नींद न आने के कारण और समाधान

नींद न आने के कारण: एक स्वस्थ और प्रसन्न जीवन जीने के लिए भरपूर नींद लेना बहुत जरूरी है. वर्तमान की भागदौड़ भरी जिन्दगी में नींद न आना एक बहुत आम समस्या बनती जा रही है. खास कर शहरों में लोग अपनी दिनचर्या में इतने उलझे होते हैं कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरुरी आठ घंटें की नींद नहीं ले पाते.

अच्छी नींद लेना इतना मुश्किल क्यों होता जा रहा है इसके पीछे कई कारण हैं, इनमें लगातार काम करना और ऑफिस और घर के बीच में तालमेल न बिठा पाना प्रमुख कारण है.

कुछ समय पहले लिखी एक अन्य पोस्ट (11 तरीके जो नींद लाने में आपकी मदद कर सकते हैं) में नींद लाने में सहायक के सुझावों को अपना कर आप अच्छी नींद ले सकते हैं

यहाँ प्रस्तुत हैं नींद न आने के कुछ प्रमुख कारण और सुझाव जिन्हें समझ कर हो सकता है कि आप अच्छी नींद ले पायें.

चिंता और मानसिक अवसाद

चिंता और मानसिक तनाव या डिप्रेशन आम समस्या बनता जा रहा है और यह नींद न आने के प्रुमख कारकों में से एक है. नकारात्मक सोच और बेवजह का डर और चिंता शरीर के स्वसन तंत्र और हृदय गति को उतेजित कर देते हैं जिसकी वजह से नींद नहीं आती.

उपाय: किसी भी समस्या के समाधान पर ध्यान दें. चिंता करने या घबराने से कुछ बनने वाला नहीं है. अकेले रहने की आदत छोड़ें और सकारात्मक सोचें. खाली समय में अच्छे साहित्य और मनोरंजक टीवी प्रोग्राम देखें. अपने परिवार वालों, दोस्तों, रिश्तेदारों से बात करते रहें क्योंकि हो सकता है ये मौका फिर मिले न मिले. बेवजह की टेंशन छोड़ दें और वास्तविकता, सौन्दर्य, प्रकृति और रिश्तों की तरफ मुड़ें. संभव हो तो अध्यात्म से जुड़ें. अपने अभावों या कमियों के बजाये यह सोचें कि हमें कितना कुछ बाकि लोगों से ज्यादा मिला हुआ है.

शराब-सिगरेट आदि नशों की लत

अधिक शराब और सिगरेट का सेवन अच्छे स्वास्थ्य के लिए बुरा तो है ही इसके साथ ही अधिक शराब के सेवन से नींद के रूटीन में गड़बड़ी हो जाती है जिसकी वजह से रात में एकाध घंटें तो गहरी नींद आती है और बाकि समय में अच्छी नींद नहीं आती. शराब की आदत लम्बे समय में घोर डिप्रेशन और अनिद्रा का कारण बन जाती है. सिगरेट का अधिक सेवन सांस की बीमारियों का कारण बनता है और उम्र कम करता है इसलिए अच्छा है इससे दूर ही रहें. सोने से पहले दूध पियें जिससे अच्छी नींद आएगी.

रिश्तों में कड़वाहट

एक खुशनुमा मैरिज लाइफ टॉनिक का काम करती हैं जबकि आपसी रिश्तों में कड़वाहट धीमे जहर का. कोशिश करें कि आपके पारिवारिक और वैवाहिक रिश्ते मधुर बने रहे ताकि आप चैन की नींद ले सकें. एक-दूसरे को समान समझें, सम्मान और स्पेस दें. परिवार में हर सदस्य के महत्व को समझें. बहुत ज्यादा डोमिनेटिव, पोजेसिव, कंजर्वेटिव और नैरो-माइंडेड न बनें. जियो और जीने दो का सिद्धांत अपनाएं. खुश रखें और खुश रहें. जो सबल यानि स्ट्रांग है उसके परिवार के लोग उसके आसपास होने पर प्रसन्नचित और सुरक्षित महसूस करते हैं जबकि कायर और दुष्ट के आसपास होने पर उसके संबधी भी भय और परेशानी में जीते हैं. तय करें कि आप क्या बनना चाहते हैं.

दर्द या बीमारी

कई बार हम छोटे-मोटे दर्द या बीमारी को नजर अन्दांज करते हैं. लेकिन अलर्ट हो जाएँ यदि कोई दर्द या शारीरिक स्थिति आपकी नींद में खलल डालना शुरू कर दे. उदाहरण के लिए खर्राटों को लें लें. खर्राटे एक त्रुटिपूर्ण और असुविधाजनक श्वसन प्रणाली का संकेत है. किसी भी दर्द, बुखार आदि को नजरअंदाज न करें यदि यह लगातार कुछ दिन तक रहे. दर्द से बचने के लिए काम के बीच में विश्राम के लिए समय निकलते रहें. अधिक देर तक एक मुद्रा में न बैठे रहें. खास कर कंप्यूटर पर काम करने वाले सर्वाइकल और पीठ दर्द से बचने के लिए नियमित तौर पर व्यायाम करें.

रात में चाय/कॉफ़ी और भोजन का सेवन

कॉफी को नींद का दुश्मन कहा जाता है। भरपूर और गहरी नींद लेने के लिए जरुरी है कि आप सोने से पहले चाय या कॉफी न पीएं। कैफीन नींद लाने की जगह इसे दूर भगा देती है। इसके अलावा रात को भारी भोजन और शराब लेने से बचें। सोने से पहले ज्यादा पानी न पियें वर्ना बार-बार पेशाब करने के लिए उठने से भी नींद उड़ सकती है.

सोने से पहले टीवी देखना

यदि आपको सोने से पहले टीवी देखने, कंप्यूटर या मोबाइल पर चैटिंग या काम करने से नींद आने में समस्या आ सकती है. रात के समय जब हम लैपटॉप या मोबाइल पर काम करते हैं तो हमारी आखें स्क्रीन को देखकर दिमाग को ऐसे सिग्नल भेजती हैं जैसे वह दिन के समय रौशनी को देखकर भेजती है जिससे रात में नींद की प्रक्रिया को एक्टिवेट करने वाला तंत्र सक्रिय नहीं हो पाता है और हमें नींद नहीं आती. ऐसा ही टीवी देख कर होता है. सोने से पहले टीवी पर हॉरर या उदास करने वाले शो या मूवीज न देखें.

अनुकूल वातावरण न मिलना

अच्छी नींद के लिए जरुरी है कि आपके सोने वाला स्थान शोर-शराबे के बीच में न हो. अधिकतर लोग रौशनी के बजाये अँधेरे में आसानी से सो पाते हैं. सोने वाला स्थान बहुत ज्यादा ठंडा या गर्म न हो. यह पर्याप्त हवादार और सुंगंधित हो. आपका बिस्तर बहुत ज्यादा सख्त या नर्म न हो और बहुत ऊंचा सिरहाना भी न लें.

अधिक उम्र

आम धारणा है कि उम्र ५०-६० से अधिक हो जाने पर अच्छी नींद नहीं आती. कुछ मामलों में यह सही भी है लेकिन शोध बताते हैं कि अधिक उम्र का नींद की गुणवत्ता पर उतना प्रभाव नहीं पड़ता जितना अधिक उम्र के कारण होने वाली साइकोलॉजिकल तथा शारीरिक समस्याओं और उनके उपचार से उत्पन्न साइड इफेक्ट्स का पड़ता है. इसलिए यदि आप अधिक उम्र के हैं और स्वस्थ और एक्टिव हैं तो सामान्य नींद लेना कोई मुश्किल काम नहीं हैं.

संबधित लेख:

Comments