जानिये भारतीय क्रिकेट टीम के “रिनेसां मैन” के बारे में कुछ ख़ास बातें

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भारत के महान टेस्ट क्रिकेटरों में शुमार रहे दिलीप सरदेसाई का आज जनम दिन है। दिलीप सरदेसाई का जन्म 8 अगस्त 1940 को हुआ था। उनका जन्म गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। इनकी जयंती के मौके पर गूगल ने एक खास डूडल बनाया है। उन्होंने भारत के लिए कुल 30 टेस्ट मैच खेले थे।दिलीप सरदेसाई को स्पिनरों के खिलाफ बेस्ट बल्लेबाज माना जाता था। उन्होंने अपना पहला क्रिकेट टेस्ट मैच 1961 में इंग्लैंड के खिलाफ कानपुर में खेला था। दिलीप सरदेसाई गोवा की तरफ से भारतीय क्रिकेट टीम में खेलने वाले पहले क्रिकेटर थे।

दिलीप सरदेसाई  ने अपने 30 मैचों के करियर में 55 पारियां खेलीं और इस दौरान 39.23 की औसत से 2001 रन बनाए। भारतीय क्रिकेट ने 1971 में ही सही मायनों में चलना सीखा था और वेस्ट इंडीज़, इंग्लैंड जैसी टीमों को उन्हीं की ज़मीन पर हराया था। उन्हें सन् 1971 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरिज में 642 रन बनाने के लिये याद किया जाता है।

इस दौरे में उन्होंने तीन शतक बनाये, जिनमें 212 रनों की शानदार पारी भी शामिल हैं और भारत ने यह सीरिज जीत ली थी। उन्होंने भारत के लिए पांच सेंचुरी और नौ हाफ सेंचुरी जड़ीं  पांच में से दो सेंचुरी को उन्होंने डबल सेंचुरी में भी तब्दील किया था। सरदेसाई के बारे में कहा जाता है कि उन्हें स्पिन खेलने में महारत हासिल थी।

1962 में भी वो वेस्ट इंडीज़ आए थे और उन्होंने वेस हॉल और ग्रिफ़िथ जैसे सुपर फ़ास्ट गेंदबाज़ों का सामना किया था। उस दौरे में वो बड़ौदा में रह रहीं अपनी गर्ल फ़्रेंड नंदिनी पंत को हर रोज़ पत्र लिखा करते थे। बाद में उन्होंने नंदिनी से शादी की, जो एक मशहूर समाज शास्त्री और फ़िल्म सेंसर बोर्ड की सदस्य बनीं।

नंदिनी सरदेसाई याद करती हैं, कि हमने उस दौर में एक-दूसरे को 100 पत्र तो लिखे होंगें। उस ज़माने में एसटीडी तो हुआ नहीं करता था और एक-दूसरे से संपर्क करने का कोई दूसरा साधन नहीं था। हमने एक दूसरे को पत्रों के माध्यम से ही जाना फिर ये दोस्ती प्यार में बदल गई। मैं उस ज़माने में बड़ौदा में पढ़ रही थी और मेरे पिता वहाँ डीआईजी हुआ करते थे। जब नंदिनी मुंबई में बीए की परीक्षा दे रहीं थीं तो दिलीप परीक्षा हॉल के बाहर उनके लिए फ़्लास्क में कॉफी लिए खड़े रहते थे।

दिलीप सरदेसाई बहुत ज़िंदादिल और मज़ाकिया इंसान भी थे। उनकी वजह से ड्रेसिंग रूम में हमेशा रौनक रहती थी। 1971 के वेस्ट इंडीज़ दौरे में उनके रूम-मेट रहे सलीम दुर्रानी एक दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं, एक शाम मेरे कमरे में फ़ोन आया कि क्या हम सलीम दुर्रानी से बात कर सकते हैं। हम यहाँ रहने वाले भारतीय मूल के लोग हैं, जो आपके लिए एक कैमरा और टेप रिकॉर्डर लेकर आए हैं।

सलीम ने कहा कि आप कमरे में आ जाइए, उन्होंने कहा कि हम रिसेप्शन के पास खड़े हैं, आप ही आ जाइए। मैं सूट पहन कर नीचे गया, लेकिन वहाँ मुझे कोई भी दिखाई नहीं दिया, मैं वापस कमरे में आ गया। अभी सूट उतार कर बैठा था कि दोबारा फ़ोन आया आप कहाँ हैं, हम आपका इंतज़ार कर रहे हैं। सलीम दोबारा सूट पहन कर नीचे गए, लेकिन वहाँ फिर कोई नहीं मिला, वो झल्लाते हुए ऊपर आ रहे थे, तो उन्हें एक खंभे के पीछे से सरदेसाई की आवाज़ सुनाई पड़ी तो जनाब को टेप रेकॉर्डर चाहिए पता चला वही आवाज़ बदल कर उन्हें बार-बार नीचे बुला रहे थे। मैं उनके पीछे दौड़ा और उन्हें स्वीमिंग पूल में धक्का दे कर ही मैंने दम लिया।

2 जुलाई 2007 को दिलीप सरदेसाई का मात्र 67 साल की उम्र में निधन हो गया था। चेस्ट इंफेक्शन के बाद उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली थी।

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