हमारे दिमाग में छुपा है सच्ची दोस्ती का राज

शोध मैं वैज्ञानिकों को पता चला है कि मित्रों के दिमाग की गतिविधियां अनजान लोगों की तुलना में अधिक समान होती है. विशेषकर दिमाग के उन हिस्सों की गतिविधि एक जैसी थी जो ध्यान केन्द्रण, भावनाओं तथा भाषा से जुड़े थे.न्यू हेम्पशायर  के डार्टमाउथ कॉलेज के वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए 279 ग्रेजुएट छात्रों की दोस्ती तथा सामाजिक संबंधों का अध्ययन किया. उन्होंने उनके सामाजिक संबंधों का अध्ययन किया.उन्होंने उनके सामाजिक संबंधों के बारे में जाना. उनमे से 42 छात्रों को राजनीति , विज्ञानं, हास्य, संगीत आदि विविध विषयों से जुड़े वीडियो दिखाते हुए रक्त प्रवाह के आधार पर दिमागी गतिविधि को मापने वाले ‘फंक्शनल एम.आर.आई.’ स्कैनर से उनके मस्तिष्क की गतिविधियों पर नज़र रखी गई.

उन छात्रों के मस्तिष्क में हुए ‘न्यूरल रिस्पांस’ से पता चला कि उनमे से मित्रों की दिमागी गतिविधियां काफी हद तक एक समान थी जबकि अनजान लोगों की दिमागी गतिविधियां काफी अलग थी. एक समान गतिविधियों को दिमाग के विभिन्न हिस्सों में पाया गया जिनमे भावनात्मक प्रतिक्रिया, ध्यान केंद्रण से लेकर उच्च स्तर के तर्क-वितर्क से सम्बंधित दिमाग के हिस्से विशेष रूप से शामिल थे. वैज्ञानिकों को यह भी पता चला है कि फंक्शनल एम.आर.आई के नतीजों में समानता के आधार पर केवल दो लोगों के मित्र होने का ही पता नहीं लगाया जा सकता है, बल्कि यह भी बताया जा सकता है कि सामाजिक स्तर पर वे एक दुसरे से कितने जुदा है.

एक वैज्ञानिक थालिया व्हिट्ले बताती है,” इंसान एक सामाजिक प्राणी है जिनकी जिंदगियां अन्य सभी से जुडी रहती है. अगर हम समझना चाहते है कि इंसानी मस्तिष्क किस तरह से काम करता है तो हमें यह भी समझना होगा कि हमारे मस्तिष्क जोड़ों में किस तरह से काम करते है अर्थात किस तरह से वे एक दुसरे को आकार देते है”इससे पहले वैज्ञानिकों की इसी टीम ने पता लगाया था कि किसी परिचित को देखते ही दिमाग हमें बताता है कि वे कितने महत्वपूर्ण या प्रभावशाली है तथा हमारी सामाजिक मण्डली में उनकी क्या हैसियत है.

आगे यह टीम पता लगाना चाहती है कि दुनिया को एक जैसी नज़र से देखने वाले क्या स्वाभाविक या कुदरती तौर पर एक – दुसरे की और खींचे चले जाते है ? वे यह भी जानेंगे कि क्या एक दुसरे से अपने अनुभव साँझा करने के बाद मित्रों में ज्यादा समानताएं दिखने लगती है ?

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