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	<title>Sant Guru Kabir Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>जानिए संत कबीरदास जी की जयंती पर उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jun 2022 04:30:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>हिंदू कैलेंडर के अनुसार, संत कबीरदास जयंती ज्येष्ठ महीने में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इसका मतलब है कि यह आम तौर पर मई के अंत या जून में मनाई जाती है। इस वर्ष कबीर जयंती मंगलवार, 14 जून 2022 को मनाई जाएगी। संत कबीरदास जी एक लोकप्रिय समाज सुधारक और कवि थे। उनके [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>हिंदू कैलेंडर के अनुसार, <strong>संत कबीरदास जयंती</strong> ज्येष्ठ महीने में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इसका मतलब है कि यह आम तौर पर मई के अंत या जून में मनाई जाती है।</p>
<p>इस वर्ष <strong>कबीर जयंती</strong> मंगलवार, 14 जून 2022 को मनाई जाएगी। <strong>संत कबीरदास</strong> <strong>जी</strong> एक लोकप्रिय समाज सुधारक और कवि थे। उनके लेखन का भक्ति आंदोलन पर भी बहुत प्रभाव पड़ा।</p>
<p>माना जाता है कि कबीर का जन्म सन् 1398 ई.(लगभग), <strong>लहरतारा ताल</strong>, <strong>काशी</strong> में हुआ था। कबीर के जन्म के विषय में बहुत से रहस्य हैं।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-35718" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/06/Kabirdas-Jayanti.jpg?resize=750%2C447&#038;ssl=1" alt="" width="750" height="447" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/06/Kabirdas-Jayanti.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/06/Kabirdas-Jayanti.jpg?resize=300%2C179&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/06/Kabirdas-Jayanti.jpg?resize=696%2C415&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/06/Kabirdas-Jayanti.jpg?resize=705%2C420&amp;ssl=1 705w" sizes="(max-width: 750px) 100vw, 750px" /></p>
<p>कुछ लोगों का मानना है कि <strong>रामानंद स्वामी</strong> के आशीर्वाद से काशी की एक ब्राहम्णी के गर्भ से कबीर ने जन्म लिया था,जो की विधवा थी। कबीरदास जी की मां को भूल से रामानंद स्वामी ने पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया था।</p>
<p>उनकी मां ने कबीरदास को <a href="https://en.wikipedia.org/wiki/Lahartara_Pond" target="_blank" rel="noopener">लहरतारा ताल</a> के पास फेंक दिया था। कुछ लोग कहते हैं कि कबीर जन्म से ही मुसलमान थे और बाद में उन्हें अपने गुरु रामानंद से हिन्दू धर्म का ज्ञान प्राप्त हुआ।</p>
<p>कबीर के माता-पिता के विषय में लोगों का कहना है कि जब दो <strong>राहगीर, नीमा</strong> और <strong>नीरु</strong> विवाह कर बनारस जा रहे थे, तब वह दोनों विश्राम के लिए लहरतारा ताल के पास रुके।</p>
<p>उसी समय नीमा को कबीरदास जी, कमल के पुष्प में लपटे हुए मिले थे। कबीर का जन्म कृष्ण के समान माना जा सकता है।</p>
<p>जिस प्रकार कृष्ण की जन्म देने वाली मां अलग और पालने वाली अलग थी। उसी प्रकार कबीरदास को जन्म देने वाली और पालने वाली मां अलग-अलग थी।</p>
<p>संत कबीर दास जी ने कम उम्र में ही अध्यात्म में रुचि थी और खुद को उन्होंने <strong>भगवान राम</strong> और <strong>अल्लाह</strong> की संतान बताया। उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वे अपने समय के सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करते थे।</p>
<p>भक्ति आंदोलन उनके कार्यों से अत्यधिक प्रभावित था। उनके कुछ प्रसिद्ध लेखन में मुख्य रूप से छह ग्रंथ हैं:</p>
<p><strong>कबीर साखी</strong>: इस ग्रंथ में कबीर साहेब जी साखियों के माध्यम से सुरता (आत्मा) को आत्म और परमात्म ज्ञान समझाया करते थे।<br />
<strong>कबीर बीजक</strong>: कबीर की वाणी का संग्रह उनके शिष्य धर्मदास ने बीजक नाम से सन् 1464 में किया। इस ग्रंथ में मुख्य रूप से पद्य भाग है। बीजक के तीन भाग किए गए हैं।<br />
<strong>कबीर शब्दावली</strong>: इस ग्रंथ में मुख्य रूप से कबीर साहेब जी ने आत्मा को अपने अनमोल शब्दों के माध्यम से परमात्मा कि जानकारी बताई है।<br />
<strong>कबीर दोहवाली</strong>: इस ग्रंथ में मुख्य तौर पर कबीर साहेब जी के दोहे सम्मलित हैं।<br />
<strong>कबीर ग्रंथावली</strong>: इस ग्रंथ में कबीर साहेब जी के पद व दोहे सम्मलित किये गये हैं।<br />
<strong>कबीर सागर</strong>: यह सूक्ष्म वेद है जिसमें परमात्मा कि विस्तृत जानकारी है।</p>
<p>यदि कबीरदास के गृहस्थ जीवन की बात करें तो, उनका विवाह, वनखेड़ी बैरागी की पालिता कन्या &#8220;लोई&#8221; के साथ हुआ था। कबीरदास की दो संताने थीं, एक पुत्र जिसका नाम &#8220;<strong>कमाल</strong>&#8221; था और एक पुत्री जिसका नाम &#8220;<strong>कमाली</strong>&#8221; था।</p>
<p>कबीरदास का पुत्र कबीर के मतों को पसंद नहीं करता था, इसका उल्लेख कबीर की रचनाओं में मिलता है। कबीर ने अपनी रचनाओं में पुत्री कमाली का जिक्र कहीं नहीं किया है।</p>
<p>कहा जाता है कि कबीरदास द्वारा काव्यों को कभी भी लिखा नहीं गया, सिर्फ बोला गया है। उनके काव्यों को बाद में उनके शिष्यों द्वारा लिखा गया।</p>
<p>कबीर को बचपन से ही साधु-संगति बहुत प्रिय थी, जिसका जिक्र उनकी रचनाओं में मिलता है। कबीर की रचनाओं में मुख्यत: <strong>अवधी</strong> एवं <strong>साधुक्कड़ी</strong> <strong>भाषा</strong> का समावेश मिलता है। कबीर राम भक्ति शाखा के प्रमुख कवि माने जाते हैं।</p>
<p>उनकी साखियों में गुरु का ज्ञान एवं भक्ति का जिक्र देखने को मिलता है। कबीर संपूर्ण जीवन <strong>काशी</strong> में रहने के बाद, मगहर चले गए। कहा जाता है कि 1518 के आसपास, <strong>मगहर</strong> में उन्होनें अपनी अंतिम सांस ली।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें :-</strong></p>
<p><strong><a href="https://fundabook.com/kabirdas-jayanti-famous-couplets-hindi/">कबीरदास जयंती : जानिए उनके कुछ प्रसिद्ध दोहे!!</a></strong></p>
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		<title>कबीरदास जयंती : जानिए उनके कुछ प्रसिद्ध दोहे!!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jun 2022 03:40:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कबीरदास या कबीर साहब जी 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। वे हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग में परमेश्वर की भक्ति के लिए एक महान प्रवर्तक के रूप में उभरे। इनकी रचनाओं ने हिन्दी प्रदेश के भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया। उनका लेखन सिक्खों के आदि ग्रंथ में भी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कबीरदास</strong> या कबीर साहब जी 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। वे हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग में परमेश्वर की भक्ति के लिए एक महान प्रवर्तक के रूप में उभरे।</p>
<p>इनकी रचनाओं ने हिन्दी प्रदेश के भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया। उनका लेखन <strong>सिक्खों</strong> के <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A4%BF_%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A5" target="_blank" rel="noopener"><strong>आदि ग्रंथ</strong></a> में भी देखने को मिलता है। वे हिन्दू धर्म व इस्लाम को मानते हुए धर्म एक सर्वोच्च ईश्वर में विश्वास रखते थे।</p>
<p>उन्होंने सामाज में फैली <strong>कुरीतियों, कर्मकांड, अंधविश्वास</strong> की निंदा की और सामाजिक बुराइयों की कड़ी आलोचना भी की। उनके जीवनकाल के दौरान हिन्दू और मुसलमान दोनों ने उन्हें बहुत सहयोग किया।</p>
<p>इस पोस्ट में हम कबीर दास जी के कुछ प्रसिद्ध दोहे और उनके अर्थ के बारे जानेगें:-</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-35717" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/06/Kabirdas-Jayanti-2022.jpg?resize=750%2C501&#038;ssl=1" alt="" width="750" height="501" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/06/Kabirdas-Jayanti-2022.jpg?w=750&amp;ssl=1 750w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/06/Kabirdas-Jayanti-2022.jpg?resize=300%2C200&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/06/Kabirdas-Jayanti-2022.jpg?resize=696%2C465&amp;ssl=1 696w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2022/06/Kabirdas-Jayanti-2022.jpg?resize=629%2C420&amp;ssl=1 629w" sizes="(max-width: 750px) 100vw, 750px" /></p>
<blockquote><p>मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले न बारम्बार ।<br />
तरवर से पत्ता टूट गिरे, बहुरि न लागे डारि ।।</p>
<p>भावार्थ: परमात्मा कबीर जी हिन्दू और मुस्लिम दोनों को मनुष्य जीवन की महत्ता समझाते हुए कहते हैं कि मानव जन्म पाना कठिन है। यह शरीर बार-बार नहीं मिलता। जो फल वृक्ष से नीचे गिर पड़ता है वह पुन: उसकी डाल पर नहीं लगता। इसी तरह मानव शरीर छूट जाने पर दोबारा मनुष्य जन्म आसानी से नही मिलता है, और पछताने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता।</p>
<p>माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।<br />
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।।</p>
<p>कबीर साहेब जी अपनी उपरोक्त वाणी के माध्यम से उन लोगों पर कटाक्ष कर रहे हैं जो लम्बे समय तक हाथ में माला तो घुमाते है, पर उनके मन का भाव नहीं बदलता, उनके मन की हलचल शांत नहीं होती। कबीर जी ऐसे व्यक्ति को कहते हैं कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन को सांसारिक आडंबरों से हटाकर भक्ति में लगाओ।</p>
<p>जीवन में मरना भला, जो मरि जानै कोय |<br />
मरना पहिले जो मरै, अजय अमर सो होय ||</p>
<p>जीते जी ही मरना अच्छा है, यदि कोई मरना जाने तो। मरने के पहले ही जो मर लेता है, वह अजर-अमर हो जाता है। शरीर रहते-रहते जिसके समस्त अहंकार समाप्त हो गए, वे वासना &#8211; विजयी ही जीवनमुक्त होते हैं।</p>
<p>मैं जानूँ मन मरि गया, मरि के हुआ भूत |<br />
मूये पीछे उठि लगा, ऐसा मेरा पूत ||</p>
<p>भूलवश मैंने जाना था कि मेरा मन भर गया, परन्तु वह तो मरकर प्रेत हुआ। मरने के बाद भी उठकर मेरे पीछे लग पड़ा, ऐसा यह मेरा मन बालक की तरह है।</p>
<p>भक्त मरे क्या रोइये, जो अपने घर जाय |<br />
रोइये साकट बपुरे, हाटों हाट बिकाय ||</p>
<p>जिसने अपने कल्याणरुपी अविनाशी घर को प्राप्त कर लिया, ऐसे संत भक्त के शरीर छोड़ने पर क्यों रोते हैं? बेचारे अभक्त &#8211; अज्ञानियों के मरने पर रोओ, जो मरकर चौरासी लाख योनियों के बाज़ार में बिकने जा रहे हैं।</p>
<p>मैं मेरा घर जालिया, लिया पलीता हाथ |<br />
जो घर जारो आपना, चलो हमारे साथ ||</p>
<p>संसार &#8211; शरीर में जो मैं &#8211; मेरापन की अहंता &#8211; ममता हो रही है &#8211; ज्ञान की आग बत्ती हाथ में लेकर इस घर को जला डालो। अपना अहंकार &#8211; घर को जला डालता है।</p>
<p>शब्द विचारी जो चले, गुरुमुख होय निहाल |<br />
काम क्रोध व्यापै नहीं, कबूँ न ग्रासै काल ||</p>
<p>गुरुमुख शब्दों का विचार कर जो आचरण करता है, वह कृतार्थ हो जाता है। उसको काम क्रोध नहीं सताते और वह कभी मन कल्पनाओं के मुख में नहीं पड़ता।</p>
<p>जब लग आश शरीर की, मिरतक हुआ न जाय |<br />
काया माया मन तजै, चौड़े रहा बजाय ||</p>
<p>जब तक शरीर की आशा और आसक्ति है, तब तक कोई मन को मिटा नहीं सकता। इसलिए शरीर का मोह और मन की वासना को मिटाकर, सत्संग रूपी मैदान में विराजना चाहिए।</p>
<p>मन को मिरतक देखि के, मति माने विश्वास |<br />
साधु तहाँ लौं भय करे, जौ लौं पिंजर साँस ||</p>
<p>मन को मृतक (शांत) देखकर यह विश्वास न करो कि वह अब धोखा नहीं देगा। असावधान होने पर वह फिर से चंचल हो सकता है इसलिए विवेकी संत मन में तब तक भय रखते हैं, जब तक शरीर में सांस चलती है।</p>
<p>कबीर मिरतक देखकर, मति धरो विश्वास |<br />
कबहुँ जागै भूत है करे पिड़का नाश ||</p>
<p>ऐ साधक! मन को शांत देखकर निडर मत हो। अन्यथा वह तुम्हारे परमार्थ में मिलकर जाग्रत होगा और तुम्हें प्रपंच में डालकर पतित करेगा।</p>
<p>अजहुँ तेरा सब मिटै, जो जग मानै हार |<br />
घर में झजरा होत है, सो घर डारो जार ||</p>
<p>आज भी तेरा संकट मिट सकता है यदि संसार से हार मानकर निरभिमानी हो जा। तुम्हारे अंधकाररूपी घर में को काम, क्रोधा आदि का झगड़ा हो रहा है, उसे ज्ञान की अग्नि से जला डालो।</p>
<p>सत्संगति है सूप ज्यों, त्यागै फटकि असार |<br />
कहैं कबीर गुरु नाम ले, परसै नहीं विकार ||</p>
<p>सत्संग सूप के ही समान है, वह फटक कर असार का त्याग कर देता है। तुम भी गुरु से ज्ञान लो, जिससे बुराइयां बाहर हो जाएंगी।</p></blockquote>
<p><strong>यह भी पढ़ें :-</strong></p>
<p><strong><a href="https://fundabook.com/on-guru-ravidas-jayanti-read-his-couplets-can-change-lives-hindi/">गुरु रविदास जयंती पर पढ़ें उनके दोहे जो जीवन बदल सकते हैं !!</a></strong></p>
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