<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Astrology Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
	<atom:link href="https://fundabook.com/topic/astrology/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://fundabook.com/topic/astrology/</link>
	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
	<lastBuildDate>Mon, 05 Oct 2026 11:13:31 +0000</lastBuildDate>
	<language>hi</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1.2</generator>
<site xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">100044268</site>	<item>
		<title>श्राद्ध क्या है? पितृ पक्ष में श्राद्ध की सही विधि, तिथि और नियम</title>
		<link>https://fundabook.com/what-is-shraddha-the-right-method-dates-and-rules-for-shraddha-during-pitru-paksha/</link>
					<comments>https://fundabook.com/what-is-shraddha-the-right-method-dates-and-rules-for-shraddha-during-pitru-paksha/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Oct 2026 11:11:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[Interesting Facts]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://fundabook.com/?p=63046</guid>

					<description><![CDATA[<p>&#8220;श्राद्ध&#8221; शब्द &#8220;श्रद्धा&#8221; से बना है, यानी पूरे सम्मान और विश्वास के साथ किया गया कर्म। अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए जल, भोजन और दान अर्पित करना ही श्राद्ध कहलाता है। मान्यता है कि जो लोग इस संसार से जा चुके हैं, वे हमारे आशीर्वाद के रूप में हमारे साथ रहते [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/what-is-shraddha-the-right-method-dates-and-rules-for-shraddha-during-pitru-paksha/">श्राद्ध क्या है? पितृ पक्ष में श्राद्ध की सही विधि, तिथि और नियम</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p dir="ltr">&#8220;श्राद्ध&#8221; शब्द &#8220;श्रद्धा&#8221; से बना है, यानी पूरे सम्मान और विश्वास के साथ किया गया कर्म। अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए जल, भोजन और दान अर्पित करना ही श्राद्ध कहलाता है।</p>
<p dir="ltr">मान्यता है कि जो लोग इस संसार से जा चुके हैं, वे हमारे आशीर्वाद के रूप में हमारे साथ रहते हैं। श्राद्ध के ज़रिए हम उन्हें याद करते हैं और बदले में उनका आशीर्वाद पाते हैं।</p>
<p dir="ltr"><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-63047 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2026/10/%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%83-%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BF.png?resize=696%2C392&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="392" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2026/10/%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%83-%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BF.png?w=1024&amp;ssl=1 1024w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2026/10/%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%83-%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BF.png?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2026/10/%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%83-%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BF.png?resize=768%2C432&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2026/10/%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%83-%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BF.png?resize=747%2C420&amp;ssl=1 747w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2026/10/%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%83-%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BF.png?resize=150%2C84&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2026/10/%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%83-%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BF.png?resize=696%2C392&amp;ssl=1 696w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2 dir="ltr"><strong>पितृ पक्ष कब आता है?</strong></h2>
<p dir="ltr">श्राद्ध के लिए सबसे खास समय <strong>पितृ पक्ष</strong> है। यह लगभग 16 दिनों का होता है और भाद्रपद की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या तक चलता है। हर साल इसकी तारीखें पंचांग के हिसाब से बदलती हैं, इसलिए सही तिथि के लिए अपना स्थानीय पंचांग देख लें।</p>
<p dir="ltr">माना जाता है कि इन दिनों पितर धरती पर अपने परिवार से मिलने आते हैं।</p>
<h2 dir="ltr"><strong>श्राद्ध किस दिन करें?</strong></h2>
<p dir="ltr">श्राद्ध उसी तिथि पर किया जाता है, जिस तिथि पर परिवार के सदस्य का निधन हुआ हो। कुछ खास तिथियाँ ये हैं:</p>
<div dir="ltr">
<table>
<thead>
<tr>
<th scope="col">तिथि</th>
<th scope="col">किसके लिए</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>तिथि के अनुसार</td>
<td>जिस तिथि पर निधन हुआ हो</td>
</tr>
<tr>
<td>नवमी (मातृ नवमी)</td>
<td>माता और परिवार की सुहागिन महिलाओं के लिए</td>
</tr>
<tr>
<td>चतुर्दशी</td>
<td>दुर्घटना या अचानक हुई मृत्यु वालों के लिए</td>
</tr>
<tr>
<td>सर्वपितृ अमावस्या</td>
<td>जिनकी तिथि याद न हो, या सभी पूर्वजों के लिए</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
<p dir="ltr">अगर आपको तिथि याद नहीं है, तो चिंता न करें। सर्वपितृ अमावस्या पर किया गया श्राद्ध सभी पूर्वजों के लिए माना जाता है।</p>
<h2 dir="ltr"><strong>श्राद्ध में क्या-क्या किया जाता है?</strong></h2>
<div dir="ltr">
<table>
<thead>
<tr>
<th scope="col">कर्म</th>
<th scope="col">क्या है</th>
<th scope="col">कैसे करते हैं</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>तर्पण</td>
<td>पूर्वजों को जल अर्पित करना</td>
<td>काले तिल और जल हाथ में लेकर नाम लेकर अर्पण करते हैं</td>
</tr>
<tr>
<td>पिंड दान</td>
<td>चावल, जौ और तिल के पिंड बनाकर अर्पित करना</td>
<td>पूर्वजों के नाम से श्रद्धापूर्वक अर्पित करते हैं</td>
</tr>
<tr>
<td>ब्राह्मण भोजन</td>
<td>योग्य व्यक्ति को भोजन कराना</td>
<td>सात्विक भोजन कराकर दान-दक्षिणा देते हैं</td>
</tr>
<tr>
<td>पंचबलि</td>
<td>पाँच जीवों के लिए भोजन निकालना</td>
<td>गाय, कुत्ता, कौआ, देवता और चींटी के लिए</td>
</tr>
<tr>
<td>दान</td>
<td>ज़रूरतमंदों की मदद</td>
<td>अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल, छाता आदि देते हैं</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
<p dir="ltr">कौए को भोजन देने की परंपरा खास है, क्योंकि कौए को पितरों का संदेशवाहक माना जाता है।</p>
<h2 dir="ltr"><strong>श्राद्ध में क्या करें और क्या न करें?</strong></h2>
<div dir="ltr">
<table>
<thead>
<tr>
<th scope="col">क्या करें</th>
<th scope="col">क्या न करें</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>सुबह स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें</td>
<td>लहसुन-प्याज़ वाला तामसिक भोजन न बनाएँ</td>
</tr>
<tr>
<td>सात्विक और शुद्ध भोजन बनाएँ</td>
<td>शराब और मांसाहार से दूर रहें</td>
</tr>
<tr>
<td>खीर, पूड़ी, सब्ज़ी जैसे पितरों के प्रिय व्यंजन बनाएँ</td>
<td>किसी का अपमान या झगड़ा न करें</td>
</tr>
<tr>
<td>ज़रूरतमंदों को दान दें</td>
<td>श्राद्ध के दिनों में नए कपड़े या नई चीज़ों की ख़रीदारी न करें</td>
</tr>
<tr>
<td>मन में शांति और श्रद्धा रखें</td>
<td>भोजन आने वाले अतिथि या भिखारी को लौटाएँ नहीं</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
<h2 dir="ltr"><strong>श्राद्ध के प्रमुख तीर्थ</strong></h2>
<p dir="ltr">अगर संभव हो, तो कुछ पवित्र स्थानों पर श्राद्ध करना विशेष माना गया है:</p>
<ul dir="ltr">
<li><strong>गया (बिहार):</strong> पिंड दान के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थान</li>
<li><strong>हरिद्वार:</strong> गंगा तट पर तर्पण के लिए</li>
<li><strong>प्रयागराज:</strong> संगम पर श्राद्ध कर्म</li>
<li><strong>उज्जैन:</strong> शिप्रा नदी के किनारे</li>
<li><strong>काशी (वाराणसी):</strong> मोक्ष की नगरी</li>
</ul>
<p dir="ltr">लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि आप इन्हीं जगहों पर जाएँ। घर पर श्रद्धा से किया गया श्राद्ध भी उतना ही मान्य है।</p>
<h2 dir="ltr"><strong>श्राद्ध का असली संदेश</strong></h2>
<p dir="ltr">कई लोग श्राद्ध को केवल रीति-रिवाज़ समझ लेते हैं, लेकिन इसके पीछे एक गहरी सीख है:</p>
<ol dir="ltr">
<li><strong>कृतज्ञता:</strong> जिन्होंने हमें जीवन दिया, उन्हें याद रखना</li>
<li><strong>परिवार का जुड़ाव:</strong> पूरा परिवार एक साथ बैठकर पूर्वजों को याद करता है</li>
<li><strong>दान और सेवा:</strong> भोजन और दान के ज़रिए समाज की मदद</li>
<li><strong>अगली पीढ़ी को संस्कार:</strong> बच्चे अपनी जड़ों और परंपराओं को समझते हैं</li>
</ol>
<h2 dir="ltr"><strong>आज के समय में श्राद्ध कैसे करें?</strong></h2>
<p dir="ltr">भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हर कोई विस्तृत विधि नहीं कर पाता। ऐसे में ये सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं:</p>
<ul dir="ltr">
<li>पूर्वजों की तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ और जल अर्पित करें</li>
<li>उनके पसंदीदा व्यंजन बनाकर गाय, कौए या ज़रूरतमंद को खिलाएँ</li>
<li>बच्चों को दादा-दादी या परदादा-परदादी की कहानियाँ सुनाएँ</li>
<li>किसी गरीब को भोजन या ज़रूरी सामान दान करें</li>
</ul>
<p dir="ltr">याद रखें, श्राद्ध में दिखावे से ज़्यादा भावना मायने रखती है। सच्चे मन से किया गया छोटा-सा कर्म भी पूर्वजों तक पहुँचता है।</p>
<h2 dir="ltr"><strong>निष्कर्ष</strong></h2>
<p dir="ltr">श्राद्ध हमें याद दिलाता है कि हम अकेले नहीं हैं। हमारे पीछे पीढ़ियों का आशीर्वाद, संघर्ष और प्रेम खड़ा है। जब हम श्रद्धा से उन्हें याद करते हैं, तो हम सिर्फ़ उनका ऋण नहीं चुकाते, बल्कि अपने जीवन में भी शांति और संतुलन लाते हैं।</p>
<p dir="ltr">इस पितृ पक्ष में एक पल रुककर अपने पूर्वजों को याद करें, और कहें: <strong>&#8220;आपने जो दिया, उसके लिए धन्यवाद।&#8221;</strong></p>
<p dir="ltr"><em>नोट: श्राद्ध की विधि और मान्यताएँ अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। अपने कुल की परंपरा और किसी जानकार पंडित की सलाह ज़रूर लें।</em></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/what-is-shraddha-the-right-method-dates-and-rules-for-shraddha-during-pitru-paksha/">श्राद्ध क्या है? पितृ पक्ष में श्राद्ध की सही विधि, तिथि और नियम</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://fundabook.com/what-is-shraddha-the-right-method-dates-and-rules-for-shraddha-during-pitru-paksha/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">63046</post-id>	</item>
		<item>
		<title>Pitr Paksha 2024: श्राद्ध 2024 आज से, जानें पितृ पूजा की विधि</title>
		<link>https://fundabook.com/pitr-paksha-2024-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-2024-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4/</link>
					<comments>https://fundabook.com/pitr-paksha-2024-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-2024-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Sep 2024 11:31:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://fundabook.com/?p=62479</guid>

					<description><![CDATA[<p>Pitr Paksha 2024: हिन्दू मान्यता के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक के सोलह दिन पूर्वजों को समर्पित हैं।यह वह शास्त्र सम्मत अवधि है, जिसमें मृत्यु को प्राप्त हुए पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए दान-पुण्य किए जाते हैं और उन्हें अन्न-जल समर्पित किया जाता है। पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए और [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/pitr-paksha-2024-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-2024-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4/">Pitr Paksha 2024: श्राद्ध 2024 आज से, जानें पितृ पूजा की विधि</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Pitr Paksha 2024: </strong>हिन्दू मान्यता के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक के सोलह दिन पूर्वजों को समर्पित हैं।यह वह शास्त्र सम्मत अवधि है, जिसमें मृत्यु को प्राप्त हुए पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए दान-पुण्य किए जाते हैं और उन्हें अन्न-जल समर्पित किया जाता है। पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए और उनकी तृप्ति के श्रद्धा के साथ जो तर्पण-अनुष्ठान किया जाता है, उसे ही श्राद्ध कहते हैं।</p>
<p>इस लेख में हम पितृ पक्ष 2024 (Pitr Paksha 2024) की सभी तिथियों की जानकारी देंगें और साथ में आप जानेंगें कि पितृपक्ष (Shradh 2024) में कौन से नियमों का पालन करना चाहिए और इस दौरान कौन-कौन सी सावधानियां बरतने की जरूरत होती है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone wp-image-62480 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/jlcfbpag_pitru-paksha_625x300_09_September_24.jpg?resize=696%2C522&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="522" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/jlcfbpag_pitru-paksha_625x300_09_September_24.jpg?w=800&amp;ssl=1 800w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/jlcfbpag_pitru-paksha_625x300_09_September_24.jpg?resize=300%2C225&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/jlcfbpag_pitru-paksha_625x300_09_September_24.jpg?resize=768%2C576&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/jlcfbpag_pitru-paksha_625x300_09_September_24.jpg?resize=560%2C420&amp;ssl=1 560w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/jlcfbpag_pitru-paksha_625x300_09_September_24.jpg?resize=80%2C60&amp;ssl=1 80w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/jlcfbpag_pitru-paksha_625x300_09_September_24.jpg?resize=150%2C113&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/jlcfbpag_pitru-paksha_625x300_09_September_24.jpg?resize=696%2C522&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/jlcfbpag_pitru-paksha_625x300_09_September_24.jpg?resize=265%2C198&amp;ssl=1 265w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पितृ पक्ष 2024 कब शुरू होगा (Pitr Paksha 2024 Date and Time) </strong></h2>
<p>पितृ पक्ष 2024, भाद्रपद शुक्ल की पूर्णिमा यानी 17 सितम्बर 2024, मंगलवार के दिन शुरू हो रहा है। पूर्णिमा तिथि 17 सितम्बर 2024 को सुबह 11:44 बजे से शुरू होगी और ये 18 सितम्बर 2024 को सुबह 8:04 बजे तक रहेगी। पितृ पक्ष (Shradh 2024) 2 अक्टूबर, बुधवार, सर्वपितृ अमावस्या को समाप्त होगा, ये सोलह दिन तक रहेगा। पुराणों के अनुसार, पितृजन अपनी मृत्यु की तिथि के दिन अपना तर्पण ग्रहण करने पृथ्वीलोक आते हैं।</p>
<p>इस अवधि में आप अपने पूर्वजों का श्राद्ध, हिन्दू पञ्चांग के अनुसार उनकी मृत्यु तिथि पर कर सकते हैं। अगर आपको अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद नहीं है, तो आप सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राद्ध करें। मान्यता है कि इस दिन सभी पूर्वज अपना अंश ग्रहण करने पृथ्वीलोक पर आते हैं।</p>
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए क्या करें (Pitr Paksha 2024 Puja Vidhi)</strong></h2>
<p>श्राद्ध पक्ष की तिथियां जान लेने के बाद अब इसके महत्व को समझते हैं। श्राद्ध कर्म का सनातन संस्कृति में विशेष महत्व है। श्रद्धा पूर्वक किया गया श्राद्ध विशेष फलदायी होता है। पितृदेव प्रसन्न होते हैं, जिससे घर में शान्ति और सुख-समृद्धि आती है। वहीं अगर हम पितृपक्ष में नियमों की अवहेलना करते हैं या पितरों को अन्न-जल अर्पित नहीं करते तो वे कुपित हो सकते हैं और आपको कई तरह के कष्ट उठाने पड़ सकते हैं। इसलिए आपको विधि-विधान से अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करना चाहिए।</p>
<p>भारत में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीके से, परम्परानुसार पितृ पूजा होता है। Shradh 2024 में अगर आप पहली बार पितृ पूजा कर रहे हैं तो आप नीचे लिखी विधि अपना सकते हैं –</p>
<ul class="wp-block-list">
<li>आप तीन पीढ़ी तक के पूर्वजों का श्राद्ध कर सकते हैं।</li>
<li>सबसे पहले ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। श्वेत वस्त्र अति उत्तम माने गए हैं।</li>
<li>अपने पूर्वज की रूचि का स्वच्छतापूर्वक भोजन बनाएं, जैसे खीर, पूड़ी,हलवा और सब्जी इत्यादि।</li>
<li>एक स्वच्छ जगह पर भोजन के छह भाग करके रखें, जिसमें सभी व्यंजन शामिल हों।</li>
<li>एक भाग गौ बलि, दूसरा भाग काक बलि (कौवे के लिए) , तीसरा भाग स्वान बलि (कुत्ते के लिए)  चौथा भाग पिपिलिका बलि (चींटियों के लिए) पांचवा भाग सभी देवताओं के लिए और छठा भाग चांडाल बलि का होता है।</li>
<li>एक लोटे में जल रख लें और हाथ में कुशा(दूब) और काले तिल लेकर अपने पूर्वज का आवाहन करें।</li>
<li>अब हाथ में जल लेकर भोजन के चारों ओर दो बार घुमा दें। कौए का भाग, कौए को खिला दें।कुत्ते और चींटी का भाग उन्हें दें। अगर इनमें से कोई उपलब्ध न हो तो वो भाग गाय को दिया जा सकता है।</li>
<li>बाकि सभी भाग आप गाय को खिला दें। उसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं। उन्हें दक्षिणा दें और पैर छूकर आशीर्वाद लें।</li>
<li> ब्राह्मण न मिले तो किसी जरुरतमंद को भोजन दान करें और इसके बाद खुद भोजन ग्रहण करें।</li>
</ul>
<h2 class="wp-block-heading"><strong>श्राद्ध पक्ष के नियम और सावधानियां (Pitr Paksha Important Tips and Rules in Hindi)</strong></h2>
<p>धार्मिक अनुष्ठान और महत्व को जान लेने के बाद उसके नियमों का ज्ञान होना भी जरुरी है। श्राद्ध पक्ष में कुछ कार्य वर्जित माने गए हैं और कुछ ऐसी बातें हैं जिनका ध्यान पितृ पूजा के समय रखना जरुरी है। आइए, इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।</p>
<ul class="wp-block-list">
<li>जिन लोगों की मृत्यु दुर्घटना, सर्पदंश, विष, हत्या, आत्महत्या से हुई हो, उनका श्राद्ध उनकी मृत्यु की तिथि पर नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों का श्राद्ध केवल चतुर्दशी तिथि को ही करना चाहिए, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी दिन हुई हो।</li>
<li> जिन विवाहित स्त्रियों की मृत्यु उनके पति के जीवनकाल में हुई हो, उनका श्राद्ध पितृपक्ष की नवमी तिथि को करना चाहिए, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो।</li>
<li> जिन लोगों की स्वाभाविक मृत्यु चतुर्दशी के दिन हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी को नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, उनका श्राद्ध पितृपक्ष की त्रयोदशी या अमावस्या के दिन करना चाहिए।</li>
<li>संन्यासियों का श्राद्ध केवल पितृपक्ष की द्वादशी तिथि को ही किया जाता है, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो।</li>
<li>पितृपक्ष में नया वाहन और नए वस्त्र नहीं खरीदने चाहिए, इस अवधि में विवाह जैसे मंगल कार्य भी निषेध हैं।</li>
<li>इस अवधि में मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए और यथासंभव अपने पूर्वजों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहिए।</li>
<li>श्राद्ध हमेशा अपने घर पर, नदी किनारे या मंदिर परिसर में करना चाहिए, किसी अन्य की भूमि पर किए गए श्राद्ध को पितृ स्वीकार नहीं करते हैं।</li>
<li>पितरों को चांदी या तांबे के बर्तन में भोजन अर्पित करना चाहिए, या पत्तल का उपयोग भी कर सकते हैं। इस पूजा में केले के पत्ते का उपयोग नहीं करना चाहिए।</li>
<li>पूजा के समय द्वार पर आए भिक्षुक को भोजन जरुर दें, और इस अवधि में किसी भी अतिथि का अपमान नहीं करना चाहिए, बल्कि पितृ पक्ष में दामाद या भांजे को सम्मान देना शुभ माना गया है।</li>
</ul>
<p>तो इस तरह से आप Shradh 2024 में पितरों का विशेष आशार्वाद पा सकते हैं। पितृ, देवता स्वरूप होते हैं, इसलिए उनकी तुष्टि आपको कई प्रकार के सुख-संसाधन से भर देती है। इसी क्रम में पितृ पक्ष 2024 (Pitr Paksha 2024) में सभी को कृतज्ञ भाव से अपने पूर्वजों का स्मरण करना चाहिए।</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/pitr-paksha-2024-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-2024-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4/">Pitr Paksha 2024: श्राद्ध 2024 आज से, जानें पितृ पूजा की विधि</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://fundabook.com/pitr-paksha-2024-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-2024-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">62479</post-id>	</item>
		<item>
		<title>गणपति विसर्जन कब है? जानें, गणपति विसर्जन विधि और मुहूर्त</title>
		<link>https://fundabook.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82/</link>
					<comments>https://fundabook.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Sep 2024 09:14:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://fundabook.com/?p=62465</guid>

					<description><![CDATA[<p>गणपति विसर्जन सनातन धर्म में एक महत्पूर्ण त्यौहार है। ये गणेश चतुर्थी के 10 दिन बाद आता है। इसे गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan 2024) और अनंत चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। गणेश विसर्जन भक्तों के लिए श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। इस त्यौहार का उद्देश्य भगवान गणेश की प्रतिमा को जल [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82/">गणपति विसर्जन कब है? जानें, गणपति विसर्जन विधि और मुहूर्त</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गणपति विसर्जन सनातन धर्म में एक महत्पूर्ण त्यौहार है। ये गणेश चतुर्थी के 10 दिन बाद आता है। इसे गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan 2024) और अनंत चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। गणेश विसर्जन भक्तों के लिए श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। इस त्यौहार का उद्देश्य भगवान गणेश की प्रतिमा को जल में विसर्जित करके उन्हें सम्मानपूर्ण विदाई देना है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone wp-image-62466 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/ganesha-visarjan.webp?resize=696%2C464&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="464" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/ganesha-visarjan.webp?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/ganesha-visarjan.webp?resize=300%2C200&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/ganesha-visarjan.webp?resize=630%2C420&amp;ssl=1 630w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/ganesha-visarjan.webp?resize=150%2C100&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/ganesha-visarjan.webp?resize=696%2C464&amp;ssl=1 696w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गणेश विसर्जन कब है</strong> <strong>(Ganpati Visarjan 2024 Date and Time)</strong></h2>
<p>इस साल गणेश चतुर्थी शनिवार, 7 सितम्बर को है। इसके ठीक दस दिन बाद मंगलवार, 17 सितम्बर को गणेश विसर्जन का आयोजन किया जाएगा। गणेश चतुर्थी को गणेश स्थापना के बाद कुछ भक्त 3,5 या 7 दिन में भी विसर्जन कर देते हैं। आप पांचवें दिन गणेश विसर्जन करना चाहते हैं तो 11 सितम्बर को विसर्जन कर सकते हैं। वैसे शास्रों के अनुसार अनंत चतुर्दशी ही गणेश विसर्जन के लिए सबसे अच्छा दिन है। गणेश विसर्जन के अलावा, अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करने का भी विधान है। विष्णु भक्त इस दिन व्रत भी करें ताकि इसका शुभफल मिल सके।</p>
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गणपति विसर्जन 2024 शुभ मुहूर्त (Ganpati Visarjan Muhurat 2024)</strong></h2>
<p>चतुर्दशी तिथि 16 सितंबर, 2024 को दोपहर 03:10 बजे से शुरू हो रही है और ये 17 सितंबर, 2024 को सुबह 11:44 बजे तक रहेगी। इस साल गणपति विसर्जन 2024(Ganpati Visarjan 2024)का मुहूर्त इस प्रकार है –</p>
<figure class="wp-block-table">
<table class="has-fixed-layout">
<tbody>
<tr>
<td><strong>मुहूर्त </strong></td>
<td><strong>समय </strong></td>
</tr>
<tr>
<td>सुबह का मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)</td>
<td>09:11 बजे से 01:47 बजे तक</td>
</tr>
<tr>
<td>दोपहर का मुहूर्त (शुभ)</td>
<td>03:19 बजे से 04:51 बजे तक</td>
</tr>
<tr>
<td>शाम का मुहूर्त (लाभ)</td>
<td>07:51 बजे से 09:19 बजे तक</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</figure>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82/">गणपति विसर्जन कब है? जानें, गणपति विसर्जन विधि और मुहूर्त</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://fundabook.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">62465</post-id>	</item>
		<item>
		<title>Ganesh Chaturthi 2024 : जानें सही तारीख और मुहूर्त</title>
		<link>https://fundabook.com/ganesh-chaturthi-2024-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%96-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82/</link>
					<comments>https://fundabook.com/ganesh-chaturthi-2024-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%96-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Sep 2024 09:51:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[OMG!!]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://fundabook.com/?p=62443</guid>

					<description><![CDATA[<p>Ganesh Chaturthi 2024 : भगवान गणेश पूजा की महिमा हम सब जानते हैं, जब भी कोई बड़ा काम शुरू किया जाता है, या घर पर मंगलकार्य होते हैं तो सबसे पहले गणेश पूजन का विधान है। गणेश जी शुभ-लाभ प्रदान करते हैं, और वो ज्ञान-सद्बुद्धि के प्रदाता हैं। पुराणों के अनुसार, भादो की शुक्लपक्ष चतुर्थी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/ganesh-chaturthi-2024-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%96-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82/">Ganesh Chaturthi 2024 : जानें सही तारीख और मुहूर्त</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>Ganesh Chaturthi 2024 : भगवान गणेश पूजा की महिमा हम सब जानते हैं, जब भी कोई बड़ा काम शुरू किया जाता है, या घर पर मंगलकार्य होते हैं तो सबसे पहले गणेश पूजन का विधान है। गणेश जी शुभ-लाभ प्रदान करते हैं, और वो ज्ञान-सद्बुद्धि के प्रदाता हैं।</p>
<p>पुराणों के अनुसार, भादो की शुक्लपक्ष चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था। उनके जन्म के उपलक्ष में हिन्दू परिवारों में दस दिवसीय उत्सव आयोजित किया जाता है जिसे <strong>गणेश चतुर्थी या विनायक संकष्टी</strong> के नाम से जाना जाता है।</p>
<p>गणेश जी की पूजा-अर्चना के लिए ये अवधि बहुत शुभ मानी जाती है, विशेष रूप से महाराष्ट्र में इस त्यौहार को बहुत धूम-धाम से मनाते हैं।</p>
<p>तो आइए, इस ब्लॉग में जानते हैं इस साल 2024 में गणेश चतुर्थी कब है और इस दिन किस मुहूर्त में गणेश चतुर्थी पूजा करें?</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-62444 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/58eb1bb8982c1dd4f116c9b13c3e36ab.jpg?resize=426%2C640&#038;ssl=1" alt="" width="426" height="640" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/58eb1bb8982c1dd4f116c9b13c3e36ab.jpg?w=426&amp;ssl=1 426w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/58eb1bb8982c1dd4f116c9b13c3e36ab.jpg?resize=200%2C300&amp;ssl=1 200w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/58eb1bb8982c1dd4f116c9b13c3e36ab.jpg?resize=280%2C420&amp;ssl=1 280w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/58eb1bb8982c1dd4f116c9b13c3e36ab.jpg?resize=150%2C225&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/09/58eb1bb8982c1dd4f116c9b13c3e36ab.jpg?resize=300%2C451&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 426px) 100vw, 426px" /></p>
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गणेश चतुर्थी कब है (Ganesh Chaturthi 2024 Date and Time) </strong></h2>
<p>आपको बता दें, गणेश चतुर्थी उत्सव पूरे दस दिनों तक चलता है। इस साल 2024 में ये उत्सव 7 सितम्बर शनिवार को शुरू हो रहा है और गणेश जी की मूर्ति विर्सजन 17 सितंबर, 2024 को है। गणेश चतुर्थी के दिन भक्तजन गणेश जी की सुंदर प्रतिमाओं को घर लाते हैं और दोपहर में उनका विधिवत पूजन करते हैं। इस साल पूजा का समय सुबह 6:30 बजे शुरू होगा और दोपहर 2:30 बजे समाप्त होगा।</p>
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गणेश चतुर्थी 2024 पूजा विधि (Ganesh Chaturthi 2024 Puja Vidhi)</strong></h2>
<p>आमतौर पर गणेश पूजा मध्याह्न काल में की जाती है क्योंकि भगवान गणेश का जन्म इसी समय हुआ था। हिन्दू काल गणना में दिन को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है जिन्हें प्रहर कहा जाता है।पूर्वाह्न, मध्याह्न, अपराह्न और सायंकाल, प्रदोष, निशिथ, त्रियामा एवं उषा, ये सभी प्रहर हैं। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति को मध्याह्न चरण में स्थापित किया जाता है जिसके बाद उनकी पूजा की जाती है। पूजा के लिए नीचे लिखी विधि अपनाई जा सकती है –</p>
<ul class="wp-block-list">
<li>सुबह उठकर नहा धो लें और घर को स्वच्छ रखें।</li>
<li>पूजा के लिए पूर्व दिशा या उत्तर पूर्व कोण में एक प्लेटफॉर्म तैयार रखें जहाँ आप गणेश स्थापना करेंगें।</li>
<li>गणेश जी का सपरिवार स्वागत करें और उनकी मूर्ति को स्थापित करें।</li>
<li>भगवान गणेश को हाथ जोड़कर नमस्कार करें।</li>
<li>तीन बार आचमन विधि द्वारा खुद को पवित्र करें और सभी के माथे पर तिलक लगाएं।</li>
<li>अब गणेश जी को पंचामृत से नहलाएं।</li>
<li>इसके बाद उन्हें वस्त्र, जनेऊ, चंदन, दूर्वा, अक्षत, धूप, दीप, शमी पत्ता, पीले पुष्प और फल चढ़ाएं।</li>
<li>पूजन आरंभ करें और गणेश वन्दना इत्यादि गाएं।</li>
<li>गणेश जी से मनोकामना पूर्ति का वरदान मांगें और सभी को प्रसाद बाँट दें।</li>
<li>इसी तरह आप अपनी श्रद्धानुसार 3,5,7 या 10 दिन तक गणेश जी को घर में रखें और शाम को इसी विधि से रोजाना पूजा करें।</li>
</ul>
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गणेश चतुर्थी पर क्या न करें </strong>(Things to Avoid During Ganesh Chaturthi)</h2>
<p>परंपरा के अनुसार, गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2024) के दौरान विशिष्ट समय पर चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए।हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति चंद्रमा को देखता है, तो उस पर चोरी का आरोप लगता है और ये पाप तब तक रहता है, जब तक कि वह एक विशिष्ट मंत्र का जाप न कर ले। ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने इस दिन चन्द्रमा को देख लिया था जिसके फलस्वरूप उनपर एक बहुमूल्य रत्न चुराने का आरोप लगा। इसलिए इस मान्यता का ख़ास ध्यान रखें और चन्द्रमा दर्शन न करें।</p>
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गणेश चतुर्थी का महत्व</strong> (Significance of Ganesh Chaturthi in Hindi)</h2>
<p>गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2024) एक सिर्फ एक हिन्दू त्यौहार नहीं है बल्कि एक सांस्कृतिक आयोजन है जिसमें गणेश विसर्जन के समय ढोल-नगाड़े बजते हैं, नृत्य होता है और आतिशबाजी होती है।साथ ही मूर्ति कला के सुंदर नमूने देखने को मिलते हैं और सामूहिक आयोजन किए जाते हैं। इस तरह से ये त्यौहार भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। महाराष्ट्र में ये उत्सव बड़े स्तर पर इसलिए मनाया जाता है क्योंकि लोकमान्य तिलक ने 1894 में जातीय भेदभाव को कम करने के लिए सामूहिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी। तब से लेकर आजतक ये एक सामाजिक पर्व के रूप में मनाया जा रहा है जिसमें सभी जाति के लोग मिलकर हर्ष और उल्लास के साथ गणपति जी की पूजा करते हैं। इसलिए ये पर्व न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि ये सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।</p>
<p>तो आपने जाना कि गणेश चतुर्थी 2024 (Ganesh Chaturthi 2024) कब है और पूजा के लिए सबसे शुभ समय कौन सा है? इस जानकारी के साथ हम आपको गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ भेजते हैं और ये मंगलकामना करते हैं कि ये त्यौहार जनसामान्य के बीच सद्भावना का विस्तार करता रहे।</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/ganesh-chaturthi-2024-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%96-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82/">Ganesh Chaturthi 2024 : जानें सही तारीख और मुहूर्त</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://fundabook.com/ganesh-chaturthi-2024-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%96-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">62443</post-id>	</item>
		<item>
		<title>Krishan Janmashtami 2024: कैसे मनाएं जन्माष्टमी</title>
		<link>https://fundabook.com/krishan-janmashtami-2024-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80/</link>
					<comments>https://fundabook.com/krishan-janmashtami-2024-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Aug 2024 08:46:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[Interesting Facts]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://fundabook.com/?p=62422</guid>

					<description><![CDATA[<p>Krishan janmashtmi 2024: कृष्ण जन्माष्टमी हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में एक है। यह त्योहार इस वर्ष 26 अगस्त 2024 को पड़ रहा है। इस दिन विष्णु जी के आठवें अवतार श्री कृष्ण जी का जन्म उत्सव मनाया जाता है। 2024 में श्री Krishan janmashtmi कब है? भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म मध्य रात्रि अष्टमी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/krishan-janmashtami-2024-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80/">Krishan Janmashtami 2024: कैसे मनाएं जन्माष्टमी</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Krishan janmashtmi 2024: </strong>कृष्ण जन्माष्टमी हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में एक है। यह त्योहार इस वर्ष 26 अगस्त 2024 को पड़ रहा है। इस दिन विष्णु जी के आठवें अवतार श्री कृष्ण जी का जन्म उत्सव मनाया जाता है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-62423 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/08/112645235.webp?resize=696%2C392&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="392" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/08/112645235.webp?w=1280&amp;ssl=1 1280w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/08/112645235.webp?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/08/112645235.webp?resize=1024%2C576&amp;ssl=1 1024w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/08/112645235.webp?resize=768%2C432&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/08/112645235.webp?resize=747%2C420&amp;ssl=1 747w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/08/112645235.webp?resize=150%2C84&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/08/112645235.webp?resize=696%2C392&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/08/112645235.webp?resize=1068%2C601&amp;ssl=1 1068w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h2 id="h-2024-म-श-र-क-ष-ण-जन-म-ष-टम-कब-ह" class="wp-block-heading">2024 में <strong>श्री Krishan janmashtmi कब है</strong>?</h2>
<p>भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म मध्य रात्रि अष्टमी तिथि में हुआ इस लिए इस रात्रि को कृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है। परन्तु भगवान जी उसी रात्रि में मथुरा से गोकुल पहुच गये। गोकुल और वृन्दावन के वासी अलगे दिन उनके होने का उत्सव मनाते हैं।</p>
<p>हर वर्ष लोगों में श्री Krishan janmashtmi को लेकर भ्रम होता है, व्रत किस दिन किया जाए। आपको बता रहे हैं व्रत की तारीख…</p>
<ul class="wp-block-list">
<li><strong>26 अगस्त 2024 के दिन कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत और उत्सव मनाया जाएगा</strong></li>
<li><strong>25 तारीख की रात्रि 03:38 से अष्टमी तिथि शुरू हो रही है जो…26 अगस्त की रात्रि 02:19 तक रहेगी</strong>।<strong> </strong></li>
<li>मध्य रात्रि में जन्म के अनुसार 26 अगस्त की रात्रि व्रत और उत्सव के लिए श्रेष्ठ है।</li>
</ul>
<p><strong>26 अगस्त 2024 की रात्रि 23:21 बजे दिल्ली में चन्द्र उदय होगा।</strong></p>
<p>जिन स्थानों पर जन्म के बाद उत्सव मनाया जाता है, वहाँ ये उत्सव 27 अगस्त को भी मनाया जाएगा।</p>
<p><strong>विष्णु और ब्रह्म पुराण के अनुसार</strong> श्री कृष्ण जी का जन्म योगनिद्रा द्वारा हुआ है, वर्षा ऋतु भाद्रपद के मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की अर्ध रात्रि में जन्म लिया और अगले ही दिन नवमी तिथि में योग माया जा जन्म हुआ,</p>
<p><strong>गर्ग सहिंता के अनुसार</strong> भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की रात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हर्षन योग और वृष लग्न के समय आधि रात में जब सृष्टी अंधकार में डूबी हुई थी तो सृष्टी को प्रकाश में लाने के लिए श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ</p>
<p><strong>हरिवंश पुराण के अनुसार</strong> भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म रात्रि के अभिजीत काल में जयंती नाम रात्रि और विजय नामक मुहूर्त में हुआ था,</p>
<h2 id="h-क-ष-ण-जन-म-ष-टम-प-ज-क-स-कर-nbsp" class="wp-block-heading"><strong>Krishan janmashtmi पूजा कैसे करें </strong></h2>
<ul class="wp-block-list">
<li>सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ़ धुले हुए कपड़े पहनें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>भगवान जी की पूजा के लिए सबसे पहले भगवान जी की पूजा का समान जोड़ लें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>पूजा शुरू करने से पहले भगवान जी का ध्यान करें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>भगवान कृष्ण की बाल रूप की प्रतिमा को प्यार से पालने में रखें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>आपके घर में पालना नहीं है, तो लकड़ी की चौंकी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>भगवान जी को 5 बार जल से आचमन अर्पण करें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>बाल गोपल जी को दूध दही शहद घी शक्कर से अलग अलग और पंचामृत बना कर भी स्नान करवाएं।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>भगवान जी के स्नान के जल को प्रसाद के रूप में लें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>भगवान जी को नये वस्त्र और श्रृंगार अर्पण करें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>भगवान की पूजा में जनेऊ जरुर अर्पण करें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>भगवान जी को चन्दन का लेपन जरुर करें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>भगवान की प्रतिमा को मुकुट, आभूषण, मोर पंख और बांसुरी से सजाएं।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>भगवान को तुलसी दल अर्पण करें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>धूपबत्ती और घी का दीपक जलाएं।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>भगवान को माखन और मिश्री का भोग जरुर लगाएं।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>अपने सामर्थ्य के अनुसार पकवान बना कर भेंट अर्पण करें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>रात्रि में कीर्तन अकरने और आरती गाएं, फिर परिक्रमा करें।</li>
</ul>
<ul class="wp-block-list">
<li>अपने परिवार और विश्व शांति के लिए प्रार्थना करें।.</li>
</ul>
<h2 id="h-श-र-क-ष-ण-ज-क-कथ" class="wp-block-heading">श्रीकृष्ण जी की कथा</h2>
<p>श्री कृष्ण जी ने मथुरा में पिता वासुदेव और  माता देवकी जी के गर्भ से जन्म लिया। योग माया द्वारा रची हुई विधि के द्वारा गोकुल में माता यशोदा और पिता नन्दलाल जी के घर में उनका लालन पालन हुआ।</p>
<p>श्री कृष्ण माता देवकी की आठवीं सन्तान हुए। हिन्दू धर्म के आदर्श ग्रन्थ श्रीमद्भगवत गीता का उपदेश श्री कृष्ण जी ने ही दिया है। प्रमाणों के अनुसार आज से लगभग 5252 वर्ष पहले श्री कृष्ण जी ने अवतार लिया और धरती पर धर्म की स्थापना के लिए महाभारत जैसे बड़े संग्राग की रचना करवाई।</p>
<p>महायोद्धा अर्जुन जब युद्ध से भय भीत हुए और युद्ध से मना कर के अस्त्र छोड़ दिए, तो श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को उपदेश दिया उसे गीता के उपदेश के नाम से जाना जाता है।</p>
<p>श्री कृष्ण जी का जन्म एक पापी राजा, कंस से पीड़ित लोगों को बचाने के लिए हुआ था। प्राप्त कथाओं से ज्ञात होता है, कि कंस की मृत्य के लिए आकशवाणी हुई कि,  वो केवल अपनी बहन देवकी के पुत्र से ही मारा जाएगा।</p>
<p>कंस ने देवकी और उसके बहनोई वासुदेव जी को जेल में डाल बंद कर दिया। जब वो जेल में थे तो देवकी ने 7 पुत्रियों को जन्म दिया। लेकिन जब कृष्ण जी में आठवीं सन्तान के रूप में जन्म लिया, तो दूसरी तरफ यशोदा के गर्भ से योग माया ने जन्म लिया।</p>
<p>भगवान की लीला से प्रेरित हो कर वासुदेव जी कृष्ण जी को गोकुल में छोड़ आए। गोकुल से योग माया रूपी कन्या को साथ ले आए। जैसे ही कंस को पता लगा कि देवकी ने आठवीं भी कन्या को जन्म दिया है।</p>
<p>कंस अपनी मृत्यु के कारण को समाप्त करने के लिए जेल गया। तभी योग माया कसं के हाथों से छुट कर आकाश में चली गई और दुबारा भविष्यवाणी हुई की तेरी मृत्यु करने वाला पैदा हो चुका है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><a href="https://fundabook.com/horoscope/24-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-2024/">24 अगस्त 2024</a></p>
<p><a href="https://fundabook.com/horoscope/23-august-2024/">23 अगस्त 2024</a></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/krishan-janmashtami-2024-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80/">Krishan Janmashtami 2024: कैसे मनाएं जन्माष्टमी</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://fundabook.com/krishan-janmashtami-2024-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">62422</post-id>	</item>
		<item>
		<title>महाशिवरात्रि 2024 : 300 साल बाद बन रहा महाशिवरात्रि पर विशेष योग, इन राशियों पर बरसेगी कृपा</title>
		<link>https://fundabook.com/mahashivratri-2024-know-which-zodiac-signs-will-be-blessed-mahadev-this-year-hindi/</link>
					<comments>https://fundabook.com/mahashivratri-2024-know-which-zodiac-signs-will-be-blessed-mahadev-this-year-hindi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Mar 2024 06:00:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[astrology]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu religion]]></category>
		<category><![CDATA[mahashivratri]]></category>
		<category><![CDATA[mahashivratri 2024]]></category>
		<category><![CDATA[Traditions in India]]></category>
		<category><![CDATA[zodiac signs]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://fundabook.com/?p=33647</guid>

					<description><![CDATA[<p>महाशिवरात्रि हिन्दुओं और भगवान शिव का एक प्रमुख त्यौहार है। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व 8 मार्च 2024 को शुक्रवार के दिन है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/mahashivratri-2024-know-which-zodiac-signs-will-be-blessed-mahadev-this-year-hindi/">महाशिवरात्रि 2024 : 300 साल बाद बन रहा महाशिवरात्रि पर विशेष योग, इन राशियों पर बरसेगी कृपा</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महाशिवरात्रि हिन्दुओं और <strong>भगवान शिव</strong> का एक प्रमुख त्यौहार है। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व 8 मार्च 2024 को शुक्रवार के दिन है। <strong>फाल्गुन कृष्ण</strong> चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ।</p>
<p><strong>पौराणिक कथाओं</strong> के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ <strong>अग्निलिंग</strong> (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ था। इसी दिन भगवान शिव का विवाह <strong>देवी पार्वती</strong> के साथ हुआ था।</p>
<p>साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से इस महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत सहित पूरी दुनिया में शिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-24613 size-full aligncenter" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/maha-shivratri.jpg?resize=696%2C468&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="468" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/maha-shivratri.jpg?w=700&amp;ssl=1 700w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/maha-shivratri.jpg?resize=300%2C202&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/maha-shivratri.jpg?resize=696%2C468&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/03/maha-shivratri.jpg?resize=624%2C420&amp;ssl=1 624w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/mahashivratri-2021-know-the-auspicious-time-worship-hindi/">महाशिवरात्रि 2024: जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त</a> </div></strong></p>
<h2>महाशिवरात्रि 2024 शुभ मुहूर्त</h2>
<p>पंचांग के अनुसार, 8 मार्च को महाशिवरात्रि के दिन शिव जी की पूजा का समय शाम के समय 06 बजकर 25 मिनट से 09 बजकर 28 मिनट तक है।</p>
<h2>300 वर्ष बाद बनेगा त्रिग्रही योग</h2>
<p>इस बार महाशिवरात्रि के मौके पर त्रिग्रही योग बन रहा है। यह योग 300 साल बाद बनने जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार यह योग विशेष फलदायी है। इस दौरान पांच राशि वाले जातकों पर भगवान शिव की विशेष कृपा बरसेगी।</p>
<p>इस दुर्लभ योग और शुभ अवसर पर भगवान शंकर की पूजा करने से भक्तों को मनवांछित फल की प्राप्ति होगी। महाशिवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है।</p>
<p>मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन व्रत रखने व विधि पूर्वक पूजा अर्चना करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।</p>
<p>ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस वर्ष शुक्रवार को प्रदोष और शिवरात्रि व्रत एक ही दिन मनाई जाएगी। शुक्र प्रदोष का अपना महत्व है।</p>
<p>गुरुवार सात मार्च को रात्रि 9.46 बजे त्रयोदशी का आगमन हो रहा है, जो शुक्रवार आठ मार्च को रात्रि 7.38 बजे तक रहेगा।</p>
<p>सिंह, कन्या, वृष, मेष, धनु आदि राशि वालों के लिए यह विशेष फलदायी है। महाशिवरात्रि के दिन सुबह आठ बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा।</p>
<p>महाशिवरात्रि के दिन मकर राशि में मंगल और चंद्रमा की युति से चंद्र मंगल योग बन रहा है। इसके साथ ही कुंभ राशि में शुक्र, शनि और सूर्य की युति और मीन राशि में राहु और बुध की युति से त्रिग्रही योग बन रहा है।</p>
<p>ऐसा संयोग कई राशियों के जीवन में खुशियां ला सकता है। इस दिन शहद से अभिषेक करना शुभ होगा।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/perfect-remedies-to-please-mahadev-on-mahashivaratri/">महाशिवरात्रि पर महादेव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय</a> </div></strong></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/mahashivratri-2024-know-which-zodiac-signs-will-be-blessed-mahadev-this-year-hindi/">महाशिवरात्रि 2024 : 300 साल बाद बन रहा महाशिवरात्रि पर विशेष योग, इन राशियों पर बरसेगी कृपा</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://fundabook.com/mahashivratri-2024-know-which-zodiac-signs-will-be-blessed-mahadev-this-year-hindi/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">33647</post-id>	</item>
		<item>
		<title>जानिए राशि के अनुसार कैसा रहेगा आपका नया साल 2024</title>
		<link>https://fundabook.com/new-year-astrology-2024-hindi/</link>
					<comments>https://fundabook.com/new-year-astrology-2024-hindi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Dec 2023 11:34:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[2024]]></category>
		<category><![CDATA[astrology]]></category>
		<category><![CDATA[astrology 2024]]></category>
		<category><![CDATA[new year astrology]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://fundabook.com/?p=58521</guid>

					<description><![CDATA[<p>नया साल आने वाला है। नया साल 2024 सभी के जीवन में ढेर सारी उम्मीदें लेकर आने वाला है। आने वाला नया साल 2024 कुछ राशियों के लिए सफलता के नए अवसर लेकर आ रहा है तो कुछ राशियों के लिए चुनौतियां। आज पोस्ट में हम आपको बताने जा रहें है राशियों के अनुसार आने [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/new-year-astrology-2024-hindi/">जानिए राशि के अनुसार कैसा रहेगा आपका नया साल 2024</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नया साल आने वाला है। नया साल 2024 सभी के जीवन में ढेर सारी उम्मीदें लेकर आने वाला है। आने वाला नया साल 2024 कुछ राशियों के लिए सफलता के नए अवसर लेकर आ रहा है तो कुछ राशियों के लिए चुनौतियां।</p>
<p>आज पोस्ट में हम आपको बताने जा रहें है राशियों के अनुसार आने वाला साल कैसा रहने वाला है, चलिए जानते हैं</p>
<h2>मेष राशि</h2>
<p>मेष राशिफल 2024 के अनुसार, आपकी राशि के स्वामी ग्रह मंगल महाराज वर्ष की शुरुआत में धनु राशि में आपके नवम भाव में सूर्य महाराज के साथ स्थित होंगे जिससे लंबी यात्राओं के योग बनेंगे। आपके सम्मान में बढ़ोतरी होगी। समाज में आपको एक अच्छा ओहदा मिल सकता है।</p>
<p>आप धर्म-कर्म के मामलों में भी व्यस्त रहेंगे। व्यापार में उन्नति के अच्छे योग बनेंगे। स्वास्थ्य में सुधार होगा। देव गुरु बृहस्पति वर्ष की शुरुआत में आपके प्रथम भाव में बने रहकर आपके प्रेम भाव, आपके वैवाहिक जीवन, आपके व्यापार और आपके धर्म के भाव को मजबूत बनाएंगे जिससे आपको इन सभी क्षेत्रों में अनुकूल परिणामों की प्राप्ति होगी।</p>
<p>इसके बाद 1 मई को देव गुरु बृहस्पति आपके दूसरे भाव में जाकर आर्थिक उन्नति के योग बनाएंगे। आपको वर्ष की शुरुआत में राजयोग सरीखे परिणाम मिलने वाले हैं इसलिए दिल खोलकर अवसरों का लाभ उठाएं।</p>
<p>राहु महाराज पूरे महीने द्वादश भाव में बने रहेंगे जिससे खर्चे लगातार बने रहेंगे। यह खर्चे व्यर्थ के होंगे इसलिए आपको इन पर नियंत्रण लगाने के लिए प्रयास करना होगा।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/happy-new-year-in-languages-around-world-hindi/" target="_blank" rel="noopener">अलग-२ भाषाओं में ‘ऐसे दी जाती हैं नव वर्ष की बधाई</a> </div></strong></p>
<h2>वृषभ राशिफल</h2>
<p>वृषभ राशिफल 2024 के अनुसार, वर्ष 2024 की शुरुआत में देव गुरु बृहस्पति द्वादश भाव में बने रहकर खर्चों में बढ़ोतरी करेंगे लेकिन आप धर्म कर्म और अच्छे कार्यों में भी लगे रहेंगे। 1 मई के बाद देव गुरु बृहस्पति आपकी राशि में आ जाएंगे। तब इन समस्याओं में कमी आएगी लेकिन आपको अपने स्वास्थ्य पर थोड़ा ध्यान देना पड़ेगा।</p>
<p>योगकारक ग्रह शनि देव जी के पूरे वर्ष दशम भाव में रहने से आप मेहनत भी कराएंगे। अच्छा प्रतिफल भी मिलेगा। भाग्य और कर्म का संबंध बनने से आपको अपने करियर में राज योग का प्रभाव मिलेगा। करियर में उन्नति होगी।</p>
<p>राहु की उपस्थिति पूरे वर्ष आपके एकादश भाव में बनी रहेगी जिससे मनचाही इच्छाओं की पूर्ति होगी। सामाजिक तौर पर आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी। दोस्तों और सामाजिक दायरे में बढ़ोतरी होगी। आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।</p>
<p>हालांकि, वार्षिक भविष्यफल 2024 (Rashifal 2024) के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में प्रेम संबंधों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। पूरे वर्ष केतु महाराज पंचम भाव में बैठे रहेंगे जिससे अपने प्रियतम को ठीक से समझ न पाने के कारण रिश्ते में समस्याएं आ सकती हैं।</p>
<p>बीच-बीच में शुक्र ग्रह का प्रभाव आपके रिश्ते को संभालता रहेगा लेकिन आपको अपने रिश्ते की अहमियत समझनी होगी। करियर में सुखद और आशा जनक परिणामों की प्राप्ति होगी। मेहनत का लाभ मिलेगा। इस वर्ष अच्छी उन्नति के योग बन रहे हैं। मार्च से अप्रैल और दिसंबर के महीने में अच्छे उन्नति हो सकती है।</p>
<p>विद्यार्थियों को शिक्षा में समस्याएं आ सकती हैं लेकिन कुछ विशेष विषयों में आप की पकड़ मजबूत बनेगी। वित्तीय तौर पर आपको लाभ मिलता रहेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। गुप्त धन प्राप्ति के योग भी वर्ष की शुरुआत में आपको मिल सकते हैं लेकिन खर्च भी बने रहने की संभावना है।</p>
<p>पारिवारिक जीवन को देखें तो वर्ष की शुरुआत अनुकूल रहेगी लेकिन आपके माताजी और पिताजी के स्वास्थ्य समस्याएं बनी रह सकती हैं। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी की समस्त शारीरिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। वर्ष की शुरुआत में बुध और शुक्र सप्तम भाव में, द्वादश भाव में बृहस्पति, दशम भाव में शनि और राहु एकादश भाव में होने से व्यापार के लिए आदर्श स्थितियों का निर्माण करेंगे।</p>
<p>स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से वर्ष की शुरुआत कमजोर रहेगी। पंचम भाव में केतु, द्वादश भाव में बृहस्पति, अष्टम भाव में मंगल और सूर्य स्वास्थ्य में समस्याएं खड़ी कर सकते हैं। हालांकि वर्ष के मध्य में धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार के योग बनते नजर आएंगे।</p>
<h2>मिथुन राशिफल</h2>
<p>मिथुन राशिफल 2024 के अनुसार, ग्रहों की स्थिति इस ओर इशारा कर रही है कि वर्ष की शुरुआत आपके लिए अनुकूल रहेगी। देव गुरु बृहस्पति एकादश भाव में विराजमान होकर अनेक सफलताएं प्रदान करेंगे। आर्थिक रूप से यह बहुत मजबूती प्रदान करेंगे। प्रेम संबंधों में भी प्रेम को बढ़ाते रहेंगे। वैवाहिक संबंधों में भी समस्याओं में कमी आएगी।</p>
<p>शनि भाग्य के स्वामी होकर भाग्य स्थान में रहकर आपके भाग्य की वृद्धि करेंगे जिससे रुके हुए कार्य भी बनने लगेंगे। आपको सफलता प्राप्त होती रहेगी। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। राहु और केतु आपके दशम और चतुर्थ भाव में रहेंगे जो शारीरिक रूप से समस्याएं दे सकते हैं। पारिवारिक जीवन में भी अशांति पैदा हो सकती है।</p>
<h2>कर्क राशि</h2>
<p>कर्क राशिफल 2024 की भविष्यवाणियों के अनुसार, वर्ष की शुरुआत में देव गुरु बृहस्पति दशम भाव में विराजमान हो कर करियर और परिवार के बीच संतुलन स्थापित करने में आपकी मदद करेंगे और 1 मई के बाद यह आपके ग्यारहवें भाव में जाकर आपकी आमदनी में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेंगे। धर्म-कर्म के मामले में आपकी रूचि जागेगी।</p>
<p>राहु पूरे वर्ष आपके नवम भाव में बने रहेंगे जिससे आपको तीर्थ स्थानों के दर्शन और विशेष नदियों में स्नान करने का मौका मिल सकता है। लंबी यात्राओं के योग बनेंगे। यह वर्ष यात्राओं से भरा रहने वाला है। वर्ष की शुरुआत में शुक्र और बुध पंचम भाव में विराजमान रहेंगे।</p>
<p>इसके परिणाम स्वरूप यह समय प्रेम और आर्थिक लिहाज से अनुकूल रहेगा। सूर्य और मंगल के छठे भाव में और शनि महाराज के आठवें भाव में होने से स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के प्रति आपको सावधानी रखनी होगी और खर्चों पर नियंत्रण रखने के लिए प्रयास करने होंगे।</p>
<h2>सिंह राशिफल</h2>
<p>सिंह राशिफल 2024 के अनुसार, यह साल सिंह जातकों के लिए अनुकूलता लेकर आने वाला है। पूरे वर्ष शनि महाराज आपके सप्तम भाव में विराजमान रहेंगे जिससे आपके वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाएंगे और आपके जीवन साथी के व्यक्तित्व में सुधार होगा। वह मजबूत व्यक्तित्व के स्वामी बनेंगे।</p>
<p>इसके अतिरिक्त आपके व्यापार में भी स्थाई वृद्धि होने के योग बनेंगे। आप चाहें तो व्यापार का विस्तार भी कर सकते हैं। लंबी &#8211; लंबी यात्राएं इस वर्ष आपको करने का मौका मिलेगा। विदेश जाने के मौके भी मिल सकते हैं। बृहस्पति महाराज वर्ष की शुरुआत में नवम भाव में रहकर आपको सही निर्णय लेने में मदद करेंगे।</p>
<p>धर्म कर्म के कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी और घर पर ही कार्यक्रमों का आयोजन होगा। आपके पिताजी से आपके संबंध सुधरेंगे। उसके बाद 1 मई को देव गुरु बृहस्पति दशम भाव में जाकर परिवार और काम के बीच स्थितियों को सुधारेंगे। राहु महाराज के पूरे साल अष्टम भाव में बने रहने से आपको स्वास्थ्य का ध्यान रखना पड़ेगा।</p>
<h2>कन्या राशि</h2>
<p>कन्या राशिफल 2024 के अनुसार, इस वर्ष आपको ग्रहों के गोचर के अनुसार अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पड़ेगी। वर्ष की शुरूआत से ही शनि महाराज आपके छठे भाव में विशेष रूप से विराजमान रहकर आपके आठवें और बारहवें भाव को भी देखेंगे।</p>
<p>इससे आपको स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है लेकिन यही शनिदेव इन समस्याओं से मुक्ति दिलाने में भी मददगार बनेंगे, बस आपको एक संतुलित और अनुशासित जीवन व्यतीत करना होगा और अच्छी दिनचर्या का पालन करना होगा। जीवन में अनुशासन लाने से आपके सभी काम बनने लगेंगे।</p>
<p>शनिदेव की स्थिति नौकरी में अच्छी सफलता दिला सकती है। देव गुरु बृहस्पति वर्ष के पूर्वार्ध में 1 मई तक आपके अष्टम भाव में रहेंगे जिससे धर्म-कर्म के मामले में मन तो खूब लगेगा लेकिन व्यर्थ खर्च भी होंगे और आपके कामों में रुकावटें आ सकती हैं लेकिन 1 मई के बाद यह आपके नवम भाव में चले जाएंगे जिससे सभी कामों में सफलता मिलनी शुरू हो जाएगी।</p>
<p>आपको संतान संबंधी सुखद समाचार भी मिलने की संभावना बनेगी। राहु पूरे वर्ष आपके सप्तम भाव में बने रहेंगे इसलिए आपको व्यापार और निजी जीवन दोनों क्षेत्रों में सावधानी बरतनी होगी।</p>
<h2>तुला राशिफल</h2>
<p>तुला राशिफल 2024 के अनुसार, तुला राशि के जातकों को इस पूरे वर्ष मेहनत, कार्यकुशलता और इमानदारी पर विश्वास रखना होगा क्योंकि वर्ष की शुरुआत से पूरे वर्ष शनि महाराज आपके पंचम भाव में रहेंगे और वहां से आपके सप्तम, एकादश और द्वितीय भाव पर दृष्टि बनाए रखेंगे।</p>
<p>आप जितना ईमानदारी और मेहनत से काम करेंगे, उतना ही आपका वैवाहिक जीवन और आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। देव गुरु बृहस्पति 1 मई तक आपके सप्तम भाव में रहकर प्रथम, तृतीय और एकादश भाव को देखेंगे जिससे आपका स्वास्थ्य सुधरेगा।</p>
<p>आपके व्यापार और निजी संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी तथा आपकी आमदनी अच्छे से बढ़ने लगेगी लेकिन 1 मई को देव गुरु बृहस्पति अष्टम भाव में जाएंगे जिससे खर्चों में बढ़ोतरी होने के योग बनेंगे। हालांकि आपका धर्म-कर्म में मन लगेगा लेकिन खर्च ज्यादा बढ़ने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है।</p>
<p>राहु महाराज पूरे महीने आपके छठे भाव में बने रहेंगे इसलिए स्वास्थ्य समस्याएं सामने आएंगी लेकिन वे आती-जाती रहेंगी। खर्चों पर नियंत्रण रखना आपके लिए थोड़ा चुनौती पूर्ण होगा।</p>
<h2>वृश्चिक राशि</h2>
<p>वृश्चिक राशिफल 2024 के अनुसार, नया साल 2024 वृश्चिक राशि वालों के लिए नई उम्मीद लेकर आएगा। वर्ष की शुरुआत में शुक्र और बुध आपकी ही राशि में रहकर आपको खुशनुमा बनाएंगे। आपका व्यवहार और चुंबकीय व्यक्तित्व आकर्षण का केंद्र बनेगा।</p>
<p>लोग आपकी ओर खिंचे चले आएंगे। वर्ष की शुरुआत में राशि स्वामी मंगल महाराज दूसरे भाव में सूर्य देव के साथ उपस्थित रहेंगे जिससे आपको आर्थिक तौर पर उन्नति प्राप्त होगी। देव गुरु बृहस्पति 1 मई तक छठे भाव में रहेंगे जिससे स्वास्थ्य समस्याएं और खर्च बढ़ने की स्थिति रहेगी।</p>
<p>हालांकि उसके बाद 1 मई को आपके सप्तम भाव में आकर समस्याओं में कमी करेंगे। वह वैवाहिक जीवन और निजी जीवन को अनुकूल बनाएंगे। राहु महाराज पूरे साल आपके पंचम भाव में बने रहेंगे और आपकी बुद्धि को प्रभावित करेंगे।</p>
<p>जल्दबाजी में आकर कोई भी गलत निर्णय लेने से बचने की कोशिश‌ करें। प्रेम संबंधों में राहु की मौजूदगी आपको और कुछ भी करने वाला बना सकती है।</p>
<div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <strong><a href="https://fundabook.com/happy-new-year-in-languages-around-world-hindi/">जानिए दुनिया भर की भाषाओं में नव वर्ष की बधाइयां कैसे दी जाती हैं</a></strong></div>
<h2>धनु राशिफल</h2>
<p>राशिफल 2024 के अनुसार धनु राशि के जातकों के लिए वर्ष 2024 उम्मीदों से भरा साल रहने वाला है लेकिन वर्ष की शुरुआत में सूर्य और मंगल आपकी राशि में रहकर आपको गर्म दिमाग बनाएंगे। आपको उग्रता में आकर कुछ भी बोलने और कोई भी व्यवहार या निर्णय लेने से बचना चाहिए क्योंकि इससे आपका न केवल व्यापार और बल्कि आपका निजी जीवन भी प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>वर्ष की शुरुआत में देव गुरु बृहस्पति महाराज आपके पंचम भाव में विराजमान रहेंगे। आपके प्रेम संबंधों को सुधारेंगे। आपके भाग्य की बढ़ोतरी करेंगे और आपकी आमदनी में भी अच्छी उन्नति देखने को मिलेगी। संतान से संबंधित अच्छे समाचार मिल सकते हैं या संतान हो सकती है। विद्यार्थियों को भी अच्छे परिणाम मिलेंगे।</p>
<p>1 मई के बाद देव गुरु बृहस्पति आपके छठे भाव में चले जाएंगे जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं और आपको इन सभी क्षेत्रों में, जिनमें बृहस्पति महाराज अच्छे परिणाम दे रहे थे, कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। शनि महाराज पूरे वर्ष तीसरे भाव में रहकर आपको साहस और पराक्रम देंगे।</p>
<p>यदि आप इस वर्ष अपने आलस्य को छोड़ देंगे तो जीवन में बहुत कुछ प्राप्त कर पाएंगे। राहु महाराज पूरे वर्ष आपके चौथे और केतु महाराज दशम भाव में बने रहेंगे जिससे करियर में उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी और पारिवारिक संबंधों में भी रस्साकशी की स्थिति बन सकती है।</p>
<h2>मकर राशिफल</h2>
<p>मकर राशिफल 2024 के अनुसार, साल 2024 मकर राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से अनुकूल परिणाम लेकर आने वाला है। आपके राशि स्वामी आपके दूसरे भाव के स्वामी भी हैं। वहीं शनि महाराज दूसरे भाव में पूरे वर्ष बने रहने के कारण आर्थिक रूप से आपको मजबूत बनाते रहेंगे।</p>
<p>आप चुनौतियों से डरेंगे नहीं और उनका डटकर सामना करेंगे। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी। देव गुरु बृहस्पति 1 मई तक चौथे भाव में रहकर पारिवारिक जीवन में खुशियां लेकर आएंगे और करियर को भी सफलता देंगे।</p>
<p>1 मई से आपके पंचम भाव में जाकर संतान संबंधित समाचारों के कारण बन सकते हैं। पूरे वर्ष आपके तीसरे भाव में रहकर आपके जोखिम लेने की प्रवृत्ति को बढ़ाएंगे और आपके व्यापार में भी आपको अच्छी सफलता प्रदान कर सकते हैं। दूसरों के मामलों में हस्तक्षेप करने से बचना आपके लिए सफलता दायक होगा।</p>
<h2>कुंभ राशि</h2>
<p>कुंभ राशिफल 2024 के अनुसार कुंभ राशि के जातकों के लिए यह वर्ष बहुत कुछ प्रदान करने वाला वर्ष साबित होगा। आपके राशि स्वामी शनि देव आपकी ही राशि में पूरे वर्ष बने रहेंगे। यह आपके लिए हर तरीके से शुभ परिणाम लेकर आएगा। आपके जीवन में अनुशासन बढ़ेगा।</p>
<p>आप हर काम को पूरी लगन और मेहनत से करेंगे जिससे कार्य क्षेत्र में भी अपना अच्छा स्थान बना पाएंगे। आपकी मेहनत आपको अन्य लोगों से आगे रखेगी। देव गुरु बृहस्पति 1 मई तक आपके तीसरे भाव में रहकर आपकी आमदनी में बढ़ोतरी का कारण बनेंगे और आपके वैवाहिक जीवन में भी अनुकूल समय की आहट होगी।</p>
<p>व्यापार में वृद्धि के योग बनेंगे और भाग्य वृद्धि होगी। 1 मई के बाद देव गुरु बृहस्पति चतुर्थ भाव में जाकर पारिवारिक संबंधों को अनुकूल बनाने के लिए आपकी मदद करेंगे।</p>
<h2>मीन राशिफल</h2>
<p>मीन राशिफल 2024 के अनुसार, मीन राशि के जातकों के लिए वर्ष 2024 अच्छी संभावनाएं लेकर आने वाला है। आपकी राशि के स्वामी देव गुरु बृहस्पति वर्ष की शुरुआत से ही आपके दूसरे भाव में रहेंगे और आपके धन और आपके कुटुंब की रक्षा करेंगे। आपकी वाणी में मिठास बढ़ेगी जिससे आपके रिश्ते मजबूत होंगे।</p>
<p>धन संचित करने में आपको सफलता मिलेगी। केवल इतना ही नहीं, ससुराल पक्ष से भी आपके संबंध बढ़िया होने लगेंगे। बृहस्पति महाराज 1 मई को तीसरे भाव में चले जाएंगे जिससे आपके व्यापार में बढ़ोतरी होगी। वैवाहिक संबंधों में सुधार का योग बनेगा। आपके भाग्य की वृद्धि होगी।</p>
<p>धर्म-कर्म के मामलों में मन लगेगा। शनि महाराज पूरे वर्ष द्वादश भाव में बने रहने से आपको अपने खर्चों पर ध्यान देना होगा क्योंकि कोई न कोई खर्च पूरे वर्ष लगा रहने वाला है। विदेश यात्रा इस वर्ष होने के प्रबल योग हैं इसलिए इसकी तैयारी पूरी करके रखें। राहु महाराज प्रथम भाव में और सप्तम भाव में केतु का गोचर बना रहने से वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव की स्थितियां बनती रहेंगी।</p>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span> <a href="https://fundabook.com/more-than-70-new-years-are-celebrated-in-the-world/">दुनिया में मनाए जाते हैं 70 से अधिक नववर्ष</a> </div></strong></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/new-year-astrology-2024-hindi/">जानिए राशि के अनुसार कैसा रहेगा आपका नया साल 2024</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://fundabook.com/new-year-astrology-2024-hindi/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">58521</post-id>	</item>
		<item>
		<title>दिवाली पर राशि के अनुसार इन रंगों के कपड़े पहनकर करें माँ लक्ष्मी की पूजा, होगी धन की वर्षा</title>
		<link>https://fundabook.com/on-diwali-worship-goddess-lakshmi-wearing-clothes-these-colors-according-zodiac2023-hindi/</link>
					<comments>https://fundabook.com/on-diwali-worship-goddess-lakshmi-wearing-clothes-these-colors-according-zodiac2023-hindi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Nov 2023 06:15:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[Diwali worship]]></category>
		<category><![CDATA[Goddess Lakshmi]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu religion]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[traditions]]></category>
		<category><![CDATA[Traditions in India]]></category>
		<category><![CDATA[दिवाली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://fundabook.com/?p=37428</guid>

					<description><![CDATA[<p>दिवाली साल के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। यह न केवल भारत में मनाया जाता है, बल्कि नेपाल, इंडोनेशिया, फिजी, मॉरीशस, मलेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड और यहां तक ​​कि सिंगापुर [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/on-diwali-worship-goddess-lakshmi-wearing-clothes-these-colors-according-zodiac2023-hindi/">दिवाली पर राशि के अनुसार इन रंगों के कपड़े पहनकर करें माँ लक्ष्मी की पूजा, होगी धन की वर्षा</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दिवाली साल के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे <strong>दीपोत्सव</strong> भी कहते हैं।</p>
<p>यह न केवल भारत में मनाया जाता है, बल्कि <strong>नेपाल, इंडोनेशिया, फिजी, मॉरीशस, मलेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड</strong> और यहां तक ​​कि <strong>सिंगापुर</strong> में भी मनाया जाता है।</p>
<p>इस पर्व में लोग घर को <strong>दीयों</strong> और <strong>रोशनी</strong> से सजाते हैं और अलग-अलग रंगों के कपड़े पहनते हैं। खासतौर पर महिलाएं। ज्योतिष शास्त्रों की मानें तो यदि इस दिन राशि के अनुसार कुछ ख़ास रंगों के कपड़े पहनकर माँ की पूजा की जाए तो आपके जीवन में <strong>खुशहाली</strong> और धन की वर्षा होगी।</p>
<p>चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से कि राशि के अनुसार किस रंग के कपड़े पहनकर करें माँ लक्ष्मी की पूजा:-</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-37433 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/10/On-Diwali-worship-Goddess-Lakshmi-wearing-clothes-these-colors-according-zodiac.jpg?resize=696%2C392&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="392" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/10/On-Diwali-worship-Goddess-Lakshmi-wearing-clothes-these-colors-according-zodiac.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/10/On-Diwali-worship-Goddess-Lakshmi-wearing-clothes-these-colors-according-zodiac.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/10/On-Diwali-worship-Goddess-Lakshmi-wearing-clothes-these-colors-according-zodiac.jpg?resize=696%2C392&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/10/On-Diwali-worship-Goddess-Lakshmi-wearing-clothes-these-colors-according-zodiac.jpg?resize=746%2C420&amp;ssl=1 746w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<h3>मेष राशि</h3>
<p>दीपावली के दिन मेष राशि के जातक लाल रंग के वस्त्र पहन सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि मेष राशि का शुभ रंग लाल होता है। अब क्योंकि लाल रंग देवी लक्ष्मी को बेहद प्रिय है, ऐसे में हो सकता है कि देवी आपसे प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर दें।</p>
<h3>वृषभ राशि</h3>
<p>वृषभ राशि के जातक का शुभ रंग सफेद होता है। इसलिए दीपावली के मौके पर इस राशि के लोगों को सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। इससे आपके अंदर पॉजिटिव एनर्जी का संचार होगा।</p>
<h3>मिथुन राशि</h3>
<p>मिथुन राशि का शुभ रंग पीला माना जाता है। इसलिए दिवाली के मौके पर पीले रंग के वस्त्र धारण करें। क्योंकि पीला रंग भगवान गणेश को भी अति प्रिय है, इसलिए दिवाली के मौके पर इस रंग के कपड़े पहनना आपके लिए शुभ साबित हो सकता है।</p>
<h3>कर्क राशि</h3>
<p>कर्क राशि के जातकों को दिवाली पर सफेद रंग के कपड़े पहनने चाहिए। ये रंग इस राशि के लोगों के लिए काफी अच्छा होता है। ये रंग शांति और सकारात्मकता का प्रतीक है।</p>
<h3>सिंह राशि</h3>
<p>सिंह राशि का शुभ रंग सुनहरा यानी गोल्डन होता है। गोल्डन रंग आपके लुक को निखारने के साथ-साथ आपकी किस्मत को भी निखार सकता है।</p>
<h3>कन्या राशि</h3>
<p>कन्या राशि का शुभ रंग हरा होता है। पूजा पाठ के लिए हरा रंग शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनें।</p>
<h3>तुला राशि</h3>
<p>तुला राशि के लोगों के लिए लाल रंग शुभ माना जाता है। दिवाली पर लाल रंग के कपड़े जरूर पहनें। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर आप पर अपनी कृपा बरसा सकती हैं।</p>
<h3>वृश्चिक राशि</h3>
<p>इस राशि का शुभ रंग लाल माना जाता है। लाल रंग के कपड़े दीपावली के दिन जरूर पहनें। ये आपको तेज प्रदान करेगा।</p>
<h3>धनु राशि</h3>
<p>इस राशि के लोगों के लिए पीला रंग शुभ माना जाता है। इसलिए इस राशि के लोगों को दिवाली पर पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए।</p>
<h3>मकर राशि</h3>
<p>इस राशि का शुभ रंग नीला माना जाता है। नीला रंग देखने में बहुत सुंदर लगता है। ये रंग आपके भीतर शांति का संचार करेगा। इसलिए दिवाली पर इस राशि के लोगों को नीले रंग के कपड़े जरूर पहनने चाहिए।</p>
<h3>कुंभ राशि</h3>
<p>कुंभ राशि के लिए आसमानी रंग यानी स्काई ब्लू कलर शुभ माना जाता है। दिवाली के दिन आपको आसमानी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।</p>
<h3>मीन राशि</h3>
<p>मीन राशि के लिए भी पीला रंग शुभ माना जाता है। पीला रंग मां लक्ष्मी और भगवान गणेश, दोनों को प्रिय है। इसलिए दिवाली पर मीन राशि के जातकों को पीले रंग के कपड़े जरूर पहनने चाहिए।</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/on-diwali-worship-goddess-lakshmi-wearing-clothes-these-colors-according-zodiac2023-hindi/">दिवाली पर राशि के अनुसार इन रंगों के कपड़े पहनकर करें माँ लक्ष्मी की पूजा, होगी धन की वर्षा</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://fundabook.com/on-diwali-worship-goddess-lakshmi-wearing-clothes-these-colors-according-zodiac2023-hindi/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">37428</post-id>	</item>
		<item>
		<title>जानिए कब है अहोई अष्टमी,  शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा की विधि !!!</title>
		<link>https://fundabook.com/when-ahoi-ashtami-celebrated-auspicious-time-importance-method-worship/</link>
					<comments>https://fundabook.com/when-ahoi-ashtami-celebrated-auspicious-time-importance-method-worship/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sharleen Kaur]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Oct 2023 11:25:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[festival]]></category>
		<category><![CDATA[hindu culture]]></category>
		<category><![CDATA[hindu festival]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu religion]]></category>
		<category><![CDATA[hindu tradition]]></category>
		<category><![CDATA[hindu traditions]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[life tips]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[अहोई अष्टमी]]></category>
		<category><![CDATA[रोचक तथ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://fundabook.com/?p=20205</guid>

					<description><![CDATA[<p>अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है। करवा चौथ के व्रत की तरह ही यह व्रत भी निर्जल रहकर रखने का विधान वर्णित है। अहोई अष्टमी का त्यौहार हिंदू धर्म में बहुत ही खास माना गया है क्योंकि अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं संतान की [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/when-ahoi-ashtami-celebrated-auspicious-time-importance-method-worship/">जानिए कब है अहोई अष्टमी,  शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा की विधि !!!</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है। <a href="https://fundabook.com/karva-chauth-the-time-of-worship-and-worship-2023/">करवा चौथ</a> के व्रत की तरह ही यह व्रत भी निर्जल रहकर रखने का विधान वर्णित है।</p>
<p>अहोई अष्टमी का त्यौहार हिंदू धर्म में बहुत ही खास माना गया है क्योंकि अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना से रखती हैं।</p>
<p>वहीं जो महिलाएं संंतान प्राप्ति की चाह रखती हैं उनके लिए भी <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%88_%E0%A4%85%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%AE%E0%A5%80" target="_blank" rel="noopener noreferrer">अहोई अष्टमी</a> का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण और फलदायी माना गया है।  इस साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-20206 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/10/ahoi-ashtami.jpg?resize=600%2C450&#038;ssl=1" alt="Ahoi Ashtami" width="600" height="450" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/10/ahoi-ashtami.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/10/ahoi-ashtami.jpg?resize=300%2C225&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/10/ahoi-ashtami.jpg?resize=80%2C60&amp;ssl=1 80w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/10/ahoi-ashtami.jpg?resize=265%2C198&amp;ssl=1 265w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2019/10/ahoi-ashtami.jpg?resize=560%2C420&amp;ssl=1 560w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<h3>अहोई अष्टमी के शुभ मुहूर्त</h3>
<p>पंचांग के अनुसार इस साल यह तिथि 4 नवंबर की मध्यरात्रि को शुरू होगी और 5 नवंबर की रात 3 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत 5 नवंबर को रखा जाएगा।</p>
<p>अहोई अष्टमी के दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 33 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। चूंकि यह व्रत तारों को देखने के बाद खोलते हैं। ऐसे में तारों के दर्शन के लिए मुहूर्त शाम 5 बजकर 58 मिनट है।</p>
<h3>अहोई अष्टमी का महत्व</h3>
<p>माताओं के लिए कार्तिक मास की अष्टमी तिथि बहुत ही खास होती है क्योंकि इस दिन अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। माताएं यह व्रत संतान की लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए रखती हैं।</p>
<p>इस दिन अहोई माता का पूजन किया जाता है और दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद रात्रि में तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं। कहते हैं कि अहोई अष्टमी का व्रत रखने से बच्चों पर आने वाले सभी संकट दूर होते हैं और उन्हें जीवन में तरक्की मिलती है।</p>
<p>वहीं जो महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना रखती हैं उनके लिए भी अहोई का व्रत बहुत ही फलदायी माना गया है। इस व्रत को रखने से संतान प्राप्ति की कामना पूरी होती है।</p>
<h3>ऐसे करें अहोई माता की पूजा</h3>
<ul>
<li>सुबह के समय जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान आदि करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।</li>
<li>अब मंदिर की दीवार पर गेरू और चावल से अहोई माता यानी कि मां पार्वती और स्याहु व उसके सात पुत्रों का चित्र बनाएं। आप चाहें तो बाज़ार में मिलने वाले पोस्टर का इस्तेमाल भी कर सकती हैं।</li>
<li>अब एक नए मटके में पानी भरकर रखें, उस पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं, अब मटके के ढक्कन पर सिंघाड़े रखें।</li>
<li>घर में मौजूद सभी बुजुर्ग महिलाओं को बुलाकर सभी के साथ मिलकर अहोई माता का ध्यान करें और उनकी व्रत कथा पढ़ें। सभी के लिए एक-एक नया परिधान भी रखें। कथा खत्म होने के बाद परिधान को उन महिलाओं को भेंट कर दें।</li>
<li>रखे हुए मटके का पानी खाली ना करें इस पानी से दीवाली के दिन पूरे घर में पोंछा लगाएं। इससे घर में बरकत आती है।</li>
<li>रात के समय सितारों को जल से अर्घ्य दें और फिर ही उपवास को खोलें।</li>
</ul>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/when-ahoi-ashtami-celebrated-auspicious-time-importance-method-worship/">जानिए कब है अहोई अष्टमी,  शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा की विधि !!!</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://fundabook.com/when-ahoi-ashtami-celebrated-auspicious-time-importance-method-worship/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">20205</post-id>	</item>
		<item>
		<title>करवा चौथ 2023: ​​जानिए राशि के अनुसार किस रंग के कपड़े पहने </title>
		<link>https://fundabook.com/karva-chauth-2023-know-what-color-clothes-to-wear-according-zodiac/</link>
					<comments>https://fundabook.com/karva-chauth-2023-know-what-color-clothes-to-wear-according-zodiac/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Oct 2023 05:46:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[astrology]]></category>
		<category><![CDATA[human life]]></category>
		<category><![CDATA[life]]></category>
		<category><![CDATA[life tips]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[traditions]]></category>
		<category><![CDATA[zodiac]]></category>
		<category><![CDATA[करवा चौथ]]></category>
		<category><![CDATA[करवा चौथ 2022]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://fundabook.com/?p=37326</guid>

					<description><![CDATA[<p>करवा चौथ का शुभ अवसर इस साल 1 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। महिलाएं, विशेष रूप से शाम की पूजा के दौरान, अपने बेहतरीन पोशाक पहनती हैं, और अपनी हथेलियों पर मेहंदी भी लगाती हैं। तो करवा चौथ [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/karva-chauth-2023-know-what-color-clothes-to-wear-according-zodiac/">करवा चौथ 2023: ​​जानिए राशि के अनुसार किस रंग के कपड़े पहने </a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>करवा चौथ का शुभ अवसर इस साल 1 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन विवाहित <strong>महिलाएं</strong> अपने पति की लंबी उम्र और <strong>सुखी वैवाहिक</strong> जीवन के लिए <strong>व्रत</strong> रखती हैं।</p>
<p>महिलाएं, विशेष रूप से शाम की पूजा के दौरान, अपने बेहतरीन पोशाक पहनती हैं, और अपनी हथेलियों पर मेहंदी भी लगाती हैं। तो करवा चौथ पर आपको कौन से रंग पहनने चाहिए और किन रंगों से बचना चाहिए?</p>
<p>इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेगें कि राशि के अनुसार करवा चौथ पर किस रंग के कपड़े पहनें :-</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-37334 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/10/karwa-chauth-2022-1.jpg?resize=696%2C392&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="392" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/10/karwa-chauth-2022-1.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/10/karwa-chauth-2022-1.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/10/karwa-chauth-2022-1.jpg?resize=696%2C392&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/10/karwa-chauth-2022-1.jpg?resize=746%2C420&amp;ssl=1 746w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p><strong>मेष राशि</strong></p>
<p>मेष राशि के लोग स्वभाव से साहसी होते हैं और इनका ग्रह मंगल होता है। मंगल ग्रह का रंग लाल होता है। यदि आपकी राशि मेष है तो करवा चौथ के दिन आपको लाल रंग के कपड़े पहनने।</p>
<p>यदि आप इस रंग के या इससे मिलते जुलते रंगों के कपड़े पहनती हैं तो ये आपके वैवाहिक जीवन के लिए बहुत शुभ होगा। लाल रंग को प्रेम का रंग भी माना जाता है, इसलिए ये रंग आपसी प्रेम को बढ़ाने में मदद करेगा।</p>
<p><strong>वृषभ राशि</strong></p>
<p>वृषभ राशि को शुक्र द्वारा संचालित ग्रह माना जाता है। यदि आपकी राशि वृषभ है तो आपको करवा चौथ के दिन गुलाबी रंग के कपड़े पहनने चाहिए।</p>
<p>यह रंग आपके लिए बहुत शुभ होगा और आपके रिश्तों में सामंजस्य बनाने में मदद करेगा। यह रंग आपके व्यक्तित्व को भी निखारने में मदद करेगा।</p>
<p><strong>मिथुन राशि</strong></p>
<p>मिथुन राशि वाले शांतचित्त स्वभाव के होते हैं। यदि आप करवा चौथ पूजा में हरे रंग के कपड़े पहनती हैं तो उत्साह को बढ़ाएगा। आप हरे से मिलते-जुलते शेड्स भी पहन सकती हैं।</p>
<p>ये रंग आपके जीवन में शांति लाने में और वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ाने में मदद करेंगे। जीवनसाथी के साथ प्रेम और उनकी अच्छी सेहत के लिए यह रंग बहुत शुभ होगा।</p>
<p><strong>कर्क राशि</strong></p>
<p>कर्क राशि का स्वामी ग्रह चन्द्रमा है, इसलिए अगर आप करवा चौथ के दिन आइवरी रंग ( हल्के पीले रंग ) के कपड़े पहनती हैं तो आपके लिए शुभ होगा। यह रंग चन्द्रमा का रंग माना जाता है और शांति को दिखाता है। आप यदि इसी रंग के कपड़े पहनकर करवा चौथ की पूजा कर रही हैं तो रिश्ते में सामंजस्य बना रहता है।</p>
<p><strong>सिंह राशि</strong></p>
<p>सिंह राशि के लोगों के लिए बैंगनी रंग बहुत शुभ माना जाता है और यदि आप करवा चौथ के दिन इसी रंग के कपड़े पहनती हैं तो आपके लिए बहुत शुभ होगा। इस रंग से आपको सौभाग्य का आशीष मिलेगा और प्रेम बना रहेगा।</p>
<p><strong>कन्या राशि</strong></p>
<p>कन्या राशि के लिए शुभ रंग पीला माना जाता है। पीला रंग खुशी और हंसी से जुड़ा होता है। यदि आप करवा चौथ के दिन इस रंग के कपड़े पहनती हैं तो जीवन में सदैव खुशहाली बनी रहती है। यह रंग आपके जीवनसाथी के साथ संबंधों में मजबूती लाने में मदद करता है।</p>
<p><strong>तुला राशि</strong></p>
<p>तुला राशि शुक्र गृह द्वारा शासित होती है और इनका शुभ रंग नीला होता है। यदि आप नीले रंग के कपड़े पहनती हैं या फिर मजेंटा रंग के कपड़े करवा चौथ के दिन पहनती हैं तो ये आपके लिए शुभ होगा। मैजेंटा रंग भी प्रेम का रंग माना जाता है और यह शांति प्रदान करने वाला रंग है।</p>
<p><strong>वृश्चिक राशि</strong></p>
<p>वृश्चिक राशि की महिलाओं के लिए करवा चौथ के दिन भगवा रंग के कपड़े पहनना शुभ होगा यानी कि केसरिया रंग आपके रिश्तों में प्रेम बढ़ाने में मदद करेगा। अगर आपकी राशि वृश्चिक है तो आप करवा चौथ के दिन इसी रंग के कपड़े पहनें।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-23152 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2020/11/karwa_chauth-rashifal-final.jpg?resize=500%2C327&#038;ssl=1" alt="karwa_chauth-rashifal-final" width="500" height="327" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2020/11/karwa_chauth-rashifal-final.jpg?w=500&amp;ssl=1 500w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2020/11/karwa_chauth-rashifal-final.jpg?resize=300%2C196&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /></p>
<p><strong>धनु राशि</strong></p>
<p>धनु राशि का स्वामी बृहस्पति को माना जाता है। धनु राशि के लोग मिलनसार होते हैं और प्रकृति का अवलोकन करना पसंद करते हैं। इस साल करवा चौथ पर यदि आप पीले रंग के कपड़े पहनेंगी तो आपके लिए शुभ होगा और जीवन में प्रेम का संचार होगा।</p>
<p><strong>मकर राशि</strong></p>
<p>शनि ग्रह द्वारा शासित मकर राशि की महिलाओं को करवा चौथ के उत्सव के दौरान फिरोजी रंग के कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है और ऐसा माना जाता है कि यह रंग उनके जीवन में शांति ला सकता है।</p>
<p>आप इस दिन नीले रंग के कोई भी शेड के कपड़े पहनेंगी तो आपके लिए शुभ होगा। यह रंग किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है।</p>
<p><strong>कुंभ राशि</strong></p>
<p>कुंभ राशि पर भी शनि का शासन होता है और उन्हें करवा चौथ के दिन बैंगनी या लैवेंडर रंग के कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है, जिससे उनके रिश्ते अच्छे बने रहें। यदि आपकी राशि कुंभ है तो ये रंग आपके जीवन में खुशहाली ला सकते हैं।</p>
<p><strong>मीन राशि</strong></p>
<p>मीन राशि के लोगों के लिए करवा चौथ के दिन यदि आप लाल या चेरी रंग के कपड़े पहनती हैं तो आपके वैवाहिक जीवन के लिए बहुत शुभ माना जाता है। यह रंग रिश्तों में प्रेम को बढ़ाने का संकेत देते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/karva-chauth-2023-know-what-color-clothes-to-wear-according-zodiac/">करवा चौथ 2023: ​​जानिए राशि के अनुसार किस रंग के कपड़े पहने </a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://fundabook.com/karva-chauth-2023-know-what-color-clothes-to-wear-according-zodiac/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">37326</post-id>	</item>
	</channel>
</rss>
