आज हम नवरात्र के तीसरे दिन की बात करेंगे। आज मां दुर्गा की तीसरी शक्ति, मां चंद्रघंटा, की पूजा होती है। पहले दिन मां ने हमें मजबूती सिखाई। दूसरे दिन उन्होंने धैर्य सिखाया। तीसरे दिन मां का संदेश है: डर को छोड़ो और हिम्मत से आगे बढ़ो। मां का रूप सुंदर भी है और शक्तिशाली भी। वे भक्तों के लिए शांत और दयालु हैं, पर बुराई के लिए सिंहनी हैं।

तीसरा नवरात्र कब है
शारदीय नवरात्र का तीसरा दिन 13 अक्टूबर, मंगलवार को पड़ रहा है। यह तृतीया तिथि है। मंगलवार का दिन होने से इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। मंगलवार को हनुमान जी और शक्ति की उपासना के लिए भी खास माना जाता है।
ध्यान दें: तिथि और पूजा का सही समय हर शहर में थोड़ा अलग होता है। अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से एक बार मिला लें।
मां का नाम “चंद्रघंटा” क्यों
नाम दो शब्दों से बना है।
| शब्द | मतलब |
|---|---|
| चंद्र | चंद्रमा |
| घंटा | घंटी |
| चंद्रघंटा | जिसके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है |
मां के माथे पर आधा चांद सजा है। वह देखने में घंटे जैसा लगता है। इसी वजह से उन्हें चंद्रघंटा कहते हैं।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप
मां का रूप बहुत तेजस्वी है। उनका शरीर सोने जैसा चमकता है। मां शेर पर सवार होती हैं।
| स्वरूप | खास बात |
|---|---|
| माथे पर | घंटे के आकार का अर्धचंद्र |
| रंग | सोने जैसा चमकता हुआ |
| वाहन | सिंह (शेर) |
| भुजाएं | दस हाथ |
| हाथों में | त्रिशूल, गदा, तलवार, कमंडल, धनुष, बाण, कमल और माला |
| एक हाथ में | वरदान की मुद्रा |
| दूसरे हाथ में | अभय की मुद्रा, यानी “डरो मत” |
| भाव | शांत चेहरा, पर युद्ध के लिए तैयार |
मां के हाथों में हथियार हैं, फिर भी चेहरे पर शांति है। यही उनकी खासियत है। वे बताती हैं कि असली ताकत शांत रहकर भी दिखाई जा सकती है।
मां चंद्रघंटा की कथा
इस रूप को लेकर कई कथाएं मिलती हैं। यहां दो लोकप्रिय कथाएं दी गई हैं।
पहली कथा: शिव जी की अनोखी बारात
मां पार्वती की तपस्या सफल हुई। भगवान शिव उनसे विवाह के लिए तैयार हो गए। विवाह का दिन आया। शिव जी बारात लेकर हिमालय के महल की तरफ चले। लेकिन यह बारात बिल्कुल अलग थी।
- शिव जी बैल पर सवार थे।
- उनके गले में सांप लिपटे थे।
- शरीर पर भस्म लगी थी।
- बारात में भूत, प्रेत और गण नाचते-गाते चल रहे थे।
जब बारात महल के पास पहुंची, तो मां मैना ने यह नजारा देखा। वे बहुत डर गईं। घबराहट के मारे वे बेहोश हो गईं। महल में हलचल मच गई। तब पार्वती जी ने हालात संभालने का फैसला किया। उन्होंने अपना चंद्रघंटा रूप धारण किया। उनका यह रूप देखकर सब शांत हो गए। इसके बाद उन्होंने शिव जी से विनती की। उन्होंने कहा, “प्रभु, आप अपना सुंदर रूप धारण कर लें।”शिव जी ने पार्वती की बात मान ली। वे सुंदर और तेजस्वी रूप में आ गए। इसके बाद विवाह खुशी-खुशी पूरा हुआ। इस कथा से सीख मिलती है कि समझदारी और शांति से बड़ी से बड़ी मुश्किल हल हो सकती है।
दूसरी कथा: राक्षसों का अत्याचार
एक समय की बात है। देवताओं और राक्षसों में बहुत बड़ा युद्ध छिड़ा। राक्षसों का राजा महिषासुर था। वह बहुत ताकतवर और घमंडी था।उसने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। इंद्र का सिंहासन भी छीन लिया। देवता परेशान होकर त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास पहुंचे। देवताओं की बात सुनकर तीनों को बहुत गुस्सा आया। उनके क्रोध से एक तेज निकला। यह तेज दूसरे देवताओं के तेज से भी मिल गया। इसी से देवी प्रकट हुईं।
भगवान शिव ने उन्हें त्रिशूल दिया। विष्णु जी ने चक्र दिया। इंद्र ने घंटा दिया। सूर्य ने तेज दिया। बाकी देवताओं ने भी अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र दिए। इस रूप में देवी ने राक्षसों का सामना किया। कहा जाता है कि उनके घंटे की आवाज इतनी तेज थी कि उसे सुनकर राक्षस कांप उठे। कई तो घंटे की गूंज से ही डर गए। इसके बाद देवी ने महिषासुर और उसकी सेना का अंत किया। देवताओं को उनका स्वर्ग वापस मिल गया।
(यह कथा देवी महात्म्य जैसे ग्रंथों में मिलती है। अलग-अलग परंपराओं में इसे थोड़े अलग रूप में बताया जाता है।)
इस कथा से हम क्या सीखें
| सीख | मतलब |
|---|---|
| शांति में भी ताकत है | हर बार चिल्लाने की जरूरत नहीं होती |
| डर का सामना करो | डर से भागने से वह बढ़ता है |
| समझदारी से काम लो | मां ने मुश्किल हालात संभाले, बिना झगड़े के |
| बुराई के आगे मत झुको | जरूरत पड़े तो डटकर खड़े रहो |
| दूसरों की रक्षा करो | मां ने देवताओं और भक्तों को बचाया |
तीसरे दिन इनकी पूजा क्यों
मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा से:
- डर दूर होता है। मन में हिम्मत आती है।
- गुस्सा शांत होता है। स्वभाव में नरमी आती है।
- परेशानियां घटती हैं। नकारात्मक सोच से राहत मिलती है।
- आवाज और व्यक्तित्व में निखार आता है।
- घर में सुख-शांति रहती है।
मान्यता यह भी है कि मां की साधना से मणिपुर चक्र मजबूत होता है। यह चक्र आत्मविश्वास से जुड़ा माना जाता है। लोग इसे अपनी श्रद्धा के अनुसार मानते हैं।
पूजा की सामग्री
| सामग्री | किसलिए |
|---|---|
| मां की तस्वीर या मूर्ति | पूजा के लिए |
| रोली, चंदन और अक्षत (चावल) | तिलक और पूजा के लिए |
| फूल और माला | मां को चढ़ाने के लिए |
| घी का दीपक | आरती के लिए |
| धूप और अगरबत्ती | वातावरण शुद्ध करने के लिए |
| गंगाजल | शुद्धि के लिए |
| घंटी | पूजा और आरती के समय बजाने के लिए |
| दूध से बनी मिठाई या खीर | भोग के लिए |
| फल और मेवे | प्रसाद के लिए |
मां को घंटे की ध्वनि बहुत प्रिय मानी जाती है। इसलिए आज पूजा में घंटी जरूर बजाएं।
पूजा की आसान विधि
पहला कदम: स्नान करें
सुबह जल्दी उठें और नहाएं। साफ कपड़े पहनें।
दूसरा कदम: जगह साफ करें
पूजा की जगह पर गंगाजल छिड़कें। कलश के पास मां की तस्वीर रखें।
तीसरा कदम: संकल्प लें
हाथ में जल और चावल लें। मन में कहें कि आप आज श्रद्धा से मां की पूजा कर रहे हैं।
चौथा कदम: कलश की पूजा करें
सबसे पहले कलश पर रोली और अक्षत चढ़ाएं। फिर उसके आगे दीया जलाएं।
पांचवां कदम: मां का ध्यान करें
आंखें बंद करें। मां के शेर पर सवार तेजस्वी रूप को याद करें। ध्यान मंत्र पढ़ें।
छठा कदम: पूजन करें
मां को रोली, चंदन और अक्षत चढ़ाएं। फूल अर्पित करें। फिर धूप और दीप दिखाएं।
सातवां कदम: भोग लगाएं
मां को दूध की खीर या दूध से बनी मिठाई चढ़ाएं।
आठवां कदम: मंत्र जाप
मंत्र का जाप करें। माला से करेंगे तो गिनती आसान होगी।
नौवां कदम: घंटी बजाकर आरती करें
आरती के समय घंटी जरूर बजाएं। अंत में प्रसाद बांटें।
मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाएं
मां को दूध से बनी चीजें पसंद मानी जाती हैं। खासकर खीर का भोग शुभ माना जाता है।
| भोग | खास बात |
|---|---|
| दूध की खीर | सबसे प्रिय भोग माना जाता है |
| दूध से बनी मिठाई | रसमलाई, बर्फी या पेड़ा |
| शहद | थोड़ी मात्रा में चढ़ा सकते हैं |
| फल | केला, सेब या अनार |
| मेवे | बादाम, किशमिश या काजू |
ध्यान रहे: भोग साफ-सफाई से बनाएं। उसमें लहसुन-प्याज न डालें। भोग का कुछ हिस्सा गाय या जरूरतमंद को दें, तो और अच्छा।
मां चंद्रघंटा के मंत्र
बीज मंत्र
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
ध्यान मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
प्रार्थना मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जितना हो सके, उतना ही पढ़ें। भाव सबसे जरूरी है।
मां चंद्रघंटा की आरती
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे काम॥
चंद्र समान तू शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती॥
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली॥
मन की मालक मन भाती हो।
चंद्रघंटा तुम वर दाती हो॥
सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट में बचाने वाली॥
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाए॥
मूर्ति चंद्र आकार बनाए।
सन्मुख घी की ज्योति जलाए॥
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता॥
कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा॥
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी॥
क्या करें और क्या न करें
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| सुबह जल्दी उठकर पूजा करें | पूजा में जल्दबाजी न करें |
| साफ कपड़े पहनें | गंदे या फटे कपड़े न पहनें |
| घंटी बजाकर आरती करें | शोर-शराबा और झगड़ा न करें |
| शांत स्वभाव रखें | गुस्से में कड़वे शब्द न बोलें |
| सात्विक भोजन करें | लहसुन-प्याज और मांसाहार न खाएं |
| जरूरतमंद की मदद करें | किसी को नीचा न दिखाएं |
| घर के बड़ों का आशीर्वाद लें | बड़ों की बात को अनसुना न करें |
व्रत रखने वालों के लिए सुझाव
- दिन में फल, दूध और मेवे लेते रहें।
- खूब पानी पिएं।
- सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करें।
- ज्यादा तला-भुना न खाएं।
- सेहत ठीक न हो, तो डॉक्टर की सलाह से ही व्रत रखें। अपना ध्यान रखना भी जरूरी है।
आज की जिंदगी में मां का संदेश
आज हम सब किसी न किसी डर से जूझ रहे हैं। कोई नौकरी जाने से डरता है। कोई परीक्षा के रिजल्ट से। किसी को लोगों की बातों का डर है। मां चंद्रघंटा कहती हैं:
- डर को नाम दो और उसका सामना करो।
- अपनी बात शांति से रखो, पर साफ रखो।
- गलत के आगे चुप मत रहो।
- खुद पर भरोसा रखो।
जब मां के हाथों में अभय की मुद्रा है, तो हमें किस बात की चिंता? बस अपना काम ईमानदारी से करते रहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. नवरात्र के तीसरे दिन किसकी पूजा होती है?
मां चंद्रघंटा की।
2. मां का वाहन क्या है?
सिंह, यानी शेर।
3. मां को कौन सा भोग पसंद है?
दूध से बनी चीजें, खासकर खीर।
4. मां के माथे पर क्या है?
घंटे के आकार का अर्धचंद्र।
5. मां के कितने हाथ हैं?
दस हाथ। उनमें अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र और कमल सजे हैं।
6. पूजा में घंटी क्यों बजाते हैं?
मान्यता है कि घंटे की आवाज से नकारात्मकता दूर होती है। मां के नाम में भी घंटा जुड़ा है।
7. क्या घर में अकेले पूजा की जा सकती है?
बिल्कुल। मां श्रद्धा देखती हैं, भीड़ नहीं।
मां चंद्रघंटा की कथा हमें सिखाती है कि शांत रहना कमजोरी नहीं है। और जरूरत पड़ने पर डटकर खड़े होना भी जरूरी है। तीसरे दिन मां के आगे दीया जलाइए। घंटी बजाइए। मन से सारे डर निकाल दीजिए। मां चंद्रघंटा आपको हिम्मत, शांति और सुख दें।
जय माता दी!

