आज नवरात्र का आठवां दिन है, जिसे दुर्गा अष्टमी भी कहते हैं। आज मां दुर्गा की आठवीं शक्ति, मां महागौरी, की पूजा होती है। कल हमने मां कालरात्रि के अंधेरे को देखा था। आज उजाला है। मां महागौरी का रूप चांद की तरह उजला और शांत है। उन्हें शांति, पवित्रता और नई शुरुआत की देवी माना जाता है। अष्टमी पर कई घरों में कन्या पूजन भी होता है। इस ब्लॉग में उसकी विधि भी आसान भाषा में दी गई है।

अष्टमी कब है? तारीख को लेकर जरूरी बात
इस साल अष्टमी की तारीख को लेकर थोड़ा फर्क है, इसलिए ध्यान से पढ़िए। एक पंचांग के अनुसार इस साल अष्टमी और नवमी, दोनों 19 अक्टूबर, सोमवार को पड़ रही हैं। अष्टमी उस दिन सुबह 10:53 बजे तक रहती है, फिर नवमी लग जाती है और अगले दिन दोपहर 12:52 तक चलती है। इसी वजह से महा अष्टमी, संधि पूजा और महा नवमी, तीनों उसी दिन मनाई जा रही हैं। वहीं कुछ दूसरे कैलेंडरों में महा अष्टमी 18 अक्टूबर, रविवार को दी गई है।
| बात | जानकारी |
|---|---|
| अष्टमी तिथि की शुरुआत | 18 अक्टूबर |
| ज्यादातर पंचांगों में महा अष्टमी | 19 अक्टूबर (अलग-अलग कैलेंडर में फर्क संभव) |
| दशहरा | 20 अक्टूबर |
मेरी सलाह: अपने शहर और परिवार की परंपरा के हिसाब से अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से पूछकर ही दिन तय करें। जिस दिन आपके यहां अष्टमी की पूजा होती है, उसी दिन ये विधि अपनाएं।
आज की पूजा एक नजर में
| बात | जानकारी |
|---|---|
| आज की देवी | मां महागौरी |
| नवरात्र का दिन | आठवां (अष्टमी) |
| वाहन | बैल (वृषभ) |
| भुजाएं | चार |
| रंग | दूध जैसा सफेद |
| प्रिय भोग | नारियल |
| प्रिय फूल | सफेद फूल, खासकर मोगरा और चमेली |
| बीज मंत्र | ॐ देवी महागौर्यै नमः |
| दूसरे नाम | श्वेतांबरधरा, वृषारूढ़ा |
नाम का मतलब क्या है
| शब्द | मतलब |
|---|---|
| महा | बहुत बड़ा, श्रेष्ठ |
| गौरी | गोरी, उजली |
| महागौरी | अत्यंत उजले रंग वाली देवी |
मान्यता है कि मां का रंग शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल जैसा सफेद है। उनकी उम्र आठ साल की मानी जाती है। इसीलिए उनके चेहरे पर बच्चों जैसी मासूमियत दिखती है।
मां महागौरी का स्वरूप
| स्वरूप | क्या बताता है |
|---|---|
| सफेद रंग | पवित्रता और शांति |
| सफेद वस्त्र और गहने | सादगी |
| सवारी बैल | धैर्य और स्थिरता |
| दाहिना ऊपरी हाथ | अभय मुद्रा, यानी “डरो मत” |
| दाहिना निचला हाथ | त्रिशूल |
| बायां ऊपरी हाथ | डमरू |
| बायां निचला हाथ | वर मुद्रा, यानी आशीर्वाद |
| भाव | शांत, करुणामयी |
इसी वजह से मां को श्वेतांबरधरा भी कहा जाता है, यानी सफेद कपड़े पहनने वाली।
मां महागौरी की कथा
कथा सुंदर भी है और सीख देने वाली भी। हम जानते हैं कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए सालों तक कठोर तप किया था। इसी तपस्या की कथा मां ब्रह्मचारिणी के रूप में हमने पढ़ी थी। वन में रहते हुए उन्होंने धूप, बारिश, ठंड और भूख सब सही। उनका शरीर धूल, मिट्टी और कमजोरी से मैला पड़ गया। उनका सुंदर रंग काला दिखने लगा।
शिव जी का आना
जब तप सफल हुआ, तो भगवान शिव प्रकट हुए। उन्होंने पार्वती को इस हाल में देखा। उनका मन प्रेम और करुणा से भर गया। कथा के अनुसार शिव जी ने गंगा जल से पार्वती को स्नान कराया। जैसे ही गंगा जल उनके शरीर पर गिरा, मैल उतर गया। उनका रंग बिजली जैसा उजला और चमकदार हो गया। तभी से वे महागौरी कहलाईं।
शेर और मां की दूसरी कथा
एक और कथा बहुत प्यारी है। जब मां तपस्या कर रही थीं, तब एक भूखा शेर वहां आया। वह मां को खाना चाहता था। पर मां को तपस्या में लीन देखकर वह वहीं बैठ गया और इंतजार करने लगा। वह सालों तक वहीं बैठा रहा। भूख से कमजोर हो गया। जब मां की आंखें खुलीं, तो उन्होंने शेर की हालत देखी। उन्हें उस पर दया आ गई। उन्होंने उसे अपना वाहन बना लिया। कहते हैं कि इसी वजह से मां कई रूपों में बैल के साथ-साथ सिंह पर भी सवार दिखाई जाती हैं।
कथा एक नजर में
| क्रम | घटना |
|---|---|
| 1 | पार्वती ने शिव जी को पाने के लिए कठोर तप किया |
| 2 | तप से उनका शरीर मैला और काला पड़ गया |
| 3 | शिव जी प्रसन्न होकर प्रकट हुए |
| 4 | उन्होंने गंगा जल से पार्वती को स्नान कराया |
| 5 | मां का रंग उजला और चमकदार हो गया |
| 6 | इसी से नाम पड़ा महागौरी |
इस कथा से हम क्या सीखें
1. मेहनत का रंग जरूर चढ़ता है
तप में मां का रूप धुंधला हो गया था। पर आखिर में वही तप उनकी सबसे बड़ी चमक बना। मेहनत के दिन कठिन लगते हैं, पर नतीजा खूबसूरत होता है।
2. असली सुंदरता मन की होती है
मां की उजली पहचान सिर्फ रंग से नहीं है। वह उनकी तपस्या, धैर्य और पवित्र मन की चमक है।
3. मुश्किल के बाद सुकून आता है
कालरात्रि के अंधेरे के बाद महागौरी का उजाला आता है। यही नवरात्र का सबसे सुंदर क्रम है।
4. अपनों का साथ मिलता है
जब मां थक चुकी थीं, तब शिव जी ने उन्हें संभाला। मुश्किल समय में अपनों का सहारा बहुत बड़ी ताकत है।
5. दया सबसे बड़ी ताकत है
भूखे शेर पर मां को दया आई। उन्होंने उसे साथ रख लिया। दया से रिश्ते बनते हैं।
आठवें दिन इनकी पूजा क्यों
मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा से:
- मन शांत होता है।
- पुराने दुख और पाप कटते हैं।
- घर में सुख-शांति आती है।
- वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है।
- नई शुरुआत की हिम्मत मिलती है।
इसीलिए कई लोग जीवन की बाधाएं दूर करने के भाव से आज खास पूजा करते हैं।
पूजा की सामग्री
| सामग्री | किसलिए |
|---|---|
| मां की तस्वीर या मूर्ति | पूजा के लिए |
| रोली, चंदन, अक्षत (चावल) | तिलक और अर्पण के लिए |
| सफेद फूल, जैसे मोगरा या चमेली | मां को चढ़ाने के लिए |
| घी का दीपक | आरती के लिए |
| धूप और अगरबत्ती | वातावरण शुद्ध करने के लिए |
| गंगाजल | शुद्धि के लिए |
| नारियल | मुख्य भोग |
| हलवा, पूरी और काले चने | कन्या पूजन और प्रसाद के लिए |
| लाल चुनरी | मां को अर्पित करने के लिए |
| माला | मंत्र जाप के लिए |
पूजा की आसान विधि
पहला कदम: स्नान करें
सुबह जल्दी उठें और नहाएं। साफ कपड़े पहनें। कई लोग इस दिन सफेद या हल्के रंग के कपड़े शुभ मानते हैं। यह परंपरा और पंचांग के अनुसार बदल सकता है।
दूसरा कदम: जगह साफ करें
पूजा की जगह पर गंगाजल छिड़कें। कलश के पास मां की तस्वीर रखें।
तीसरा कदम: संकल्प लें
हाथ में जल और चावल लें। मन में कहें कि आप श्रद्धा से मां की पूजा कर रहे हैं।
चौथा कदम: कलश पूजन
कलश पर रोली और अक्षत चढ़ाएं। फिर दीया जलाएं।
पांचवां कदम: मां का ध्यान करें
आंखें बंद करें। सफेद बैल पर सवार, सफेद कपड़ों वाली शांत मां को याद करें। ध्यान मंत्र पढ़ें।
छठा कदम: पूजन करें
मां को तिलक लगाएं। सफेद फूल और लाल चुनरी चढ़ाएं। फिर धूप और दीप दिखाएं।
सातवां कदम: भोग लगाएं
मां को नारियल का भोग लगाएं।
आठवां कदम: मंत्र जाप
माला से मंत्र का जाप करें। जितना हो सके, उतना करें।
नौवां कदम: आरती करें
आरती उतारें और प्रसाद बांटें।
अष्टमी पर कन्या पूजन कैसे करें
अष्टमी पर कन्या पूजन की परंपरा है। छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर भोजन कराया जाता है।
| क्या | कैसे |
|---|---|
| कितनी कन्याएं | आमतौर पर 9, जिनकी उम्र लगभग 2 से 10 साल हो |
| साथ में | एक छोटा बालक, जिसे “लांगूर” या बटुक कहते हैं |
| स्वागत | आदर से घर बुलाएं |
| पैर धोना | साफ जल से पैर धोएं |
| तिलक | रोली-चंदन का टीका लगाएं |
| भोजन | हलवा, पूरी और काले चने परोसें |
| उपहार | अपनी श्रद्धा से कुछ भेंट दें |
| विदाई | पैर छूकर आशीर्वाद लें |
ध्यान रखें:
- कन्याओं को प्रेम और सम्मान से बिठाएं।
- भोजन साफ और ताजा बनाएं।
- अगर 9 कन्याएं न मिलें, तो जितनी मिलें उतनी से भी पूजा हो सकती है।
- बच्चों की पसंद का ध्यान रखें और उन पर किसी तरह का दबाव न डालें।
- जो भी करें, वह सहज और सम्मान के साथ हो।
यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि हर बेटी का सम्मान होना चाहिए, सिर्फ नवरात्र में नहीं, पूरे साल।
मां महागौरी को क्या भोग लगाएं
मां को नारियल प्रिय माना जाता है।
| भोग | खास बात |
|---|---|
| नारियल | सबसे प्रिय भोग माना जाता है |
| नारियल की बर्फी | आसानी से बन जाती है |
| हलवा, पूरी और काले चने | अष्टमी का पारंपरिक प्रसाद |
| खीर | दूध और चावल की सात्विक मिठाई |
| फल और मेवे | प्रसाद के लिए |
आसान हलवा:
- कड़ाही में घी गरम करें।
- सूजी डालकर हल्का सुनहरा भूनें।
- गरम पानी या दूध मिलाकर पकाएं।
- चीनी और इलायची डालें।
- गाढ़ा होने पर मेवे डालकर उतार लें।
ध्यान रहे: भोग साफ-सफाई से बनाएं। उसमें लहसुन-प्याज न डालें।
मां महागौरी के मंत्र
बीज मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
ध्यान मंत्र
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
प्रार्थना मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मंत्र न आए, तो सिर्फ “जय माता दी” बोल लें। भाव सबसे जरूरी है।
मां महागौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया।
जया उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा॥
चंद्रकली और ममता अंबे।
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे॥
भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती सत हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
शरण आने वाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो॥
क्या करें और क्या न करें
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| सुबह जल्दी उठकर पूजा करें | पूजा में जल्दबाजी न करें |
| साफ और हल्के कपड़े पहनें | गंदे कपड़ों में पूजा न करें |
| कन्याओं का आदर करें | बच्चों को डांटें या दबाव न डालें |
| सात्विक भोजन करें | लहसुन-प्याज और मांसाहार न खाएं |
| मन शांत रखें | गुस्सा और झगड़ा न करें |
| जरूरतमंद की मदद करें | किसी का दिल न दुखाएं |
| बड़ों का आशीर्वाद लें | बड़ों से बहस न करें |
आज की जिंदगी में मां का संदेश
आज हम अक्सर बाहरी सुंदरता को बहुत अहमियत देते हैं। पर मां महागौरी की कथा कुछ और कहती है।
- असली चमक मेहनत और अच्छे मन से आती है।
- मुश्किल दौर में खुद को कम मत आंकिए।
- थक जाएं, तो अपनों से मदद मांगिए।
- खुद पर दया रखिए। हर किसी को ठहरकर सांस लेने का हक है।
- नई शुरुआत करने से मत डरिए।
आज एक काम जरूर कीजिए। पांच मिनट शांत बैठिए। अपने मन से सारी थकान उतारिए। और खुद से कहिए, “मैं कोशिश कर रहा हूं, और यह काफी है।”
व्रत रखने वालों के लिए सुझाव
- दिन में फल, दूध और मेवे लेते रहें।
- खूब पानी पिएं।
- सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करें।
- ज्यादा तला-भुना न खाएं।
- कन्या पूजन का हलवा-पूरी प्रसाद के रूप में थोड़ा ही खाएं। व्रत के बाद भारी खाना एकदम से न खाएं।
- गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बीमार लोग डॉक्टर की सलाह से ही व्रत रखें। सेहत सबसे जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. नवरात्र के आठवें दिन किसकी पूजा होती है?
मां महागौरी की।
2. अष्टमी कब है?
ज्यादातर पंचांगों के अनुसार 19 अक्टूबर। कुछ कैलेंडर में 18 अक्टूबर भी बताई गई है। अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें।
3. मां का वाहन क्या है?
बैल, यानी वृषभ।
4. मां को कौन सा भोग पसंद है?
नारियल।
5. मां का नाम महागौरी क्यों पड़ा?
कथा के अनुसार तप से मैला हुआ शरीर गंगा जल से धुलकर उजला हो गया। इसीलिए यह नाम पड़ा।
6. कन्या पूजन कब करते हैं?
अष्टमी या नवमी पर, अपनी परंपरा के अनुसार।
7. कितनी कन्याओं को बुलाना चाहिए?
आमतौर पर 9। न मिलें तो जितनी हों, उतनी से भी पूजा हो सकती है।
8. क्या घर में अकेले पूजा की जा सकती है?
बिल्कुल। मां श्रद्धा देखती हैं, भीड़ नहीं।
मां महागौरी की कथा एक सीधी सीख देती है। मेहनत और धैर्य से जो चमक आती है, उसे कोई मैला नहीं कर सकता। आज मां के आगे दीया जलाइए। नारियल का भोग लगाइए। अपने मन की सारी थकान उनके चरणों में रख दीजिए। मां महागौरी आपके जीवन में शांति, पवित्रता और नई उम्मीद भर दें।
जय माता दी!

