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	<title>Vijayadashami Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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		<title>विजयादशमी : दशानन रावण के जीवन से सीखने योग्य बातें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 05:27:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आज विजयादशमी है। राम ने रावण को मारकर धरती को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। रावण अधर्म का प्रतीक था, पापी था, लेकिन ज्ञानी भी था। जिस तरह हम भगवान राम के जीवन की घटनाओं से सीखते हैं कि हमें अपनी जिंदगी में क्या करना चाहिए, वैसे ही रावण का जीवन सिखाता है कि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>आज विजयादशमी है। राम ने रावण को मारकर धरती को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। रावण अधर्म का प्रतीक था, पापी था, लेकिन ज्ञानी भी था। जिस तरह हम भगवान राम के जीवन की घटनाओं से सीखते हैं कि हमें अपनी जिंदगी में क्या करना चाहिए, वैसे ही रावण का जीवन सिखाता है कि हमें क्या-क्या नहीं करना चाहिए।</p>
<p>तो आज दशानन रावण के जीवन की 5 कहानियों से सीखें कि क्या गलतियां हमें नहीं करनी चाहिए।</p>
<h2>मन की शांति सबसे बड़ा सुख है</h2>
<p>रावण का मन शांत नहीं रहता था। संतुष्टि का भाव उसमें था ही नहीं। तीनों लोकों को जीतने के बाद भी रावण के मन में एक अशांति थी कि इतना शक्तिशाली होने के बाद भी कोई उसकी पूजा नहीं करता। नतीजतन उसने ऋषि-मुनियों को मारना शुरू कर दिया।</p>
<p>सारी दुनिया जीतने के बाद भी मन में एक असंतुष्टि थी कि लोग उसकी पूजा क्यों नहीं करते। जब रावण के अत्याचार बढ़ने लगे तो ऋषियों ने तप शुरू किए। यज्ञ और ज्यादा होने लगे। यज्ञ होने लगे तो रावण ने अपने अत्याचार और बढ़ा दिए। दुनियाभर में रावण का आतंक हो गया।</p>
<p>पूरी धरती परेशान हो गई। तब भगवान को उसे मारने के लिए अवतार लेना पड़ा। ये असंतुष्टि उसे पापके रास्ते पर ले गई और उसे अंतत: इसी असंतुष्टि के कारण मरना पड़ा। इसलिए हमेशा मन में संतुष्टि का भाव रखें। जो हमारे पास है, उसे स्वीकार करें।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-29307 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?resize=512%2C336&#038;ssl=1" alt="" width="512" height="336" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?w=512&amp;ssl=1 512w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?resize=300%2C197&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 512px) 100vw, 512px" /></p>
<h2>बिना किसी की शक्ति का अनुमान किए चुनौती ना दें</h2>
<p>रावण की नजर में सिर्फ वो खुद ही महान योद्धा था। वो हर किसी को युद्ध की चुनौती देता रहता था। ऐसे ही एक बार उसे वानरों के राज किष्किंधा के बारे में पता चला। वहां का राजा बाली काफी शक्तिशाली है ऐसा उसे पता चला। रावण ने बिना किसी विलंब के किष्किंधा का रूख किया।</p>
<p>रावण ने बाली को ललकारा, उस समय बाली अपने महल में नहीं था। उसका छोटा भाई सुग्रीव मौजूद था। सुग्रीव ने रावण से पूछा कि तुम कौन हो और क्यों बाली को पुकार रहे हो तो रावण ने जवाब दिया कि मैं बाली से युद्ध करना चाहता हूं या तो वो मुझसे युद्ध करे या फिर अपनी हार स्वीकार कर मेरी दासता स्वीकार करे।</p>
<p>सुग्रीव को रावण की इस बात पर हंसी आ गई। उसने कहा- महाराज बाली अभी संध्यापूजन के लिए समुद्र तट पर गए हैं।<br />
कुछ ही देर में वो यहां चार समद्रों की परिक्रमा करके लौटेंगे। तब तुम्हारी इच्छा वैसे ही पूरी हो जाएगी।</p>
<p>रावण से रहा नहीं गया। उसने जैसे ही सुना कि बाली अभी पूजा करने समुद्र तट पर गया है, वो समुद्र किनारे पहुंच गया। बाली उस समय सूर्य को अर्घ्य दे रहा था, रावण ने पीछे से वार करने की कोशिश की, लेकिन बाली ने उसे पकड़ कर अपनी बाजू में दबा लिया। रावण छूटने की कोशिश करता रहा, लेकिन नहीं छूट पाया।</p>
<p>बाली ने चार समुद्र की परिक्रमा उसे अपनी कांख में दबाकर की। तब तक रावण को अपनी गलती का अहसास हो गया था कि उसने बिना बाली की ताकत का अंदाजा लगाए उस पर हमला करने की गलती कर दी।</p>
<p>जैसे ही बाली ने उसे छोड़कर पूछा कि बता तू क्या चाहता है, तो युद्ध करने की इच्छा से आए रावण ने बाली को मित्रता का प्रस्ताव दिया। रावण की ये गलती सिखाती है कि किसी की ताकत और कमजोरी को समझे बिना उसे चुनौती नहीं देनी चाहिए। इससे हमारी हार ही होती है।</p>
<h2>अगर सही सलाह मिले तो उसे स्वीकार करें</h2>
<p>वाल्मीकि रामायण का एक प्रसंग है। जब राम से शादी करने की जिद कर रही शूर्पणखा के नाक लक्ष्मण ने काट दिए तो वो अपने भाई रावण के पास पहुंची। उसने रावण को बताया कि उसके राज्य में कोई संन्यासी है, जो उसके लिए घातक हो सकता है। रावण तुरंत अपने रथ पर बैठकर निकल गया। वो सीधा अपने मामा मारिच के पास पहुंचा।</p>
<p>उसने मारिच से कहा कि उसके राज्य में कोई दो संन्यासी घुस आए हैं, उन्हें मारना है। मारिच एक बार पहले राम से युद्ध कर चुका था, राम ने घास के तिनके को तीर बनाकर छोड़ा &#8216; और मारिच समुद्र पार जाकर गिरा था। मारिच ने रावण को समझाया कि राम से युद्ध करना उसके हित में नहीं है।</p>
<p>वो लौट जाए। रावण मान गया। वो फिर लौटकर अपने महल में आ गया। शूर्पणखा को जब पता चला कि रावण ने राम से बदला लेने का विचार त्याग दिया है तो उसने फिर जाकर रावण को बोलै कि वन में जो दो संन्यासी हैं, उनके साथ एक बड़ी सुंदर सी स्त्री भी है, जिसे रावण के पास होना चाहिए क्योंकि उसके जैसी कोई और सुंदर महिला संसार में नहीं है।</p>
<p>सीता की सुंदरता के बारे में सुनकर रावण ने सीता के हरण की योजना बनाई। वो फिर मारिच के पास पहुंचा। मारिच ने उसे फिर वही सलाह दी कि राम कोई सामान्य संन्यासी नहीं है, अवतारी पुरुष हैं।</p>
<p>उनसे दुश्मनी ना लें, लेकिन इस बार रावण नहीं माना और मारिच से कहा कि अगर वो सीता के हरण में उसकी सहायता नहीं करेगा तो उसे मार दिया जाएगा। मारिच ने सोचा, रावण के हाथ से मरने से बेहतर है, राम के हाथों मारा जाऊं। फिर मारिच ने स्वर्ण मृग बनने की योजना बनाई।</p>
<p>ये सीता हरण ही रावण के पूरे वंश का नाश का कारण बन गया। इस पूरे प्रसंग से सीख सकते हैं कि अगर कोई सही सलाह मिले तो उसे मानें, अपनी जिद और लालच में उस सलाह को ना ठुकराएं। ये आपके लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता है।</p>
<h2>रिश्ते अधिकार से नहीं चलते, समर्पण से टिकते हैं</h2>
<p>वाल्मीकि रामायण कहती है, रावण के पास पुष्पक विमान तो था ही, जो उसने अपने भाई कुबेर से छीना था। इसके साथ ही रावण के पास एक दिव्य रथ भी था। रावण ने तीनों लोकों को इसी रथ पर बैठकर जीता था।</p>
<p>रावण जहां भी जाता वहां से राजकूमारियों, रानियों और अन्य सुंदर औरतों को उठाकर अपने महल में ले आता था। रावण के महल में करीब 10 हजार ऐसी औरतें थीं, जिन्हें वो अलग-अलग राज्यों से अपहरण करके लाया था।</p>
<p>रावण एक बार ऐसे ही लंका में सैंकडों महिलाओं को जीत कर ले आया। तब विभीषण ने रावण को बताया कि तुम अपने बल के अभिमान में कितनी औरतों को उनके पति और पिता को मार कर उठा लाए। तुम्हारे इन्हीं पापकर्मों का परिणाम हमारे परिवार को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p>रावण ने पूछा &#8211; ऐसा क्या हो गया जो तुम मुझसे इस तरह की बातें कर रहे हो। विभीषण ने जवाब दिया &#8211; तुम विश्वविजय के लिए निकले थे, दूसरे राजाओं के परिवार की औरतें लाने में व्यस्त थे, तब एक राक्षस ने हमारे राज्य पर हमला कर दिया। वो हमारी मौसी की बेटी, हमारी बहन को उठाकर ले गया। तुम दुनिया के साथ जो कर रहे थे. वो हमारे ही परिवार के साथ घट गया।</p>
<p>रावण को अपनी गलती का एहसास हुआ। वो अपनी बहन को बचाने निकला, लेकिन तब तक उसकी बहन ने उस राक्षस को अपना पति मान कर शादी कर ली।</p>
<p>ये कहानी सिखाती है कि हम दुनिया को जो देते हैं, वो ही लौटकर हमारे पास आता है। इसलिए, संसार में रहकर अच्छे काम करें। आप अच्छा करेंगे तो आपके साथ भी अच्छा ही होगा।</p>
<h2>आप दुनिया के साथ जो करते हैं, वो आपके साथ भी होगा</h2>
<p>रावण परम शिव भक्त था। भगवान शिव को उसने ऐसा प्रसन्न किया कि खुद भगवान शिव ने घोषित किया कि रावण उनका परमभक्त है। रावण ने खुद को शिव का सबसे बड़ा भक्त मान लिया। इस बात का उसे अहंकार हो गया।</p>
<p>एक दिन जब रावण सोने की लंका में बैठा था, तो उसे ख्याल आया कि उसके आराध्य भगवान शिव कैलाश पर्वत पर रहते हैं, जहां ना कोई भवन है ना कोई महल। रावण ने तय किया कि वो भगवान शिव को लंका में लेकर आएगा, ताकि वो उनके पास भी रह सके और भगवान भी सोने की लंका का वैभव भोग सके। रावण कैलाश पर्वत की ओर चल दिया।</p>
<p>उसने भगवान शिव को लंका ले जाने के लिए कैलाश पर्वत को उठाने की कोशिश की। एक हाथ कैलाश पर्वत के नीचे लगाया और उठाने लगा तो भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया। रावण का हाथ दब गया। वो कुछ कर नहीं पा रहा था।</p>
<p>तब उसने शिवतांडव स्तोत्र की रचना कर शिव को प्रसन्न किया। भगवान ने उसे समझाया कि वो अपनी भक्ति का अहंकार ना करे। अहंकार ही उसके विनाश का कारण हो सकता है। रावण ने रिश्तों में समर्पण से ज्यादा अधिकार पर जोर दिया, इसलिए उसे लगभग हर रिश्ते से हाथ धोना पड़ा।</p>
<p>भाई विभीषण छोड़ गया, कुंभकर्ण मारा गया, सारे बेटे मारेगए,पत्नियां अकेली रह गईं। रिश्तों में अधिकार की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि समर्पण रिश्तों को बचाता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें :-</strong></p>
<ul>
<li><strong><a href="https://fundabook.com/celebrate-vijayadashami-importance-10-heads-ravana-hindi/">क्यों मनाते हैं विजयादशमी, जाने रावण के 10 सिरों का अर्थ !!</a></strong></li>
</ul>
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		<title>क्यों मनाते हैं विजयादशमी, जाने रावण के 10 सिरों का अर्थ !!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 03:56:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>इस पर्व को भगवती &#8216;विजया&#8217; के नाम पर भी &#8216;विजयादशमी&#8216; कहते हैं। इस दिन भगवान रामचंद्र चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण का वध कर अयोध्या पहुँचे थे। इसलिए भी इस पर्व को &#8216;विजयादशमी&#8217; कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय &#8216;विजय&#8217; नामक काल [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इस पर्व को भगवती &#8216;विजया&#8217; के नाम पर भी &#8216;<strong>विजयादशमी</strong>&#8216; कहते हैं। इस दिन भगवान रामचंद्र चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण का वध कर अयोध्या पहुँचे थे। इसलिए भी इस पर्व को &#8216;विजयादशमी&#8217; कहा जाता है।</p>
<p>ऐसा माना जाता है कि <strong>आश्विन शुक्ल दशमी</strong> को तारा उदय होने के समय &#8216;विजय&#8217; नामक काल होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है यह भी यह कारण है कि इसे विजयादशमी कहते हैं।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone wp-image-29307 " src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?resize=696%2C457&#038;ssl=1" alt="" width="696" height="457" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?w=512&amp;ssl=1 512w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2021/10/celebrate-Vijayadashami-importance-10-heads-Ravana.jpg?resize=300%2C197&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p>पौराणिक कथा के अनुसार, <strong>रावण</strong> ने देवी सीता का हरण कर लिया था। इस दौरान देवी सीता की रक्षा के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने अधर्म और अन्यायी रावण को युद्ध के लिए ललकारा। <strong>मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम</strong> और लंकापति रावण के बीच 10 दिनों तक युद्ध चला।</p>
<p>भगवान श्री राम ने आश्विन शुक्ल की दशमी तिथि को मां दुर्गा से प्राप्त <strong>दिव्यास्त्र</strong> की मदद से रावण का वध कर दिया था। श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी और यह दशमी तिथि भी थी, ऐसे में इस दिन को विजयदशमी कहा जाता है।</p>
<h2>विजया दशमी का अर्थ</h2>
<p><strong>विजयादशमी</strong> भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग कारणों से अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है। कुछ क्षेत्रों में, यह भैंस राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा की जीत के उत्सव के साथ दुर्गा पूजा के अंत का प्रतीक है।</p>
<p>उत्तरी, मध्य और कुछ पश्चिमी राज्यों में इसे लोकप्रिय रूप से <strong>दशहरा</strong> कहा जाता है, यह <strong>रामलीला</strong> के अंत का प्रतीक है। भगवान राम की रावण पर विजय के लिए उत्साह है।</p>
<h2>महत्व</h2>
<p>इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के असुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। वहीं इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था।</p>
<p>इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग शस्त्र पूजन के साथ ही वाहन पूजन भी भी करतें हैं। वहीं आज के दिन से किसी भी नए कार्य की शुरुआत करना भी शुभ माना जाता है।</p>
<h2>रावण के 10 सिरों का महत्व</h2>
<p>रावण ने ब्रह्मा के लिए कई वर्षों तक गहन तपस्या की थी l अपनी तपस्या के दौरान, रावण ने <a href="https://fundabook.com/secret-flower-related-lord-brahma-people-yearn-see-hindi/"><strong>ब्रह्मा</strong> </a>को प्रसन्न करने के लिए 10 बार अपने सिर को काट दिया। हर बार जब वह अपने सिर को काटता था तो एक नया सिर प्रकट हो जाता था l इस प्रकार वह अपनी तपस्या जारी रखने में सक्षम हो गया।</p>
<p>अंत में, ब्रह्मा, रावण की तपस्या से प्रसन्न हुए और 10 वें सिर कटने के बाद प्रकट हुए और उन्हें वरदान मांगने को कहा l इस पर रावण ने <strong>अमरता का वरदान</strong> माँगा पर ब्रह्मा ने निश्चित रूप से मना कर दिया, लेकिन उन्हें अमरता का आकाशीय <strong>अमृत</strong> प्रदान किया, जिसे हम सभी जानते हैं कि उनके नाभि के तहत संग्रहीत किया गया था।</p>
<p>रावण के दस सिर दस कमजोरियों या दस पापों का प्रतीक हैं जिनसे मनुष्य को छुटकारा पाना चाहिए। मनुष्य के दस बुरे भाव या गुण जिन्हें रावण के दस सिरों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, वे इस प्रकार हो सकते हैं।</p>
<ol>
<li>काम (वासना)</li>
<li>क्रोध (क्रोध)</li>
<li>मोह (आकर्षण)</li>
<li>लोभ (लालच)</li>
<li>मद (गर्व)</li>
<li>मत्सर (ईर्ष्या)</li>
<li>स्वर्थ (स्वार्थ)</li>
<li>अन्याय (अन्याय)</li>
<li>अमानवीयता (क्रूरता)</li>
<li>अहंकार (अहंकार)<br />
<figure></figure>
</li>
</ol>
<p><strong>यह भी पढ़ें :-</strong></p>
<p><strong><a href="https://fundabook.com/where-ravana-is-worshipped-at-these-places-in-india/">भारत के वे स्थान जहां दशहरा पर होती है रावण की पूजा!!!</a></strong></p>
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		<title>दशहरा 2023 : जानिए कब है दशहरा, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि!</title>
		<link>https://fundabook.com/dussehra-auspicious-time-and-worship-method-hindi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Oct 2023 05:25:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>दशहरा या विजय दशमी हिंदुओं का एक मनाया जाने वाला त्यौहार है जो लंका के राजा, दस सिर वाले राजा, रावण पर देवी सीता का अपहरण करने के बाद भगवान राम की विजय की याद दिलाता है। यह त्यौहार हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन माह की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस त्यौहार का नाम [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दशहरा या विजय दशमी हिंदुओं का एक मनाया जाने वाला त्यौहार है जो लंका के राजा, दस सिर वाले राजा, रावण पर देवी सीता का अपहरण करने के बाद भगवान राम की विजय की याद दिलाता है।</p>
<p>यह त्यौहार हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन माह की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस त्यौहार का नाम संस्कृत के दो शब्दों से आया है- &#8220;<strong>दशा</strong>,&#8221; जिसका अर्थ है <strong>दस</strong>, और &#8220;हारा&#8221;, जिसका अर्थ है <strong>हार</strong>। यह एक ऐसा दिन है जो अयोध्या के राजा भगवान राम के साथ लड़ाई में रावण की हार का जश्न मनाता है।</p>
<p>इसके अलावा, यह दिन हिंदुओं के सबसे बड़े त्यौहार <strong>दिवाली</strong> की तैयारी की शुरुआत का प्रतीक है, जो दशहरा के 20 दिन बाद होता है।</p>
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<h2>दशहरा 2023 कब है?</h2>
<p>इस साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 23 अक्तूबर को शाम 05 बजकर 44 मिनट से हो रही है। इसका समापन 24 अक्तूबर को दोपहर 03 बजकर 14 मिनट पर होगा। उदया तिथि 24 अक्तूबर को प्राप्त हो रही है, इसलिए दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व 24 अक्तूबर को मनाया जाएगा।</p>
<h2>दशहरा 2023 पर रावण दहन का मुहूर्त</h2>
<div>दशहरा के दिन सूर्यास्त बाद प्रदोष काल में रावण के पुतले का दहन किया जाता है। इस साल रावण दहन 24 अक्तूबर को शाम 05 बजकर 43 मिनट के बाद से किया जाएगा।</div>
<h2>दशहरा पर्व का महत्व</h2>
<p>यह बुरे आचरण पर अच्छे आचरण की जीत की ख़ुशी में मनाया जाने वाला त्यौहार हैं। सामान्यतः <strong>दशहरा</strong> एक जीत के जश्न के रूप में मनाया जाने वाला त्यौहार हैं। जश्न की मान्यता सबकी अलग-अलग होती हैं। जैसे किसानों के लिए यह नयी <strong>फसलों</strong> के घर आने का जश्न हैं।</p>
<p>पुराने वक़्त में इस दिन औजारों एवम हथियारों की पूजा की जाती थी, क्योंकि वे इसे युद्ध में मिली जीत के जश्न के तौर पर देखते थे। लेकिन इन सबके पीछे एक ही कारण होता हैं बुराई पर अच्छाई की जीत। किसानो के लिए यह मेहनत की जीत के रूप में आई फसलो का जश्न एवम सैनिको के लिए युद्ध में दुश्मन पर जीत का जश्न हैं।</p>
<h2>पूजन विधि</h2>
<p><strong>दशहरा</strong> के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। फिर साफ कपड़े पहनें। गेहूं या फिर चूने से दशहरा की प्रतिमा बनाएं। फिर <strong>गाय के गोबर</strong> से <strong>नौ उपले</strong> बनाएं और उन पर जौ और <strong>दही लगाएं</strong>। फिर गोबर से ही 2 कटोरी बनाएं और इनमें से एक में <strong>सिक्‍के</strong> और <strong>दूसरी में रोली, चावल, फल, फूल, </strong>और <strong>जौ डाल</strong> दें।</p>
<p>इसके बाद गोबर से बनाई प्रतिमा पर <strong>केले, मूली, ग्वारफली, गुड़</strong> और <strong>चावल</strong> चढ़ाएं। <strong>धूप-दीप</strong> जलाएं। ब्राह्मणों और निर्धनों को भोजन कराकर दान दें। रात में रावण दहन करें और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।</p>
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