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	<title>hindu Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>एक रहस्यमयी मंदिर जिसका दरवाज़ा खुलता है सिर्फ महाशिवरात्रि पर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Feb 2024 10:40:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>भारत में कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक शिव मंदिर है, जिनके दर्शन करने हर साल लाखों की तादाद में भक्त पहुंचते हैं। भारत में कई शिव मंदिर ऐसे भी हैं,जहां तक पहुँचने के लिए भक्तों को काफी दुर्गम यात्रा भी करनी होती है। आज हम आपको भगवान शिव के ऐसे रहस्यमयी मंदिर के बारे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत में कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक <a href="https://fundabook.com/ancient-temple/">शिव मंदिर</a> है, जिनके दर्शन करने हर साल लाखों की तादाद में भक्त पहुंचते हैं। भारत में कई शिव मंदिर ऐसे भी हैं,जहां तक पहुँचने के लिए भक्तों को काफी दुर्गम यात्रा भी करनी होती है।</p>
<p>आज हम आपको भगवान शिव के ऐसे रहस्यमयी मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां मत्था टेकने के लिए पूरे साल इंतजार करना पड़ता है। एक ऐसा मंदिर जो साल में सिर्फ एक बार खुलता है।</p>
<p>हम बात कर रहे हैं, <strong>जयपुर</strong> स्थित <strong>एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर</strong> की, जो साल में सिर्फ शिवरात्रि के दिन ही खुलता है। इसे शंकर गढ़ी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-17425 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/jaipur.jpg?resize=500%2C357&#038;ssl=1" alt="" width="500" height="357" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/jaipur.jpg?w=500&amp;ssl=1 500w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/jaipur.jpg?resize=300%2C214&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/jaipur.jpg?resize=100%2C70&amp;ssl=1 100w" sizes="(max-width: 500px) 100vw, 500px" /></p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span><a href="https://fundabook.com/mahadev-is-pleased-with-these-14-auspicious-flowers/">महाशिवरात्रि पर इन 14 फूलों से करें महादेव को प्रसन्न</a></div></strong></p>
<p>जयपुर में मोतीडूंगरी शंकरगढ़ की पहाड़ी स्थित एकलिंगजी और चांदनी चौक के राज-राजेश्वर मंदिर ऐसे दो मंदिर है जो वर्ष में सिर्फ एक बार खुलते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर ही यहां श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन होते हैं। यही कारण है कि यहां अलसुबह से भक्तों का तांता लगना शुरू हो जाता है।</p>
<p>जयपुर का यह मंदिर बिरला मंदिर के पीछे मोती डूंगरी के पास शिवडूंगरी पर स्थित है। इस मंदिर के पुजारी ने बताया कि इसकी स्थापना बहुत पुरानी है। यह जयपुर की स्थापना से भी पहले बनाया गया था। शिवरात्रि के दिन ही इसके पट आम भक्तों के लिए खुलते हैं।</p>
<p>यह महादेव मंदिर जयपुर राज परिवार का निजी मंदिर है और इस मंदिर में खुद जयपुर के महाराजा और महारानियां पूजा-अर्चना करने आते थे। खुद जयपुर की राजमाता गायत्री देवी तक कई बार यहाँ महादेव की पूजा करने पहुँचती थीं। आमजन को सालभर शिवरात्रि का ही इंतजार करना पड़ता है जब मंदिर के पट खुलते हैं और उन्हें एकलिंग जी के दर्शन होते है।</p>
<p>इस मंदिर में पहले शिव भगवान के साथ माता पार्वती और उनके पुत्र गणेश की मूर्ति की स्थापना की गयी थी, लेकिन कुछ समय बाद वह मूर्तियां अपने आप गायब हो गयी थी, लेकिन फिर से मूर्तियों की स्थापना की गयी, जो एक बार फिर से विचित्र तरीके से विलुप्त हो गयीं। जिसके बाद किसी ने भी दुबारा मंदिर में भगवान शंकर के अलावा किसी भी मूर्ति की स्थापना करने का साहस नहीं किया।</p>
<p>सावन के महीने में या किसी बड़े पारिवारिक कार्यक्रम में राज परिवार के सदस्य यहां पूजा-पाठ करने पहुंचते हैं। इस मंदिर से जुड़े सभी खर्च शाही परिवार द्वारा वहन किए जाते हैं।</p>
<p>चूंकि यह मंदिर साल में एक ही बार खुलता है इसलिए शिवरात्रि के दिन इसके प्रति श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण होता है। करीब एक किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ कर एवं कई घंटों तक लाइन में खड़े होकर लोग यहां भगवान के दर्शन करते हैं।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/perfect-remedies-to-please-mahadev-on-mahashivaratri/">महाशिवरात्रि पर महादेव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय</a> </div></strong></p>
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		<title>जन्माष्टमी: कब और कैसे करें जन्माष्टमी व्रत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 01 Sep 2023 09:53:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>जन्माष्टमी हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। इस पर्व को बाल-गोपाल श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पूरी श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाता है। हर साल हिन्दू कैलेंडर के भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>जन्माष्टमी हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। इस पर्व को बाल-गोपाल श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पूरी श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाता है।</p>
<p>हर साल हिन्दू कैलेंडर के भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। हिन्दू धर्म की मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म पांच हजार साल पहले भाद्रपद मास में रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी तिथि की आधी रात को हुआ था।</p>
<h2><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-19072" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/janamashtmi-fasting-how-when.jpg?resize=660%2C411&#038;ssl=1" alt="जन्माष्टमी" width="660" height="411" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/janamashtmi-fasting-how-when.jpg?w=660&amp;ssl=1 660w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/janamashtmi-fasting-how-when.jpg?resize=300%2C187&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 660px) 100vw, 660px" />कब है जन्माष्टमी व्रत</h2>
<p>इस साल 2023 को स्मार्त यानि गृहस्थियों के लिए जन्माष्टमी व्रत 6 सितम्बर को है l परंपरा के अनुसार अष्टमी की आधी रात के बाद ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा की जाती है।</p>
<p>इस दिन व्रतानुष्ठान अष्टमी तिथि से शुरू होती है और अगले दिन नवमी पर खत्म होती है। फिर भी कई लोग, अर्द्धरात्रि पर रोहिणी नक्षत्र का योग होने पर सप्तमी और अष्टमी पर व्रत रखते हैं। कुछ भक्तगण उदयव्यापिनी अर्थात शुरू होती अष्टमी पर उपवास करते हैं।</p>
<p>शास्त्रकारों ने व्रत -पूजन, जपादि के लिए अर्द्धरात्रि अर्थात अष्टमी और नवमी के बीच की रात्रि में रहने वाली तिथि को ही मान्यता दी है।</p>
<p>विशेषकर स्मार्त लोग अर्द्धरात्रिव्यापिनी अष्टमी को यह व्रत करते हैं। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, चंडीगढ़ आदि में में स्मार्त धर्मावलम्बी अर्थात गृहस्थ लोग इसी परम्परा का अनुसरण करते हुए सप्तमी युक्ता अर्द्धरात्रिकालीन वाली अष्टमी को व्रत, पूजा आदि करते आ रहे हैं जबकि मथुरा, वृंदावन सहित उत्तर प्रदेश आदि प्रदेशों में उदयकालीन अष्टमी के दिन ही कृष्ण जन्मोत्सव मनाते आ रहे हैं।</p>
<p>भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली <a href="http://www.uptourism.gov.in/post/hi/mathura-vrindawan" target="_blank" rel="noopener noreferrer">मथुरा</a> की परम्परा को आधार मानकर मनाई जाने वाली जन्माष्टमी के दिन ही केन्द्रीय सरकार अवकाश की घोषणा करती है। वैष्णव संप्रदाय के अधिकांश लोग उदयकालिक नवमी युता जन्माष्टमी व्रत के लिए ग्रहण करते हैं।</p>
<h2>कैसे करें जन्माष्टमी व्रत</h2>
<p>व्रत अष्टमी तिथि से शुरू होता है। इस दिन सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद घर के मंदिर को साफ सुथरा करें और जन्माष्टमी की तैयारी शुरू करें।</p>
<p>रोज की तरह पूजा करने के बाद बाल कृष्ण लड्डू गोपाल जी की मूर्ति मंदिर में रखें और इसे अच्छे से सजाएं। माता देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा जी का चित्र भी लगा सकते हैं।</p>
<p>इसके बाद, जप-ध्यान व व्रतानुष्ठान करके &#8216;ओम नमो भगवते वासुदेवाय&#8217; मंत्र जाप करें। पूरा दिन व्रत रखें। फलाहार कर सकते हैं। इसके साथ ही यथा संभव भगवान का भजन-कीर्तन, स्वाध्यान, पाठ व भगवान से संबन्धित प्रसंगों का अध्ययन व सेवन करें।</p>
<p>मन और वाणी को संयम में रखें। काम, क्रोध, लोभ, द्वेष, हिंसा, क्लेश, दुर्वचन, ठेस लगाना आदि अप्रिय कार्यों और मांस-मदिरा आदि दुर्व्यसनों से दूर रहने का अभ्यास करना ही उपवास है। इसके लिए <a href="https://fundabook.com/learn-how-to-meditate/">ध्यान करें</a>। उपवास केवल अन्न से सिद्ध नहीं होता बल्कि यह क्रिया-कलापों और आचरण से भी परिलक्षित होना अनिवार्य है।</p>
<h2>जन्माष्टमी पर मंत्र साधना</h2>
<p><strong>भगवान कृष्ण की आराधना</strong> के लिए आप यह मंत्र पढ़ सकते हैं</p>
<p><strong><em>ज्योत्स्नापते नमस्तुभ्यं नमस्त ज्योतिशां पते!<br />
</em><em>नमस्ते रोहिणी कान्त अध्य मे प्रतिगृह्यताम्!!</em></strong></p>
<p><strong>संतान प्राप्ति के लिए:</strong> संतान की इच्छा रखने वाले दंपति, संतान गोपाल मंत्र का जाप पति-पत्नी दोनों मिलकर करें।</p>
<p><em>देवकीसुत गोविंद वासदेव जगत्पते!<br />
</em><em>देहिमे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:!! दूसरा मंत्र:<br />
</em><em>क्लीं ग्लौं श्यामल अंगाय नमः!!</em></p>
<p><strong>विवाह में हो रहे विलम्ब के लिए</strong>:</p>
<p><strong><em>ओम् क्ली कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा।</em></strong></p>
<p>इन मंत्रों की एक माला अर्थात 108 मंत्र कर सकते हैं।</p>
<h2>जन्माष्टमी व्रत यानि व्रतराज</h2>
<p>कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजन के साथ-साथ व्रत रखना बहुत फलदायी माना जाता है। इसे व्रत व्रतराज भी कहा जाता है। इस व्रत का विधि-विधान से पालन करने से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत सबसे आसान व्रत कहा जा सकता है जिसमें फलाहार, उबले आलू, साबुदाना आदि का सेवन किया जा सकता है।</p>
<h2>रात्रि बारह बजे तक व्रत का पालन</h2>
<p>जन्माष्टमी का व्रत रात बारह बजे तक किया जाता है। इस व्रत को करने वाले रात बारह बजे तक कृष्ण जन्म का इंतजार करते हैं। उसके पश्चात् पूजा आरती होती है और फिर प्रसाद मिलता है। प्रसाद के रूप में धनिया और माखन मिश्री दिया जाता है क्योंकि ये दोनों ही वस्तुएं श्री कृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं। उसके पश्चात् प्रसाद ग्रहण करके व्रत पारण किया जा सकता है। हालांकि सभी के यहां परम्पराएं अलग-अलग होती हैं। कोई प्रात:काल सूर्योदय के बाद व्रत पारण करते हैं तो कोई रात में प्रसाद खाकर व्रत खोल लेते हैं। आप अपने परिवार की परम्परा के अनुसार ही व्रत पारण करें।।</p>
<p>दिन भर अन्न ग्रहण नहीं करें। मध्य रात्रि को एक बार फिर पूजा की तैयारी शुरू करें। रात को 12 बजे भगवान के जन्म के बाद भगवान की पूजा करें और भजन करें। गंगा जल से श्री कृष्ण को स्नान कराएं और उन्हें सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाएं। भगवान को झूला झुलाएं और फिर भजन, गीत-संगीत के बाद प्रसाद का वितरण करें।</p>
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		<title>रक्षाबन्धन : 30 या 31 अगस्त, कब बांधी जाएगी भाई को राखी, जाने इस पोस्ट के माध्यम से</title>
		<link>https://fundabook.com/raksha-bandhan-festival-date-time-2023/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Aug 2023 05:32:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>रक्षाबन्धन एक हिन्दू व जैन त्यौहार  है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। राखी ईश्वर की ओर से बांधा जाने वाला साक्षात सुरक्षा कवच है।  रक्षाबन्धन का पर्व भाई-बहनों के आपसी प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-weight: 400;"><a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%A8" target="_blank" rel="noopener noreferrer"><b>रक्षाबन्धन</b></a> एक हिन्दू व जैन त्यौहार  है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। राखी ईश्वर की ओर से बांधा जाने वाला साक्षात सुरक्षा कवच है। </span></p>
<p>रक्षाबन्धन का पर्व भाई-बहनों के आपसी प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार रक्षाबन्धन का त्योहार हमेशा भद्रा रहित काल में मनाना शुभ होता है। अगर रक्षाबंधन के दिन भद्रा होती है तो ऐसे में बहनों को अपने भाईयों की कलाई में राखी नहीं बांधनी चाहिए।</p>
<p>भद्रा की समाप्ति के बाद ही राखी बांधना चाहिए। इस बार रक्षा बंधन की तिथि  को लेकर कुछ मतभेद है। दरअसल इस वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर भद्रा का साया रहने के कारण रक्षाबंधन 30 और 31 अगस्त को मनाने को लेकर असमंजस बना हुआ है।</p>
<p>जानते हैं रक्षाबंधन का त्योहार 30 या 31 अगस्त कब मनाएं और शुभ महूर्त :-</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone wp-image-54699 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/Raksha-Bandhan-date-time-2023.webp?resize=696%2C450&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="450" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/Raksha-Bandhan-date-time-2023.webp?w=768&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/Raksha-Bandhan-date-time-2023.webp?resize=300%2C194&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/Raksha-Bandhan-date-time-2023.webp?resize=150%2C97&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/08/Raksha-Bandhan-date-time-2023.webp?resize=696%2C450&amp;ssl=1 696w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2>रक्षाबन्धन का महत्व</h2>
<p>रक्षाबन्धन पर्व को भाई-बहन के प्रेम और सदभाव के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है इसके बदले में भाई बहन को भेंट देता है एवं सदैव उसकी रक्षा करने का वचन भी देता है। अच्छे मुहूर्त अथवा भद्रारहित काल में भाई की कलाई में राखी बांधने से भाई को कार्य सिद्धि और विजय प्राप्त होती है।</p>
<h2>रक्षाबन्धन के दौरान कब पड़ रही है भद्रा काल ?</h2>
<p>इस साल भद्रा काल होने के कारण रक्षाबन्धन  का मुहूर्त  30 अगस्त को है या 31 को। इसको लेकर सभी असमंजस में है। इस साल पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को सुबह 10:58 मिनट से शुरू होगी, जो 31 अगस्त 2023 को सुबह 07:05 तक चलेगी।</p>
<p>लेकिन शास्त्रों  के अनुसार पूर्णिमा के साथ ही भद्राकाल भी शुरू हो जाएगा। इसमें हिन्दू पंचांग के अनुसार राखी बांधना शुभ नहीं रहता है। ऐसे में एक ही दिन पूर्णिमा और <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AD%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE" target="_blank" rel="noopener">भद्रा</a> लगने के कारण आपको मुहूर्त का खास ख्याल रखना होगा।</p>
<h2>राखी बांधने का शुभ महूर्त</h2>
<p>रक्षाबन्धन का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त को रात 09 बजकर 01 मिनट के बाद से शुरू होगा और इस मुहूर्त का समापन 31 अगस्त को सूर्योदय काल में सुबह 07 बजकर 05 बजे पर होगा.</p>
<h2>क्यों नहीं बांधते भद्रा में राखी?</h2>
<p>हिन्दू शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि शूर्पणखा ने अपने भाई रावण को भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, जिस वजह से रावण के पूरे कुल का सर्वनाश हो गया था। इसलिए ऐसा माना जाता है कि बहनों को भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए।</p>
<h2>इन बातों का भी रखें ख्याल?</h2>
<ul>
<li>राखी बांधते समय अच्छे से नहा-धोकर साफ सुथरे कपड़े पहनें।</li>
<li>रक्षाबंधन वाले दिन भाई को राखी बांधते समय मुहूर्त का खास ख्याल रखें।</li>
<li>राखी से पहले जब भाई की पूजा करें, तो उस समय अक्षत यानि चावल के दाने टूटे हुए न हो।</li>
<li>आरती करते समय थाल में रखा हुआ दिया शुद्ध हो, वो टुटा हुआ नहीं होना चाहिए।</li>
<li>राखी बांधते समय भाई या बहन का चेहरा दक्षिण दिशा की तरफ नहीं होना चाहिए। इस दिशा में मुख करते हुए राखी बांधने पर उम्र कम होती है।</li>
<li>राखी बांधते समय भाई को टिका लगाते समय रोली या चंदन का इस्तेमाल करें। इस समय सिंदूर का इस्तेमाल न करें क्योंकि सिंदूर सुहाग की निशानी होता है।</li>
</ul>
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		<title>जानिये आप  में से किस पर होगी धन की बारिश महाशिवरात्रि पर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Feb 2020 04:15:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[OMG!!]]></category>
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		<category><![CDATA[shiv pooja]]></category>
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		<category><![CDATA[Traditions in India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महाशिवरात्रि हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है। यह भगवान शिव और माँ गौरी के विवाह का दिन है। इस दिन भगवान शिव और पार्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इस साल 2020 में महाशिवरात्रि 21 फरवरी को है। महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त: महाशिवरात्रि की तिथि: 21 फरवरी 2020 चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 21 फरवरी 2020 को शाम [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>महाशिवरात्रि हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है। यह भगवान शिव और माँ गौरी के विवाह का दिन है। इस दिन भगवान शिव और पार्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इस साल 2020 में महाशिवरात्रि 21 फरवरी को है।</p>
<p><strong>महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त:</strong><br />
<strong>महाशिवरात्रि की तिथि: </strong>21 फरवरी 2020<br />
<strong>चतुर्थी तिथि प्रारंभ:</strong> 21 फरवरी 2020 को शाम 5 बजकर 20 मिनट से</p>
<p><strong>चतुर्थी तिथि समाप्‍त: </strong>22 फरवरी 2020 को शाम 7 बजकर 2 मिनट तक</p>
<p>यह पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। यह पर्व महादेव शिव और देवी पार्वती के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है ।</p>
<p>ऐसी भी मान्यता है की इस दिन ही पहला शिवलिंग प्रकट हुआ था। इस दिन ही भगवान् शिव ने &#8216;कालकूट&#8217; नाम के विष को अपने कंठ में रख लिया था जो कि समुद्र मंथन के समय बाहर आया।</p>
<p>वैसे तो हर महीने त्रयोदशी/चतुर्दशी को शिवरात्रि होती है। यानि साल में कुल 12 शिवरात्रि होती है लेकिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।</p>
<h2>इस बार है खास</h2>
<p>इस बार शिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस साल महाशिवरात्रि सोमवार को है। सोमवार का स्वामी चन्द्रमा है। ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा को सोम कहा गया है और भगवान् शिव को सोमनाथ।</p>
<p>अतः सोमवार को शिवरात्रि का होना बहुत ही शुभ माना गया है। सोमवार को शिवजी की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-12807" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2018/02/Mahashivratri.jpg?resize=600%2C338&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="338" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/02/Mahashivratri.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/02/Mahashivratri.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p>इस दिन अगर भोलेबाबा और माँ पार्वती की सच्चे मन से भक्ति की जाए तो वो अपने भक्तों की सारी मनोकामना पूरी करते है। मंदिरों में इस दिन बेल पत्र,दूध, दही,जल,फलाहार आदि चढ़ाये जाते है।</p>
<h2>किस राशि के लिए है खास</h2>
<p>चूंकि इस बार महाशिवरात्रि पर खास योग बन रहे हैं । यह सभी राशि वालों के लिए अत्यंत लाभकारी है। सच्चे मन से व्रत करने पर और जल, विल्वपत्र मात्र से ही पूजा करने पर भगवान शिव प्रसन्न होंगे, ऐसा ज्योतिष के जानकारों का मानना है।</p>
<p>साथ ही गरीबों को भोजन कराने और जिनके विवाह नहीं हो रहा उनका विवाह का प्रयत्न करवाने मात्र से ही अभीष्ट फल सिद्धि का भी योग है ।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:</strong></p>
<ul>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/perfect-remedies-to-please-mahadev-on-mahashivaratri/">महाशिवरात्रि पर महादेव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय</a></strong></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/mahadev-is-pleased-with-these-14-auspicious-flowers/">महाशिवरात्रि पर इन 14 फूलों से करें महादेव को प्रसन्न</a></strong></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/a-mysterious-temple-whose-door-opens-only-on-mahashivaratri/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">एक रहस्यमयी मंदिर जिसका दरवाज़ा खुलता है सिर्फ महाशिवरात्रि पर !!!!</a></strong></li>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/mahashivratri-2021-know-the-auspicious-time-worship-hindi/">महाशिवरात्रि 2021: जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त</a></strong></li>
</ul>
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		<title>जानिए बुध ग्रह के वक्री होने से क्या होगा 12 राशियों पर असर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 01 Mar 2019 06:32:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[astro]]></category>
		<category><![CDATA[astrology]]></category>
		<category><![CDATA[culture]]></category>
		<category><![CDATA[hindu]]></category>
		<category><![CDATA[hindu culture]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu religion]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मार्च में बुध ग्रह वक्री होने वाला है। जानते हैं कि इसका लोगों के जीवन में क्या असर पड़ सकता है। बुध ग्रह 5 मार्च से लेकर 28 मार्च तक वक्री रहेगा।इन सितारों की वजह से ही हमारे जीवन में खुशियां या फिर नकारात्मकता आती है। इनकी हल्की सी गति भी मनुष्यों के व्यवहार को [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मार्च में बुध ग्रह वक्री होने वाला है। जानते हैं कि इसका लोगों के जीवन में क्या असर पड़ सकता है। बुध ग्रह 5 मार्च से लेकर 28 मार्च तक वक्री रहेगा।इन सितारों की वजह से ही हमारे जीवन में खुशियां या फिर नकारात्मकता आती है। इनकी हल्की सी गति भी मनुष्यों के व्यवहार को प्रभावित करती है।वक्री बुध का हमारे जीवन में बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि जहां जिस भाव में सामान्य तौर पर बुध ग्रह अच्छा प्रभाव देते हैं, वहां उसका उल्टा प्रभाव देंगे। बुध का हमारे जीवन में विशेष महत्व है, क्योंकि बुध हमारी बुद्धि, विद्या, गणित, सांख्यिकी व व्यापार आदि का कारक ग्रह माना जाता है। तो आइए जानते हैं कि प्रत्येक राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा वक्री बुध का?</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-17410" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/budh-vakri.jpg?resize=500%2C337&#038;ssl=1" alt="" width="500" height="337" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/budh-vakri.jpg?w=500&amp;ssl=1 500w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/03/budh-vakri.jpg?resize=300%2C202&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /></p>
<h2><strong>मेष राशि </strong></h2>
<p>आपके 12 भाव में बुध ग्रह वक्री होने जा रहे हैं। हालांकि 12 भाव में बुध ग्रह श्रेष्ठ फल प्रदाता नहीं है लेकिन यहां स्थित आपको विशेष लाभ दिला सकते हैं। सट्टेबाजी में विशेष लाभ आपको प्राप्त हो सकता है। किसी श्रेष्ठ कार्य में खर्च बढ़ेगा। किसी विशिष्ट कार्य के लिए यात्रा कर सकते हैं, साथ ही गूढ़ अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। इस समय मन की एकाग्रता आपको विशेष लाभ दिलाएगी। विरोधी परास्त होंगे। अचानक शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं। इस समय में बड़ा परिवर्तन होगा, जो आपके लिए विशेष लाभकारी होगा।</p>
<h2><strong>वृषभ राशि </strong></h2>
<div></div>
<div>आपके ग्यारहवें भाव में वक्री बुध गोचर करने जा रहे हैं। यहां स्थित बहुत अच्छे फलप्रदायक माने गए हैं लेकिन वक्री बुध उल्टा प्रभाव देंगे यानी अपनी इच्छा-महत्वाकांक्षा की पूर्ति होने में समस्या पैदा हो सकती है। मित्र और रिश्तेदारों से परेशानी प्राप्त हो सकती है। अगर आप प्रेम संबंध में लिप्त हैं, तो यहां आपको परेशानी दे सकते हैं। वक्री बुध से लंबी यात्राओं से परेशानी हो सकती है। सहयोगियों से सहयोग प्राप्त होने में परेशानी हो सकती है। इस समय बुध आपको भाई-बहन, मामा-मौसी आदि से लड़ाई-झगड़ा करवा सकता है। इससे परेशानी आपको आ सकती है। इस समय आपको कान संबंधी परेशानी हो सकती है।</div>
<div></div>
<h2><strong>मिथुन राशि</strong></h2>
<div></div>
<p>आपको बता दें कि मिथुन राशि के जातकों की राशि का स्वामी बुध ही है। बुध के वक्री होने से आपके बातचीत के स्तर पर असर होने की संभावना है। वक्ता के तौर पर मिथुन राशि के लोगों की खास पहचान है लेकिन ग्रहों की चाल में होने वाली तब्दीली से आपकी क्षमता प्रभावित होगी। बोलते समय हो सकता है आप अपनी बात ही भूल जाएं और आपको बंधा हुआ सा महसूस हो। आप इस चीज को अपने ऊपर हावी ना होने दें।</p>
<h2><strong>कर्क राशि</strong></h2>
<p>आमतौर पर कर्क राशि के जातकों को चुपचाप तमाशबीन बने रहने के लिए जाना जाता है लेकिन बुध के वक्री होने के बाद से वो चुप नहीं रहने वाले हैं। संभावना है कि बुध के इस परिवर्तन से आप इमोशनल और थोड़े चिड़चिड़े हो सकते हैं। किसी बड़ी वजह के बिना ही आपको छोटी छोटी बात पर गुस्सा आ सकता है। सलाह है कि आप कुछ भी बोलने से पहले धैर्य रखें।</p>
<h2><strong>सिंह राशि</strong></h2>
<p>सिंह राशि के लोग अपने जोशीले और सकारात्मक शख्सियत के लिए जाने जाते हैं लेकिन मार्च के महीने में ऐसा नजर नहीं आने वाला है। संभावना है कि आपकी ऊर्जा काफी कम रहेगी। आप काफी आलस महसूस करेंगे और चीजों को लेकर आप में रूचि नहीं रहेगी।</p>
<h2><strong>कन्या राशि</strong></h2>
<p>आप जीवन में बहुत सारी चीजों को लेकर कंफ्यूज रहेंगे। आप हर चीज को लेकर बहुत ज्यादा ना सोचें और इस वक्त को गुजर जाने दें। बेहतर होगा कि आप धैर्य रखें और असमंजस की स्थिति को खुद पर हावी ना होने दें।</p>
<h2><strong>तुला राशि</strong></h2>
<p>हम जानते हैं कि इस राशि के जातक अपने दिल की बात को अनसुना करके सामने वाले की खुशियों का ध्यान रखते हैं। लेकिन इस पूरी अवधि के दौरान आप अपने मन की बात जाहिर करने वाले हैं। आपको यही सलाह दी जाती है कि आप ठंडे दिमाग से काम लें और अपनी बातों से किसी को चोट ना पहुंचाए।</p>
<h2><strong>वृश्चिक राशि</strong></h2>
<p>आपके पंचम भाव में बुध ग्रह वक्री होने जा रहे हैं। इस अवधि में वासनापरक विचार सिर्फ आपको अवसादित ही नहीं करेंगे, बल्कि जलील भी करवा सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण आपकी नित्य चर्चा में भी व्यवधान उपस्थित हो जाएगा। वैसे नौकरी के हालात अच्छे रहेंगे। यद्यपि काम का बोझ थकाने वाला होगा। स्त्री वर्ग से आपका व्यवहार मधुर नहीं रह पाएगा। विरोधी प्रबल होंगे। विपरीत परिस्थितियों में प्रतिरोधात्मक शक्ति का विकास प्राप्त करने का प्रयत्न करें। भारी व्यय होने की भी संभावना है।</p>
<h2><strong>धनु राशि</strong></h2>
<p>आपके चतुर्थ भाव में बुध ग्रह वक्री होने जा रहे हैं। थोड़े से लाभ के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ सकती है। नौकरी के हालात बदतर होते जाएंगे। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं परेशान करेंगी। परिवारजनों से संबंध भी इस अवधि में अच्छे नहीं रहेंगे। विरोधी प्रबल होंगे। व्यर्थ की यात्राओं से बचें। वैसे मुकदमेबाजी और न्यायालयों के मामलों के लिए यह समय अच्छा है। जीवन शक्ति और स्फूर्ति में कमी महसूस होने के कारण झगड़े और झंझटों से दूर रहने का प्रयत्न करें।</p>
<h2><strong>मकर राशि</strong></h2>
<p>आपके तीसरे भाव में बुध ग्रह वक्री होने जा रहे हैं। इस अवधि में अचानक लाभ होने की संभावना है। अगर वसीयत प्राप्त करने की संभावना है या आप उसको प्राप्त करने के लिए इच्छुक हैं, तो आप उसे प्राप्त कर सकते हैं। आपका मन धार्मिक क्रिया-कलापों की ओर झुका रहेगा। कुछ अतीन्द्रिय अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं। पारिवारिक माहौल सौहार्दपूर्ण रहेगा। अचानक यात्राएं सफलतादायक सिद्ध होंगी। आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और सम्मान में इजाफा होगा। छोटी-मोटी बीमारियां मानसिक शांति भंग कर सकती हैं। आप तीर्थाटन पर जा सकते हैं। कुल मिलाकर सुखी रहेंगे।</p>
<h2><strong>कुंभ राशि</strong></h2>
<p>बुध ग्रह के वक्री होने के कारण आपको बिना किसी वजह के कुंठा और निराशा हो सकती है। आपको चीजों को देखने के लिए दूसरा नजरिया अपनाना चाहिए। आपको सकारात्मक रहना है, तब आपको एहसास होगा कि चीजें उतनी बुरी भी नहीं हुई है जितनी नजर आ रही हैं।</p>
<h2><strong>मीन राशि</strong></h2>
<p>आपके प्रथम भाव में वक्री होने जा रहे हैं बुध ग्रह। यह अच्छा समय नहीं है, क्योंकि आपके भागीदार या सहयोगी आपको नीचा दिखाएंगे। औरों की लापरवाही और असफलताओं से आप चिंतित रहेंगे। रोजमर्रा के कामों में भी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। बेबुनियाद इल्जाम आप पर मढ़े जाएंगे। छोटे-मोटे झंझट या विवादों से बचें। स्त्री वर्ग से आपके संबंध अच्छे नहीं रहेंगे। जहां तक संभव हो, फालतू की यात्रा कम करें। व्यापार के बड़े-बड़े निर्णय लेने या विकास की योजनाओं पर ध्यान देने के लिए यह आवश्यक है कि आप पूरी जांच-परख करके ही ऐसा करें।</p>
<div></div>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>महाभारत की द्रौपदी के बारे में कुछ रोचक तथ्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Dec 2018 10:48:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interesting Facts]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[Draupadi]]></category>
		<category><![CDATA[hindu]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[mahabharata]]></category>
		<category><![CDATA[रोचक तथ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महाभारत से बहुत सी लोकप्रिय कथाएं जुड़ी हुई है। द्रौपदी महाभारत के मुख्य पात्रों में से एक है। द्रौपदी एक संपूर्ण नारी थी। एक प्रतिष्ठित कुरु राज्य की रानी होने के बावजूद द्रौपदी ने सब से ज़्यादा कष्ट सहा था। आइए जानते है द्रौपदी के बारे में कुछ रोचक तथ्य: द्रौपदी के पांच नाम द्रौपदी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महाभारत से बहुत सी लोकप्रिय कथाएं जुड़ी हुई है। द्रौपदी महाभारत के मुख्य पात्रों में से एक है। द्रौपदी एक संपूर्ण नारी थी। एक प्रतिष्ठित कुरु राज्य की रानी होने के बावजूद द्रौपदी ने सब से ज़्यादा कष्ट सहा था। आइए जानते है द्रौपदी के बारे में कुछ रोचक तथ्य:</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-16110" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/12/draupadi.jpg?resize=600%2C396&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="396" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/12/draupadi.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2018/12/draupadi.jpg?resize=300%2C198&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<h3>द्रौपदी के पांच नाम</h3>
<p>द्रौपदी को पांचाली (अर्थात पांचाल राज्य की), यज्ञसेनी (अर्थात यज्ञ या आहुति से उत्पन्न), महाभारती (भारत के पांच महान वंशजों की पत्नी) और सैरंध्री इन पांच नामों से भी जाना जाता था।</p>
<h3>महाकाली का अवतार</h3>
<p>द्रौपदी महाकाली का अवतार थी। वह भगवान कृष्ण की सहायता के लिए पैदा हुई थी, ताकि वह सभी अभिमानी राजाओं को नष्ट कर सके।</p>
<h3>भगवान शिव का वरदान</h3>
<p>द्रौपदी को पांच पति भगवान शिव के वरदान से मिले थे। वह अपने पिछले जन्म में 14 गुणों वाला पति चाहती थी। एक व्यक्ति में ये 14 गुण होने असंभव थे। इसीलिए भगवान शिव ने उन्हें पांच व्यक्तियों की पत्नी बनने का वरदान दिया और कहा उसके अगले जन्म में उसे ये 14 गुण इन पांच पतियों में मिलेगें।</p>
<h3>कुत्तों को दिया था श्राप</h3>
<p>पांडवों से विवाह के बाद वे सभी इस बात पर सहमत हुए थे कि एक समय में केवल एक भाई ही द्रौपदी के कक्ष में जा सकेगा, अन्य और कोई नहीं और जाने से पहले वह अपने जूते दरवाज़े पर रख देगा। जूतों से यह पता रहेगा कि कक्ष में पहले ही कोई है। एक दिन युधिष्ठिर द्रौपदी के साथ कक्ष में थे और तभी एक कुत्ता दरवाज़े के बाहर से उनके जूते चुरा ले गया।</p>
<p>इस बात से अनजान अर्जुन कक्ष में प्रवेश कर गए और उन्होंने युधिष्ठिर को द्रौपदी के साथ देख लिया। द्रौपदी को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई और उसने क्रोध में आकर जूते चुराने वाले कुत्ते को यह श्राप दे दिया, &#8220;सारी शर्म को भूलकर सारा संसार तुम्हें सार्वजनिक रूप से मैथुन करते हुए देखेगा&#8221;।</p>
<h3>ऋषि दुर्वासा ने बचाया था</h3>
<p>चीर हरण के समय ऋषि दुर्वासा के एक वरदान ने द्रौपदी की रक्षा की थी। एक बार गंगा में स्नान करते वक्त ऋषि दुर्वासा की लंगोटी गंगा नदी में बह गई। तब द्रौपदी ने अपने वस्त्र का एक कपड़ा फाड़कर उन्हें ढांकने के लिए दिया। इसीलिए ऋषि ने उसे कपड़े की एक न अंत होने वाली पट्टी का वरदान दिया था। जब दुशासन ने द्रौपदी का चीर हरण किया, उसी वरदान ने द्रौपदी की रक्षा की थी।</p>
<h3>पांचों पतियों में से किसे अधिक प्रेम करती थी</h3>
<p>द्रौपदी पांचों पतियों में से अर्जुन को सबसे ज्यादा प्रेम करती थी,पर अर्जुन  कृष्ण की बहन सुभद्रा से सबसे ज़्यादा प्यार करते थे। पांचों में से महाबली भीम द्रौपदी को सबसे अधिक प्रेम करते थे।</p>
<h3>द्रौपदी की शर्त</h3>
<p>द्रौपदी ने पांचों पांडवों की पत्नी बनने के बाद यह शर्त रखी थी कि वह अपना राज्य किसी अन्य स्त्री के साथ नहीं बांटेगी, पांडव अपनी अन्य पत्नियों को इंद्रप्रस्थ नहीं ला सकते थे। लेकिन अर्जुन कृष्ण जी की सलाह पर अपनी पत्नी सुभद्रा को वहां लाने में सफल हुए थे।</p>
<h3>द्रौपदी के स्वयंवर में दुर्योधन ने नहीं लिया था सहभाग</h3>
<p>द्रौपदी के स्वयंवर से पहले ही दुर्योधन का विवाह कलिंग की राजकुमारी भानुमति से हो चुका था। दुर्योधन ने भानुमति को यह वचन दिया था कि उसके इलावा वह किसी और को अपनी पत्नी नहीं बनाएगा और उसने इस वचन को निभाया। इसीलिए दुर्योधन ने द्रौपदी के स्वयंवर में सहभाग नहीं लिया था।</p>
<p>यह भी पढ़ें :</p>
<p><a href="https://fundabook.com/some-interesting-facts-related-to-the-mahabharata/">महाभारत से जुड़े कुछ रोचक तथ्य</a></p>
<p><a href="https://fundabook.com/mahabharata-hindu-epic-if-draupdi-loved-karna-why-did-she-marry-the-pandavas/">प्रमाण सहित: क्या सचमुच में कर्ण से प्रेम करती थीं द्रौपदी??</a></p>
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		<title>एक ऐसा मंदिर, जहाँ प्रसाद में मिलते हैं सोने चांदी के जेवर&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 May 2017 07:42:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[hindu]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu religion]]></category>
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		<category><![CDATA[Madhya Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जब भी हम किसी मंदिरों या धार्मिक स्थलों में जाते हैं तो हमें प्रसाद के रूप में मिठाई या फल जरूर मिलते है. लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में ऐसे मंदिर भी हैं जहां प्रसाद के रूप में भक्तों को सोने और चांदी के आभूषण दिए जाते हैं. आज हम इस लेख में भारत के एक ऐसे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>जब भी हम किसी मंदिरों या धार्मिक स्थलों में जाते हैं तो हमें प्रसाद के रूप में मिठाई या फल जरूर मिलते है. लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में ऐसे मंदिर भी हैं जहां प्रसाद के रूप में भक्तों को सोने और चांदी के आभूषण दिए जाते हैं. आज हम इस लेख में भारत के एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जहां भक्तों को प्रसाद के रूप में मिलते हैं सोने चांदी के जेवर&#8230;</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-10789" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/05/mahalaxmi-temple-ratlam.jpg?resize=600%2C400&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="400" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/mahalaxmi-temple-ratlam.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/mahalaxmi-temple-ratlam.jpg?resize=300%2C200&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /><strong>हिन्दू धर्मग्रंथों</strong> और <strong>पुराणों</strong> में धन और समृद्धि के लिए महालक्ष्मी देवी की पूजा की जाती है. <strong>मध्यप्रदेश</strong> में <strong>रतलाम</strong> नामक स्थान पर<strong> महालक्ष्मी देवी</strong> सबसे प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है. यहाँ साल भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है और भक्त यहां करोड़ों रुपए के जेवर और नकदी चढ़ाते हैं. खासतौर पर <strong>धनतेरस</strong> से लेकर <strong>दिवाली</strong> के दिन परिसर को सोने, चांदी और नोटों की मालाओं से सजाया जाता है.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-10788" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/05/mahalaxmi-temple-madhya-pradesh.jpg?resize=600%2C400&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="400" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/mahalaxmi-temple-madhya-pradesh.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/mahalaxmi-temple-madhya-pradesh.jpg?resize=300%2C200&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" />लेकिन भक्त यहां से खाली हाथ नहीं जाते है. दिवाली के बाद जाने वाले भक्तों को आभूषण और नगदी, प्रसाद के रुप में दी जाती है. प्रसाद को लेने के लिए लोग दूर-दूर से इस मंदिर में पहुंचते हैं. लेकिन प्रसाद के रूप में मिलें आभूषण और नगदी को लोग माता का आशीर्वाद मानते है और हमेशा संभाल कर रखते हैं.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-10787" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/05/Mahalaxmi-Temple.jpg?resize=600%2C450&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="450" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/Mahalaxmi-Temple.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/Mahalaxmi-Temple.jpg?resize=300%2C225&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/Mahalaxmi-Temple.jpg?resize=80%2C60&amp;ssl=1 80w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/Mahalaxmi-Temple.jpg?resize=265%2C198&amp;ssl=1 265w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/Mahalaxmi-Temple.jpg?resize=560%2C420&amp;ssl=1 560w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
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