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	<title>jyotish Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>जानिए होली के अजब-गजब टोटके, जो कि जीवन के हर संकट को रोके</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Mar 2024 10:46:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>होली के अजब-गजब टोटके &#8211; हिन्दू पंचांग के अनुसार होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में यह त्यौहार दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन होलिकादहन किया जाता है, होलिकादहन के दिन लकड़ी के ढेर की पूजा की जाती है और उसकी परिक्रमा की जाती है। दूसरे दिन होली वाले [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>होली के अजब-गजब टोटके &#8211;</strong> हिन्दू पंचांग के अनुसार होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में यह त्यौहार दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन होलिकादहन किया जाता है, होलिकादहन के दिन लकड़ी के ढेर की पूजा की जाती है और उसकी परिक्रमा की जाती है। दूसरे दिन होली वाले दिन रंगों, अबीर और गुलाल से होली खेली जाती है, होली को धुलेंडी भी कहा जाता है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class=" wp-image-17526 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?resize=614%2C352&#038;ssl=1" alt="" width="614" height="352" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?w=400&amp;ssl=1 400w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?resize=300%2C172&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 614px) 100vw, 614px" /></p>
<p><strong>[readalso label=&#8221;संबंधित&#8221;] <a href="https://fundabook.com/astrology-holi-special-miraculous-tricks-2/">जानिए होली के अजब-गजब टोटके, जो कि जीवन के हर संकट को रोके</a> [/readalso]</strong></p>
<h2>होली 2024 तिथि</h2>
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा 24 मार्च को सुबह 9 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ हो रही है, जो 25 मार्च को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में होलिका दहन 24 मार्च और रंगों वाली होली 25 मार्च को खेली जाएगी।</p>
<h2>होली के अजब-गजब टोटके</h2>
<p>आज हम आपको होली पर किए जाने वाले कुछ साधारण उपाय बता रहे हैं, ये उपाय बहुत ही जल्दी शुभ फल प्रदान करते हैं। आइए जानते हैं ये खास उपाय :</p>
<h2>रोग नाश के लिए उपाय</h2>
<p><em><strong>मंत्र- ॐ नमो भगवते रुद्राय मृतार्क मध्ये संस्थिताय मम शरीरं अमृतं कुरु कुरु स्वाहा।</strong></em></p>
<p>होली वाले दिन ऊपर दिए गए मंत्र का जाप तुलसी की माला से करें। अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं, तो इस मंत्र का जाप करने से आपकी बीमारी दूर हो जाएगी।</p>
<h2>धन की कमी को दूर करने के उपाय</h2>
<p>होली की रात चंद्रमा के उदय होने के बाद अपने घर की छत पर या खुली जगह, जहां से चांद नज़र आए, वहां खड़े हो जाएं। फिर चंद्रमा का स्मरण करते हुए चांदी की प्लेट में सूखे छुहारे तथा कुछ मखाने रखकर शुद्ध घी के दीपक के साथ धूप एवं अगरबत्ती अर्पित करें।</p>
<p>अब दूध से चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य के बाद सफेद मिठाई तथा केसर मिश्रित साबूदाने की खीर अर्पित करें। चंद्रमा से समृद्धि प्रदान करने का निवेदन करें। बाद में प्रसाद और मखानों को बच्चों में बांट दें। फिर लगातार आने वाली प्रत्येक पूर्णिमा की रात चंद्रमा को दूध का अर्घ्य दें।</p>
<h2>शीघ्र विवाह के लिए उपाय</h2>
<p>होली के दिन सुबह एक साबुत पान पर साबुत सुपारी एवं हल्दी की गांठ शिवलिंग पर चढ़ाएं और पीछे पलटे बगैर अपने घर आ जाएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। जल्दी ही आपके विवाह के योग बन सकते हैं।</p>
<h2>ग्रहों की शांति के लिए उपाय</h2>
<p><em><strong>मंत्र- ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानु शशि भूमि-सुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव: सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु।।</strong></em></p>
<p>होली की रात उत्तर दिशा में बाजोट (पटिया) पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर मूंग, चने की दाल, चावल, गेहूं, मसूर, काले उड़द एवं तिल की ढेरी बनाएं। अब उस पर नवग्रह यंत्र स्थापित करें। उस पर केसर का तिलक करें, घी का दीपक लगाएं और ऊपर दिए गए मंत्र मंत्र का जाप करें। जाप स्फटिक की माला से करें। जाप पूरा होने पर यंत्र को पूजा स्थान पर स्थापित करें, ग्रह अनुकूल होने लगेंगे।</p>
<h2>व्यापार में सफलता पाने का उपाय</h2>
<p><em><strong>मंत्र- ॐ श्रीं श्रीं श्रीं परम सिद्धि व्यापार वृद्धि नम:।</strong></em></p>
<p>एकाक्षी नारियल को लाल कपड़े में गेहूं के आसन पर स्थापित करें और सिन्दूर का तिलक करें। अब मूंगे की माला से ऊपर दिए गए मंत्र का जाप करें। 21 माला जाप होने पर इस पोटली को दुकान में ऐसे स्थान पर टांग दें, जहां ग्राहकों की नज़र इस पर पड़ती रहे। इससे व्यापार में सफलता मिलने के योग बन सकते हैं।</p>
<h2>होली की पूजा कैसे करें</h2>
<p>लकड़ी और कंडों की होली के साथ घास लगाकर होलिका खड़ी करके उसका पूजन करने से पहले हाथ में <strong>असद, फूल, सुपारी, पैसा</strong> लेकर पूजन कर जल के साथ होलिका के पास छोड़ दें और <strong>अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल</strong> तथा <strong>गूलरी</strong> की माला पहनाएं।</p>
<p>इसके बाद होलिका की तीन परिक्रमा करते हुए नारियल का गोला, गेहूं की बाली तथा चना को भूंज कर इसका प्रसाद सभी को वितरित करें। होली की पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong>[readalso label=&#8221;संबंधित&#8221;] <a href="https://fundabook.com/astrology-holi-special/">आपको हर संकट से बचाएंगें, होली पर किए गए यह 7 अनोखे काम</a> [/readalso]</strong></p>
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		<title>होली पर इस चमत्कारी टोटके से घर में हमेशा के लिए ठहर जाएगी समृद्धि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Mar 2024 10:30:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण है। होली के आते ही वातावरण में एक मस्ती का आलम छा जाता है। होली के दिन रंगों के माध्यम से सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन<strong> हरे, पीले, लाल, गुलाबी</strong> आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण है। होली के आते ही वातावरण में एक मस्ती का आलम छा जाता है।</p>
<p>होली के दिन रंगों के माध्यम से सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस एक रंग के हो जाते हैं। हर किसी का तन-मन, प्रेम-उल्लास और उमंग के रंगों की फुहार से भर जाता है। आज हम आपको इस पोस्ट में एक टोटका बताने जा रहे हैं, जिससे घर में हमेशा के लिए समृद्धि ठहर जाती है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class=" wp-image-17526 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?resize=673%2C385&#038;ssl=1" alt="" width="673" height="385" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?w=400&amp;ssl=1 400w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?resize=300%2C172&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 673px) 100vw, 673px" /></p>
<p><strong>[readalso label=&#8221;संबंधित&#8221;] <a href="https://fundabook.com/astrology-holi-special-miraculous-tricks-2/">जानिए होली के अजब-गजब टोटके, जो कि जीवन के हर संकट को रोके</a> [/readalso]</strong></p>
<h2>कब है होली</h2>
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा 24 मार्च को सुबह 9 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ हो रही है, जो 25 मार्च को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में होलिका दहन 24 मार्च और रंगों वाली होली 25 मार्च को खेली जाएगी।</p>
<h2>क्यों मनाई जाती है होली</h2>
<p>हिन्दू मान्यताओं के अनुसार हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे। उनकी इस भक्ति से उनके पिता हिरण्यकश्यप नाखुश थे, इसीलिए उनके पिता ने अपने पुत्र को भगवान की भक्ति से हटाने के लिए कई प्रयास किए।</p>
<p>हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जल सकेगी। एक बार हिरण्यकश्यप ने अपनी ही बहन होलिका के जरिए प्रह्लाद को जिंदा जला देने का आदेश दिया, लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।</p>
<p>जब होलिका प्रह्लाद को जलाने के लिए आग में बैठी, तो वह खुद जल कर मर गई। तभी से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में जाना जाता है और हिन्दू धर्म में होलिका दहन की परंपरा प्रचलित है। होलिका दहन से अगले दिन दुलहंडी (होली) खेला जाता है।</p>
<h2>होली का मटकी टोटा</h2>
<p>जिस स्थान पर होली जलाई जाती रही हो, वहां पर होली जलने से एक दिन पहले की रात में एक मटकी में गाय का घी, तिल का तेल, गेहूं और ज्वार तथा एक तांबे का पैसा रखकर मटकी का मुंह बंद करके गाड़ आएं।</p>
<p>रात्रि में जब होली जल जाए, तब दूसरे दिन सुबह उसे उखाड़ लाएं। फिर यह सारी वस्तुएं पोटली में बांधकर जिस जगह रख दी जाएगी, वहां समृद्धि रूक जाएगी। घर में फिर किसी चीज की कभी कमी नहीं होगी।</p>
<h2>होली पूजन विधि</h2>
<p>लकड़ी और कंडों की होली के साथ घास लगाकर होलिका खड़ी करके उसका पूजन करने से पहले हाथ में असद, फूल, सुपारी, पैसा लेकर पूजन कर जल के साथ होलिका के पास छोड़ दें और अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल तथा गूलरी की माला पहनाएं।</p>
<p>इसके बाद होलिका की तीन परिक्रमा करते हुए नारियल का गोला, गेहूं की बाली तथा चना को भूंज कर इसका प्रसाद सभी को वितरित करें। होली की पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong>[readalso label=&#8221;संबंधित&#8221;] <a href="https://fundabook.com/easy-and-accurate-tricks-of-attaining-lakshmi/">लक्ष्मी व धन लाभ प्राप्ति के आसान व अचूक टोटके</a> [/readalso]</strong></p>
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		<title>महाशिवरात्रि पर इन 14 फूलों से करें महादेव को प्रसन्न</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Mar 2024 06:00:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महाशिवरात्रि हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण और शुभ त्योहारों में से एक है जो हर साल फरवरी और मार्च के महीने में आता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह त्यौहार फाल्गुन या माघ महीने के कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महाशिवरात्रि हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण और शुभ त्योहारों में से एक है जो हर साल फरवरी और मार्च के महीने में आता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह त्यौहार फाल्गुन या माघ महीने के कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन मनाया जाता है।</p>
<p><strong>पौराणिक कथाओं</strong> के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ <strong>अग्निलिंग</strong> (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ था। इसी दिन भगवान शिव का विवाह <strong>देवी पार्वती</strong> के साथ हुआ था।</p>
<p>साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से इस महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत सहित पूरी दुनिया में शिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।</p>
<p>इस साल 2024 में महाशिवरात्रि 8 मार्च को है। महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त का समय शाम 06 बजकर 25 मिनट से 09 बजकर 28 मिनट तक है।</p>
<h2>भगवान भोले नाथ कैसे हों प्रसन्न</h2>
<p><strong>महादेव</strong> को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग को जल और दूध से नहलाया जाता है। यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से उन्हें सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित करें, तो भी महादेव प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करना बड़ा सरल है।</p>
<p>यदि भक्त उन्हें विभिन्न तरीकों के फूल और पत्तियां अर्पित करते हैं, तब भी महादेव मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। भगवान शिव को फूल बहुत पसंद हैं, इसी तरह भगवान शिव को अलग- अलग फूल चढ़ाने के भी अलग- अलग फायदे है। आइए जानते वो 14 शुभ फूल, जिनसे महादेव होते हैं प्रसन्न।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="wp-image-17257 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/02/jasmine-flower.jpg?resize=585%2C391&#038;ssl=1" alt="" width="585" height="391" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/02/jasmine-flower.jpg?w=500&amp;ssl=1 500w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/02/jasmine-flower.jpg?resize=300%2C200&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 585px) 100vw, 585px" /></p>
<p><strong>[readalso label=&#8221;संबंधित&#8221;]<a href="https://fundabook.com/a-mysterious-temple-whose-door-opens-only-on-mahashivaratri/">एक रहस्यमयी मंदिर जिसका दरवाज़ा खुलता है सिर्फ महाशिवरात्रि पर </a>[/readalso]</strong></p>
<h2>आंकड़े के फूल</h2>
<p>लाल और सफेद आंकड़े के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<h2>धतूरे के फूल</h2>
<p>धतूरा महादेव को चढ़ाए जाने वाले फूलों में से एक है। धतूरे के फूल से पूजन करने पर संतान प्राप्ति का सुख मिलेगा।</p>
<h2>चमेली के फूल</h2>
<p>अगर आप गाड़ी खरीदना चाहते है, तो चमेली के फूलों से भोलेनाथ का पूजन करने पर गाड़ी का सुख मिलता है।</p>
<h2>बिल्व पत्र</h2>
<p>बिल्व पत्र के पेड़ को शिवद्रुम के नाम से भी जाना जाता है। भोलेनाथ को बेलपत्र अर्पित करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।</p>
<h2>अलसी के फूल</h2>
<p>अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है, कई पाप क्षमा होते हैं।</p>
<h2>गुड़हल के फूल</h2>
<p>गुड़हल फूल भगवान गणेश के साथ ही भगवान शिव के भी प्रिय फूल हैं। गुड़हल के फूल महादेव को अर्पित करने से दुश्मनों का विनाश होता है।</p>
<h2>बेला के फूल</h2>
<p>बेला के फूलों से भोलेनाथ का पूजन करने पर सुंदर और अच्छा लाइफ पार्टनर मिलेगा।</p>
<h2>हरसिंगार के फूल</h2>
<p>हरसिंगार के फूलों से महादेव का पूजन करने पर सुख-संपत्ति में वृद्धि होती है।</p>
<h2>जूही के फूल</h2>
<p>जूही के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती और दरिद्रता भी नहीं रहती।</p>
<h2>गुलाब के फूल</h2>
<p>आमतौर पर देवी- देवताओं को लाल गुलाब की पंखुड़ियां चढ़ाई जाती है। अगर आप शिव शंकर को लाल गुलाब अर्पित करते हैं, तो धन व समृद्धि बढ़ने लगते हैं।</p>
<h2>कनेर के फूल</h2>
<p>कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से मनचाहा धन लाभ होगा।</p>
<h2>लाल डंठलवाला धतूरा</h2>
<p>लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है। यह फूल भोलेनाथ को अर्पित करने से धन की मनोकामना पूरी होती है।</p>
<h2>शमी वृक्ष के पत्ते</h2>
<p>शमी वृक्ष के पत्तों से महादेव का पूजन करने पर अपार धन-संपदा का आशीष मिलता है।</p>
<h2>दूब या दूर्वा</h2>
<p>दूब या दूर्वा, यूं तो एक तरह की घास है, पर दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।</p>
<p><strong>[readalso label=&#8221;संबंधित&#8221;]</strong><strong><a href="https://fundabook.com/which-all-rashi-will-get-money-on-this-mahashivratri/">जानिये आप में से किस पर होगी धन की बारिश महाशिवरात्रि पर</a><a href="https://fundabook.com/a-mysterious-temple-whose-door-opens-only-on-mahashivaratri/"> </a>[/readalso]</strong></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/mahadev-is-pleased-with-these-14-auspicious-flowers-hindi/">महाशिवरात्रि पर इन 14 फूलों से करें महादेव को प्रसन्न</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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		<title>महाशिवरात्रि पर महादेव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Mar 2024 05:00:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>महाशिवरात्रि हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण और शुभ त्योहारों में से एक है जो हर साल फरवरी और मार्च के महीने में आता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह त्यौहार फाल्गुन या माघ महीने के कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन मनाया जाता है। इस साल 2024 में महाशिवरात्रि 8 मार्च को है। महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>महाशिवरात्रि हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण और शुभ त्योहारों में से एक है जो हर साल फरवरी और मार्च के महीने में आता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह त्यौहार फाल्गुन या माघ महीने के कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन मनाया जाता है।</p>
<p>इस साल 2024 में महाशिवरात्रि 8 मार्च को है। महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त का समय शाम 06 बजकर 25 मिनट से 09 बजकर 28 मिनट तक है।</p>
<p>इस पोस्ट में हम महाशिवरात्रि पर महादेव को प्रसन्न करने के अचूक उपायों के बारे में जानेगें, तो चलिए शुरू करते हैं।</p>
<h2>महाशिवरात्री का महत्व</h2>
<p>तीनों लोकों के मालिक भगवान शिव के विवाह का दिन यानि महाशिवरात्रि है। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि पड़ती है। इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न कर लेने से सभी मनुष्य की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।</p>
<p>महाशिवरात्रि के अवसर पर सारे देवी-देवता एकत्रित होते हैं। इसलिए इसदिन भगवान शिव की कृपा से सभी देवी-देवताओं की कृपा मिलती है और रुके हुए सभी काम पूरे हो जाते हैं। आइए जानते महाशिवरात्रि पर <strong>महादेव को प्रसन्न करने के उपाय</strong>:</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-13015" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/04/shiv-ji.jpg?resize=600%2C337&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="337" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/04/shiv-ji.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/04/shiv-ji.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p><strong>[readalso label=&#8221;संबंधित&#8221;] <a href="https://fundabook.com/a-mysterious-temple-whose-door-opens-only-on-mahashivaratri/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">एक रहस्यमयी मंदिर जिसका दरवाज़ा खुलता है सिर्फ महाशिवरात्रि पर</a> [/readalso]</strong></p>
<ul>
<li>भगवान शिव की पूजा करते समय ऊँ महाशिवाय सोमाय नमः मंत्र का जाप करें।</li>
<li>जल चढ़ाते समय <a href="https://fundabook.com/do-not-forget-these-things-shivling-god-angry-hindi/">शिवलिंग</a> को हथेलियों से रगड़ना चाहिए। इस उपाय से किसी की भी किस्मत बदल सकती हैं।</li>
<li>नंदी बैल को महादेव का वाहन कह कर पूजा जाता है। इस दिन नंदी बैल को हरा चारा खिलाना चाहिए, इससे धन लाभ और सुख समृद्धि प्राप्त होगी।</li>
<li>अगर आप शिवरात्रि पर किसी बिल्व वृक्ष के नीचे खड़े होकर खीर और घी का दान करते हैं, तो आप पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा होगी।</li>
<li>इस दिन सुबह, दोपहर, शाम और रात इन चारों प्रहर में रुद्राष्टाध्यायी पाठ के साथ भगवान शिव का अलग-अलग पदार्थों जैसे दूध, <a href="https://fundabook.com/miraculous-tricks-ganga-wate-open-locks-lck-hindi/">गंगाजल</a>, शहद, दही या घी से अभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।</li>
<li>चार पहर दिन में शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने से महादेव की अनंत कृपा प्राप्त होती है।</li>
<li>इस दिन पर्स में लाल रंग का कागज, चावल, पीपल का पत्ता, चांदी का सिक्का और रुद्राक्ष रखने चाहिए।</li>
<li>इस दिन भगवान शिव पर शहद चढ़ाने से नौकरी या व्यवसाय में आ रही बाधाएं दूर हो जाएंगी।</li>
<li>इस दिन शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाने से रोगों से मुक्ति मिलेगी।</li>
<li>किसी सुहागन को लाल साड़ी, लाल चूड़ियां, कुमकुम आदि सुहाग का सामान उपहार में दें। इससे वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर हो जाती हैं।</li>
<li>मुखी <a href="https://fundabook.com/miraculous-benefits-of-wearing-panchmukhi-rudraksha-hindi/">रुद्राक्ष</a> को कुमार कार्तिकेय का स्वरूप माना जाता है। इसलिए इस दिन इस रुद्राक्ष को धारण करने से धन और स्वास्थ्य दोनों पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।</li>
<li>इस दिन शिवलिंग पर गाय का दूध अर्पित करने से कलह &#8211; क्लेश से छुटकारा पाया जा सकता है।</li>
<li>इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति या गरीबों को दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।</li>
<li>इस दिन घर में स्फटिक का शिवलिंग लाकर स्थापित करें और नियमित इसकी पूजा करें। इससे घर में किसी प्रकार के वास्तुदोष का अशुभ प्रभाव नहीं होता है।</li>
<li>बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नमः शिवाय या श्रीराम लिखें। इसके बाद इन पत्तों की माला बनाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।</li>
<li>महाशिवरात्रि के अवसर पर सारे देवी-देवता एकत्रित होते हैं इसलिए अन्य देवताओं की स्तुति भी विशेष फलदायी होती है</li>
</ul>
<h2>कैसे करे महाशिवरात्रि व्रत और पूजा की विधि</h2>
<ul>
<li>मिट्टी के लोटे में पानी या दूध भरकर, ऊपर से बेलपत्र, आक-धतूरे के फूल, चावल आदि डालकर ‘<strong>शिवलिंग</strong>’ पर चढ़ाना चाहिए। अगर आस-पास कोई शिव मंदिर नहीं है, तो घर में ही मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उनका पूजन किया जाना चाहिए।</li>
<li>शिव पुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप इस दिन करना चाहिए। साथ ही महाशिवरात्री के दिन रात्रि जागरण का भी विधान है।</li>
<li>शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार शिवरात्रि का पूजन ‘<strong>निशीथ काल</strong>’ में करना सर्वश्रेष्ठ रहता है। हालाँकि भक्त रात्रि के चारों प्रहरों में से अपनी सुविधानुसार यह पूजन कर सकते हैं।</li>
</ul>
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		<title>आईये देखें कि अलग-2 धर्म और देश क्यों और कैसे मनाते हैं दिवाली का त्यौहार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Nov 2023 11:47:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>दिवाली हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार है। धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक लिहाज से दिवाली भारत वर्ष और विश्व भर के हिंदू, सिख और अन्य धर्मों के बीच बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है। दिवाली की शुरुआत, नाम और उद्देश्य दीपावली का अर्थ है दीपों की माला अर्थात बहुत सारे दीयों को एक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दिवाली हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार है। धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक लिहाज से दिवाली भारत वर्ष और विश्व भर के हिंदू, सिख और अन्य धर्मों के बीच बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है।</p>
<h2>दिवाली की शुरुआत, नाम और उद्देश्य</h2>
<p>दीपावली का अर्थ है दीपों की माला अर्थात बहुत सारे दीयों को एक साथ जलाना। अंधकार को बुराई, पाप और असत्य का प्रतीक माना जाता है जबकि प्रकाश को अच्छाई, पुण्य और सत्य का प्रतीक समझा जाता है।</p>
<p>इसलिए दीप जला कर यह प्रकट किया जाता है कि अच्छाई, पुण्य और सत्य के साथ हैं न कि बुराई के साथ। साथ ही यह छुट्टी, आराम, ख़ुशी, उत्सव और उल्लास का पर्व है। हिन्दू धर्म के साथ ही इस त्यौहार को सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं।</p>
<p>आईये देखते हैं कि विभिन्न धर्मों के लोग दिवाली को किन कारणों से मानते हैं।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-15891" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/diwali-festival-celebrate-why-how.jpg?resize=600%2C331&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="331" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/diwali-festival-celebrate-why-how.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/diwali-festival-celebrate-why-how.jpg?resize=300%2C166&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<h2>हिन्दू धर्म में दिवाली</h2>
<p>हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार जब आयोध्या के भावी राजा मर्यादा पुरषोतम भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास काट कर आयोध्या वापिस लौटे तो आयोध्या के निवासियों ने घी के दीपक जला कर उनका स्वागत किया।</p>
<p>साथ ही राज्य भर में निवासियों ने अपने परमप्रिय राजा के वापिस आने की ख़ुशी में गाँव-२ नगर-२ में हर्षोउल्लास में कई दिनों तक नाच-गा कर उत्सव मनाये। उन्होंने एक दूसरे को गले लगा कर बधाईयां दी और उपहार आदि भेंट किये। हिन्दू धर्म में मर्यादा पुरषोतम राम को हिन्दुओं के मुख्य देवता भगवान् विष्णु का अवतार माना जाता है।</p>
<p>वनवास के अंतिम भाग में रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया था। श्री राम ने वानर, भालुओं की सेना लेकर रावण की स्वर्ण नगरी पर चढ़ाई कर रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त करा लिया था।</p>
<p>उनकी इस जीत की ख़ुशी में भी आयोध्या वासियों के उल्लास को बढ़ा दिया था। हिन्दू कैलेंडर पञ्चाङ्ग के अनुसार हर वर्ष उसी दिन यह त्यौहार मनाया जाने लगा और इसे दिवाली या दीपावली का नाम दे दिया गया।</p>
<p>रावण को अंधकार, पाप और असत्य का प्रतीक माना गया है और श्री राम को प्रकाश, पुण्य और सत्य का। इसीलिए दिवाली को प्रकाश का पर्व भी माना जाता है। बृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ को यह त्यौहार सत्यापित करता है ऐसा माना जाता है।</p>
<h2>सिख धर्म में दिवाली</h2>
<p>सिख धर्म में दिवाली को बंदी-छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है. दीपावली त्यौहार सिख समुदाय द्वारा ऐतिहासिक रूप से मनाया जाता है। इस दिन सिक्खों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोविंद व अन्य राजाओं को मुग़ल राजा जहांगीर ने ग्वालियर किले की कैद से मुक्त किया था। उनके अमृतसर पहुंचने पर दिवाली मनाई गयी थी।</p>
<p>सिक्खों के लिए यह दिन इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि 1577 में इसी दिन सिखों के सबसे पवित्र स्थान अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था</p>
<h2>जैन धर्म में दिवाली</h2>
<p>जैन धर्म में दिवाली जैन तीर्थंकर महावीर जी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है। 527 ई. पू. में इसी दिन भगवान महावीर के परिनिर्वाण यानि मृत्यु पर उनके अनुयायी 18 राजाओं के समूह ने दीप जला कर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। ये सभी राजा महावीर के अंतिम प्रवचन के लिए एकत्र हुए थे।</p>
<p>उन्होंने यह कह कर दीप जलाये की एक महान प्रकाशपुंज के लिए एक प्रकाशदीप की श्रद्धांजलि से अच्छा भला क्या हो सकता है। तभी से जैन धर्म को मानने वाले दिवाली पर दीपक जलाते हैं। जैन लोग इस पर्व पर लक्ष्मी पूजन भी करते हैं।</p>
<h2>बौद्ध धर्म में दिवाली</h2>
<p>नेपाल के नेवाड़ लोग जो वज्रयाणा बोध धर्म के इष्टदेवों को मानते हैं वे लोग दिवाली पर लक्ष्मी का पूजन करते हैं। वे लोग पांच दिनों तक इस पर्व को मानते हैं।</p>
<p>इसी दिन आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद तथा स्वामी रामतीर्थ का निर्वाण भी दिवस है जिस कारण दिवाली आर्य समाज के लिए दिवाली बहुत महत्व रखती है।</p>
<h2>विभिन्न देशों में दिवाली</h2>
<p>इसके अलावा विश्व भर में विभिन्न धर्मों के मानने वालों में दिवाली को बड़े पैमाने पर सौहार्द, भाईचारे और विश्व शान्ति की कामना के रूप में मनाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड, फिजी आदि देशों में स्थानीय लोग प्रवासी भारतीयों के साथ इस पर्व को हर्षोउल्लास के साथ मनाते हैं।</p>
<p>दिवाली नेपाल, भारत, श्रीलंका, म्यांमार, मारीशस, गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम, मलेशिया, सिंगापुर, फिजी, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया की बाहरी सीमा पर स्थित क्रिसमस द्वीप में एक सरकारी छुट्टी है।</p>
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		<title>दिवाली पर यह 5 उपाय करने से होगी धन की तंगी दूर !!!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Nov 2023 05:50:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>दिवाली के 5 दिन धन के संकट को दूर करने के लिए सबसे शुभ माने गए हैं। शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति यदि अपने मूल कर्ज से निवृत्ति का उपाय नहीं करता है, तो उसे इस जीवन में अर्थ, उपकार, दया के रूप में किसी भी तरह का उधार लेना ही पड़ता है। इस उधार को [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दिवाली के 5 दिन धन के संकट को दूर करने के लिए सबसे शुभ माने गए हैं। शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति यदि अपने मूल कर्ज से निवृत्ति का उपाय नहीं करता है, तो उसे इस जीवन में अर्थ, उपकार, दया के रूप में किसी भी तरह का उधार लेना ही पड़ता है। इस उधार को उतारने के पश्चात ही मनुष्य <a href="https://fundabook.com/easy-and-accurate-tricks-of-attaining-lakshmi/">लक्ष्मी</a> को प्राप्त कर सकता है।</p>
<h4>यह है वो उपाय जिससे धन की तंगी को दूर कर सकते है</h4>
<ul>
<li>दिवाली से पहले धन तेरस का त्यौहार आता है , इस दिन <a href="https://fundabook.com/recommends/diyas-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%95-deepak-fancy-and-colorful-diyas-diwali-diyasearthen-lamps-with-baati-20-small/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">13 दीपक</a> जलाएं और हर दीपक में एक <a href="https://fundabook.com/recommends/generic-natural-kaudi-shells-kauri-2-cm-yellow-set-of-21-pieces/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">कौड़ी</a> डाल दें। दीपक पूर्ण हो जाए तब ये 13 कौड़ी लेकर साफ करें और तिजोरी में रख दें।</li>
<li><a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95_%E0%A4%9A%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A5%80" target="_blank" rel="noopener noreferrer">नरक चतुर्दशी</a> (रूप चतुर्दशी) के दिन पवित्रता से पांच प्रकार के फूल की माला में दूर्वा व बिल्वपत्र लगाकर देवी को अर्पित करें। अर्पित करते समय मौन रखें। यह प्रयोग प्रभावकारी होता है। ऐसा करने से यश में वृद्धि होती है।</li>
<li>दीपावली की रात्रि में ग्यारह बजे के बाद एकाग्रता से बैठकर आँखे बंद करके ध्यान करें l ध्यान करते समय ऐसा सोचें, जैसे की सामने <a href="https://fundabook.com/recommends/maa-padma-farms-astadhatu-made-maha-lakshmi-idol-dhan-lakshmi-brass/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">महालक्ष्मी</a> कमलासन पर विराजमान हो और आप उनके ऊपर कमल के फूल चढ़ा रहे हैं। ध्यान करते समय मन ही मन में कुल 108 मानसिक कमल पुष्प अर्पित करें। ऐसा करने से लक्ष्मी की कृपा होती है। साथ ही विष्णु सहस्रनाम या गोपाल सहस्रनाम का पाठ करें तो अति उत्तम है।</li>
<li>अन्नकूट के दिन भोजन बनाकर अपने कुल के देवता के मंदिर में, अपने पित्तरों को, गाय को, ऋषियों के निमित्त ब्राह्मण को, अपने कुल के पक्षी और किसी भिखारी को भोजन करवाए। साथ ही वृक्ष को जल चढ़ाए, सूर्य को जल चढ़ाए, अग्नि में घी अर्पित करें, चींटियों को आटा तथा मछली को आटे की गोली देने से घर में धन की कमी दूर होती है, और बरकत आती है।</li>
<li>भाईदूज के दिन सुबह शुद्ध पवित्र होकर <a href="https://fundabook.com/recommends/the-holy-mart-kalawa/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">पवित्र रेशमी धागा</a> गुरु व ईष्ट देव को याद करके धूप दीप के बाद उनके दाहिने हाथ में यह डोरा बांधें। डोरा बांधते समय ईश्वर का स्मरण करते रहें। यह प्रयोग वर्षपर्यंत सुरक्षा देता है।</li>
</ul>
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		<title>रक्षाबन्धन : 30 या 31 अगस्त, कब बांधी जाएगी भाई को राखी, जाने इस पोस्ट के माध्यम से</title>
		<link>https://fundabook.com/raksha-bandhan-festival-date-time-2023/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Aug 2023 05:32:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>रक्षाबन्धन एक हिन्दू व जैन त्यौहार  है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। राखी ईश्वर की ओर से बांधा जाने वाला साक्षात सुरक्षा कवच है।  रक्षाबन्धन का पर्व भाई-बहनों के आपसी प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;"><a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%A8" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><b>रक्षाबन्धन</b></a> एक हिन्दू व जैन त्यौहार  है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। राखी ईश्वर की ओर से बांधा जाने वाला साक्षात सुरक्षा कवच है। </span></p>
<p>रक्षाबन्धन का पर्व भाई-बहनों के आपसी प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार रक्षाबन्धन का त्योहार हमेशा भद्रा रहित काल में मनाना शुभ होता है। अगर रक्षाबंधन के दिन भद्रा होती है तो ऐसे में बहनों को अपने भाईयों की कलाई में राखी नहीं बांधनी चाहिए।</p>
<p>भद्रा की समाप्ति के बाद ही राखी बांधना चाहिए। इस बार रक्षा बंधन की तिथि  को लेकर कुछ मतभेद है। दरअसल इस वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर भद्रा का साया रहने के कारण रक्षाबंधन 30 और 31 अगस्त को मनाने को लेकर असमंजस बना हुआ है।</p>
<p>जानते हैं रक्षाबंधन का त्योहार 30 या 31 अगस्त कब मनाएं और शुभ महूर्त :-</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-54699 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/Raksha-Bandhan-date-time-2023.webp?resize=768%2C496&#038;ssl=1" alt="" width="768" height="496" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/Raksha-Bandhan-date-time-2023.webp?w=768&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/Raksha-Bandhan-date-time-2023.webp?resize=300%2C194&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/Raksha-Bandhan-date-time-2023.webp?resize=150%2C97&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/Raksha-Bandhan-date-time-2023.webp?resize=696%2C450&amp;ssl=1 696w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></p>
<h2>रक्षाबन्धन का महत्व</h2>
<p>रक्षाबन्धन पर्व को भाई-बहन के प्रेम और सदभाव के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है इसके बदले में भाई बहन को भेंट देता है एवं सदैव उसकी रक्षा करने का वचन भी देता है। अच्छे मुहूर्त अथवा भद्रारहित काल में भाई की कलाई में राखी बांधने से भाई को कार्य सिद्धि और विजय प्राप्त होती है।</p>
<h2>रक्षाबन्धन के दौरान कब पड़ रही है भद्रा काल ?</h2>
<p>इस साल भद्रा काल होने के कारण रक्षाबन्धन  का मुहूर्त  30 अगस्त को है या 31 को। इसको लेकर सभी असमंजस में है। इस साल पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को सुबह 10:58 मिनट से शुरू होगी, जो 31 अगस्त 2023 को सुबह 07:05 तक चलेगी।</p>
<p>लेकिन शास्त्रों  के अनुसार पूर्णिमा के साथ ही भद्राकाल भी शुरू हो जाएगा। इसमें हिन्दू पंचांग के अनुसार राखी बांधना शुभ नहीं रहता है। ऐसे में एक ही दिन पूर्णिमा और <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AD%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE" target="_blank" rel="noopener">भद्रा</a> लगने के कारण आपको मुहूर्त का खास ख्याल रखना होगा।</p>
<h2>राखी बांधने का शुभ महूर्त</h2>
<p>रक्षाबन्धन का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त को रात 09 बजकर 01 मिनट के बाद से शुरू होगा और इस मुहूर्त का समापन 31 अगस्त को सूर्योदय काल में सुबह 07 बजकर 05 बजे पर होगा.</p>
<h2>क्यों नहीं बांधते भद्रा में राखी?</h2>
<p>हिन्दू शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि शूर्पणखा ने अपने भाई रावण को भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, जिस वजह से रावण के पूरे कुल का सर्वनाश हो गया था। इसलिए ऐसा माना जाता है कि बहनों को भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए।</p>
<h2>इन बातों का भी रखें ख्याल?</h2>
<ul>
<li>राखी बांधते समय अच्छे से नहा-धोकर साफ सुथरे कपड़े पहनें।</li>
<li>रक्षाबंधन वाले दिन भाई को राखी बांधते समय मुहूर्त का खास ख्याल रखें।</li>
<li>राखी से पहले जब भाई की पूजा करें, तो उस समय अक्षत यानि चावल के दाने टूटे हुए न हो।</li>
<li>आरती करते समय थाल में रखा हुआ दिया शुद्ध हो, वो टुटा हुआ नहीं होना चाहिए।</li>
<li>राखी बांधते समय भाई या बहन का चेहरा दक्षिण दिशा की तरफ नहीं होना चाहिए। इस दिशा में मुख करते हुए राखी बांधने पर उम्र कम होती है।</li>
<li>राखी बांधते समय भाई को टिका लगाते समय रोली या चंदन का इस्तेमाल करें। इस समय सिंदूर का इस्तेमाल न करें क्योंकि सिंदूर सुहाग की निशानी होता है।</li>
</ul>
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		<title>चैत्र नवरात्रि के दिनों में माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के अचूक उपाय</title>
		<link>https://fundabook.com/perfect-remedies-to-please-durga-in-chaitra-navaratri/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Mar 2023 11:32:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[astrology]]></category>
		<category><![CDATA[hindu culture]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu religion]]></category>
		<category><![CDATA[hindu traditions]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[Indian traditions]]></category>
		<category><![CDATA[jyotish]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[traditions]]></category>
		<category><![CDATA[Traditions in India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नवरात्रि भारतवर्ष में हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग- अलग रूपों की पूजा की जाती है। वैसे तो साल में चार बार चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में नवरात्रि आती है, लेकिन उनमें से केवल चैत्र और आश्विन माह की नवरात्रि ही बड़े स्तर [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नवरात्रि</strong> भारतवर्ष में <strong>हिंदुओं</strong> द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख <strong>पर्व</strong> है। इस दौरान <strong>मां दुर्गा</strong> के नौ अलग- अलग रूपों की पूजा की जाती है।</p>
<p>वैसे तो साल में चार बार <strong>चैत्र, आषाढ़, आश्विन</strong> और <strong>माघ</strong> के महीनों में नवरात्रि आती है, लेकिन उनमें से केवल <strong>चैत्र</strong> और <strong>आश्विन माह</strong> की नवरात्रि ही बड़े स्तर पर मनाई जाती है।</p>
<p>आइए जानते हैं इस बार चैत्र नवरात्रि कब है और क्या है <strong>घट स्थापना</strong> का मुहूर्त। <strong>घट स्थापना</strong> का मतलब है <strong>कलश की स्थापना करना</strong>, इसे सही मुहूर्त में ही करना चाहिए और पूजा विधि का भी खास ख्याल रखना चाहिए।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-17856 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/04/chaitra-navratri.jpg?resize=701%2C468&#038;ssl=1" alt="" width="701" height="468" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/04/chaitra-navratri.jpg?w=400&amp;ssl=1 400w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/04/chaitra-navratri.jpg?resize=300%2C200&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 701px) 100vw, 701px" /></p>
<p>[adinserter block=&#8221;1&#8243;]</p>
<h2>चैत्र नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त</h2>
<p>चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होती है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 21 मार्च को रात 10 बजकर 52 मिनट से लेकर 22 मार्च को रात 08 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। इसलिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 22 मार्च को सुबह 06 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यानी घटस्थापना के लिए आपको कुल 01 घंटा 09 मिनट की अवधि मिलेगी।</p>
<h2>ऐसे करें माँ दुर्गा को प्रसन्न</h2>
<p>चैत्र नवरात्रि के दौरान भक्त माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए <strong>नौ दिनों</strong> का <strong>उपवास</strong> रखते हैं। इन नौ दिनों में तीन देवी <strong>पार्वती, लक्ष्मी</strong> और <strong>सरस्वती</strong> के <strong>नौ रुपों</strong> की <strong>पूजा</strong> होती है, जिन्हें <strong>नवदुर्गा</strong> कहते हैं।</p>
<p>भक्त ये 9 दिन देवी माँ की पूजा और <strong>नवरात्रि मंत्रों</strong> का जप करते हुए बिताते हैं। चैत्र नवरात्रि के पहले तीन दिनों को <strong>ऊर्जा माँ दुर्गा</strong> को समर्पित है।</p>
<p>अगले तीन दिन, <strong>धन की देवी, माँ लक्ष्मी</strong> को समर्पित है और आखिर के तीन दिन <strong>ज्ञान की देवी, माँ सरस्वती</strong> को समर्पित हैं।</p>
<p>यह माना जाता है कि जो भक्त बिना किसी इच्छा की पूर्ति के लिए नवदुर्गा की पूजा करते हैं, तो वह भक्त मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर मोक्ष प्राप्त करते हैं। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों के कुछ <strong>पूजा अनुष्ठान</strong> नीचे दिए गए हैं।</p>
<ul>
<li>घट स्थापना नवरात्रि के पहले दिन सबसे आवश्यक है, यह <strong>ब्रह्मांड</strong> का प्रतीक है। घर की <strong>शुद्धि</strong> और <strong>खुशाली</strong> के लिए इसे पवित्र स्थान पर रखें।</li>
<li>आप नवरात्रि पूजा शुरू करने से पहले <strong>देसी घी</strong> का <strong>दीपक</strong> जलाएं, जो कि घर और परिवार में <strong>शांति</strong> का प्रतीक है। यह घर की <strong>नकारात्मक ऊर्जा</strong> खत्म करता है और भक्तों में <strong>मानसिक संतोष</strong> बढ़ाता है।</li>
<li>नवरात्रि में घर में <strong>जौ</strong> की बीजाई करते है। ऐसी मान्यता है कि जौ इस सृष्टी की <strong>पहली फसल</strong> थी, इसीलिए इसे<strong> हवन</strong> में भी चढ़ाया जाता है। <strong>वसंत ऋतू</strong> में आने वाली पहली फसल भी जौ ही है, जिसे देवी माँ को चैत्र नवरात्रि के दौरान अर्पण करते है।</li>
<li>नवरात्रि के 9 दिनों में <strong>दुर्गा सप्तशती</strong> का पाठ करना शुभ माना जाता है, क्योंकि दुर्गा सप्तशती <strong>शांति, समृद्धि, धन</strong> और <strong>शांति</strong> का प्रतीक है।</li>
<li><strong>कन्या पूजन</strong> के दिन कन्या को <strong>फूल, इलायची, फल, सुपारी, मिठाई, श्रृंगार की वस्तुएं, कपड़े, घर का भोजन</strong> (खासकर: जैसे की हलवा, काले चने और पूरी) प्रस्तुत करें।</li>
</ul>
<p>[adinserter block=&#8221;1&#8243;]</p>
<h2>इन बातों का रखें ध्यान</h2>
<ul>
<li>त्योहार के शुरू होने से पहले, अपने घर में देवी का स्वागत करने के लिए घर की साफ सफाई करें।</li>
<li>उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाएं।</li>
<li>इन दिनों चमड़े का प्रयोग नहीं करना चाहिए।</li>
<li>नवरात्रि के दिनों में क्रोध से बचे रहें।</li>
<li>हर दिन सत्संग करें और कम से कम 2 घंटे का मौन रखें।</li>
</ul>
<p><strong>यह भी पढ़ें-</strong></p>
<ul>
<li><a href="https://fundabook.com/9-days-navratri-know-which-day-indulge-in-hindi/"><strong>नवरात्रि के 9 दिनों में, जानिए किस दिन कौन सा भोग लगाएं!!</strong></a></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/know-which-tasks-will-be-fulfilled-by-doing-actions-chaitra-navratri/">जानिए नवरात्रि में कौन से कार्य करने से होगी मनोकामना पूर्ण !!</a></strong></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/eating-garlic-onion-prohibited-during-navratri-hindi/">जानिए क्यों नवरात्रि के दौरान लहसुन-प्याज खाना वर्जित होता है?</a></strong></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/some-interesting-facts-related-to-the-nine-days-of-navratri/">नवरात्रि के नौं दिनों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य</a> </strong></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/perfect-remedies-to-please-durga-in-chaitra-navaratri/">चैत्र नवरात्रि के दिनों में माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के अचूक उपाय</a></strong></li>
</ul>
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		<title>जानिए अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Mar 2022 09:07:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[astrology]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। होली के आते ही वातावरण में एक मस्ती का आलम छा जाता है। होली के दिन रंगों के माध्यम से सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। होली के आते ही वातावरण में एक मस्ती का आलम छा जाता है।</p>
<p>होली के दिन रंगों के माध्यम से सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस एक रंग के हो जाते हैं। हर किसी का तन-मन, प्रेम-उल्लास और उमंग के रंगों की फुहार से भर जाता है।</p>
<p>आइए जानते हैं अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-17526 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?resize=657%2C376&#038;ssl=1" alt="" width="657" height="376" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?w=400&amp;ssl=1 400w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/Holi.jpg?resize=300%2C172&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 657px) 100vw, 657px" /></p>
<h2>कब है होली</h2>
<p>होली 2019 तिथि की बात करें तो, इस बार होली 21 मार्च 2019 को है और 20 मार्च 2019 को होलिका दहन है। होलिका दहन और होली के शुभ मुहूर्त का समय 20 मार्च की सुबह 10:44 से शुरू होकर 21 मार्च की शाम 07:12 तक है।</p>
<h2>क्यों मनाई जाती है होली</h2>
<p>हिन्दू मान्यताओं के अनुसार हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे। उनकी इस भक्ति से उनके पिता हिरण्यकश्यप नाखुश थे, इसीलिए उनके पिता ने अपने पुत्र को भगवान की भक्ति से हटाने के लिए कई प्रयास किए।</p>
<p>हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जल सकेगी। एक बार हिरण्यकश्यप ने अपनी ही बहन होलिका के जरिए प्रह्लाद को जिंदा जला देने का आदेश दिया, लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।</p>
<p>जब होलिका प्रह्लाद को जलाने के लिए आग में बैठी, तो वह खुद जल कर मर गई। तभी से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में जाना जाता है और हिन्दू धर्म में होलिका दहन की परंपरा प्रचलित है। होलिका दहन से अगले दिन दुलहंडी (होली) खेला जाता है।</p>
<h2>अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली</h2>
<h2>मेष &#8211; वृश्चिक राशि</h2>
<p>इन राशियों का स्वामी मंगल है, जो ऊर्जा का कारक है और वहीं गुस्से का भी। इन दोनों राशि के लोगों के लिए गुलाबी और पीला रंग उत्तम रहेगा।</p>
<h2>वृषभ &#8211; तुला राशि</h2>
<p>इन राशियों का स्वामी शुक्र है और शुभ रंग सिल्वर है, लेकिन इस कलर का उपयोग करना ठीक नहीं रहेगा। इन दोनों राशि के लोग आसमानी और हल्के नीले रंगों का प्रयोग करें और अपने आसपास के माहौल को खुशनुमा बनाएं।</p>
<h2>मिथुन &#8211; कन्या राशि</h2>
<p>इन राशियों का स्वामी बुध है। इन राशि के लोग हल्के हरे रंग, गुलाबी, पीले, नारंगी, आसमानी रंगों का प्रयोग कर इस त्योहार को यादगार बनाएं।</p>
<h2>कर्क राशि</h2>
<p>इस राशि का स्वामी चन्द्रमा है। इसका रंग सफेद है, इसीलिए आप कोई भी रंग दही में मिलाकर प्रयोग करें। इस प्रकार रंगों भरी होली भी हो जाएगी और दही के प्रयोग से चेहरे पर हानिकारक प्रभाव भी कम होगा। इस राशि के लोग भावुक होते हैं, तो उनके साथ होली की मस्ती सादगी से ही होनी चाहिए।</p>
<h2>सिंह राशि</h2>
<p>इस राशि का स्वामी सूर्य है, इसीलिए इस राशि के रंग भी बड़े सुहावने हैं, जैसे गुलाबी हल्के हरे, नारंगी, पीले आदि। इन रंगों से आपका प्रभाव भी बढ़ेगा। इस राशि वाले लोग उत्साही होते हैं, तो इनके साथ खूब मस्ती वाली होली खेली जा सकती है।</p>
<h2>मकर &#8211; कुंभ राशि</h2>
<p>इन राशियों का स्वामी शनि है और इनका रंग आसमानी, नीला और फिरोजी होता है। ये राशि के लोग हरे रंग का भी प्रयोग कर सकते हैं। इन राशि वालों के साथ होली खेलना बड़ा ही दिलचस्प होता है।</p>
<h2>धनु &#8211; मीन राशि</h2>
<p>इन राशियों का स्वामी गुरु है, जो संत प्रवृत्ति का कारक है। इनका रंग पीला, नारंगी और गुलाबी हैं। ये राशि वाले लोग सादगीपसंद होते हैं। इनके साथ सलीके से होली खेलकर इनका दिल जीत सकते हैं।</p>
<h2>होली पूजन विधि</h2>
<p>लकड़ी और कंडों की होली के साथ घास लगाकर होलिका खड़ी करके उसका पूजन करने से पहले हाथ में असद, फूल, सुपारी, पैसा लेकर पूजन कर जल के साथ होलिका के पास छोड़ दें और अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल तथा गूलरी की माला पहनाएं।</p>
<p>इसके बाद होलिका की तीन परिक्रमा करते हुए नारियल का गोला, गेहूं की बाली तथा चना को भूंज कर इसका प्रसाद सभी को वितरित करें। होली की पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें &#8211;</strong></p>
<ul>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/why-and-how-these-religion-and-countries-observe-diwali-festival/">आईये देखें कि अलग-2 धर्म और देश क्यों और कैसे मनाते हैं दीवाली</a></strong></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/where-ravana-is-worshipped-at-these-places-in-india/">भारत के पांच स्थान जहां दशहरा पर होती है रावण की पूजा</a></strong></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/some-interesting-facts-related-to-the-nine-days-of-navratri/">नवरात्रि के नौं दिनों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य</a></strong></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/most-bizarre-festivals-in-the-world/">दुनिया में होने वाले अजीबोगरीब त्यौहार</a></strong></li>
</ul>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/astrology-rashifal-holi-special/">जानिए अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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		<title>आपको हर संकट से बचाएंगें, होली पर किए गए यह 7 अनोखे काम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Mar 2022 23:41:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। होली के दिन हर किसी का तन-मन, प्रेम-उल्लास और उमंग के रंगों की फुहार से [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है।</p>
<p>होली के दिन हर किसी का तन-मन, प्रेम-उल्लास और उमंग के रंगों की फुहार से भर जाता है। आइए जानते हैं होली पर किए गए वह 7 अनोखे काम, जो आपको हर संकट से बचाएंगें:-</p>
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<h2>कब है होली</h2>
<p>होली 2022 तिथि की बात करें तो, इस बार होली 17 मार्च 2022 को है और 18 मार्च 2022 को होलिका दहन है।होलिका दहन और होली के शुभ मुहूर्त का समय रात में 09 बजकर 6 मिनट से  लेकर 10 बजकर 16 मिनट तक है।</p>
<h2>होली पर पढ़ें यह शुभ मंत्र</h2>
<p>आज हम आपको एक मंत्र के बारे में बताने जा रहें हैं, इस होली इस शुभ मंत्र को पढ़ लिया, तो सुख, समृद्धि और सफलता के दरवाज़े खुल जाएंगे। सुख और समृद्धि के लिए पढ़ें होली का यह शुभ मंत्र-</p>
<p><strong>अहकूटा भयत्रस्तै:कृता त्वं होलि बालिशै: अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम:</strong></p>
<p>इस मंत्र का उच्चारण एक माला, तीन माला या फिर पांच माला विषम संख्या के रूप में करना चाहिए।</p>
<h2>करें यह 7 काम</h2>
<p>होली और दिवाली तंत्र, मंत्र और यंत्र के लिए जानी जाती है, लेकिन होली पर अगर आप कोई कठिन तंत्र-मंत्र नहीं करना चाहते हैं, तो आप यह बहुत सरल से उपाय भी कर सकतें हैं।</p>
<ul>
<li>होलिका का पूजन कर पान, फल, मिष्ठान्न चढ़ाएं और दूसरे दिन कुछ चुटकी भस्म लेकर धारण करें और पूजन करें, तांत्रिक प्रयोगों से रक्षा होगी।</li>
<li>होली के दिन जो लोग भगवान विष्णु के दर्शन करते हैं, वे बैकुंठगामी होते हैं। अगर उनकी प्रतिमा हिंडोले (झूला) में झूलते हुए है, तो वर्ष भर यह दर्शन शुभता लाते हैं।</li>
<li>नमक, मिर्च, राई लेकर अपने ऊपर से उतारकर होली में डाल दें। किसी व्यक्ति से बचाव के लिए उस व्यक्ति का नाम लेकर डालें।</li>
<li>इस दिन आम मंजरी और चंदन को मिलाकर खाने की बड़ी महत्ता है।</li>
<li>अशुभ ग्रहों के निवारण के लिए होली की भस्म शरीर पर लगाकर स्नान करें।</li>
<li><a href="https://fundabook.com/holika-dahan-auspicious-time-these-things-mind-hindi/">होलिका दहन</a> के बाद जो राख निकलती है, उस राख को शरीर पर लगाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जली हुई होली की गर्म राख घर में समृद्धि लाती है। साथ ही परिवार में शांति और आपसी प्रेम बढ़ता है।</li>
<li>होलिका दहन के दौरान गेहूं की बाली सेंककर घर में रखने से धनधान्य में वृद्धि होती है।</li>
</ul>
<h2>होली की आग, भस्म और धूल, बुरी आत्माओं को रखती हैं दूर</h2>
<p>ऐसा माना जाता है कि होली की बची हुई अग्नि और भस्म को अगले दिन प्रात: घर में लाने से घर को अशुभ शक्तियों से बचाने में सहयोग मिलता है। इस भस्म का शरीर पर लेपन भी किया जाता है। भस्म का लेपन करते समय निम्न मंत्र का जाप करना कल्याणकारी रहता है-</p>
<p><strong>वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च। अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।</strong></p>
<h2>होली की पूजा कैसे करें</h2>
<p>लकड़ी और कंडों की होली के साथ घास लगाकर होलिका खड़ी करके उसका पूजन करने से पहले हाथ में असद, फूल, सुपारी, पैसा लेकर पूजन कर जल के साथ होलिका के पास छोड़ दें और अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल तथा गूलरी की माला पहनाएं।</p>
<p>इसके बाद होलिका की तीन परिक्रमा करते हुए नारियल का गोला, गेहूं की बाली तथा चना को भूंज कर इसका प्रसाद सभी को वितरित करें। होली की पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong>Related Article &#8211;</strong></p>
<ul>
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<li><strong><a href="https://fundabook.com/astrology-holi-special-miraculous-tricks/">होली पर इस चमत्कारी टोटके से घर में हमेशा के लिए ठहर जाएगी समृद्धि</a></strong></li>
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</ul>
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