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	<title>rebirth Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>पुनर्जन्म की मान्यता को सिद्ध करती 10 घटनाएँ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Jun 2019 10:45:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>कई मान्यताएं हैं, जिन पर वैज्ञानिक विश्वास नहीं करते. ऐसी ही हिन्दू धर्म में एक पुनर्जन्म की मान्यता है. हिन्दू धर्म के अनुसार व्यक्ति के शरीर की मौत होती है, उसकी आत्मा की नहीं. आत्मा मृत्यु के बाद एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाती है और इसको पुनर्जन्म कहा जाता है. [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>कई मान्यताएं हैं, जिन पर वैज्ञानिक विश्वास नहीं करते. ऐसी ही हिन्दू धर्म में एक पुनर्जन्म की मान्यता है. हिन्दू धर्म के अनुसार व्यक्ति के शरीर की मौत होती है, उसकी आत्मा की नहीं. आत्मा मृत्यु के बाद एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाती है और इसको पुनर्जन्म कहा जाता है. कई लोग इस बात को बेतुकी मानते हैं. यहाँ प्रस्तुत हैं, ऐसी 10 घटनाओं की सूची, जो पुनर्जन्म की मान्यता को सिद्ध करती है.</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-2751" src="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2015/08/10-true-stories-of-again-birth.jpg?resize=600%2C521&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="521" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2015/08/10-true-stories-of-again-birth.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2015/08/10-true-stories-of-again-birth.jpg?resize=300%2C261&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2015/08/10-true-stories-of-again-birth.jpg?resize=484%2C420&amp;ssl=1 484w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<ol>
<li>यह घटना सन 1950 में हुई थी. कोसीकला गाँव के रहने वाले भोलेनाथ जैन के पुत्र निर्मल की मृत्यु चेचक से हुई. उसकी मौत के एक साल बाद 1951 में छटा गाँव में एक पुत्र का जन्म हुआ. जब वह 4 साल का हुआ, तब वह अचानक से कोसीकला गाँव का जिक्र करने लगा और बताने लगा कि मैं पिछले जन्म में भोलेनाथ जैन का पुत्र था. उस लड़के को कोसीकला गाँव की सभी बातें याद थी.</li>
<li>पुनर्जन्म की यह घटना आगरा शहर की है. आगरा में रहने वाले पोस्ट मास्टर पी. एन. भार्गव के घर में एक लड़की का जन्म हुआ. जब वह लड़की 2 साल की हुई, तो वह अपने पिछले जन्म के घर के बारे में बताने लगी. जब भी उनका परिवार धुलियागंज, आगरा के एक बड़े घर के पास से गुजरता, तो वह कहने लगती कि यह मेरा घर है. अंत में मंजू को उस घर में ले जाया गया. यह घर प्रकाश सिंह चतुर्वेदी का था. बाद में पता चला कि उसी घर में प्रकाश सिंह की चाची रहती थी, जिसकी 1952 में मौत हो गयी थी. उसी ने डाकिये के घर में मंजू के रूप में जन्म लिया था.</li>
<li>यह पुनर्जन्म की घटना 1960 में हुई थी. प्रवीन चन्द्र के परिवार में एक लड़की ने जन्म लिया. जब लड़की 3 साल की हुई, तो उसने अपने पिछले जन्म की घटनाओं का जिक्र किया. उसने अपने पिछले जन्म का नाम गीता बताना शुरू कर दिया. उसने बताया कि वह जूनागढ़ में रहती थी. उसके परिवार वालों ने पहले उसकी बातों को हल्के में लिया. लेकिन उसके दादा वजूभाई शाह उसे जूनागढ़ ले गये. काफी छान-बीन के बाद पता लगा कि जूनागढ़ के रहने गोकुलदास की बेटी गीता का देहांत अक्टूबर 1959 में हुआ था. उसने पूरे परिवार को पहचाना और उस मंदिर को पहचाना जिसमें उसकी माँ उसे ले जाती थी.</li>
<li>एम् एल मिश्रा मध्यप्रदेश के छत्रपुर जिले में रहते थे. उनकी एक बेटी थी स्वर्णलता. वह बचपन से ही अपने पिछले जन्म की बातें करती रहती थी. जिसमें वह बताती थी कि उसका घर कटनी में है और उसके 2 पुत्र हैं. जब उसके परिवार वाले उसे कटनी लेकर गये. छान-बीन के बाद पता चला कि कटनी में 18 साल पहले एक बिन्दियादेवी नाम की औरत रहती थी जिसका देहांत हार्ट अटैक से हुआ था. उसने अपने पिछले जन्म के पुत्रों को पहचाना और मकान में किये गये बदलाव भी बता दिए.</li>
<li>यह घटना 1956 में दिल्ली गुप्ता परिवार में जन्मे गोपाल की है. उसने अपने पिछले जन्म का नाम शक्तिपाल बताया और यह भी बताया कि वह पिछले जन्म में मथुरा में रहता था. उसने बताया वे तीन भाई थे और उसी के एक भाई ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी. उसने बताया कि मथुरा में &#8220;सुख संचारक&#8221; नाम से उसकी दवाईयों की दुकान थी. उसके पिता ने अपने मित्रों की सहायता से छानबीन शुरू कर दी. उनको पता चला की सुख-संचारक के मालिक की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. मथुरा में उसके परिवार को इस बारे में पता चलने पर उसकी चाची और पत्नी उससे मिली जिन्हें उसने तुरंत पहचान लिया.</li>
<li>यह पुनर्जन्म की घटना न्यूयॉर्क की रहने वाली 26 साल की क्यूबा की औरत की है. उसने दावा किया कि वह पिछले जन्म में यूरोप में रहती थी और एक डांसर थी. वह अपना पिछले जन्म का नाम भी जानती थी. हैरानीजनक रूप से वह कमाल के नृत्य-कौशल का प्रदर्शन करती थी, जबकि उसने डांसिंग की कोई विधिवत शिक्षा नहीं ली थी. स्पष्ट रूप से यह उसके पिछले जन्म में सीखे नृत्य का कमाल था.</li>
<li>यह घटना भी अमेरिका में रहने वाली औरत के बारे में है. जो बार-बार “जैन” शब्द ही दोहराती थी, जबकि उसे या उसके दोस्तों तक को इस शब्द का अर्थ नहीं पता था. उसको आग से बहुत डर लगता था और बचपन से ही उसके हाथ की उँगलियों पर जलने के निशान थे. एक जैन सम्मलेन के बाद उसे अपने पिछले जन्म के बारे में पता चला. उसने जाना कि पिछले जन्म में वह जैन धर्म की अनुयायी थी और एक जैन-मंदिर में रहती थी. उसकी मौत आग लगने से हुई थी.</li>
<li>यह पुनर्जन्म की घटना जापान में 10 अक्टूबर 1815 को वहां पड़ते गाँव नकावो मुरा में हुई थी. नकावो गाँव में एक लड़के का जन्म हुआ था, जिसका नाम कटसुगोरो रखा गया था. जब वह लड़का 7 साल का हुआ, तब वह कहने लगा कि पिछले जन्म में उसका नाम तोजो था और उसके पिता का नाम कुबी, उसकी बहन का नाम फुसा और उसकी मां का नाम शिद्जु था. उसने यह भी बताया था कि पिछले जन्म में उसकी मौत चेचक से हुई थी. बाद में जब कटसुगोरो के परिवार वालों ने उसके पिछले जन्म के बारे में छान बीन की तब सब कुछ सच्च निकला.</li>
<li>थाईलैंड में रहने वाली लड़की जिसका नाम सियाम था, उसने अपने पिछले जन्म के बारे में अपने परिवार वालों को बताया. सियाम को चीनी भाषा का अच्छी तरह से ज्ञान था. एक दिन वह कहने लगी कि उसके पिछले जन्म के माता-पिता चीन में रहते हैं और वह चीन में जाना चाहती है. जब वह चीन में गयी, तब उसकी मुलाकात एक परिवार से हुई और वह उस परिवार के हर सदस्य के बारे में अच्छी तरह से जानती थी.</li>
<li>यह घटना 1963 में श्री लंका में पड़ते गाँव बतापोला की थी. इस गाँव में रूबी कुसुम नाम की लड़की का जन्म हुआ था. जिसके पिता का नाम सीमेन सिल्वा था. जब रूबी बोलने लगी, तब उसने बताया कि वह पिछले समय में लड़का थी और पिछले जन्म में उसकी मौत कुँए में डूब कर हुई थी. बाद में जब उसके इस दावे की छान बीन की गयी, तो सभी बातें सच्च निकलीं.</li>
</ol>
<p><a href="https://fundabook.com/do-we-use-only-10-of-our-brains/"><strong>क्या हम सचमुच अपने दिमाग का 10 प्रतिशत इस्तेमाल करते हैं?</strong></a></p>
<p><strong><a href="http://en.fundabook.com/20-rare-and-interesting-pictures-of-the-world-history/">20 Rare and Interesting Pictures Of The World History</a> </strong></p>
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		<title>महाभारत के बारे में अज्ञात और अद्भुत  तथ्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[अरविन्द कुमार]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 May 2017 04:58:51 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[धर्म-संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिन्दू धर्म में महाभारत को पांचवा वेद माना जाता है. माना जाता है कि इस महाकाव्य में व्यक्ति, परिवार, समाज, धर्म, कर्म, माया, ईश्वर, देवता, राजनीति, कूटनीति, महासंग्राम, महाविनाश, ज्ञान-विज्ञान, तंत्र-साधना, भक्त-भगवान और न जाने कितने अनेकोनेक विषयों के बारे में विस्तृत वर्णन किया गया है. महाभारत में वर्णित श्रीभगवत गीता ईश्वर, आत्मा, कर्म और योग [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हिन्दू धर्म में <strong>महाभारत</strong> को पांचवा वेद माना जाता है. माना जाता है कि इस महाकाव्य में व्यक्ति, परिवार, समाज, धर्म, कर्म, माया, ईश्वर, देवता, राजनीति, कूटनीति, महासंग्राम, महाविनाश, ज्ञान-विज्ञान, तंत्र-साधना, भक्त-भगवान और न जाने कितने अनेकोनेक विषयों के बारे में विस्तृत वर्णन किया गया है. महाभारत में वर्णित <strong>श्रीभगवत गीता</strong> ईश्वर, आत्मा, कर्म और योग के विवेचन का एक ऐसा विश्व-कोष है जिसके स्तर का ग्रन्थ अन्यंत्र मिलना दुर्लभ है.</p>
<p>लगभग हर हिंदू व्यक्ति महाभारत की कथा और गाथा के बारे में जानता है. लेकिन महाभारत के कुछ ऐसे दिलचस्प तथ्य हैं जो केवल महाभारत के बारे में गहन रुचि और अध्ययन करने वाले व्यक्ति को ही पता हैं और हम-आप साधारण जन के लिए जान पाना लगभग असंभव ही है. कुछ ऐसे ही खास तथ्य हमें इंटरनेट के माध्यम से पता चले और हमने आपके लिए उनको यहाँ पर संकलित और प्रस्तुत किया है.</p>
<p>तो आइए शुरू करते हैं कौरव-पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के जन्म से सम्बंधित प्रसंग से.</p>
<h2>द्रोणाचार्य का जन्म</h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-10969" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/05/birth-of-dron.jpg?resize=600%2C367&#038;ssl=1" alt="" width="600" height="367" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/birth-of-dron.jpg?w=600&amp;ssl=1 600w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/birth-of-dron.jpg?resize=300%2C184&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" />कौरवों और पांडवों के गुरु <strong>द्रोण</strong> महऋषि <strong>भरद्वाज</strong> के पुत्र थे. महर्षि भरद्वाज एक महान वैज्ञानिक, चिकित्सक, तत्व-वेता और प्रकांड विद्वान थें. एक बार महर्षि भरद्वाज अपनी दिनचर्या के अनुसार गंगा नदी में स्नान के लिए जा रहे थे. उसी समय घृताची नामक अप्सरा केवल एक पारदर्शी वस्त्र में गंगा जी में स्नान कर रही थी. अप्रितम सुंदर और कमनीय अप्सरा को देखकर महऋषि भरद्वाज उत्तेजित हो गये और उनका अवांछित वीर्यपात हो गया.</p>
<p>उस समय में वीर्य को केवल नए जीवन के बीज के रूप में ही बाहर निकालने की परंपरा थी. दूसरे, वर्षों की कड़ी तपस्या और सयंम से पुरुष का वीर्य एक अति-तेजस्वी और बलशाली संतान को सक्षम देने में समर्थ था, महऋषि ने इस वीर्य को व्यर्थ जाने देना उचित नहीं समझा और उसे पीपल के पत्ते की सहायता से एक द्रोणा यानि कलश में कुछ अन्य उपाय करके स्थापित कर दिया. समय आने पर इससे तेजस्वी और महान धनुर्धर गुरु द्रोणाचार्य का जन्म हुआ. अत: द्रोणाचार्य पहले ज्ञात <strong>टेस्ट ट्यूब बेबी</strong> थे.</p>
<h2>एकलव्य का धृष्टदयुम्न के रूप में पुनर्जन्म</h2>
<figure id="attachment_11029" aria-describedby="caption-attachment-11029" style="width: 360px" class="wp-caption aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="wp-image-11029 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/05/Drishtadyumn-was-a-reincarnation-of-eklavya.jpg?resize=360%2C449&#038;ssl=1" alt="" width="360" height="449" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/Drishtadyumn-was-a-reincarnation-of-eklavya.jpg?w=360&amp;ssl=1 360w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/Drishtadyumn-was-a-reincarnation-of-eklavya.jpg?resize=241%2C300&amp;ssl=1 241w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/Drishtadyumn-was-a-reincarnation-of-eklavya.jpg?resize=337%2C420&amp;ssl=1 337w" sizes="(max-width: 360px) 100vw, 360px" /><figcaption id="caption-attachment-11029" class="wp-caption-text">एकलव्य ने धृष्टदयुम्न के रूप में पुनर्जन्म लेकर द्रोणाचार्य का वध किया</figcaption></figure>
<p><a href="https://fundabook.com/some-interesting-facts-about-draupadi/">द्रौपदी</a> के साथ उनके भाई धृष्टदयुम्न का भी जन्म हुआ था. माना जाता है कि धृष्टदयुम्न पूर्वजन्म के एकलव्य थे. गुरु द्रोण ने उनकी तीरंदाजी के महाकौशल को देखते हुए उन्हें राज-परंपरा के लिए एक खतरा समझा और उनसे गुरुदक्षिणा में उनका अंगूठा मांग लिया था. एकलव्य ने बायें हाथ से धनुष चलाना सीख लिया था.</p>
<p>रुक्मिणी के हरण के समय श्रीकृष्ण के हाथों से एकलव्य मारा गया. उस समय श्रीकृष्ण ने एकलव्य को अगले जन्म में द्रोणाचार्य के वध के लिए जन्म लेने का वरदान दिया था. इस तरह एकलव्य ने पुनर्जन्म लेकर द्रोणाचार्य का वध किया था. यह शरीर बदल कर कार्य करने के सिद्धांत का एक अन्य उदाहरण था.</p>
<h2>केवल अर्जुन ने ही श्रीकृष्ण के विश्वरूप को नहीं देखा था</h2>
<figure id="attachment_11031" aria-describedby="caption-attachment-11031" style="width: 360px" class="wp-caption aligncenter"><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-11031 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/05/hanuman-was-present-on-arjun-ratha-chariot.jpg?resize=360%2C496&#038;ssl=1" alt="" width="360" height="496" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/hanuman-was-present-on-arjun-ratha-chariot.jpg?w=360&amp;ssl=1 360w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/hanuman-was-present-on-arjun-ratha-chariot.jpg?resize=218%2C300&amp;ssl=1 218w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/hanuman-was-present-on-arjun-ratha-chariot.jpg?resize=305%2C420&amp;ssl=1 305w" sizes="auto, (max-width: 360px) 100vw, 360px" /><figcaption id="caption-attachment-11031" class="wp-caption-text">अर्जुन के रथ पर ध्वजा पर विराजमान पवन-पुत्र हनुमान</figcaption></figure>
<p>युद्ध के शुरू होने से पहले ही शत्रु सेना में अपने सगे-सम्बन्धियों को देख कर अर्जुन के मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया. अर्जुन को पलायन करता देख श्रीकृष्ण ने उन्हें गीता के रूप उपदेश दिया और उन्हें अपने विराट विश्वरूप के दर्शन कराये जिससे अर्जुन का मन मोह-माया को त्याग कर युद्ध के लिए तत्पर हुआ. ऐसा माना जाता है कि यह उपदेश और दर्शन अर्जुन को ही प्राप्त हुआ लेकिन दो अन्य लोग भी थे जिन्होंने यह उपदेश भी सुना और भगवान के विश्व-रूप के दर्शन भी किये.</p>
<p><strong>संजय ने दिव्य दृष्टि के कारण देखा और सुना</strong></p>
<p>संजय महाभारत के एक महत्वपूर्ण पात्र  थे. वे कौरव राजा धृतराष्ट्र के सारथी थे. महाभारत युद्ध के शुरू होने पर धृतराष्ट्र ने युद्ध देखने का आग्रह किया. चूंकि धृतराष्ट्र अंधे थे इसलिए महर्षि वेदव्यास ने संजय को दिव्य दृष्टि प्रदान की ताकि वे सारा वृत्तांत धृतराष्ट्र को &#8216;लाइव&#8217; सुना सकें. इसी कारण संजय ने भी दिव्य दृष्टि से कृष्ण के विश्वरूप को देखा था.</p>
<p><strong>श्री हनुमान ने भी देखा-सुना है क्योंकि वे अर्जुन के रथ पर विराजमान थे</strong></p>
<p>पवन-पुत्र हनुमान, अर्जुन के रथ पर ध्वजा पर विराजमान थे. इसलिए रणभूमि में जो कुछ भी घटित हुआ वह सब कुछ उन्होंने देखा और सुना.</p>
<h2>अर्जुन किन्नर के रूप में</h2>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-11028" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/05/arjun-as-an-eunuch-brihtrala.jpg?resize=360%2C328&#038;ssl=1" alt="" width="360" height="328" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/arjun-as-an-eunuch-brihtrala.jpg?w=360&amp;ssl=1 360w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/arjun-as-an-eunuch-brihtrala.jpg?resize=300%2C273&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 360px) 100vw, 360px" />एक दिन जब स्वर्ग में गन्धर्व चित्रसेन अर्जुन को संगीत और नृत्य की शिक्षा दे रहे थे, वहाँ अप्सरा उर्वशी आई और अर्जुन पर मोहित हो गई. उर्वशी ने अर्जुन के सामने विवाह करने का प्रस्ताव रखा लेकिन अर्जुन ने  इसे विनम्रता से ठुकरा दिया. क्योकिं वह इंद्र की पत्नी थी और चूंकि अर्जुन इंद्र के अंश-पुत्र थे इसलिए उनके लिए उर्वशी माता के समान थी.</p>
<p>अर्जुन द्वारा ठुकराए जाने पर उर्वशी क्रोधित हो गईं और उसने अर्जुन को एक वर्ष तक नपुंसक या हिजड़ा बनने का शाप दे दिया. यह श्राप अज्ञात-वास के दौरान उनके काम आया जब वे <strong>बृहन्नला</strong> नाम से विराट नगर में अपनी होने वाली पुत्रवधू <strong>उत्तरा</strong> की संगीत और नृत्य की शिक्षिका के रूप में कार्यरत रहे.</p>
<h2>भीष्म के पांच &#8216;पांडव विनाशक&#8217; तीर</h2>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-10973" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/05/five-golden-arrows.jpg?resize=450%2C253&#038;ssl=1" alt="" width="450" height="253" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/five-golden-arrows.jpg?w=450&amp;ssl=1 450w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/five-golden-arrows.jpg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /></p>
<p>युद्ध के दौरान, दुर्योधन ने भीष्म पितामह पर पांडवों के प्रति नरम रवैया अपनाने का आरोप लगाया. इस आरोप से भीष्म क्षुब्ध हो गये और उन्होंने अपने तरकश से पांच तीर निकाले, उन पर कुछ मंत्र फूंके और दुर्योधन को वचन दिया कि इन पांच तीरों से वे अगले दिन पांडवों का वध करेंगे. दुर्योधन इससे संतुष्ट नहीं हुआ और उसने इन तीरों को अपने कब्जे में ले लिया.</p>
<p>श्रीकृष्ण की सलाह पर अर्जुन ने दुर्योधन से ये पांच तीर दुर्योधन द्वारा अर्जुन को दिए एक वरदान के बदले में मांग लिए.</p>
<h2>श्रीकृष्ण हुए शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा को तोड़ने के लिए विवश</h2>
<figure id="attachment_11033" aria-describedby="caption-attachment-11033" style="width: 500px" class="wp-caption aligncenter"><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-11033 size-full" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/05/shrikrishana-attempt-to-kill-bhism-pitamaha.jpg?resize=500%2C351&#038;ssl=1" alt="महाभारत - क्रोध में भीष्म को मारने ले लिए लपकते श्रीकृष्ण और उनको रोकते अर्जुन" width="500" height="351" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/shrikrishana-attempt-to-kill-bhism-pitamaha.jpg?w=500&amp;ssl=1 500w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/shrikrishana-attempt-to-kill-bhism-pitamaha.jpg?resize=300%2C211&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/shrikrishana-attempt-to-kill-bhism-pitamaha.jpg?resize=100%2C70&amp;ssl=1 100w" sizes="auto, (max-width: 500px) 100vw, 500px" /><figcaption id="caption-attachment-11033" class="wp-caption-text">क्रोध में भीष्म को मारने ले लिए लपकते श्रीकृष्ण और उनको रोकते अर्जुन</figcaption></figure>
<p>युद्ध से पहले, भगवान श्रीकृष्ण ने प्रण किया था कि वह इस युद्ध में हथियार नहीं उठाएँगे. वहीँ महायोद्धा भीष्म ने भी प्रण किया था कि वह या तो श्रीकृष्ण को हथियार उठाने पर मजबूर कर देंगे या पांडवों का वध कर देंगे. युद्ध के दौरान, भीष्म पांडवों की सेना को बुरी तरह कुचल रहे थे और अर्जुन भी उन्हें रोक नहीं पा रहे थे.</p>
<p>कोई चारा न देख अंत्यंत क्रोधित होकर श्रीकृष्ण ने भीष्म पितामह को मारने के लिए रथ के पहिए को उठा कर दौड़ पड़े. अर्जुन ने उन्हें भक्त और सखा होने का वास्ता देकर रोक लिया ताकि श्रीकृष्ण के प्रण की मर्यादा बनी रहे.</p>
<h2>जब अर्जुन युधिष्ठिर को मारने के लिए उतारू हुए</h2>
<p><img data-recalc-dims="1" loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-11030" src="https://i0.wp.com/fundabook.com//wp-content/uploads/2017/05/arjun-picks-sword-to-kill-ydhisthar.jpg?resize=360%2C306&#038;ssl=1" alt="" width="360" height="306" srcset="https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/arjun-picks-sword-to-kill-ydhisthar.jpg?w=360&amp;ssl=1 360w, https://i0.wp.com/fundabook.com/wp-content/uploads/2017/05/arjun-picks-sword-to-kill-ydhisthar.jpg?resize=300%2C255&amp;ssl=1 300w" sizes="auto, (max-width: 360px) 100vw, 360px" />सूतपुत्र कर्ण पांडव सैनिकों का भयानक संहार कर रहा था. इसी दौरान कर्ण ने युधिष्ठिर पर एक ज़ोरदार वार किया और वे बुरी तरह घायल हो गये. नकुल तथा सहदेव ने भ्राता युधिष्ठिर की यह हालत देखी तो शीघ्र ही वे उन्हें शिविर में ले गए.</p>
<p>युधिष्ठिर ने जब अर्जुन आते देखा तो वह बहुत खुश हुए. उन्हें अति-विश्वास था कि अर्जुन ने अपने भ्राता को घायल करने के बदले में कर्ण को अवश्य ही मार डाला होगा. लेकिन जब पता चला कि कर्ण जीवित है तो युधिष्ठिर बहुत क्रोधित हुए. युधिष्ठिर ने क्रोध में आकर अर्जुन गांडीव को त्याग देने को कह क्योंकि वह अपने भाई की रक्षा और प्रतिशोध नहीं ले पाने के कारण इसके लायक नहीं रहे थे.</p>
<p>दूसरी और, बहुत पहले ही, अर्जुन ने प्रण कर रखा था कि जो भी उन्हें गांडीव को त्यागने को कहेगा वे उसे मार डालेंगे. अब उन्हें इस दुविधा में पाकर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को किसी ऐसे व्यक्ति का अनादर करने की सलाह दी जिसका वे पहले आदर करते रहे हों. इस तरह से अर्जुन ने जीवन में पहली बार भ्राता युधिष्ठर का अनादर किया.</p>
<p>दरअसल, किसी का अनादर करना भी कुछ समय के लिए उस व्यक्ति को नजरों में खो देने या क्षणिक मार डालने के समान समझा गया है. इस तरह से त्रिकाल-दर्शी भगवान श्रीकृष्ण की सूझबूझ से पांडवों का एक बड़ा संकट टल गया.</p>
<p><strong>(यह पोस्ट <a href="https://www.quora.com/" target="_blank" rel="noopener noreferrer">Quora</a> पर महाभारत के विषय में किये गये <a href="https://goo.gl/trjvxY" target="_blank" rel="noopener noreferrer">एक प्रश्न</a> के एक उत्तर का हिंदी अनुवाद है. मैं Fundabook टीम की ओर से Quora और उत्तर के लेखक <span id="SzEPVF"><span id="__w2_A5V5gmu_link"><span class="user"><a href="https://goo.gl/am4078" target="_blank" rel="noopener noreferrer">Aditya Anshul</a> का आभार व्यक्त करता हूँ.)</span></span></span></strong></p>
<p>आगे पढ़ें: <a href="https://fundabook.com/mahabharata-hindu-epic-if-draupdi-loved-karna-why-did-she-marry-the-pandavas/">प्रमाण सहित: क्या सचमुच में कर्ण से प्रेम करती थीं द्रौपदी??</a></p>
<p>The post <a href="https://fundabook.com/amazing-unknown-facts-about-mahabharat/">महाभारत के बारे में अज्ञात और अद्भुत  तथ्य</a> appeared first on <a href="https://fundabook.com">Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</a>.</p>
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