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	<title>success stories Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>एक मरते हुए इंसान के 5 पछतावे! इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप न करें ये भूल!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Feb 2019 16:42:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>कहावत है कि मरता हुआ इंसान कभी झूठ नहीं बोलता। ये शायद इसलिए भी सच है कि मरते हुए इंसान के पास खोने के लिए कुछ नहीं होता क्योंकि उसको एहसास हो चुका होता है कि इस धरती पर ये इसका आखिरी पल है और इसके बाद वह किसी को अपने बारे में अच्छा बुरा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>कहावत है कि मरता हुआ इंसान कभी झूठ नहीं बोलता। ये शायद इसलिए भी सच है कि मरते हुए इंसान के पास खोने के लिए कुछ नहीं होता क्योंकि उसको एहसास हो चुका होता है कि इस धरती पर ये इसका आखिरी पल है और इसके बाद वह किसी को अपने बारे में अच्छा बुरा कुछ भी नहीं बता पाएगा। यह पछतावे का पहला चरण होता है।</p>
<p>हम पूरा जीवन खुद को बेहतर इंसान साबित करने मे गुजार देते हैं लेकिन अंतिम क्षण में जब सब कुछ खत्म होने को होता है तो कुछ भी मायने नहीं रखता। मायने रखता है तो केवल यह कि हम कैसे जिये और हमने क्या सही किया और क्या गलत। क्या ऐसा किया जो नहीं करना चाहिए था और क्या नहीं किया जो करना चाहिए था।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-17539" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/02/top-5-regrets-of-the-dyingt.jpg?resize=400%2C267&#038;ssl=1" alt="" width="400" height="267" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/02/top-5-regrets-of-the-dyingt.jpg?w=400&amp;ssl=1 400w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/02/top-5-regrets-of-the-dyingt.jpg?resize=300%2C200&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 400px) 100vw, 400px" /></p>
<p>जब मृत्यु नजदीक हो तो इंसान उन सभी अच्छे बुरे पलों को याद करता है जो उसके जीवन के सबसे नजदीक रहे और जिन्होने उसकी जीवन के रुख को मोड़ दिया। आखिर साथ जाता है तो अच्छी बुरी यादें और कुछ पश्चाताप यानि पछतावे। इंसान के अंतिम दिनों में पछतावे पर <span style="font-weight: 400;">ब्रोनी वेयर की एक किताब ने तहलका मचा दिया। हम उसी किताब से टॉप 5 पछतावों पर चर्चा करेंगे जो ब्रोनी वेयर ने अपनी बेस्ट सेलिंग किताब में लिखे हैं।</span></p>
<h2>कौन है <span style="font-weight: 400;">ब्रोनी वेयर</span></h2>
<p><span style="font-weight: 400;">आस्ट्रेलिया की रहने वाली अब 52 वर्षीय ब्रोनी वेयर कई वर्षों तक कोई ढंग का काम तलाशती रही, लेकिन कोई फॉर्मल ट्रेनिंग, क्वालीफिकेशन या अनुभव न होने के कारण बात नहीं बनी। फिर उन्होंने एक हॉस्पिटेल की <strong>पैलिएटिव केयर यूनिट</strong> में काम करना शुरू किया। यह वह यूनिट होती है जिसमें टर्मिनली इल या अंतिम स्टेज वाले मरीजों को रखा  जाता है। उसमें मृत्यु से जूझ रहे लाइलाज बीमारियों व असहनीय दर्द से पीड़ित मरीजों की मैडीकल डोज धीरे-धीरे कम की जाती है और परामर्श(counseling) के माध्यम से उनकी आध्यात्मिक और <a href="https://fundabook.com/mexico-is-worshiping-goddess-of-death/">आस्था</a> चिकित्सा (faith healing) की जाती है। जिससे वे एक शांति पूर्ण मृत्यु की ओर बढ़ सकें।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ब्रोनी वेयर ने ब्रिटेन </span><span style="font-weight: 400;">और मिडिल ईस्ट में कई वर्षों तक मरीजों की कांऊसलिंग करते हुए पाया कि मरते हुए लोगों को कोई न कोई पछतावा(regret) जरूर था। उन्होंने यह भी पाया कि मरते हुए मरीजों के बड़े पछतावे या रिग्रेट्स में एक कॉमन पैटर्न था। हम सब इस सच्चाई को जानते हैं कि मरता हुआ व्यक्ति हमेशा सच बोलता है। उसकी एक-एक बात ईश्वर की वाणी (इपिफनी, epiphany) जैसी होती है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">मरते हुए मरीजों की इपिफनी को ब्रोनी वेयर ने 2009 में एक ब्लॉग </span><span style="font-weight: 400;">के रूप में रिकार्ड किया। बाद में उन्होंने अपने निष्कर्ष को एक किताब &#8216;<a href="https://fundabook.com/recommends/top-5-regrets-of-the-dying-bronnie-ware/">द टॉप फाइव रिग्रेट्स ऑफ द डाइंग</a>&#8216; के रूप में पब्लिश किया। </span><span style="font-weight: 400;">छपते ही यह विश्व की बैस्ट सैलिंग बुक साबित हुई और अब तक 29 भाषाओं में छप चुकी है। पूरी दुनिया में इसे 10 लाख से भी ज्यादा लोगों ने पढ़ा और प्रेरित हुए। <a href="https://fundabook.com/recommends/top-5-regrets-of-the-dying-bronnie-ware/">देखें किताब.</a></span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">बोनी द्वारा लिखित पांच सबसे बड़े पछतावे संक्षेप में ये हैं। </span></p>
<h3><span style="font-weight: 400;">काश! मैं दूसरों के अनुसार न जीकर अपने अनुसार जिंदगी जीने की हिम्मत जुटा पाता</span></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">यह सबसे ज्यादा सामान्य पछतावा था। इसमें यह भी शामिल था कि जब तक हम यह महसूस करते हैं कि अच्छा स्वास्थ्य ही आजादी से जीने की राह देता है </span><span style="font-weight: 400;">तब तक यह हाथ से निकल चुका होता है।</span><span style="font-weight: 400;"><br />
</span></p>
<h3><span style="font-weight: 400;">काश! मैंने इतनी कड़ी मेहनत न की होती</span></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">ब्रोनी वेयर ने बताया कि उन्होंने जितने भी मरीज पुरुषों का उपचार किया लगभग सभी को यह रिग्रेट था और उन्होंने अपने रिश्तों को समय न दे पाने की गलती मानी। ज्यादातर मरीजों को पछतावा था कि उन्होंने अपना अधिकतर जीवन अपने कार्यस्थल पर खर्च कर दिया। उसमें से हरेक ने कहा कि थोड़ी कम मेहनत करके अपने और अपने </span><span style="font-weight: 400;">के लिए समय निकाल सकते थे।</span></p>
<h3><span style="font-weight: 400;">काश! मैं अपनी भावनाओं का इजहार करने की हिम्मत जुटा पाता</span></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">ब्रोनी वेयर ने पाया कि बहुत </span><span style="font-weight: 400;">सारे लोगों ने अपनी भावनाओं का केवल इसीलिए गला घोंट दिया जिससे कि शांति बनी रहे । परिणामस्वरूप उनको औसत दर्जे का जीवन जीना पड़ा और वे अपनी <a href="https://fundabook.com/some-ways-to-succeed-in-life/">वास्तविक योग्यता</a> के अनुसार ऊंची जगह नहीं पा सके। इस बात की कड़वाहट और असंतोष के कारण उनको कई बीमारियां हो गईं। </span></p>
<h3><span style="font-weight: 400;">काश! मैं अपने बचपन के दोस्तों के </span><span style="font-weight: 400;">सम्पर्क में रहा होता</span></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">ब्रोनी वेयर ने देखा कि अक्सर लोगों को मृत्यु के नजदीक पहुंचने तक पुरानी दोस्ती के पूरे फायदों का वास्तविक आभास भी नहीं हुआ। अधिकतर तो अपनी जिंदगी में इतने उलझ गए थे कि उनकी कई वर्ष पुरानी <a href="https://fundabook.com/10-things-about-good-friends/">गोल्डन </a></span><span style="font-weight: 400;">फ्रेंडशिप उनके हाथ से निकल गई थी। उनके द्वारा दोस्ती को अपेक्षित सय और जोर न देने का गहरा अफसोस था। हर कोई मरते वक्त अपने दोस्तों को याद कर रहा था।</span></p>
<h3><span style="font-weight: 400;">काश! मैं अपनी इच्छानुसार अपने आपको खुश रख पाता</span></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">आम आश्चर्य की यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है कि कई लोगों को जीवन के अंत तक यह पता ही नहीं चलता कि <strong><a href="https://fundabook.com/know-how-to-be-happy/">खुशी</a> भी एक च्वाइस है</strong>। यानि हम अपनी मर्जी से जब चाहें खुश हो सकते हैं और इसमें कोई भी बाहरी चीज़ अड़चन पैदा नहीं कर सकती, बशर्ते हम अपनी गुलामी वाली मानसिकता से बाहर निकलें. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि “हैपीनेस इज नाओ।&#8221; <strong>HAPPINESS IS NOW!!!</strong></span></p>
<p>तो आप क्या समझे? जीवन को एक अलग नज़रिये से देखिये और आप पाएंगे की आप जीवन के असली आनंद का अनुभव कर रहे हैं। अगर आप ब्रोनी वेयर की किताब पढना चाहते हैं तो <a class="thirstylink" target="_blank" title="top-5-regrets-of-the-dying-bronnie-ware" href="https://fundabook.com/recommends/top-5-regrets-of-the-dying-bronnie-ware/" data-shortcode="true">यहाँ से खरीद सकते हैं</a>. बहुत ही लाइफ चेंजिग <a class="thirstylink" target="_blank" title="top-5-regrets-of-the-dying-bronnie-ware" href="https://fundabook.com/recommends/top-5-regrets-of-the-dying-bronnie-ware/" data-shortcode="true">किताब<span> </span></a>है जिसका मूल्य केवल 942 रूपए है.</p>
<p><strong>आगे पढ़ें</strong></p>
<ul>
<li><a href="https://fundabook.com/li-ching-yuen-man-who-lived-astonishing-256-years/">256 साल तक ज़िंदा रहे शख़्स ने मौत से पहले बताया था लंबी ज़िंदगी का राज़, 1933 में हुई मौत</a></li>
<li><a title="अपने आप को बेहतर बनाने के 10 टिप्स!" href="https://fundabook.com/top-10-tips-to-improve-your-life/" rel="bookmark">अपने आप को बेहतर बनाने के 10 टिप्स!</a></li>
</ul>
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		<title>जानिए प्रेरणादायक और विप्रो कंपनी के चेयरमैन अजीम प्रेमजी के बारे में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Nov 2018 11:28:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आज हम आपको महान इंसान विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी के जीवन के बारे में बताने जा रहे हैं। अजीम प्रेमजी दुनिया के बड़े बिज़नेस मैन होने के साथ एक अच्छे व्यक्ति भी हैं। इनको सबसे बड़े दान दाता के नाम से भी जाना जाता है। इनकी मेहनत के कारण ही विप्रो का नाम आज [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज हम आपको महान इंसान विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी के जीवन के बारे में बताने जा रहे हैं। अजीम प्रेमजी दुनिया के बड़े बिज़नेस मैन होने के साथ एक अच्छे व्यक्ति भी हैं। इनको सबसे बड़े दान दाता के नाम से भी जाना जाता है। इनकी मेहनत के कारण ही विप्रो का नाम आज पूरी दुनिया में चमक रहा है। जानिए इनके बारे में और भी कई बातें।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-16036" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/wipro_chairman-min.jpg?resize=300%2C225&#038;ssl=1" alt="" width="300" height="225" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/wipro_chairman-min.jpg?w=300&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/wipro_chairman-min.jpg?resize=80%2C60&amp;ssl=1 80w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/wipro_chairman-min.jpg?resize=265%2C198&amp;ssl=1 265w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h2>प्रारंभिक जीवन</h2>
<p>अजीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को मुंबई के एक निज़ारी इस्माइली शिया मुस्लिम परिवार में हुआ था। इनके पूर्वज मुख्यतः कछ (गुजरात) के निवासी थे। उनके पिता एक प्रसिद्ध व्यवसायी थे और ‘राइस किंग ऑफ़ बर्मा’ के नाम से जाने जाते थे। भारत और पाकिस्तान बंटवारा के बाद मोहम्मद अली जिन्नाह ने उनके पिता को पाकिस्तान आने का न्योता दिया था पर उन्होंने उसे ठुकरा कर भारत में ही रहने का फैसला किया था।</p>
<h4>वेस्टर्न इंडियन वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड की स्थापना</h4>
<p>सन 1945 में अजीम प्रेमजी के पिता मुहम्मद हाशिम प्रेमजी ने महाराष्ट्र के जलगाँव जिले में ‘वेस्टर्न इंडियन वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड’ की स्थापना की थी। यह कंपनी ‘सनफ्लावर वनस्पति’ और कपड़े धोने के साबुन ’787’ का निर्माण करती थी।</p>
<h4>पिता का देहांत</h4>
<p>उनके पिता ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए प्रेमजी को अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय भेजा पर दुर्भाग्यवश इसी बीच उनके पिता की मौत हो गयी थी और अजीम प्रेमजी को इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर भारत वापस आना पड़ा था। उस समय उनकी उम्र मात्र 21 साल थी।</p>
<h4>विप्रो को पहुंचाया सफलता पर</h4>
<p>आपको बता दें कि इसके बाद भी वह उन्होंने साहस नहीं छोड़ा, बलकि जमकर मेहनत की और विप्रो को एक नए मुकाम पर पहुंचाया। आज विप्रो एक बहु व्यवसायी (Multi Business) तथा बहु स्थानीय (Multi National) कंपनी बन गयी हैं। इसका व्यसाय उपभोक्ता उत्पादों, अधोसरंचना यांत्रिकी से विशिष्ट सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों और सेवाओं तक फैला हैं।</p>
<p>एशिया वीक मैगज़ीन के अनुसार प्रेमजी का नाम दुनिया के 20 प्रभावशाली लोगों में शामिल हैं, और टाइम मैग्जीन ने भी उन्हें कई बार दुनिया की 100 प्रभावशाली हस्तियों में शामिल किया हैं। आज विप्रो दुनिया की टॉप सौ सॉफ्टवेयर आईटी कंपनियों में शामिल हैं।</p>
<h4>दान देने में हमेशा आगे</h4>
<p>प्रेमजी दान देने के मामले में हमेशा आगे रहते हैं। वह अब भारत में विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय खोलने में लगे हुए हैं। वह आपको ये जानकर गर्व होगा कि उन्होंने गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए आठ हजार करोड़ रुपये से भी अधिक दान दिया हैं।</p>
<h2>निजी जीवन</h2>
<p>अजीम प्रेमजी का विवाह यास्मीन के साथ हुआ और दंपत्ति के दो पुत्र हैं – रिषद और तारिक। रिषद वर्तमान में विप्रो के आई.टी. बिज़नेस के ‘मुख्य रणनीति अधिकारी’ हैं।</p>
<h2>जीवन घटनाक्रम</h2>
<p>1945: 24 जुलाई को अजीम रेमजी का जन्म मुंबई में हुआ था ।</p>
<p>1966: अपने पिता की मृत्यु के बाद अमेरिका से पढ़ाई छोड़ भारत वापस आ गए थे।</p>
<p>1977: कंपनी का नाम बदलकर ‘विप्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड’ कर दिया गया था।</p>
<p>1980: विप्रो का आई.टी. क्षेत्र में प्रवेश हुआ था।</p>
<p>1982: कंपनी का नाम ‘विप्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड’ से बदलकर ‘विप्रो लिमिटेड’ कर दिया गया था।</p>
<p>1999-2005: सबसे धनी भारतीय रहे।</p>
<p>2001: उन्होंने ‘अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ की स्थापना की थी।</p>
<p>2004: टाइम मैगज़ीन द्वारा दुनिया के टॉप 100 प्रभावशाली व्यक्तियों में उनको शामिल किया था।</p>
<h2>पुरस्कार और सम्मान</h2>
<p>बिजनेस वीक द्वारा प्रेमजी को महानतम उद्यमियों में से एक कहा गया है।<br />
सन 2000 में मणिपाल अकादमी ने उनको डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था।<br />
सन 2005 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।<br />
2006 में ‘राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान, मुंबई, द्वारा उनको लक्ष्य बिज़नेस विजनरी से सम्मानित किया गया था।<br />
2009 में उनको कनेक्टिकट स्थित मिडलटाउन के वेस्लेयान विश्वविद्यलाय द्वारा उनके उत्कृष्ट लोकोपकारी कार्यों के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था।<br />
सन 2011 में उन्हें भारत सरकार द्वारा देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था।<br />
सन 2013 में उनको ‘इकनोमिक टाइम्स अचीवमेंट अवार्ड’ दिया गया था।<br />
सन 2015 में मैसोर विश्वविद्यालय ने उनको डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया था।</p>
<p>यह भी पढ़ें:- <a href="https://fundabook.com/know-about-the-biography-of-abraham-lincoln/">जानिए कैसे बने अब्राहम लिंकन अनेक असफलताओं के बाद इतने सफल इंसान</a></p>
<p>यह भी पढ़ें:- <a href="https://fundabook.com/know-about-adolf-hitler/">जानिए अडोल्फ हिटलर के बारे में जिसके नाम से ही कांपता था पूरा विश्व</a></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/know-about-inspiration-and-about-azim-premji-chairman-of-wipro-company/">जानिए प्रेरणादायक और विप्रो कंपनी के चेयरमैन अजीम प्रेमजी के बारे में</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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		<title>जानिए मुकेश अंबानी और उनके परिवार के बारे में कुछ रोचक बातें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Nov 2018 11:28:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। वह 19.6 अरब रूपए के नेटवर्क के साथ भारत में अमीरों की सूची में पहले स्थान पर हैं। अंबानी परिवार में मुकेश उनकी पत्नी नीता और उनके तीन बच्चे आकाश, ईशा और अनन्त हैं। अंबानी और उनके परिवार के बारे में जानने के लिए इस पोस्ट को [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। वह 19.6 अरब रूपए के नेटवर्क के साथ भारत में अमीरों की सूची में पहले स्थान पर हैं। अंबानी परिवार में मुकेश उनकी पत्नी नीता और उनके तीन बच्चे आकाश, ईशा और अनन्त हैं। अंबानी और उनके परिवार के बारे में जानने के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़ें।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-16029" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/mukesh-ambani-min-.jpg?resize=300%2C168&#038;ssl=1" alt="" width="300" height="168" /></p>
<h2>मुकेश अंबानी और उनके परिवार के बारे में</h2>
<p>मुकेश अंबानी का जन्म 19 अप्रैल 1957 को हुआ था। उनके पिता का नाम धीरूभाई अंबानी और माता का नाम कोकिला बेन अंबानी है। उनके एक छोटे भाई अनिल अंबानी और दो बहने दीप्ति सलग ओमकार और मीना कोठारी भी है। पूरा अंबानी परिवार 1970 तक मुंबई के भुलेश्वर मैं 2 बैडरूम के अपार्टमेंट में रहा करता था। बाद में धीरूभाई अंबानी ने कोलामबा में एक 14 मंजिला अपार्टमेंट खरीदा था| जिसे शि-वाईनड भी कहा जाता है। जहां कुछ समय पहले मुकेश और अनिल अपने परिवार के साथ अलग-अलग मंजिल पर रहा करते थे।</p>
<h2>महंगा घर अंबानी परिवार का</h2>
<p>दुनिया में सबसे महंगा घर भी अंबानी का है, जिसका नाम एंटीलिया है। इस घर की कीमत $1000000000 से भी ज्यादा है। इस घर में 60 मंजिलें और एक गैरेज भी है, जिसमें 168 कारों खड़ सकती हैं। परिवार के हर सदस्य के लिए हेल्थ क्लब, सिनेमा और 600 स्टाफ है।</p>
<h2>अनन्त अंबानी का सफेद हाथी</h2>
<p>मुकेश अंबानी के 23 वर्षीय बेटे अनंत अंबानी को अध्यात्म से कुछ ज्यादा ही लगाव हैं। कुछ रिपोर्टों में उल्लेख किया गया हैं। वो अक्सर भगवान बालाजी मंदिर का भ्रमण करते रहते हैं। उन्होंने भगवान बालाजी को एक पवित्र सफेद हाथी भी भेट किया हैं।</p>
<h2>परिवार की अहमियत</h2>
<p>अपने बिज़नेस के साथ-साथ मुकेश अपने परिवार को भी काफी अहमियत देते हैं। वह जितने भी बिजी रहे लेकिन हर रविवार को अपनी मां, पत्नी और बच्चों के साथ समय बिताते हैं।</p>
<h2>अंबानी की गाड़ी</h2>
<p>मुकेश अंबानी की BMW 760Li कार Bullet Proof है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास भी ऐसी ही Hi-tech कार है।</p>
<p>मुकेश अंबानी ने अपनी पत्नी को Traffic में शादी के लिए Propose किया था और कार को चलाने से मना कर दिया था जब तक वो हाँ नही करती।</p>
<p>मुकेश अंबानी कभी भी बिना पूजा किये घर से बाहर नही जाते।</p>
<h2>परिवार का खास गिफ्ट</h2>
<p>मुकेश ने सिर्फ अपना 50 वा बर्थडे मनाया था। आपको बता दें कि अंबानी को अपना बर्थडे मनाना पसंद नहीं हैं, लेकिन परिवार के सदस्यों को वह बर्थडे मनाने से नहीं रोकते हैं। नीता अंबानी के बर्थडे पर उन्होंने करीब 6.2 करोड़ डॉलर का जेट नीता अंबानी को गिफ्ट में दिया था।</p>
<h2>परोपकारी गतिविधियां</h2>
<p>नीता अंबानी कई परोपकारी गतिविधियों और चैरिटी प्रोजेक्टस में लगी हुई हैं। जिस क्षेत्र मैं वो सबसे ज्यादा सक्रिय हैं।</p>
<h2>सादगी पसंद परिवार</h2>
<p>भारत के सबसे अमीर व्यक्ति होने के बावजूद भी मुकेश को उनके विनम्र व्यवहार के लिए जाना जाता हैं। वो पारंपरिक भारतीय भोजन को खाना पसंद करते हैं और वो शाकाहारी भी हैं।</p>
<h2>कम उम्र की अरबपति</h2>
<p>मुकेश और नीता की बेटी ईशा अंबानी सबसे कम उम्र की अरबपति वारिस हैं। 2008 में जब ईशा महज 16 साल की थी तो उनको दुनिया के 10 अरबपति मैं दूसरा रैंक दिया गया था।</p>
<h2>जियो का रिकॉर्ड</h2>
<p>21 फरवरी 2017 के अनुसार मुकेश अंबानी के जियो ने अपने 10 करोड़ यूजर्स बना लिए थे। 21 फरवरी 2017 तक 160 दिन पूरे कर लिए थे इसी कारण संचार के क्षेत्र में भारत वर्ल्ड में टॉप पर आ गया था। Reliance जियो ने अपने सर्वे में यह बताया की यूजर्स ने प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे लाइव वीडियो देखते हुए बताएं।</p>
<h2>बहुमूल्य अवॉर्ड्स</h2>
<p>एक अच्छे बिज़नेस मैन होने के कारण मुकेश अंबानी को कई अवॉर्ड्स भी मिल चुके हैं और उनके नाम कई रिकॉर्ड्स भी हैं। फॉर्च्यून मैगजीन मैं उनको बिजनेस में एशिया की सबसे प्रभावशाली लोगों की रैंकिंग में 13वं स्थान दिया था।</p>
<p>यह भी पढ़ें:- <a href="https://fundabook.com/mdh-mahashay-dharampal-gulati/">एक तांगे वाले से मसालों की कंपनी के मालिक बनने तक का सफर</a></p>
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		<title>मशहूर उद्योगपति रतन टाटा का अब तक का सफर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Nov 2018 11:16:24 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Ratan Tata]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मशहूर उद्योगपति रतन टाटा के बारे तो आप जानते ही होंगे। एक ऐसे इंसान जिनका टाटा परिवार के साथ खून का रिस्ता नहीं है। वह एक गोद लिए हुए पुत्र है। टाटा ग्रुप के अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने टाटा ग्रुप को शिखर पर पहुंचा दिया। उन्होंने बड़ी मेहनत और लगन से टाटा को नई [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मशहूर उद्योगपति रतन टाटा के बारे तो आप जानते ही होंगे। एक ऐसे इंसान जिनका टाटा परिवार के साथ खून का रिस्ता नहीं है। वह एक गोद लिए हुए पुत्र है। टाटा ग्रुप के अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने टाटा ग्रुप को शिखर पर पहुंचा दिया। उन्होंने बड़ी मेहनत और लगन से टाटा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। आइए जानते है उनके जीवन से जुड़ी बातें:</p>
<p>रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को सूरत, गुजरात में हुआ था। रतन टाटा नवल टाटा और सोनू टाटा के बेटे है। जिन्हें नवाजबाई टाटा ने अपने पति की मृत्यु के बाद गोद लिया था। जब रतन 10 साल के थे, उनके माता-पिता का तलाक हो गया था। उनका पालन- पोषण उनकी दादी नवजबाई टाटा ने किया था।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-15967" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/Ratan-Tata-min.jpg?resize=600%2C386&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="386" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/Ratan-Tata-min.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/Ratan-Tata-min.jpg?resize=300%2C193&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p>उन्होंने टाटा ग्रुप में अपने करियर की शुरुआत 1961 में की थी। शुरुआत में वो स्टील के शॉप फ्लोर पर लाइमस्टोन को हटाने और धमाके भट्टी को हैंडल करने का काम करते थे। उस टाइम कंपनी में सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स ही बनाए जाते थे और कंपनी को कोई खास मुनाफा नहीं होता था। 1971 में उन्हें राष्ट्रीय रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी (नेल्को) में प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया।</p>
<p>1981 में जमशेदजी टाटा ने रतन को टाटा ग्रुप का नया अध्यक्ष बनाया। जब उन्हें टाटा ग्रुप का अध्यक्ष बनाया गया था, तब कंपनी में उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा था। लेकिन उनके उत्तराधिकारी बनने के बाद टाटा इंड्रस्ट्री ने नई मंजिले हासिल की। रतन टाटा के उत्तराधिकारी बनने के बाद टाटा ग्रुप ने टाटा टी ब्रांड के तले टीटले, टाटा मोटर्स के तले जगुआर लैंड रोवर और टाटा स्टील खरीद लिए।</p>
<p>यह सब खरीदने के बाद टाटा ग्रुप भारत के बहुत बड़े ब्रांड बिज़नेस में शामिल हो गया था और भारत के अलावा टाटा ग्रुप का बिजनेस 100 और देशों में भी फैल गया। आज टाटा ग्रुप में 110 कंपनिया आती हैं, जिनमें टाटा चाय से लेकर पांच सितारा होटल तक, सुई से लेकर स्टील तक और लखटकिया नैनो से लेकर हवाई जहाज तक बनते है।</p>
<p>28 दिसंबर 2012 को वह टाटा ग्रुप की सभी कार्यकारी जिम्मेवारियां से सेवा मुक्त हो गए। उनकी जगह 44 साल के साइरस मिस्त्री को चेयरमैन नियुक्त किया गया। सेवा मुक्ति के बाद भी वह काम-काज में लगे रहते है।</p>
<p>रतन टाटा बहुत शर्मीले स्वभाव के है। वह दुनिया की झूठी चमक दमक में विश्वास नहीं करते। रतन टाटा ने कभी शादी नहीं की, हालांकि उनको 4 बार प्यार भी हुआ था, लेकिन चारों बार हालात ऐसे बने कि किसी न किसी वजह से उनका प्यार अधूरा रह गया। 2008 में भारत सरकार ने उनको पद्दम भूषण और पद्दम विभूषण से सन्मानित किया था।</p>
<p><a href="https://fundabook.com/know-about-inspiration-and-about-azim-premji-chairman-of-wipro-company/">जानिए प्रेरणादायक और विप्रो कंपनी के चेयरमैन अजीम प्रेमजी के बारे में</a></p>
<p><a href="https://fundabook.com/know-some-interesting-things-about-mukesh-ambani-and-his-family/">जानिए मुकेश अंबानी और उनके परिवार के बारे में कुछ रोचक बातें</a></p>
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		<title>एक तांगे वाले से मसालों की कंपनी के मालिक बनने तक का सफर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Nov 2018 07:19:20 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Mahashay Dharampal Gulati]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सफलता पाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। सफलता ऐसे ही नहीं मिलती, हरेक बड़े इंसान की सफलता के पीछे संघर्ष छिपा होता है। आज हम आपको ऐसे ही एक बड़े इंसान के बारे में बताने जा रहे है, जिसकी सफलता के पीछे एक संघर्ष भरी कहानी है। हम बात कर रहे है, MDH [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>सफलता पाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। सफलता ऐसे ही नहीं मिलती, हरेक बड़े इंसान की सफलता के पीछे संघर्ष छिपा होता है। आज हम आपको ऐसे ही एक बड़े इंसान के बारे में बताने जा रहे है, जिसकी सफलता के पीछे एक संघर्ष भरी कहानी है। हम बात कर रहे है, MDH नाम की मसालों की कंपनी के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी।</p>
<p>उनका जन्म 1923 में सियालकोट (पाकिस्तान) में हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। वह पढ़ाई में बहुत कमजोर थे और पाँचवी कक्षा में फेल हो गए थे। उसके बाद उन्होंने स्कूल जाना छोड़ दिया।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-15971" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/MDH-Masala-min.jpg?resize=600%2C337&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="337" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/MDH-Masala-min.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/11/MDH-Masala-min.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p>उनके पिता ने उन्हें काम सीखने के लिए दुकान भेजा। उनका किसी भी काम में दिल नहीं लगता था। 15 साल की उम्र तक उन्होंने बहुत सारे काम बदले। क्योंकि सियालकोट लाल मिर्च के लिए बहुत मशहूर था इसीलिए उनके पिता ने उन्हें एक छोटी सी मसाले की दुकान खुलवा दी और धीरे- धीरे वह दुकान अच्छी चलने लगी।</p>
<p>1947 में देश आज़ाद होने के बाद सियालकोट को पाकिस्तान का हिस्सा बना दिया गया। इसीलिए महाशय धर्मपाल जी और उनका परिवार सियालकोट छोड़ कर दिल्ली आ गए। जब वह पाकिस्तान छोड़ कर दिल्ली आये, उनके पास सिर्फ 1500 रूपये थे। उन्होंने 650 का घोड़ा तांगा खरीद लिया। दो महीने तांगे का काम करने के बाद धर्मपाल जी को लगा यह काम वो और नहीं कर पाएंगे, लेकिन उनके पास इस काम को करने के सिवा और कोई चारा भी नहीं था ।</p>
<p>क्योंकि सियालकोट पाकिस्तान में वह मसालों का काम करते थे, उन्हें मसालों के बारे में अच्छे से पता था। उन्होंने सोच विचार कर मसाले पीसने और बेचने का काम शुरू कर दिया। मसालों की शुद्धता की वजह से धीरे-धीरे उनकी पहचान बनने लगी और उनका मसालों का व्यापार बढ़ने लगा।</p>
<p>ईमानदारी के दम पर धर्मपाल जी सफलता पाते गए और 1996 तक उन्होंने दिल्ली में मसालों की फैक्ट्री लगा ली। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा,और धीरे धीरे वह मसालों की और फैक्ट्रियां लगाते गए।</p>
<p>आज MDH पूरे विश्व भर में एक बड़ा Brand बन चुका है और उनकी कम्पनियाँ 100 से ज्यादा देशों में अपने प्रोडेक्ट्स सप्लाई करती है। धर्मपाल जी एक समाज सेवक भी है, भारत में उनके द्वारा बहुत सी जगहों पर स्कूल और हस्पताल स्‍थापित किये गए है।</p>
<p>यह भी पढ़ें :</p>
<p><a href="https://fundabook.com/5-horror-movies-of-bollywood/">बॉलीवुड की 5 डरावनी फिल्में, जिन्हें देखकर आपकी रूह कांप उठेगी</a></p>
<p><a href="https://fundabook.com/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%8b/">नासा ने की धरती जैसे ग्रहों की खोज जहां पर हो सकता है जीवन संभव</a></p>
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		<title>जानिए कैसे बने अब्राहम लिंकन अनेक असफलताओं के बाद इतने सफल इंसान</title>
		<link>https://fundabook.com/know-about-the-biography-of-abraham-lincoln/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Oct 2018 11:02:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interesting Facts]]></category>
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		<category><![CDATA[abraham lincoln]]></category>
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		<category><![CDATA[motivational stories]]></category>
		<category><![CDATA[success stories]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आज हम आपको अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की कुछ ख़ास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में आपने पहले कही नहीं सुना होगा। अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16 वें राष्ट्पति थे। उनका जन्म 12 फरवरी 1809 ईसवी को एक गरीब परिवार में हुआ था। गरीब परिवार में पैदा होने के [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/know-about-the-biography-of-abraham-lincoln/">जानिए कैसे बने अब्राहम लिंकन अनेक असफलताओं के बाद इतने सफल इंसान</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>आज हम आपको अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की कुछ ख़ास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में आपने पहले कही नहीं सुना होगा। अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16 वें राष्ट्पति थे। उनका जन्म 12 फरवरी 1809 ईसवी को एक गरीब परिवार में हुआ था। गरीब परिवार में पैदा होने के कारण अब्राहम को अपनी जिंदगी में काफी मेहनत करनी पड़ी थी। अब्राहम बार-बार असफल होने के बाद ही अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे।</p>
<h2><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-15753" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/abhrahim-1.jpg?resize=400%2C225&#038;ssl=1" alt="" width="400" height="225" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/abhrahim-1.jpg?w=400&amp;ssl=1 400w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/10/abhrahim-1.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></h2>
<h2>अब्राहम लिंकन के जीवन की कुछ महत्वपूर्ण बातें</h2>
<ul>
<li>आपको बता दें कि जिस दिन ही लिंकन का जन्म हुआ था, उस दिन ही महान वैज्ञानिक &#8216;चार्ल्स डार्विन&#8217; का जन्म हुआ था।</li>
<li>लिंकन अमेरिका के सबसे लम्बे कद के राष्ट्रपति थे। उनका कद लगभग 6 फुट 4 इंच था।</li>
<li>9 साल की उम्र में ही लिंकन की माता का देहांत हो गया था, और इसके बाद उनकी सौतेली मां ने ही उनको पाला और उनकी सगी माँ जितना प्यार और प्रोत्साहन दिया।</li>
<li>लिंकन ने वकालत भी की थी परन्तु उसके लिए उन्होंने कोई डिग्री नहीं करी बल्कि खुद ही वकालत के विषय का अध्ययन किया था।</li>
<li>लिंकन की जिंदगी में बहुत सी असफलता आई थी, पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी थी। वह 21 वर्ष की उम्र में वार्ड मेंबर का चुनाव हार गए थे, 27 साल की उम्र में उनकी पत्नी ने उनको तलाक दे दिया था, 32,37,42 और 47 की उम्र में संसद में लगातार चुनाव हार गए थे ।</li>
<li>जब लिंकन इतने निराशा वाले वक्त से गुज़र रहे थे तब उन दिनों वे चाक़ू छुरियों से दूर रहते थे क्यूंकि उन्हें लगता था कि वह खुद को नुक्सान ना पहुंचाले।</li>
<li>52 वर्ष की उम्र में वह राष्ट्रपति बने और जब लिंकन राष्ट्रपति बने, तो एक महीने के बाद ही अमेरिका में गृह-युद्ध शुरू हो गया था, और आपको बता दें कि लिंकन इस युद्ध को जितने में सफल भी रहे थे।</li>
<li>लिंकन के पास एक बिल्ली थी जो वाइट हाउस में डिनर टेबल पर बैठकर खाना खाती थी।</li>
<li>एक दिन जब लिंकन अपने पड़ोसी से &#8216;<strong>जॉर्ज वाशिंगटन</strong>&#8216; की जीवनी की पुस्तक लेकर घर आये, तो अचानक से बारिश होने लग गई, और घर कच्चा होने के कारण किताब भीग गई थी। लिंकन इससे बहुत उदास हो गए थे, क्योंकि वह नई पुस्तक नहीं खरीद सकते थे, पुस्तक के बदले में उनको पड़ोसी के खेत में काम करना पड़ा था।</li>
<li>लिंकन अमेरिका के पहले राष्ट्रपति थे जो दाढ़ी रखते थे और तो और वह इकलोते राष्ट्रपति है जिनके नाम पर पेटेंट है।</li>
<li>1842 में लिंकन ने मैरी टोड से शादी जिसके बाद उनके 4 बेटे हुए परन्तु उनके 3 बेटे 18 की उम्र तक होते होते मर गए।</li>
<li>1876 में लिंकन की मौत के बाद २ चोरों ने उनकी कब्र में से उनकी लाश निकलने की कोशिश करी परन्तु वे नाकामयाब रहे। ऐसा करने के पीछे उनका मकसद वो पैसा था जो वो मांगते लाश के बदले।</li>
</ul>
<p>यह भी पढ़ें:-<a href="https://fundabook.com/know-about-the-great-person-sardar-patel-and-his-great-statue/">जानिए महान इंसान सरदार पटेल और उनकी महान प्रतिमा के बारे में</a></p>
<p>यह भी पढ़ें:-<a href="https://fundabook.com/how-law-is-make-in-parliment/">जानिए किसको है बिल बनाने की अनुमति और वह कैसे बनता है</a></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/know-about-the-biography-of-abraham-lincoln/">जानिए कैसे बने अब्राहम लिंकन अनेक असफलताओं के बाद इतने सफल इंसान</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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