नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। वे मां दुर्गा की तीसरी शक्ति मानी जाती हैं। मां ब्रह्मचारिणी ने तप किया। मां चंद्रघंटा उस तप के बाद का रूप हैं। यानी जब मन मजबूत हो जाए, तो डर अपने आप भागने लगता है। आइए, मां की कथा आसान भाषा में जानते हैं।

नाम का मतलब क्या है
| शब्द | मतलब |
|---|---|
| चंद्र | चंद्रमा |
| घंटा | घंटी |
| चंद्रघंटा | जिसके माथे पर घंटे जैसा अर्धचंद्र सजा है |
मां के माथे पर आधा चांद है। वह देखने में घंटे जैसा लगता है। इसीलिए उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।
कथा की शुरुआत: तपस्या के बाद
मां पार्वती ने सालों तक कठोर तप किया था। उसी तप से उन्हें भगवान शिव मिलने वाले थे। अब विवाह की तैयारियां शुरू हुईं। हिमालय के महल में खुशी की लहर थी। सजावट हो रही थी। मेहमान आ रहे थे। सबको बारात का इंतजार था। पर किसी को अंदाजा नहीं था कि बारात कैसी होगी।
शिव जी की अनोखी बारात
भगवान शिव बारात लेकर निकले। लेकिन यह बारात दुनिया की सबसे अलग बारात थी।
| शिव जी की बारात में | कैसा नजारा था |
|---|---|
| सवारी | बैल (नंदी) |
| गले में | लिपटे हुए सांप |
| शरीर पर | भस्म (राख) |
| बाराती | भूत, प्रेत, गण और अनगिनत अजीब जीव |
| माहौल | नाच-गाना और शोर |
कोई शिव जी के साथ नाच रहा था। कोई उछल-कूद कर रहा था। कुछ बाराती देखने में बड़े डरावने थे।
जब मां मैना घबरा गईं
बारात हिमालय के महल के पास पहुंची। मां पार्वती की माता, रानी मैना, उसे देखने आईं। जैसे ही उन्होंने बारात देखी, वे सहम गईं। उन्होंने सोचा, “मेरी फूल सी बेटी इस भयानक बारात के साथ कैसे जाएगी?” घबराहट इतनी बढ़ी कि वे बेहोश हो गईं। महल में हड़कंप मच गया। लोग इधर-उधर भागने लगे। हर तरफ डर और परेशानी का माहौल था।
मां पार्वती का फैसला
पार्वती जी ने यह सब देखा। वे जानती थीं कि शिव जी दिल के बहुत भोले हैं। उनका रूप अलग है, पर मन बहुत साफ है। उन्हें यह भी पता था कि अगर अभी हालात न संभाले गए, तो सब बिगड़ जाएगा। उन्होंने रोने या घबराने के बजाय शांति से काम लेने का फैसला किया। और तब उन्होंने धारण किया चंद्रघंटा रूप।
- माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र।
- सोने जैसा चमकता शरीर।
- दस हाथ, हर हाथ में कुछ खास।
- शेर पर सवारी।
- चेहरे पर शांति और आंखों में तेज।
यह रूप देखते ही महल में सन्नाटा छा गया। लोगों का डर गायब हो गया।
शिव जी से विनती
फिर मां चंद्रघंटा शिव जी के पास गईं। उन्होंने बहुत प्यार से कहा:
“प्रभु, मेरे परिवार को आपका यह रूप देखकर डर लग रहा है। कृपया आप अपना सुंदर रूप धारण करें।”
शिव जी मुस्कुराए। उन्होंने पार्वती की बात का मान रखा। वे तुरंत एक सुंदर और तेजस्वी रूप में आ गए। इस रूप को देखकर हिमालय का पूरा महल खुश हो उठा। रानी मैना को भी होश आ गया। सबने शिव जी का प्रेम से स्वागत किया। इसके बाद विवाह की सारी रस्में खुशी-खुशी पूरी हुईं।
इस कथा की एक खास बात
इस कथा में मां ने न किसी से लड़ाई की, न किसी को डांटा। उन्होंने सिर्फ अपनी समझदारी और शांत स्वभाव से बात संभाल ली। यही मां चंद्रघंटा की असली ताकत है। वे बताती हैं कि हर मुश्किल का हल गुस्से में नहीं, समझदारी में छिपा होता है।
दूसरी कथा: महिषासुर और घंटे की गूंज
मां चंद्रघंटा की एक और लोकप्रिय कथा है। यह देवताओं की रक्षा से जुड़ी है।
राक्षसों का अत्याचार
बहुत पहले देवताओं और राक्षसों के बीच भीषण युद्ध हुआ। राक्षसों का राजा महिषासुर था। वह बहुत ताकतवर था और उसे अपनी ताकत का घमंड भी था। उसने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। इंद्र का सिंहासन भी छीन लिया। देवता दर-दर भटकने लगे।
त्रिदेव के पास गुहार
परेशान होकर देवता ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी के पास पहुंचे। उन्होंने पूरी बात बताई। यह सुनकर तीनों देवताओं को बहुत क्रोध आया। उनके क्रोध से एक तेज निकला। वही तेज दूसरे देवताओं के तेज से मिल गया। उसी से देवी प्रकट हुईं।
अस्त्र-शस्त्र का उपहार
हर देवता ने देवी को कुछ न कुछ दिया।
| किसने दिया | क्या दिया |
|---|---|
| भगवान शिव | त्रिशूल |
| भगवान विष्णु | चक्र |
| इंद्र | घंटा |
| अन्य देवता | अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र और शक्तियां |
| हिमालय | सवारी के लिए शेर |
घंटे की गूंज से कांपे राक्षस
इस रूप में देवी युद्ध में उतरीं। कहा जाता है कि उनके घंटे की आवाज इतनी तेज थी कि उसे सुनकर राक्षस कांप उठे। कई तो सिर्फ आवाज से ही घबरा गए। फिर देवी ने महिषासुर और उसकी सेना का अंत किया। स्वर्ग देवताओं को वापस मिल गया।
(यह कथा देवी महात्म्य जैसे ग्रंथों में अलग-अलग रूप में मिलती है।)
मां का स्वरूप और उसका संदेश
| स्वरूप | क्या सिखाता है |
|---|---|
| माथे पर घंटे जैसा चांद | मन शांत रखो, चांद की तरह शीतल बनो |
| सोने जैसा तेज | अंदर की रोशनी को पहचानो |
| शेर की सवारी | हिम्मत और निडरता |
| दस हाथ | हर मुश्किल से निपटने की ताकत |
| हाथों में अस्त्र-शस्त्र | जरूरत पर बुराई से लड़ने की तैयारी |
| अभय मुद्रा | भक्तों से कहना, “डरो मत” |
| शांत चेहरा | ताकतवर इंसान को चिल्लाना नहीं पड़ता |
इस कथा से हम क्या सीखें
1. मुश्किल में घबराएं नहीं
जब पूरा महल घबरा रहा था, तब मां शांत रहीं। उन्होंने सबसे पहले हालात को समझा।
2. शांति सबसे बड़ी ताकत है
गुस्से में लिए फैसले अक्सर गलत होते हैं। शांत मन से लिया फैसला काम बना देता है।
3. प्यार से बात मनवाओ
मां ने शिव जी से बहुत नरमी से विनती की। नतीजा यह हुआ कि बात बन गई।
4. जरूरत पर डटकर खड़े हो जाओ
मां सिर्फ शांत ही नहीं हैं। जब राक्षसों से सामना हुआ, तो वे पीछे नहीं हटीं।
5. अपनों की रक्षा करो
मां ने परिवार को भी बचाया और देवताओं को भी।
आज की जिंदगी में यह कथा क्यों जरूरी है
हमारी जिंदगी में भी कई “बेकाबू बारातें” आती हैं। कभी ऑफिस का तनाव। कभी घर की परेशानी। कभी परीक्षा का डर। ऐसे वक्त में मां चंद्रघंटा की कथा याद रखिए:
- घबराहट में कोई फैसला न लें।
- पहले गहरी सांस लें।
- हालात को समझें।
- फिर शांति से हल निकालें।
अगर घर में कोई झगड़ा हो, तो ऊंची आवाज की जगह नरम बोली अपनाइए। अक्सर वही काम कर जाती है।
कथा सुनने के बाद पूजा कैसे करें
अगर आप आज मां की पूजा कर रहे हैं, तो ये आसान स्टेप अपनाएं।
- सुबह नहाकर साफ कपड़े पहनें।
- कलश के पास मां की तस्वीर रखें।
- रोली, चंदन और चावल चढ़ाएं।
- फूल अर्पित करें।
- घी का दीया जलाएं।
- दूध की खीर या दूध की मिठाई का भोग लगाएं।
- मंत्र का जाप करें।
- घंटी बजाकर आरती करें।
मां को घंटे की आवाज प्रिय मानी जाती है। इसलिए आज पूजा में घंटी जरूर बजाएं।
बीज मंत्र
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
प्रार्थना मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां को प्रिय भोग
| भोग | मान्यता |
|---|---|
| दूध की खीर | मां को सबसे प्रिय मानी जाती है |
| दूध से बनी मिठाई | रसमलाई, बर्फी या पेड़ा |
| शहद | थोड़ी मात्रा में चढ़ा सकते हैं |
| फल | केला, सेब या अनार |
माना जाता है कि मां को दूध का भोग लगाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. मां चंद्रघंटा कौन हैं?
वे मां दुर्गा का तीसरा रूप हैं। यह मां पार्वती का वह रूप है जो विवाह के समय सामने आया।
2. उनके माथे पर क्या है?
घंटे के आकार का अर्धचंद्र।
3. उनका वाहन क्या है?
सिंह, यानी शेर।
4. मां के कितने हाथ हैं?
दस हाथ। उनमें अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र और कमल सजे हैं।
5. उनकी पूजा में घंटी क्यों बजाई जाती है?
मान्यता है कि घंटे की आवाज से नकारात्मकता दूर होती है। मां के नाम और कथा, दोनों में घंटे का खास स्थान है।
6. यह कथा किन ग्रंथों में मिलती है?
इसका उल्लेख शिव पुराण और देवी महात्म्य जैसे ग्रंथों और लोक परंपराओं में अलग-अलग रूप में मिलता है।
मां चंद्रघंटा की कथा बहुत सीधी बात कहती है। शांत रहो, समझदारी से काम लो, और डर को पास मत आने दो। आज मां के आगे दीया जलाइए। घंटी बजाइए। अपने मन के सारे डर उनके चरणों में रख दीजिए। मां चंद्रघंटा आपको हिम्मत, शांति और सुख दें।
जय माता दी!

