988 – दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में 24वें ओलंपिक खेलों का समापन।
  • 2000 – रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन भारत की चार दिवसीय यात्रा दिल्ली पहुँचे।
  • 2004 – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कांगों में 5900 सैनिक भेजने का प्रस्ताव मंजूर किया।

1 अक्टूबर इतिहास

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1 अक्टूबर इतिहास

  • 1574 – सिखों के तीसरे गुरू अमर दास का निधन हुआ।
  • 1842 – स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्‌ और सामाजिक कार्यकर्ता एस. सुब्रह्मण्य अय्यर का जन्म हुआ।
  • 1847 – प्रख्यात समाजसेवी, लेखिका और स्वतंत्रता सेनानी एनी बेसेंट का जन्म हुआ।
  • 1854 – भारत में डाक टिकट का प्रचलन आरंभ हुआ l
  • 1895 – पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाक़त अली ख़ाँ का जन्म हुआ।
  • 1901 – स्वतंत्रता सेनानी एवं पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों का जन्म हुआ।
  • 1904 – केरल के प्रसिद्ध कम्युनिस्ट नेता और भारत के स्वतंत्रता सेनानी ए. के. गोपालन का जन्म हुआ।
  • 1919 – हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म हुआ।
  • 1922 – अमेरिकी वकील और राजनितिज्ञ बर्क मार्शल का जन्म हुआ।
  • 1924 – अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति जिमी कार्टर का जन्म हुआ।
  • 1927 – प्रसिद्ध तमिल अभिनेता शिवाजी गणेशन का जन्म हुआ।
  • 1928 – भारतीय राजनीतिज्ञ एवं दलित नेता सूरज भान का जन्म हुआ।
  • 1938 – भारत के महान् बिलियर्ड्स खिलाड़ी माइकल फ़रेरा का जन्म हुआ।
  • 1945 – भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का जन्म हुआl
  • 1949 – चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के शासन की शुरुआत हुई।
  • 1953 – आंध्र प्रदेश अलग राज्य बना।
  • 1966 – राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत त्रिलोक सिंह ठकुरेला का जन्म हुआ।
  • 1967 – भारतीय पर्यटन विकास निगम की स्थापना हुई।
  • 1978 – लड़कियों की शादी की उम्र को 14 से बढा कर 18 और लड़कों का 18 से बढा कर 21 वर्ष किया गया।
  • 1979 – भारत के क्रांतिकारी चन्दन सिंह गढ़वाली का निधान हुआ।
  • 1996 – अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा पश्चिम एशिया शिखर सम्मेलन का उद्घाटन हुआ ।
  • 2000 – सिडनी में 27वें ओलम्पिक खेल सम्पन्न  हुआ।
  • 2002 – एशियाड खेलों में स्नूकर प्रतिस्पर्द्धा में भारत को पहला स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ।
  • 2003 – नदियों को जोड़ने के सम्बन्ध में बांग्लादेश की आशंकाओं को भारत ने दूर किया।
  • 2004 – इज़रायली प्रधानमंत्री एरियल शैरोन के मंत्रिमंडल ने गाजा पट्टी में बड़े पैमाने पर सैनिक कार्रवाई की योजना को मंजूरी दी।
  • 2007 – जापान ने उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबन्धों को अगले छ: महीनों तक बढ़ाने की घोषणा की।
  • 2008 – आतंकवादियों ने त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बम ब्लास्ट किया।
  • 2015 – ग्वाटेमाला के संता काटरीना पिनुला में भारी बारिश और भूस्खलन से 280 लोगों की मौत।