आज शारदीय नवरात्र का पहला दिन है। घर-घर में माता के स्वागत की तैयारी है। आज मां दुर्गा के पहले रूप, मां शैलपुत्री, की पूजा होती है। आज ही घटस्थापना भी होती है।अगर आप पहली बार पूजा कर रहे हैं, तो घबराइए मत। इस ब्लॉग में सब कुछ आसान भाषा में है।
नवरात्र 2026 की तारीखें
इस साल शारदीय नवरात्र रविवार 11 अक्टूबर से शुरू होकर मंगलवार 20 अक्टूबर तक चलेंगे। घटस्थापना भी 11 अक्टूबर को ही है। 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
मुहूर्त समय
प्रातःकाल घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:11 बजे तक
अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक
ध्यान रखें: अलग-अलग शहरों में समय थोड़ा बदल जाता है। इसलिए अपने शहर का सही समय स्थानीय पंचांग या पंडित जी से जरूर मिला लें। साथ ही, कुछ पंचांगों के अनुसार इस दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग भी पड़ रहे हैं, जिन्हें कलश स्थापना के लिए ठीक नहीं माना जाता। इसी वजह से कई लोग अभिजित मुहूर्त में कलश बैठाना पसंद करते हैं। आप अपने पंडित जी की सलाह के अनुसार चलें।
कौन हैं मां शैलपुत्री?
“शैल” का मतलब है पहाड़। “पुत्री” का मतलब है बेटी। यानी पर्वत की बेटी। मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। पिछले जन्म में वे राजा दक्ष की बेटी सती थीं। एक बार दक्ष ने बड़ा यज्ञ किया। उसमें उन्होंने भगवान शिव का अपमान किया। यह सती से सहन नहीं हुआ। उन्होंने यज्ञ की अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। अगले जन्म में वे हिमालय के घर जन्मीं। तब उनका नाम पड़ा शैलपुत्री। इन्हें पार्वती और हेमवती भी कहते हैं। बाद में उनका विवाह फिर से भगवान शिव से हुआ।
मां का स्वरूप
- मां बैल (नंदी) पर सवार होती हैं। इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहते हैं।
- उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल है।
- बाएं हाथ में कमल का फूल है।
- माथे पर आधा चंद्रमा सजा है।
पहले दिन इनकी पूजा क्यों?
मां शैलपुत्री स्थिरता और मजबूती का प्रतीक हैं। जैसे पहाड़ अडिग रहता है, वैसे ही मां भक्तों को हिम्मत देती हैं। मान्यता है कि इनकी पूजा से मन शांत होता है। घर में सुख-शांति आती है। साथ ही जीवन में आगे बढ़ने की ताकत मिलती है। नवरात्र की शुरुआत इन्हीं से होती है। जैसे किसी भी काम की नींव मजबूत होनी चाहिए, वैसे ही साधना की नींव भी मजबूत होनी चाहिए।
पूजा की सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले सब चीजें पास रख लें। बीच में उठना नहीं पड़ेगा।
| सामग्री | किसलिए |
| मिट्टी का चौड़ा बर्तन | जौ बोने के लिए |
| साफ मिट्टी और जौ | हरियाली (जवारे) के लिए |
| तांबे या मिट्टी का कलश | घटस्थापना के लिए |
| गंगाजल और साफ जल | कलश में भरने के लिए |
| आम या अशोक के पत्ते (5 या 7) | कलश के मुंह पर सजाने के लिए |
| जटा वाला नारियल | कलश के ऊपर रखने के लिए |
| लाल चुनरी और मौली (कलावा) | कलश और नारियल लपेटने के लिए |
| रोली, चावल (अक्षत), हल्दी | तिलक और पूजा के लिए |
| सुपारी, सिक्का, लौंग-इलायची | कलश में डालने के लिए |
| फूल और माला | मां को चढ़ाने के लिए |
| घी, दीपक, धूप, अगरबत्ती | ज्योति और आरती के लिए |
| मां की तस्वीर या मूर्ति | पूजा के लिए |
| भोग का प्रसाद | मां को अर्पित करने के लिए
|
घटस्थापना की आसान विधि
पहला कदम: घटस्थापना का मतलब है मां दुर्गा का आह्वान करना। यानी उन्हें अपने घर बुलाना। इसे कलश स्थापना भी कहते हैं। पहला कदम: स्नान और संकल्प सुबह जल्दी उठें। नहा-धोकर साफ कपड़े पहनें। फिर पूजा की जगह पर बैठकर मन में संकल्प लें कि आप पूरे नौ दिन श्रद्धा से पूजा करेंगे।
दूसरा कदम: जगह की सफाई
पूजा की जगह को अच्छे से साफ करें। गंगाजल छिड़कें। यह जगह घर के उत्तर-पूर्व कोने में हो तो अच्छा माना जाता है।
तीसरा कदम: जौ बोना
मिट्टी के बर्तन में थोड़ी साफ मिट्टी बिछाएं। उसमें जौ डालें। ऊपर से फिर थोड़ी मिट्टी डाल दें। हल्का पानी छिड़कें।
चौथा कदम: कलश तैयार करें
कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। गले में मौली बांधें। अब उसमें साफ जल भरें। चाहें तो थोड़ा गंगाजल मिला लें। उसमें सुपारी, सिक्का, अक्षत और लौंग डालें।
पांचवां कदम: कलश की स्थापना
कलश के मुंह पर आम के पत्ते लगाएं। उसके ऊपर नारियल रखें। नारियल पर लाल चुनरी लपेटें। अब इस कलश को जौ वाले बर्तन के बीच में रखें।
छठा कदम: दीपक जलाएं
घी का दीपक जलाएं। कई लोग नौ दिन तक अखंड ज्योति जलाते हैं। अगर आप ऐसा कर सकें तो करें। न कर पाएं, तो रोज सुबह-शाम दीया जलाएं।
सातवां कदम: मां शैलपुत्री की पूजा
मां की तस्वीर के आगे रोली, चावल और फूल चढ़ाएं। धूप-दीप दिखाएं। फिर भोग लगाएं और मंत्र पढ़ें।
आठवां कदम: आरती अंत में आरती करें। सबको प्रसाद बांटें।
मां शैलपुत्री को क्या भोग लगाएं
मां को शुद्ध देसी घी बहुत प्रिय है। पहले दिन सफेद चीजों का भोग शुभ माना जाता है।
| भोग | कैसे चढ़ाएं |
|---|---|
| शुद्ध देसी घी | सीधे मां के चरणों में या दीपक में |
| दूध की खीर | साफ कटोरी में रखकर |
| सफेद बर्फी या मिठाई | थाली में सजाकर |
| मिश्री | छोटी कटोरी में |
| दूध से बनी कोई भी मिठाई | श्रद्धा से |
ध्यान रहे: भोग साफ-सफाई से बनाएं। उसमें लहसुन-प्याज बिल्कुल न डालें।
मां शैलपुत्री के मंत्र
पूजा के समय इन मंत्रों का जाप करें। जितना समझ आए, उतना ही पढ़ें। भाव सबसे जरूरी है।
बीज मंत्र
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
ध्यान मंत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
प्रार्थना मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आप चाहें तो 108 बार बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं। माला के साथ करेंगे तो गिनती आसान रहेगी।
मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार।
करें देवता जय जयकार॥
शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने न जानी॥
पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे॥
रिद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू॥
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी॥
उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिटा दो॥
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के॥
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं॥
जय गिरराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे॥
मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो॥
क्या करें और क्या न करें
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| सुबह जल्दी उठकर नहाएं | देर तक सोते न रहें |
| साफ और हल्के रंग के कपड़े पहनें | काले कपड़े पहनने से बचें |
| घर और पूजा की जगह साफ रखें | पूजा स्थल पर गंदगी न रखें |
| सात्विक भोजन करें | लहसुन-प्याज और मांसाहार से दूर रहें |
| मन शांत और विचार अच्छे रखें | गुस्से और झगड़े से बचें |
| रोज दीया जलाएं | कलश को बार-बार न हिलाएं |
| कन्याओं का सम्मान करें | किसी का अपमान न करें |
व्रत रखने वालों के लिए कुछ आसान सुझाव
- दिन में फल, दूध और मेवे लेते रहें।
- खूब पानी पिएं।
- सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करें।
- साबूदाना, कुट्टू का आटा और सिंघाड़े का आटा व्रत में चलता है।
- तबीयत खराब हो, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें। श्रद्धा के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है।
पूजा का असली मतलब
पूजा सिर्फ विधि का नाम नहीं है। असली पूजा मन की सच्चाई में है। अगर किसी वजह से सारी सामग्री न जुटा पाएं, तो परेशान न हों। एक दीया, थोड़े फूल और सच्चे मन की प्रार्थना भी मां स्वीकार कर लेती हैं। मां शैलपुत्री हमें सिखाती हैं कि हालात कैसे भी हों, पहाड़ की तरह डटे रहो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. नवरात्र के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है?
मां शैलपुत्री की।
2. घटस्थापना कब करनी चाहिए?
प्रतिपदा तिथि में, मुहूर्त के समय। ऊपर दिए गए समय देखें और अपने शहर का समय मिला लें।
3. क्या घटस्थापना खुद की जा सकती है?
हां। आप श्रद्धा और सही विधि से खुद कर सकते हैं। चाहें तो पंडित जी से भी करवा सकते हैं।
4. जौ क्यों बोते हैं?
जौ को समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। नौ दिन में हरे-हरे जवारे उगना शुभ संकेत समझा जाता है।
5. अगर कलश मुहूर्त में न रख पाएं तो?
उसी दिन प्रतिपदा रहते हुए जितनी जल्दी हो सके, स्थापना कर लें। मन में ग्लानि न रखें।
आखिर में
नवरात्र नौ दिन का त्योहार है। यह अपने भीतर की शक्ति को जगाने का मौका है। आज पहला दिन है। साफ मन से शुरुआत करें।
मां शैलपुत्री आप सब पर कृपा करें। आपके घर में सुख, शांति और खुशहाली बनी रहे।
जय माता दी! 🙏

