“नवरात्रि” या “नवरात्र” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। “नव” का अर्थ है नौ और “रात्रि” का अर्थ है रात। इस प्रकार इसका शाब्दिक अर्थ है “नौ रातें”। नौ रातों और दस दिनों तक चलने वाला नवरात्रि हिंदू परंपरा के सबसे पवित्र और व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। यह आमतौर पर शरद ऋतु के महीनों में आता है।v

इस उत्सव का मूल भाव देवी दुर्गा की भक्ति है। उन्हें शक्ति, यानी सृष्टि की सार्वभौमिक ऊर्जा का स्वरूप माना जाता है, और उनके नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। भारत में साल भर में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं: चैत्र नवरात्रि, पौष नवरात्रि, माघ नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि। इनमें महा नवरात्रि, यानी शारदीय नवरात्रि, को सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार यह त्योहार अश्विन मास में मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर में पड़ता है। इस वर्ष नवरात्रि 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक मनाई जाएगी। दसवें और अंतिम दिन दशहरा मनाया जाएगा।
नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि का मूल संदेश भारत के सभी प्रमुख त्योहारों की तरह बुराई पर अच्छाई की अंतिम विजय है, हालाँकि इसके पीछे की कथाएँ और मान्यताएँ अलग-अलग हैं। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में यह त्योहार अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में इन दिनों को दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में लोग नौ रातों का यह पर्व भगवान राम की राक्षस राजा रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाते हैं।
परंपरा के अनुसार देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर से भीषण युद्ध किया और अंत में उसे पराजित किया। यह पर्व उसी विजय के उपलक्ष्य में देवी की आराधना और पूजा के लिए मनाया जाता है, जो अंधकार पर दिव्य प्रकाश की जीत का प्रतीक है। उत्सव की औपचारिक शुरुआत महालया से होती है, जो पर्व का पहला दिन है। यह दिन देवी दुर्गा के आह्वान और स्मरण को समर्पित है और पितृ पक्ष के समापन का भी प्रतीक है, जो पूर्वजों के श्राद्ध का पवित्र पखवाड़ा है।
पर्व के छठे दिन देवी दुर्गा का परिवारों के घरों और भव्य सार्वजनिक पंडालों में विधिवत स्वागत किया जाता है। ये उत्सव आगे के दिनों में दसवें दिन तक चलते हैं, जिसे विजयादशमी कहा जाता है। इस दिन देवी की मूर्ति का जल में विसर्जन किया जाता है। इस दौरान लोग मिलकर पंडाल घूमते हैं, “भोग” नामक पवित्र प्रसाद ग्रहण करते हैं और ज़रूरतमंदों को भोजन बाँटते हैं। यह परोपकार और सद्भावना की भावना का उत्सव है।
उत्तर भारत में नौ दिनों का यह पर्व भगवान राम की रावण पर ऐतिहासिक विजय की स्मृति पर केंद्रित होता है। नौ रातों तक “रामलीला” नामक नाट्य मंचन होते हैं, जिनमें प्राचीन हिंदू महाकाव्य रामायण का नाटकीय रूपांतरण प्रस्तुत किया जाता है। दसवें और अंतिम दिन भगवान राम द्वारा धनुष-बाण से रावण का वध दर्शाया जाता है, और उत्सव का समापन रावण, उसके भाइयों मेघनाद और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों के दहन के साथ होता है। इस क्षेत्र के लोग पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं, उपवास रखते हैं और सामूहिक प्रार्थना के लिए एकत्र होते हैं।
भव्य मंच सज्जा, कथा-वाचन, प्राचीन कथाओं का नाट्य मंचन, मंत्रोच्चार, भक्ति प्रार्थनाएँ और डांडिया व गरबा जैसे रंगारंग लोकनृत्य उत्सव की ऊर्जा को जीवंत करते हैं। मित्र और परिवार के लोग एक साथ पंडाल देखने जाते हैं और स्थानीय आयोजनों में भाग लेते हैं। अंतिम दिन उत्सव का समापन या तो देवी की मूर्ति के जल में विसर्जन से होता है, जैसा दुर्गा पूजा में किया जाता है, या फिर पुतला दहन से, जैसा दशहरा में होता है।
नवरात्रि के रंग कैसे तय होते हैं?
नवरात्रि के रंग आम तौर पर हफ़्ते के दिन के हिसाब से तय किए जाते हैं। हर वार का एक रंग माना जाता है और उसी के अनुसार नौ दिनों के रंग बनते हैं। इस बार नवरात्रि रविवार से शुरू हो रही है, इसलिए पहले दिन का रंग नारंगी रखा गया है।
एक बात ज़रूर याद रखें। रंगों की यह परंपरा शास्त्रों का नियम नहीं है। यह नई और क्षेत्रीय परंपरा है, खासकर महाराष्ट्र और गुजरात में, जहाँ महिलाएँ हर दिन उसी रंग के कपड़े पहनती हैं। अलग-अलग कैलेंडरों में कुछ दिनों के रंग अलग भी हो सकते हैं। रंग पहनना आपकी खुशी की बात है, ज़रूरी नहीं। नवरात्रि का असली मकसद श्रद्धा और भक्ति है।
कैलेंडर के अनुसार नवरात्रि के रंग
| दिन | तिथि (दिनांक) | तिथि (पंचांग) | देवी | दिन का रंग |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 11 अक्टूबर 2026 | प्रतिपदा | शैलपुत्री | नारंगी |
| 2 | 12 अक्टूबर 2026 | द्वितीया | ब्रह्मचारिणी | सफ़ेद |
| 3 | 13 अक्टूबर 2026 | तृतीया | चंद्रघंटा | लाल |
| 4 | 14 अक्टूबर 2026 | चतुर्थी | कूष्मांडा | गहरा नीला |
| 5 | 15 अक्टूबर 2026 | पंचमी | स्कंदमाता | पीला |
| 6 | 16 अक्टूबर 2026 | षष्ठी | कात्यायनी | हरा |
| 7 | 17 अक्टूबर 2026 | सप्तमी | कालरात्रि | स्लेटी |
| 8 | 18 अक्टूबर 2026 | अष्टमी | महागौरी | बैंगनी |
| 9 | 19 अक्टूबर 2026 | नवमी | सिद्धिदात्री | मोरपंखी हरा |
| 10 | 20 अक्टूबर 2026 | दशमी | विजयादशमी | — |
निष्कर्ष
नवरात्रि 2026 आस्था, परंपरा और उत्सव का सुंदर संगम है। चाहे आप पूरे नौ दिन व्रत रखें, रंगों के कपड़े पहनें या सिर्फ़ माँ का नाम लेकर दिन की शुरुआत करें, सबसे ज़रूरी है सच्चे मन से की गई भक्ति। आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!

