नवरात्र का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित है। वे मां दुर्गा की छठी शक्ति हैं। मां को योद्धा देवी कहा जाता है। उन्होंने महिषासुर जैसे घमंडी राक्षस का अंत किया था, इसलिए उन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहते हैं। इनकी कथा में तपस्या है, एकता है और नारी शक्ति की जीत है। आइए, इसे आसान भाषा में सुनते हैं।

छठा नवरात्र कब है
इस साल छठा नवरात्र 16 अक्टूबर, शुक्रवार को है। यह षष्ठी तिथि है।
ध्यान दें: तिथि का सही समय हर शहर और पंचांग में थोड़ा अलग हो सकता है। अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से एक बार मिला लें।
नाम का मतलब क्या है
| शब्द | मतलब |
|---|---|
| कात्यायन | एक महान ऋषि |
| कात्यायनी | कात्यायन ऋषि की पुत्री |
यानी ऋषि कात्यायन के नाम पर मां का यह नाम पड़ा। मां के और भी नाम हैं।
| नाम | मतलब |
|---|---|
| महिषासुरमर्दिनी | महिषासुर का अंत करने वाली |
| योद्धा देवी | युद्ध में निपुण देवी |
| ब्रज की अधिष्ठात्री | ब्रज की मुख्य देवी |
कथा की शुरुआत: ऋषि कात्यायन की तपस्या
बहुत पुरानी बात है। एक महान ऋषि थे, कात्यायन। उनके पिता भी बड़े ऋषि थे। ऋषि कात्यायन के मन में एक इच्छा थी। वे चाहते थे कि मां दुर्गा उनके घर बेटी बनकर जन्म लें। इस इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या की। सालों तक साधना की। मां उनकी भक्ति से प्रसन्न हुईं। उन्होंने कहा, “ठीक है। मैं तुम्हारे घर बेटी बनकर आऊंगी।” ऋषि की इच्छा पूरी होने का समय जल्द आने वाला था। उसी समय धरती पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया।
महिषासुर का आतंक
उस समय एक राक्षस था महिषासुर। वह आधा भैंसा और आधा इंसान जैसा रूप ले सकता था। उसने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की। ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए। महिषासुर ने अमर होने का वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ने कहा, “यह संभव नहीं। कोई और वरदान मांगो।” तब महिषासुर ने चालाकी से कहा, “मेरी मृत्यु किसी पुरुष या देवता के हाथों न हो।” उसे लगता था कि कोई स्त्री उसे क्या हराएगी। ब्रह्मा जी ने उसे यह वरदान दे दिया। वरदान मिलते ही महिषासुर का घमंड बढ़ गया।
| उसने क्या किया | नतीजा |
|---|---|
| देवताओं पर हमला किया | देवता हार गए |
| स्वर्ग पर कब्जा किया | इंद्र का सिंहासन छिन गया |
| ऋषि-मुनियों को सताया | यज्ञ और पूजा रुक गई |
| प्रजा पर अत्याचार किए | तीनों लोकों में डर फैल गया |
देवताओं की पुकार
परेशान देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास पहुंचे। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, “प्रभु, हमें महिषासुर से बचाइए। हम बेघर हो गए हैं।” पूरी बात सुनकर तीनों देवताओं को बहुत क्रोध आया। उनके चेहरों से एक तेज निकला। यह तेज इतना प्रचंड था कि आकाश में फैल गया। फिर दूसरे देवताओं के शरीर से भी तेज निकला। वह भी उसी तेज में मिल गया। सब मिलकर एक विशाल तेज-पुंज बन गया।
देवी का प्रकट होना
यह तेज-पुंज कात्यायन ऋषि के आश्रम में पहुंचा। ऋषि ने उसे प्रणाम किया और उसकी पूजा की। उसी तेज से एक सुंदर और शक्तिशाली देवी प्रकट हुईं। ऋषि कात्यायन ने सबसे पहले उनकी पूजा की थी। इसलिए वे कात्यायनी कहलाईं। इस तरह ऋषि की बेटी पाने की इच्छा भी पूरी हो गई।
देवताओं के उपहार
सभी देवताओं ने देवी को कुछ न कुछ भेंट किया।
| किसने दिया | क्या दिया |
|---|---|
| भगवान शिव | त्रिशूल |
| भगवान विष्णु | चक्र |
| इंद्र | वज्र और घंटा |
| वरुण | शंख |
| अग्नि | शक्ति (अस्त्र) |
| हिमालय | सिंह की सवारी |
| विश्वकर्मा | कवच और कुल्हाड़ी |
| अन्य देवता | आभूषण, माला और दूसरे अस्त्र |
अब देवी हर तरह से तैयार थीं।
महिषासुर से युद्ध
देवी ने तेज आवाज में गर्जना की। उसकी गूंज से तीनों लोक कांप उठे। यह आवाज महिषासुर तक भी पहुंची। वह अपनी विशाल सेना लेकर आया। जैसे ही उसने देवी को देखा, वह चकित रह गया। पर उसका घमंड कम नहीं हुआ। युद्ध शुरू हुआ। महिषासुर बहुत चालाक था। वह बार-बार रूप बदलता रहा।
| रूप | क्या हुआ |
|---|---|
| भैंसा | देवी ने उसे रोक दिया |
| सिंह | देवी का सिंह उससे भिड़ गया |
| मनुष्य | देवी ने उस पर वार किया |
| हाथी | देवी ने उसकी सूंड काट दी |
| फिर भैंसा | इस बार देवी ने उसे नहीं छोड़ा |
कथा के अनुसार यह युद्ध कई दिन चला। आखिर में देवी ने महिषासुर का अंत कर दिया। तीनों लोकों में जयकार गूंज उठी। देवताओं को उनका स्वर्ग वापस मिल गया।
कथा एक नजर में
| क्रम | घटना |
|---|---|
| 1 | ऋषि कात्यायन ने तपस्या की, मां को बेटी रूप में पाने के लिए |
| 2 | महिषासुर को वरदान मिला कि कोई पुरुष या देवता उसे नहीं मार सकेगा |
| 3 | उसने स्वर्ग पर कब्जा कर लिया |
| 4 | देवता त्रिदेव के पास पहुंचे |
| 5 | देवताओं के तेज से देवी प्रकट हुईं |
| 6 | ऋषि कात्यायन ने सबसे पहले पूजा की, इसलिए नाम कात्यायनी |
| 7 | सभी देवताओं ने अस्त्र-शस्त्र दिए |
| 8 | देवी ने महिषासुर का अंत किया |
गोपियों और मां कात्यायनी की कथा
मां कात्यायनी की एक और सुंदर कथा श्रीमद्भागवत में मिलती है। ब्रज की गोपियां भगवान कृष्ण को बहुत चाहती थीं। वे चाहती थीं कि कृष्ण उनके जीवनसाथी बनें। इसके लिए उन्होंने कात्यायनी व्रत रखा।
| गोपियों ने क्या किया | कैसे |
|---|---|
| सुबह जल्दी उठीं | यमुना जी में स्नान किया |
| मिट्टी की मूर्ति बनाई | यमुना के किनारे |
| रोज पूजा की | फूल, धूप और दीप से |
| प्रार्थना की | “हे मां कात्यायनी, कृष्ण हमारे पति बनें” |
इसीलिए मां कात्यायनी को ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है। इसी कथा से यह मान्यता चली कि मां की पूजा से विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। यह श्रद्धा और परंपरा की बात है। लोग इसे अपनी आस्था के अनुसार मानते हैं।
मां का स्वरूप
| स्वरूप | क्या सिखाता है |
|---|---|
| सुनहरा रंग | तेज और पवित्रता |
| सिंह की सवारी | निडरता |
| चार भुजाएं | हर दिशा में रक्षा |
| एक हाथ अभय मुद्रा में | “डरो मत, मैं हूं” |
| एक हाथ वर मुद्रा में | भक्तों को आशीर्वाद |
| एक हाथ में तलवार | बुराई के नाश का प्रतीक |
| एक हाथ में कमल | पवित्रता और कोमलता |
मां के एक हाथ में तलवार है और दूसरे में कमल। यानी जरूरत पड़े तो सख्ती और बाकी समय कोमलता।
इस कथा से हम क्या सीखें
1. अन्याय के आगे मत झुको
मां ने बुराई को खत्म करने के लिए डटकर लड़ाई लड़ी। सही के लिए खड़े होना जरूरी है।
2. एकता में ताकत है
देवी का जन्म सभी देवताओं के तेज से हुआ। जब सब मिलते हैं, तो बड़ी से बड़ी समस्या हल होती है।
3. घमंड का अंत होता है
महिषासुर बहुत ताकतवर था। पर घमंड में उसने स्त्री की शक्ति को कम आंका। आखिर में एक स्त्री के हाथों ही उसका अंत हुआ।
4. नारी शक्ति को कम मत समझो
यह कथा बताती है कि औरतें सिर्फ कोमल नहीं, बेहद मजबूत भी हैं।
5. सच्ची तपस्या का फल मिलता है
ऋषि कात्यायन की साधना से मां उनकी पुत्री बनीं। सच्ची भक्ति कभी बेकार नहीं जाती।
6. मुश्किल में समझदारी से लड़ें
महिषासुर बार-बार रूप बदलता रहा। पर देवी ने हर बार शांत रहकर उसका सामना किया।
आज की जिंदगी में यह कथा क्यों जरूरी है
आज भी हमारे आसपास कई “महिषासुर” हैं। यानी ऐसी बुराइयां जो घमंड और ताकत के सहारे खड़ी हैं।
- ऑफिस में कोई गलत व्यवहार करे, तो आवाज उठाइए।
- घर में किसी के साथ अन्याय हो, तो साथ खड़े होइए।
- खुद पर भरोसा रखिए। अपनी क्षमता को कम मत आंकिए।
- मिलकर काम कीजिए। अकेले से ज्यादा ताकत टीम में होती है।
अगर कोई महिला या कोई भी इंसान मुश्किल या डर में है, तो मदद मांगना कमजोरी नहीं है। परिवार, दोस्तों या जरूरत पड़ने पर प्रशासन की मदद जरूर लीजिए।
कथा सुनने के बाद पूजा कैसे करें
- सुबह नहाकर साफ कपड़े पहनें।
- कलश के पास मां की तस्वीर रखें।
- रोली, चंदन और चावल चढ़ाएं।
- लाल गुलाब, गेंदा या कमल का फूल अर्पित करें।
- घी का दीया जलाएं।
- शहद का भोग लगाएं।
- मंत्र का जाप करें।
- आरती करके प्रसाद बांटें।
बीज मंत्र
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
ध्यान मंत्र
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
प्रार्थना मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां को प्रिय भोग
| भोग | मान्यता |
|---|---|
| शहद | सबसे प्रिय माना जाता है |
| शहद वाला हलवा | सात्विक और स्वादिष्ट |
| मीठा पान | कई जगह चढ़ाया जाता है |
| दूध की मिठाई | शुभ मानी जाती है |
| फल और मेवे | प्रसाद के लिए |
डायबिटीज के मरीज शहद का सेवन डॉक्टर से पूछकर ही करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. कात्यायनी कौन हैं?
वे मां दुर्गा का छठा रूप हैं। उन्होंने महिषासुर का अंत किया था।
2. कात्यायनी नाम क्यों पड़ा?
ऋषि कात्यायन ने उनकी सबसे पहले पूजा की और उन्हें अपनी पुत्री माना। इसलिए यह नाम पड़ा।
3. महिषासुर को क्या वरदान मिला था?
कि कोई पुरुष या देवता उसे नहीं मार सकेगा।
4. मां ने महिषासुर को कैसे हराया?
देवताओं के तेज और अस्त्र-शस्त्रों के साथ युद्ध करके। उसके बार-बार रूप बदलने पर भी देवी डटी रहीं।
5. गोपियों ने मां की पूजा क्यों की?
भागवत कथा के अनुसार, उन्होंने कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कात्यायनी व्रत रखा था।
6. मां का वाहन क्या है?
सिंह, यानी शेर।
7. मां को कौन सा भोग पसंद है?
शहद।
8. क्या घर में अकेले पूजा की जा सकती है?
बिल्कुल। मां श्रद्धा देखती हैं, भीड़ नहीं।
मां कात्यायनी की कथा हमें एक सीधी बात सिखाती है। सच के लिए डटे रहो और अन्याय के आगे कभी मत झुको। आज मां के आगे दीया जलाइए। शहद का भोग लगाइए। अपने मन की बात मां से कह दीजिए। मां कात्यायनी आपको हिम्मत, खुशी और रिश्तों में मिठास दें।
जय माता दी!

