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	<title>harming the Earth Archives - Interesting Facts, Information in Hindi - रोचक तथ्य</title>
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	<description>रोचक तथ्य और जानकारी हिन्दी में!</description>
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		<title>धरती को नुकसान पंहुचा रहे &#8220;मांसाहारी &#8220;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mamta Bansal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Mar 2021 05:05:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[OMG!!]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ]]></category>
		<category><![CDATA[Carnivores]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>6 करोड़ लोग प्रति वर्ष भूख से मर जाते हैं। क्या इसका कारण हमारे द्वारा खाया जाने वाले मांस है? जरा निम्नलिखित तथ्यों पर गौर करें.. 80 प्रतिशत मक्का, मांस के लिए पाले जाने वाले पशुओं द्वारा खा लिया जाता है जबकि केवल 20 प्रतिशत मनुष्यों के खाने के लिए छोड़ा जाता है। 20 शाकाहारियों [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>6 करोड़ लोग प्रति वर्ष भूख से मर जाते हैं। क्या इसका कारण हमारे द्वारा खाया जाने वाले मांस है? जरा निम्नलिखित तथ्यों पर गौर करें..</p>
<p>80 प्रतिशत मक्का, मांस के लिए पाले जाने वाले पशुओं द्वारा खा लिया जाता है जबकि केवल 20 प्रतिशत मनुष्यों के खाने के लिए छोड़ा जाता है।</p>
<p>20 शाकाहारियों का पेट उतनी जमीन से भरा जा सकता है जितनी कि 1 मांसाहारी की भूख मिटाने के लिए जरूरत होती है। लगभग 5.45 किलो गेहूं से बनाई जा सकती हैं 12 ब्रैड तथा केवल 1 मांसाहारी हैमबर्गर।</p>
<p>1 किलो पशु प्रोटीन प्राप्त करने के लिए मुर्गियों को 5 किलो पौध प्रोटीन खिलाया जाता है। मांस केंद्रित भोजन के समर्थन में फसल उगाने के लिए 26 करोड़ एकड़ अछूते जंगल साफ कर दिए गए।</p>
<p>विश्व के पैट्रोलियम भंडार केवल 13 वर्षों तक बचे रहेंगे अगर सभी मनुष्य मांसाहारी होंगे लेकिन यदि सभी मनुष्य शाकाहारी हों तो 260 वर्षों तक।</p>
<p>5000 गैलन (लगभग 18927 लीटर) पानी का इस्तेमाल मात्र 1 पाऊंड (लगभग 454 ग्राम) बीफ तैयार करने के लिए किया जाता है।</p>
<p>1पाऊंड सेबों के लिए केवल 49 गैलन (लगभग 18550 लीटर) पानी की जरूरत है। पशुधन में मात्र 1 जानवर इतना पानी पी जाता है, जो 1 युद्धपोत के पानी की आपूर्ति के लिए पर्याप्त होता है।</p>
<h2><span style="font-weight: 400;">इंसानी शरीर शाकाहार के लिए ही बना है, ये हैं इसके प्रमाण</span></h2>
<h2>पैतृक वंशानुक्रम</h2>
<p>हमारे सबसे करीबी पूर्वज यानी कि प्राइमेट्स (नर-वानर या मनुष्य सदृश्यजानवर) शाकाहारी हैं। हमारी जैविक व्यवस्था इस संबंधमें परिवर्तित नहीं हुई है। अभी भी मनुष्य उन प्राइमेट्स जैसा दिखाई देता है, जिनसे इसका विकास हुआ है।</p>
<h2>पालन-पोषण</h2>
<p>हमारे पूर्वजों ने अपने बच्चों को फल चुनना और तोड़ना सिखाया न कि शिकार करना। यह अभी तक भी हमारे पालन-पोषण का काफी हद तक तरीका बना हुआ है।</p>
<h2>सहज प्रवृत्ति</h2>
<p>हम कच्चे मांस की बजाय फलों की खुशबू की ओर अधिक आकर्षित होते हैं।</p>
<h2>जबड़े</h2>
<p>मनुष्य शाकाहारी जीवों की तरह अपने जबड़े दाएं-बाएं तथा ऊपर-नीचे चला सकता है।<br />
मांसाहारी जीव अपने जबड़े केवल ऊपर-नीचे चला सकते हैं।</p>
<h2>आहार नली</h2>
<p>मनुष्य की पाचन नलीशाकाहारी जीवों की तरह लंबी होती है, हमारी रीढ़ से कई गुना लंबी। शाकाहारी जीवों की आहार नली इससे कहीं कम लंबाई की होती है।</p>
<p>गाय : रीढ़ से 16 गुना, सिंह : रीढ़ से 3 गुना, मनष्य : रीढ़ से 12 गना</p>
<h2>दांत</h2>
<p>मनुष्य में शाकाहारियों की तरह कैनाइन्स (कुत्ते जैसे तीखे दांत) तथा इनसिजर्स (कृतक) की बजाय मोलार्स (चबाने वाले दांत) अधिक होते हैं, ताकि वे रेशेदार शाकाहारी चीज़ों को पीस सकें। मांसाहारी जीवों में मांस को चीरने-फाड़ने के लिए कैनाइन्स तथा इनसिजर्स अधिक होते हैं।</p>
<h2>लार</h2>
<p>मनुष्य की लार क्षारीय होती है, जैसे कि शाकाहारी जीवों की । मांसाहारी जीवों की लार अम्लीय होती है।</p>
<h2>रात्रि दृष्टि (नाइट विजन)</h2>
<p>मांसाहारी जीवों की रात्रि दृष्टि बहुत तेज होती है, ताकि अंधेरे में शिकार करने में उन्हें मदद कर सके। मनुष्य को शिकार करने की जरूरत नहीं होती और न ही वह करता है।</p>
<p>शाकाहारी जीवों की तरह मनुष्य खुद को पसीना बहा कर ठंडा करते हैं, जबकि मांसाहारी जीव हांफ कर खुद को ठंडा करते हैं।</p>
<h2>पानी पीने का तरीका</h2>
<p>सभी शाकाहारी जीवों की तरह मनुष्य पानी को अपने होंठों से खींच कर या चूस कर पीते हैं। मांसाहारी जीव अपनी जीभ में लपेट कर पानी को अपने मुंह में डालते हैं। यह एक और प्रमाण है इंसानी शरीर शाकाहार के लिए ही बना है।</p>
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