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शहद सी मिठास, तलवार सी ताकत: मां कात्यायनी की उपासना और पूजा की पूरी विधि

आज नवरात्र का छठा दिन है। आज मां दुर्गा की छठी शक्ति, मां कात्यायनी, की पूजा होती है। मां का रूप दो बातें एक साथ सिखाता है: मिठास और मजबूती। उनके एक हाथ में कमल है, तो दूसरे में तलवार। इसीलिए उन्हें योद्धा देवी कहा जाता है। यह ब्लॉग मां की पूजा को सरल भाषा में समझाता है। पहली बार पूजा कर रहे हैं, तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी।

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छठा नवरात्र कब है

इस साल छठा नवरात्र 16 अक्टूबर, शुक्रवार को पड़ रहा है। यह षष्ठी तिथि है।

ध्यान दें: तिथि और पूजा का सही समय हर शहर में थोड़ा अलग होता है। पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से एक बार मिला लें।

आज की पूजा एक नजर में

बात जानकारी
आज की देवी मां कात्यायनी
नवरात्र का दिन छठा
वाहन सिंह
भुजाएं चार
प्रिय भोग शहद
प्रिय फूल लाल गुलाब, गेंदा, कमल
बीज मंत्र ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
दूसरा नाम महिषासुरमर्दिनी

कौन हैं मां कात्यायनी

मां का नाम कात्यायन ऋषि से जुड़ा है। ऋषि ने मां की कठोर तपस्या की थी। वे चाहते थे कि मां उनके घर बेटी बनकर आएं। मां ने उनकी इच्छा पूरी की। इसलिए वे कात्यायनी कहलाईं। जब महिषासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचाया, तब देवताओं के तेज से देवी प्रकट हुईं। ऋषि कात्यायन ने सबसे पहले उनकी पूजा की थी। इसी रूप ने महिषासुर का अंत किया।

मां का स्वरूप

स्वरूप खास बात
रंग सुनहरा, चमकदार
सवारी सिंह
दाहिना ऊपरी हाथ अभय मुद्रा, यानी “डरो मत”
दाहिना निचला हाथ वर मुद्रा, यानी आशीर्वाद
बायां ऊपरी हाथ तलवार
बायां निचला हाथ कमल

तलवार बुराई के नाश का संकेत है। कमल पवित्रता का संकेत है।

आज की पूजा क्यों खास मानी जाती है

मान्यता है कि मां कात्यायनी की पूजा से:

  • विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
  • रिश्तों में प्यार और समझ बढ़ती है।
  • हिम्मत और आत्मविश्वास आता है।
  • डर और नकारात्मक सोच घटती है।

यह मान्यता गोपियों की कथा से आई है। श्रीमद्भागवत के अनुसार, ब्रज की गोपियों ने कृष्ण को जीवनसाथी के रूप में पाने के लिए कात्यायनी व्रत रखा था। उन्होंने यमुना किनारे मिट्टी की मूर्ति बनाकर रोज पूजा की थी। मान्यता यह भी है कि मां की साधना से आज्ञा चक्र मजबूत होता है। यह चक्र माथे के बीच माना जाता है और समझ-बूझ से जुड़ा है। यह श्रद्धा की बात है, आप अपनी आस्था के अनुसार मानें।

पूजा की तैयारी

सामग्री किसलिए
मां की तस्वीर या मूर्ति पूजा के लिए
रोली, चंदन, अक्षत (चावल) तिलक और अर्पण के लिए
लाल गुलाब, गेंदा या कमल मां को चढ़ाने के लिए
घी का दीया आरती के लिए
धूप और अगरबत्ती वातावरण शुद्ध करने के लिए
गंगाजल शुद्धि के लिए
शहद मुख्य भोग
फल, मेवे, मिठाई प्रसाद के लिए
माला मंत्र जाप के लिए

पूजा से पहले सारी सामग्री पास रख लें। बीच में उठना नहीं पड़ेगा।

पूजा की आसान विधि, कदम-दर-कदम

1. स्नान और सफाई
सुबह जल्दी उठें। नहाकर साफ कपड़े पहनें। कई लोग आज लाल या पीले कपड़े शुभ मानते हैं। यह परंपरा के अनुसार बदल सकता है।

2. जगह की शुद्धि
पूजा की जगह पर गंगाजल छिड़कें। कलश के पास मां की तस्वीर रखें।

3. संकल्प
हाथ में जल और चावल लें। मन में कहें कि आप श्रद्धा से मां की पूजा कर रहे हैं।

4. कलश पूजन
पहले कलश पर रोली और अक्षत चढ़ाएं। फिर दीया जलाएं।

5. ध्यान
आंखें बंद करें। सिंह पर सवार, सुनहरे रंग वाली मां का रूप मन में लाएं।

6. अर्पण
मां को तिलक करें। फूल चढ़ाएं। धूप-दीप दिखाएं।

7. भोग
शहद की थोड़ी सी मात्रा साफ कटोरी में रखकर मां को अर्पित करें।

8. मंत्र जाप
माला से मंत्र का जाप करें। कम से कम 11 बार करें।

9. आरती
आरती उतारें। फिर प्रसाद बांट दें।

10. क्षमा प्रार्थना
अंत में हाथ जोड़कर कहें, “मां, पूजा में कोई भूल हुई हो, तो क्षमा करना।”

मां को क्या भोग लगाएं

मां को शहद बहुत प्रिय माना जाता है।

भोग कैसे बनाएं या चढ़ाएं
शहद सीधे कटोरी में
शहद वाला हलवा सूजी भूनकर, चीनी की जगह शहद मिलाएं
मीठा पान कई जगह चढ़ाया जाता है
दूध की मिठाई खीर या बर्फी
फल केला, सेब, अनार

आसान शहद का हलवा:

  1. कड़ाही में घी गरम करें।
  2. सूजी डालकर हल्का सुनहरा भूनें।
  3. गरम पानी या दूध मिलाकर पकाएं।
  4. आंच बंद करके ऊपर से शहद मिलाएं।
  5. मेवे डालकर मां को अर्पित करें।

(शहद को ज्यादा गरम करने से बचें। आंच बंद करके ही मिलाएं।)

मां कात्यायनी के मंत्र

बीज मंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

ध्यान मंत्र

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

प्रार्थना मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मंत्र न आए, तो सिर्फ “जय माता दी” या बीज मंत्र बोल लें। भाव सबसे जरूरी है।

मां कात्यायनी की आरती

जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहावर दाती नाम पुकारा॥
कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो॥
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

क्या करें और क्या न करें

 क्या करें  क्या न करें
सुबह जल्दी उठकर पूजा करें पूजा में जल्दबाजी न करें
साफ कपड़े पहनें गंदे कपड़ों में पूजा न करें
घर की बेटियों का सम्मान करें किसी महिला का अपमान न करें
सात्विक भोजन करें लहसुन-प्याज और मांसाहार न खाएं
सच बोलें, शांत रहें झगड़ा और कड़वे शब्द न बोलें
जरूरतमंद की मदद करें किसी का दिल न दुखाएं
बड़ों का आशीर्वाद लें बड़ों से बहस न करें

विवाह की इच्छा रखने वालों के लिए

कई लोग इसी भाव से आज मां की पूजा करते हैं। कुछ सीधे सुझाव:

  • साफ मन और श्रद्धा से पूजा करें।
  • मां से अपनी बात प्रेम से कहें।
  • सिर्फ पूजा के भरोसे न बैठें। अपनी तरफ से भी कोशिश करें।
  • माता-पिता से खुलकर बात करें।
  • अपने स्वभाव और सोच को बेहतर बनाने पर ध्यान दें।

मां की कृपा और अपनी कोशिश, दोनों साथ चलें तो बात बनती है।

महिलाओं के लिए संदेश

मां कात्यायनी नारी शक्ति की मिसाल हैं।

  • अपनी बात साफ और हिम्मत से रखिए।
  • गलत के आगे चुप मत रहिए।
  • अपनी सेहत और खुशी का ध्यान रखिए।
  • अपने सपनों को अहमियत दीजिए।

अगर कोई मुश्किल या डर में है, तो मदद मांगना कमजोरी नहीं है। परिवार, दोस्तों या जरूरत पड़ने पर प्रशासन की मदद लीजिए।

व्रत रखने वालों के लिए सुझाव

  • दिन में फल, दूध और मेवे लेते रहें।
  • खूब पानी पिएं।
  • सेंधा नमक ही इस्तेमाल करें।
  • तला-भुना कम खाएं।
  • गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बीमार लोग डॉक्टर की सलाह से ही व्रत रखें। सेहत सबसे जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. नवरात्र के छठे दिन किसकी पूजा होती है?
मां कात्यायनी की।

2. मां को कौन सा भोग पसंद है?
शहद।

3. मां को महिषासुरमर्दिनी क्यों कहते हैं?
क्योंकि उन्होंने महिषासुर का अंत किया था।

4. मां की सवारी क्या है?
सिंह।

5. मां को कौन से फूल चढ़ाएं?
लाल गुलाब, गेंदा या कमल।

6. क्या विवाह के लिए पूजा करना जरूरी है?
यह श्रद्धा की बात है। पूजा के साथ अपनी कोशिश भी जारी रखें।

7. क्या घर पर अकेले पूजा हो सकती है?
बिल्कुल। मां श्रद्धा देखती हैं, भीड़ नहीं।

मां कात्यायनी का संदेश सीधा है: दिल में मिठास रखिए, पर जरूरत पड़े तो हिम्मत से खड़े भी होइए। आज मां के आगे दीया जलाइए। शहद का भोग लगाइए। अपने मन की बात उनसे कह दीजिए।   कात्यायनी आपको हिम्मत, खुशी और रिश्तों में मिठास दें।

जय माता दी!

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