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	<title>scientists Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jan 2024 05:30:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interesting Facts]]></category>
		<category><![CDATA[Homi Jahangir Bhabha]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Atomic Energy Programme]]></category>
		<category><![CDATA[nuclear science]]></category>
		<category><![CDATA[scientists]]></category>
		<category><![CDATA[रोचक तथ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>डॉ. होमी जहांगीर भाभा भारत के प्रमुख दूरदर्शी परमाणु भौतिक वैज्ञानिकों में से एक थे। होमी जे. भाभा ने परमाणु विज्ञान के क्षेत्र में एक शक्तिशाली भारत की कल्पना की थी। उन्होने मुट्ठी भर वैज्ञानिकों की सहायता से मार्च 1944 में नाभिकीय उर्जा पर अनुसन्धान आरम्भ किया। उन्हें भारत के परमाणु उर्जा कार्यक्रम का जनक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>डॉ. होमी जहांगीर भाभा भारत के प्रमुख दूरदर्शी परमाणु भौतिक <a href="https://fundabook.com/rocket-boys-two-great-scientists-hindi/">वैज्ञानिकों</a> में से एक थे। होमी जे. भाभा ने परमाणु विज्ञान के क्षेत्र में एक शक्तिशाली भारत की कल्पना की थी। उन्होने मुट्ठी भर वैज्ञानिकों की सहायता से मार्च 1944 में नाभिकीय उर्जा पर अनुसन्धान आरम्भ किया।</p>
<p>उन्हें भारत के परमाणु उर्जा कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। उन्होंने देश के परमाणु कार्यक्रम के भावी स्वरूप की मजबूत नींव रखी जिसके चलते भारत आज विश्व के प्रमुख परमाणु संपन्न देशों की कतार में खड़ा है। उन्हें &#8216;आर्किटेक्ट ऑफ इंडियन एटॉमिक एनर्जी प्रोग्राम&#8217; भी कहा जाता है।</p>
<p>इस लेख में हम जानेगें होमी जे. भाभा के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य , तो चलिए जानते हैं।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-59739 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/01/facts-about-Homi-Jahangir-Bhabha.jpg?resize=600%2C337&#038;ssl=1" alt="facts about Homi Jahangir Bhabha" width="600" height="337" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/01/facts-about-Homi-Jahangir-Bhabha.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/01/facts-about-Homi-Jahangir-Bhabha.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2024/01/facts-about-Homi-Jahangir-Bhabha.jpg?resize=150%2C84&amp;ssl=1 150w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<ul>
<li>होमी ने अपनी स्कूली शिक्षा कैथेड्रल और जॉन कॉनन स्कूल, बॉम्बे में की थी। साल 1930 में होमी भाभा ने इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री और 1934 में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी। साल 1940 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान होमी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज, (IISc) बैंग्लोर में बतौर रीडर जॉइन किया था।</li>
<li>वह एक चित्रकार, शास्त्रीय संगीत और ओपेरा के प्रेमी होने के साथ-साथ कला और संस्कृति में बहुत रुचि रखते थे।</li>
<li>परमाणु अनुसंधान में जाने से पहले उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की।</li>
<li>उन्होंने <a href="https://en.wikipedia.org/wiki/Niels_Bohr" target="_blank" rel="noopener">नील्स बोह्र</a> ( जोकि एक एक डेनिश भौतिक विज्ञानी थे) के साथ काम किया और क्वांटम सिद्धांत के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई।</li>
<li>भाभा को मेसन कण की पहचान करने का श्रेय दिया जाता है।</li>
<li>वह 20 अगस्त 1955 में &#8220;<strong>परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग</strong>&#8221; पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के पहले अध्यक्ष थे।</li>
<li>वह 2 प्रमुख अनुसंधान संस्थानों &#8220;<strong>टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च&#8221;</strong> और &#8220;<strong>भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर&#8221;</strong> के संस्थापक, निर्माता और निदेशक थे।</li>
<li>वह चाहते थे कि परमाणु ऊर्जा का उपयोग गरीबी उन्मूलन के लिए किया जाए और उन्होंने दुनिया भर में परमाणु हथियारों को गैरकानूनी घोषित करने की वकालत की।</li>
<li>1954 में, उन्हें परमाणु विज्ञान में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 1942 में <strong>एडम्स पुरस्का</strong>र भी जीता था और <strong>रॉयल सोसाइटी के फ़ेलो</strong> से सम्मानित हुए। रॉयल सोसाइटी के <b>फ़ेलोशिप </b>पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने &#8221; गणित , इंजीनियरिंग विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान सहित प्राकृतिक ज्ञान के सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।</li>
<li>उन्होंने ब्रह्मांडीय विकिरण को बेहतर ढंग से समझने के लिए <a href="https://en.wikipedia.org/wiki/Cascade_effect" target="_blank" rel="noopener">कैस्केड सिद्धांत</a> विकसित करने के लिए जर्मन भौतिक विज्ञानी वाल्टर हेइटलर के साथ काम किया।</li>
<li>वह अपने काम के प्रति इतने जुनूनी थे कि वह जीवन भर कुंवारे रहे और अपना सारा समय विज्ञान को समर्पित कर दिया।</li>
<li>वह मालाबार हिल्स में मेहरानगीर नाम के एक विशाल औपनिवेशिक बंगले में रहते थे।</li>
<li>24 जनवरी 1996 को माउंट ब्लैंक के पास एक रहस्यमय हवाई दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।</li>
<li>होमी भाभा की मृत्यु से ठीक 14 दिन पहले भारत के पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी ताशकंद में रहस्यमय मौत हो गई थी।</li>
</ul>
<p><strong><div class="read-also-wrap read-also-outer"><span class="read-also-link">संबंधित: </span><a href="https://www.imdb.com/title/tt13868972/" target="_blank" rel="noopener"> रॉकेट बॉयज :- दो महान वैज्ञानिकों की कहानी और कुछ रोचक तथ्य! </a></div></strong></p>
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		<title>वैज्ञानिकों द्वारा मानव शरीर में खोजी गयी यह 10 नई चीजें!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Mar 2017 12:53:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विज्ञान]]></category>
		<category><![CDATA[discover]]></category>
		<category><![CDATA[Gut Bacteria]]></category>
		<category><![CDATA[human body]]></category>
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		<category><![CDATA[tissues]]></category>
		<category><![CDATA[रोचक तथ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>चाहे मनुष्य समुद्र की गहराइयों और आकाश की ऊँचाइयों तक पहुंच गया हो. लेकिन अभी तक मानव यह पूरी तरह नहीं जान पाया कि उसके शरीर के अंदर क्या चल रह है ? हाल ही में वैज्ञानिकों ने शरीर के बारे में दस नई बातें पता की है. जिनके बारे में जानकर आपको अपने शरीर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>चाहे मनुष्य समुद्र की गहराइयों और आकाश की ऊँचाइयों तक पहुंच गया हो. लेकिन अभी तक मानव यह पूरी तरह नहीं जान पाया कि <span id="more-3969"></span>उसके शरीर के अंदर क्या चल रह है ? हाल ही में वैज्ञानिकों ने शरीर के बारे में दस नई बातें पता की है. जिनके बारे में जानकर आपको अपने शरीर के बारे में अच्छी तरह से पता चलेगा.</p>
<h2>हमारा दिमाग सूचना को कैसे श्रेणीबद्ध करता है</h2>
<p>हमारे दिमाग में सूचना जाकर अलग अलग श्रेणियों में बंट जाती है. जैसे कि लोगों के नाम की श्रेणी दिमाग के किसी अलग हिस्से में स्टोर हो जाती है. जरूरी सूचनाओं की श्रेणी दिमाग के दुसरे हिस्से में स्टोर हो जाती है. यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहता है. इसी वजह से किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति चीजों को भूलने लगते हैं क्योंकि रोग दिमाग के माध्यम से स्थानांतरित करता है. जिससे दिमाग के एक वर्ग में स्टोर की हुई जानकारी खत्म होने लगती है.</p>
<h2>मनुष्य की आँख में एक नई लेयर मिलना</h2>
<p>वैज्ञानिकों ने एक नये शोध में पता लगाया है कि मनुष्य की आँख में एक बहुत छोटी सी लेयर भी पायी जाती है जिसके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं थी. इस नई लेयर के मिल जाने से आँखों में 6 लेयर बन गयी हैं. इस बात का पता लोगों द्वारा दान की गयी आँखों पर अध्ययन करके लगा. जिसमें डॉक्टरों ने आँख के कोर्निया पर छोटा सा बब्ल इंजेक्ट किया और उन्होंने एक छोटी लेयर को पाया. इस नई लेयर के मिल जाने से बहुत सारी आँख के संबंधित बीमारियों के बारे में पता चलेगा.</p>
<h2>हमारे दिमाग में झुर्रियां क्यों हैं ?</h2>
<p>सभी मनुष्यों के दिमाग एक समान नहीं होते. हर एक मनुष्य के दिमाग में पायी जाने वाली झुर्रियों की बनावट अलग अलग होती है. इस झुर्रियों की बनावट की वजह से हमारा दिमाग ठीक ढंग से प्रोसेस करता है. हमारे दिमाग पर पायी जाने वाली लकीरों को गीरी(gyri) कहते हैं और झुर्रियों को सुलसी कहते हैं. हमारे मस्तिष्क में ग्रे पदार्थ और सफेद पदार्थ पाया जाता है. दोनों पदार्थों में समान सी कठोरता होती है. लेकिन दोनों के ग्रोथ अलग अलग होती है. जिसकी वजह से हमारे दिमाग में झुर्रियां बनी होती हैं.</p>
<h2>आंत जीवाणु (Gut Bacteria)</h2>
<p>रेडबाउंड विश्वविद्यालय के चिकित्सक सेंटर में शोधकर्ताओं ने मानव शरीर में पाये जाने वाले सबसे समान वायरस के बारे में पता लगाया है. उन्होंने इस वायरस का नाम क्रासफेज रखा है. वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि क्रासफेज वायरस पाचन किर्या में भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में अलग करता है.</p>
<h2>मस्तिष्क के नये हिस्से की खोज</h2>
<p>वाशिंगटन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, मानव दिमाग के बारे में अध्ययन कर रहे थे. तो उन्हें एम्.आर.आई स्कैन में दिमाग में फाइबर के अजीब से बंडल मिले. इससे पहले इन फाइबर के बंडलों का किसी को पता नहीं था. यह इतिहास में पहली बार हुआ था. फिर बाद में इस पर वैज्ञानिकों की टीम ने अध्ययन किया जिसमें पता चला कि इस फाइबर का उपयोग दृश्य जानकारी को स्टोर करने के लिए होता है.</p>
<h2>जैसे-जैसे मानव का शरीर बूढ़ा होता जाता है तो शरीर की दुर्गन्ध बढ़ती जाती है</h2>
<p>वैज्ञानिकों ने पता लगाया है जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती जाती है उसके शरीर से निकलने वाली दुर्गन्ध भी पहले से बदतर होती जाती है. 40 साल की उम्र के बाद व्यक्ति के शरीर के पसीने की दुर्गन्ध पहले से बदतर होने लगती है. ऐसा पसीने से मिलने वाले बैक्टीरिया की वजह से होता है.</p>
<h2>घुटनों पर लगी चोट का उपचार करने की नई तकनीक</h2>
<p>घुटनों के दर्द से बहुत सारे लोग ग्रस्त हैं. पहले घुटनों को हटाने के लिए की जाने वाली ऐ.सी.एल सर्जरी पूरी तरह से घुटनों की समस्या को हल नहीं करती थी. अब उन्होंने ऐसी तकनीक को बनाया है जो सीधे तौर पर उसी हिस्से को ठीक करेगी जहाँ पर चोट के दौरान घुटने के हिस्से में सबसे ज्यादा दर्द हो रहा होता है. शोधकर्ताओं को घुटनों में अग्रपाश्विक बंध(anterolateral ligament) हिस्सा मिला है जिसमें घुटने पर चोट लगने से सबसे पहले चोट से ग्रस्त होता है.</p>
<h2>हमारे शरीर के अलग अलग हिस्सों की उम्र अलग अलग दर से बढ़ती है</h2>
<p>वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि हमारे शरीर के अलग अलग हिस्सों की उम्र अलग-अलग दर से बढ़ती है. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में किये गये एक अध्ययन में पाया गया है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों की उम्र मंह अंतर थोड़ा-थोड़ा नहीं होता बल्कि बहुत ज्यादा भी हो सकता है. शरीर के कई उत्तकों(tissues) की उम्र बाकी उत्तकों से कई साल ज्यादा भी हो सकती है.</p>
<h2>ध्यान लगाते समय हमारा शरीर</h2>
<p>मैडिटेशन तकनीक सदियों से चलती आ रही है. अगर आप लगातार कई सप्ताह तक मैडिटेशन करेंगे तो आपको पता चलेगा कि मेडिटेशन करने से आप अपने तनाव के स्तर को, विचारों को और प्रतिकिर्याओं को स्थिर रख सकेंगे. वैज्ञानिकों ने मैडिटेशन की वजह से दिमाग पर होने वाले असर को एम्.आर.आई स्कैन से देखा. उन्होंने पाया कि मैडिटेशन से हमारे मस्तिष्क में ग्रे पदार्थ में कमी होने लगती है. यह ग्रे पदार्थ ही लड़ाई की वजह बनता है. इसमें कमी आने से हमारा स्वभाव शांत और हंसमुख होने लगता हैं</p>
<h2>चेतना के लिए ओन-ऑफ स्विच</h2>
<p>इस बात को जानकर आप हैरान हो जायेंगे कि अब आप अपने दिमाग में आने वाले नकरात्मक विचारों को भी मिटा सकते हैं. अगर आप किसी बुरी स्मृति को भूलना चाहते हैं तो वैज्ञानिकों ने ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित की है जिससे आप अपनी बुरी स्मृति को भूल सकेंगे. वैज्ञानिकों ने ऐसे इलेक्ट्रिक रोड्स विकसित किये हैं जो आपके दिमाग में होने वाली सूचना के आदान प्रदान को नियंत्र कर पाएंगे.</p>
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