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	<title>देश Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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		<title>भारत के वे स्थान जहां दशहरा पर होती है रावण की पूजा!!!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 05:56:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>दशहरा यानी विजयादशमी एक ऐसा दिन जब वैसे तो पूरे देश में रावण का दहन किया जाता रहा है, लेकिन देश के कुछ हिस्से ऐसे भी है जहाँ इस दिन रावण की पूजा करने का रिवाज़ हैं। ऐसा करने के पीछे उनके पास अपनी अपनी मान्यताएं हैं। मंदसौर, मध्य प्रदेश मंदसौर मध्य प्रदेश-राजस्थान की सीमा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दशहरा यानी विजयादशमी एक ऐसा दिन जब वैसे तो पूरे देश में रावण का दहन किया जाता रहा है, लेकिन देश के कुछ हिस्से ऐसे भी है जहाँ इस दिन रावण की पूजा करने का रिवाज़ हैं। ऐसा करने के पीछे उनके पास अपनी अपनी मान्यताएं हैं।</p>
<p><b><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-15362" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/raavan.jpg?resize=500%2C280&#038;ssl=1" alt="" width="500" height="280" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/raavan.jpg?w=500&amp;ssl=1 500w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/raavan.jpg?resize=300%2C168&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 500px) 100vw, 500px" /></b></p>
<h3><b>मंदसौर, मध्य प्रदेश</b></h3>
<p>मंदसौर मध्य प्रदेश-राजस्थान की सीमा पर स्थित है। रामायण के अनुसार, मंदसौर रावण की पत्नी मंडोडरी का पैतृक घर था और इसीलिए रावण को मंदसौर के लोग दामाद मानते है। इसलिए वहाँ रावण की पूजा और सम्मान अद्वितीय ज्ञानी और भगवान शिव के भक्त के रूप में होती है । इस जगह में रावण की 35 फुट लंबी मूर्ति है। दशहरा पर, गाँव के लोग रावण की मौत पर शोक करते हैं और प्रार्थना करते हैं।</p>
<h3><b>बिसरख, उत्तर प्रदेश</b></h3>
<p>बिसरख को अपना नाम ऋषि विश्वरा के नाम पर मिला है &#8211; जो दानव राजा रावण के पिता थे । बिसरख में रावण का जन्म हुआ था और उन्हें यहां महा-ब्राह्मण माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि विश्वा ने बिसरख में एक स्वयंभू (स्वयं प्रकट) शिव लिंग की खोज की थी और तब से स्थानीय लोग ऋषि विश्वरा और रावण के सम्मान के रूप में उनकी पूजा करते है। बिसरख में, लोग नवरात्रि उत्सव के दौरान रावण की मृत आत्मा के लिए यज्ञ और शांति प्रार्थना करते हैं।</p>
<h3><strong>गडचिरोली, महाराष्ट्र</strong></h3>
<p>महाराष्ट्र गडचिरोली की गोंड जनजाति रावण और उनके पुत्र मेघनादा की देवताओं के रूप में पूजा करती हैं। गोंड जनजातियों के अनुसार, रावण को वाल्मीकि रामायण में कभी भी बुरा नहीं दिखाया गया था और ऋषि वाल्मीकि ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि रावण ने कुछ भी गलत नहीं किया था और ना ही सीता को बदनाम किया था । यह तुलसीदास रामायण में ही था कि रावण एक क्रूर और शैतानी राजा था।</p>
<h3><strong>काँगड़ा, हिमाचल प्रदेश</strong></h3>
<p>हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा के खूबसूरत जिले में भी रावण दहन की प्रथा को मनाया नहीं जाता । पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण ने भगवान शिव को बैजनाथ, कांगड़ा में ही अपनी भक्ति और तपस्या के साथ प्रसन्न किया था । ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने उन्हें यहां ही वरदान दिया था। इसीलिए यहाँ रावण को भगवान शिव के महान भक्त के रूप में सम्मानित किया जाता है।</p>
<h3><strong>मांड्या और कोलर, कर्नाटका</strong></h3>
<p>भगवान शिव के कई मंदिर हैं जहां रावण की भगवान शिव के लिए उनकी अतुलनीय भक्ति के लिए पूजा की जाती है। फसल के त्यौहार के दौरान कर्नाटक के कोलार जिले के लोगों द्वारा लंकादिपति रावण की पूजा की जाती है। एक जुलूस में, भगवान शिव की मूर्ति के साथ, रावण के दस-सर वाले (दशानन) और बीस सशस्त्र मूर्तियों की भी स्थानीय लोगों द्वारा पूजा की जाती है। इसी प्रकार, कर्नाटक के मंड्या जिले में मलावल्ली तालुका में, भगवान शिव के लिए अपने समर्पण का सम्मान करने के लिए हिंदू भक्तों द्वारा रावण के एक मंदिर में उनकी पूजा की जाती है।</p>
<h3><strong>जोधपुर, राजस्थान</strong></h3>
<p>कहा जाता है कि राजस्थान के जोधपुर के मौदगील में ब्राह्मण रावण के विवाह के दौरान लंका से आए थे। मंडोडरी और रावण का विवाह किण चनवारी में हुआ था। जोधपुर के मौडिल ब्राह्मणों द्वारा हिंदू अनुष्ठानों के अनुसार लंकेश्वर रावण की प्रतिमाओं को जलाने के बजाय, श्राध और पिंड दान किया जाता है क्यूंकि वह खुद को उनके वंशजों मानते है ।</p>
<h3 data-start="560" data-end="607"><strong>कर्नाटक – कोलार </strong></h3>
<p data-start="610" data-end="684">कर्नाटक में कुछ ग्रामीण इलाकों में दशहरा पर <strong data-start="654" data-end="670">रावण की पूजा</strong> की जाती है। यहाँ के लोग रावण को <strong data-start="707" data-end="736">विद्या और ज्ञान का प्रतीक</strong> मानते हैं। रावण के प्रतीक पुतले को सजाया जाता है और उसे देवी-देवताओं के समक्ष <strong data-start="819" data-end="835">सम्मानपूर्वक</strong> स्थापित किया जाता है। यह परंपरा यह सिखाती है कि <strong data-start="888" data-end="927">सभी पक्षों का सम्मान करना आवश्यक है</strong>, भले ही वह दुष्ट पात्र हो।</p>
<h3 data-start="963" data-end="1008"><strong>महाराष्ट्र – नागपुर </strong></h3>
<p data-start="1011" data-end="1099">महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में रावण को <strong data-start="1049" data-end="1074">योग और विद्या का गुरु</strong> मानकर पूजा की जाती है। लोग मानते हैं कि रावण ने महर्षि ऋषियों से अनेक ज्ञान प्राप्त किया था। इसलिए, रावण का सम्मान कर उसका <strong data-start="1206" data-end="1224">ज्ञान और वीरता</strong> याद किया जाता है।</p>
<h3 data-start="1561" data-end="1596"><strong>उत्तराखंड </strong></h3>
<p data-start="1599" data-end="1681">उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में दशहरा पर रावण के <strong data-start="1648" data-end="1665">सांकेतिक पूजन</strong> की परंपरा है। यह परंपरा स्थानीय देवी-देवताओं और पुरानी कथाओं से जुड़ी हुई है। ग्रामीण मानते हैं कि रावण की पूजा करने से <strong data-start="1794" data-end="1861">शत्रु नष्ट नहीं होते बल्कि उनके साथ बुद्धिमानी से निपटना आता है</strong>।</p>
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		<title>विजयादशमी : दशानन रावण के जीवन से सीखने योग्य बातें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 05:27:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आज विजयादशमी है। राम ने रावण को मारकर धरती को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। रावण अधर्म का प्रतीक था, पापी था, लेकिन ज्ञानी भी था। जिस तरह हम भगवान राम के जीवन की घटनाओं से सीखते हैं कि हमें अपनी जिंदगी में क्या करना चाहिए, वैसे ही रावण का जीवन सिखाता है कि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>आज विजयादशमी है। राम ने रावण को मारकर धरती को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। रावण अधर्म का प्रतीक था, पापी था, लेकिन ज्ञानी भी था। जिस तरह हम भगवान राम के जीवन की घटनाओं से सीखते हैं कि हमें अपनी जिंदगी में क्या करना चाहिए, वैसे ही रावण का जीवन सिखाता है कि हमें क्या-क्या नहीं करना चाहिए।</p>
<p>तो आज दशानन रावण के जीवन की 5 कहानियों से सीखें कि क्या गलतियां हमें नहीं करनी चाहिए।</p>
<h2>मन की शांति सबसे बड़ा सुख है</h2>
<p>रावण का मन शांत नहीं रहता था। संतुष्टि का भाव उसमें था ही नहीं। तीनों लोकों को जीतने के बाद भी रावण के मन में एक अशांति थी कि इतना शक्तिशाली होने के बाद भी कोई उसकी पूजा नहीं करता। नतीजतन उसने ऋषि-मुनियों को मारना शुरू कर दिया।</p>
<p>सारी दुनिया जीतने के बाद भी मन में एक असंतुष्टि थी कि लोग उसकी पूजा क्यों नहीं करते। जब रावण के अत्याचार बढ़ने लगे तो ऋषियों ने तप शुरू किए। यज्ञ और ज्यादा होने लगे। यज्ञ होने लगे तो रावण ने अपने अत्याचार और बढ़ा दिए। दुनियाभर में रावण का आतंक हो गया।</p>
<p>पूरी धरती परेशान हो गई। तब भगवान को उसे मारने के लिए अवतार लेना पड़ा। ये असंतुष्टि उसे पापके रास्ते पर ले गई और उसे अंतत: इसी असंतुष्टि के कारण मरना पड़ा। इसलिए हमेशा मन में संतुष्टि का भाव रखें। जो हमारे पास है, उसे स्वीकार करें।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone wp-image-29307 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?resize=512%2C336&#038;ssl=1" alt="" width="512" height="336" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?w=512&amp;ssl=1 512w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?resize=300%2C197&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 512px) 100vw, 512px" /></p>
<h2>बिना किसी की शक्ति का अनुमान किए चुनौती ना दें</h2>
<p>रावण की नजर में सिर्फ वो खुद ही महान योद्धा था। वो हर किसी को युद्ध की चुनौती देता रहता था। ऐसे ही एक बार उसे वानरों के राज किष्किंधा के बारे में पता चला। वहां का राजा बाली काफी शक्तिशाली है ऐसा उसे पता चला। रावण ने बिना किसी विलंब के किष्किंधा का रूख किया।</p>
<p>रावण ने बाली को ललकारा, उस समय बाली अपने महल में नहीं था। उसका छोटा भाई सुग्रीव मौजूद था। सुग्रीव ने रावण से पूछा कि तुम कौन हो और क्यों बाली को पुकार रहे हो तो रावण ने जवाब दिया कि मैं बाली से युद्ध करना चाहता हूं या तो वो मुझसे युद्ध करे या फिर अपनी हार स्वीकार कर मेरी दासता स्वीकार करे।</p>
<p>सुग्रीव को रावण की इस बात पर हंसी आ गई। उसने कहा- महाराज बाली अभी संध्यापूजन के लिए समुद्र तट पर गए हैं।<br />
कुछ ही देर में वो यहां चार समद्रों की परिक्रमा करके लौटेंगे। तब तुम्हारी इच्छा वैसे ही पूरी हो जाएगी।</p>
<p>रावण से रहा नहीं गया। उसने जैसे ही सुना कि बाली अभी पूजा करने समुद्र तट पर गया है, वो समुद्र किनारे पहुंच गया। बाली उस समय सूर्य को अर्घ्य दे रहा था, रावण ने पीछे से वार करने की कोशिश की, लेकिन बाली ने उसे पकड़ कर अपनी बाजू में दबा लिया। रावण छूटने की कोशिश करता रहा, लेकिन नहीं छूट पाया।</p>
<p>बाली ने चार समुद्र की परिक्रमा उसे अपनी कांख में दबाकर की। तब तक रावण को अपनी गलती का अहसास हो गया था कि उसने बिना बाली की ताकत का अंदाजा लगाए उस पर हमला करने की गलती कर दी।</p>
<p>जैसे ही बाली ने उसे छोड़कर पूछा कि बता तू क्या चाहता है, तो युद्ध करने की इच्छा से आए रावण ने बाली को मित्रता का प्रस्ताव दिया। रावण की ये गलती सिखाती है कि किसी की ताकत और कमजोरी को समझे बिना उसे चुनौती नहीं देनी चाहिए। इससे हमारी हार ही होती है।</p>
<h2>अगर सही सलाह मिले तो उसे स्वीकार करें</h2>
<p>वाल्मीकि रामायण का एक प्रसंग है। जब राम से शादी करने की जिद कर रही शूर्पणखा के नाक लक्ष्मण ने काट दिए तो वो अपने भाई रावण के पास पहुंची। उसने रावण को बताया कि उसके राज्य में कोई संन्यासी है, जो उसके लिए घातक हो सकता है। रावण तुरंत अपने रथ पर बैठकर निकल गया। वो सीधा अपने मामा मारिच के पास पहुंचा।</p>
<p>उसने मारिच से कहा कि उसके राज्य में कोई दो संन्यासी घुस आए हैं, उन्हें मारना है। मारिच एक बार पहले राम से युद्ध कर चुका था, राम ने घास के तिनके को तीर बनाकर छोड़ा &#8216; और मारिच समुद्र पार जाकर गिरा था। मारिच ने रावण को समझाया कि राम से युद्ध करना उसके हित में नहीं है।</p>
<p>वो लौट जाए। रावण मान गया। वो फिर लौटकर अपने महल में आ गया। शूर्पणखा को जब पता चला कि रावण ने राम से बदला लेने का विचार त्याग दिया है तो उसने फिर जाकर रावण को बोलै कि वन में जो दो संन्यासी हैं, उनके साथ एक बड़ी सुंदर सी स्त्री भी है, जिसे रावण के पास होना चाहिए क्योंकि उसके जैसी कोई और सुंदर महिला संसार में नहीं है।</p>
<p>सीता की सुंदरता के बारे में सुनकर रावण ने सीता के हरण की योजना बनाई। वो फिर मारिच के पास पहुंचा। मारिच ने उसे फिर वही सलाह दी कि राम कोई सामान्य संन्यासी नहीं है, अवतारी पुरुष हैं।</p>
<p>उनसे दुश्मनी ना लें, लेकिन इस बार रावण नहीं माना और मारिच से कहा कि अगर वो सीता के हरण में उसकी सहायता नहीं करेगा तो उसे मार दिया जाएगा। मारिच ने सोचा, रावण के हाथ से मरने से बेहतर है, राम के हाथों मारा जाऊं। फिर मारिच ने स्वर्ण मृग बनने की योजना बनाई।</p>
<p>ये सीता हरण ही रावण के पूरे वंश का नाश का कारण बन गया। इस पूरे प्रसंग से सीख सकते हैं कि अगर कोई सही सलाह मिले तो उसे मानें, अपनी जिद और लालच में उस सलाह को ना ठुकराएं। ये आपके लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता है।</p>
<h2>रिश्ते अधिकार से नहीं चलते, समर्पण से टिकते हैं</h2>
<p>वाल्मीकि रामायण कहती है, रावण के पास पुष्पक विमान तो था ही, जो उसने अपने भाई कुबेर से छीना था। इसके साथ ही रावण के पास एक दिव्य रथ भी था। रावण ने तीनों लोकों को इसी रथ पर बैठकर जीता था।</p>
<p>रावण जहां भी जाता वहां से राजकूमारियों, रानियों और अन्य सुंदर औरतों को उठाकर अपने महल में ले आता था। रावण के महल में करीब 10 हजार ऐसी औरतें थीं, जिन्हें वो अलग-अलग राज्यों से अपहरण करके लाया था।</p>
<p>रावण एक बार ऐसे ही लंका में सैंकडों महिलाओं को जीत कर ले आया। तब विभीषण ने रावण को बताया कि तुम अपने बल के अभिमान में कितनी औरतों को उनके पति और पिता को मार कर उठा लाए। तुम्हारे इन्हीं पापकर्मों का परिणाम हमारे परिवार को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p>रावण ने पूछा &#8211; ऐसा क्या हो गया जो तुम मुझसे इस तरह की बातें कर रहे हो। विभीषण ने जवाब दिया &#8211; तुम विश्वविजय के लिए निकले थे, दूसरे राजाओं के परिवार की औरतें लाने में व्यस्त थे, तब एक राक्षस ने हमारे राज्य पर हमला कर दिया। वो हमारी मौसी की बेटी, हमारी बहन को उठाकर ले गया। तुम दुनिया के साथ जो कर रहे थे. वो हमारे ही परिवार के साथ घट गया।</p>
<p>रावण को अपनी गलती का एहसास हुआ। वो अपनी बहन को बचाने निकला, लेकिन तब तक उसकी बहन ने उस राक्षस को अपना पति मान कर शादी कर ली।</p>
<p>ये कहानी सिखाती है कि हम दुनिया को जो देते हैं, वो ही लौटकर हमारे पास आता है। इसलिए, संसार में रहकर अच्छे काम करें। आप अच्छा करेंगे तो आपके साथ भी अच्छा ही होगा।</p>
<h2>आप दुनिया के साथ जो करते हैं, वो आपके साथ भी होगा</h2>
<p>रावण परम शिव भक्त था। भगवान शिव को उसने ऐसा प्रसन्न किया कि खुद भगवान शिव ने घोषित किया कि रावण उनका परमभक्त है। रावण ने खुद को शिव का सबसे बड़ा भक्त मान लिया। इस बात का उसे अहंकार हो गया।</p>
<p>एक दिन जब रावण सोने की लंका में बैठा था, तो उसे ख्याल आया कि उसके आराध्य भगवान शिव कैलाश पर्वत पर रहते हैं, जहां ना कोई भवन है ना कोई महल। रावण ने तय किया कि वो भगवान शिव को लंका में लेकर आएगा, ताकि वो उनके पास भी रह सके और भगवान भी सोने की लंका का वैभव भोग सके। रावण कैलाश पर्वत की ओर चल दिया।</p>
<p>उसने भगवान शिव को लंका ले जाने के लिए कैलाश पर्वत को उठाने की कोशिश की। एक हाथ कैलाश पर्वत के नीचे लगाया और उठाने लगा तो भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया। रावण का हाथ दब गया। वो कुछ कर नहीं पा रहा था।</p>
<p>तब उसने शिवतांडव स्तोत्र की रचना कर शिव को प्रसन्न किया। भगवान ने उसे समझाया कि वो अपनी भक्ति का अहंकार ना करे। अहंकार ही उसके विनाश का कारण हो सकता है। रावण ने रिश्तों में समर्पण से ज्यादा अधिकार पर जोर दिया, इसलिए उसे लगभग हर रिश्ते से हाथ धोना पड़ा।</p>
<p>भाई विभीषण छोड़ गया, कुंभकर्ण मारा गया, सारे बेटे मारेगए,पत्नियां अकेली रह गईं। रिश्तों में अधिकार की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि समर्पण रिश्तों को बचाता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें :-</strong></p>
<ul>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/celebrate-vijayadashami-importance-10-heads-ravana-hindi/">क्यों मनाते हैं विजयादशमी, जाने रावण के 10 सिरों का अर्थ !!</a></strong></li>
</ul>
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		<title>महात्मा गांधी का एक विचार दिला सकता है मनचाही सफलता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 04:00:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Person]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
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		<category><![CDATA[ahimsa day]]></category>
		<category><![CDATA[ahimsa diwas]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महात्मा गांधी जी को हम बापू के नाम से जानते हैं। उनका पूरा जीवन अपने आप में एक स्कूल की तरह है जिसे अपना कर आप अपने जीवन में नई ऊंचाइयां पा सकते हैं। गांधी जी ने अपने अनुभव पर कई किताबें लिखीं जो आज हमें जीवन की नई राह दिखाती हैं। उनकी सोच हमें [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महात्मा गांधी जी को हम बापू के नाम से जानते हैं। उनका पूरा जीवन अपने आप में एक स्कूल की तरह है जिसे अपना कर आप अपने जीवन में नई ऊंचाइयां पा सकते हैं। गांधी जी ने अपने अनुभव पर <a href="https://fundabook.com/recommends/mahatma-gandhi-my-experiments-with-truth-paper-back/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">कई किताबें</a> लिखीं जो आज हमें जीवन की नई राह दिखाती हैं।</p>
<p>उनकी सोच हमें राह दिखाती है और उनके विचार आज भी उतने ही सार्थक हैं जितने कि वह तब थे। यदि उनके विचारों पर अमल किया जाए तो हम जीवन में कई तरह से आनंद पा सकते हैं।</p>
<h3><strong>ऐसे जिएं जैसे आपको कल मरना है, सीखें ऐसे कि आपको हमेशा जीवित रहना है</strong></h3>
<p>गांधी जी का यह विचार हमें लगातार सीखने की ओर प्रेरित करता है। कई बार हम यह सोचकर कुछ नया नहीं सीखते कि अब सीख कर क्या करना है। हमें जीना ही कितना है मगर गांधी जी के अनुसार सीखने की कोई उम्र नहीं होती जब जागो तब सवेरा।</p>
<h3><strong>जो समय बचाते हैं वे धन को बचाते। बचाया धन</strong><strong>, </strong><strong>कमाए धन के समान ही महत्वपूर्ण है</strong></h3>
<p>हममें से कई लोग हैं जो अक्सर यह कहते हैं कि क्या करें टाइम ही नहीं मिलता मगर भगवान ने सभी को 24 घंटे ही दिए हैं किसी को कम या ज्यादा नहीं तो फिर कोई और क्या कर सकता है तो हम क्यों नहीं। क्या हममें काबिलियत नहीं है।</p>
<p>कुछ अलग से करने की इच्छा नहीं है। इसका कारण टाइम मैनेजमैंट का न होना है। यदि हम लगातार अपना समय बचाएं, अपने समय को अनावश्यक रूप से व्यर्थ न करके उसका सदुपयोग करें तो हम अपने साथ-साथ दूसरों का जीवन भी संवार सकते हैं।</p>
<div class="inpost-ad"><a href="https://fundabook.com/recommends/mahatma-gandhi-my-experiments-with-truth-paper-back/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">महात्मा गांधी की किताब &#8220;माय एक्सपेरीमेंट्स विद ट्रुथ&#8221; केवल 88 रुपए में खरीदें</a></div>
<h3><strong>आंख के बदले आंख पूरे विश्व को अंधा बना देगी</strong></h3>
<p>आज के समय हर कोई किसी दूसरे की तरक्की नहीं देख सकता। हर समय एक दूसरे की टांग खींचने पर लगे रहते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी की उन्नति में बाधा बनता है तो कोई दूसरा व्यक्ति उसकी उन्नति में बाधा बन जाता है।</p>
<p>जैसा हम दूसरे के लिए करते हैं वैसा ही हम अपने लिए पाते हैं इसलिए अपनी सोच को सदैव सकारात्मक रखें। बदला लेने की भावना अपने मन पर हावी न होने दें ताकि खुद भी तरक्की कर सकें और दूसरों की तरक्की पर हमें मलाल न हो। &#8211; प्रसन्नता ही एक मात्र ऐसा इत्र है जिसे आप दूसरे पर डालते हैं तो कुछ बूंद आप पर भी पड़ती है।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/some-precious-words-on-gandhi-jayanti/">गांधी जयंती पर कुछ अनमोल वचन</a> </div></strong></p>
<h3><strong>व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से नहीं उसके चरित्र से होती है</strong></h3>
<p>कई बार हम बाहरी आवरण को देख कर किसी की तरफ आकर्षित हो जाते हैं मगर जब हम उसके करीब जाते हैं तो हम सच्चाई से रू-ब-रू हो पाते हैं।</p>
<p>किसी व्यक्ति के कपड़ों से हम उसके व्यक्तित्व को नहीं समझ सकते।वह उसके व्यक्तित्वका आवरण मात्र है। उसका व्यक्तित्व उसके चरित्र से उजागर होता है।</p>
<h3><strong>आप जो कुछ भी करते हैं वह कम महत्वपूर्ण हो सकता है मगर सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप कुछ करें</strong></h3>
<p>कई बार किसी कार्य को करने से पहले ऐसे विचार हमारे दिमाग में चलते रहते हैं कि &#8220;वह जरूरी नहीं है&#8221; या &#8220;वह कम महत्वपूर्ण है&#8221;। ऐसे में हम उस कार्य को शुरू ही नहीं कर पाते।</p>
<p>यदि हम किसी कार्य को करेंगे ही नहीं तो कैसे पता चलेगा कि वह महत्वपूर्ण है या नहीं। कार्य महत्वपूर्ण है या नहीं यह जरूरी नहीं है कार्य का होना जरूरी है।</p>
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<h3><strong>गांधी जयंती 2 अक्तूबर</strong></h3>
<p>गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था जिनका जन्म 2 अक्तूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। इस दिन को सारा देश गांधी जयंती के रूप में मनाता है। अहिंसा के पथ पर चल कर देश को अंग्रेजों की दास्ता से मुक्ति दिलाने वाले गांधी जी ने पूरी दुनिया को अपने विचारों से प्रभावित किया था। । अहिंसा केरास्ते पर चलने की बात गांधीजी |ने आजादी की लड़ाई में शामिल हर शख्स से कही थी। उन्होंने त्याग को अपने जीवन में सदा अपनाए रखा और सादगी भरे जीवन के साथ-साथ कम से कम चीजों से अपना जीवनयापन किया।</p>
<h4><strong>गांधी जी के तीन महत्वपूर्ण सूत्र</strong></h4>
<p><strong>पहला</strong> : सामाजिक गंदगी को दूर करने के लिए झाड़ का सहारा।<br />
<strong>दूसरा</strong> : सामूहिक प्रार्थना को बल देना जिससे एकजुट होकर व्यक्ति जात-पात और धर्म की बंदिशों को दरकिनार कर प्रार्थना करे।<br />
<strong>तीसरा</strong>: चरखा जोआत्मनिर्भर और एकता का प्रतीक माना जाने लगा था।</p>
<p>हंसता हुआ चेहरा हर किसी को पसंद होता है। हर हंसने वाले चेहरे के साथ दुनिया हंसती है। यदि आप अपनी छवि को हमेशा अच्छा बनाए रखना चाहते हैं, सदैव प्रसन्न रहकर अपने आसपास का माहौल खुशनुमा बना सकते हैं।</p>
</div>
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		<title>क्यों मनाते हैं विजयादशमी, जाने रावण के 10 सिरों का अर्थ !!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 03:56:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[human life]]></category>
		<category><![CDATA[life]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Traditions in India]]></category>
		<category><![CDATA[Vijayadashami]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इस पर्व को भगवती &#8216;विजया&#8217; के नाम पर भी &#8216;विजयादशमी&#8216; कहते हैं। इस दिन भगवान रामचंद्र चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण का वध कर अयोध्या पहुँचे थे। इसलिए भी इस पर्व को &#8216;विजयादशमी&#8217; कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय &#8216;विजय&#8217; नामक काल [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>इस पर्व को भगवती &#8216;विजया&#8217; के नाम पर भी &#8216;<strong>विजयादशमी</strong>&#8216; कहते हैं। इस दिन भगवान रामचंद्र चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण का वध कर अयोध्या पहुँचे थे। इसलिए भी इस पर्व को &#8216;विजयादशमी&#8217; कहा जाता है।</p>
<p>ऐसा माना जाता है कि <strong>आश्विन शुक्ल दशमी</strong> को तारा उदय होने के समय &#8216;विजय&#8217; नामक काल होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है यह भी यह कारण है कि इसे विजयादशमी कहते हैं।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone wp-image-29307 " src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?resize=696%2C457&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="457" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?w=512&amp;ssl=1 512w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?resize=300%2C197&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p>पौराणिक कथा के अनुसार, <strong>रावण</strong> ने देवी सीता का हरण कर लिया था। इस दौरान देवी सीता की रक्षा के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने अधर्म और अन्यायी रावण को युद्ध के लिए ललकारा। <strong>मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम</strong> और लंकापति रावण के बीच 10 दिनों तक युद्ध चला।</p>
<p>भगवान श्री राम ने आश्विन शुक्ल की दशमी तिथि को मां दुर्गा से प्राप्त <strong>दिव्यास्त्र</strong> की मदद से रावण का वध कर दिया था। श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी और यह दशमी तिथि भी थी, ऐसे में इस दिन को विजयदशमी कहा जाता है।</p>
<h2>विजया दशमी का अर्थ</h2>
<p><strong>विजयादशमी</strong> भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग कारणों से अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है। कुछ क्षेत्रों में, यह भैंस राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा की जीत के उत्सव के साथ दुर्गा पूजा के अंत का प्रतीक है।</p>
<p>उत्तरी, मध्य और कुछ पश्चिमी राज्यों में इसे लोकप्रिय रूप से <strong>दशहरा</strong> कहा जाता है, यह <strong>रामलीला</strong> के अंत का प्रतीक है। भगवान राम की रावण पर विजय के लिए उत्साह है।</p>
<h2>महत्व</h2>
<p>इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के असुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। वहीं इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था।</p>
<p>इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग शस्त्र पूजन के साथ ही वाहन पूजन भी भी करतें हैं। वहीं आज के दिन से किसी भी नए कार्य की शुरुआत करना भी शुभ माना जाता है।</p>
<h2>रावण के 10 सिरों का महत्व</h2>
<p>रावण ने ब्रह्मा के लिए कई वर्षों तक गहन तपस्या की थी l अपनी तपस्या के दौरान, रावण ने <a href="https://fundabook.com/secret-flower-related-lord-brahma-people-yearn-see-hindi/"><strong>ब्रह्मा</strong> </a>को प्रसन्न करने के लिए 10 बार अपने सिर को काट दिया। हर बार जब वह अपने सिर को काटता था तो एक नया सिर प्रकट हो जाता था l इस प्रकार वह अपनी तपस्या जारी रखने में सक्षम हो गया।</p>
<p>अंत में, ब्रह्मा, रावण की तपस्या से प्रसन्न हुए और 10 वें सिर कटने के बाद प्रकट हुए और उन्हें वरदान मांगने को कहा l इस पर रावण ने <strong>अमरता का वरदान</strong> माँगा पर ब्रह्मा ने निश्चित रूप से मना कर दिया, लेकिन उन्हें अमरता का आकाशीय <strong>अमृत</strong> प्रदान किया, जिसे हम सभी जानते हैं कि उनके नाभि के तहत संग्रहीत किया गया था।</p>
<p>रावण के दस सिर दस कमजोरियों या दस पापों का प्रतीक हैं जिनसे मनुष्य को छुटकारा पाना चाहिए। मनुष्य के दस बुरे भाव या गुण जिन्हें रावण के दस सिरों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, वे इस प्रकार हो सकते हैं।</p>
<ol>
<li>काम (वासना)</li>
<li>क्रोध (क्रोध)</li>
<li>मोह (आकर्षण)</li>
<li>लोभ (लालच)</li>
<li>मद (गर्व)</li>
<li>मत्सर (ईर्ष्या)</li>
<li>स्वर्थ (स्वार्थ)</li>
<li>अन्याय (अन्याय)</li>
<li>अमानवीयता (क्रूरता)</li>
<li>अहंकार (अहंकार)<br />
<figure></figure>
</li>
</ol>
<p><strong>यह भी पढ़ें :-</strong></p>
<p><strong><a href="https://fundabook.com/where-ravana-is-worshipped-at-these-places-in-india/">भारत के वे स्थान जहां दशहरा पर होती है रावण की पूजा!!!</a></strong></p>
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		<title>महात्मा गांधी जी के जीवन से जुड़े कुछ स्थान</title>
		<link>https://fundabook.com/some-places-associated-with-mahatma-gandhis-life/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 02:14:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[human life]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[life]]></category>
		<category><![CDATA[महात्मा गांधी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचंद गांधी का जन्‍म दिन 2 अक्‍टूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। आज हम आपको महात्मा गांधी जी के जीवन से जुड़े कुछ सथलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां से गांधी जी के विचारों, [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत के राष्ट्रपिता <a href="https://fundabook.com/recommends/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8-2/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मोहनदास कर्मचंद</a> गांधी का जन्‍म दिन 2 अक्‍टूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को <strong>विश्व अहिंसा दिवस</strong> के रूप में भी मनाया जाता है।</p>
<p>आज हम आपको महात्मा गांधी जी के जीवन से जुड़े कुछ सथलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां से गांधी जी के विचारों, उनके आदर्शों और सिद्धांतों को अंकुर मिला था।</p>
<h2><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-14639" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/mahtma-gandhi.jpg?resize=500%2C417&#038;ssl=1" alt="" width="500" height="417" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/mahtma-gandhi.jpg?w=500&amp;ssl=1 500w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/mahtma-gandhi.jpg?resize=300%2C250&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /></h2>
<h2>पोरबंदर</h2>
<p>कर्मचंद गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था। यह गांव गुजरात में स्थिति हैं। पोरबंदर में कर्मचंद गांधी जी के बचपन से जुड़ी बहुत सी चीज़े हैं, आज भी यहां पर उनका पैतृक घर है। इसके अलावा पोरबंदर में कीर्ति मंदिर भी एक शानदार जगह है।</p>
<h2>राजकोट (गुजरात)</h2>
<p data-start="838" data-end="896">गांधी जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में प्राप्त की। यहाँ उनके पिता करमचंद गांधी दीवान थे। राजकोट का यह दौर गांधी जी के बचपन और संस्कारों का आधार बना।</p>
<h2 data-start="838" data-end="896">लंदन (इंग्लैंड)</h2>
<p data-start="1055" data-end="1108">1888 में गांधी जी बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए लंदन गए। उन्होंने यहाँ से कानून की पढ़ाई पूरी की और अंग्रेज़ी संस्कृति को नज़दीक से देखा। यह अनुभव उनके जीवन में अनुशासन और दृढ़ संकल्प का कारण बना।</p>
<h2>अहमदाबाद</h2>
<p>अहमदाबाद भी ऐसे ऐतिहासिक स्‍थलों में से एक है, यहां<a href="https://fundabook.com/some-places-associated-with-mahatma-gandhis-life/"> गांधी जी के जीवन </a>का काफी जुड़ाव रहा है। अहमदाबाद में <strong>साबरमती नदी</strong> के किनारे स्थित गांधी जी का आश्रम है। इस आश्रम को <strong>साबरमती आश्रम</strong> के नाम से भी पुकारते हैं।। यहीं से ही गांधी जी ने<strong> दांडी मार्च</strong> की शुरूआत की थी।</p>
<h2>दांडी</h2>
<p>दांडी गांव भी राष्‍ट्रपि‍ता महात्‍मा गांधी जी के जीवन काल को बयां करने वाले मुख्‍य स्‍थानों में से एक है। आज दांडी अरब सागर के तट पर स्थित इस जगह से ही नमक सत्याग्रह अपनी परिणति तक पहुंचा।</p>
<h2>दक्षिण अफ्रीका</h2>
<p data-start="1310" data-end="1387">1893 में गांधी जी दक्षिण अफ्रीका गए जहाँ उन्हें नस्लभेद का सामना करना पड़ा। <strong data-start="1390" data-end="1423">पिएटरमैरिट्जबर्ग रेलवे स्टेशन</strong> की घटना, जहाँ उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया था, ने उनके जीवन को बदल दिया। यहीं से उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के प्रयोग शुरू किए। दक्षिण अफ्रीका में ही <strong data-start="1585" data-end="1620">फीनिक्स आश्रम और टॉल्सटॉय फार्म</strong> की स्थापना की।</p>
<h2>नई दिल्ली</h2>
<p>दि‍ल्‍ली भी गांधी स्‍मृत‍ि वाले स्‍थानो में से एक है। यहां पर <strong>बिरला हाउस</strong> के रूप में महात्मा गांधी को समर्पित एक <a href="https://fundabook.com/recommends/mahatma-gandhi-autobiography-the-story-of-my-experiments-with-truth/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">ऐत‍िहास‍िक संग्रहालय</a> है। इसके अलावा यहां का प्रस‍िद्ध स्थल राजघाट भी है, यहां पर 1869 को गांधी जी की मृत्‍यु के बाद राजघाट में उनकी समाधि स्थल बनी थी।</p>
<h2>सेवाग्राम आश्रम</h2>
<p data-start="1988" data-end="2056">1936 में गांधी जी ने वर्धा (महाराष्ट्र) में सेवाग्राम आश्रम बसाया। यह स्थान उनकी गतिविधियों का केंद्र बन गया और अनेक स्वतंत्रता सेनानी यहाँ एकत्र होते थे। आज भी यह आश्रम ग्रामीण विकास और शिक्षा का केंद्र है।</p>
<h2>जोहान्सबर्ग</h2>
<p>गांधी जी ने अपनी जिंदगी के 21 साल जोहान्सबर्ग में व्‍यतीत किए थे। यहां पर ही उन्होंने अपनी राजनीतिक विचारधाराओं को पहचाना था। गांधी जी की याद में यहां <a href="https://fundabook.com/recommends/meri-aatamkatha-satya-ke-prayog/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">सत्याग्रह सदन</a> बनाया गया है।</p>
<h2>चंपारण (बिहार)</h2>
<p data-start="2237" data-end="2327">1917 में गांधी जी ने चंपारण में नील की खेती करने वाले किसानों के आंदोलन का नेतृत्व किया। इसे <strong data-start="2334" data-end="2354">चंपारण सत्याग्रह</strong> कहा जाता है और यह भारत में गांधी जी का पहला सफल आंदोलन था। यहाँ से किसानों को अत्याचार से मुक्ति मिली और स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा।</p>
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		<title>गांधी जयंती पर कुछ अनमोल वचन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 00:20:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Gandhi Jayanti]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[mahatma gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[Mohandas Karamchand Gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महात्मा गांधी, जिन्हें हम प्यार से बापू भी कहते हैं, न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नायक थे बल्कि वे मानवता, अहिंसा और सत्य के प्रतीक भी थे। उनका जीवन और उनके विचार आज भी हमारे लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं। महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता हैं। प्रति वर्ष 2 अक्टूबर को उनका जन्म [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महात्मा गांधी, जिन्हें हम प्यार से बापू भी कहते हैं, न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नायक थे बल्कि वे मानवता, अहिंसा और सत्य के प्रतीक भी थे। उनका जीवन और उनके विचार आज भी हमारे लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं। महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता हैं। प्रति वर्ष 2 अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयंती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है। आइये आज याद करते हैं गांधी जी के कुछ अनमोल वचन:</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-14639" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/mahtma-gandhi.jpg?resize=500%2C417&#038;ssl=1" alt="" width="500" height="417" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/mahtma-gandhi.jpg?w=500&amp;ssl=1 500w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/mahtma-gandhi.jpg?resize=300%2C250&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /></p>
<ul>
<li>विश्वास को हमेशा तर्क से तौलना चाहिए। जब विश्वास अंधा हो जाता है तो वो मर जाता है।</li>
<li>विश्वास करना एक गुण है, अविश्वास दुर्बलता कि जननी है।</li>
<li>ताकत दो तरह की होती है। एक जो सज़ा के डर से बनायी जाती है और दूसरी जो प्यार के acts से बनायी जाती है। प्यार वाली ताकत सज़ा के डर से बनायी गयी ताकत से हज़ार गुणा ज्यादा असरदार होती है।</li>
<li>पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे।</li>
<li>परमेश्वर ही सत्य है; यह कहने की बजाय ‘सत्य ही परमेश्वर’ है यह कहना अधिक उपयुक्त है।</li>
</ul>
<ul>
<li>ऐसे जियो जैसे कि तुम कल मरने वाले हो। ऐसे सीखो की तुम हमेशा के लिए जीने वाले हो।</li>
<li>जहाँ प्रेम है वहां जीवन है।</li>
<li>आपको इंसानियत में विश्वास नहीं खोना चाहिए। इंसानियत एक समुन्दर है, यदि समुन्दर में कुछ बूंदे गन्दी होती हैं,तो पूरा समुन्दर गन्दा नहीं हो जाता।</li>
<li>क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है।</li>
<li>मेरा जीवन मेरा सन्देश है।</li>
<li>आँख के बदले में आँख पूरे विश्व को अँधा बना देगी।</li>
<li>सत्य एक विशाल वृक्ष है, उसकी ज्यों-ज्यों सेवा की जाती है, त्यों-त्यों उसमे अनेक फल आते हुए नज़र आते है, उनका अंत ही नहीं होता।</li>
</ul>
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		<title>महात्मा गांधी के जीवन से सीखने योग्य 10 बातें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 00:00:59 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[mahatma gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[महात्मा गांधी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महात्मा गांधी भारत के इतिहास के महान व्यक्तित्व थे। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। महात्मा गांधी ने भारत को ब्रिटिश शासन से आज़ाद करवाने के लिए सत्याग्रह और अहिंसा का सहारा लिया और देश के लोगों को भारत की आज़ादी के लिए प्रेरित किया। वे अंगेजों को यह मनवाने में सफल रहे कि [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महात्मा गांधी भारत के इतिहास के महान व्यक्तित्व थे। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। महात्मा गांधी ने भारत को ब्रिटिश शासन से आज़ाद करवाने के लिए सत्याग्रह और अहिंसा का सहारा लिया और देश के लोगों को भारत की आज़ादी के लिए प्रेरित किया। वे अंगेजों को यह मनवाने में सफल रहे कि भारत पर ब्रिटिश हकूमत मानवता के अधिकार का घोर उल्लंघन थी।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-14639" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/mahtma-gandhi-1.jpg?resize=500%2C417&#038;ssl=1" alt="" width="500" height="417" /></p>
<p>वैसे तो गांधी जी का पूरा जीवन ही अनुकरणीय है, लेकिन हम यहाँ 10 ऐसी चुनिन्दा बातें रख रहे हैं, जो देखने सुनने में बहुत ही साधारण लगती हैं, लेकिन अगर इन पर अमल किया जाए, तो मनुष्य कोई भी मंजिल पा सकता है।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/some-precious-words-on-gandhi-jayanti/">गांधी जयंती पर कुछ अनमोल वचन</a> </div></strong></p>
<h2>&#8220;जो हम सोचते हैं हम वही बन जाते हैं&#8221;</h2>
<p>महात्मा गांधी का मानना था कि हम जो सोचते हैं वही बन जाते हैं। अगर हम यह सोचेंगे कि हम लक्ष्य तक पहुंचने से पहले असफल हो जायेंगे, तो असल जिंदगी में भी वैसा ही होगा।</p>
<p>हमारा मन सकारात्मक और नकारात्मक विचारों से हमेशा भरा रहता है, लेकिन हमें नकारात्मक विचारों को मन से हटा देना चाहिए और सिर्फ सकारात्मक विचारों को मन में रखने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<h2>&#8220;कभी हार ना मानो और लगातार प्रयास करते रहो&#8221;</h2>
<p>महात्मा गांधी जी को अपने जीवन में भारत की आज़ादी के लिए कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करते रहे। इसी तरह हमें भी अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार संघर्ष करना चाहिए।</p>
<div class="inpost-ad">महात्मा गांधी की आत्मकथा &#8220;<a href="https://fundabook.com/recommends/amazon-satya-ke-prayog-paper-back/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">सत्य के साथ मेरे प्रयोग</a>&#8221; महात्मा गांधी जी ने मूलत: गुजराती में लिखी थी। विभिन्न भाषाओं में इसके अनुवाद हुए हैं और यह किताब बेस्ट-सेलर रही है। हिन्दी भाषा में अनुवादित किताब <a href="https://fundabook.com/recommends/amazon-satya-ke-prayog-paper-back/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">सत्य के प्रयोग (Satya Ke Prayog)</a> काफी रोचक व आसान भाषा में है। Amazon से इसे खरीदा जा सकता है।</div>
<h2>&#8220;आपके कर्म आपकी प्राथमिकता को दर्शाते हैं&#8221;</h2>
<p>अगर हमारे जीवन का लक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण है और हम उसको पूरा करने के लिए कोई भी कदम नहीं उठा रहे है, तो हमें अपनी प्राथमिकता के बारे में सोचना होगा। इसका अर्थ यह है कि हम अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर नहीं हैं। आपको अपनी प्राथमिकता अपने लक्ष्य को देनी चाहिए।</p>
<h2>&#8220;लक्ष्य का रास्ता भी लक्ष्य जैसा सुंदर होता है&#8221;</h2>
<p>महात्मा गांधी एक मजबूत चरित्र वाले आदमी थे। वह भारत की आज़ादी के लिए ऐसा कोई भी विधि नहीं अपनाना चाहते थे, जिनसे उनकी अंतरआत्मा को ठेस पहुंचे। इसीलिए उन्होंने भारत को आज़ाद करवाने के लिए हिंसा का सहारा ना लेते हुए, अहिंसा का सहारा लिया था। हमें भी उसी तरह अपने लक्ष्य को पाने के लिए एक नैतिक मार्ग का सहारा लेना चाहिए।</p>
<div class="inpost-ad">कैसा था महात्मा गांधी का जीवन? कैसे वह अति-साधारण जीवन जीने के साथ-2 इतने महान कार्य कर पाये? लेखक Louis Fischer द्वारा अँग्रेजी भाषा में लिखी <a href="https://fundabook.com/recommends/the-life-of-mahatma-gandhi/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">The Life of Mahatma Gandhi</a> किताब काफी कुछ बताती है।</div>
<h2>&#8220;ईमानदारी से “ना” कहना बेइमानी से “हाँ” कहने से कहीं बेहतर है&#8221;</h2>
<p>लोग अक्सर दूसरे लोगों को नाराज़ न करने के लिए “ना” कहने की बजाए “हां” कर देते हैं। वह अक्सर उन लोगों के साथ कई गतिविधियों में बिना अपनी दिलचस्पी के हिस्सा भी लेते रहते हैं।</p>
<p>महात्मा गांधी का कहना था, दूसरों को खुश करने के लिए की गयी &#8220;हां&#8221; आपको कहीं भी नहीं लेकर जाती. दूसरी तरफ यह आपकी जिंदगी को आक्रोश और कुंठा की तरफ ले जाती है।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/some-places-associated-with-mahatma-gandhis-life/">महात्मा गांधी जी के जीवन से जुड़े कुछ स्थान</a> </div></strong></p>
<h2>&#8220;शांति आपको अपने अंदर से ही मिलती है&#8221;</h2>
<p>क्या हम वास्तव में खुद के भीतर शांति को तलाशने की कोशिश करते हैं? ज्यादतर जवाब होगा “नहीं” क्योंकि असल में हम अपनी पूरी जिंदगी शांति को बाहर तलाशते रहते हैं।</p>
<p>जैसे कि हम जिंदगी में पहली बार किसी से मिलते हैं, हम उनके विचारों को इतनी गंभीरता से ले लेते हैं, जिससे हमारा अपने ऊपर से <a href="https://fundabook.com/recommends/mahatma-gandhi-complete-archive-of-thoughts-hindi/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">विश्वास</a> हट जाता है और हम अपने आपको दूसरों की नज़रों से देखने लग जाते हैं। लेकिन असल में हमें बाहरी आवाज़ों को अनसुना कर के अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को सुनना चाहिए।</p>
<h2>&#8220;सदभावना से किया गया काम आपको ख़ुशी देगा&#8221;</h2>
<p>आज की दुनिया में ख़ुशी और सदभावना दुर्लभ होती जा रही है। महात्मा गांधी जी का कहना था कि हमें अपने सदभावना के विचारों से और अपने कार्यों को संतुलित रखना चाहिए। इसी से हमें सच्ची ख़ुशी प्राप्त होगी।</p>
<div class="inpost-ad">लेखक राजेन्द्र अत्री ने महात्मा गांधी के बहुमूल्य विचारों का संग्रह अपनी किताब <a href="https://fundabook.com/recommends/the-life-of-mahatma-gandhi/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">महात्मा गांधी &#8211; सम्पूर्ण विचारों का संग्रह</a> में खूबसूरत ढंग से सँजोया है। इस किताब का अँग्रेजी में ऑनलाइन संस्करण डाउनलोड करने के लिए <a href="https://www.mkgandhi.org/ebks/An-Autobiography.pdf" target="_blank" rel="noopener noreferrer">यहाँ क्लिक करें</a></div>
<h2>&#8220;माफ़ करना मज़बूत लोगों की निशानी है&#8221;</h2>
<p>माफ़ करना बहुत कठिन होता है। वह आदमी जो माफ़ करके जिंदगी में आगे बढ़ता जाता है, वही महान है। हमें दूसरे लोगों की गलतियों को माफ़ कर देना चाहिए, ताकि हम जीवन शांति से व्यतीत कर सकें। माफ़ करना मज़बूत लोगों की निशानी है, ना कि कमज़ोर लोगों की।</p>
<h2>&#8220;मानसिक शक्ति शारीरिक शक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण है&#8221;</h2>
<p>शक्ति के विभिन्न रूप हो सकते हैं। ज़िंदगी में मज़बूत दिमाग का होना मज़बूत शरीर से ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक मज़बूत इच्छाशक्ति वाला आदमी पर्वतों को हिला सकता है, भले ही वह भीम या हनुमान नहीं है। महात्मा गांधी शारीरिक रूप से मज़बूत नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति से ब्रिटिश राज्य को घुटनों के बल झुका दिया था।</p>
<h2>&#8220;अगर आप अपनी जिंदगी में परिवर्तन करना चाहते हैं तो अपने आपको बदलें&#8221;</h2>
<p>गांधी जी ने कहा था कि हम अपने वांछित गुणों को दूसरों में देखने का प्रयास करते हैं। असल में हम सभी अंदर से बहुत अदभुत और सुंदर हैं। जितना हम दूसरों की मदद करेंगे, जवाब में वह भी हमारी मदद करेंगे। हमें सभी से प्यार और दया की भावना रखनी चाहिए। ऐसा करने से हमारे जीवन में अअदभुत बदलाव आएगा।</p>
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		<title>नवरात्रि के नौ दिनों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य</title>
		<link>https://fundabook.com/some-interesting-facts-related-to-the-nine-days-of-navratri/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 11:23:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interesting Facts]]></category>
		<category><![CDATA[OMG!!]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
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		<category><![CDATA[human life]]></category>
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		<category><![CDATA[त्यौहार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8220;नवरात्रि&#8221; हिंदुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है जिसे दुर्गा माँ की पूजा को समर्पित किया जाता है। नवरात्रि के त्यौहार को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, बहुत से लोग तो इन दिनों में नंगे पांव रहते है। आज हम आपके लिए लेकर आये हैं नवरात्रि के नौं दिनों से जुड़े कुछ रोचक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&#8220;नवरात्रि&#8221; हिंदुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है जिसे दुर्गा माँ की पूजा को समर्पित किया जाता है। नवरात्रि के त्यौहार को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, बहुत से लोग तो इन दिनों में नंगे पांव रहते है। आज हम आपके लिए लेकर आये हैं नवरात्रि के नौं दिनों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:-</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-14851" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/navratri.jpg?resize=600%2C450&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="450" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/navratri.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/navratri.jpg?resize=300%2C225&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/navratri.jpg?resize=80%2C60&amp;ssl=1 80w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/navratri.jpg?resize=265%2C198&amp;ssl=1 265w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/navratri.jpg?resize=560%2C420&amp;ssl=1 560w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<ul>
<li>&#8220;<strong>नवरात्रि</strong>&#8221; &#8211; शब्द दो शब्दों का संयोजन है- <strong>नवा (अर्थ नौ) और रात्री (अर्थ रात)</strong>। नौ रातों और नौ दिनों को नवरात्रों के रूप में मनाया जाता है।</li>
<li>भारत में मनाए जाने वाले तीन मुख्य नवरात्रि शरद नवरात्रि, वसंत नवरात्रि और अशदा नवरात्रि हैं।</li>
<li>नवरात्रि त्यौहारों में शरद नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण है। यह सर्दियों की शुरूआत में मनाया जाता है, यानी शरद ऋतु में (सितंबर / अक्टूबर का महीना) यह मनाने का ख़ास कारण है कि इस वक्त देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध किया गया था जिसका जश्न मनाया जाता है।</li>
<li>वसंत नवरात्रि गर्मियों की शुरुआत के दौरान मनाया जाता है जो मार्च /अप्रैल के महीने में होता है। मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है।</li>
<li>अशदा सीजन के दौरान हिमाचल प्रदेश राज्य में अशदा नवरात्रि मनाया जाता है जो जुलाई-अगस्त महीने में होता है।</li>
<li>नवरात्रि के साथ सर्द और वसंत ऋतु का भी आगमन होता है।</li>
<li>गुजरात और मुंबई में, नवरात्रि की हर रात को गरबा नृत्य किया जाता है जो बहुत प्रसिद्ध है।</li>
<li>नवरात्रि के दिनों में अगर आपको सपने में सफेद सांप दिखाई देता है तो यह बहुत ही शुभ होता है। इससे लक्ष्मी की कृपा होती है।</li>
<li>अगर कोई <a href="https://fundabook.com/kanya-worship-special-significance-navratri-keep-these-things-hindi/">कन्या</a> आपको नवरात्रि के दिनों में सिक्का देती है तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है , इससे धन का लाभ होता है।</li>
<li>बंगाल में नवरात्रि के दिनों मे दुर्गा पूजा की जाती है जो बंगाल का पुरे साल का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है।</li>
<li>दुर्गा देवी आठ भुजाओं से युक्त हैं जिन सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होते हैं।</li>
<li>हिन्दू ग्रन्थों में वे शिव की पत्नी पार्वती के रूप में वर्णित हैं, जिन्हें दुर्गा का 8वां रूप गौरी कहा जाता है।</li>
<li>वेदों में तो दुर्गा का व्यापाक उल्लेख है, किन्तु उपनिषद में देवी &#8220;<strong>उमा हैमवती</strong>&#8221; (<strong>उमा, हिमालय की पुत्री</strong>) का वर्णन है।</li>
<li>पुराण में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है।</li>
<li>इसी आदि शक्ति देवी ने ही सावित्री (ब्रह्मा जी की पहली पत्नी), लक्ष्मी, और पार्वती (सती) के रूप में जन्म लिया और उसने ब्रह्मा, विष्णु और महेश से विवाह किया था।</li>
<li>तीन रूप मिलकर दुर्गा (आदि शक्ति) को पूरा करते हैं।</li>
</ul>
<p><strong>यह भी पढ़ें:-</strong></p>
<p><strong><a href="https://fundabook.com/why-celebrate-navratri/">नवरात्रों के दिनों से जुड़ी हैं ये 2 महत्वपूर्ण कथाएँ</a></strong></p>
<p><strong><a href="https://fundabook.com/do-not-do-this-work-in-navratri-days/">नवरात्रि के दिनों में ना करे यह काम</a></strong></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/some-interesting-facts-related-to-the-nine-days-of-navratri/">नवरात्रि के नौ दिनों से जुड़े कुछ रोचक तथ्य</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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		<title>क्यों नवरात्रि के दौरान लहसुन-प्याज खाना वर्जित होता है?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 09:39:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
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		<category><![CDATA[नवरात्रि]]></category>
		<category><![CDATA[लहसुन-प्याज]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नवरात्रि का हिन्दु धर्म में बहुत महत्व है। नवरात्रि में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता यह है कि जो व्यक्ति मां दुर्गा की पूजा आराधना सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से करता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है इस बार शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 से आरंभ हो रही [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नवरात्रि का हिन्दु धर्म में बहुत महत्व है। नवरात्रि में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता यह है कि जो व्यक्ति मां दुर्गा की पूजा आराधना सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से करता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है</p>
<p>इस बार शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 से आरंभ हो रही है इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है।</p>
<p>भक्त नवरात्रि के दौरान तन मन को शुद्ध करने के लिए व्रत भी रखते हैं। नवरात्रि के व्रत के दौरान कई नियमों का पालन भक्तों को करना होता है।</p>
<p>ऐसा ही एक नियम नवरात्रि के दौरान भोजन को लेकर भी है। नवरात्रि के व्रत लेने वाले लोग और जो व्रत नहीं लेते वह भी लहसुन प्याज का इस्तेमाल भोजन में नहीं करते। इसके पीछे वजह क्या है, आइए जानते हैं।</p>
<h2><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-25025" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?resize=696%2C522&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="522" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?resize=300%2C225&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?resize=560%2C420&amp;ssl=1 560w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?resize=80%2C60&amp;ssl=1 80w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?resize=265%2C198&amp;ssl=1 265w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/04/lahsun-pyaj.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></h2>
<h2>तामसिक गुण पाए जाते हैं लहसुन-प्याज में</h2>
<p>नवरात्रि के व्रत मन की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अहम माने जाते हैं इसलिए नवरात्रि के नौ दिनों में <a href="https://fundabook.com/health-benefits-of-eating-garlic/">लहसुन</a> <a href="https://fundabook.com/know-why-tears-come-when-cutting-onions-what-to-do-so-that-tears-do-not-come-out/">प्याज</a> का सेवन वर्जित होता है, क्योंकि यह तामसिक प्रकृति के भोज्य पदार्थ होते हैं।</p>
<p>इनके सेवन से अज्ञानता और वासना में वृद्धि होती है। इसके साथ ही लहसुन-प्याज जमीने के नीचे उगते हैं और इनकी सफाई में कई सूक्ष्मजीवों की मृत्यु होती है, इसलिए भी इन्हें व्रत के दौरान खाना शुभ नहीं माना जाता है।</p>
<div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <strong><a href="https://fundabook.com/know-which-tasks-will-be-fulfilled-by-doing-actions-chaitra-navratri/">जानिए नवरात्रि में कौन से कार्य करने से होगी मनोकामना पूर्ण !!</a></strong> </div>
<h2>मन की चंचलता बढ़ाते हैं लहसुन-प्याज</h2>
<p>तामसिक गुणों के कारण लहसुन-प्याज के सेवन से मन चंचल होता है। व्रत के दौरान मन की चंचलता व्यक्ति को विचलित करती है। इससे भोग-विलास की ओर मन आकर्षित होता है और व्यक्ति व्रत के नियमों का उल्लंघन कर सकता है।</p>
<h2>पवित्रता को बनाए रखने के लिए ही लहसुन</h2>
<p>प्याज का सेवन भोजन में नहीं करना चाहिए। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, जैसा अन्न व्यक्ति खाता है उसका मन भी वैसा हो जाता है इसलिए व्रत के दौरान सात्विक भोजन करने की सलाह हिंदू धर्म में दी गई है।</p>
<h2>पौराणिक कहानी</h2>
<p>पौराणिक कथा के अनुसार, स्वरभानु नाम के दैत्य ने समुद्रमंथन के बाद देवताओं के बीच बैठकर छल से अमृत का सेवन कर लिया था।</p>
<p>यह बात जब मोहिनी रूप धारण किये हुए भगवान विष्णु को पता चली तो उन्होंने अपने चक्र से स्वरभानु का सिर, धड़ से अलग कर दिया। स्वरभानु के सिर और धड़ को ही राहु-केतु कहा जाता है।</p>
<p>सिर कटने के बाद स्वरभानु के सिर और धड़ से अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरी और इन्हीं से लहसुन-प्याज की उत्पत्ति हुई। लहसुन-प्याज का जन्म अमृत की बूंदों से हुआ इसलिए रोगों को मिटाने में यह दोनों कारगर साबित होते हैं।</p>
<p>परंतु यह राक्षस के मुंह से होकर उत्पन्न हुई हैं, इसलिए यह अपवित्र मानी जाती हैं और भगवान को इनका भोग लगाना वर्जित है। इसके साथ ही व्रत के दौरान भी इनको खाना वर्जित है।</p>
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<p>&nbsp;</p>
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		<title>नवरात्रि में कन्या पूजन का है विशेष महत्व, ध्यान रखें ये बातें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 23:56:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>चैत्र नवरात्रि हो या शारदीय नवरात्रि देवी माँ की पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक कन्या पूजन न हो जाए। नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्त्व होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके कुछ नियम भी होते हैं जिनका विशेष ध्यान रखना होता है। मान्यता है कि अगर इन [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>चैत्र नवरात्रि हो या शारदीय नवरात्रि देवी माँ की पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक <strong>कन्या पूजन</strong> न हो जाए। नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्त्व होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके कुछ नियम भी होते हैं जिनका विशेष ध्यान रखना होता है।</p>
<p>मान्यता है कि अगर इन नियमों पालन किया जाए तो देवी माँ अत्यंत प्रसन्न होती हैं। तो आइए जानते हैं कन्या पूजन का महत्त्व और नियम?</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-34434 aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/chaitra-navratri-girl-worship.jpg?resize=696%2C390&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="390" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/chaitra-navratri-girl-worship.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/chaitra-navratri-girl-worship.jpg?resize=300%2C168&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/chaitra-navratri-girl-worship.jpg?resize=696%2C390&amp;ssl=1 696w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2 data-start="620" data-end="644">कन्या पूजन का महत्व</h2>
<ol data-start="646" data-end="1217">
<li data-start="646" data-end="849">
<p data-start="649" data-end="675"><strong data-start="649" data-end="673">देवी स्वरूपा की पूजा</strong></p>
<ul data-start="679" data-end="849">
<li data-start="679" data-end="782">
<p data-start="681" data-end="782">नवरात्रि के आठवें या नवें दिन (अष्टमी या नवमी) कन्याओं को माता दुर्गा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है।</p>
</li>
<li data-start="786" data-end="849">
<p data-start="788" data-end="849">प्रत्येक कन्या में देवी दुर्गा के नौ रूपों का आभास होता है।</p>
</li>
</ul>
</li>
<li data-start="851" data-end="1066">
<p data-start="854" data-end="887"><strong data-start="854" data-end="885">सांस्कृतिक और धार्मिक संदेश</strong></p>
<ul data-start="891" data-end="1066">
<li data-start="891" data-end="979">
<p data-start="893" data-end="979">कन्या पूजन यह सिखाता है कि <strong data-start="920" data-end="944">नारी शक्ति का सम्मान</strong> समाज की मजबूती के लिए आवश्यक है।</p>
</li>
<li data-start="983" data-end="1066">
<p data-start="985" data-end="1066">यह हमें अहंकार और लालच से दूर, <strong data-start="1016" data-end="1037">सादगी और सेवा भाव</strong> अपनाने की प्रेरणा देता है।</p>
</li>
</ul>
</li>
<li data-start="1068" data-end="1217">
<p data-start="1071" data-end="1101"><strong data-start="1071" data-end="1099">सकारात्मक ऊर्जा का संचार</strong></p>
<ul data-start="1105" data-end="1217">
<li data-start="1105" data-end="1217">
<p data-start="1107" data-end="1217">माना जाता है कि कन्याओं को भोजन, मिठाई और उपहार देने से घर में <strong data-start="1170" data-end="1202">सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति</strong> बनी रहती है।</p>
</li>
</ul>
</li>
</ol>
<h2>नियम</h2>
<p>कन्या पूजन <strong>षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी</strong> या <strong>नवमी</strong> में किसी भी दिन किया जाता है। ख्याल रखें कि कन्याओं की उम्र 2 से 7 साल के बीच होनी चाहिए। कन्या पूजन में बालक को जरूर आमंत्रित करना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा न करने पर कन्या पूजन पूर्ण नहीं होता।</p>
<p>सबसे पहले कन्याओं के पैर दूध या फिर पानी से अपने हाथों से साफ करें। इसके बाद उनके पैर छूकर उन्हें साफ स्थान पर बैठाएं। कन्याओं के माथे पर <strong>अक्षत, फूल</strong> और <strong>कुमकुम</strong> का <strong>तिलक</strong> लगाएं। कन्याओं को खीर-पूड़ी का प्रसाद खिलाएं।</p>
<p>नमकीन में चना भी खिला सकते हैं कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें दान में <strong>रूमाल, लाल चुनरी, फल</strong> और खिलौने देकर उनके चरण छुकर आर्शीवाद लें। इसके बाद कन्याओं को खुशी-खुशी विदा करें। ऐसा करने से मातारानी की कृपा और उनका आर्शीवाद आप के ऊपर हमेशा बना रहेगा।</p>
<h2 data-start="1781" data-end="1808">ध्यान रखने योग्य बातें</h2>
<ol data-start="1810" data-end="2298">
<li data-start="1810" data-end="1924">
<p data-start="1813" data-end="1839"><strong data-start="1813" data-end="1837">साफ-सफाई और स्वच्छता</strong></p>
<ul data-start="1843" data-end="1924">
<li data-start="1843" data-end="1924">
<p data-start="1845" data-end="1924">कन्या पूजन में उपयोग होने वाले थाल, कपड़े और भोजन पूरी तरह स्वच्छ होने चाहिए।</p>
</li>
</ul>
</li>
<li data-start="1926" data-end="2043">
<p data-start="1929" data-end="1948"><strong data-start="1929" data-end="1946">सादगी और संयम</strong></p>
<ul data-start="1952" data-end="2043">
<li data-start="1952" data-end="2043">
<p data-start="1954" data-end="2043">पूजन में महंगे उपहार और भव्य भोजन की तुलना में <strong data-start="2001" data-end="2027">सादगी और हृदय की भक्ति</strong> को महत्व दें।</p>
</li>
</ul>
</li>
<li data-start="2045" data-end="2173">
<p data-start="2048" data-end="2070"><strong data-start="2048" data-end="2068">सुरक्षा का ध्यान</strong></p>
<ul data-start="2074" data-end="2173">
<li data-start="2074" data-end="2127">
<p data-start="2076" data-end="2127">बच्चों और कन्याओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।</p>
</li>
<li data-start="2131" data-end="2173">
<p data-start="2133" data-end="2173">भीड़ वाले आयोजन में अनुशासन बनाए रखें।</p>
</li>
</ul>
</li>
<li data-start="2175" data-end="2298">
<p data-start="2178" data-end="2199"><strong data-start="2178" data-end="2197">उचित समय और दिन</strong></p>
<ul data-start="2203" data-end="2298">
<li data-start="2203" data-end="2251">
<p data-start="2205" data-end="2251">अष्टमी या नवमी का दिन सबसे शुभ माना जाता है।</p>
</li>
<li data-start="2255" data-end="2298">
<p data-start="2257" data-end="2298">समय सुबह या दोपहर के पहले भाग में करें।</p>
</li>
</ul>
</li>
</ol>
<h2>पौराणिक कथा</h2>
<p>मान्यता है कि माता के भक्त पंडित श्रीधर की कोई संतान नहीं थी। एक दिन उन्होंने नवरात्र में कुंवारी कन्याओं को आमंत्रित किया। इसी बीच मां वैष्णों कन्याओं के बीच आकर बैठ गईं।</p>
<p>सभी कन्याएं तो भोजन करके और दक्षिणा लेकर चली गईं लेकिन मातारानी वहीं बैठी रहीं। उन्होंने पंडित श्रीधर से कहा कि तुम एक भंडारा रखो और उसमें पूरे गांव को आमंत्रित करो।</p>
<p>इसी भंडारे में भैरोनाथ भी आया और वहीं उसके अंत का आरंभ हुआ। माँ ने <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AD%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5" target="_blank" rel="noopener">भैरोनाथ</a> का अंत करने के साथ ही उसका उद्धार किया।</p>
<h2 data-start="2305" data-end="2318">निष्कर्ष</h2>
<p data-start="2319" data-end="2545">कन्या पूजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह हमें <strong data-start="2375" data-end="2415">समानता, सेवा और नारी शक्ति का सम्मान</strong> सिखाता है। नवरात्रि में इस पूजन के माध्यम से हम अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सामूहिक सौहार्द और भक्ति की भावना बढ़ा सकते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/kanya-worship-special-significance-navratri-keep-these-things-hindi/">नवरात्रि में कन्या पूजन का है विशेष महत्व, ध्यान रखें ये बातें</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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