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	<title>hindi Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>हिंदी भाषा के बारे में दिलचस्प तथ्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Sep 2024 00:45:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
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		<category><![CDATA[रोचक तथ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिंदी भाषा, भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। चीन की मंडारिन के बाद यह विश्व में सबसे अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी के अधिकतम शब्द संस्कृत, अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। इसलिए इस भाषा को संबंध भाषा के नाम से भी जाना जाता [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://fundabook.com/interesting-things-about-world-hindi-day/">हिंदी भाषा</a>, भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। चीन की <a href="https://fundabook.com/facts-about-chinese-mandarin-hindi/"><strong>मंडारिन</strong></a> के बाद यह <a href="https://fundabook.com/10-most-spoken-languages-in-the-world/">विश्व में सबसे अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा</a> है। हिंदी के अधिकतम शब्द संस्कृत, अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। इसलिए इस भाषा को <strong>संबंध भाषा</strong> के नाम से भी जाना जाता है।</p>
<ul>
<li>2001 की जनगणना के अनुसार भारत में 5 सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी, बंगाली, तेलुगु, मराठी, तमिल भाषाएँ हैं।</li>
<li>विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में <strong>हिंदी का <a href="https://fundabook.com/10-most-spoken-languages-in-the-world/">तीसरा स्थान</a></strong> है।</li>
<li>भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिन्दी है। देश के 77% लोग हिन्दी बोलते और समझते हैं।</li>
<li>हिंदी को देवनागरी लिपि में लिखा जाता है। इसे <strong>नागरी</strong> नाम से भी पुकारा जाता है। देवनागरी में 11 स्वर और 33 व्यंजन होते हैं और इसे बाएं से दाएं ओर लिखा जाता है।</li>
</ul>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/14-september-hindi-day-intersting-facts-about-hindi/">14 सितंबर &#8211; हिंदी दिवस के बारे में रोचक तथ्य</a> </div></strong></p>
<ul>
<li>हिंदी भाषा के इतिहास में पहले साहित्य की रचना एक फ्रांसीसी लेखक <strong>ग्रासिन द तैसी</strong> ने की थी।</li>
<li><a href="https://fundabook.com/important-facts-about-indian-constitution/">भारतीय संविधान</a> ने 14 सितंबर 1949 में हिन्दी को <b>राष्ट्रभाषा</b> का दर्ज़ा दिया। इसलिए हर साल हम 14 सितंबर को <a href="https://fundabook.com/interesting-things-about-world-hindi-day/"><strong>हिन्दी दिवस</strong></a> के रूप में मनाते हैं।</li>
<li>हिंदी की पहली कविता प्रख्यात कवि <strong>अमीर खुसरो</strong> ने लिखी थी।</li>
<li><a href="https://fundabook.com/interesting-facts-about-google-in-hindi/"><strong>गूगल</strong></a> ने कहा है कि <strong>इंटरनेट</strong> पर हिंदी कंटेंट की मांग अब बढ़ना शुरू हो गई है। यह साल-दर-साल English कंटेंट के 19 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले <strong>94 प्रतिशत</strong> बढ़ती जा रही है।</li>
<li>पूरी दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां <strong>सबसे ज्यादा भाषाएँ</strong> बोली जाती हैं। विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों का देश भारत सिर्फ एक या दो भाषाओं का नहीं बल्कि 461 भाषाओं का घर है पर इनमें से 14 विलुप्त हो गईं है।</li>
</ul>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span>  <a href="https://fundabook.com/interesting-things-about-world-hindi-day/">10 जनवरी- विश्व हिंदी दिवस के बारे में रोचक तथ्य  </a></div></strong></p>
<ul>
<li>हिंदी भाषा सबसे सरल और लचीली है। हिन्दी बोलने एवं समझने वाले लोग <strong>पचास करोड़</strong> से भी अधिक है।</li>
<li>सन् 2000 में हिंदी का पहला <a href="https://fundabook.com">Webportal</a> अस्तित्त्व में आया था। तभी से इंटरनेट पर हिंदी ने अपनी छाप छोड़नी प्रारंभ कर दी जो अब <strong>रफ्तार</strong> पकड़ चुकी है।</li>
<li><a href="https://fundabook.com/interesting-facts-about-c-programming-language-hindi/">कम्प्यूटर</a> के विकास के आरम्भिक काल में अंग्रेजी को छोड़कर विश्व की अन्य भाषाओं का प्रयोग बहुत कम किया जाता था। जिससे कारण सामान्य लोगों में यह गलत धारणा फैल गयी कि कम्प्यूटर अंग्रेजी के सिवा किसी दूसरी भाषा में काम ही नही कर सकता। किन्तु <a href="https://fundabook.com/start-of-such-emoji/"><strong>यूनिकोड</strong></a> के पदार्पण के बाद स्थिति बहुत तेजी से बदल गयी। 19 अगस्त 2009 में गूगल ने कहा की हर 5 वर्षों में हिन्दी की सामग्री में 94% बढ़ोतरी हो रही है।</li>
<li>आज भी <a href="https://fundabook.com/world-top-10-greenest-cities/">संयुक्त राज्य अमेरिका</a> (US) के 45 <strong>विश्वविद्यालय</strong> सहित पूरी दुनिया के लगभग 176 <strong>विश्वविद्यालयों</strong> में <strong>हिन्दी</strong> की पढ़ाई जारी है।</li>
</ul>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span>  <a href="https://fundabook.com/facts-about-chinese-mandarin-hindi/">दुनिया की नंबर 1 भाषा मैंडरिन के बारे में रोचक तथ्य</a> </div></strong></p>
<ul>
<li>विदेशों में 25 से अधिक <strong>पत्र-पत्रिकाएं</strong> है जो नियमित रूप से हिंदी में प्रकाशित हो रही हैं।</li>
<li>हिंदी भारत की उन 7 भाषाओं में से एक भाषा है जिसका इस्तेमाल Web addresses (URLs) बनाने के लिए किया जाता है।</li>
</ul>
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		<title>डाॅ. वेदप्रताप वैदिक: 13 वर्ष की आयु में हिंदी भाषा के लिए सत्याग्रह करने वाले महान विद्वान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Sep 2024 22:28:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Person]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महान हिंदी विद्वान,चिंतक,पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डाॅ. वेदप्रताप वैदिक की गणना राष्ट्रीय अग्रदूतों में होती है। मात्र 13 वर्ष की आयु में मातृभाषा हिंदी के लिए सत्याग्रह करने वाले डा. वेद प्रताप वैदिक का जन्म सन 1944 में इंदौर में हुआ था। वह देश के जाने माने व बड़े हिंदी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक थे। [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महान हिंदी विद्वान,चिंतक,पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डाॅ. वेदप्रताप वैदिक की गणना राष्ट्रीय अग्रदूतों में होती है। मात्र 13 वर्ष की आयु में मातृभाषा हिंदी के लिए सत्याग्रह करने वाले डा. वेद प्रताप वैदिक का जन्म सन 1944 में इंदौर में हुआ था। वह देश के जाने माने व बड़े हिंदी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक थे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में पीएचडी की थी।</p>
<h2>13 वर्ष की आयु में सत्याग्रह</h2>
<p>डा. वैदिक ने हिंदी भाषा के लिए सत्याग्रह किया और अपनी पहली जेल-यात्रा सिर्फ 13 वर्ष की आयु में की थी। हिंदी सत्याग्रही के तौर पर वे 1957 में पटियाला जेल में रहे। बाद में छात्र नेता और भाषाई आंदोलनकारी के तौर पर कई जेल यात्राएं कीं।</p>
<p>हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा का स्थान दिलाने के लिए सबसे अधिक जेल यात्रा करने वाले वह पहले भाषाई आंदोलनकारी थे।, जिन्होंने हिंदी को मौलिक चिंतन की भाषा बनाया और भारतीय भाषाओं को उनका उचित स्थान दिलवाने के लिए सतत संघर्ष और त्याग किया।</p>
<p>महर्षि दयानंद, महात्मा गांधी और डाॅ. राममनोहर लोहिया की महान परंपरा को आगे बढ़ानेवाले योद्धाओं में डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का नाम अग्रणी है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-52011 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik1.jpg?resize=696%2C365&#038;ssl=1" alt="Dr-vedpratap-vaidik" width="696" height="365" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik1.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik1.jpg?resize=300%2C158&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2>हिंदी भाषा में पी.एच.डी. करने वाले पहले व्यक्ति</h2>
<p>वह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में पीएच.डी. कर रहे थे। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर शोध ग्रंथ वह हिंदी में लिखना चाहते थे परंतु उनको अनुमति नहीं मिली।</p>
<p>इस प्रश्न पर उन्होंने आंदोलन किया और कहा कि देश की राष्ट्रभाषा पर मुझे शोध ग्रंथ लिखने और पीएच.डी. करने की अनुमति मिलनी चाहिए। मामला न्यायालय में गया, भारत की संसद में भी मामला गूंजा।</p>
<p>डा. राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी वाजपेयी, मधु लिमये, चंद्रशेखर, प्रकाश वीर शास्त्री, रामधारी सिंह दिनकर, डा. धर्मवीर भारती और डा. हरिवंश राय बच्चन जैसे विद्वानों ने उनका प्रबल समर्थन किया।</p>
<p>इसके बाद इंदिरा गांधी सरकार की पहल पर JNU के नियमों में बदलाव हुआ और उन्हें वापस लिया गया। इसके बाद डा. वैदिक पहले भारतीय छात्र बने जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी में शोध लिख कर पीएच. डी. की। इस दृष्टि से उन्होंने भारत में एक नया इतिहास बनाया।</p>
<p>डा. वैदिक ने अपने लेखन के 60 वर्षों में हजारों लेख लिखे और भाषण दिए! वे लगभग 10 वर्षों तक पीटीआई भाषा (हिन्दी समाचार समिति) के संस्थापक-संपादक रहे और उसके पहले नवभारत टाइम्स के संपादक (विचारक) रहे।</p>
<p>डा. भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर उनके लेख राष्ट्रीय समाचार पत्रों तथा प्रदेशों और विदेशों के लगभग 200 समाचार पत्रों में हर सप्ताह प्रकाशित होते रहे हैं। उनका अंतिम लेख उनकी मृत्यु से महज़ एक दिन पहले ही प्रकाशित हुआ था।</p>
<p>ख़ास: उन्होंने 2014 में आतंकी हाफिज सईद का इंटरव्यू लिया था।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="wp-image-52014 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?resize=696%2C313&#038;ssl=1" alt="Dr.-vedpratap-vaidik" width="696" height="313" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?resize=300%2C135&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik2.jpg?resize=696%2C313&amp;ssl=1 696w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2>हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई का दिया था सुझाव</h2>
<p>अक्तूबर 2022 से देश में पहली बार मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में होने का फ़ैसला लिया गया था। मध्य प्रदेश के सभी 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस पहल की शुरुआत की गयी थी। दरअसल इसका सुझाव सन 2019 में डॉ वेद प्रताप वैदिक ने ही दिया था।</p>
<h2>मीडिया ने की हर बार उपेक्षा</h2>
<p>दोगले चरित्र वाले भारतीय मीडिया चैनलों ने हिंदी भाषा को उसका उचित सम्मान दिलाने में  हमेशा डा. वैदिक के प्रयास की हमेशा उपेक्षा की। वैसे तो हर बार हिंदी दिवस पर सभी चैनल पर हिंदी भाषा को लेकर बड़े-२ प्रोग्राम चलते हैं लेकिन डा. वैदिक के किसी भी प्रयास और यहाँ तक की उनकी मृत्यु पर किसी चैनल ने प्रोग्राम चलाना तो दूर इस खबर को हाई लाइट करना भी ज़रूरी नहीं समझा।</p>
<h2>डा. वैदिक की जीवन यात्रा</h2>
<p><strong>जन्म</strong>: डॉ. वेद प्रताप वैदिक का जन्म 30 दिसंबर 1944 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ।</p>
<p><strong>शिक्षा</strong>:</p>
<p>(1) पीएच.डी (अंतरराष्ट्रीय राजनीति), स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज, जवाहरलाल नेहरु वि.वि., 1971. विषय — अफगानिस्तान के साथ सोवियत संघ और अमेरिका के संबंधों का तुलनात्मक अध्ययन, 1946-1963 (पीएच.डी. शोध-कार्य के दौरान न्यूयार्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय, वाशिंगटन डी. सी. की लायब्रेरी आॅफ कांग्रेस, मास्को की विज्ञान अकादमी, लंदन के प्राच्य-विद्या संस्थान तथा काबुल विश्वविद्यालय में विशेष अध्ययन का अवसर)</p>
<p>(2) एम.ए. (राजनीति शास्त्र), प्रथम श्रेणी इंदौर क्रिश्चियन काॅलेज, इंदौर विश्वविद्यालय, 1965</p>
<p>(3) बी.ए. (राजनीति शास्त्र, दर्शनशास्त्र, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी) प्रथम श्रेणी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, 1963</p>
<p>(4) संस्कृत (सातवलेकर परीक्षाएं),1955 प्रथम श्रेणी</p>
<p>(5) रूसी भाषा (स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज),1967प्रथम श्रेणी</p>
<p>(6) फारसी भाषा (स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज), 1968 प्रथम श्रेणी</p>
<p><strong>छात्रवृत्तियां</strong>:</p>
<p>(1) राष्ट्रीय प्रतिभा छात्रवृत्ति, 1963-64. एवं</p>
<p>(2) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग शोधवृत्ति, 1964-1966</p>
<p><strong>शोधवृत्तियां</strong>:</p>
<p>(3) वरिष्ठ शोधवृत्ति, इंडियन काॅसिल आॅफ सोश्यल साइंस रिसर्च, 1981-1983</p>
<p>‘इंस्टीट्यूट फाॅर डिफेंस स्टडीज एण्ड एनालिसस’ तथा ‘स्कूल आॅफ इंटरनेशनल स्टडीज’ (ज.नेहरू.वि.वि.) में दो साल तक ‘सीनियर फेलो’ के तौर पर शोधकार्य.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="wp-image-52013 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C392&#038;ssl=1" alt="Dr-vedpratap-vaidik" width="696" height="392" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C392&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr-vedpratap-vaidik.jpg?resize=746%2C420&amp;ssl=1 746w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p><strong>अध्यापन</strong>:</p>
<p>हस्तिनापुर काॅलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में राजनीति शास्त्र का अध्यापन, 1970-74। 30 वर्षों में अनेक भारतीय एवं विदेशी विश्वविद्यालयों में अन्तरराष्ट्रीय राजनीति एवं पत्रकारिता पर अल्पकालिक अध्यापन-कार्यक्रम चलाते रहे।</p>
<p><strong>पुस्तकें</strong>:</p>
<p>(1) ‘हिन्दी पत्रकारिता: विविध आयाम’, संपादित (नेशनल, 1976),पाँच संस्करण (हिन्दी बुक सेंटर), हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास, कला और अधुनातन प्रवृत्तियों का विवेचन करने वाले इस ग्रंथ को समीक्षकों ने ‘हिन्दी पत्रकारिता का विश्वकोष’ कहा है. लगभग सभी विश्वविद्यालयों में इसका संदर्भ ग्रंथ के तौर पर उपयोग किया जाता है. इसके कई संस्करण आ चुके हैं।</p>
<p>(2) ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा’ (नेशनल पब्लिशिंग हाउस, 1973). : अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर हिंदी का यह पहला शोधग्रंथ है, विद्वान समीक्षकों ने इसे अपने विषय का ‘प्रामाणिक’ और ‘मौलिक’ संदर्भ ग्रंथ कहा है. यह फारसी, रूसी और अंग्रेजी स्रोतों के आधार पर लिखा गया है. इस ग्रंथ पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।</p>
<p>(3) ‘भारतीय विदेश नीति: नये दिशा संकेत’ (नेशनल, 1971) इस ग्रंथ को समीक्षकों ने ‘मौलिक चिंतन और भविष्य दृष्टि’ का उल्लेखनीय दस्तावेज घोषित किया है।</p>
<p>(4) ‘एथनिक क्राइसिस इन श्रीलंका: इंडिया’ज़ आॅप्शंस’ (नेशनल, 1985).श्रीलंका की तमिल समस्या पर किसी भारतीय द्वारा लिखा गया यह पहला ग्रंथ है।</p>
<p>(5) ‘अफगानिस्तान: कल, आज और कल’ (राजकमल प्रकाशन, 2002). अफगानिस्तान के इतिहास, समाज और राजनीति पर इस तरह का गवेषणात्मक और मौलिक व्याख्यासम्पन्न ग्रंथ दुनिया की किसी भी अन्य भाषा में उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>(6) ‘वर्तमान भारत’ (राजकमल प्रकाशन, 2002)। समसामयिक भारत की राजनीति पर लिखे गए विश्लेषणात्मक निबंधों का संग्रह !</p>
<p>(7) ‘महाशक्ति भारत’ (राजकमल प्रकाशन, 2002)। इस ग्रंथ में भारत को महाशक्ति बनाने का स्वप्न देखा गया है और उस स्वप्न को साकार करने के उपायों पर विचार किया गया है।</p>
<p>(8) ‘अंग्रेजी हटाओ: क्यों और कैसे ? (प्रभात प्रकाशन, दिल्ली प्रथम संस्करण 1973, सातवां संस्करण, 1998) : इस पुस्तक की 75 हजार प्रतियां बिक चुकी हैं और इसका मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, संस्कृत, गुजराती, मराठी, बांग्ला, असमिया, पंजाबी,उर्दू, सिंधी, मणिपुरी, कश्मीरी, कोंकणी तथा ओडि़या आदि में अनुवाद हो चुका है।</p>
<p>(9) हिंदी का सम्पूर्ण समाचार-पत्र कैसा हो ? (प्रवीण प्रकाशन, 1994), तीन संस्करण।</p>
<p>(10) ‘भाजपा, हिंदुत्व और मुसलमान’ (राजकमल प्रकाशन)</p>
<p>(11)‘कुछ महापुरूष और कुछ मित्र’ शीघ्र प्रकाश्य</p>
<p>(12) मोरिशस, मध्य एशिया और चीन के तीन यात्रा-वृतांत प्रकाशनाधीन</p>
<p><strong>पत्रकारिता</strong>:</p>
<p>(1) 1958 में प्रूफ रीडर के तौर पर पत्रकारिता में प्रवेश. तब से अब तक लगभग 1000 लेख, दर्जनों शोधपत्र, लगभग दो हजार संपादकीय तथा सैकड़ों समीक्षाएं प्रकाशित. पिछले तीन दशकों में ‘नई दुनिया’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिंदुस्तान’, ‘जनसत्ता’, ‘भास्कर’, ‘टाइम्स आॅफ इंडिया’, ‘धर्मयुग’, ‘दिनमान’, ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘इंटरनेशनल स्टडीज’, ‘स्ट्रटेजिक एनालिसिस’, ‘वल्र्ड फोकस’ आदि पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर लेख और भेंट वार्ताएं।</p>
<p>अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, श्रीलंका, चेकोस्लोवाकिया, सूरिनाम आदि राष्ट्रों के शीर्ष नेताओं से की गई भेंट-वार्ताओं को अंतरराष्ट्रीय ख्याति। देश के लगभग दर्जन भर अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-52012 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C428&#038;ssl=1" alt="Dr.-vedpratap-vaidik" width="696" height="428" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?w=699&amp;ssl=1 699w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=300%2C185&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=696%2C428&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=683%2C420&amp;ssl=1 683w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2023/03/Dr.-vedpratap-vaidik.jpg?resize=356%2C220&amp;ssl=1 356w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p>(2) संपादक, ‘पी.टी.आई.-भाषा’, 1986-96 :  प्रेस ट्रस्ट आॅफ इंडिया द्वारा स्थापित ‘भाषा’ नामक हिंदी की समाचार समिति के संस्थापक-संपादक। ‘भाषा’ ने अपनी नवीन खबर-शैली, देशी और विदेशी नामों के मानकीकरण और अनेक महत्त्वपूर्ण अवसरों पर अपने ‘स्कूपों’ द्वारा हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय ख्याति अर्जित की।</p>
<p>(3) संपादक (विचार), नवभारत टाइम्स, 1986. सहायक संपादक, नवभारत टाइम्स 1974-85, संपादक, ‘अग्रवाही (मासिक), इंदौर, 1962-66. संपादक, इंदौर क्रिश्यिचन काॅलेज पत्रिका, 1963-64. हिंदी पत्रकारिता: विविध आयम’ नामक 1100 पृष्ठों के महग्रंथ का संपादन, 1976।</p>
<p>(4) निदेशक, हिंदुस्तान समाचार, 1974-77</p>
<p>(5) संपादकीय निदेशक, नेटजाल.काॅम (भारतीय भाषाओं का महापोर्टल)</p>
<p><strong>सम्मान</strong>:</p>
<p>(1) हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पत्रकारिता के लिए इक्कीस हजार रूपये की एवं  सम्मान राशि, 1990.</p>
<p>(2) पुरस्कार मधुवन (भोपाल) द्वारा पत्रकारिता में ‘श्रेष्ठ कला आचार्य’ की उपाधि से सम्मानित, 1989.</p>
<p>(3) उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिंदी सेवा के लिए ‘पुरूषोत्तमदास टण्डन’ स्वर्ण पदक, 1988.</p>
<p>(4) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा’ ग्रंथ पर गोविंदवल्लभ पंत पुरस्कार, 1976.</p>
<p>(5) काबुल वि.वि. द्वारा अफगानिस्तान संबंधी शोधगं्रथ पर दस हजार रूपये की सम्मान राशि, 1972.</p>
<p>(6) इंडियन कल्चरल सोसायटी द्वारा ‘लाला लाजपतराय सम्मान’, 1992.</p>
<p>(7) मीडिया इंडिया सम्मान, नई दिल्ली, 1992.</p>
<p>(8) डाॅ. राममनोहर लोहिया सम्मान, कानपुर, 1990.</p>
<p>(9) प्रधानमंत्री द्वारा प्रदत्त रामधारीसिंह दिनकर शिखर सम्मान, 1992.</p>
<p>(10) छात्रकाल में राजनीतिशास्त्र, दर्शन और हिंदी में सर्वोच्च अंक पाने पर कई बार ‘स्पेशल मेरिट सर्टिफिकेट’</p>
<p><strong>मृत्यु</strong>:</p>
<p>14 मार्च 2023, गुरुग्राम</p>
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		<title>महाशिवरात्रि 2024: जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Mar 2024 04:30:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu religion]]></category>
		<category><![CDATA[human life]]></category>
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		<category><![CDATA[Lord Shiva]]></category>
		<category><![CDATA[mahashivratri 2022]]></category>
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		<category><![CDATA[traditions]]></category>
		<category><![CDATA[Traditions in India]]></category>
		<category><![CDATA[शिवरात्रि]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हर साल फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व आता है, वैसे तो पूरे साल की प्रत्येक माह में  कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शंकर को समर्पित मास शिवरात्रि का व्रत किया जाता है लेकिन सालभर में एक बार की जाने वाली फाल्गुन कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि का [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>हर साल <strong>फाल्गुन</strong> <strong>कृष्ण पक्ष</strong> की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व आता है, वैसे तो पूरे साल की प्रत्येक माह में  कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शंकर को समर्पित मास शिवरात्रि का व्रत किया जाता है लेकिन सालभर में एक बार की जाने वाली फाल्गुन कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि का बहुत अधिक महत्व है।</p>
<p>इस दिन व्रत और पूजा करने से युवतियों को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। बताया जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की चार पहर की विशेष पूजा का महत्व है।</p>
<p>उत्तर भारत में इस दिन को फाल्गुन के महीने के रूप में माना जाता है, जबकि अंग्रेजी महीने में यह दिन फरवरी या मार्च के महीने में आता है।</p>
<p>आज इस पोस्ट में हम जानेंगे इस साल कब है शिवरात्रि और शुभ मुहूर्त। तो आइए जानते हैं।</p>
<h2><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-24593" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF-2021.jpg?resize=696%2C392&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="392" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF-2021.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF-2021.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></h2>
<h2>महाशिवरात्रि 2024 शुभ मुहूर्त</h2>
<p>पंचांग के अनुसार, 8 मार्च को महाशिवरात्रि के दिन शिव जी की पूजा का समय शाम के समय 06 बजकर 25 मिनट से 09 बजकर 28 मिनट तक है।</p>
<p><strong>महाशिवरात्रि 2024 चार प्रहर मुहूर्त</strong></p>
<ul>
<li>रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय &#8211; शाम 06 बजकर 25 मिनट से रात 09 बजकर 28 मिनट तक</li>
<li>रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय &#8211; रात 09 बजकर 28 मिनट से 9 मार्च को रात 12 बजकर 31 मिनट तक</li>
<li>रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय &#8211; रात 12 बजकर 31 मिनट से प्रातः 03 बजकर 34 मिनट तक</li>
<li>रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय &#8211; प्रात: 03.34 से प्रात: 06:37</li>
</ul>
<h2>महाशिवरात्रि का महत्व</h2>
<p>महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा और व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ही भगवान <strong>शिव लिंग</strong> के स्वरूप में प्रकट हुए थे। इसके अलावा ऐसी भी मान्यता है कि इसी तिथि पर पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।</p>
<p>महाशिवरात्रि पर अविवाहित कन्याएं पूरे दिन उपवास रखते हुए शिव आराधना में लीन रहती है और भगवान शिव से योग्य वर की प्राप्ति के लिए कामना करती हैं।</p>
<p>महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर <strong>जलाभिषेक</strong> और <a href="https://fundabook.com/do-rudrabhishek-once-sawan-special-benefits-hindi/">रुद्राभिषेक</a> करने से सभी तरह के सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। महाशिवरात्रि पर सुबह से ही शिव <strong>मंदिरों</strong> में शिव भक्तों की भीड़ जुटना प्रारंभ हो जाती है।</p>
<p><strong>सम्बंधित :- <a href="https://fundabook.com/ndias-tallest-shiva-lingam-know-its-specialty-hindi/">ये हैं भारत के सबसे ऊंचे शिवलिंग, जानिए क्या है इनकी खासियत !!!</a></strong></p>
<h2>महाशिवरात्रि पूजा का संकल्प</h2>
<ul>
<li>महाशिवरात्रि व्रत इस वर्ष त्रयोदशी पर शुरू होगा। इस दिन सुबह उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ करें।</li>
<li>शिव और देवी <strong>पार्वती</strong> की मूर्तियों को लकड़ी के तख्ते पर रखें और <strong>पंचामृत</strong> से स्नान कराएं।</li>
<li><strong>शिवलिंग</strong> को स्नान कराएं और बेल के <strong>पत्ते, भांग, धतूरा, फल</strong> और <strong>मिठाई</strong> चढ़ाएं।</li>
<li><strong>चंदन</strong> की माला से शिव की पूजा करें और मां पार्वती को कुमकुम चढ़ाएं।</li>
<li>महाशिवरात्रि पर उपवास करने का संकल्प लें और मंदिर जाकर शिव को जल चढ़ाएं।</li>
</ul>
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		<title>हनुमान चालीसा पाठ से दूर होते हैं सारे दुःख, पर न करें ये काम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 May 2021 11:01:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interesting Facts]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[hanuman chalisa]]></category>
		<category><![CDATA[hindi]]></category>
		<category><![CDATA[lyrics]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>श्रीहनुमान चालीसा हिन्दी और अवधी साहित्य के महान सन्त कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक महान और प्रसिद्ध रचना है। जैसे कि नाम से ज्ञात होता है, यह चालीस छंदों और दो दोहों में अवधी भाषा में लिखी गयी है। श्रीहनुमान चालीसा श्रीरामभक्त श्रीहनुमानजी की सुंदर स्तुति है जिसमें उनकी श्रीराम भक्ति, वीरता, सरलता, निर्भयता, सौंदर्य [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>श्रीहनुमान चालीसा हिन्दी और अवधी साहित्य के महान सन्त कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक महान और प्रसिद्ध रचना है। जैसे कि नाम से ज्ञात होता है, यह चालीस छंदों और दो दोहों में अवधी भाषा में लिखी गयी है।</p>
<p>श्रीहनुमान चालीसा श्रीरामभक्त श्रीहनुमानजी की सुंदर स्तुति है जिसमें उनकी श्रीराम भक्ति, वीरता, सरलता, निर्भयता, सौंदर्य आदि गुणों का सुंदर ढंग से चित्रण किया गया है। यह गोस्वामी तुलसीदासजी की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-25421 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/05/Lord-Hanuman-Image-12.jpg?resize=400%2C606&#038;ssl=1" alt="हनुमान चालीसा पाठ से दूर होते हैं सारे दुःख, पर न करें ये काम" width="400" height="606" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/05/Lord-Hanuman-Image-12.jpg?w=400&amp;ssl=1 400w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/05/Lord-Hanuman-Image-12.jpg?resize=198%2C300&amp;ssl=1 198w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/05/Lord-Hanuman-Image-12.jpg?resize=277%2C420&amp;ssl=1 277w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" />मान्यता है कि श्रीहनुमानजी ने तुलसीदासजी को दर्शन देकर श्रीराम लक्ष्मण के दर्शन पाने का मार्ग सुझाया था।</p>
<h2>श्रीहनुमान चालीसा-पाठ से मिटते हैं सारे दुःख</h2>
<p>श्रीहनुमानजी की स्तुति करने से दुःख, क्लेश और भय आदि विकारों को मिटाने के सरलतम उपाए श्रीहनुमान चालीसा में बताए गये है। माना जाता है श्रीहनुमानजी अजर-अमर हैं और कलियुग में विचरते रहते हैं।</p>
<p>माना जाता है कि जो भी साधक सच्चे और शुद्ध मन से श्रीहनुमान चालीसा का पाठ करता है और श्रीहनुमानजी का ध्यान करता है बजरंगबली उसे शीघ्र ही दर्शन देकर सारे भयों से मुक्त कर देते हैं।</p>
<h2>लेकिन न करें ये काम</h2>
<p>लेकिन हनुमान चालीसा का पाठ करने के साथ ही साधक को काम, क्रोध, लोभ, मोह से बचना चाहिए। खासतौर पर पर-स्त्री गमन, पराई स्त्री पर बुरी नज़र रखने और कामुक विचारों आदि से दूर रहना चाहिए।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-25422" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/05/Panchmukhi-Hanuman-Bhagwan-Wallpaper-Image-Pic.jpeg?resize=400%2C511&#038;ssl=1" alt="" width="400" height="511" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/05/Panchmukhi-Hanuman-Bhagwan-Wallpaper-Image-Pic.jpeg?w=400&amp;ssl=1 400w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/05/Panchmukhi-Hanuman-Bhagwan-Wallpaper-Image-Pic.jpeg?resize=235%2C300&amp;ssl=1 235w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/05/Panchmukhi-Hanuman-Bhagwan-Wallpaper-Image-Pic.jpeg?resize=329%2C420&amp;ssl=1 329w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" />चूंकि श्रीहनुमानजी बाल-ब्रह्मचारी हैं इसलिए यदि उनकी भक्ति करते हैं तो इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसा न करने पर श्रीहनुमान जी की कृपा दृष्टि मिलना कठिन होता है, ऐसा माना जाता है।</p>
<h2>श्रीहनुमान चालीसा</h2>
<p><strong>दोहा</strong>:<br />
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।<br />
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।<br />
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।<br />
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।</p>
<p><strong>चौपाई</strong>:</p>
<p>जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।<br />
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।</p>
<p>रामदूत अतुलित बल धामा।<br />
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।</p>
<p>महाबीर बिक्रम बजरंगी।<br />
कुमति निवार सुमति के संगी।।</p>
<p>कंचन बरन बिराज सुबेसा।<br />
कानन कुंडल कुंचित केसा।।</p>
<p>हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।<br />
कांधे मूंज जनेऊ साजै।</p>
<p>संकर सुवन केसरीनंदन।<br />
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।</p>
<p>विद्यावान गुनी अति चातुर।<br />
राम काज करिबे को आतुर।।</p>
<p>प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।<br />
राम लखन सीता मन बसिया।।</p>
<p>सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।<br />
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।</p>
<p>भीम रूप धरि असुर संहारे।<br />
रामचंद्र के काज संवारे।।</p>
<p>लाय सजीवन लखन जियाये।<br />
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।</p>
<p>रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।<br />
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।</p>
<p>सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।<br />
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।</p>
<p>सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।<br />
नारद सारद सहित अहीसा।।</p>
<p>जम कुबेर दिगपाल जहां ते।<br />
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।</p>
<p>तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।<br />
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।</p>
<p>तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।<br />
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।</p>
<p>जुग सहस्र जोजन पर भानू।<br />
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।</p>
<p>प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।<br />
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।</p>
<p>दुर्गम काज जगत के जेते।<br />
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।</p>
<p>राम दुआरे तुम रखवारे।<br />
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।</p>
<p>सब सुख लहै तुम्हारी सरना।<br />
तुम रक्षक काहू को डर ना।।</p>
<p>आपन तेज सम्हारो आपै।<br />
तीनों लोक हांक तें कांपै।।</p>
<p>भूत पिसाच निकट नहिं आवै।<br />
महाबीर जब नाम सुनावै।।</p>
<p>नासै रोग हरै सब पीरा।<br />
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।</p>
<p>संकट तें हनुमान छुड़ावै।<br />
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।</p>
<p>सब पर राम तपस्वी राजा।<br />
तिन के काज सकल तुम साजा।</p>
<p>और मनोरथ जो कोई लावै।<br />
सोइ अमित जीवन फल पावै।।</p>
<p>चारों जुग परताप तुम्हारा।<br />
है परसिद्ध जगत उजियारा।।</p>
<p>साधु-संत के तुम रखवारे।<br />
असुर निकंदन राम दुलारे।।</p>
<p>अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।<br />
अस बर दीन जानकी माता।।</p>
<p>राम रसायन तुम्हरे पासा।<br />
सदा रहो रघुपति के दासा।।</p>
<p>तुम्हरे भजन राम को पावै।<br />
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।</p>
<p>अन्तकाल रघुबर पुर जाई।<br />
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।</p>
<p>और देवता चित्त न धरई।<br />
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।</p>
<p>संकट कटै मिटै सब पीरा।<br />
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।</p>
<p>जै जै जै हनुमान गोसाईं।<br />
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।</p>
<p>जो सत बार पाठ कर कोई।<br />
छूटहि बंदि महा सुख होई।।</p>
<p>जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।<br />
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।</p>
<p>तुलसीदास सदा हरि चेरा।<br />
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।</p>
<p><strong>दोहा</strong>:</p>
<p>पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।<br />
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।<br />
­</p>
<p><strong>आगे पढ़ें</strong> &gt;&gt; <a href="https://fundabook.com/hanuman-jayanti-special-2021/">श्री हनुमान चालीसा व्याख्या, सरलतम शब्दों में</a></p>
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		<title>स्वप्न-फल या सपने का फल हिंदी में विस्तार से जानें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 May 2021 20:45:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[dreams]]></category>
		<category><![CDATA[hindi]]></category>
		<category><![CDATA[interpreting dreams]]></category>
		<category><![CDATA[meaning of dreams]]></category>
		<category><![CDATA[swapan]]></category>
		<category><![CDATA[स्वप्न]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सपने सभी को आते हैं। कुछ सपने अच्छे व् खुशनुमा होते हैं, तो कुछ बेहद भयानक व डरावने। कुछ सपने अजीब होते हैं और कुछ सपने असमंजस में डालने वाले होते है। प्राचीन हिंदी शास्त्रों में सपनों के अर्थ, उनमें छिपे सन्देश और उनके मनुष्य के जीवन पड़ने वाले शुभा-शुभ फलों के प्रभाव के बारे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>सपने सभी को आते हैं। कुछ सपने अच्छे व् खुशनुमा होते हैं, तो कुछ बेहद भयानक व डरावने। कुछ सपने अजीब होते हैं और कुछ सपने असमंजस में डालने वाले होते है।</p>
<p>प्राचीन <a href="https://fundabook.com/interesting-facts-in-hindi/">हिंदी</a> शास्त्रों में सपनों के अर्थ, उनमें छिपे सन्देश और उनके मनुष्य के जीवन पड़ने वाले शुभा-शुभ फलों के प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया गया है। यहाँ नीचे 251 सपनों के <a href="https://fundabook.com/right-time-eat-fruits-hindi/">फलों</a> की सूची दी जा रही है।</p>
<p>निकट भविष्य में इस सूची में विस्तार कर दिया जायेगा।</p>
<ul>
<li>अनार का रस पीना- प्रचुर धन प्राप्त होना</li>
<li>आकाश में बादल देखना- जल्दी तरक्की होना</li>
<li>आकाश में उडऩा- लंबी यात्रा करना</li>
<li>आकाश से गिरना- संकट में फंसना</li>
<li><a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%86%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3" target="_blank" rel="noopener">आभूषण</a> देखना- कोई कार्य पूर्ण होना</li>
<li>आम खाना- धन प्राप्त होना</li>
<li>आसमान में बिजली देखना- कार्य-व्यवसाय में स्थिरता</li>
<li>अंगूठी पहनना- सुंदर स्त्री प्राप्त करना</li>
<li>अंडे खाना- पुत्र प्राप्ति</li>
<li><a href="https://fundabook.com/things-increase-eyesight-hindi/">आंखों</a> में काजल लगाना- शारीरिक कष्ट होना</li>
<li>आंधी-तूफान देखना- यात्रा में कष्ट होना</li>
<li>कैंची देखना- घर में कलह होना</li>
<li>किसी से लड़ाई करना- प्रसन्नता प्राप्त होना</li>
<li>खाली बैलगाड़ी देखना- नुकसान होना</li>
<li>खेत में पके गेहूं देखना- धन लाभ होना</li>
<li>खुला दरवाजा देखना- किसी व्यक्ति से मित्रता होगी</li>
<li>खाई देखना- धन और प्रसिद्धि की प्राप्ति</li>
<li>चक्की देखना- शत्रुओं से हानि</li>
<li>चश्मा लगाना- ज्ञान बढऩा</li>
<li>चंद्रमा देखना- सम्मान मिलना</li>
<li>चंद्रमा को टूटते हुए देखना- कोई समस्या आना</li>
<li>चंद्रग्रहण देखना- रोग होना</li>
<li>चांदी देखना- धन लाभ होना</li>
<li>चावल देखना- किसी से शत्रुता समाप्त होना</li>
<li>चिडिय़ा को रोते देखता- धन-संपत्ति नष्ट होना</li>
<li>चींटी देखना- किसी समस्या में पढऩा</li>
<li>चील देखना- शत्रुओं से हानि</li>
<li>चूड़ी दिखाई देना- सौभाग्य में वृद्धि</li>
<li>छोटा जूता पहनना- किसी स्त्री से झगड़ा</li>
<li>जमीन पर बिस्तर लगाना- दीर्घायु और सुख में वृद्धि</li>
<li>तांबा देखना- गुप्त रहस्य पता लगना</li>
<li>टूटा हुआ सपने में छप्पर देखना- गड़े धन की प्राप्ति के योग</li>
<li>थूक देखना- परेशानी में पडऩा</li>
<li>दस्ताने दिखाई देना- अचानक धन लाभ</li>
<li>दांत टूटते हुए देखना- समस्याओं में वृद्धि</li>
<li>दीपक जलाना- नए अवसरों की प्राप्ति</li>
<li>धुआं देखना- व्यापार में हानि</li>
<li>पतला बैल देखना – अनाज महंगा होगा</li>
<li>पलंग पर सोना- गौरव की प्राप्ति</li>
<li>पहाड़ हिलते हुए देखना- किसी बीमारी का प्रकोप होना</li>
<li>पेड़ से गिरता हुआ देखना- किसी रोग से मृत्यु होना</li>
<li>पूजा-पाठ करते देखना- समस्याओं का अंत</li>
<li>पूरी खाना- प्रसन्नता का समाचार मिलना</li>
<li>फल की गुठली देखना- शीघ्र धन लाभ के योग</li>
<li>बंद दरवाजा देखना- धन की हानि होना</li>
<li>बिल्लियों को लड़ते देखना- मित्र से झगड़ा</li>
<li>भेडिय़ा देखना- दुश्मन से भय</li>
<li>भूकंप देखना- संतान को कष्ट</li>
<li>मधुमक्खी देखना- मित्रों से प्रेम बढऩा</li>
<li>दलदल देखना- चिंताएं बढऩा</li>
<li>फल-फूल खाना- धन लाभ होना</li>
<li>मांस देखना- आकस्मिक धन लाभ</li>
<li>मोटा बैल देखना- अनाज सस्ता होगा</li>
<li>मैना देखना- उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति</li>
<li>मुर्दा देखना- बीमारी दूर होना</li>
<li>राजनेता की मृत्यु देखना- देश में समस्या होना</li>
<li>रोता हुआ सियार देखना- दुर्घटना की आशंका</li>
<li>स्त्री से मैथुन करना- धन की प्राप्ति</li>
<li>स्वयं के कटे हाथ देखना- किसी निकट परिजन की मृत्यु</li>
<li>सपने में स्वयं को उड़ते हुए देखना- किसी मुसीबत से छुटकारा</li>
<li>स्वयं को दिवालिया घोषित करना- व्यवसाय चौपट होना</li>
<li>सोना मिलना- धन हानि होना</li>
<li>सूखा हुआ बगीचा देखना- कष्टों की प्राप्ति</li>
<li>लड़ाई में मारे जाना- राज प्राप्ति के योग</li>
<li>हरा-भरा जंगल देखना- प्रसन्नता मिलेगी</li>
<li>सुराही देखना- बुरी संगति से हानि</li>
<li>विदाई समारोह देखना- धन-संपदा में वृद्धि</li>
<li>शिशु को चलते देखना- रुके हुए धन की प्राप्ति</li>
<li>सफेद कबूतर देखना- शत्रु से मित्रता होना</li>
<li>शेरों का जोड़ा देखना- दांपत्य जीवन में अनुकूलता</li>
<li>सफेद बिल्ली देखना- धन की हानि</li>
<li>खच्चर दिखाई देना- धन संबंधी समस्या</li>
<li>समाधि देखना- सौभाग्य की प्राप्ति</li>
<li>गोबर दिखाई देना- पशुओं के व्यापार में लाभ</li>
<li>दियासलाई जलाना- धन की प्राप्ति</li>
<li>सीना या आंख खुजाना- धन लाभ</li>
<li>सूखा जंगल देखना- परेशानी होना</li>
<li>जामुन खाना- कोई समस्या दूर होना</li>
<li>जुआ खेलना- व्यापार में लाभ</li>
<li>धन उधार देना- अत्यधिक धन की प्राप्ति</li>
<li>लाठी देखना- यश बढऩा</li>
<li>सुपारी देखना- रोग से मुक्ति</li>
<li>सपने में शरीर का कोई अंग कटा हुआ देखना- किसी परिजन की मृत्यु के योग</li>
<li>कौआ देखना- किसी की मृत्यु का समाचार मिलना</li>
<li>धुआं देखना- व्यापार में हानि</li>
<li>चश्मा लगाना- ज्ञान में बढ़ोत्तरी</li>
<li>भूकंप देखना- संतान को कष्ट</li>
<li>रोटी खाना- धन लाभ और राजयोग</li>
<li>श्मशान में शराब पीना- शीघ्र मृत्यु होना</li>
<li>रुई देखना- निरोग होने के योग</li>
<li>कुत्ता देखना- पुराने मित्र से मिलन</li>
<li>सफेद फूल देखना- किसी समस्या से छुटकारा</li>
<li>उल्लू देखना- धन हानि होना</li>
<li>सफेद सांप काटना- धन प्राप्ति</li>
<li>लाल फूल देखना- भाग्य चमकना</li>
<li>नदी का पानी पीना- सरकार से लाभ</li>
<li>धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना- यश में वृद्धि व पदोन्नति</li>
<li>कोयला देखना- व्यर्थ विवाद में फंसना</li>
<li>घर बनाना- प्रसिद्धि मिलना</li>
<li>घोड़ा देखना- संकट दूर होना</li>
<li>घास का मैदान देखना- धन लाभ के योग</li>
<li>दीवार में कील ठोकना- किसी बुजुर्ग व्यक्ति से लाभ</li>
<li>दीवार देखना- सम्मान बढऩा</li>
<li>बाजार देखना- दरिद्रता दूर होना</li>
<li>मृत व्यक्ति को पुकारना- विपत्ति एवं दु:ख मिलना</li>
<li>मृत व्यक्ति से बात करना- मनचाही इच्छा पूरी होना</li>
<li>मोती देखना- पुत्री प्राप्ति</li>
<li>लोमड़ी देखना- किसी घनिष्ट व्यक्ति से धोखा मिलना</li>
<li>अनार देखना- धन प्राप्ति के योग</li>
<li>गड़ा धन दिखाना- अचानक धन लाभ</li>
<li>सूखा अन्न खाना- परेशानी बढऩा</li>
<li>अर्थी देखना- बीमारी से छुटकारा</li>
<li>झरना देखना- दु:खों का अंत होना</li>
<li>बिजली गिरना- संकट में फंसना</li>
<li>चादर देखना- बदनामी के योग</li>
<li>जलता हुआ दीया देखना- आयु में वृद्धि</li>
<li>धूप देखना- पदोन्नति और धनलाभ</li>
<li>रत्न देखना- व्यय एवं दु:ख</li>
<li>चेक लिखकर देना- विरासत में धन मिलना</li>
<li>कुएं में पानी देखना- धन लाभ</li>
<li>आकाश देखना – पुत्र प्राप्ति</li>
<li>अस्त्र-शस्त्र देखना- मुकद्में में हार</li>
<li>इंद्रधनुष देखना – उत्तम स्वास्थ्य</li>
<li>कब्रिस्तान देखना- समाज में प्रतिष्ठा</li>
<li>कमल का फूल देखना- रोग से छुटकारा</li>
<li>सुंदर स्त्री देखना- प्रेम में सफलता</li>
<li>चूड़ी देखना- सौभाग्य में वृद्धि</li>
<li>कुआं देखना- सम्मान बढऩा</li>
<li>गुरु दिखाई देना – सफलता मिलना</li>
<li>गोबर देखना- पशुओं के व्यापार में लाभ</li>
<li>देवी के दर्शन करना- रोग से मुक्ति</li>
<li>चाबुक दिखाई देना- झगड़ा होना</li>
<li>चुनरी दिखाई देना- सौभाग्य की प्राप्ति</li>
<li>छुरी दिखना- संकट से मुक्ति</li>
<li>बालक दिखाई देना- संतान की वृद्धि</li>
<li>बाढ़ देखना- व्यापार में हानि</li>
<li>जाल देखना- मुकद्में में हानि</li>
<li>जेब काटना- व्यापार में घाटा</li>
<li>चंदन देखना- शुभ समाचार मिलना</li>
<li>जटाधारी साधु देखना- अच्छे समय की शुरुआत</li>
<li>स्वयं की मां को देखना- सम्मान की प्राप्ति</li>
<li>फूलमाला दिखाई देना- निंदा होना</li>
<li>जुगनू देखना- बुरे समय की शुरुआत</li>
<li>टिड्डी दल देखना- व्यापार में हानि</li>
<li>डाकघर देखना – व्यापार में उन्नति</li>
<li>डॉक्टर को देखना- स्वास्थ्य संबंधी समस्या</li>
<li>ढोल दिखाई देना- किसी दुर्घटना की आशंका</li>
<li>सांप दिखाई देना- धन लाभ</li>
<li>तपस्वी दिखाई देना- दान करना</li>
<li>तर्पण करते हुए देखना- परिवार में किसी बुुजुर्ग की मृत्यु</li>
<li>डाकिया देखना – दूर के रिश्तेदार से मिलना</li>
<li>तमाचा मारना- शत्रु पर विजय</li>
<li>उत्सव मनाते हुए देखना- शोक होना</li>
<li>दवात दिखाई देना- धन आगमन</li>
<li>नक्शा देखना- किसी योजना में सफलता</li>
<li>नमक देखना- स्वास्थ्य में लाभ</li>
<li>कोर्ट-कचहरी देखना- विवाद में पडऩा</li>
<li>पगडंडी देखना- समस्याओं का निराकरण</li>
<li>त्रिशूल देखना- शत्रुओं से मुक्ति</li>
<li>तारामंडल देखना- सौभाग्य की वृद्धि</li>
<li>ताश देखना- समस्या में वृद्धि</li>
<li>तीर दिखाई देना- लक्ष्य की ओर बढऩा</li>
<li>सूखी घास देखना- जीवन में समस्या</li>
<li>भगवान शिव को देखना- विपत्तियों का नाश</li>
<li>किसी रिश्तेदार को देखना- उत्तम समय की शुरुआत</li>
<li>दंपत्ति को देखना- दांपत्य जीवन में अनुकूलता</li>
<li>शत्रु देखना- उत्तम धनलाभ</li>
<li>दूध देखना- आर्थिक उन्नति</li>
<li>मंदिर देखना- धार्मिक कार्य में सहयोग करना</li>
<li>नदी देखना- सौभाग्य वृद्धि</li>
<li>नाच-गाना देखना- अशुभ समाचार मिलने के योग</li>
<li>नीलगाय देखना- भौतिक सुखों की प्राप्ति</li>
<li>नेवला देखना- शत्रुभय से मुक्ति</li>
<li>पगड़ी देखना- मान-सम्मान में वृद्धि</li>
<li>पूजा होते हुए देखना- किसी योजना का लाभ मिलना</li>
<li>फकीर को देखना- अत्यधिक शुभ फल</li>
<li>गाय का बछड़ा देखना- कोई अच्छी घटना होना</li>
<li>वसंत ऋतु देखना- सौभाग्य में वृद्धि</li>
<li>बिल्वपत्र देखना- धन-धान्य में वृद्धि</li>
<li>स्वयं की बहन देखना- परिजनों में प्रेम बढऩा</li>
<li>भाई को देखना- नए मित्र बनना</li>
<li>भीख मांगना- धन हानि होना</li>
<li>शहद देखना- जीवन में अनुकूलता</li>
<li>स्वयं की मृत्यु देखना- भयंकर रोग से मुक्ति</li>
<li>रुद्राक्ष देखना- शुभ समाचार मिलना</li>
<li>पैसा दिखाई देना- धन लाभ</li>
<li>स्वर्ग देखना- भौतिक सुखों में वृद्धि</li>
<li>पत्नी को देखना- दांपत्य में प्रेम बढऩा</li>
<li>स्वस्तिक दिखाई देना- धन लाभ होना</li>
<li>हथकड़ी दिखाई देना- भविष्य में भारी संकट</li>
<li>मां सरस्वती के दर्शन- बुद्धि में वृद्धि</li>
<li>कबूतर दिखाई देना- रोग से छुटकारा</li>
<li>कोयल देखना- उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति</li>
<li>अजगर दिखाई देना- व्यापार में हानि</li>
<li>कौआ दिखाई देना- बुरी सूचना मिलना</li>
<li>छिपकली दिखाई देना- घर में चोरी होना</li>
<li>चिडिय़ा दिखाई देना- नौकरी में पदोन्नति</li>
<li>तोता दिखाई देना- सौभाग्य में वृद्धि</li>
<li>भोजन की थाली देखना- धनहानि के योग</li>
<li>इलाइची देखना – मान-सम्मान की प्राप्ति</li>
<li>खाली थाली देखना- धन प्राप्ति के योग</li>
<li>गुड़ खाते हुए देखना- अच्छा समय आने के संकेत</li>
<li>शेर दिखाई देना- शत्रुओं पर विजय</li>
<li>हाथी दिखाई देना- ऐेश्वर्य की प्राप्ति</li>
<li>कन्या को घर में आते देखना- मां लक्ष्मी की कृपा मिलना</li>
<li>सफेद बिल्ली देखना- धन की हानि</li>
<li>दूध देती भैंस देखना- उत्तम अन्न लाभ के योग</li>
<li>चोंच वाला पक्षी देखना- व्यवसाय में लाभ</li>
<li>ऊँट को देखना- धन लाभ</li>
<li>ऊँट की सवारी- रोगग्रस्त होना</li>
<li>सूर्य देखना- खास व्यक्ति से मुलाकात</li>
<li>घोड़े पर चढऩा- व्यापार में उन्नति होना</li>
<li>घोड़े से गिरना- व्यापार में हानि होना</li>
<li>दर्पण में चेहरा देखना- किसी स्त्री से प्रेम बढऩा</li>
<li>ऊँचाई से गिरना- परेशानी आना</li>
<li>बगीचा देखना- खुश होना</li>
<li>बारिश होते देखना- घर में अनाज की कमी</li>
<li>सिर के कटे बाल देखना- कर्ज से छुटकारा</li>
<li>बर्फ देखना- मौसमी बीमारी होना</li>
<li>बांसुरी बजाना- परेशान होना</li>
<li>स्वयं को बीमार देखना- जीवन में कष्ट</li>
<li>बाल बिखरे हुए देखना- धन की हानि</li>
<li>सुअर देखना- शत्रुता और स्वास्थ्य संबंधी समस्या</li>
<li>बिस्तर देखना- धनलाभ और दीर्घायु होना</li>
<li>बुलबुल देखना- विद्वान व्यक्ति से मुलाकात</li>
<li>भैंस देखना- किसी मुसीबत में फंसना</li>
<li>बादाम खाना- धन की प्राप्ति</li>
<li>स्वयं के सफेद बाल देखना- आयु बढ़ेगी</li>
<li>बिच्छू देखना- प्रतिष्ठा प्राप्त होगी</li>
<li>पहाड़ पर चढऩा- उन्नति मिलेगी</li>
<li>फूल देखना- प्रेमी से मिलन</li>
<li>शरीर पर गंदगी लगाना- धन प्राप्ति के योग</li>
<li>पिंजरा देखना- कैद होने के योग</li>
<li>पुल पर चलना- समाज हित में कार्य करना</li>
<li>प्यास लगना- लोभ बढऩा</li>
<li>पान खाना- सुंदर स्त्री की प्राप्ति</li>
<li>पानी में डूबना- अच्छा कार्य करना</li>
<li>तलवार देखना- शत्रु पर विजय</li>
<li>हरी सब्जी देखना- प्रसन्न होना</li>
<li>तेल पीना- किसी भयंकर रोग की आशंका</li>
<li>तिल खाना- दोष लगना</li>
<li>तोप देखना- शत्रु नष्ट होना</li>
<li>तीर चलाना- इच्छा पूर्ण होना</li>
<li>तीतर देखना- सम्मान में वृद्धि</li>
<li>स्वयं को सपने में हंसते हुए देखना- किसी से विवाद होना</li>
<li>स्वयं को रोते हुए देखना- प्रसन्नता प्राप्त होना</li>
<li>तरबूज खाते हुए देखना- किसी से दुश्मनी होगी</li>
<li>तालाब में नहाना- शत्रु से हानि</li>
<li>जहाज देखना- दूर की यात्रा होगी</li>
<li>झंडा देखना- धर्म में आस्था बढ़ेगी</li>
<li>धनवान व्यक्ति देखना- धन प्राप्ति के योग</li>
</ul>
<p><strong>यह भी पढ़ें :-</strong></p>
<p><strong><a href="https://fundabook.com/interesting-facts-about-dreams/">जानिये कब, कैसे और क्यों देखते है हम सपने !!!!</a></strong></p>
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		<title>आइज़ैक न्यूटन के बारे में 22 रोचक तथ्य</title>
		<link>https://fundabook.com/isaac-newton-facts-hindi/</link>
					<comments>https://fundabook.com/isaac-newton-facts-hindi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Sep 2017 16:54:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[विज्ञान]]></category>
		<category><![CDATA[facts]]></category>
		<category><![CDATA[hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Isaac Newton]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महान वैज्ञानिक, गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और भौतिकविद आईजैक न्यूटन (Isaac Newton) का जन्म 25 दिसंबर 1642 को इंग्लैंड के लिंकनशायर में हुआ था. न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण (Law of gravitation) और गति के नियमों (Laws of motion) के नियमों की खोज की जिन्होंने भौतिक विज्ञान के सारे आयामों को बदल कर रख दिया. यहाँ प्रस्तुत है इसी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-12424 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/09/isaac-newton-facts-hindi.jpg?resize=660%2C439&#038;ssl=1" alt="आइज़ैक न्यूटन" width="660" height="439" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/09/isaac-newton-facts-hindi.jpg?w=660&amp;ssl=1 660w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/09/isaac-newton-facts-hindi.jpg?resize=300%2C200&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/09/isaac-newton-facts-hindi.jpg?resize=631%2C420&amp;ssl=1 631w" sizes="auto, (max-width: 660px) 100vw, 660px" />महान वैज्ञानिक, गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और भौतिकविद आईजैक न्यूटन (Isaac Newton) का जन्म 25 दिसंबर 1642 को इंग्लैंड के लिंकनशायर में हुआ था. न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण (Law of gravitation) और गति के नियमों (Laws of motion) के नियमों की खोज की जिन्होंने भौतिक विज्ञान के सारे आयामों को बदल कर रख दिया.</p>
<p>यहाँ प्रस्तुत है इसी महान व्यक्ति से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:</p>
<ol>
<li>न्यूटन का जन्म जिस वर्ष हुआ उसी वर्ष यानि 1642 में 8 जनवरी को गैलीलीयो गैलीलायाई का निधन हुआ था।</li>
<li>जन्म के समय न्यूटन का आकार सामान्य से काफी छोटा था इसलिए इनके जिंदा बचने की उम्मीद  बहुत कम थी।</li>
<li><strong>आइज़ैक न्यूटन के पिता का भी आइजैक न्यूटन ही था</strong>। न्यूटन के पिता इनके जन्म से तीन महीने पहले ही मर गए थे.</li>
<li>न्यूटन की माँ चाहती थी कि वह किसान बने. उन्होंने कृषि की परीक्षा दी लेकिन फेल हो गये.</li>
<li>जिस समय न्यूटन ने Law of gravitation, Three laws of motion और Calculus की खोज की उस समय कैंब्रिज में प्लेग की बीमारी फैली हुई थी।</li>
<li>माना जाता है कि पेड़ से गिरते हुए सेब को देख कर न्यूटन ने गुरूत्वाकर्षण बल की खोज की थी.</li>
<li>न्यूटन उस समय केवल 23 साल के थे जब उन्होनें गुरूत्वाकर्षण बल की खोज की।</li>
<li>धारणा है कि सेब न्यूटन के सिर पर गिरा था. दरअसल सेब उनके सिर पर नहीं बल्कि उनके आगे गिरी थी।</li>
<li>न्यूटन ने अधिकतर शोध पेपर और किताबें <strong>इतिहास</strong> और <strong>धर्म</strong> पर लिखे न कि <strong>विज्ञान</strong> और <strong>गणित</strong> पर।</li>
<li>अपनी युवावस्था में न्यूटन ने एक बार अपनी माँ और सौतेले पिता को <strong>जिंदा जला देने</strong> की धमकी दी थी।</li>
<li>अपनी माँ की मौत के बाद न्यूटन 6 साल के बौद्धिक एकांतवास में चले गये थे जब उन्होंने केवल लिख कर थोड़ी बहुत बातचीत की.</li>
<li>न्यूटन एक साल के लिए पार्लियामेंट के सदस्य भी रहे थे. इस पूरे एक साल में उन्होनें सिर्फ एक वाक्य बोला: उन्होनें अपने साइड वाले से खुली हुई खिड़की बंद करने के लिए पूछा।</li>
<li>धरती सूर्य के चारों ओर गोल नही बल्कि अंडाकार घूमती है ये बात न्यूटन ने ही बताई थी।</li>
<li>न्यूटन ने differntial and integral calculas की खोज ये बताने के लिए की थी कि सभी ग्रह अंडाकार ही क्यों घूमते है।</li>
<li>आइजैक न्यूटन को कैलकुलस का अविष्कार करने में उतना ही समय लगा था जितना एक छात्र का इसे सीखने में लगता है।</li>
<li>सन 1720, आइजैक न्यूटन ने आज के $30 लाख के बराबर पैसे स्टाॅक मार्केट में खो दिए थे।न्यूटन, बाएं हाथ से लिखते थे।</li>
<li><strong>आइज़ैक न्यूटन</strong> ने कभी शादी नहीं की. माना जाता है है कि वह कुँवारे (virgin) मरे थे।</li>
<li><strong>Isaac Newton</strong> की मृत्यु 31 मार्च, 1727 को लन्दन, इंग्लैंड में हुई जब वह 85 वर्ष के थे.Apple कंपनी के पहले लोगो (Logo) में न्यूटन की तस्वीर थी. एप्पल के एक प्रोडक्ट का नाम newton था।</li>
<li>Isaac Newton’s के Mathematica सिद्धांत में calculation की एक छोटी सी गलती थी लेकिन 300 साल तक इस पर किसी ने ध्यान नही दिया. सन 1987 में शिकागो यूनिवर्सिटी के छात्र Robert Garisto ने इस गलती को पकड़ा था.</li>
<li>जिस पेड़ से सेब गिरी थी उस पेड़ की लकड़ी का एक टुकड़ा अंतरिक्ष में भी भेजा जा चुका है ताकि गुरूत्वाकर्षण बल की अवहेलना की जा सके और ‘इस पेड़’ को zero gravity का अहसास दिलाया जा सके।</li>
<li><strong>आइज़ैक न्यूटन</strong> का प्रसिद्ध वाक्य था:“If I have seen further it is by standing on the shoulders of giants.”<br />
(यदि मैंने समय से आगे देख पाया तो केवल इसलिए कि मैं दैत्यों (बहुत विशाल) के कन्धों पर बैठ कर देख रहा था)</li>
<li>इंग्लिश poet Alexander Pope ने यह epithet Newton के बारे में लिखा था:<br />
“Nature and nature’s laws lay hid in night;<br />
God said “Let Newton be” and all was light.”</li>
</ol>
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